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शनिवार, 30 नवंबर 2019

अपूर्ण



      जापान में भोजन वस्तुएं बड़े ध्यान और शुद्धता से बनाई जाती हैं, और बेचने के लिए आकर्षक रीति से पैक भी की जाती हैं। न केवल उनका स्वाद अच्छा होना चाहिए, परन्तु उनका स्वरूप भी अच्छा होना चाहिए। उन्हें खरीदते समय मैं अकसर सोचता हूँ कि मैं भोजन वस्तु खरीद रहा हूँ या वह पैकिंग! अच्छी गुणवत्ता पर जापान में दिए जाने वाले बल के कारण, ज़रा से भी त्रुटि वाले उत्पादों को अकसर हटा दिया जाता है। परन्तु हाल ही के वर्षों में ‘वेकियारी’ उत्पाद लोकप्रीय होने लगे हैं। जापानी भाषा में ‘वेकियारी’ शब्द का अर्थ है “कारण है”। इन उत्पादों को फेंका नहीं जाता है, वरन उन्हें सस्ते दामों पर बेच दिया जाता है – उदाहरण के लिए वे बिस्किट जो टूट गए हैं।

      मेरा एक मित्र ने, जो जापान में रहता है, मुझे बताया कि ‘वेकियारी’ शब्द प्रत्यक्ष रूप में अपूर्ण दिखने वाले लोगों के लिए भी प्रयोग किया जाता है।

      परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि प्रभु यीशु सभी से प्रेम करते हैं; उन से भी जिन्हें समाज ने वेकियारी कहकर तिरिस्कृत कर दिया है। जब एक पापिनी स्त्री को मालूम हुआ कि प्रभु यीशु एक फरीसी के घर में भोजन कर रहे हैं, तो वह वहाँ गयी, और प्रभु यीशु के पांवों पर झुककर रोने लगी (लूका 7:37-38)। फरीसी ने तो उसे “पापिनी” कहा (पद 39), परन्तु प्रभु यीशु ने उसे स्वीकार किया। प्रभु ने उससे कोमलता से बात की, और उसे आश्वस्त किया कि उसके पाप क्षमा किए गए हैं (पद 48)।

      प्रभु यीशु अपूर्ण, वेक्यारी लोगों से भी प्रेम करते हैं – जिनमें मैं और आप भी सम्मिलित हैं। और प्रभु के प्रेम का सबसे महान प्रगटीकरण है: “परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा” (रोमियों 5:8)। उसके प्रेम को प्राप्त करने वाले पात्र होने के कारण, हम मसीही विश्वासियों को प्रभु के इस प्रेम को औरों तक पहुंचाने का माध्यम भी बन जाना है, जिससे इस संसार के अपूर्ण और वेक्यरी लोग भी जान सकें कि उनकी अपूर्णता और त्रुटियों के बावजूद, प्रभु यीशु पर लाए गए विश्वास और उससे माँगी गई पापों की क्षमा के द्वारा वे भी परमेश्वर के प्रेम को प्राप्त करने वाले हो सकते हैं।
 - एल्बर्ट ली

परमेश्वर के प्रेम के द्वारा पाप के कारण टूटे हुए लोग भी पूर्ण बनाए जा सकते हैं।

क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। परमेश्वर ने अपने पुत्र को जगत में इसलिये नहीं भेजा, कि जगत पर दंड की आज्ञा दे परन्तु इसलिये कि जगत उसके द्वारा उद्धार पाए। - यूहन्ना 3:16-17

