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रविवार, 21 जून 2020

समय


     ऑस गिन्निस ने अपनी पुस्तक Impossible People में एक अफ्रीकी कहावत को उद्धृत किया; वह कहावत है, “पश्चिम के लोगों के पास घड़ियाँ होती है; अफ्रीकियों के पास समय होता है।” इससे मैं विचार करने लगा कि कितनी ही बार मैंने किसी निवेदन को ठुकराते हुए कहा है “मेरे पास समय नहीं है।” मैं सोचने लगा कि मेरे जीवन में निर्धारित कार्यक्रम, और कार्यों को पूरा करने के निर्धारित समय कितने महत्वपूर्ण रहते हैं, वे मुझे नियंत्रित किए रहते हैं, किसी अत्यावश्यक को करना कैसा अत्याचार प्रतीत होता है।

     परमेश्वर के वचन बाइबल में मूसा ने भजन 90 में प्रार्थन की, “हम को अपने दिन गिनने की समझ दे कि हम बुद्धिमान हो जाएं” (पद 12)। और समय के विषय पौलुस ने लिखा, “इसलिये ध्यान से देखो, कि कैसी चाल चलते हो; निर्बुद्धियों के समान नहीं पर बुद्धिमानों के समान चलो। और अवसर को बहुमूल्य समझो, क्योंकि दिन बुरे हैं” (इफिसियों 5:15-16)।

     मेरा मानना है कि मूसा और पौलुस इस बात में मुझ से सहमत होंगे कि हमारे द्वारा समय के सदुपयोग का अर्थ केवल घड़ी देखते रहना ही नहीं है। संभव है कि परिस्थिति की माँग हो कि हम एक निर्धारित समय सीमा में कार्य को पूरा कर लें, या फिर, वह हम से यह माँग करे कि हम किसी और को अपने समय को भेंट दें।

     सँसार के हमारे जीवन में मसीह यीशु के लिए प्रभावी और उपयोगी होने के लिए हमारे पास थोड़ा ही समय उपलब्ध है, और हमें उस समय का सदुपयोग करना है, उसे यथासंभव सही बातों में लगाना है। ऐसा करने का अर्थ कभी यह भी हो सकता है कि हम अपनी घड़ियों और निर्धारित कार्यों की सूची की अनदेखी करके, किसी ऐसे व्यक्ति के साथ जिसे प्रभु हमारे जीवन में लाया है, कुछ समय बिताएँ और मसीह यीशु के धैर्य तथा प्रेम को व्यावाहरिक रीति से उसके साथ प्रकट करें।

     हम जब समय की सीमाओं से बाहर अनंत मसीह की सामर्थ्य और अनुग्रह में जीवन व्यतीत करते हैं, हम अनन्तकाल के लिए अपने समय को प्रभावी बनाते हैं। - बिल क्राउडर

 

समय का प्रबंधन घड़ी देखकर कार्य करना नहीं है, 

वरन हमारे पास जो समय है उसका सदुपयोग करना है।


जो काम तुझे मिले उसे अपनी शक्ति भर करना, क्योंकि अधोलोक में जहां तू जाने वाला है, न काम न युक्ति न ज्ञान और न बुद्धि है। - सभोपदेशक 9:10

बाइबल पाठ: भजन 90:9-17

भजन संहिता 90:9 क्योंकि हमारे सब दिन तेरे क्रोध में बीत जाते हैं, हम अपने वर्ष शब्द के समान बिताते हैं।

भजन संहिता 90:10 हमारी आयु के वर्ष सत्तर तो होते हैं, और चाहे बल के कारण अस्सी वर्ष के भी हो जाएं, तौभी उनका घमण्ड केवल नष्ट और शोक ही शोक है; क्योंकि वह जल्दी कट जाती है, और हम जाते रहते हैं।

भजन संहिता 90:11 तेरे क्रोध की शक्ति को और तेरे भय के योग्य तेरे रोष को कौन समझता है?

भजन संहिता 90:12 हम को अपने दिन गिनने की समझ दे कि हम बुद्धिमान हो जाएं।

भजन संहिता 90:13 हे यहोवा लौट आ! कब तक? और अपने दासों पर तरस खा!

