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मंगलवार, 5 नवंबर 2019

न्याय



      एशिया में आयोजित एक सम्मलेन में भाग लेते समय, मुझे कुछ ही घंटों के अन्दर दो चौंका देने वाली बातें सुनने को मिलीं। पहले तो एक पास्टर ने बताया कि उसने बरी होने से पहले कैद में ग्यारह वर्ष हत्या के एक गलत आरोप के अन्तर्गत काटे थे। फिर एक परिवार ने बताया कि अपने ही देश में धार्मिक उत्पीड़न से बचने के लिए कैसे उन्हें एक बहुत बड़ी रकम देनी पड़ी थी, किन्तु उन्होंने बचाने के लिए जिन्हें वह रकम दी थी, उन्होंने ही उन्हें धोखा देकर पकड़वा दिया। अब वर्षों से एक शरणार्थी शिविर में रहते हुए, वे सोचते हैं कि क्या कभी उन्हें कोई घर मिलेगा!

      इन दोनों ही घटनाओं में, किया गया अत्याचार, न्याय के अभाव में और अधिक पीड़ादायक हो गया, जो कि हमारे सँसार के टूटेपन का एक प्रमाण है। परन्तु यह न्याय का अभाव स्थाई स्थिति नहीं है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 67 में आया है कि परमेश्वर के लोगों को, परमेश्वर के बारे में इस दुखित सँसार को बताना है। परमेश्वर की निकटता में आने और बने रहने का परिणाम आनन्द है, न केवल परमेश्वर के प्रेम के कारण, परन्तु उसके न्याय के भी कारण। भजनकार लिखता है, “राज्य राज्य के लोग आनन्द करें, और जयजयकार करें, क्योंकि तू देश देश के लोंगों का न्याय धर्म से करेगा, और पृथ्वी के राज्य राज्य के लोगों की अगुवाई करेगा” (पद 4)।

      यद्यपि बाइबल के लेखक समझते थी कि “खराई” (निष्पक्षता और न्याय) परमेश्वर के प्रेम का महत्वपूर्ण भाग है, किन्तु वे यह भी समझते थे कि इसकी पूर्ति भविष्य में परमेश्वर का राज्य स्थापित होने के बाद ही होगी। उस समय तक अन्याय से भरे हमारे इस सँसार में, हम लोगों को परमेश्वर के उस सिद्ध न्याय के विषय बताते रहें। प्रभु परमेश्वर का आगमन, “न्याय की नदी के समान, और धर्म महानद के समान होगा” (अमोस 5:24)। - बिल क्राउडर

न्याय के लिए कार्य करें; करुणा के लिए प्रार्थना करें।

परन्तु तुम्हारे लिये जो मेरे नाम का भय मानते हो, धर्म का सूर्य उदय होगा, और उसकी किरणों के द्वारा तुम चंगे हो जाओगे; और तुम निकल कर पाले हुए बछड़ों की नाईं कूदोगे और फांदोगे। - मलाकी 4:2

बाइबल पाठ: भजन 67
Psalms 67:1 परमेश्वर हम पर अनुग्रह करे और हम को आशीष दे; वह हम पर अपने मुख का प्रकाश चमकाए
Psalms 67:2 जिस से तेरी गति पृथ्वी पर, और तेरा किया हुआ उद्धार सारी जातियों में जाना जाए।
Psalms 67:3 हे परमेश्वर, देश देश के लोग तेरा धन्यवाद करें; देश देश के सब लोग तेरा धन्यवाद करें।
Psalms 67:4 राज्य राज्य के लोग आनन्द करें, और जयजयकार करें, क्योंकि तू देश देश के लोंगों का न्याय धर्म से करेगा, और पृथ्वी के राज्य राज्य के लोगों की अगुवाई करेगा।
Psalms 67:5 हे परमेश्वर, देश देश के लोग तेरा धन्यवाद करें; देश देश के सब लोग तेरा धन्यवाद करें।
Psalms 67:6 भूमि ने अपनी उपज दी है, परमेश्वर जो हमारा परमेश्वर है, उसने हमें आशीष दी है।
Psalms 67:7 परमेश्वर हम को आशीष देगा; और पृथ्वी के दूर दूर देशों के सब लोग उसका भय मानेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 34-36
  • इब्रानियों 2



