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रविवार, 22 नवंबर 2020

दान


        मेरी सहेली की बहुत लालसा थी कि वह एक उत्सव मनाने के लिए अपने परिवार और मित्र जनों को अपने घर पर साथ मिलकर भोजन करने के लिए एकत्रित करे जिससे वे सब साथ मिलकर उस का समारोह मनाएँ। सभी मेहमानों की भी इच्छा थी कि वे भी साथ एकत्रित हों और उत्सव को साथ मनाएँ। इतने ढेर सारे लोगों के लिए भोजन के इंतज़ाम करने के खर्चे में सभी योगदान देना चाहते थे, जिससे किसी एक पर यह खर्चा भारी न पड़े। इसलिए किसी ने रोटी लाने का प्रस्ताव दिया, तो किसी ने कोई अन्य भोजन सामग्री लाने के लिए कहा। एक मेहमान ऐसी भी थी जो सभी के साथ मिलकर उत्सव मनाना भी चाहती थी, और अपना योगदान भी देना तो चाहती थी, परन्तु उस समय उसे पैसे की तंगी थी, इसलिए वह कुछ खरीद पाने में असमर्थ थी; इसलिए उसने अपने योगदान के लिए मेरे सहेली के घर की सफाई करने को कहा।

        यदि वह कुछ न भी लेकर आती तो भी सभी के साथ उत्सव मनाने के लिए उसका स्वागत होता, किन्तु फिर भी उसने वह देखा जो वह दे सकती थी – अपना समय और कौशल – और उसे अपने योगदान के रूप में सहर्ष देने की इच्छा प्रकट की, और दिया। परमेश्वर के वचन बाइबल में 2 कुरिन्थियों 8 अध्याय में पौलुस द्वारा व्यक्त की गई भावना के पीछे बिलकुल यही मंशा है। कोरिन्थ की मण्डली के लोग कुछ साथी मसीही विश्वासियों को सहायता देना चाहते थे, और पौलुस ने उन्हें प्रोत्साहित किया कि वे अपनी इस इच्छा को निभाएं भी। उसने उनकी इस इच्छा की सराहना की, और कहा कि दान देने की उनकी यह अभिलाषा ही उनकी किसी भी भेंट को, वह चाहे कितनी भी बड़ी अथवा छोटी हो, स्वीकार्य बनाती है (पद 12)।

        बहुधा हम अपने दान की तुलना किसी दूसरे द्वारा दिए गए दान के साथ करने लगते हैं, विशेषकर तब, जब हमारे अपने संसाधन हमें उतना नहीं देने देते हैं, जितना हम देना चाहते हैं। परन्तु परमेश्वर हमारे द्वारा दिए गए दान को भिन्न दृष्टि से देखता है: उसके समक्ष हमारी देने की इच्छा और अपनी सामर्थ्य के अनुसार देने का महत्व है, न कि हमारे द्वारा दिए गए दान की मात्रा का। - कर्स्टन होल्मबर्ग

 

परमेश्वर स्वेच्छा और संपूर्ण मन से दिए गए 

किसी भी मात्रा के दान का आदर करता है।


तब उस [यीशु] ने कहा; मैं तुम से सच कहता हूं कि इस कंगाल विधवा ने सब से बढ़कर डाला है। क्योंकि उन सब ने अपनी अपनी बढ़ती में से दान में कुछ डाला है, परन्तु इस ने अपनी घटी में से अपनी सारी जीविका डाल दी है। - लूका 21:3-4

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 8:1-12

2 कुरिन्थियों 8:1 अब हे भाइयों, हम तुम्हें परमेश्वर के उस अनुग्रह का समाचार देते हैं, जो मकिदुनिया की कलीसियाओं पर हुआ है।

2 कुरिन्थियों 8:2 कि क्लेश की बड़ी परीक्षा में उन के बड़े आनन्द और भारी कंगालपन के बढ़ जाने से उन की उदारता बहुत बढ़ गई।

