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शनिवार, 18 जुलाई 2020

अभिलाषा


     मेरे बैंक के एक कर्मचारी के पास की खिड़की पर फोर्ड मोटर कंपनी द्वारा उच्च प्रदर्शन के लिए बनाई गई शेल्बी कोबरा गाड़ी की एक फोटो लगी है। एक दिन बैंक में अपने कार्य से संबंधित लेन-देन करते हुए, मैंने उस कर्मचारी से उस फोटो के सम्बन्ध में पूछा कि क्या वह उसकी कार है? उसने उत्तर दिया, “नहीं; यह मेरी अभिलाषा है; मैं एक दिन इसे खरीदूँगा, और आज यही मुझे रोज़ प्रातः उठकर काम के लिए आने को प्रोत्साहित करता है।”

     मैं इस जवान व्यक्ति की अभिलाषा को समझ सकता हूँ। मेरे एक मित्र के पास यह गाड़ी हुआ करती थी, और एक बार मैंने इसे चलाया भी था। यह वास्तव में बहुत बलवंत गाड़ी है; परन्तु संसार की अन्य वस्तुओं के समान, यह भी जीवन जीने की अभिलाषा रखने का कारण नहीं हो सकती है। परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि जो परमेश्वर को छोड़ कर अन्य किसी भी बात में भरोसा रखते हैं, वे भजन 20 के भजनकार के अनुसार, झुकाए और गिराए जाएँगे।

     ऐसा इसलिए क्योंकि हमें परमेश्वर ने अपने लिए सृजा है, और बाकी सभी बातें व्यर्थ हैं। हम इस तथ्य को प्रतिदिन अपने जीवन में प्रमाणित होते हुए देखते हैं: हम कभी यह, तो कभी वह खरीदते रहते हैं, हमें लगता है कि वे वस्तुएँ हमें संतुष्टि प्रदान करेंगी, आनंदित करेंगी। परन्तु जैसे छोटे बच्चों को चाहे जितने भी उपहार दे दो, उन्हें कुछ और की लालसा लगी रहती है; और जो उपहार उन्हें मिलते हैं, उसके प्रति उनका उल्लास और उत्तेजना शीघ्र ही समाप्त हो जाती है, उसी प्रकार हम भी यही सोचते रहते हैं, अब इसके बाद और क्या लिया जाए? पूर्ण तृप्ति कभी नहीं मिलती है।

     संसार की कोई भी वस्तु हमें पूर्णतः संतुष्ट नहीं करने पाती है – वह चाहे कोई भली वस्तु ही क्यों न हो। उनके द्वारा अवश्य ही हमें कुछ आनंद तो मिलता है, परन्तु यह प्रसन्नता कुछ समय बाद धूमिल हो जाती है (1 यूहन्ना 2:17)। जैसा सी. एस. ल्यूइस ने कहा, “परमेश्वर अपने से बाहर हमें कोई प्रसन्नता और शान्ति नहीं दे सकता है; क्योंकि उसके बाहर वह है ही नहीं।” – डेविड एच. रोपर

 

प्रत्येक हृदय में एक अभिलाषा है, जिसे केवल प्रभु यीशु ही पूर्ण कर सकता है।


तुम मुझ में बने रहो, और मैं तुम में: जैसे डाली यदि दाखलता में बनी न रहे, तो अपने आप से नहीं फल सकती, वैसे ही तुम भी यदि मुझ में बने न रहो तो नहीं फल सकते। - यूहन्ना 15:4

बाइबल पाठ: भजन 20:6-9

भजन संहिता 20:6 अब मैं जान गया कि यहोवा अपने अभिषिक्त का उद्धार करता है; वह अपने दाहिने हाथ के उद्धार करने वाले पराक्रम से अपने पवित्र स्वर्ग पर से सुनकर उसे उत्तर देगा।

भजन संहिता 20:7 किसी को रथों को, और किसी को घोड़ों का भरोसा है, परन्तु हम तो अपने परमेश्वर यहोवा ही का नाम लेंगे।

भजन संहिता 20:8 वे तो झुक गए और गिर पड़े परन्तु हम उठे और सीधे खड़े हैं।

भजन संहिता 20:9 हे यहोवा, बचा ले; जिस दिन हम पुकारें तो महाराजा हमें उत्तर दे।    

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 20-22
  • प्रेरितों 21:1-17


