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बुधवार, 4 जून 2014

अन्दरूनी परिवर्तन


   मुझे नाटकीय मोड़ों और जीवन के लिए बहुमूल्य शिक्षाओं से भरी हुई योना नबी की कहानी बहुत पसन्द है। परमेश्वर के वचन बाइबल में दी गई इस कहानी का नायक, परमेश्वर का नबी योना, परमेश्वर से निर्देश पाता है कि गैरयहूदी और दुष्ट निनवे-वासियों के पास जाए और उन्हें पश्चाताप कर के परमेश्वर की ओर मुड़ने को कहे क्योंकि उनकी दुष्टता बहुत बढ़ गई है और परमेश्वर का न्याय उन पर आने वाला है। योना, जो निनवे-वासियों से बैर रखता था, अपनी ढिठाई में परमेश्वर के निर्देश की अवहेलना करता है, परन्तु परमेश्वर उसे उस ज़िम्मेदारी से भागने नहीं देता और अन्ततः योना निनवे जाकर वहाँ पापों से पश्चाताप और परमेश्वर की ओर मुड़ने का प्रचार करता है। उसके एक ही प्रचार से वहाँ बड़ा परिवर्तन आता है और वहाँ के राजा से लेकर प्रजा तक का हर व्यक्ति पश्चाताप में परमेश्वर के सामने झुक जाता है। उनके इस पश्चाताप को देख कर परमेश्वर उन पर आने वाले दण्ड की अपनी आज्ञा रोक लेता है और उन्हें क्षमा कर देता है।

   योना के इस प्रचार और उसके अद्भुत प्रभाव से निश्चय ही वह अपने समय का सफलतम प्रचारक बन गया होगा, और हर कोई यह आशा रखेगा कि निनवे के लोगों के पश्चाताप और परमेश्वर की ओर मुड़ने तथा परमेश्वर के उन्हें क्षमा कर देने को देख कर योना बहुत प्रसन्न हुआ होगा; लेकिन इसके विपरीत योना परमेश्वर की इस क्षमा को देखकर बहुत खिसिया! यद्यपि योना ने बाहर से परिवर्तित प्रतीत होकर परमेश्वर के निर्देशानुसार सही स्थान पर सही कार्य तो करा, लेकिन उसका व्यवहार दिखाता है कि योना में अन्दरूनी परिवर्तन नहीं हुआ था; वह निनवे के लोगों के प्रति अपने बैर को दबाए नहीं रख सका, और परमेश्वर के महान कार्य को वहाँ होता देख कर भी वह निनवे-वासियों के प्रति अपने बैर में बना ही रहा।

   यदि हम मसीही विश्वासी भी सचेत ना रहें तो हम भी योना के समान ही बाहर से परमेश्वर के आज्ञाकारी दिखने वाले किंतु अन्दर से परमेश्वर से दूर रहने वाले हो सकते हैं। परमेश्वर हमारे बाहरी स्वरूप और कार्यों को नहीं देखता वरन हमारे हृदय की दशा और अन्दरूनी विचार-व्यवहार पर नज़र रखता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा है कि, "क्योंकि परमेश्वर का वचन जीवित, और प्रबल, और हर एक दोधारी तलवार से भी बहुत चोखा है, और जीव, और आत्मा को, और गांठ गांठ, और गूदे गूदे को अलग कर के, वार पार छेदता है; और मन की भावनाओं और विचारों को जांचता है" (इब्रानियों 4:12); और परमेश्वर अपने इसी वचन से हमारी आत्मिक शल्य-चिकित्सा करता है, हमारे हृदय की गहराइयों में छिपे और बसे लोभ, बेईमानी, घृणा, घमण्ड, स्वार्थ आदि दुर्भावनाओं को प्रकट करता, उन्हें काटता तथा बाहर निकालता है।

   इसलिए जब अगली बार परमेश्वर का वचन आपकी वास्तविकता आपको दिखाए तथा परमेश्वर का पवित्र आत्मा आपको किसी बात के लिए कायल करे तो अपनी आत्मिक-शल्यचिकित्सा के लिए अपने आप को उसे पूर्ण रूप से सौंप दीजिए, उसकी बातों को ध्यान पूर्वक सुनिए और जो कुछ दूर करना है उसे कीजिए जिससे वह अन्दरूनी परिवर्तन के द्वारा आपको वास्तविक रीति से और भी बेहतर एवं आशीशित बना सके। - जो स्टोवैल