भजन संहिता 90:14 भोर को हमें अपनी करूणा से तृप्त कर, कि हम जीवन भर जयजयकार और आनन्द करते रहें।

भजन संहिता 90:15 जितने दिन तू हमें दु:ख देता आया, और जितने वर्ष हम क्लेश भोगते आए हैं उतने ही वर्ष हम को आनन्द दे।

भजन संहिता 90:16 तेरा काम तेरे दासों को, और तेरा प्रताप उनकी सन्तान पर प्रगट हो।

भजन संहिता 90:17 और हमारे परमेश्वर यहोवा की मनोहरता हम पर प्रगट हो, तू हमारे हाथों का काम हमारे लिये दृढ़ कर, हमारे हाथों के काम को दृढ़ कर।    

 

एक साल में बाइबल: 

  • एस्तेर 3-5
  • प्रेरितों 5:22-42


बुधवार, 18 मई 2016

सूचि


   मेरे एक मित्र ने हाल ही में मुझे बताया कि उसने अपनी बहन को यूरोप की यात्रा करवा कर, उसने अपनी मृत्युपूर्व इच्छाओं की सूचि में से एक और पूरी कर ली है। मेरा वह मित्र स्वयं तो अनेक बार यूरोप जा चुका था, लेकिन उसकी बहन कभी यूरोप नहीं गई थी, और वह चाहता था कि उसकी बहन भी यूरोप देख सके। उस मित्र की इच्छा सूचि में यह निःस्वार्थ इच्छा का होना मेरे लिए विस्मयकारी था; इसने मुझे विचार करने पर बाध्य किया कि मेरी इच्छाएं कितनी अपने आप पर और कितनी दूसरों पर केंद्रित होती हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में रोम के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में प्रेरित पौलुस ने हम मसीही विश्वासियों को परमेश्वर द्वारा दिए गए वरदानों तथा उनके सदुपयोग के बारे में निर्देश दिए (रोमियों 12)। यदि हम इन वरदानों पर थोड़ा विचार करें तो पाएंगे कि यह सभी वरदान दूसरों की भलाई से संबंधित हैं; उदाहरणस्वरूप, सिखाने का वरदान शिक्षक की ही नहीं वरन उसके विद्यार्थियों की उन्नति और भलाई के लिए है। इसी प्रकार पद 6 से 8 में उल्लेखित अन्य वरदानों के साथ भी यही बात है। पौलुस ने परमेश्वर की इस उदार भावना को हमारे अनुसरण के लिए पद 10 में रेखंकित किया: "भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर दया रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो।"

   पौलुस ने ना केवल इस रवैये को अपनी शिक्षाओं में कहा, वरन उसने इसे अपने जीवन में जी कर भी दिखाया; उसने औरों को अपने साथ अपनी मसीही सेवकाई में सम्मिलित किया, उन्हें सिखाया और आने वाली मसीही विश्वासियों की पीढ़ी की भलाई के लिए उन्हें तैयार किया। साथ ही पौलुस ने उदारता, आतिथ्य, क्षमा, अनुकंपा आदि को अपने दैनिक व्यवहार का एक अभिन्न अंग बनाकर अपने साथियों तथा हमारे लिए एक सजीव उदाहरण भी प्रस्तुत किया।

   जीवन के हमारे उद्देश्यों की सूचि में एक अनिवार्य बात होनी चाहिए, परमेश्वर द्वारा हमें दिए गए वरदानों का दूसरों की भलाई तथा परमेश्वर की महिमा के लिए सदुपयोग। - डेविड मैक्कैसलैंड


स्वस्थ आत्मिक जीवन के लिए नम्रता और दूसरों की भलाई का अभ्यास करते रहें।

विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो। हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे। जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो। - फिलिप्पियों 2:3-5

