ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

शाँति लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
शाँति लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 3 अक्टूबर 2013

स्वर्गीय चँगाई

   थॉमस मूर (1779-1852) आयरलैंड के रहने वाले एक मसीही विश्वासी, गीत लेखक, गायक और कवि थे। उन्हें गाते हुए सुनने से या उनके गीतों को गाने से उनकी यह प्रतिभाएं अनेकों लोगों के लिए बहुत आनन्द और शान्ति का कारण रहीं। किंतु थॉमस मूर का व्यक्तिगत जीवन बार बार आने वाले दुखों से भरा था, जिसमें उनके जीते जी ही उनके पाँचों बच्चों की मृत्यु हो जाना भी सम्मिलित है। मूर द्वारा सहे गए इन भिन्न दुखों को स्मरण रखते हुए उनके द्वारा लिखे एक गीत की पंक्तियों से परमेश्वर प्रभु यीशु में उनके विश्वास की दृढ़ता का पता चलता है तथा ये पंकतियाँ और भी मार्मिक हो जाती हैं: "यहाँ अपने घायल मनों को लाएं, अपनी व्यथा को बताएं; पृथ्वी के पास ऐसा कोई दुख नहीं है, स्वर्ग के पास जिसका समाधान नहीं है।" उनका यह हृदय स्पर्शी छंद हमें स्मरण दिलाता है कि प्रार्थना में परमेश्वर के साथ मिलना हमारे घायल मनों को स्वस्थ करता है।

   प्रेरित पौलुस ने भी दुखी लोगों को परमेश्वर से मिलने वाली सांत्वना और सामर्थ का उल्लेख करते हुए कुरिन्थुस की मण्डली को लिखा: "हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर, और पिता का धन्यवाद हो, जो दया का पिता, और सब प्रकार की शान्‍ति का परमेश्वर है। वह हमारे सब क्‍लेशों में शान्‍ति देता है; ताकि हम उस शान्‍ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्हें भी शान्‍ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्‍लेश में हों।" (2 कुरिन्थियों 1:3-4)। कभी कभी हम अपने दुखों में अपने आप को इतना समेट लेते हैं कि हमें सच्ची और स्थाई शान्ति देने वाले परमेश्वर से अपने आप को दूर कर लेते हैं। ऐसे में हमें परमेश्वर से मिलने वाली शान्ति और सांत्वना को स्मरण करके प्रार्थना में पुनः उसके साथ अपने संबंध को ठीक कर लेना चाहिए।

   जैसे जैसे हम अपने परमेश्वर पिता के सामने अपने दिल खोल कर सच्चे, आज्ञाकारी और समर्पित मन के साथ उससे अपने दुखों का बयान करते जाएंगे, उससे शान्ति, सामर्थ और समाधान हमें प्राप्त होता जाएगा और हमारे घायल मन उसकी स्वर्गीय चँगाई को अनुभव करने लग जाएंगे। वास्तव में "पृथ्वी के पास ऐसा कोई दुख नहीं है, स्वर्ग के पास जिसका समाधान नहीं है"। - डेनिस फिशर


प्रार्थना ही वह भूमि है जिसमें आशा और चंगाई सबसे अच्छे फलते-फूलते हैं।

अब प्रभु जो शान्‍ति का सोता है आप ही तुम्हें सदा और हर प्रकार से शान्‍ति दे: प्रभु तुम सब के साथ रहे। (2 थिसुलुनिकीयों 3:16)