बाइबल पाठ: लूका 7:36-50
Luke 7:36 फिर किसी फरीसी ने उस से बिनती की, कि मेरे साथ भोजन कर; सो वह उस फरीसी के घर में जा कर भोजन करने बैठा।
Luke 7:37 और देखो, उस नगर की एक पापिनी स्त्री यह जानकर कि वह फरीसी के घर में भोजन करने बैठा है, संगमरमर के पात्र में इत्र लाई।
Luke 7:38 और उसके पांवों के पास, पीछे खड़ी हो कर, रोती हुई, उसके पांवों को आंसुओं से भिगाने और अपने सिर के बालों से पोंछने लगी और उसके पांव बारबार चूमकर उन पर इत्र मला।
Luke 7:39 यह देखकर, वह फरीसी जिसने उसे बुलाया था, अपने मन में सोचने लगा, यदि यह भविष्यद्वक्ता होता तो जान लेता, कि यह जो उसे छू रही है, वह कौन और कैसी स्त्री है? क्योंकि वह तो पापिनी है।
Luke 7:40 यह सुन यीशु ने उसके उत्तर में कहा; कि हे शमौन मुझे तुझ से कुछ कहना है वह बोला, हे गुरू कह।
Luke 7:41 किसी महाजन के दो देनदार थे, एक पांच सौ, और दूसरा पचास दीनार धारता था।
Luke 7:42 जब कि उन के पास पटाने को कुछ न रहा, तो उसने दोनों को क्षमा कर दिया: सो उन में से कौन उस से अधिक प्रेम रखेगा।
Luke 7:43 शमौन ने उत्तर दिया, मेरी समझ में वह, जिस का उसने अधिक छोड़ दिया: उसने उस से कहा, तू ने ठीक विचार किया है।
Luke 7:44 और उस स्त्री की ओर फिरकर उसने शमौन से कहा; क्या तू इस स्त्री को देखता है मैं तेरे घर में आया परन्तु तू ने मेरे पांव धोने के लिये पानी न दिया, पर इस ने मेरे पांव आंसुओं से भिगाए, और अपने बालों से पोंछा!
Luke 7:45 तू ने मुझे चूमा न दिया, पर जब से मैं आया हूं तब से इस ने मेरे पांवों का चूमना न छोड़ा।
Luke 7:46 तू ने मेरे सिर पर तेल नहीं मला; पर इस ने मेरे पांवों पर इत्र मला है।
Luke 7:47 इसलिये मैं तुझ से कहता हूं; कि इस के पाप जो बहुत थे, क्षमा हुए, क्योंकि इस ने बहुत प्रेम किया; पर जिस का थोड़ा क्षमा हुआ है, वह थोड़ा प्रेम करता है।
Luke 7:48 और उसने स्त्री से कहा, तेरे पाप क्षमा हुए।
Luke 7:49 तब जो लोग उसके साथ भोजन करने बैठे थे, वे अपने अपने मन में सोचने लगे, यह कौन है जो पापों को भी क्षमा करता है?
Luke 7:50 पर उसने स्त्री से कहा, तेरे विश्वास ने तुझे बचा लिया है, कुशल से चली जा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 37-39
  • 2 पतरस 2



गुरुवार, 5 अप्रैल 2018

छोड़ न दें



   सन 1986 में जौन पाईपर ने एक बड़े चर्च के पादरी होने के पद को लगभग छोड़ ही दिया था। उन्होंने अपनी डायरी में उस समय के विषय में लिखा, “मैं बहुत निराश हो चुका हूँ। मैं अपने आप को बिलकुल खाली अनुभव करता हूँ। मुझे लगता है कि मेरे चारों ओर विरोधी भरे पड़े हैं।” लेकिन पाईपर ने छोड़ नहीं दिया, और परमेश्वर ने उसे एक फलती-फूलती सेवकाई का, जिसके प्रभाव उसके अपने चर्च से बहुत बाहर तक अनुभव किए गए, नेतृत्व करने के लिए सक्षम और प्रयोग किया।

   यद्यपि सफलता एक ऐसा शब्द है जिसे सरलता से गलत समझा जा सकता है, लेकिन हम जौन पाईपर की सेवकाई को एक सफल सेवकाई कह सकते हैं। परन्तु यदि उसकी सेवकाई कभी फलती-फूलती न हुई होती तो?

