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शनिवार, 26 नवंबर 2011

आपका हाथ परमेश्वर के हाथ

   ब्रिटिश साम्राज्य को सन १९३९ में दिए गए अपने क्रिस्मस के सन्देश का अन्त तत्कालीन सम्राट जौर्ज (शष्टम) ने परमेश्वर की अगुवाई पर अपने विश्वास के बारे में बताकर किया। उस समय दूसरा विश्वयुद्ध आरंभ हो चुका था और हिटलर की सेनाएं ब्रिटेन पर भारी प्रहार कर रहीं थीं। सम्राट ने अपना सन्देश मिनि लुइस हैस्किन्स द्वारा लगभग ३० वर्ष पूर्व लिखित पंक्तियों के साथ समाप्त किया। मिनि ने लिखा था: "मैंने नव वर्ष के द्वार पर खड़े द्वारपाल से कहा, ’मुझे एक बत्ती दो कि मैं इस अन्जान स्थान में सुरक्षित चल सकूँ’; द्वारपाल ने उत्तर दिया ’अन्धकार में जाओ और अपना हाथ परमेश्वर के हाथ में दे दो। यह तुम्हारे लिए किसी भी बत्ती या जानी-पहचानी राह पर चलने से बेहतर होगा’ "।

   जैसे १९३९ में ब्रिटिश साम्राज्य अनिश्चितता के कगार पर खड़ा था, वैसे ही हम में से प्रत्येक एक ऐसे भविष्य के सामने खड़ा है जिसका पहचान चिन्ह है ’सतत परिवर्तन’ संभवतः आशंकापुर्ण परिस्थितियों के साथ। किंतु मसीही विश्वासी के साथ अनिश्चितता के घोर अन्धकार में भी उसके मार्गदर्शन के लिए एक विश्वासयोग्य और कभी न गलती करने वाला एक सहायक है; भजनकार ने उसी के विषय में लिखा: "तो वहां भी तू अपने हाथ से मेरी अगुवाई करेगा, और अपने दाहिने हाथ से मुझे पकड़े रहेगा" (भजन १३९:१०)।

   परमेश्वर के लिए कुछ अप्रत्याशित नहीं है, कोई मार्ग अनजाना नहीं है, कोई परिस्थिति विचिलित कर देने वाली नहीं है। क्योंकि हमारे परमेश्वर पिता के सामने भविष्य बिलकुल स्पष्ट है, प्रत्येक मसीही विश्वासी पूरे भरोसे के साथ जहाँ परमेश्वर ले जाए निश्चिंत हो कर जा सकता है, चाहे मार्ग में तूफान हों अथवा शांति।

   हम पूरे विश्वास के साथ अपने हाथ परमेश्वर के हाथ में रख सकते हैं क्योंकि वही परमेश्वर हमारे भूतकाल को क्षमा, वर्तमान को नियंत्रित तथा भविष्य को निर्धारित करता है। - पौल वैन गोर्डर


जो लोग हर बात में परमेश्वर का हाथ देखते हैं वि निश्चिंत हो कर हर बात परमेश्वर के हाथ में छोड़ सकते हैं।

तो वहां भी तू अपने हाथ से मेरी अगुवाई करेगा, और अपने दाहिने हाथ से मुझे पकड़े रहेगा। - भजन १३९:१०

