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Monday, January 31, 2011

विश्वासयोग्य वचनदाता

मान लीजिए कि कोई बहुत धनी व्यक्ति आप को आश्वासन दे कि "मैं ने तुम्हारे लिये २५ लाख रुपये अलग रखे हैं और भविष्य में किसी दिन तुम्हें वे मिल जाएंगे" तो उन रुपयों की प्रतीक्षा में आप अधीर तो हो सकते हैं पर आप वायदा करने वाले व्यक्ति की प्रतिष्ठा के आधार पर जानते और मानते हैं कि रुपये आपको कभी न कभी अवश्य मिलेंगे। किंतु यदि उसी व्यक्ति ने आप से यह कहा होता कि "यदि सब कुछ ठीक ठाक रहा तो भविष्य मे शायद मैं तुम्हें कभी २५ लाख रुपये देने का विचार करुंगा" तो आप को वह रुपये पाने की कोई विशेष आशा नहीं होती, क्योंकि रुपयों का मिलना बहुत सी अनिश्चितताओं पर निर्भर हो जाता।

परमेश्वर के विधान में भी ऐसा ही है। उसकी प्रतिज्ञाएं भी स्वर्गीय समयकाल में पूरी हैं, और क्योंकि हम अभी अधूरा ही जानते हैं, इसलिये हमें उनके पूरा होने का सही समय पता नहीं है। लेकिन यह चिंता का विष्य नहीं है क्योंकि हमें पता है कि परमेश्वर अपना वायदा सदा पूरा करता है। उसके वायदे की कीमत कभी कम नहीं होती क्योंकि उन वायदों का आधार उसके चरित्र का असीम धन है। वह कभी बदलता नहीं, कभी भूलता नहीं। हमें उसके वायदों के पूरे होने में विलम्ब तो प्रतीत हो सकता है, लेकिन हम यह भी जानते हैं कि उसका प्रत्येक वायदा उसके वचन के समान खरा है।

हम में से बहुतों को कभी न कभी यह अनुभव अवश्य हुआ होगा कि किसी बात के लिये हम अपने सभी उपाय और संसाधन आज़्मा कर के निरुपाय हो चुके थे और तभी अचानक अद्भुत रीति से परमेश्वर ने सही समय पर अपनी सही सामर्थ प्रकट करी और हमें उस परिस्थिति से निकाल लिया। वह न धीमा था और न ढीला, सहायता का उसका समय और तरीका है और वह उसी के अन्तर्गत काम करता है।

इसलिये हमें विलम्ब के आभास से हतोसाहित नहीं होना चाहिये। हम बस उसके वायदों को स्मरण करते रहें और वह अपने समय और तरीके से उन्हें पूरा करता रहेगा। वह सम्पूर्ण रीति से विश्वासयोग्य वचनदाता है। - पौल वैन गौर्डर


मसीही विश्वासी का भविष्य परमेश्वर के वचन जैसा ही ज्योतिर्मान है।

और अपनी आशा के अंगीकार को दृढ़ता से थामें रहें, क्‍योंकि जिस ने प्रतिज्ञा किया है, वह सच्‍चा है। - इब्रानियों १०:२३


बाइबल पाठ: इब्रानियों १०:१९-२५
सो हे भाइयो, जब कि हमें यीशु के लोहू के द्वारा उस नए और जीवते मार्ग से पवित्र स्थान में प्रवेश करने का हियाव हो गया है।
जो उस ने परदे अर्थात अपने शरीर में से होकर, हमारे लिये अभिषेक किया है,
और इसलिये कि हमारा ऐसा महान याजक है, जो परमेश्वर के घर का अधिकरी है।
तो आओ हम सच्‍चे मन, और पूरे विश्वास के साथ, और विवेक को दोष दूर करने के लिये ह्रृदय पर छिड़काव लेकर, और देह को शुद्ध जल से धुलवा कर परमेश्वर के समीप जाएं।
और अपनी आशा के अंगीकार को दृढ़ता से थामें रहें, क्‍योंकि जिस ने प्रतिज्ञा किया है, वह सच्‍चा है।
और प्रेम, और भले कामों में उकसाने के लिये एक दूसरे की चिन्‍ता किया करें।
और एक दूसरे के साथ इकट्ठा होना ने छोड़ें, जैसे कि कितनों की रीति है, पर एक दूसरे को समझाते रहें और ज्यों ज्यों उस दिन को निकट आते देखो, त्यों त्यों और भी अधिक यह किया करो।

