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शुक्रवार, 1 अप्रैल 2011

स्वर्ग के नागरिक

एक व्यक्ति अपने पुराने मित्र से मिलने गया, जो ब्रिटिश सेना में फौजी अफसर था और अफ्रीका के जंगलों में अपने दल के साथ तैनात था। एक दिन जब वह अपने मित्र के तम्बू में आया तो यह देख कर भौंचका रह गया कि उस जंगल में उसका मित्र किसी समारोह में भाग लेने जैसे औपचारिक वस्त्र पहने हुए बैठा था और उसके सामने मेज़ पर भोजन करने के कीमती पात्र सजे हुए थे। उसने अपने मित्र से पूछा कि जंगल में एक तम्बु के अन्दर वह ऐसी ठाठ-बाठ की वेशभूशा पहने और ऐसे कीमती पात्रों से मेज़ सजाकर क्यों बैठा है? उस ब्रिटिश अफसर ने उसे समझाया, "सप्ताह में एक बार मैं इस रीति को मनाता हूँ, जिससे मुझे स्मरण रहे कि मैं कौन हूँ - ब्रिटिश सेना का एक अफसर। मैं अपने वास्तविक घर के तौर तरीकों को बनाए रखना चाहता हूँ और ब्रिटिश लोगों की परम्पराओं के अनुसार जीना चाहता हूँ, चाहे मेरे आस-पास के लोग कैसे भी रहें। मैं नहीं चाहता कि किसी विदेशी आचरण के प्रभाव में आ कर मैं अपने देश के आचरण भूल जाऊँ।

मसीहियों को भी ऐसी ही चिंता होनी चाहिए। प्रभु यीशु के विश्वासी होने के कारण हम स्वर्ग के नागरिक हैं, वहीं की नागरिकता हमारी वास्तविक नागरिकता है; लेकिन अक्सर हम ऐसे व्यवहार करते हैं जैसे यह संसार ही हमारा स्थायी निवास स्थान है। हमें चौकस रहना चाहिए कि हम अपनी स्वर्गीय नागरिकता के अनुसार आचरण के स्थान पर सांसारिक आचरण न अपनाने लगें। हमें ऐसे जीना है कि लोग हमारे जीवनों को देखकर जान सकें कि हम संसार से भिन्न हैं, क्योंकि हम संसार में यात्री और स्वर्ग के नागरिक हैं। - रिचर्ड डी हॉन


जो मसीही संसार से ऊपर उठकर जीते हैं, वे स्वर्ग के निकट रहते हैं।

पर हमारा स्‍वदेश स्‍वर्ग पर है; और हम एक उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह के वहां से आने ही बाट जोह रहे हैं। - फिलिप्पियों ३:२०


बाइबल पाठ: फिलिप्पियों ३:१७-२१

Php 3:17 हे भाइयो, तुम सब मिलकर मेरी सी चाल चलो, और उन्‍हें पहिचान रखो, जो इस रीति पर चलते हैं जिस का उदाहरण तुम हम में पाते हो।
Php 3:18 क्‍योंकि बहुतेरे ऐसी चाल चलते हैं, जिन की चर्चा मैं ने तुम से बार बार किया है और अब भी रो रोकर कहता हूं, कि वे अपनी चालचलन से मसीह के क्रूस के बैरी हैं।
Php 3:19 उन का अन्‍त विनाश है, उन का ईश्वर पेट है, वे अपनी लज्ज़ा की बातों पर घमण्‍ड करते हैं, और पृथ्वी की वस्‍तुओं पर मन लगाए रहते हैं।
Php 3:20 पर हमारा स्‍वदेश स्‍वर्ग पर है; और हम एक उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह के वहां से आने ही बाट जोह रहे हैं।
Php 3:21 वह अपनी शक्ति के उस प्रभाव के अनुसार जिस के द्वारा वह सब वस्‍तुओं को अपने वश में कर सकता है, हमारी दीन-हीन देह का रूप बदलकर, अपनी महिमा की देह के अनुकूल बना देगा।

एक साल में बाइबल:
  • न्यायियों १३-१५
  • लूका ६:२७-४९

रविवार, 23 जनवरी 2011

औकात एवं घमंड

ब्रिटिश संसद के लिये एक नवनिर्वाचित व्यक्ति अपने परिवार को लंडन शहर दिखाने लाया, और बड़े घमंड से उन्हें लंडन का दौरा करवाने लगा। जब वे लंडन की भवय और विशाल वेस्टमिनिस्टर ऐब्बी में पहुंचे तो उसकी ८ वर्षीय पुत्री उस भवन की सुन्दरता और विशाल आकार देखकर भौंचक रह गई। उसकी इस प्रतिक्रिया पर उसके पिता ने गर्व से पूछा, "बेटी, तुम किस सोच में पड़ गईं?" उसने कहा, "पिताजी मैं सोच रही थी कि अपने घर में आप तो आप कितने बड़े लगते हैं लेकिन यहां इस भवन में कितने छोटे लग रहे हैं!"