बाइबल पाठ: भजन १३९:१-१२
    Psa 139:1  हे यहोवा, तू ने मुझे जांच कर जान लिया है।
    Psa 139:2  तू मेरा उठना बैठना जानता है; और मेरे विचारों को दूर ही से समझ लेता है।
    Psa 139:3  मेरे चलने और लेटने की तू भली भांति छानबीन करता है, और मेरी पूरी चालचलन का भेद जानता है।
    Psa 139:4  हे यहोवा, मेरे मुंह में ऐसी कोई बात नहीं जिसे तू पूरी रीति से न जानता हो।
    Psa 139:5  तू ने मुझे आगे पीछे घेर रखा है, और अपना हाथ मुझ पर रखे रहता है।
    Psa 139:6  यह ज्ञान मेरे लिये बहुत कठिन है; यह गम्भीर और मेरी समझ से बाहर है।
    Psa 139:7  मैं तेरे आत्मा से भागकर किधर जाऊं? वा तेरे साम्हने से किधर भागूं?
    Psa 139:8  यदि मैं आकाश पर चढूं, तो तू वहां है! यदि मैं अपना बिछौना अधोलोक में बिछाऊं तो वहां भी तू है!
    Psa 139:9  यदि मैं भोर की किरणों पर चढ़ कर समुद्र के पार जा बसूं,
    Psa 139:10  तो वहां भी तू अपने हाथ से मेरी अगुवाई करेगा, और अपने दाहिने हाथ से मुझे पकड़े रहेगा।
    Psa 139:11  यदि मैं कहूं कि अन्धकार में तो मैं छिप जाऊंगा, और मेरे चारों ओर का उजियाला रात का अन्धेरा हो जाएगा,
    Psa 139:12  तौभी अन्धकार तुझ से न छिपाएगा, रात तो दिन के तुल्य प्रकाश देगी; क्योंकि तेरे लिये अन्धियारा और उजियाला दोनों एक समान हैं।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल २७-२९ 
  • १ पतरस ३

शुक्रवार, 25 नवंबर 2011

तिरिस्कार न करें, सुधारें

   कुछ वर्ष पहले की घटना है, एक मानसिक सन्तुलन खो चुका व्यक्ति दौड़ता हुआ ऐम्सटरडैम के एक अजायब घर में आया और विश्व-विख्यात कलाकार रेमब्रां के प्रसिद्ध चित्र Nightwatch पर आकर, अपनी जेब से एक चाकू निकाला और उस चित्र पर वार करके उसमें कई काटे लगा दिये। कुछ समय पश्चात, ऐसी ही एक और घटना में एक विक्षिप्त व्यक्ति रोम के प्रसिद्ध और विशाल सेंट पीटर चर्च में घुसा और मूर्तिकार माईकिलैंजलो की प्रसिद्ध और सुन्दर शिल्प The Pieta को तोड़ डाला।

   क्या अजायब घर और चर्च के रख-रखाव करने वालों ने इन बेमिसाल और अन्मोल कलाकृतियों को इस नुक्सान के कारण अब व्यर्थ और बेमोल समझ लिया और उन्हें कूड़े में फेंक दिया? कदापि नहीं; उन्होंने संसार में उपलब्ध सबसे उत्तम तकनीक और विशेषज्ञों की सहायता ली और फिर से उन्होंने इन बेश्कीमती कलाकृतियों को जहाँ तक संभव था पुनःस्थापित करने का पूरा पूरा प्रयास किया और अपने पास फिर संजो कर रख लिया।

   मसीही विश्वासियों को भी यही रवैया अपने उन साथियों के प्रति रखना चाहिए जिनकी गवाही किसी पाप द्वारा बिगड़ गई है। जब कोई परमेश्वर की सन्तान पाप में फंसती है, तो हमारा पहला प्रयास उसकी निन्दा करने का नहीं वरन उसे पुनःस्थापित करने का होना चाहिए। नम्रता और हमदर्दी के साथ हमें प्रार्थना और सहायता द्वारा उसे आत्मिक रूप से फिर से खड़े करने और मसीही संगति में स्थापित करने का प्रयास करना चाहिए। मूल युनानी भाषा में जो शब्द गलतियों ६:१ में पु्नःस्थापित करने के लिए प्रयोग हुआ है, वही शब्द मत्ती ४:२१ में मछुआरों द्वारा अपने जाल सुधारने के लिए प्रयोग हुआ है। इस शब्द का अर्थ होता है पूरी तरह से ठीक कर देना।

   निन्दा करना सुधारने से अधिक सरल होता है। अपनी विरक्ति और घृणा में हमारी इच्छा एक पाप करने वाले मसीही से अपना मूँह फेर लेने की हो सकती है, किंतु परमेश्वर के वचन की सलाह निन्दा और तिरिस्कार नहीं सुधारना और अपनाना है, जैसे प्रभु यीशु मसीह ने भी हमें तथा पाप में पड़े समस्त संसार को सुधारने और अपनाने के लिए अपने प्राण दिये, ना कि नाश होने के लिए छोड़ दिया। - डेव एग्नर

यदि हम किसी को नीची निगाह से देखते रहेंगे तो फिर उसके साथ नज़र मिला कर बात कैसे कर सकेंगे?