2 कुरिन्थियों 8:3 और उनके विषय में मेरी यह गवाही है, कि उन्होंने अपनी सामर्थ्य भर वरन सामर्थ्य से भी बाहर मन से दिया।

2 कुरिन्थियों 8:4 और इस दान में और पवित्र लोगों की सेवा में भागी होने के अनुग्रह के विषय में हम से बार बार बहुत बिनती की।

2 कुरिन्थियों 8:5 और जैसी हम ने आशा की थी, वैसी ही नहीं, वरन उन्होंने प्रभु को, फिर परमेश्वर की इच्छा से हम को भी अपने लिए दे दिया।

2 कुरिन्थियों 8:6 इसलिये हम ने तीतुस को समझाया, कि जैसा उसने पहिले आरम्भ किया था, वैसा ही तुम्हारे बीच में इस दान के काम को पूरा भी कर ले।

2 कुरिन्थियों 8:7 सो जैसे हर बात में अर्थात विश्वास, वचन, ज्ञान और सब प्रकार के यत्न में, और उस प्रेम में, जो हम से रखते हो, बढ़ते जाते हो, वैसे ही इस दान के काम में भी बढ़ते जाओ।

2 कुरिन्थियों 8:8 मैं आज्ञा की रीति पर तो नहीं, परन्तु औरों के उत्साह से तुम्हारे प्रेम की सच्चाई को परखने के लिये कहता हूं।

2 कुरिन्थियों 8:9 तुम हमारे प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह जानते हो, कि वह धनी हो कर भी तुम्हारे लिये कंगाल बन गया ताकि उसके कंगाल हो जाने से तुम धनी हो जाओ।

2 कुरिन्थियों 8:10 और इस बात में मेरा विचार यही है, क्योंकि यह तुम्हारे लिये अच्छा है; जो एक वर्ष से न तो केवल इस काम को करने ही में, परन्तु इस बात के चाहने में भी प्रथम हुए थे।

2 कुरिन्थियों 8:11 इसलिये अब यह काम पूरा करो; कि जैसा इच्छा करने में तुम तैयार थे, वैसा ही अपनी अपनी पूंजी के अनुसार पूरा भी करो।

2 कुरिन्थियों 8:12 क्योंकि यदि मन की तैयारी हो तो दान उसके अनुसार ग्रहण भी होता है जो उसके पास है न कि उसके अनुसार जो उसके पास नहीं।

 

एक साल में बाइबल: 

  • यहेजकेल 18-19
  • याकूब 4

बुधवार, 20 जुलाई 2016

मात्रा या माप


   मसीही सेवकाई के भ्रमण के समयों में मुझे अनेकों ऐसे लोगों से मिलने और बात करने के अवसर मिले हैं जो छोटे-छोटे कार्यों द्वारा छोटे स्थानों पर सेवकाई कर रहे हैं। अकसर ये लोग एकाकीपन से ग्रसित रहते हैं, उन्हें लगता है कि उनकी वह सेवकाई बहुत गौण है, उसका कोई विशेष महत्व नहीं है। जब मैं उन लोगों की बातें सुनता हूँ तो मुझे सुप्रसिद्ध मसीही लेखक सी. एस. ल्यूईस की पुस्तक Out of the Silent Planet में एक स्वर्गदूत द्वारा कही गई बात: "मेरे लोगों के पास एक नियम है कि वे कभी मात्रा या माप की बातें आप से नहीं करेंगे...ऐसा करने से आप महत्वहीन को आदर देने लगते हैं और महत्वपूर्ण को नज़रन्दाज़ कर देते हैं" स्मरण हो आती है।

   हमारे समाज की धारणाएं कभी-कभी हम से कहती है कि जितना अधिक या जितना बड़ा उतना ही बेहतर - अर्थात आकार ही सफलता का मापदण्ड है। इस धारणा का सामना करने, इसको अनदेखा करने, इसे बदलने के लिए बहुत सामर्थ चाहिए, विशेषकर किसी ऐसे व्यक्ति को जो किसी छोटे से स्थान पर किसी छोटे प्रतीत होने वाले कार्य द्वारा सेवकाई में मेहनत कर रहा हो। ऐसे में हमें ध्यान बनाए रखना है कि कहीं हम भी तो उसे जो महत्वपूर्ण है, नज़रन्दाज़ तो नहीं कर दे रहे हैं।