सोमवार, 25 अक्टूबर 2010

एक लेखक, मिच अल्बौम, को विचार आया कि यदि कुछ ऐसे व्यक्ति, जिनके पार्थिव जीवन पर आपने इस पृथ्वी पर कोई प्रभाव डाला हो, वे आपसे स्वर्ग में मिलें, और स्वर्ग में आपके पार्थिव जीवन की व्याख्या करें, तो स्वर्ग आपके लिये कैसा स्थान होगा? इस विचार के आधार पर करी गई अपनी कल्पना को उसने पुस्तक रूप में प्रस्तुत किया जिसका शीर्षक है "The Five People You Meet in Heaven"।

मिच अल्बौम की यह पुस्तक इस बात पर अवश्य अन्तःदृष्टि देती है कि जाने-अन्जाने हम कैसे दूसरों के जीवन को कैसे प्रभावित करते रहते हैं, परन्तु एक मसीही विश्वासी के लिये स्वर्ग में अनन्त आनन्द का आधार किसी अन्य व्यक्ति की राय नहीं है। उसके इस अनन्त आनन्द का आधार है प्रभु यीशु मसीह से उसका संबंध। स्वर्ग एक वास्तविक स्थान है, जहां प्रभु यीशु अपने लोगों के लिये तैयारी कर रहा है (यूहन्ना १४:२, ३) और वहां हम प्रभु यीशु से मिल कर सदा आनंदित रहेंगे।

परन्तु प्रभु यीशु से यह स्वर्गीय मुलाकात पृथ्वी पर व्यतीत किये गये हमारे जीवन में प्रभु के प्रति हमारे उतरदायित्व को निभाने का लेखा-जोखा लिये जाने का भी समय होगा। प्रभु द्वारा बुद्धिमानी और न्याय से किया गया हमारे पार्थिव जीवन का मूल्यांकन प्रगट करेगा कि हम उसके प्रति कितने आज्ञाकारी रहे और हमने उससे कैसा प्रेम किया; और स्वर्ग में मिलने वाले हमारे कर्मों के प्रतिफल भी निर्धारित करेगा "क्‍योंकि अवश्य है, कि हम सब का हाल मसीह के न्याय आसन के साम्हने खुल जाए, कि हर एक व्यक्ति अपने अपने भले बुरे कामों का बदला जो उस ने देह के द्वारा किए हों पाए" (२ कुरिन्थियों ५:१०)।

हम यह तो नहीं जानते कि स्वर्ग में सबसे पहले हम किन पाँच लोगों से मिलेंगे, लेकिन यह अवश्य जानते हैं कि सर्वप्रथम हम किससे मिलेंगे - प्रभु यीशु से। क्या आप उससे मिलने और उसके मूल्यांकन के लिये तैयार हैं? - डेनिस फिशर


प्रभु यीशु के साथ अनन्त काल तक रहना अनन्त आनन्द का आधार है।

क्‍योंकि अवश्य है, कि हम सब का हाल मसीह के न्याय आसन के साम्हने खुल जाए, कि हर एक व्यक्ति अपने अपने भले बुरे कामों का बदला जो उस ने देह के द्वारा किए हों पाए। - २ कुरिन्थियों ५:१०


बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों ५:६-११

और जिस ने हमें इसी बात के लिये तैयार किया है वह परमेश्वर है, जिस ने हमें बयाने में आत्मा भी दिया है।
सो हम सदा ढाढ़स बान्‍धे रहते हैं और यह जानते हैं कि जब तक हम देह में रहते हैं, तब तक प्रभु से अलग हैं।
क्‍योंकि हम रूप को देखकर नहीं, पर विश्वास से चलते हैं।
इसलिये हम ढाढ़स बान्‍धे रहते हैं, और देह से अलग होकर प्रभु के साथ रहना और भी उत्तम समझते हैं।
इस कारण हमारे मन की उमंग यह है, कि चाहे साथ रहें, चाहे अलग रहें पर हम उसे भाते रहें।
क्‍योंकि अवश्य है, कि हम सब का हाल मसीह के न्याय आसन के साम्हने खुल जाए, कि हर एक व्यक्ति अपने अपने भले बुरे कामों का बदला जो उस ने देह के द्वारा किए हों पाए।
सो प्रभु का भय मान कर हम लोगों को समझाते हैं और परमेश्वर पर हमारा हाल प्रगट है और मेरी आशा यह है, कि तुम्हारे विवेक पर भी प्रगट हुआ होगा।