हे भाइयों, यदि कोई मनुष्य किसी अपराध में पकड़ा जाए, तो तुम जो आत्मिक हो, नम्रता के साथ ऐसे को संभालो, और अपनी भी चौकसी रखो, कि तुम भी परीक्षा में न पड़ो। - गलतियों ६:१

बाइबल पाठ: गलतियों ६:१-५
    Gal 6:1  हे भाइयों, यदि कोई मनुष्य किसी अपराध में पकड़ा जाए, तो तुम जो आत्मिक हो, नम्रता के साथ ऐसे को संभालो, और अपनी भी चौकसी रखो, कि तुम भी परीक्षा में न पड़ो।
    Gal 6:2  तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो।
    Gal 6:3  क्‍योंकि यदि कोई कुछ न होने पर भी अपने आप को कुछ समझता है, तो अपने आप को धोखा देता है।
    Gal 6:4  पर हर एक अपने ही काम को जांच ले, और तब दूसरे के विषय में नहीं परन्‍तु अपने ही विषय में उसको घमण्‍ड करने का अवसर होगा।
    Gal 6:5  क्‍योंकि हर एक व्यक्ति अपना ही बोझ उठाएगा।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल २४-२६ 
  • १ पतरस २

गुरुवार, 24 नवंबर 2011

पुनःस्थापना

   एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी अवैध पदार्थों के प्रयोग और विक्रय करने के जुर्म में पकड़ा गया और बन्दीगृह में डाल दिया गया। उसके मित्रों ने इस बात के लिए कहा, "कैसी शर्म की बात है; ज़रा सोचो, यदि वह यह काम ना करता तो कितना कुछ प्राप्त कर सकता था, कितना अधिक आनन्द उठा सकता था।"

   इस खिलाड़ी का अपनी प्रतिभा के अनुरूप कार्य ना करना, एक तरह से समस्त मानव जाति का चित्रण है। परमेश्वर ने हमें अपने स्वरूप में बनाया जिससे हम उसकी आज्ञाकारिता में रहकर उसके साथ संगति का आनन्द उठाएं और उसकी महिमा के लिए इस पृथ्वी पर राज्य करें। किंतु ना तो हम जैसा रहना चाहिए वैसे उसकी आज्ञाकारिता में रहते हैं, ना ही उस की संगति का आनन्द लेते हैं और ना ही पृथ्वी पर जैसे हमें राज्य करना चाहिए वैसे राज्य करते हैं। संसार में लगातार बने और बढ़ते हुए अनैतिकता, अपराध, अकाल, आपसी बैर और संघर्ष, संभावित परमाणु युद्ध और विनाश के खतरे लगातार हमें स्मरण दिलाते रहते हैं कि जो प्रतिभा परमेश्वर ने हम में डालीं थीं, हमने उसके अनुरूप कार्य नहीं किया है।