घमंड अनजाने ही हमारे जीवनों मे घर बना लेता है और हमें पता भी नहीं चलता। जैसा हमें अपने आप को सोचना चाहिये, उस से अधिक कभी न सोचें (रोमियों १२:३)।

जब हम अपने ही दायरों में रहते हैं तो घमंडी हो जाना आसान होता है, लेकिन हमें अपनी औकात का पता तब ही चलता है जब हमें बड़े कामों, बड़ी परिस्थितियों, बड़ी चुनौतियों और बड़ी प्रतियोगिताओं का सामना करना पड़ता है। जैसे छोटे तालाबों में बड़ी बड़ी लगने वाली मछलियां सागर में पहुंच कर अपना असली आकार समझने पाती हैं, वैसे ही ऐसी बड़ी बातों के सम्मुख ही हमें अपनी असली औकात का पता चलता है।

परमेश्वर के वचन में जो एक बात स्पष्ट है वह यह कि उसे घंडियों से घृणा है। भजनकार ने परमेश्वर की अगुवाई में उसके संबंध में लिखा "...जिसकी आंखें चढ़ी हों और जिसका मन घमण्डी है, उसकी मैं न सहूंगा।" (भजन १०१:५); तथा याकूब ने कहा "...इस कारण यह लिखा है, कि परमेश्वर अभिमानियों से विरोध करता है, पर दीनों पर अनुग्रह करता है।" (याकूब ४:६)

यदि हम परमेश्वर के आत्मा के आगे दीन होकर उससे अनुरोध करें, तो वह हमारी वास्तविक स्थिति हमें दिखाने में हमारी सहायता करेगा और हमें घमंड से भी बचाए रखेगा। - रिचर्ड डी हॉन


जो परमेश्वर को जानते हैं वे नम्र रहेंगे, जो स्वयं अपनी हकीकत को जानते पहचानते हैं वे कभी घमंडी नहीं होंगे।

क्‍योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूं, कि जैसा समझना चाहिए, उस से बढ़ कर कोई भी अपने आप को न समझे पर जैसा परमेश्वर ने हर एक को परिमाण के अनुसार बांट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे। - रोमियों १२:३


बाइबल पाठ: याकूब ४:१-१०

तुम में लड़ाइयां और झगड़े कहां से आ गए? क्‍या उन सुख-विलासों से नहीं जो तुम्हारे अंगों में लड़ते-भिड़ते हैं?
तुम लालसा रखते हो, और तुम्हें मिलता नहीं, तुम हत्या और डाह करते हो, ओर कुछ प्राप्‍त नहीं कर सकते, तुम झगड़ते और लड़ते हो; तुम्हें इसलिये नहीं मिलता, कि मांगते नहीं।
तुम मांगते हो और पाते नहीं, इसलिये कि बुरी इच्‍छा से मांगते हो, ताकि अपने भोग विलास में उड़ा दो।
हे व्यभिचारिणयों, क्‍या तुम नहीं जानतीं, कि संसार से मित्रता करनी परमेश्वर से बैर करना है सो जो कोई संसार का मित्र होना चाहता है, वह अपने आप को परमेश्वर का बैरी बनाता है।
क्‍या तुम यह समझते हो, कि पवित्र शास्‍त्र व्यर्थ कहता है जिस आत्मा को उस ने हमारे भीतर बसाया है, क्‍या वह ऐसी लालसा करता है, जिस का प्रतिफल डाह हो?
वह तो और भी अनुग्रह देता है; इस कारण यह लिखा है, कि परमेश्वर अभिमानियों से विरोध करता है, पर दीनों पर अनुग्रह करता है।
इसलिये परमेश्वर के आधीन हो जाओ और शैतान का साम्हना करो, तो वह तुम्हारे पास से भाग निकलेगा।
परमेश्वर के निकट आओ, तो वह भी तुम्हारे निकट आएगा: हे पापियों, अपने हाथ शुद्ध करो और हे दुचित्ते लोगों अपने हृदय को पवित्र करो।
दुखी होओ, और शोक करा, और रोओ: तुम्हारी हंसी शोक में और तुम्हारा आनन्‍द उदासी में बदल जाए।
प्रभु के साम्हने दीन बनो, तो वह तुम्हें शिरोमणि बनाएगा।

एक साल में बाइबल:
  • निर्गमन ७-८
  • मत्ती १५:१-२०