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रविवार, 22 मई 2016

सुनना


   अपनी पुस्तक Listening to Others में लेखिका जॉयस हगेट सुनने के महत्व तथा जो कठिन परिस्थितियों में हैं उन्हें उचित प्रतिक्रिया देने के बारे में बताती हैं। इन बातों को वे अपने अनुभवों के आधार पर बताती हैं, जब दुःखों और कठिनाईयों में पड़े लोगों के साथ बैठकर उन्होंने उनकी बातें सुनने में समय बिताया। वे बताती हैं कि अनेकों लोगों ने उनका बहुत धन्यवाद किया उस सहायता के लिए जो उन्होंने उन लोगों के लिए करी, जबकि जॉयस का कहना है कि बहुत बार तो उन्होंने कुछ भी नहीं किया था, केवल शांत बैठकर उन लोगों की बात सुनी थी, उन्हें अपने मन की व्यथा निर्बाधित उंडेल लेने दी थी। जॉयस का निषकर्ष था कि दुःखी लोगों की सहायता करने का एक प्रभावी तरीका, ध्यान लगाकर उनकी बात सुनना भी है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के एक पात्र अय्युब के साथ भी हम यही बात पाते हैं। अय्युब के परमेश्वर में विश्वास को गिराने के लिए शैतान उसकी घोर परीक्षा लेता है, उसका घर-बार, परिवार, संपत्ति और सेहत सब पर शैतान हमला करके सब ले लेता है, किंतु अय्युब का विश्वास परमेश्वर पर से नहीं हटता। उसके इस घोर दुःख के समय में उसके मित्र उससे मिलने और उसे सांत्वना देने आते हैं। उसकी दशा देखकर वे मित्र सात दिन तक चुपचाप उसके साथ बैठे तो रहते हैं (अय्युब 2:13), लेकिन जब अय्युब अपनी व्यथा उनके सामने कहना आरंभ करता है तो उसकी व्यथा का वर्णन सुनने की बजाए वे उस से अपने ही विचार कहने लगते हैं, उस पर दोषारोपण करते हैं, और उसके जीवन में किसी पाप के कारण ही इन दुःखों के आने का इलज़ाम उस पर लगाते हैं। उनकी उपस्थिति अय्युब के लिए सांत्वना का नहीं वरन कष्ट का कारण हो जाती है और वह कहता है, "भला होता कि मेरा कोई सुनने वाला होता! (सर्वशक्तिमान अभी मेरा न्याय चुकाए! देखो मेरा दस्तखत यही है)। भला होता कि जो शिकायतनामा मेरे मुद्दई ने लिखा है वह मेरे पास होता!" (अय्युब 31:35)।

   जब हम किसी की बात ध्यान से सुनते हैं, तो हम उस पर प्रगट करते हैं कि तुम्हारे संदर्भ में जो तुम्हारी चिंताएं है, वे मेरी भी है; जो तुम्हारे लिए महत्वपूर्ण है, वह मेरे लिए भी है। अवश्य ही कठिनाई में पड़े लोगों को नेक और भली सलाह की आवश्यकता होती है; लेकिन इससे भी बढ़कर अनेकों बार लोगों को ऐसे साथियों की आवश्यकता होती है जो उनसे प्रेम करते हैं, उनकी चिंता करते हैं, उनकी बात ध्यान से सुनने के लिए समय देते हैं। ऐसे ध्यान से किसी की बात सुनना सरल कार्य नहीं है; किसी के मन की बात को सुन कर समझ पाना और फिर उसे एक सही एवं उचित प्रतिक्रीया दे पाने के लिए समय, नम्रता और लगन की आवश्यकता होती है जो उसके प्रति हमारी सच्ची सहानुभूति का सूचक है।

   हे प्रभु हमें प्रेम से भरा मन और दूसरों की सुनने वाले कान दे। - डेविड रोपर


जब कोई बोल रहा हो, और हम उसकी बात का उत्तर सोचना आरंभ कर दें, 
तो वास्तव में हम उसकी बात को सुन नहीं रहे होते।

हे बुद्धिमानों! मेरी बातें सुनो, और हे ज्ञानियो! मेरी बातों पर कान लगाओ; क्योंकि जैसे जीभ से चखा जाता है, वैसे ही वचन कान से परखे जाते हैं। - अय्युब 34:2-3

बाइबल पाठ: अय्युब 2:11-13
Job 2:11 जब तेमानी एलीपज, और शूही बिलदद, और नामाती सोपर, अय्यूब के इन तीन मित्रों ने इस सब विपत्ति का समाचार पाया जो उस पर पड़ी थीं, तब वे आपस में यह ठान कर कि हम अय्यूब के पास जा कर उसके संग विलाप करेंगे, और उसको शान्ति देंगे, अपने अपने यहां से उसके पास चले। 
Job 2:12 जब उन्होंने दूर से आंख उठा कर अय्यूब को देखा और उसे न चीन्ह सके, तब चिल्लाकर रो उठे; और अपना अपना बागा फाड़ा, और आकाश की ओर धूलि उड़ाकर अपने अपने सिर पर डाली। 
Job 2:13 तब वे सात दिन और सात रात उसके संग भूमि पर बैठे रहे, परन्तु उसका दु:ख बहुत ही बड़ा जान कर किसी ने उस से एक भी बात न कही।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 16-18
  • यूहन्ना 7:28-53