   लेकिन बात यहीं समाप्त नहीं हो जाती। हमारी इस विफलता के बावजूद, परमेश्वर ने हम में से प्रत्येक को अपनी इस नैतिक असफलता से निकल कर आत्मिक सिद्धता तक उठने का मार्ग उपलब्ध कराया है। प्रभु यीशु के रूप में परमेश्वर स्वयं मनुष्य जाति का हिस्सा बन गया, जिसने सिद्ध जीवन जीया, हमारे पापों को अपने ऊपर लेकर हमारे बदले में उनका दण्ड क्रूस की मृत्यु के रूप में सहा और तीसरे दिन मृत्यु पर जयवन्त होकर फिर जीवित हो गया। आज भी वो प्रत्येक उस व्यक्ति को जो उसके इस बलिदान और उद्धार के कार्य को स्वीकार करता है, उसे स्वीकार करता है, उसके पाप क्षमा करता है और उन्हें उस सृजे गए स्वरूप में बहाल करता है। वह अपने प्रत्येक विश्वासी को अपने साथ, अपने आने वाले अनन्त साम्राज्य में, राज्य करने के लिए राजा और पुरोहित बना देता है (प्रकाशितवाक्य १:५, ६)।

   यदि हमें किसी चकनाचूर कर देने वाली हार का भी सामना करना पड़े, तौभी हमें निराषा में पड़े रहने की आवश्यक्ता नहीं है। सुसमाचार हमारे लिए अच्छी खबर है - प्रभु यीशु में विश्वास के द्वारा परमेश्वर हमें नया जीवन देता है, हमें हमारी असफलताओं से निकालता है और पुनः हम में अपने पूर्व-निर्धारित उद्देश्यों की पूर्ति के लिए उठा कर खड़ा करता है। - हर्ब वैण्डर लुग्ट

प्रभु यीशु से मिले उद्धार द्वारा निकम्मे पापी उपयोगी सन्त बन जाते हैं।

और यीशु मसीह की ओर से, जो विश्वासयोग्य साक्षी और मरे हुओं में से जी उठने वालों में पहिलौठा, और पृथ्वी के राजाओं का हाकिम है, तुम्हें अनुग्रह और शान्‍ति मिलती रहे: जो हम से प्रेम रखता है, और जिस ने अपने लोहू के द्वारा हमें पापों से छुड़ाया है। और हमें एक राज्य और अपने पिता परमेश्वर के लिये याजक भी बना दिया; उसी की महिमा और पराक्रम युगानुयुग रहे। आमीन। - प्रकाशितवाक्य १:५, ६

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य १:१-८
    Rev 1:1  यीशु मसीह का प्रकाशितवाक्‍य जो उसे परमेश्वर ने इसलिये दिया, कि अपने दासों को वे बातें, जिन का शीघ्र होना अवश्य है, दिखाए: और उस ने अपने स्‍वर्गदूत को भेज कर उसके द्वारा अपने दास यूहन्ना को बताया।
    Rev 1:2  जिस ने परमेश्वर के वचन और यीशु मसीह की गवाही, अर्थात जो कुछ उस ने देखा था उस की गवाही दी।
    Rev 1:3  धन्य है वह जो इस भविष्यद्वाणी के वचन को पढ़ता है, और वे जो सुनते हैं और इस में लिखी हुई बातों को मानते हैं, क्‍योंकि समय निकट आया है।
    Rev 1:4  यूहन्ना की ओर से आसिया की सात कलीसियाओं के नाम: उस की ओर से जो है, और जो था, और जो आनेवाला है; और उन सात आत्माओं की ओर से, जो उसके सिंहासन के साम्हने है।
    Rev 1:5  और यीशु मसीह की ओर से, जो विश्वासयोग्य साक्षी और मरे हुओं में से जी उठने वालों में पहिलौठा, और पृथ्वी के राजाओं का हाकिम है, तुम्हें अनुग्रह और शान्‍ति मिलती रहे: जो हम से प्रेम रखता है, और जिस ने अपने लोहू के द्वारा हमें पापों से छुड़ाया है।
    Rev 1:6  और हमें एक राज्य और अपने पिता परमेश्वर के लिये याजक भी बना दिया; उसी की महिमा और पराक्रम युगानुयुग रहे। आमीन।
    Rev 1:7  देखो, वह बादलों के साथ आने वाला है; और हर एक आंख उसे देखेगी, वरन जिन्‍होंने उसे बेधा था, वे भी उसे देखेंगे, और पृथ्वी के सारे कुल उसके कारण छाती पीटेंगे। हां। आमीन।
    Rev 1:8  प्रभु परमेश्वर वह जो है, और जो था, और जो आनेवाला है; जो सर्वशक्तिमान है: यह कहता है, कि मैं ही अल्फा और ओमिगा हूं।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल २२-२३ 
  • १ पतरस १