मंगलवार, 8 जुलाई 2014

सुसमाचार


   इंटरनैट पर उपलब्ध अनेक प्रकार की सामग्री से संबंधित एक शब्द है "वायरल" अर्थात वह जो बड़ी तेज़ी से एक इंटरनैट प्रयोगकर्ता के द्वारा दूसरे तक पहुँचाया जाता है और इस प्रकार एक से दूसरे स्थान पर संसार भर में फैलता रहता है। इस प्रकार से फैलने वाली यह सामग्री हास्यास्प्रद हो सकती है, प्रेर्णादायक हो सकती है, विचारों को उकसाने वाली हो सकती है, किसी विशेष परिस्थित या घटना का समाचार हो सकती है, और तेज़ी से फैल कर यह बहुत ही कम समय में लाखों लोगों तक पहुँच जाती है।

   इस प्रकार की "वायरल" फैलाव की क्षमता रखने वाली सामग्री बनाना प्रत्येक विज्ञापन बनाने वाले का सपना होता है, लेकिन इंटरनैट के द्वारा व्यापार करने वाले बहुत ही कम लोग ऐसा कर पाते हैं। लेसी केम्प ने इस संबंध में realnetworksblog.com पर लिखा: "कैसे आप किसी बात को इतनी तीव्रता के साथ फैला सकते हैं? उत्तर है कि आप ऐसा नहीं कर सकते, क्योंकि यह कोई ऐसी बात नहीं है जो किसी योजना या विधि के अन्तर्गत करी जा सके, नहीं तो सभी ऐसा कर लेते। उस बात में स्वतः ही कुछ ऐसा अद्भुत होना चाहिए कि वह अपने ही बूते पर तेज़ी से प्रसारित हो सके।"

   समस्त संसार के लिए प्रभु यीशु में विश्वास द्वारा पापों से क्षमा एवं उद्धार का सुसमाचार भी कुछ ऐसा ही है, जो एक से दूसरे तक फैलता है। जिसने इस सुसमाचार पर विश्वास कर लिया और इसे अपना लिया, फिर वह इसे किसी ना किसी माध्यम द्वारा दूसरे तक पहुँचाए बिना रह नहीं सकता। मसीही विश्वासियों की प्रथम मण्डली का एक अगुवा स्‍तिुफनुस अपने मसीही विश्वास के कारण पत्थरवाह करके मार डाला गया, और फिर यरूशलेम में स्थित सारी मसीही मण्डली पर अत्याचार का पहाड़ टूट पड़ा। इस सताव के कारण बहुत से मसीही विश्वासी बेघर हो गए और यरुशलेम छोड़कर भागने को मजबूर हो गए। लेकिन जान बचाकर भागते हुए भी वे जहाँ कहीं जाते, प्रभु यीशु के सुसमाचार को लोगों को अवश्य बताते (प्रेरितों 8:1-4)। इस प्रकार सुसमाचार को दबाने और नष्ट करने का वह प्रयास सुसमाचार की तेज़ी से बढ़ती तथा फैलने का कारण बन गया।

   आज भी यही स्थिति किसी ना किसी रूप में सारे संसार में बारंबार घटित हो रही है। जितना मसीही विश्वास के सुसमाचार को दबाने का प्रयास किया जाता है, मसीही विश्वासियों को सताया जाता है, मसीह यीशु के विरोध में किया जाता है, वह सब मसीही विश्वास के सुसमाचार को संसार भर में समाचारों या अन्य किसी माध्यम से फैलाने का कारण हो जाता है और अनेक ऐसे लोग जिन्होंने उस सुसमाचार के बारे में सुना नहीं हो या उस पर कभी ध्यान ना दिया हो, उसे सुनने और उसे गंभीरता से देखने को प्रोत्साहित हो जाते हैं। मसीह यीशु का सुसमाचार समस्त संसार में फैलने से रुक नहीं सकता - या तो मसीही विश्वासी इसे फैलाते रहेंगे, नहीं तो उन पर ढाया जाने वाला अत्याचार उसे फैलाने का माध्यम बन जाएगा। - डेविड मैक्कैसलैंड


सुसमाचार संक्रामक है, वह तो फैलेगा ही; उसके फैलने में आपका योगदान क्या है?