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 1:1-10
2 Corinthians 1:1 पौलुस की ओर से जो परमेश्वर की इच्छा से मसीह यीशु का प्रेरित है, और भाई तीमुथियुस की ओर से परमेश्वर की उस कलीसिया के नाम जो कुरिन्थुस में है; और सारे अखया के सब पवित्र लोगों के नाम। 
2 Corinthians 1:2 हमारे पिता परमेश्वर और प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शान्‍ति मिलती रहे। 
2 Corinthians 1:3 हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर, और पिता का धन्यवाद हो, जो दया का पिता, और सब प्रकार की शान्‍ति का परमेश्वर है। 
2 Corinthians 1:4 वह हमारे सब क्‍लेशों में शान्‍ति देता है; ताकि हम उस शान्‍ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्हें भी शान्‍ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्‍लेश में हों। 
2 Corinthians 1:5 क्योंकि जैसे मसीह के दुख हम को अधिक होते हैं, वैसे ही हमारी शान्‍ति भी मसीह के द्वारा अधिक होती है। 
2 Corinthians 1:6 यदि हम क्‍लेश पाते हैं, तो यह तुम्हारी शान्‍ति और उद्धार के लिये है और यदि शान्‍ति पाते हैं, तो यह तुम्हारी शान्‍ति के लिये है; जिस के प्रभाव से तुम धीरज के साथ उन क्‍लेशों को सह लेते हो, जिन्हें हम भी सहते हैं। 
2 Corinthians 1:7 और हमारी आशा तुम्हारे विषय में दृढ़ है; क्योंकि हम जानते हैं, कि तुम जैसे दुखों के वैसे ही शान्‍ति के भी सहभागी हो। 
2 Corinthians 1:8 हे भाइयों, हम नहीं चाहते कि तुम हमारे उस क्‍लेश से अनजान रहो, जो आसिया में हम पर पड़ा, कि ऐसे भारी बोझ से दब गए थे, जो हमारी सामर्थ से बाहर था, यहां तक कि हम जीवन से भी हाथ धो बैठे थे। 
2 Corinthians 1:9 वरन हम ने अपने मन में समझ लिया था, कि हम पर मृत्यु की आज्ञा हो चुकी है कि हम अपना भरोसा न रखें, वरन परमेश्वर का जो मरे हुओं को जिलाता है। 
2 Corinthians 1:10 उसी ने हमें ऐसी बड़ी मृत्यु से बचाया, और बचाएगा; और उस से हमारी यह आशा है, कि वह आगे को भी बचाता रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 17-19 
  • इफिसियों 5:17-33


बुधवार, 2 अक्टूबर 2013

शाँत स्थान

   गायक मैग हचिन्सन ने एक बार कहा, "मेरा अगला रिकॉर्ड 45 मिनिट तक शाँत रहने का होना चाहिए क्योंकि समाज में शाँत वातावरण की बहुत कमी है"। यह बात सही है; शाँत स्थान पाना वास्तव में बहुत कठिन होता जा रहा है। शहर वहाँ रहने वाले लोगों और चहल-पहल के कारण शोर से भर गए हैं और उनमें ऊँची आवाज़ में बजने वाले संगीत, ऊँची आवाज़ में बोलने वाले लोगों और तरह तरह की मशीनों के शोर से बचने का कोई तरीका सूझ नहीं पड़ता।

   यदि हम बाहरी शोर से पीड़ित हैं तो कितने ही ऐसे भी हैं जो अपने अन्दर के शोर से परेशान हैं, ऐसा शोर जो हमारी आध्यात्मिक सेहत के लिए हानिकारक है। विचित्र बात तो यह है कि ऐसे शोर को अकसर हम स्वयं ही अपने अन्दर आमंत्रित करते हैं। कुछ लोग आत्मिक एकाकीपन से बचने के लिए शोर को प्रयोग करते हैं - टी०वी० और रेडियो कार्यक्रमों के शोर को अपने जीवनों में आमंत्रित करके; उन्हें लगता है कि टी०वी० और रेडियो कार्यक्रमों के प्रस्तुतकर्ता और कलाकार उन्हें संगति दे रहे हैं और वे उन के साथ अपना समय व्यतीत करना चाहते हैं। कुछ इस शोर को अपने विचारों को दबाने के लिए प्रयोग करते हैं - दूसरों के विचार और आवाज़ें उनके स्वयं के मन की आवाज़ से बचने और उसे दबाए रखने का माध्यम बन जाती हैं। कुछ अन्य लोग शोर का प्रयोग परमेश्वर की आवाज़ को अनसुना करने के लिए करते हैं; वे अपने मनों को संसार की बातों के शोर से इतना भर लेते हैं कि परमेश्वर की आवाज़ को सुनना उनके लिए कठिन हो जाता है। कुछ ऐसे भी हैं जो परमेश्वर और आध्यात्म के बारे में इतना बोलते रहते हैं कि वे स्वयं भी यह नहीं सुन पाते कि परमेश्वर वास्तव में उन से कह क्या रहा है; उनके लिए परमेश्वर तथा आध्यत्म पर उनके विचार और उन विचारों के प्रचार द्वारा मिलने वाली संसार कि वाह-वाही, इज़्ज़त, शोहरत, समाज में वर्चस्व और सांसारिक वस्तुएं ऐसे हो महत्वपूर्ण हो जाते हैं कि परमेश्वर की आवाज़ के लिए उनके कान बन्द हो जाते हैं।