एक साल में बाइबल:
  • निर्गमन २५-२६
  • मत्ती २०:१७-३४

Sunday, January 30, 2011

सम्पूर्ण वज़न

मुझे बुज़ुर्ग चाचा औस्कर की प्रथम हवाई यात्रा की कहानी बहुत पसन्द है। उन्हें सदा ही हवाई यात्रा से डर लगता था और वे कभी हवाई जहाज़ पर जाने को तैयार नहीं होते थे। बड़ी मुश्किल से आखिरकर वे हवाई यात्रा के लिये मान गए। यात्रा के बाद उनके मित्रों ने पूछा, "क्यों, क्या हवाई यात्रा में मज़ा आया?" तो चाचा ने उत्तर दिया, "चलो, वैसे तो मैं जैसा सोचता था उतनी बुरी तो नहीं थी, लेकिन मैं यह भी बता दूं कि मैंने अपना पूरा भार उस जहाज़ पर नहीं डाला था।"

ऐसे ही हम में से कई मसीही भी हैं। मसीही विश्वासी होने के नाते हम जानते हैं कि हमारे पाप क्षमा हो गए हैं और हमें स्वर्ग जाने के अटल आश्वासन का आनन्द है, लेकिन इससे आगे हम प्रभु पर अपने प्रतिदिन के जीवन के लिये विश्वास नहीं करते। हम अपने प्रतिदिन की आवश्यक्तओं के लिये प्रभु पर निर्भर रहने का विश्वास नहीं जुटा पाते और उन्हें स्वयं अपनी सामर्थ और सूझ-बूझ से ही पूरी करना चाहते हैं - हम अपना पूरा वज़न प्रभु पर नहीं डाल देते। नतीजा होता है हमारे अन्दर भय, शक, अनिश्चितता घर बना लेतीं है, चिंताएं हमें घेरे रहती हैं और हम अपनी मसीही यात्रा का पूरा आनन्द नहीं उठाने पाते। कैसी विचित्र बात है, हमें प्रभु पर अनन्तकाल के लिये तो सम्पूर्ण भरोसा है, लेकिन अभी और यहां के लिये नहीं।

यदि हम प्रभु पर भविष्य की अपनी अनन्त नियति के लिये भरोसा रख सकते हैं, तो वर्तमान पर क्यों नहीं? वर्तमान के लिये भी हमें उसके वचन पर उतना ही भरोसा होना चाहिये, जितना भविष्य के लिये। जैसे अब्राहम अपने विश्वास में खरा रहा और डगमगाया नहीं, वैसे ही हमें भी अपने विश्वास में स्थिर रहना चाहिये।

यदि हम चिंता और भय के बोझ तले दबे हैं तो हम चाचा औस्कर के समान हैं - अपना पूरा बोझ डालने से डरने वाले। इसके बजाए हमें अब्राहम की तरह होना चाहिये जिसने "न अविश्वासी होकर परमेश्वर की प्रतिज्ञा पर संदेह किया, पर विश्वास में दृढ़ होकर परमेश्वर की महिमा की।" (रोमियों ४:२०)

जी हां, परमेश्वर सम्पूर्ण रीति से हर बात के लिये विश्वास योग्य है। हम निडर होकर उसपर अपना पूरा वज़न डाल सकते हैं। - रिचर्ड डी हॉन


सच्चा विश्वास यह जानता है कि परमेश्वर जो कहता है सदैव वह करता भी है।

और न अविश्वासी होकर परमेश्वर की प्रतिज्ञा पर संदेह किया, पर विश्वास में दृढ़ होकर परमेश्वर की महिमा की। - रोमियों ४:२०