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता के विषय देखते हैं कि उसे लड़कपन में ही परमेश्वर ने अपनी सेवकाई के लिए बुला लिया, और उसे आश्वस्त करने तथा उसकी घबराहट का निवारण करने के लिए परमेश्वर ने यिर्मयाह को बताया कि, “गर्भ में रचने से पहिले ही मैं ने तुझ पर चित्त लगाया, और उत्पन्न होने से पहिले ही मैं ने तुझे अभिषेक किया; मैं ने तुझे जातियों का भविष्यद्वक्ता ठहराया” (यिर्मयाह 1:5)।

   परन्तु बाद में अपनी सेवकाई के विषय, अपने बुलाए जाने को लेकर, यिर्मयाह विलाप करता है, “हे मेरी माता, मुझ पर हाय, कि तू ने मुझ ऐसे मनुष्य को उत्पन्न किया जो संसार भर से झगड़ा और वादविवाद करने वाला ठहरा है!” (यिर्मयाह 15:10), जो कि जन्म से पहले ही परमेश्वर की सेवकाई के लिए चुन लिए और बुलाए गए किसी व्यक्ति के लिए विचित्र बात है।

   परमेश्वर ने, अपने वायदे के अनुसार, यिर्मयाह की रक्षा अवश्य करी, परन्तु उसकी सेवकाई कभी भी फलती-फूलती नहीं हुई। उसके लोगों ने कभी उसकी नहीं सुनी, उन्होंने कभी पश्चाताप नहीं किया; उसने उनका संहार होते हुए, उन्हें गुलाम बनाकर ले जाए जाते हुए, देश से भगाए जाकर इधर-उधर तित्तर-बित्तर होते हुए देखा। परन्तु आजीवन निराशा और तिरिस्कार झेलने के बावजूद वह कभी अपनी सेवकाई छोड़ कर चला नहीं गया। वह जानता था कि परमेश्वर ने उसे सफल होने के लिए नहीं, वरन विश्वासयोग्य रहने के लिए बुलाया है। उसने अपने बुलाने वाले परमेश्वर पर भरोसा किया। विरोध और तिरस्कार के बावजूद यिर्मयाह की अपने लोगों के प्रति बनी रहने वाली करुणा, उसे बुलाने और सक्षम करने वाले परमेश्वर के हृदय को दिखाती है, जो सदा इसी प्रतीक्षा में रहता है कि सब जन अपने पापों से फिरकर उसकी ओर लौट कर आ जाएँ। - टिम गुस्ताफासन


जल्दी ही आशा छोड़ देने से सचेत रहें। 
हमारी भावनाएँ भरोसेमंद मार्गदर्शक नहीं हैं। - जौन पाईपर

मैं एक हठीली जाति के लोगों की ओर दिन भर हाथ फैलाए रहा, जो अपनी युक्तियों के अनुसार बुरे मार्गों में चलते हैं। - यशायाह 65:2

बाइबल पाठ: यिर्मयाह 1:4-10
Jeremiah 1:4 तब यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा,
Jeremiah 1:5 गर्भ में रचने से पहिले ही मैं ने तुझ पर चित्त लगाया, और उत्पन्न होने से पहिले ही मैं ने तुझे अभिषेक किया; मैं ने तुझे जातियों का भविष्यद्वक्ता ठहराया।
Jeremiah 1:6 तब मैं ने कहा, हाय, प्रभु यहोवा! देख, मैं तो बोलना ही नहीं जानता, क्योंकि मैं लड़का ही हूँ।
Jeremiah 1:7 परन्तु यहोवा ने मुझ से कहा, मत कह कि मैं लड़का हूँ; क्योंकि जिस किसी के पास मैं तुझे भेजूं वहां तू जाएगा, और जो कुछ मैं तुझे आज्ञा दूं वही तू कहेगा।
Jeremiah 1:8 तू उनके मुख को देखकर मत डर, क्योंकि तुझे छुड़ाने के लिये मैं तेरे साथ हूँ, यहोवा की यही वाणी है।
Jeremiah 1:9 तब यहोवा ने हाथ बढ़ाकर मेरे मुंह को छुआ; और यहोवा ने मुझ से कहा, देख, मैं ने अपने वचन तेरे मुंह में डाल दिए हैं।
Jeremiah 1:10 सुन, मैं ने आज के दिन तुझे जातियों और राज्यों पर अधिकारी ठहराया है; उन्हें गिराने और ढा देने के लिये, नाश करने और काट डालने के लिये, या उन्हें बनाने और रोपने के लिये।


एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 1-3
  • लूका 8:26-56