हे भाइयों, मैं चाहता हूं, कि तुम यह जान लो, कि मुझ पर जो बीता है, उस से सुसमाचार ही की बढ़ती हुई है। - फिलिप्पियों 1:12

बाइबल पाठ: प्रेरितों 7:59-8:8
Acts 7:59 और वे स्‍तिुफनुस को पत्थरवाह करते रहे, और वह यह कहकर प्रार्थना करता रहा; कि हे प्रभु यीशु, मेरी आत्मा को ग्रहण कर। 
Acts 7:60 फिर घुटने टेककर ऊंचे शब्द से पुकारा, हे प्रभु, यह पाप उन पर मत लगा, और यह कहकर सो गया: और शाऊल उसके बध में सहमत था।
Acts 8:1 उसी दिन यरूशलेम की कलीसिया पर बड़ा उपद्रव होने लगा और प्रेरितों को छोड़ सब के सब यहूदिया और सामरिया देशों में तित्तर बित्तर हो गए। 
Acts 8:2 और भक्तों ने स्‍तिुफनुस को कब्र में रखा; और उसके लिये बड़ा विलाप किया। 
Acts 8:3 शाऊल कलीसिया को उजाड़ रहा था; और घर घर घुसकर पुरूषों और स्‍त्रियों को घसीट घसीट कर बन्‍दीगृह में डालता था।
Acts 8:4 जो तित्तर बित्तर हुए थे, वे सुसमाचार सुनाते हुए फिरे। 
Acts 8:5 और फिलेप्पुस सामरिया नगर में जा कर लोगों में मसीह का प्रचार करने लगा। 
Acts 8:6 और जो बातें फिलेप्पुस ने कहीं उन्हें लोगों ने सुनकर और जो चिन्ह वह दिखाता था उन्हें देख देखकर, एक चित्त हो कर मन लगाया। 
Acts 8:7 क्योंकि बहुतों में से अशुद्ध आत्माएं बड़े शब्द से चिल्लाती हुई निकल गई, और बहुत से झोले के मारे हुए और लंगडे भी अच्‍छे किए गए। 
Acts 8:8 और उस नगर में बड़ा आनन्द हुआ।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 137-139


शुक्रवार, 7 जून 2013

विश्वास का तात्पर्य

   स्मुरना के इलाके के बिशप पॉलीकार्प (ई० 59-155) को, उनके मसीही विश्वास और प्रचार के कारण रोमी अधिकारियों ने बन्धक बना लिया और उन से कहा कि यदि वे कैद से मुक्त होना चाहते हैं तो मसीह यीशु को कोसें और उसकी निन्दा करें। पॉलीकार्प का उत्तर था, "छियासी वर्षों से मैं उसकी सेवा करता आया हूँ, और उसने आज तक कभी मेरी कोई हानि नहीं की है। मैं अपने मुक्तिदाता राजा की निन्दा कैसे कर सकता हूँ?" रोमी अधिकारी ने धमकी दी, "यदि तू अपनी मनशा नहीं बदलेगा तो तुझे आग के हवाले कर दिया जाएगा।" पॉलीकार्प अपने निर्णय पर अडिग रहा, और उसे लठ्ठे से बांधकर आग के हवाले कर दिया गया जिससे उसकी मृत्यु हो गई।

