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शुक्रवार, 14 अप्रैल 2017

उन्मुक्त तथा आनन्दित


   कैनडा के अंतरिक्ष यात्री क्रिस हैडफील्ड ने अंतरिक्ष में अपने प्रक्षेपण के अनुभव के बारे में बताते हुए कहा, जब उन्हें ले जाने वाला रॉकेट अन्तराष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन की ओर तेज़ गति से चला तो उन पर पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के खिंचाव का बल इतना बढ़ गया कि उनके लिए साँस लेना कठिन हो गया। इस बल के कारण साँस ठीक से ना ले पाने के कारण जैसे ही क्रिस को लगने लगा कि अब वे बेसुध हो जाएंगे, रॉकेट पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव के बल से बाहर निकल कर अन्तरिक्ष की भारहीन स्थिति में पहुँच गया। ऐसा होते ही, बल से मुक्त उस स्थिति आते ही, बेहोश होने की बजाए क्रिस ने हँसना आरंभ कर दिया।

   उनके इस विवरण ने मुझे अपनी माता की मृत्यु तक आने के दिनों के बारे में याद दिलाया। उनका जीवन और बोझिल होता चला जा रहा था, यहाँ तक कि उनके लिए साँस लेना भी दूभर हो रहा था। फिर वे अपनी पीड़ा से मुक्त होकर स्वर्ग की "भारहीनता" में पहुँच गईं। मैं सोचता हूँ कि पृथ्वी की पीड़ा से निकलकर जैसे ही वे प्रभु यीशु के सम्मुख पहुँची होंगी, वहाँ अपनी पहली उन्मुक्त साँस को लेते ही वे भी आनदित होकर हँसने लगी होंगी।

   इस शुक्रवार को, जिसे शुभ शुक्रवार कहा जाता है, कुछ ऐसा ही प्रभु यीशु के साथ भी हुआ था। परमेश्वर ने सारे संसार के सभी पापों - पूर्व, वर्तमान और भविष्य को, क्रूस पर टंगे हुए प्रभु यीशु पर लाद दिया, और पाप के इस बोझ के नीचे उनके लिए साँस लेना कठिन हो गया। परमेश्वर के वचन बाइबल में अपने विषय में लिखी गई सभी बातों को पूरा करने के पश्चात, "यीशु ने बड़े शब्द से पुकार कर कहा; हे पिता, मैं अपनी आत्मा तेरे हाथों में सौंपता हूं: और यह कहकर प्राण छोड़ दिए" (लूका 23:46)। हमारे पापों के लिए अपना जीवन त्यागने के बाद प्रभु ने परमेश्वर पिता से अपना जीवन वापस प्राप्त किया और मृतकों में से जी उठा; और अब उन पर पाप और मृत्यु का कोई अधिकार या प्रभाव नहीं है। ना केवल प्रभु पर, वरन जो साधारण विश्वास के साथ क्रूस पर दिए गए उनके बलिदान को स्वीकार करके, पापों से पश्चाताप करके अपना जीवन उन्हें समर्पित कर देते हैं, क्रूस पर उनके द्वारा पापों के लिए चुकाए गए दाम को स्वीकार कर लेते हैं, अर्थात प्रभु यीशु के चेले होना स्वीकार कर लेते हैं, उन पर भी अब पाप और म्रुत्यु का कोई अधिकार नहीं रह जाता है।

   जितनों ने स्वेच्छा से प्रभु यीशु को अपना उध्दारकर्ता स्वीकार किया है, उसके अनुयायी, उसके चेले हो गए हैं, एक दिन वे भी इस संसार की पीड़ा और परिस्थितियों के बोझ से मुक्त होकर प्रभु के साथ होंगे, और उन्मुक्त तथा आनन्दित होकर प्रभु के साथ अनन्तकाल तक रहेंगे। - जूली ऐकैरमैन लिंक


प्रभु यीशु का बलिदान स्वर्ग के आनन्द की ओर संकेत करता है।

और विश्वास के कर्ता और सिद्ध करने वाले यीशु की ओर ताकते रहें; जिसने उस आनन्द के लिये जो उसके आगे धरा था, लज्ज़ा की कुछ चिन्‍ता न कर के, क्रूस का दुख सहा; और सिंहासन पर परमेश्वर के दाहिने जा बैठा। इसलिये उस पर ध्यान करो, जिसने अपने विरोध में पापियों का इतना वाद-विवाद सह लिया कि तुम निराश हो कर हियाव न छोड़ दो। - इब्रानियों 12:2-3