बाइबल पाठ: रोमियों ४:१६-२५

इसी कारण वह विश्वास के द्वारा मिलती है, कि अनुग्रह की रीति पर हो, कि प्रतिज्ञा सब वंश के लिये दृढ़ हो, न कि केवल उसके लिये जो व्यवस्था वाला है, वरन उन के लिये भी जो इब्राहीम के समान विश्वास वाले हैं: वही तो हम सब का पिता है।
जैसा लिखा है, कि मैं ने तुझे बहुत सी जातियों का पिता ठहराया है उस परमश्‍ेवर के साम्हने जिस पर उस ने विश्वास किया और जो मरे हुओं को जिलाता है, और जो बातें हैं ही नहीं, उन का नाम ऐसा लेता है, कि मानो वे हैं।
उस ने निराशा में भी आशा रख कर विश्वास किया, इसलिये कि उस वचन के अनुसार कि तेरा वंश ऐसा होगा वह बहुत सी जातियों का पिता हो।
और वह जो एक सौ वर्ष का था, अपने मरे हुए से शरीर और सारा के गर्भ की मरी हुई की सी दशा जान कर भी विश्वास में निर्बल न हुआ।
और न अविश्वासी होकर परमेश्वर की प्रतिज्ञा पर संदेह किया, पर विश्वास में दृढ़ हो कर परमेश्वर की महिमा की।
और निश्‍चय जाना, कि जिस बात की उस ने प्रतिज्ञा की है, वह उसे पूरी करने को भी सामर्थी है।
इस कारण, यह उसके लिये धामिर्कता गिना गया।
और यह वचन, कि विश्वास उसके लिये धामिर्कता गिना गया, न केवल उसी के लिये लिखा गया,
वरन हमारे लिये भी जिन के लिये विश्वास धामिर्कता गिना जाएगा, अर्थात हमारे लिये जो उस पर विश्वास करते हैं, जिस ने हमारे प्रभु यीशु को मरे हुओं में से जिलाया।
वह हमारे अपराधों के लिये पकड़वाया गया, और हमारे धर्मी ठहरने के लिये जिलाया भी गया।

एक साल में बाइबल:
  • निर्गमन २३-२४
  • मत्ती २०:१-१६

Saturday, January 29, 2011

सृष्टि की पाठशाला, परमेश्वर के अनपहचाने करिशमे

एक इंजीनियर श्री टी. सी. रोडी ने लिखा, "मेरे घर के आंगन में छः विशाल Oak (बांज) वृक्ष हैं जो १०० वर्ष से भी अधिक पुराने होंगे। उनके तले से लेकर चोटी तक के प्रत्येक पत्ते को हरा भरा रखने के लिये प्रतिदिन भारी मात्रा में उन तक पानी पहुंचाने की आवश्यक्ता होती है। एक इंजीनियर होने के नाते मैं जानता हूं कि मनुष्य द्वारा अभिकल्पित अथवा निर्मित ऐसा कोई भी पानी चढ़ाने का पम्प नहीं है जो इतना पानी इन पेड़ों के सघन लकड़ी के तने में से होकर इतनी ऊँचाई तक प्रवाहित कर सके, और वह भी लगातार, अविराम, बिना किसी खराबी या रखरखाव की आवश्यक्ता के। यदि पानी के प्रवाह में तने की लकड़ी के प्रतिरोध को ना भी लिया जाए, तो भी प्रत्येक पेड़ की जड़ों को ज़मीन से चोटी तक पानी चढाने के लिये ३,००० पौंड प्रति वर्ग फुट से अधिक के दबाव को पार करना होगा। लेकिन फिर भी यह परमेश्वर का अद्भुत करिशमा है कि जड़ें इतना पानी जमा भी करतीं हैं और उसे प्रत्येक पत्ते तक भी पहुंचाती हैं, बिल्कुल शांत और सहज रीति से, और हमें पता भी नहीं चलता।"