   इससे सदियों पहले, तीन जवानों - शदरक, मीशक और अबदनेगो को भी परमेश्वर पर अपने विश्वास के कारण ऐसी ही परिस्थिति का सामना करना पड़ा था। उन्होंने भी राजा नबूकदनेस्सर द्वारा जारी राजा की प्रतिमा के आगे गिरने और उसकी उपासना करने की आज्ञा की अवहेलना की थी क्योंकि वे अपने परमेश्वर यहोवा पर विश्वास रखते थे और केवल उसी की उपासना करते थे। राजा नबूकदनेस्सर ने उनके सामने विकल्प रखा, या तो मेरी प्रतिमा की उपासना स्वीकार करो अथवा आग के भट्टे में झोंके जानो को तैयार हो जाओ। उन तीनों जवानों का राजा को उत्तर था, "...हे नबूकदनेस्सर, इस विषय में तुझे उत्तर देने का हमें कुछ प्रयोजन नहीं जान पड़ता। हमारा परमेश्वर, जिसकी हम उपासना करते हैं वह हम को उस धधकते हुए भट्टे की आग से बचाने की शक्ति रखता है; वरन हे राजा, वह हमें तेरे हाथ से भी छुड़ा सकता है। परन्तु, यदि नहीं, तो हे राजा तुझे मालूम हो, कि हम लोग तेरे देवता की उपासना नहीं करेंगे, और न तेरी खड़ी कराई हुई सोने की मूरत को दण्डवत करेंगे" (दानिय्येल 3:16-18)। उन तीनों को आग के भट्टे में झोंक दिया गया परन्तु आग उन तीनों का कुछ भी नहीं बिगाड़ सकी; जब उन्हें भट्टे से बाहर निकाला गया तो ना तो उनके कपड़े या बाल झुलसे थे और ना ही उनमें आग की कोई गन्ध थी।

   एक ही परमेश्वर के प्रति एक समान विश्वास के लिए एक समान दण्ड, किन्तु दो भिन्न परिणाम - एक आग से जल कर मर गया तो दूसरे आग से अछूते बाहर आ गए। मसीही विश्वास के इन दिग्गजों की गवाही सिखाती है कि मसीही विश्वास में परमेश्वर पर विश्वास का तात्पर्य केवल परमेश्वर की क्षमताओं अथवा हर बात में इच्छित परिणामों की आशा पर विश्वास ही नहीं है वरन सच्चे विश्वास का अर्थ है, चाहे परमेश्वर परिस्थिति से छुड़ाए या ना छुड़ाए, उसपर अडिग अविचिलित विश्वास बनाए रखना। परिस्थिति का अन्जाम चाहे कुछ भी हो, परमेश्वर परमेश्वर ही है और हर बात के लिए अन्तिम निर्णय उसी का है। हम मसीही विश्वासियों का कर्तव्य अपने विश्वास को बनाए रखना है - केवल परिस्थितियों के अनुकूल परिणामों के अनुसार नहीं, वरन, सदा सर्वदा। - एलबर्ट ली


जीवन कठिन है, पर परमेश्वर भला है - हर समय और हर बात में।

स्‍त्रियों ने अपने मरे हुओं को फिर जीवते पाया; कितने तो मार खाते खाते मर गए; और छुटकारा न चाहा; इसलिये कि उत्तम पुनरुत्थान के भागी हों। - इब्रानियों 11:35 

