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रविवार, 3 जुलाई 2016

स्नेहिल देखभाल


   मैक्स ने अपने लिए एक छोटा सा फार्म ले रखा है और रुचि के तौर पर उसे चलाता है। हाल ही में जब वह अपने मवेशियों की जाँच करने गया तो पाया कि वहाँ एक नवजात बछड़ा भी है। जब उसने वे मवेशी खरीदे थे तो उसे नहीं पता था कि उन में से एक गर्भवती है। लेकिन दुर्भाग्यवश प्रसव में होने वाली कुछ कठिनाईयों के कारण वह मादा बछड़े के जन्म के कुछ समय बाद मर गई। मैक्स ने तुरंत दूध का पाउडर खरीदा और उस बछड़े को पाउडर से बना दूध बोतल से पिलाने लग गया। मैक्स कहता है कि वह बछड़ा अब उसे ही अपनी माँ समझने लगा है।

   उस बछड़े के प्रति मैक्स के स्नेहिल बर्ताव की इस घटना ने मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस द्वारा थिस्सुलुनीके के मसीही विश्वासियों के प्रति रखे स्नेहिल बर्ताव की याद दिलाई। पौलुस ने उन मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पहली पत्री में उन्हें स्मरण करवाया कि कैसे वह उनके बीच एक माँ के समान उनकी देखभाल करता हुआ रहा करता था: "परन्तु जिस तरह माता अपने बालकों का पालन-पोषण करती है, वैसे ही हम ने भी तुम्हारे बीच में रह कर कोमलता दिखाई है" (1 थिस्सुलुनीकियों 2:7)।

   प्रेरित पतरस ने अपनी पहली पत्री में परमेश्वर के वचन को निर्मल आत्मिक दूध के समान बताया है: "नये जन्मे हुए बच्‍चों की नाईं निर्मल आत्मिक दूध की लालसा करो, ताकि उसके द्वारा उद्धार पाने के लिये बढ़ते जाओ" (1 पतरस 2:2); और पौलुस भी वचन रूपी इस दूध को लोगों में उनकी उन्नति और विकास के लिए बाँटता रहता था। लेकिन साथ ही पौलुस उन लोगों की आवश्यकताओं का भी विशेष ध्यान रखता था, एक पिता के समान उन्हें प्रेरणा देता रहता था: "जैसे तुम जानते हो, कि जैसा पिता अपने बालकों के साथ बर्ताव करता है, वैसे ही हम तुम में से हर एक को भी उपदेश करते, और शान्‍ति देते, और समझाते थे। कि तुम्हारा चाल चलन परमेश्वर के योग्य हो, जो तुम्हें अपने राज्य और महिमा में बुलाता है" (1 थिस्सुलुनीकियों 2:11-12)

   जब हम एक दुसरे की सेवा में लगे हैं, तो चाहिए कि हम भी आत्मिक यात्रा में एक दुसरे को प्रोत्साहित करते रहें (इब्रानियों 10:24) तथा उसी स्नेहिल देखभाल को लोगों के प्रति दिखाएं जो हमारे प्रभु और जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु ने हमारे प्रति दिखाई है और संसार के समस्त लोगों के प्रति दिखाना चाहता है। - डेनिस फिशर


परमेश्वर अपने प्रेम को हमारे जीवनों में उसे दूसरों के जीवनों में प्रवाहित करने के लिए उण्डेलता है।

और प्रेम, और भले कामों में उक्साने के लिये एक दूसरे की चिन्‍ता किया करें। - इब्रानियों 10:24

बाइबल पाठ: 1 थिस्सुलुनीकियों 2:1-7
1 Thessalonians 2:1 हे भाइयों, तुम आप ही जानते हो कि हमारा तुम्हारे पास आना व्यर्थ न हुआ। 
1 Thessalonians 2:2 वरन तुम आप ही जानते हो, कि पहिले पहिल फिलिप्पी में दुख उठाने और उपद्रव सहने पर भी हमारे परमेश्वर ने हमें ऐसा हियाव दिया, कि हम परमेश्वर का सुसमाचार भारी विरोधों के होते हुए भी तुम्हें सुनाएं। 
1 Thessalonians 2:3 क्योंकि हमारा उपदेश न भ्रम से है और न अशुद्धता से, और न छल के साथ है। 
1 Thessalonians 2:4 पर जैसा परमेश्वर ने हमें योग्य ठहराकर सुसमाचार सौंपा, हम वैसा ही वर्णन करते हैं; और इस में मनुष्यों को नहीं, परन्तु परमेश्वर को, जो हमारे मनों को जांचता है, प्रसन्न करते हैं। 
1 Thessalonians 2:5 क्योंकि तुम जानते हो, कि हम न तो कभी लल्लोपत्तो की बातें किया करते थे, और न लोभ के लिये बहाना करते थे, परमेश्वर गवाह है। 
1 Thessalonians 2:6 और यद्यपि हम मसीह के प्रेरित होने के कारण तुम पर बोझ डाल सकते थे, तौभी हम मनुष्यों से आदर नहीं चाहते थे, और न तुम से, न और किसी से। 
1 Thessalonians 2:7 परन्तु जिस तरह माता अपने बालकों का पालन-पोषण करती है, वैसे ही हम ने भी तुम्हारे बीच में रह कर कोमलता दिखाई है।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 25-27
  • प्रेरितों 12