यह परमेश्वर के अनपहचाने करिशमों का केवल एक उदाहरण है। ऐसे न जाने कितने, और इससे भी न जाने कितने जटिल और कई उदाहरण सृष्टि की पाठशाला में विद्यमान हैं। परमेश्वर के इन्हीं अनपहचाने करिशमों के कारण हमारा जीवन प्रतिदिन पृथ्वी पर संभव है। प्रतिदिन परमेश्वर हमें अनगिनित आशीशों से नवाज़ता है और हम उन्हें ’प्रकृति के कार्य’ कह कर हलके में टाल जाते हैं, परमेश्वर को धन्यवाद देना तो दूर, बहुतेरे तो उसके असतित्व से ही इन्कार कर जाते हैं। लेकिन परमेश्वर का धैर्य और प्रेम फिर भी सबके प्रति बना रहता है और वह जीवन की आवश्यक्ताएं प्रदान करता रहता है।

प्रकृति परमेश्वर में हमारे विश्वास को बढ़ाती है। हज़ारों साल पहले परमेश्वर ने बुज़ुर्ग और निसन्तान अब्राहम से कहा कि आकाश की ओर देख और सितारों की संख्या पर ध्यान दे, जैसे तारे अनगिनित हैं वैसे ही तेरे वंश के लोग भी अनगिनित होंगे। वह बुज़ुर्ग समझ गया कि जो परमेश्वर उन अनगिनित सितारों को बना और चला सकता है, उस परमेश्वर के लिये उसकी बुज़ुर्गी में पुत्र देना कोई कठिन कार्य नहीं है। अब्राहम ने परमेश्वर की बात पर विश्वास किया और यह उसके लिये धार्मिकता गिना गया। अब्राहम और उसकी पत्नि के बुढापे में उन्हें सन्तान हुई और आज उसका वंश इस्त्राएल के रूप में जाना जाता है।

जब कभी अपनी किसी समस्या के समाधान के लिये परमेश्वर पर विश्वास करना कठिन हो रहा हो तो सृष्टि की पाठशाला में जा कर प्रकृति के सृजनकर्ता और संचलाक परमेश्वर के अद्भुत कार्यों पर ध्यान कीजिए। विचार कीजिए कि जो इतना सब इतनी सहजता से बना और चला सकता है, उसके लिये आपकी समस्या क्या कठिन है? फिर अपने बच्चोंके लिये उसके वचन और हमारी पाठ्य पुस्तक - पवित्र शास्त्र बाइबल में दिये गये उसके वायदों और आश्वासनों को स्मरण कीजिए, आपका विश्वास स्वतः ही जाग उठेगा और चिंताएं जाती रहेंगीं। - डेनिस डी हॉन


जो कुछ मैं ने देखा है वह सब मुझे मेरे सृष्टिकर्ता परमेश्वर पर प्रत्येक अन्देखी बात के लिये भी विश्वास रखने को प्रेरित करता है। - एमरसन

और उस ने उसको बाहर ले जा के कहा, आकाश की ओर दृष्टि कर के तारागण को गिन, क्या तू उनको गिन सकता है ? फिर उस ने उस से कहा, तेरा वंश ऐसा ही होगा। - उत्पत्ति १५:५


बाइबल पाठ: उत्पत्ति १५:१-६

इन बातों के पश्चात्‌ यहोवा को यह वचन दर्शन में अब्राम के पास पहुंचा, कि हे अब्राम, मत डर; तेरी ढाल और तेरा अत्यन्त बड़ा फल मैं हूं।
अब्राम ने कहा, हे प्रभु यहोवा मैं तो निर्वंश हूं, और मेरे घर का वारिस यह दमिश्की एलीएजेर होगा, सो तू मुझे क्या देगा ?
और अब्राम ने कहा, मुझे तो तू ने वंश नहीं दिया, और क्या देखता हूं, कि मेरे घर में उत्पन्न हुआ एक जन मेरा वारिस होगा।
तब यहोवा का यह वचन उसके पास पहुंचा, कि यह तेरा वारिस न होगा, तेरा जो निज पुत्र होगा, वही तेरा वारिस होगा।
और उस ने उसको बाहर ले जा के कहा, आकाश की ओर दृष्टि कर के तारागण को गिन, क्या तू उनको गिन सकता है? फिर उस ने उस से कहा, तेरा वंश ऐसा ही होगा।
उस ने यहोवा पर विश्वास किया और यहोवा ने इस बात को उसके लेखे में धर्म गिना।