जब परमेश्वर आपको अन्दर से नियंत्रित करेगा तब ही आप बाहर से खरे रहेंगे।

हर एक पवित्रशास्‍त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धर्म की शिक्षा के लिये लाभदायक है। ताकि परमेश्वर का जन सिद्ध बने, और हर एक भले काम के लिये तत्‍पर हो जाए। - 2 तिमिथियुस 3:16-17

बाइबल पाठ: योना 4:1-11
Jonah 4:1 यह बात योना को बहुत ही बुरी लगी, और उसका क्रोध भड़का। 
Jonah 4:2 और उसने यहोवा से यह कह कर प्रार्थना की, हे यहोवा जब मैं अपने देश में था, तब क्या मैं यही बात न कहता था? इसी कारण मैं ने तेरी आज्ञा सुनते ही तर्शीश को भाग जाने के लिये फुर्ती की; क्योंकि मैं जानता था कि तू अनुग्रहकारी और दयालु परमेश्वर है, विलम्ब से कोप करने वाला करूणानिधान है, और दु:ख देने से प्रसन्न नहीं होता। 
Jonah 4:3 सो अब हे यहोवा, मेरा प्राण ले ले; क्योंकि मेरे लिये जीवित रहने से मरना ही भला है। 
Jonah 4:4 यहोवा ने कहा, तेरा जो क्रोध भड़का है, क्या वह उचित है? 
Jonah 4:5 इस पर योना उस नगर से निकल कर, उसकी पूरब ओर बैठ गया; और वहां एक छप्पर बना कर उसकी छाया में बैठा हुआ यह देखने लगा कि नगर को क्या होगा? 
Jonah 4:6 तब यहोवा परमेश्वर ने एक रेंड़ का पेड़ लगा कर ऐसा बढ़ाया कि योना के सिर पर छाया हो, जिस से उसका दु:ख दूर हो। योना उस रेंड़ के पेड़ के कारण बहुत ही आनन्दित हुआ। 
Jonah 4:7 बिहान को जब पौ फटने लगी, तब परमेश्वर ने एक कीड़े को भेजा, जिसने रेंड़ का पेड़ ऐसा काटा कि वह सूख गया। 
Jonah 4:8 जब सूर्य उगा, तब परमेश्वर ने पुरवाई बहा कर लू चलाई, और घाम योना के सिर पर ऐसा लगा कि वह मूर्च्छा खाने लगा; और उसने यह कह कर मृत्यु मांगी, मेरे लिये जीवित रहने से मरना ही अच्छा है। 
Jonah 4:9 परमेश्वर ने योना से कहा, तेरा क्रोध, जो रेंड़ के पेड़ के कारण भड़का है, क्या वह उचित है? उसने कहा, हां, मेरा जो क्रोध भड़का है वह अच्छा ही है, वरन क्रोध के मारे मरना भी अच्छा होता। 
Jonah 4:10 तब यहोवा ने कहा, जिस रेंड़ के पेड़ के लिये तू ने कुछ परिश्रम नहीं किया, न उसको बढ़ाया, जो एक ही रात में हुआ, और एक ही रात में नाश भी हुआ; उस पर तू ने तरस खाई है। 
Jonah 4:11 फिर यह बड़ा नगर नीनवे, जिस में एक लाख बीस हजार से अधिक मनुष्य हैं, जो अपने दाहिने बाएं हाथों का भेद नहीं पहिचानते, और बहुत घरेलू पशु भी उस में रहते हैं, तो क्या मैं उस पर तरस न खाऊं?

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 31-33


मंगलवार, 3 सितंबर 2013

आँसू

   छोटे से राष्ट्र हेती में सन 2010 में आए विनाशकारी भूकम्प से हुई बरबादी और जान-माल के नुकसान तथा उसके कारण वहाँ के लोगों द्वारा झेली जाने वाली कठिनाईयों की तसवीरें टेलिविज़न पर हम सब ने देखी हैं और उनसे अभिभूत भी हुए हैं। उन अनेक दिल दहला देने वाली तस्वीरों में से एक थी एक महिला की जो अपने चारों ओर की तबाही को देखकर फूट-फूट कर रो रही थी। उस स्त्री का मस्तिष्क अपने लोगों की उस भयानक त्रासदी को संभाल नहीं पा रहा था, उसका हृदय टूट गया था और परिणामस्वरूप उसके आँसू बहे जा रहे थे। उसकी यह प्रतिक्रीया समझ में आती थी क्योंकि कभी कभी जिस कष्ट का सामना हम करते हैं उसके लिए आँसू ही उचित प्रत्युत्तर होते हैं।