बुधवार, 1 दिसंबर 2010

सर्वोतम उपहार

किसी को देने के लिये एक उत्तम उपहार ढूंढ रहे हैं, परन्तु नहीं मिल रहा? मेरे एक मित्र ने कुछ उत्तम उपहार मुझे सुझाए थे, जो मैं आपके साथ बांटना चाहता हूँ:

*सुनने की भेंट - दूसरे की बात को बिना बीच में रोके टोके पूरा होने देने, और बिना प्रत्युत्तर को तैयार करे, केवल मन लगा कर सुनना।

*स्नेह की भेंट - प्रीय जनों के प्रति अपने स्नेह को प्रकट करना, उसके लिये उपयुक्त के लिये आलिंगन, पीठ थपथपाना या अन्य कोई संकेत देना।

*हंसी की भेंट - प्रीय जनों के साथ चुटकुले, हास्यपूर्ण कहानियां एवं घटनाएं बांटना, और उन्हें एहसास दिलाना कि आप उनके साथ प्रसन्न रहना और अपनी खुशी बांटना चाहते हैं।

*प्रशंसा की भेंट - उनके प्रति अपनी भावनाओं और सम्मान को प्रकट करना, प्रेम और आदर व्यक्त करते चन्द लाईनों के एक संक्षिपत पत्र की भेंट।

*उभारने की भेंट - किसी से मन से, मुस्कुरा कर, कहना कि "आप आज बहुत अच्छे लग रहे हैं", या "आप मेरे लिये बहुत मायने रखते हैं" या ऐसा कोई उपयुक्त भाव व्यक्त करना।

किंतु मेरे लिए जीवन की सर्वोत्तम भेंट क्या है? अनन्त जीवन का वह उपहार जो मुझे परमेश्वर से प्रभु यीशु में होकर मिला "क्‍योंकि पाप की मजदूरी तो मृत्यु है, परन्‍तु परमेश्वर का बरदान हमारे प्रभु यीशु मसीह में अनन्‍त जीवन है।" (रोमियों ६:२३)

यही वह सर्वोतम भेंट है जो मैं सबके साथ बांटना चाहता हूँ - प्रभु यीशु में अनन्त जीवन की भेंट:
"परन्‍तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उस ने उन्‍हें परमेश्वर के सन्‍तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्‍हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं।" (यूहना १:१२)

"क्‍योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उस ने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्‍तु अनन्‍त जीवन पाए।" (यूहना ३:१६)

"परमेश्वर को उसके उस दान के लिये जो वर्णन से बाहर है, धन्यवाद हो।" (२ कुरिन्थियों ९:१५)

क्या आपने परमेश्वर की यह भेंट स्वीकार कर ली है? - सिंडी हैस कैस्पर


संसार की सबसे अद्भुत भेंट, संसार के लिए एक गैशाला की चरनी में होकर आई।

परमेश्वर को उसके उस दान के लिये जो वर्णन से बाहर है, धन्यवाद हो। - २ कुरिन्थियों ९:१५


बाइबल पाठ: यूहन्ना १:१०-१३

वह जगत में था, और जगत उसके द्वारा उत्‍पन्न हुआ, और जगत ने उसे नहीं पहिचाना।
वह अपने घर में आया और उसके अपनों ने उसे ग्रहण नहीं किया।
परन्‍तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उस ने उन्‍हें परमेश्वर के सन्‍तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्‍हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं।
वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्‍छा से, न मनुष्य की इच्‍छा से, परन्‍तु परमेश्वर से उत्‍पन्न हुए हैं।

एक साल में बाइबल:
  • यहेजेकेल ४०-४१
  • २ पतरस ३