एक साल में बाइबल:
  • निर्गमन २१-२२
  • मत्ती १९

Friday, January 28, 2011

ब्लोफिश जैसी पृवर्ती

एक समुद्री मछली - ब्लोफिश, मछुआरों के लिये कोई उपयोगिता नहीं रखती। ब्लोफिश का मुँह तो बड़ा सा होता है लेकिन शरीर जीर्ण चमड़े जैसा दिखने वाला और झुर्रीदार होता है। जब इस उलटा करके उसे ज़रा सा गुदगुदाओ तो वह अपने अन्दर हवा भर कर गेंद की तरह बड़ा सा गोलाकार स्वरूप ले लेती है।

कुछ लोग भी ऐसे ही हो सकते हैं - अपनी बघारने के लिये बड़ा मुँह किंतु अनाकर्षक जीवन। उनकी ज़रा सी प्रशंसा कीजिये, थोड़ा सा उनके अहम को गुदगुदाइये और वे फूल कर कुप्पा हो जाते हैं, घमंड से भर जाते हैं। वे फूली हुई ब्लोफिश के समान ही होते हैं - केवल दिखने में बड़े परन्तु अन्दर से केवल हवा। उनमें कुछ भी सार्थक नहीं होता।

यह व्याधि और भी कई रूप ले लेती है जिनके परिणाम बहुत गंभीर होते हैं। उदाहरण स्वरूप उन मसीही लोगों को देखिये जिन्हें पौलुस प्रेरित ने १ कुरिन्थियों ५ अध्याय में संबोधित किया - वे व्यभिचार से समझौता करे बैठे थे। अपने मध्य में विद्यमान ऐसे पाप पर दुखी होने कि बजाए, वे उसपर घमंड कर रहे थे (१ कुरिन्थियों ५:२)। यह उनकी आत्मिक अपरिपक्क्वता और उनमें विद्यमान शारीरिकता के लक्षण थे - उन बातों के लिये गर्व करना जिनके लिये दुखी होना चाहिये।

परमेश्वर चाहता है कि हम मसीह में बने रहें न कि घमंड में। परमेश्वर की सन्तान का व्यवहार लगातार वैसा होना चाहिये जैसा पौलुस ने फिलिप्पियों को लिखा था। उसने कहा "विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्‍छा समझो।" (फिलिप्पियों २:३)

यदि हम इस बात को गंभीरता से लेंगे और मानेंगे तो हमारे जीवनों में ब्लोफिश जैसी पृवर्ती नहीं होगी। - पौल वैन गौर्डर


हम अपना आकार जितना छोटा करेंगे, अपना काम करने के लिये परमेश्वर को उतना स्थान अधिक मिलेगा।

विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्‍छा समझो। - फिलिप्पियों २:३


बाइबल पाठ: फिलिप्पियों २:१-८

सो यदि मसीह में कुछ शान्‍ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करूणा और दया है।
तो मेरा यह आनन्‍द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो।
विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्‍छा समझो।
हर एक अपनी ही हित की नहीं, बरन दूसरों के हित की भी चिन्‍ता करे।
जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो।
जिस ने परमेश्वर के स्‍वरूप में होकर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्‍तु न समझा।
वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया।
और मनुष्य के रूप में प्रगट होकर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली।

एक साल में बाइबल:
  • निर्गमन १९-२०
  • मत्ती १८:२१-३५

Thursday, January 27, 2011

आपका मार्गदर्शक कौन है?

अंग्रज़ी भाषा की एक मशहूर कविता "Invictus" में एक जगह कहा गया है "अपने भाग्य का स्वामी मैं स्वयं हूं; अपनी आत्मा का मर्गदर्शक भी मैं ही हूं।" यह मनोहर कविता तो हो सकती है परन्तु बहुत खतरनाक विचारधारा है। यदि हम अपने जीवनों को स्वयं नियंत्रित करने का प्रयास करेंगे तो अन्त विनाश ही होगा।