गुरुवार, 18 दिसंबर 2014

खुले कान


   हाल ही में मेरे कान मुझे तकलीफ दे रहे थे जिससे मुझे स्पष्ट सुन पाने में दिक्कत आ रही थी; इस समस्या के निवारण के लिए मैंने एक ऐसा इलाज लेने का निर्णय किया जिस की उपयोगिता के बारे में कुछ मतभेद थे। उस इलाज का दावा था कि उससे कान में जमा मैल गल कर निकल जाएगा और मेरे स्पष्ट सुन पाने में आ रही बाधाएं साफ हो जाएंगी। मुझे यह मानना पड़ेगा कि वह इलाज लेना एक विचित्र सा अनुभव प्रतीत हो रहा था किंतु मैं स्पष्ट सुन पाने के लिए इतना बेचैन था कि मैं उसे भी आज़माने के लिए तैयार था।

   स्पष्ट सुन पाना हमारे दैनिक जीवनों में तो आवश्यक है ही, किंतु परमेश्वर के साथ हमारी चाल एवं संगति में और भी अधिक महत्वपूर्ण है। परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 40:6 में भजन का लेखक दाऊद कहता है, "मेलबलि और अन्नबलि से तू प्रसन्न नहीं होता तू ने मेरे कान खोदकर खोले हैं। होमबलि और पापबलि तू ने नहीं चाहा।" मूल भाषा के जिस शब्द का अनुवाद यहाँ "खोले" हुआ है उस शब्द का अनुवाद "साफ किया है" भी हो सकता है, जो दिखाता है कि परमेश्वर हम से क्या चाहता है। क्योंकि कई बार हमारे आत्मिक कान हमारे आस-पास के वातावरण तथा संसकृति के शोर से, या प्रलोभन तथा पाप के ऊँचे स्वर से बाधित हो सकते हैं; इसलिए हमें अपने आत्मिक कानों की सफाई रखना भी आवश्यक है। परमेश्वर चाहता है कि जब वह हम से अपने वचन के द्वारा बोले और बातें करे उस समय हमारे आत्मिक कान उसके लिए खुले और तैयार हों।

   होने दें कि हम अपने मनों को परमेश्वर की ओर पूरी भक्ति में लगाएं और अपने आत्मिक कानों को उसकी वाणी के लिए खुला और साफ किया हुआ रखें, जिससे जब वह अपने वचन के द्वारा हमसे बातें करे तो हम उससे सीखने वाले और उसकी इच्छा में आनन्दित रहने वाले बन सकें। - बिल क्राउडर


परमेश्वर अपने वचन के द्वारा उन से बातें करता है जो अपने मनों को उसके वचन के लिए तैयार रखते हैं।

प्रभु यहोवा ने मुझे सीखने वालों की जीभ दी है कि मैं थके हुए को अपने वचन के द्वारा संभालना जानूं। भोर को वह नित मुझे जगाता और मेरा कान खोलता है कि मैं शिष्य के समान सुनूं। प्रभु यहोवा ने मेरा कान खोला है, और मैं ने विरोध न किया, न पीछे हटा। - यशायाह 50:4-5

बाइबल पाठ: भजन 40:1-10
Psalms 40:1 मैं धीरज से यहोवा की बाट जोहता रहा; और उसने मेरी ओर झुककर मेरी दोहाई सुनी। 
Psalms 40:2 उसने मुझे सत्यानाश के गड़हे और दलदल की कीच में से उबारा, और मुझ को चट्टान पर खड़ा कर के मेरे पैरों को दृढ़ किया है। 
Psalms 40:3 और उसने मुझे एक नया गीत सिखाया जो हमारे परमेश्वर की स्तुति का है। बहुतेरे यह देखकर डरेंगे, और यहोवा पर भरोसा रखेंगे।
Psalms 40:4 क्या ही धन्य है वह पुरूष, जो यहोवा पर भरोसा करता है, और अभिमानियों और मिथ्या की ओर मुड़ने वालों की ओर मुंह न फेरता हो। 
Psalms 40:5 हे मेरे परमेश्वर यहोवा, तू ने बहुत से काम किए हैं! जो आश्चर्यकर्म और कल्पनाएं तू हमारे लिये करता है वह बहुत सी हैं; तेरे तुल्य कोई नहीं! मैं तो चाहता हूं की खोल कर उनकी चर्चा करूं, परन्तु उनकी गिनती नहीं हो सकती।
Psalms 40:6 मेलबलि और अन्नबलि से तू प्रसन्न नहीं होता तू ने मेरे कान खोदकर खोले हैं। होमबलि और पापबलि तू ने नहीं चाहा। 
Psalms 40:7 तब मैं ने कहा, देख, मैं आया हूं; क्योंकि पुस्तक में मेरे विषय ऐसा ही लिखा हुआ है। 
Psalms 40:8 हे मेरे परमेश्वर मैं तेरी इच्छा पूरी करने से प्रसन्न हूं; और तेरी व्यवस्था मेरे अन्त:करण में बनी है।
Psalms 40:9 मैं ने बड़ी सभा में धर्म के शुभ समाचार का प्रचार किया है; देख, मैं ने अपना मुंह बन्द नहीं किया हे यहोवा, तू इसे जानता है। 
Psalms 40:10 मैं ने तेरा धर्म मन ही में नहीं रखा; मैं ने तेरी सच्चाई और तेरे किए हुए उधार की चर्चा की है; मैं ने तेरी करूणा और सत्यता बड़ी सभा से गुप्त नहीं रखी।

एक साल में बाइबल: 
  • याकूब 1-2