बाइबल पाठ: रोमियों 12
Romans 12:1 इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान कर के चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है। 
Romans 12:2 और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो। 
Romans 12:3 क्योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूं, कि जैसा समझना चाहिए, उस से बढ़कर कोई भी अपने आप को न समझे पर जैसा परमेश्वर ने हर एक को परिमाण के अनुसार बांट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे। 
Romans 12:4 क्योंकि जैसे हमारी एक देह में बहुत से अंग हैं, और सब अंगों का एक ही सा काम नहीं। 
Romans 12:5 वैसा ही हम जो बहुत हैं, मसीह में एक देह हो कर आपस में एक दूसरे के अंग हैं। 
Romans 12:6 और जब कि उस अनुग्रह के अनुसार जो हमें दिया गया है, हमें भिन्न भिन्न वरदान मिले हैं, तो जिस को भविष्यद्वाणी का दान मिला हो, वह विश्वास के परिमाण के अनुसार भविष्यद्वाणी करे। 
Romans 12:7 यदि सेवा करने का दान मिला हो, तो सेवा में लगा रहे, यदि कोई सिखाने वाला हो, तो सिखाने में लगा रहे। 
Romans 12:8 जो उपदेशक हो, वह उपदेश देने में लगा रहे; दान देने वाला उदारता से दे, जो अगुवाई करे, वह उत्साह से करे, जो दया करे, वह हर्ष से करे। 
Romans 12:9 प्रेम निष्कपट हो; बुराई से घृणा करो; भलाई में लगे रहो। 
Romans 12:10 भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर दया रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो। 
Romans 12:11 प्रयत्न करने में आलसी न हो; आत्मिक उन्माद में भरो रहो; प्रभु की सेवा करते रहो। 
Romans 12:12 आशा में आनन्दित रहो; क्लेश में स्थिर रहो; प्रार्थना में नित्य लगे रहो। 
Romans 12:13 पवित्र लोगों को जो कुछ अवश्य हो, उस में उन की सहायता करो; पहुनाई करने में लगे रहो। 
Romans 12:14 अपने सताने वालों को आशीष दो; आशीष दो श्राप न दो। 
Romans 12:15 आनन्द करने वालों के साथ आनन्द करो; और रोने वालों के साथ रोओ। 
Romans 12:16 आपस में एक सा मन रखो; अभिमानी न हो; परन्तु दीनों के साथ संगति रखो; अपनी दृष्टि में बुद्धिमान न हो। 
Romans 12:17 बुराई के बदले किसी से बुराई न करो; जो बातें सब लोगों के निकट भली हैं, उन की चिन्ता किया करो। 
Romans 12:18 जहां तक हो सके, तुम अपने भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो। 
Romans 12:19 हे प्रियो अपना पलटा न लेना; परन्तु क्रोध को अवसर दो, क्योंकि लिखा है, पलटा लेना मेरा काम है, प्रभु कहता है मैं ही बदला दूंगा। 
Romans 12:20 परन्तु यदि तेरा बैरी भूखा हो तो उसे खाना खिला; यदि प्यासा हो, तो उसे पानी पिला; क्योंकि ऐसा करने से तू उसके सिर पर आग के अंगारों का ढेर लगाएगा। 
Romans 12:21 बुराई से न हारो परन्तु भलाई से बुराई का जीत लो।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 4-6
  • यूहन्ना 6:1-21


बुधवार, 15 अप्रैल 2015

धन संबंधित


   मैरिलिन और स्टीवन के विवाह को कुछ ही वर्ष हुए थे, और उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं चल रही थी, घर चलाने के लिए पैसे जुटा पाना कठिन होता था। फिर भी अपने बिस्तर पर लगी और जीर्ण हो चली चादर को देखकर आखिरकर मैरिलिन ने उसके स्थान पर नई चादर ले कर लगाने का निर्णय लिया। क्योंकि चादर खरीदने के लिए पैसे नहीं थे इसलिए उसने यह कार्य क्रेडिट-कार्ड द्वारा करने का विचार किया, इस आशा में कि आते समय कहीं से कुछ पैसों का इंतिज़ाम हो ही जाएगा और वह क्रेडिट-कार्ड पर लिया गया यह ऋण चुका देगी।

   खरीदने जाने से पहले वह अपनी दिनचर्या के अनुसार परमेश्वर के बारे में मनन करने में सहायता करने वाले पाठ को लेकर बैठी, जो उसे परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन 22:27 पर ले गया, जिसे पढ़कर वह चकित हुई, क्योंकि वहाँ लिखा था, "यदि भर देने के लिये तेरे पास कुछ न हो, तो वह क्यों तेरे नीचे से खाट खींच ले जाए?" (नीतिवचन 22:27); परमेश्वर के वचन से मिली अगुवाई का ध्यान कर के मैरिलिन ने उधार पर नई चादर खरीदने का अपना निर्णय बदल दिया।

   हम अपने पैसे को कैसे खर्च करते हैं यह हमारे तथा हमारी सब आशीषों के स्त्रोत, परमेश्वर, के बीच का व्यक्तिगत मामला है। कभी कभी सही निर्णय लेना हमें कठीन लग सकता है, लेकिन हमारे परमेश्वर पिता ने हमें असहाय नहीं छोड़ा है; उसने अपने जीवते वचन बाइबल में हमारे लिए अनेक निर्देश दिए हैं, जैसे कि: "अपनी संपत्ति के द्वारा और अपनी भूमि की पहिली उपज दे देकर यहोवा की प्रतिष्ठा करना" (नीतिवचन 3:9); तथा "कोई मनुष्य दो स्‍वामियों की सेवा नहीं कर सकता, क्योंकि वह एक से बैर ओर दूसरे से प्रेम रखेगा, वा एक से मिला रहेगा और दूसरे को तुच्‍छ जानेगा; “तुम परमेश्वर और धन दोनों की सेवा नहीं कर सकते” " (मत्ती 6:24)।