एक युवक लड़कपन से ही नाविक बन गया और अपने इस व्यवसाय में बहुत शीघ्र उन्नति भी प्राप्त करता गया, और कुछ समय में ही उसे एक पानी के जहाज़ का कपतान बना दिया गया। एक यात्रा के अन्त में, जब वह तट के निकट पहुंच रहा था तो एक यात्री, जो पानी के जहाज़ के संचालन की विधियों को जानता था, उसके पास आया और उससे कहा कि "क्या यह बेहतर नहीं होगा कि अभी लंगर डाल कर, बन्दरगाह में प्रवेश करने के लिये सहायता ले ली जाए।" उस युवक कपतान ने कहा "मेरे लिये नहीं। मैं स्वयं अपना संचालक हूं। प्रातः के ज्वार के प्रवाह के साथ मैं बन्दरगाह में प्रवेश कर जाऊंगा।" यह जान कर कि अपनी बात को रखने के लिये उसे शेष दूरी जल्दी तय करनी पड़ेगी, उसने बन्दरगाह में प्रवेश के लिये कम दूरी पर स्थित एक संकरा मुहाना चुना। उसके साथ के अनुभवी नाविकों ने अचंभे में अपना सिर हिलाया, साथ के अन्य यात्रियों ने भी चौड़ा मुहाना चुनने की सलाह दी। लेकिन उसने किसी की नहीं सुनी, वरन उन पर हंस कर प्रातः के ज्वार के साथ तट पर होने के अपने दावे को दोहरया। प्रातः होने पर वह तट पर तो था, लेकिन उस का जहाज़ टूट गया था और उसका अपना जीवन नष्ट हो गया था, पानी में बहकर उसकी लाश ही तट पर पहुंची थी। इस बड़े और दुखदायी विनाश कारण केवल उसका हठीला दंभ ही था।

समय के सागर पर होकर अनन्तकाल के तट की ओर हमारी जीवन यात्रा भी किसी अनुभवी संचालक की सहायता के बिना बहुत जोखिम से भरी है। उसे ही अपना संचालक बनाईये जो मृत्यु के पार होकर वापस आया है। वह ही इस लोक और परलोक का मार्ग जानता है तथा आपको सुरक्षित पार उतार सकता है। यदि प्रभु यीशु आपका मार्गदर्शक नहीं है तो स्वर्गीय तट पर आपका पहुंचना असंभव है। इस सृष्टि के रचियता के हाथों में अपने इस लोक और परलोक की बागडोर देकर सुरक्षित हो जाईये। - पौल वैन गौर्डर


जो अपना मार्गदर्शन स्वयं करते हैं उनका अनुयायी भी एक मूर्ख ही होता है।

नाश होने से पहिले मनुष्य के मन में घमण्ड, और महिमा पाने से पहिले नम्रता होती है। - नीतिवचन १८:१२


बाइबल पाठ: १ शमुएल २:१-१०

और हन्ना ने प्रार्थना करके कहा, मेरा मन यहोवा के कारण मगन है, मेरा सींग यहोवा के कारण ऊंचा, हुआ है। मेरा मुंह मेरे शत्रुओं के विरूद्ध खुल गया, क्योंकि मैं तेरे किए हुए उद्धार से आनन्दित हूं।
यहोवा के तुल्य कोई पवित्र नहीं, क्योंकि तुझ को छोड़ और कोई है ही नहीं; और हमारे परमेश्वर के समान कोई चट्टान नहीं है।
फूल कर अहंकार की और बातें मत करो, और अन्धेर की बातें तुम्हारे मुंह से न निकलें क्योंकि यहोवा ज्ञानी ईश्वर है, और कामों को तौलने वाला है।
शूरवीरों के धनुष टूट गए, और ठोकर खाने वालों की कटि में बल का फेंटा कसा गया।
जो पेट भरते थे उन्हें रोटी के लिये मजदूरी करनी पड़ी, जो भूखे थे वे फिर ऐसे न रहे। वरन जो बांझ थी उसके सात हुए, और अनेक बालकों की माता घुलती जाती है।
यहोवा मारता है और जिलाता भी है, वही अधोलोक में उतारता और उस से निकालता भी है।
यहोवा निर्धन करता है और धनी भी बनाता है, वही नीचा करता और ऊंचा भी करता है।
वह कंगाल को धूलि में से उठाता और दरिद्र को घूरे में से निकाल खड़ा करता है, ताकि उनको अधिपतियों के संग बिठाए, और महिमायुक्त सिंहासन के अधिकारी बनाए। क्योंकि पृथ्वी के खम्भे यहोवा के हैं, और उस ने उन पर जगत को धरा है।
वह अपने भक्तों के पावों को सम्भाले रहेगा, परन्तु दुष्ट अन्धियारे में चुपचाप पड़े रहेंगे क्योंकि कोई मनुष्य अपने बल के कारण प्रबल न होगा।
जो यहोवा से झगड़ते हैं वे चकनाचूर होंगे, वह उनके विरूद्ध आकाश में गरजेगा। यहोवा पृथ्वी की छोर तक न्याय करेगा और अपने राजा को बल देगा, और अपने अभिषिक्त के सींग को ऊंचा करेगा।