बाइबल पाठ: इब्रानियों 11:32-40
Hebrews 11:32 अब और क्या कहूँ क्योंकि समय नहीं रहा, कि गिदोन का, और बाराक और समसून का, और यिफतह का, और दाऊद का और शामुएल का, और भविष्यद्वक्ताओं का वर्णन करूं।
Hebrews 11:33 इन्‍होंने विश्वास ही के द्वारा राज्य जीते; धर्म के काम किए; प्रतिज्ञा की हुई वस्तुएं प्राप्त की, सिंहों के मुंह बन्‍द किए।
Hebrews 11:34 आग की ज्‍वाला को ठंडा किया; तलवार की धार से बच निकले, निर्बलता में बलवन्‍त हुए; लड़ाई में वीर निकले; विदेशियों की फौजों को मार भगाया।
Hebrews 11:35 स्‍त्रियों ने अपने मरे हुओं को फिर जीवते पाया; कितने तो मार खाते खाते मर गए; और छुटकारा न चाहा; इसलिये कि उत्तम पुनरुत्थान के भागी हों।
Hebrews 11:36 कई एक ठट्ठों में उड़ाए जाने; और कोड़े खाने; वरन बान्‍धे जाने; और कैद में पड़ने के द्वारा परखे गए।
Hebrews 11:37 पत्थरवाह किए गए; आरे से चीरे गए; उन की परीक्षा की गई; तलवार से मारे गए; वे कंगाली में और क्‍लेश में और दुख भोगते हुए भेड़ों और बकिरयों की खालें ओढ़े हुए, इधर उधर मारे मारे फिरे।
Hebrews 11:38 और जंगलों, और पहाड़ों, और गुफाओं में, और पृथ्वी की दरारों में भटकते फिरे।
Hebrews 11:39 संसार उन के योग्य न था: और विश्वास ही के द्वारा इन सब के विषय में अच्छी गवाही दी गई, तौभी उन्हें प्रतिज्ञा की हुई वस्तु न मिली।
Hebrews 11:40 क्योंकि परमेश्वर ने हमारे लिये पहिले से एक उत्तम बात ठहराई, कि वे हमारे बिना सिद्धता को न पहुंचे।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 28-29 
  • यूहन्ना 17


गुरुवार, 6 जून 2013

परीक्षाएं


  एक दोपहर मित्र गोष्ठी के साथ भोजन करते हुए बात-चीत के दौरान एक मित्र ने कहा कि मिशिगन झील में, जो समुद्र से काफी दूर एक स्वच्छ पानी की झील है, एक बार बुल-शार्क मछली द्वारा हमला होने की खबर आ चुकी है। हमारे लिए यह इतना असंभव विचार था कि हम ने इस बात को ठठ्ठों में उड़ा दिया। फिर मैंने इस पर खोज करने का सोचा और इन्टरनैट पर इसके बारे में ढूँढ़ने लगा। वहाँ मुझे मिला कि 1955 में एक ऐसा दावा किया गया था, लेकिन इस दावे की कभी पुष्टि नहीं होने पाई। शार्क! मिशिगन झील में! यदि यह सत्य भी है तो भी एक बहुत दुर्लभ और असामान्य घटना है।

   कितना अच्छा होता यदि हमारे लिए कठिनाईयों और परीक्षाओं का सामना करना भी मिशिगन झील के शार्क हमले के समान ही होता - अति दुर्लभ और असामान्य! लेकिन ऐसा है नहीं। सभी को कठिनाईयों और परीक्षाओं का सामना सामान्यता करना ही होता है; बस जब हमें सामना करना पड़ता है तो हम यही सोचते हैं कि काश ऐसा नहीं होता। इसी लिए प्रेरित पतरस ने पहली शताब्दी के मसीही विश्वासीयों को, जो अपने मसीही विश्वास के कारण घोर अत्यचार और अति विषम परिस्थितियों से होकर निकल रहे थे, लिखी अपनी पत्री में लिखा, "हे प्रियों, जो दुख रूपी अग्‍नि तुम्हारे परखने के लिये तुम में भड़की है, इस से यह समझ कर अचंभा न करो कि कोई अनोखी बात तुम पर बीत रही है" (1 पतरस 4:12)।

   मसीही विश्वासीयों के लिए इस प्रकार की परीक्षाएं कोई अनहोनी या अस्वाभाविक बात नहीं है, वरन उनकी विश्वास यात्रा का एक अनिवर्य भाग है - आखिर शैतान अपने चंगुल से बच निकलने वालों को शांति से कैसे रहने देगा? वह तो अपनी सारी शक्ति और सभी सहायकों द्वारा उनके जीवन को यथासंभव कठिन बनाने का भरसक प्रयास करेगा ही। लेकिन इस दुख रूपी अग्नि में ताए जाकर ही हमारा मसीही विश्वास खरे कुन्दन सा स्वच्छ और बहूमूल्य होकर निकलता है। इस ताए जाने से ही हमारे मसीही विश्वास के जीवन से संबंधित सभी व्यर्थ बातें भी भस्म हो जाती हैं तथा अपने किसी स्वार्थ में होकर या झूठे या दिखावे के विश्वास में मसीह यीशु का अनुकरण करने वालों की छाँटाई भी इससे हो जाती है। शैतान जो युक्तियाँ अपने अनुयायीयों द्वारा मसीही विश्वासियों को सताने के लिए प्रयोग करता है, परमेश्वर उन्हीं के द्वारा उसके ही अनुयायियों की वास्तविकता और उनकी दुष्ट मानसिकता को संसार पर प्रगट कर देता है तथा अपनी मण्डली को भेड़ की खाल में छिपे भेड़ियों से शुद्ध करने के लिए प्रयोग कर लेता है।