   धन के प्रयोग से संबंधित इन निर्देषों के अतिरिक्त हमें और भी निर्देष मिलते हैं, जैसे: "और उसने उन से कहा, चौकस रहो, और हर प्रकार के लोभ से अपने आप को बचाए रखो: क्योंकि किसी का जीवन उस की संपत्ति की बहुतायत से नहीं होता" (लूका12:15)। और, "धनी, निर्धन लोगों पर प्रभुता करता है, और उधार लेने वाला उधार देने वाले का दास होता है" (नीतिवचन 22:7); तथा तिमुथियुस में हम धनवानों के लिए लिखा पाते हैं, "भलाई करें, और भले कामों में धनी बनें, और उदार और सहायता देने में तत्‍पर हों" (1 तिमुथियुस 6:18)।

   धन सभी के लिए एक महत्वपूर्ण विषय है और परमेश्वर ने, जो हमारी आवश्यकताओं को पूरा करने का वायदा करता है, धन के सही एवं उपयुक्त उपयोग से संबंधित अनेक शिक्षाएं अपने वचन में हमारे लिए रख छोड़ी हैं जिससे हम धन तथा उसके उपयोग से परमेश्वर की महीमा कर सकें। - डेव एग्नर

कभी पैसे को अपना परमेश्वर ना बनने दें।

इसलिये पहिले तुम परमेश्वर के राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी। - मत्ती 6:33

बाइबल पाठ: 1 तिमुथियुस 6:6-18
1 Timothy 6:6 पर सन्‍तोष सहित भक्ति बड़ी कमाई है। 
1 Timothy 6:7 क्योंकि न हम जगत में कुछ लाए हैं और न कुछ ले जा सकते हैं। 
1 Timothy 6:8 और यदि हमारे पास खाने और पहिनने को हो, तो इन्‍हीं पर सन्‍तोष करना चाहिए। 
1 Timothy 6:9 पर जो धनी होना चाहते हैं, वे ऐसी परीक्षा, और फंदे और बहुतेरे व्यर्थ और हानिकारक लालसाओं में फंसते हैं, जो मनुष्यों को बिगाड़ देती हैं और विनाश के समुद्र में डूबा देती हैं। 
1 Timothy 6:10 क्योंकि रूपये का लोभ सब प्रकार की बुराइयों की जड़ है, जिसे प्राप्त करने का प्रयत्न करते हुए कितनों ने विश्वास से भटक कर अपने आप को नाना प्रकार के दुखों से छलनी बना लिया है।
1 Timothy 6:11 पर हे परमेश्वर के जन, तू इन बातों से भाग; और धर्म, भक्ति, विश्वास, प्रेम, धीरज, और नम्रता का पीछा कर। 
1 Timothy 6:12 विश्वास की अच्छी कुश्‍ती लड़; और उस अनन्त जीवन को धर ले, जिस के लिये तू बुलाया, गया, और बहुत गवाहों के साम्हने अच्छा अंगीकार किया था। 
1 Timothy 6:13 मैं तुझे परमेश्वर को जो सब को जीवित रखता है, और मसीह यीशु को गवाह कर के जिसने पुन्‍तियुस पीलातुस के साम्हने अच्छा अंगीकार किया, यह आज्ञा देता हूं, 
1 Timothy 6:14 कि तू हमारे प्रभु यीशु मसीह के प्रगट होने तक इस आज्ञा को निष्‍कलंक और निर्दोष रख। 
1 Timothy 6:15 जिसे वह ठीक समयों में दिखाएगा, जो परमधन्य और अद्वैत अधिपति और राजाओं का राजा, और प्रभुओं का प्रभु है। 
1 Timothy 6:16 और अमरता केवल उसी की है, और वह अगम्य ज्योति में रहता है, और न उसे किसी मनुष्य ने देखा, और न कभी देख सकता है: उस की प्रतिष्‍ठा और राज्य युगानुयुग रहेगा। आमीन।
1 Timothy 6:17 इस संसार के धनवानों को आज्ञा दे, कि वे अभिमानी न हों और चंचल धन पर आशा न रखें, परन्तु परमेश्वर पर जो हमारे सुख के लिये सब कुछ बहुतायत से देता है। 
1 Timothy 6:18 और भलाई करें, और भले कामों में धनी बनें, और उदार और सहायता देने में तत्‍पर हों।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 27-29
  • लूका 13:1-22