एक साल में बाइबल:
  • निर्गमन १६-१८
  • मत्ती १८:१-२०

Wednesday, January 26, 2011

स्वस्थ नज़रिया

जब कभी भी हम दूसरों को नीचा दिखाकर अपने आप को ऊंचा उठाना चाहते हैं, तो अन्ततः नतीजा हानिकारक ही होता है। यह बात एक नीतिकथा द्वारा स्पष्ट करी गई है: अपने तालाब में से एक बैल को पानी पीते देख कर एक छोटा मेंढक घबरा गया और तुरंत फुदक कर अपने दादा जी के पास उन्हें बताने के लिये पहुंचा। दादा जी ने उसकी बात सुनकर ठान लिया कि उनके पोते की दृष्टि में उसके दादा से बड़ा कोई नहीं होना चाहिये। इसलिये उस बुज़ुर्ग मेंढक ने अपने आप को फुलाया और पोते से पूछा, "क्या वह इससे भी बड़ा था?" पोते ने उत्तर दिया, "जी हां दादा जी, और भी बहुत बड़ा।" दादा जी ने अपने को और फुलाया और फिर वही प्रशन किया, और वही उत्तर मिला। बुजुर्ग मेंढक यह बर्दाशात नहीं कर सका, अपने आप को बड़ा बनाने के लिये वह स्वयं को इतना फूलाता गया कि वह फट गया।

अपने बारे में एक स्वस्थ नज़रिया रखना अच्छा है, लेकिन स्वस्थ और सच्चा नज़रिये और घमंड से फूल जाने में बहुत अन्तर है। परमेश्वर द्वारा जैसा और जितना हमें बनाया गया है, अपने आप को उससे अधिक आंकना खतरनाक साबित हो सकता है। अपने अहम को नियंत्रण में रखने का सबसे अच्छा तरीका है कि हम जो कुछ करें, हमारी जो भी उपलबधी हो, हम उसे अपने प्रति परमेश्वर के अनुग्रह का प्रतिफल जाने। ऐसा करने से ही हम व्यर्थ फूलने और अपने अहम को बढ़ाने की मूर्खता से बचे रहेंगे।

पौलुस प्रेरित ने इसे बहुत स्पष्ट रीति से कहा: "क्‍योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूं, कि जैसा समझना चाहिए, उस से बढ़कर कोई भी अपने आप को न समझे पर जैसा परमेश्वर ने हर एक को परिमाण के अनुसार बांट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे।" (रोमियों १२:३)

यदि हम अपने आप को फुलाते ही रहेंगे तो परिमाण से बाहर होकर फट पड़ेंगे। - पौल वैन गौर्डर


उपयोग होने लायक छोटा रहना ही परमेश्वर की दृष्टि में बड़ा होना है।

क्‍योंकि यदि कोई कुछ न होने पर भी अपने आप को कुछ समझता है, तो अपने आप को धोखा देता है। - गलतियों ६:३