   परमेश्वर का प्रेम अपनी सन्तान के प्रति कभी कम नहीं होता, वह उन्हें कभी नहीं छोड़ता, कभी नहीं त्यागता। हर कठिनाई, अत्याचार, विषम परिस्थिति में वह उनके साथ बना रहता है, उन्हें सामर्थ देता है, सहने की शक्ति और परिस्थिति के उपयुक्त शांति देता है, और उनकी इस गवाही को शैतान के प्रयोजनों को विफल करने, अपने अनुयायियों को बड़े प्रतिफल देने तथा उन्हें अपनी महिमा का कारण होने वाला बना लेता है। परीक्षाओं से विचलित ना हों, परीक्षाओं में अपनी मसीही गवाही बनाए रखें - यह आपके लिए अद्भुत प्रतिफलों को प्राप्त करने और परमेश्वर को अपने जीवन से महिमा देने का एक सामर्थी माध्यम हैं। - बिल क्राउडर


अपने प्रेम की रौशनी से परमेश्वर हमारे जीवन की काली घटाओं पर एक सुन्दर, चमकीला और आकर्षक मेघधनुष बना देता है।

हे प्रियों, जो दुख रूपी अग्‍नि तुम्हारे परखने के लिये तुम में भड़की है, इस से यह समझ कर अचंभा न करो कि कोई अनोखी बात तुम पर बीत रही है। - 1 पतरस 4:12

बाइबल पाठ: 1 पतरस 4:12-19
1 Peter 4:12 हे प्रियों, जो दुख रूपी अग्‍नि तुम्हारे परखने के लिये तुम में भड़की है, इस से यह समझ कर अचम्भा न करो कि कोई अनोखी बात तुम पर बीत रही है।
1 Peter 4:13 पर जैसे जैसे मसीह के दुखों में सहभागी होते हो, आनन्द करो, जिस से उसकी महिमा के प्रगट होते समय भी तुम आनन्‍दित और मगन हो।
1 Peter 4:14 फिर यदि मसीह के नाम के लिये तुम्हारी निन्‍दा की जाती है, तो धन्य हो; क्योंकि महिमा का आत्मा, जो परमेश्वर का आत्मा है, तुम पर छाया करता है।
1 Peter 4:15 तुम में से कोई व्यक्ति हत्यारा या चोर, या कुकर्मी होने, या पराए काम में हाथ डालने के कारण दुख न पाए।
1 Peter 4:16 पर यदि मसीही होने के कारण दुख पाए, तो लज्ज़ित न हो, पर इस बात के लिये परमेश्वर की महिमा करे।
1 Peter 4:17 क्योंकि वह समय आ पहुंचा है, कि पहिले परमेश्वर के लोगों का न्याय किया जाए, और जब कि न्याय का आरम्भ हम ही से होगा तो उन का क्या अन्‍त होगा जो परमेश्वर के सुसमाचार को नहीं मानते?
1 Peter 4:18 और यदि धर्मी व्यक्ति ही कठिनता से उद्धार पाएगा, तो भक्तिहीन और पापी का क्या ठिकाना?
1 Peter 4:19 इसलिये जो परमेश्वर की इच्छा के अनुसार दुख उठाते हैं, वे भलाई करते हुए, अपने अपने प्राण को विश्वासयोग्य सृजनहार के हाथ में सौंप दें।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 25-27 
  • यूहन्ना 16