बुधवार, 23 नवंबर 2011

उद्यमी क्षेत्र

   कुछ नगरों में उनके बिगड़े हुए क्षेत्रों को सुधारने के कोई प्रयास देखने को नहीं मिलते और वे क्षेत्र समय के साथ साथ बद से बदतर होते जाते हैं। कुछ अन्य नगरों में इन बिगड़े हुए क्षेत्रों को सुधारने के साहसी प्रयास देखने को मिलते हैं और समय के साथ साथ उन बिगड़े हुए क्षेत्रों की दशा में आशा से भी बहुत अधिक सुधार देखने को मिलता है। ऐसा इसलिए क्योंकि नगर की व्यवस्था के संचालन करने वालों ने इन बिगड़े हुए क्षेत्रों को "उद्यमी क्षेत्र" के रूप में देखना आरंभ किया, जिसके साथ स्वतः ही समय और प्रयास के साथ सुधार हो पाने की संभावना जुड़ जाती है। अपने नगर की समस्याओं को इस नज़रिए से देखने के कारण, वे लोग इसमें सुधार ला पाने की नई संभावनाएं तलाश पाते हैं, बिगड़े हुए को और बिगड़ने नहीं देते और फिर व्यापक सुधार के मार्ग खुलने लगते हैं, कार्यकारी होने लगते हैं और सुधार दिखने भी लगता है।

   मसीही विश्वासियों को भी ऐसा ही नज़रिया अपनाए रखना चाहिए। अपनी असफलताओं के कारण अपने जीवन के कठिन भागों में उन्नति पाने कि बजाए असफलताओं से निराश होकर बैठने वालों को अपनी असफलताओं को "उद्यमी क्षेत्र" के रूप में देखना चाहिए जहाँ निरंतर प्रार्थना और सतत प्रयास रचनात्मक सुधार ला सकता है।

   किसी मसीही विश्वासी को आत्मिक हताशा और विफलता में जीते रहने की आवश्यक्ता नहीं है क्योंकि किसी पाप अथवा असफलता में यह सामर्थ नहीं है कि वह उस पर हावी होकर रह सके। क्रूस पर मसीह यीशु के बलिदान ने, उसके अनुयायियों के जीवन से, पाप के बन्धनों और आधिपत्य को सदा के लिए पराजित कर दिया है (रोमियों ६:१४) और अब संसार कि हर सामर्थ से कहीं अधिक सामर्थी परमेश्वर की सामर्थ प्रत्येक मसीही विश्वासी में निवास करती है "हे बालको, तुम परमेश्वर के हो: और तुम ने उन पर जय पाई है; क्‍योंकि जो तुम में है, वह उस से जो संसार में है, बड़ा है" (१ युहन्ना ४:४)।

   जब कभी हम किसी पाप या कमज़ोरी या असफलता के चंगुल में फंसें तो विश्वास के साथ परमेश्वर की सहायता को पुकारें, उस बात के विषय में अपनी नकारात्मक प्रवृति को सकारात्मक बनाएं, और अपनी असफलता के उस क्षेत्र को "उद्यमी क्षेत्र" बना कर प्रार्थना और प्रयासों द्वारा अपनी असफलता को सफलता में परिवर्तित कर लें। - डेव एग्नर

बीते हुए कल की पराजयों को आते कल के प्रयासों पर हावी ना होने दें।

सो हम क्‍या कहें क्‍या हम पाप करते रहें, कि अनुग्रह बहुत हो? कदापि नहीं, हम जब पाप के लिये मर गए तो फिर आगे को उस में क्‍योंकर जीवन बिताएं? - रोमियों ६:१, २