बाइबल पाठ: गलतियों ६:१-५

हे भाइयों, यदि कोई मनुष्य किसी अपराध में पकड़ा जाए, तो तुम जो आत्मिक हो, नम्रता के साथ ऐसे को संभालो, और अपनी भी चौकसी रखो, कि तुम भी परीक्षा में न पड़ो।
तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो।
क्‍योंकि यदि कोई कुछ न होने पर भी अपने आप को कुछ समझता है, तो अपने आप को धोखा देता है।
पर हर एक अपने ही काम को जांच ले, और तब दूसरे के विषय में नहीं परन्‍तु अपने ही विषय में उसको घमण्‍ड करने का अवसर होगा।
क्‍योंकि हर एक व्यक्ति अपना ही बोझ उठाएगा।

एक साल में बाइबल:
  • निर्गमन १४-१५
  • मत्ती १७

Tuesday, January 25, 2011

मधु से मीठा

मोनटाना विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने इस धारणा को चुनौती दी कि व्यायाम से पहले शक्कर की अधिक मात्रा वाला नाशता लेने से शरीर को शीघ्र उर्जा प्राप्त होती है। उन्होंने लम्बी दूरी की दौड़ में भाग लेने वाले धावकों का व्यायाम के लिये उपयोग होने वाली स्थावर साईकिलों पर परीक्षण किया। उन्होंने पाया कि जिन धावकों ने परीक्षण से पहले शक्कर रहित पेय पिये थे वे, उनके मुकाबले जिन्होंने शक्कर युक्त पेय लिये थे, २५ प्रतिशत अधिक देर तक साईकिल चला सके। उनके परीक्षणों का निष्कर्ष था कि खिलाड़ियों के लिये बेहतर होगा यदि वे व्यायाम से पहले किसी शक्कर युक्त नाशते का उपयोग न करें।

राजा सुलेमान ने भी शहद के अत्याधिक सेवन के उदाहरण को लिया, एक और गंभीर समस्या की ओर ध्यान खींचने के लिये - आत्मप्रशंसा के मधुर स्वाद में रत हो जाना। नीतिवचन के २५वें अध्याय में इस बुद्धिमान राजा ने आत्मप्रशंसा और घमंड के लिये दो चेतावनियां दीं (पद १४, २७)। लोगों में अपनी महिमा के प्रयास में लगे रहना निकट भविष्य के संदर्भ में तो अच्छा लग सकता है, लेकिन दीर्घ कालीन संदर्भ में यह हानिकारक ही होता है।

आत्मप्रशंसा और घमंड के भोजन को निरंतर लेते रहने से अधिक किसी अन्य में हमें अन्दर से कमज़ोर करने की क्षमता नहीं। कितना भला हो यदि हम मधु से मीठे इस आत्मप्रशंसा और घमंड के भोजन को तज कर परमेश्वर के प्रति विश्वास और अनुशासन में बने रहें। ऐसा करने से ही हम जीवन की चुनौतियों का सामना करने की सच्ची भीतरी सामर्थ पा सकते हैं। - मार्ट डी हॉन


जब घमंड जीवन से बाहर निकलता है, तब ही परमेश्वर पर विश्वास अन्दर आता है।

जैसे बहुत मधु खाना अच्छा नहीं, वैसे ही स्वयं की महिमा ढूंढना भी अच्छा नहीं। - नीतिवचन २५:२७


बाइबल पाठ: नीतिवचन २५:१४-२८

जैसे बादल और पवन बिना वृष्टि निर्लाभ होते हैं, वैसे ही झूठ-मूठ दान देने वाले का बड़ाई मारना होता है।
धीरज धरने से न्यायी मनाया जाता है, और कोमल वचन हड्डी को भी तोड़ डालता है।
क्या तू ने मधु पाया? तो जितना तेरे लिये ठीक हो उतना ही खाना, ऐसा न हो कि अधिक खाकर उसे उगल दे।
अपने पड़ोसी के घर में बारम्बार जाने से अपने पांव को रोक ऐसा न हो कि वह खिन्न होकर घृणा करने लगे।
जो किसी के विरूद्ध झूठी साक्षी देता है, वह मानो हथौड़ा और तलवार और पैना तीर है।
विपत्ति के समय विश्वासघाती का भरोसा टूटे हुए दांत वा उखड़े पांव के समान है।
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