एक साल में बाइबल:
  • यर्मियाह ६-८
  • १ तिमुथियुस ५

बुधवार, 6 अक्टूबर 2010

चिरस्थाई और उतम भाग

एक सर्वेक्षण में, जो १३९ देशों और २०,००० से अधिक मसिही विश्वासी कार्यकर्ताओं में किया गया, पाया गया कि विश्व भर में, औसतन ४० प्रतिशत मसीही कहते हैं कि वे एक कार्य से दूसरे कार्य के लिये हमेशा या अकसर भागते रहते हैं; और लगभग ६० प्रतिशत मानते हैं कि कार्य की व्यस्तता हमेशा या अकसर उनके जीवन में परमेश्वर के साथ अच्छा संबंध विकिसित करने में बाधा होती है। स्पष्ट है कि जीवन के कार्यों में व्यस्त होना, परमेश्वर के साथ हमारी संगति करने में एक बाधा है।

मार्था के लिये भी कार्यों में व्यस्त होना प्रभु यीशु के साथ संगति करने में बाधा बना। मार्था ने प्रभु यीशु और उसके चेलों को अपने घर में आमंत्रित किया, जब वे आए तो वह उनके पांव धोने, उनके लिए भोजन बनाने, उन्हें आराम से रखने में व्यस्त हो गई। यह सब करना तो आवश्यक था, परन्तु यह सब उसके लिए प्रभु के साथ बैठने और उसकी बात सुनने से अधिक महत्वपूर्ण हो गया, प्रभु के साथ उसकी संगति में आनन्दमग्न होने में बाधा बन गया। इसके विपरीत उसकी बहन मरियम ने प्रभु के चरणों पर बैठकर प्रभु की बात सुनना पसन्द किया और "प्रभु ने उसे उत्तर दिया, मार्था, हे मार्था, तू बहुत बातों के लिये चिन्‍ता करती और घबराती है। परन्‍तु एक बात अवश्य है, और उस उत्तम भाग को मरियम ने चुन लिया है: जो उस से छीना न जाएगा।" (लूका १०:३८-४२)

आज आपका क्या हाल है? क्या आप भी एक कार्य से दूसरे कार्य की भाग-दौड़ में इतने व्यस्त हैं कि आपका ध्यान प्रभु से हट गया है, और उसके साथ संगति का मधुर आनन्द आपके जीवन में नहीं है? यदि ऐसा है तो परमेश्वर से प्रार्थना में मांगें कि वह आपका ध्यान प्रभु यीशु मसीह पर केंद्रित करने और जीवन की व्यस्तता से निकालने में आपकी सहायता करे, जिससे आप प्रभु की संगति और शांत जीवन के आनन्द का वह उत्तम भाग पा सकें, जो आपसे कभी छीना नहीं जा सकता। - मारविन विलियम्स


यदि आप परमेश्वर के लिये उचित समय नहीं निकल पा रहे हैं तो आप वास्तव में अनआवश्यक तौर पर व्यस्त हैं।

पर मार्था सेवा
करते करते घबरा गई - लूका १०:४२

बाइबल पाठ: लूका १०:३८-४२

फिर जब वे जा रहे थे, तो वह एक गांव में गया, और मार्था नाम एक स्त्री ने उसे अपने घर में उतारा।
और मरियम नाम उस की एक बहिन थी, वह प्रभु के पांवों के पास बैठकर उसका वचन सुनती थी।
पर मार्था सेवा करते करते घबरा गई और उसके पास आकर कहने लगी, हे प्रभु, क्‍या तुझे कुछ भी सोच नहीं कि मेरी बहिन ने मुझे सेवा करने के लिये अकेली ही छोड़ दिया है सो उस से कह, कि मेरी सहायता करे।
प्रभु ने उसे उत्तर दिया, मार्था, हे मार्था, तू बहुत बातों के लिये चिन्‍ता करती और घबराती है।
परन्‍तु एक बात अवश्य है, और उस उत्तम भाग को मरियम ने चुन लिया है: जो उस से छीना न जाएगा।

एक साल में बाइबल:
  • यशायाह २६, २७
  • फिलिप्पियों २