बाइबल पाठ: रोमियों ६:१-१८
    Rom 6:1  सो हम क्‍या कहें क्‍या हम पाप करते रहें, कि अनुग्रह बहुत हो?
    Rom 6:2  कदापि नहीं, हम जब पाप के लिये मर गए तो फिर आगे को उस में क्‍योंकर जीवन बिताएं?
    Rom 6:3  क्‍या तुम नहीं जानते, कि हम जितनों ने मसीह यीशु का बपतिस्मा लिया तो उस की मृत्यु का बपतिस्मा लिया;
    Rom 6:4  सो उस मृत्यु का बपतिस्मा पाने से हम उसके साथ गाड़े गए, ताकि जैसे मसीह पिता की महिमा के द्वारा मरे हुओं में से जिलाया गया, वैसे ही हम भी नए जीवन की सी चाल चलें।
    Rom 6:5  क्‍योंकि यदि हम उस की मृत्यु की समानता में उसके साथ जुड़ गए हैं, तो निश्‍चय उसके जी उठने की समानता में भी जुड़ जाएंगे।
    Rom 6:6  क्‍योंकि हम जानते हैं कि हमारा पुराना मनुष्यत्‍व उसके साथ क्रूस पर चढ़ाया गया, ताकि पाप का शरीर व्यर्थ हो जाए, ताकि हम आगे को पाप के दासत्‍व में न रहें।
    Rom 6:7  क्‍योंकि जो मर गया, वह पाप से छूट कर धर्मी ठहरा।
    Rom 6:8  सो यदि हम मसीह के साथ मर गए, तो हमारा विश्वास यह है, कि उसके साथ जीएंगे भी।
    Rom 6:9  क्‍योंकि यह जानते हैं, कि मसीह मरे हुओं में से जी उठ कर फिर मरने का नहीं, उस पर फिर मृत्यु की प्रभुता नहीं होने की।
    Rom 6:10  क्‍योंकि वह जो मर गया तो पाप के लिये एक ही बार मर गया; परन्‍तु जो जीवित है, तो परमेश्वर के लिये जीवित है।
    Rom 6:11  ऐसे ही तुम भी अपने आप को पाप के लिये तो मरा, परन्‍तु परमेश्वर के लिये मसीह यीशु में जीवित समझो।
    Rom 6:12  इसलिये पाप तुम्हारे मरणहार शरीर में राज्य न करे, कि तुम उस की लालसाओं के अधीन रहो।
    Rom 6:13  और न अपने अंगो को अधर्म के हथियार होने के लिये पाप को सौंपो, पर अपने आप को मरे हुओं में से जी उठा हुआ जान कर परमेश्वर को सौंपो, और अपने अंगो को धर्म के हथियार होने के लिये परमेश्वर को सौंपो।
    Rom 6:14  और तुम पर पाप की प्रभुता न होगी, क्‍योंकि तुम व्यवस्था के आधीन नहीं वरन अनुग्रह के आधीन हो।
    Rom 6:15  तो क्‍या हुआ? क्‍या हम इसलिये पाप करें, कि हम व्यवस्था के आधीन नहीं बरन अनुग्रह के आधीन हैं? कदापि नहीं।
    Rom 6:16  क्‍या तुम नहीं जानते, कि जिस की आज्ञा मानने के लिये तुम अपने आप को दासों की नाईं सौंप देते हो, उसी के दास हो: और जिस की मानते हो, चाहे पाप के, जिस का अन्‍त मृत्यु है, चाहे आज्ञा मानने के, जिस का अन्‍त धामिर्कता है
    Rom 6:17  परन्‍तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, कि तुम जो पाप के दास थे तौभी मन से उस उपदेश के मानने वाले हो गए, जिस के सांचे में ढाले गए थे।
    Rom 6:18  और पाप से छुड़ाए जाकर धर्म के दास हो गए।
एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल २०-२१ 
  • याकूब ५