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 5:1-8
2 Corinthians 5:1 क्योंकि हम जानते हैं, कि जब हमारा पृथ्वी पर का डेरा सरीखा घर गिराया जाएगा तो हमें परमेश्वर की ओर से स्वर्ग पर एक ऐसा भवन मिलेगा, जो हाथों से बना हुआ घर नहीं परन्तु चिरस्थाई है। 
2 Corinthians 5:2 इस में तो हम कराहते, और बड़ी लालसा रखते हैं; कि अपने स्‍वर्गीय घर को पहिन लें। 
2 Corinthians 5:3 कि इस के पहिनने से हम नंगे न पाए जाएं। 
2 Corinthians 5:4 और हम इस डेरे में रहते हुए बोझ से दबे कराहते रहते हैं; क्योंकि हम उतारना नहीं, वरन और पहिनना चाहते हैं, ताकि वह जो मरनहार है जीवन में डूब जाए। 
2 Corinthians 5:5 और जिसने हमें इसी बात के लिये तैयार किया है वह परमेश्वर है, जिसने हमें बयाने में आत्मा भी दिया है। 
2 Corinthians 5:6 सो हम सदा ढाढ़स बान्‍धे रहते हैं और यह जानते हैं; कि जब तक हम देह में रहते हैं, तब तक प्रभु से अलग हैं। 
2 Corinthians 5:7 क्योंकि हम रूप को देखकर नहीं, पर विश्वास से चलते हैं। 
2 Corinthians 5:8 इसलिये हम ढाढ़स बान्‍धे रहते हैं, और देह से अलग हो कर प्रभु के साथ रहना और भी उत्तम समझते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 25-26
  • लूका 12:32-59


बुधवार, 11 दिसंबर 2013

अर्थपूर्ण


   एक लोकप्रीय वाक्य है जिसे मैं अकसर टी-शर्ट्स पर छपा हुआ तथा कला एवं सजावट की वस्तुओं पर लिखा हुआ देखती हूँ; वह वाक्य है: "हमारे जीवन का मूल्याँकन हमारी साँसों की गिनती से नहीं वरन उन बातों से है जो हमें विस्मय से साँस रोक लेने पर बाध्य कर देती हैं।" यह वाक्य आकर्षक तो है लेकिन मेरा मानना है कि यह सत्य नहीं है।

   यदि हम जीवन का मूल्याँकन केवल उन ही बातों के आधार पर करेंगे जो हमारे लिए विस्मयकारी हैं तो फिर हम सामान्य और साधारण पलों के महत्व को खो देंगे। सामान्य बातें जैसे खाना, सोना, साँस लेना आदि ऐसी हैं जिन्हें हम बिना विचार किए लगातार करते रहते हैं; लेकिन वे "सामान्य" या महत्वहीन नहीं है। हमारा हर साँस लेना, भोजन का प्रत्येक कौर लेना आदि सब बहुत विशेष और अद्भुत कार्य हैं - यह हमें तब समझ आता है जब हम या तो इनकी बारीकियों का अध्ययन करें या फिर तब, जब किसी कारणवश अचानक ही इनमें से कोई बाधित होने लगे अथवा रुक जाए। वास्त्व में प्रत्येक साँस लेना, विस्मय में आकर साँस रोक लेने से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

   राजा सुलेमान के पास विस्मय करने के बहुत ढेर अवसर रहे होंगे, क्योंकि उसने अपने लिए लिखा: "और जितनी वस्तुओं के देखने की मैं ने लालसा की, उन सभों को देखने से मैं न रूका; मैं ने अपना मन किसी प्रकार का आनन्द भोगने से न रोका क्योंकि मेरा मन मेरे सब परिश्रम के कारण आनन्दित हुआ; और मेरे सब परिश्रम से मुझे यही भाग मिला" (सभोपदेशक 2:10)। लेकिन अन्ततः उसका निष्कर्ष इन सब के बारे में था कि "...सब कुछ व्यर्थ और वायु को पकड़ना है" (सभोपदेशक 2:17)।

   सुलेमान का अनुभव हमें स्मरण दिलाता है कि "सामान्य" बातों में आनन्द ढूंढना और आनन्दित होना महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे वास्तव में अद्भुत होती हैं। बड़ा सदा ही बेहतर नहीं होता; अधिक हमेशा उन्नत नहीं होता और हमारा व्यस्त रहना हमें अधिक महत्वपूर्ण नहीं बना देता। बजाए विस्मयकारी क्षणों को ढूंढने में समय बिताने के, हमें हर क्षण और हर साँस को परमेश्वर से मिले उपहार के रूप में स्वीकार करके उसका परमेश्वर की महिमा और आदर के लिए भरपूर उपयोग करना चाहिए, उसे अर्थपूर्ण बना लेना चाहिए; और यह हमारे जीवन को भी अर्थपूर्ण कर देगा। - जूली ऐकैरमैन लिंक