   लेकिन प्रभु यीशु के लिए ऐसा नहीं था। प्रभु यीशु चाहे कितने भी व्यस्त क्यों ना हों, उन्होंने सदा ही एक ऐसे शाँत स्थान को खोजा जहाँ वे संसार के शोर से दूर परमेश्वर पिता के साथ वार्तालाप कर सकें (मरकुस 1:35)। परमेश्वर पिता के साथ किसी शाँत स्थान पर और शाँत मन के साथ यही वार्तालाप हम मसीही विश्वासियों के लिए भी उतना ही अनिवार्य और आवश्यक है। चाहे हम कोई ऐसा स्थान ना भी ढूँढ़ पाएं जो बिलकुल शाँत है, हमें ऐसा स्थान अवश्य बनाना होगा जहाँ हमारा मन शाँत रह सके (भजन 131:2); एक ऐसा स्थान जहाँ हमारा सारा ध्यान केवल परमेश्वर पिता पर ही हो और वह हम से बातचीत कर सके। - जूली ऐकैरमैन लिंक


संसार के शोर को अपने लिए परमेश्वर की आवाज़ को दबाने मत दीजिए।

निश्चय मैं ने अपने मन को शान्त और चुप कर दिया है, जैसे दूध छुड़ाया हुआ लड़का अपनी मां की गोद में रहता है, वैसे ही दूध छुड़ाए हुए लड़के के समान मेरा मन भी रहता है। - भजन 131:2

बाइबल पाठ: मरकुस 1:35-45
Mark 1:35 और भोर को दिन निकलने से बहुत पहिले, वह उठ कर निकला, और एक जंगली स्थान में गया और वहां प्रार्थना करने लगा।
Mark 1:36 तब शमौन और उसके साथी उस की खोज में गए।
Mark 1:37 जब वह मिला, तो उस से कहा; कि सब लोग तुझे ढूंढ रहे हैं।
Mark 1:38 उस ने उन से कहा, आओ; हम और कहीं आस पास की बस्‍तियों में जाएं, कि मैं वहां भी प्रचार करूं, क्योंकि मैं इसी लिये निकला हूं।
Mark 1:39 सो वह सारे गलील में उन की सभाओं में जा जा कर प्रचार करता और दुष्टात्माओं को निकालता रहा।
Mark 1:40 और एक कोढ़ी ने उसके पास आकर, उस से बिनती की, और उसके साम्हने घुटने टेककर, उस से कहा; यदि तू चाहे तो मुझे शुद्ध कर सकता है।
Mark 1:41 उसने उस पर तरस खाकर हाथ बढ़ाया, और उसे छूकर कहा; मैं चाहता हूं तू शुद्ध हो जा।
Mark 1:42 और तुरन्त उसका कोढ़ जाता रहा, और वह शुद्ध हो गया।
Mark 1:43 तब उसने उसे चिताकर तुरन्त विदा किया।
Mark 1:44 और उस से कहा, देख, किसी से कुछ मत कहना, परन्तु जा कर अपने आप को याजक को दिखा, और अपने शुद्ध होने के विषय में जो कुछ मूसा ने ठहराया है उसे भेंट चढ़ा, कि उन पर गवाही हो।
Mark 1:45 परन्तु वह बाहर जा कर इस बात को बहुत प्रचार करने और यहां तक फैलाने लगा, कि यीशु फिर खुल्लमखुल्ला नगर में न जा सका, परन्तु बाहर जंगली स्थानों में रहा; और चहुं ओर से लागे उसके पास आते रहे।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 14-16 
  • इफिसियों 5:1-16