   ऐसा नहीं है कि संख्या का कोई महत्व ही नहीं है। संख्या अननतकाल की आवश्यकता रखने वाले जीवित मनुष्यों को दर्शाती है; और हम सब को यह प्रार्थना करते रहना चाहिए कि अधिक से अधिक लोग प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास लाकर, उस से पापों की क्षमा माँगकर, सेंत-मेंत में उद्धार पाएं और परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करें; लेकिन हमारे कार्य और उसके महत्व का माप संख्याएं नहीं हैं।

   प्रभु परमेश्वर ने हमें उसके लिए करे गए कार्य की मात्रा में, या फिर उस कार्य में संलग्न लोगों की संख्या में संतुष्टि प्राप्त करने के लिए नहीं बुलाया है; वरन उसने हमें बुलाया है कि हम विश्वासयोयता के साथ उसके द्वारा हमें दिए कार्य को उसके लिए पूरा करते रहें। हमारे महान और सर्वसामर्थी प्रभु परमेश्वर की सेवा, उसके द्वारा प्रदान करी गई सामर्थ में होकर करना ही हमारे लिए महानता है - वह सेवा चाहे मात्रा या माप में कैसी ही क्यों ना हो। - डेविड रोपर


जो कोई परमेश्वर की सेवकाई को परमेश्वर की इच्छानुसार करता है, 
वह परमेश्वर की दृष्टि में महत्वपूर्ण है।

क्योंकि किस ने छोटी बातों के दिन तुच्छ जाना है? यहोवा अपनी इन सातों आंखों से सारी पृथ्वी पर दृष्टि कर के साहुल को जरूब्बाबेल के हाथ में देखेगा, और आनन्दित होगा। - ज़कर्याह 4:10

बाइबल पाठ: यशायाह 49:1-6
Isaiah 49:1 हे द्वीपो, मेरी और कान लगाकर सुनो; हे दूर दूर के राज्यों के लोगों, ध्यान लगा कर मेरी सुनो! यहोवा ने मुझे गर्भ ही में से बुलाया, जब मैं माता के पेट में था, तब ही उसने मेरा नाम बताया। 
Isaiah 49:2 उसने मेरे मुंह को चोखी तलवार के समान बनाया और अपने हाथ की आड़ में मुझे छिपा रखा; उसने मुझ को चमकिला तीर बनाकर अपने तर्कश में गुप्त रखा। 
Isaiah 49:3 और मुझ से कहा, तू मेरा दास इस्राएल है, मैं तुझ में अपनी महिमा प्रगट करूंगा। 
Isaiah 49:4 तब मैं ने कहा, मैं ने तो व्यर्थ परिश्रम किया, मैं ने व्यर्थ ही अपना बल खो दिया है; तौभी निश्चय मेरा न्याय यहोवा के पास है और मेरे परिश्रम का फल मेरे परमेश्वर के हाथ में है।
Isaiah 49:5 और अब यहोवा जिसने मुझे जन्म ही से इसलिये रख कि मैं उसका दास हो कर याकूब को उसकी ओर फेर ले आऊं अर्थात इस्राएल को उसके पास इकट्ठा करूं, क्योंकि यहोवा की दृष्टि में मैं आदरयोग्य हूं और मेरा परमेश्वर मेरा बल है, 
Isaiah 49:6 उसी ने मुझ से यह भी कहा है, यह तो हलकी सी बात है कि तू याकूब के गोत्रों का उद्धार करने और इस्राएल के रक्षित लोगों को लौटा ले आने के लिये मेरा सेवक ठहरे; मैं तुझे अन्यजातियों के लिये ज्योति ठहराऊंगा कि मेरा उद्धार पृथ्वी की एक ओर से दूसरी ओर तक फैल जाए।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 26-28
  • प्रेरितों 22