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रविवार, 25 मार्च 2018

आज्ञाकारी



   प्रभु यीशु ने फोटोग्राफी और वीडियो बनाने के आविष्कार होने से पहले जन्म क्यों लिया? यदि सब उसे देखने पाते तो क्या उसकी पहुँच और व्यापक नहीं होती? आखिरकार, एक तस्वीर हज़ार शब्दों से अधिक मूल्यवान होती है।

   लेकिन रवि ज़कर्यास कहते हैं, “नहीं”; और प्रमाण के रूप में वे कवि रिचर्ड क्रैशौ की प्रसिद्ध पंक्ति, “जल ने अपने स्वामी को देखा और शर्मा गया” को उध्दृत करते हैं। इस एक पंक्ति में क्रैशौ ने प्रभु यीशु के पहले आश्चर्यकर्म (यूहन्ना 2:1-11) के सार को समेट लिया है – सृष्टि भी प्रभु यीशु को सृष्टिकर्ता मानती है। कोई मात्र बढ़ई जल को दाखरस में परिवर्तित नहीं कर सकता था।

   एक अन्य समय पर, जब मसीह यीशु ने तूफ़ान को “शान्त रह, थम जा” कह कर शान्त कर दिया तो उसके शिष्य स्तब्ध होकर पूछने लगे, “यह कौन है कि आँधी और पानी भी उसकी आज्ञा मानते हैं?” (मरकुस 4:39, 41)। एक और बार, प्रभु यीशु ने फरीसियों से कहा कि यदि एकत्रित लोग उसकी आराधना करने के लिए मुँह नहीं खोलेंगे, तो “पत्थर चिल्ला उठेंगे” (लूका 19:40); पत्थर भी जानते हैं कि वह कौन है।

   यूहन्ना हमें प्रभु यीशु के विषय में बताता है : “और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण हो कर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उस की ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा” (यूहन्ना 1:14)। प्रभु के अपने प्रत्यक्षदर्शी अनुभव के आधार पर यूहन्ना ने यह भी लिखा, “उस जीवन के वचन के विषय में जो आदि से था, जिसे हम ने सुना, और जिसे अपनी आंखों से देखा, वरन जिसे हम ने ध्यान से देखा; और हाथों से छूआ” (1 यूहन्ना 1:1)। यूहन्ना के समान, औरों का प्रभु यीशु से परिचय करवाने के लिए, जिसकी आज्ञाकारिता आँधी, जल और सृष्टि भी करते हैं, हम भी अपने शब्दों को प्रयोग कर सकते हैं। - टिम गुस्ताफ्सन


लिखित वचन, जीवित वचन को प्रगट करता है।

वह [प्रभु यीशु] तो अदृश्य परमेश्वर का प्रतिरूप और सारी सृष्‍टि में पहिलौठा है। क्योंकि उसी में सारी वस्‍तुओं की सृष्‍टि हुई, स्वर्ग की हो अथवा पृथ्वी की, देखी या अनदेखी, क्या सिंहासन, क्या प्रभुतांए, क्या प्रधानताएं, क्या अधिकार, सारी वस्तुएं उसी के द्वारा और उसी के लिये सृजी गई हैं। - कुलुस्सियों1:15-16

बाइबल पाठ: यूहन्ना 1:1-14
John 1:1 आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था।
John 1:2 यही आदि में परमेश्वर के साथ था।
John 1:3 सब कुछ उसी के द्वारा उत्पन्न हुआ और जो कुछ उत्पन्न हुआ है, उस में से कोई भी वस्तु उसके बिना उत्पन्न न हुई।
John 1:4 उस में जीवन था; और वह जीवन मुनष्यों की ज्योति थी।
John 1:5 और ज्योति अन्धकार में चमकती है; और अन्धकार ने उसे ग्रहण न किया।
John 1:6 एक मनुष्य परमेश्वर की ओर से आ उपस्थित हुआ जिस का नाम यूहन्ना था।
John 1:7 यह गवाही देने आया, कि ज्योति की गवाही दे, ताकि सब उसके द्वारा विश्वास लाएं।
John 1:8 वह आप तो वह ज्योति न था, परन्तु उस ज्योति की गवाही देने के लिये आया था।
John 1:9 सच्ची ज्योति जो हर एक मनुष्य को प्रकाशित करती है, जगत में आनेवाली थी।
John 1:10 वह जगत में था, और जगत उसके द्वारा उत्पन्न हुआ, और जगत ने उसे नहीं पहिचाना।
John 1:11 वह अपने घर आया और उसके अपनों ने उसे ग्रहण नहीं किया।
John 1:12 परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं।
John 1:13 वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं।
John 1:14 और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण हो कर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उस की ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा।


एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू 19-21
  • लूका 2:25-52



सोमवार, 30 अक्टूबर 2017

आँधी-तूफान


   परमेश्वर के वचन बाइबल में मरकुस रचित सुसमाचार में हम एक प्रचण्ड तूफान के बारे में पढ़ते हैं। शिष्य प्रभु यीशु के साथ थे, और वे नाव द्वारा गलील के सागर के पार जा रहे थे, कि वे एक बड़ी आँधी में फंस गए। उन शिष्यों में से कुछ अनुभवी मछुआरे भी थे, परन्तु वे भी आँधी के वेग को देख कर डर गए (मरकुस 4:37-38)। उन शिष्यों के मनों में विचार उठने लगे, क्या परमेश्वर को हमारी कोई चिंता नहीं है? क्या वे प्रभु यीशु द्वारा चुने और नियुक्त किए हुए तथा प्रभु के करीबी नहीं थे? क्या झील के पार जाने में वे प्रभु की आज्ञा का पालन नहीं कर रहे थे? तो फिर उन्हें ऐसी बड़ी आँधी-तूफान का सामना क्यों करना पड़ रहा था?

   जीवन में आँधी-तूफान के अनुभव से कोई अछूता नहीं है। परन्तु जैसे वे शिष्य पहले आँधी से डरे परन्तु फिर उस आँधी के अनुभव के कारण ही प्रभु यीशु के प्रति उनकी श्रद्धा और भी अधिक बढ़ गई, उसी प्रकार जब हम अपने जीवनों में आँधी-तूफानों का सामना करते हैं, तो परमेश्वर और उसके कार्यों के प्रति हमारी समझ और गहरी हो जाती है। उन शिष्यों के मन में कौतहूल था, "यह कौन है, कि आन्‍धी और पानी भी उस की आज्ञा मानते हैं?" (मरकुस 4:41)। हमारे जीवनों में आने वाले आँधी-तूफानों से हम सीख सकते हैं कि हमारे जीवन का कोई आँधी-तूफान प्रभु परमेश्वर को अपनी इच्छा पूरी करने से नहीं रोक सकता है (मरकुस 5:1)।

   चाहे हम यह नहीं समझ पाएं कि प्रभु परमेश्वर हमारे जीवनों में आँधी-तूफानों क्यों आने देता है, परन्तु हम उसके धन्यवादी हो सकते हैं कि उन में हो कर हम उसके बारे में और अधिक सीख सकते हैं। हर परिस्थिति हमें सिखाती है कि हमारा प्रभु परमेश्वर सदा हमारा ध्यान रखता है, हमारी देखभाल करता है, और हमारी भलाई ही के लिए कार्य करता है। - एल्बर्ट ली


हमारे जीवन के लंगर की सामर्थ्य आँधी-तूफानों में ही प्रकट होती है।

और इस कारण तुम मगन होते हो, यद्यपि अवश्य है कि अब कुछ दिन तक नाना प्रकार की परीक्षाओं के कारण उदास हो। और यह इसलिये है कि तुम्हारा परखा हुआ विश्वास, जो आग से ताए हुए नाशमान सोने से भी कहीं, अधिक बहुमूल्य है, यीशु मसीह के प्रगट होने पर प्रशंसा, और महिमा, और आदर का कारण ठहरे। - 1 पतरस 1:6-7

बाइबल पाठ: मरकुस 4:35-5:1
Mark 4:35 उसी दिन जब सांझ हुई, तो उसने उन से कहा; आओ, हम पार चलें,। 
Mark 4:36 और वे भीड़ को छोड़कर जैसा वह था, वैसा ही उसे नाव पर साथ ले चले; और उसके साथ, और भी नावें थीं। 
Mark 4:37 तब बड़ी आन्‍धी आई, और लहरें नाव पर यहां तक लगीं, कि वह अब पानी से भरी जाती थी। 
Mark 4:38 और वह आप पिछले भाग में गद्दी पर सो रहा था; तब उन्होंने उसे जगाकर उस से कहा; हे गुरू, क्या तुझे चिन्‍ता नहीं, कि हम नाश हुए जाते हैं? 
Mark 4:39 तब उसने उठ कर आन्‍धी को डांटा, और पानी से कहा; “शान्‍त रह, थम जा”: और आन्‍धी थम गई और बड़ा चैन हो गया। 
Mark 4:40 और उन से कहा; तुम क्यों डरते हो? क्या तुम्हें अब तक विश्वास नहीं? 
Mark 4:41 और वे बहुत ही डर गए और आपस में बोले; यह कौन है, कि आँधी और पानी भी उस की आज्ञा मानते हैं? 
Mark 5:1 और वे झील के पार गिरासेनियों के देश में पहुंचे।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 20-21
  • 2 तिमुथियुस 4