प्रत्येक साँस का सुचारू रीति से लेना विस्मय में साँस रोक लेने से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

जिस परमेश्वर ने पृथ्वी और उस की सब वस्‍तुओं को बनाया, वह स्वर्ग और पृथ्वी का स्‍वामी हो कर हाथ के बनाए हुए मन्‍दिरों में नहीं रहता। न किसी वस्तु का प्रयोजन रखकर मनुष्यों के हाथों की सेवा लेता है, क्योंकि वह तो आप ही सब को जीवन और स्‍वास और सब कुछ देता है। - प्रेरितों 17:24-25

बाइबल पाठ: सभोपदेशक 1:1-18
Ecclesiastes 1:1 यरूशलेम के राजा, दाऊद के पुत्र और उपदेशक के वचन। 
Ecclesiastes 1:2 उपदेशक का यह वचन है, कि व्यर्थ ही व्यर्थ, व्यर्थ ही व्यर्थ! सब कुछ व्यर्थ है। 
Ecclesiastes 1:3 उस सब परिश्रम से जिसे मनुष्य धरती पर करता है, उसको क्या लाभ प्राप्त होता है? 
Ecclesiastes 1:4 एक पीढ़ी जाती है, और दूसरी पीढ़ी आती है, परन्तु पृथ्वी सर्वदा बनी रहती है। 
Ecclesiastes 1:5 सूर्य उदय हो कर अस्त भी होता है, और अपने उदय की दिशा को वेग से चला जाता है। 
Ecclesiastes 1:6 वायु दक्खिन की ओर बहती है, और उत्तर की ओर घूमती जाती है; वह घूमती और बहती रहती है, और अपने चक्करों में लौट आती है। 
Ecclesiastes 1:7 सब नदियां समुद्र में जा मिलती हैं, तौभी समुद्र भर नहीं जाता; जिस स्थान से नदियां निकलती हैं; उधर ही को वे फिर जाती हैं। 
Ecclesiastes 1:8 सब बातें परिश्रम से भरी हैं; मनुष्य इसका वर्णन नहीं कर सकता; न तो आंखें देखने से तृप्त होती हैं, और न कान सुनने से भरते हैं। 
Ecclesiastes 1:9 जो कुछ हुआ था, वही फिर होगा, और जो कुछ बन चुका है वही फिर बनाया जाएगा; और सूर्य के नीचे कोई बात नई नहीं है। 
Ecclesiastes 1:10 क्या ऐसी कोई बात है जिसके विषय में लोग कह सकें कि देख यह नई है? यह तो प्राचीन युगों में वर्तमान थी। 
Ecclesiastes 1:11 प्राचीन बातों का कुछ स्मरण नहीं रहा, और होने वाली बातों का भी स्मरण उनके बाद होने वालों को न रहेगा।
Ecclesiastes 1:12 मैं उपदेशक यरूशलेम में इस्राएल का राजा था। 
Ecclesiastes 1:13 और मैं ने अपना मन लगाया कि जो कुछ सूर्य के नीचे किया जाता है, उसका भेद बुद्धि से सोच सोचकर मालूम करूं; यह बड़े दु:ख का काम है जो परमेश्वर ने मनुष्यों के लिये ठहराया है कि वे उस में लगें। 
Ecclesiastes 1:14 मैं ने उन सब कामों को देखा जो सूर्य के नीचे किए जाते हैं; देखो वे सब व्यर्थ और मानो वायु को पकड़ना है। 
Ecclesiastes 1:15 जो टेढ़ा है, वह सीधा नहीं हो सकता, और जितनी वस्तुओं में घटी है, वे गिनी नहीं जातीं।
Ecclesiastes 1:16 मैं ने मन में कहा, देख, जितने यरूशलेम में मुझ से पहिले थे, उन सभों से मैं ने बहुत अधिक बुद्धि प्राप्त की है; और मुझ को बहुत बुद्धि और ज्ञान मिल गया है। 
Ecclesiastes 1:17 और मैं ने अपना मन लगाया कि बुद्धि का भेद लूं और बावलेपन और मूर्खता को भी जान लूं। मुझे जान पड़ा कि यह भी वायु को पकड़ना है।
Ecclesiastes 1:18 क्योंकि बहुत बुद्धि के साथ बहुत खेद भी होता है, और जो अपना ज्ञान बढ़ाता है वह अपना दु:ख भी बढ़ाता है।

एक साल में बाइबल: 
  • होशे 5-8 
  • प्रकाशितवाक्य 2