   मैं जब उस तस्वीर को ग़ौर से देख रहा था तो मुझे अपने प्रभु यीशु की अनुकंपा स्मरण हो आई। प्रभु यीशु भी आँसुओं के महत्व को जानते थे, और वे भी रोए थे। लेकिन उनका रोना एक अलग ही प्रकार के विनाश के कारण था - पाप द्वारा लाए गए विनाश के कारण। जब वे अपने पकड़वाए और क्रूस पर चढ़ाए जाने से पहले यरुशलेम की ओर बढ़ रहे थे, उस यरुशलेम शहर की ओर जहाँ परमेश्वर का मन्दिर भी था लेकिन जो अब भ्रष्टाचार और अन्याय जैसे दुराचारों के कारण लोगों को होने वाली परेशानियों तथा तकलीफों से भरा हुआ था, तो प्रभु के आँसू बहने लगे: "जब वह निकट आया तो नगर को देखकर उस पर रोया" (लूका 19:41)। प्रभु यीशु उस नगर के प्रति अपने दुख और वहाँ के लोगों पर तरस आने के कारण रोया।

   आज जब हम अपने आस-पास संसार में अमानुषिकता, पीड़ा तथा पाप को देखते हैं जिसके कारण संसार में विनाश और त्रासदी व्याप्त है, तो हमारा प्रत्युत्तर क्या होता है? यदि हमारे प्रभु यीशु का हृदय संसार की इस दुर्दशा से टूटता है तो क्या हमारा नहीं टूटना चाहिए? जब हम अपने प्रभु की उस पीड़ा को पहचानेंगे तथा अनुभव करेंगे तो उसके समान ही हम भी संसार को पाप की पीड़ा और त्रासदी से छुड़ाने के लिए प्रयास करने वाले बन जाएंगे - वह छुटकारा जो प्रभु यीशु में मिलने वाली पापों की क्षमा के द्वारा समस्त संसार के लिए सेंत-मेंत उपलब्ध है। - बिल क्राउडर


अनुकंपा दूसरों के दुख में उन्हें आराम पहुँचाने हेतु जो भी आवश्य्क हो उसका प्रबंध करती है।

जब वह निकट आया तो नगर को देखकर उस पर रोया। - लूका 19:41

बाइबल पाठ: लूका 19:37-44
Luke 19:37 और निकट आते हुए जब वह जैतून पहाड़ की ढलान पर पहुंचा, तो चेलों की सारी मण्‍डली उन सब सामर्थ के कामों के कारण जो उन्होंने देखे थे, आनन्‍दित हो कर बड़े शब्द से परमेश्वर की स्‍तुति करने लगी।
Luke 19:38 कि धन्य है वह राजा, जो प्रभु के नाम से आता है; स्वर्ग में शान्‍ति और आकाश मण्‍डल में महिमा हो।
Luke 19:39 तब भीड़ में से कितने फरीसी उस से कहने लगे, हे गुरू अपने चेलों को डांट।
Luke 19:40 उसने उत्तर दिया, कि तुम से कहता हूं, यदि ये चुप रहें, तो पत्थर चिल्ला उठेंगे।
Luke 19:41 जब वह निकट आया तो नगर को देखकर उस पर रोया।
Luke 19:42 और कहा, क्या ही भला होता, कि तू; हां, तू ही, इसी दिन में कुशल की बातें जानता, परन्तु अब वे तेरी आंखों से छिप गई हैं।
Luke 19:43 क्योंकि वे दिन तुझ पर आएंगे कि तेरे बैरी मोर्चा बान्‍धकर तुझे घेर लेंगे, और चारों ओर से तुझे दबाएंगे।
Luke 19:44 और तुझे और तेरे बालकों को जो तुझ में हैं, मिट्टी में मिलाएंगे, और तुझ में पत्थर पर पत्थर भी न छोड़ेंगे; क्योंकि तू ने वह अवसर जब तुझ पर कृपा दृष्टि की गई न पहिचाना।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 140-142 
  • 1 कुरिन्थियों 14:1-20