मंगलवार, 22 नवंबर 2011

अगला प्रयास सर्वोत्तम होगा

   मैं जब भी गोल्फ खेलता हूँ तो गलतियाँ करता हूँ, क्योंकि मैं इसे इतना नहीं खेलता कि इसकी सभी बारीकियाँ समझ सकूँ और अपने खेल के स्तर को सुधार सकूँ। जब खेलता हूँ तो कभी गेंद गन्तव्य स्थान की बजाए कहीं और जा गिरती है, कभी निकट बहते किसी पानी की नाले में जा पड़ती है तो कभी बाईं ओर जाने की बजाए दाहिनी ओर घूम जाती है।

   इसलिए मुझे ग्रांटलैंड राइस द्वारा अपनी पुस्तक The Tumult and the Shouting में लिखे ये शब्द पसन्द हैं: "गोल्फ एक ऐसा खेल है जो एक साधारण सी बात - बल्ला घुमा कर गेंद को मारना, में  मनुष्य द्वारा होने वाली अनेक गलतियों और खामियों को प्रगट कर देता है, इसलिए खेलने वाले को यह खेल जितना कष्ट देता है और कुण्ठित करता है, शायद अन्य कोई नहीं करता। जितनी शीघ्र गोल्फ का खिलाड़ी अपने खेल के बिगड़े हुए प्रयास को भूल कर अगले प्रयास की तैयारी में लग जाए उतना ही उसके लिए लाभदायी और उस के खेल को सुधारने में सहायक होगा और उसे अपने खेल में आनन्द ले पाने में सक्षम करेगा। बिती गलतियों पर मन लगा कर पछतावे के साथ बैठे रहने से कुछ हासिल नहीं होता।" फिर राइस ने आगे लिखा, "गोल्फ में अगला प्रयास ही सर्वोत्तम प्रयास होता है।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में फिलिप्पियों को लिखी अपनी पत्री के तीसरे अध्याय में प्रेरित पौलुस ने भी अपने पाठकों को लगभग यही सलाह दी। उसने कहा कि मसीही विश्वास के जीवन में आगे बढ़ने का गुर है अपनी आँखें अपने निशाने पर गड़ाए रखना और आगे बढ़ने के प्रयास में लगे रहना। यदि हम पीछे की ओर मुड़कर देखने लगेंगे और अपनी गलतियों के बारे में सोचते रहेंगे तो शीघ्र ही निराशाओं में घिर जाएंगे।

   जब पाप हमें गिरा दे, या किसी असफलता के कारण कोई निराशा हमें घेर ले तो बाहर निकलने का सीधा सा मार्ग है - उसे परमेश्वर के सामने मान लें, उससे क्षमा माँग लें और उसकी दी गई क्षमा पर विश्वास करके तथा उस पाप अथवा असफलता पर बैठे रहने की बजाए उस को अपने पीछे करके फिर आगे की ओर बढ़ना आरंभ कर दें।

   गोल्फ के समान, मसीही विश्वास के जीवन में भी अगला प्रयास ही सर्वोत्तम प्रयास होता है। - डेव एग्नर


हमें कभी विफलता को अपनी सफलता छीनने नहीं देनी चाहिए।

हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूं: परन्‍तु केवल यह एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है। - फिलिप्पियों ३:१३, १४

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों ३:१२-१६
    Php 3:12  यह मतलब नहीं, कि मैं पा चुका हूं, या सिद्ध हो चुका हूं: पर उस पदार्थ को पकड़ने के लिये दौड़ा चला जाता हूं, जिस के लिये मसीह यीशु ने मुझे पकड़ा था।
    Php 3:13  हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूं: परन्‍तु केवल यह एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ।
    Php 3:14  निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है।
    Php 3:15  सो हम में से जितने सिद्ध हैं, यही विचार रखें, और यदि किसी बात में तुम्हारा और ही विचार हो तो परमेश्वर उसे भी तुम पर प्रगट कर देगा।
    Php 3:16  सो जहां तक हम पहुंचे हैं, उसी के अनुसार चलें।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल १८-१७ 
  • याकूब ४

सोमवार, 21 नवंबर 2011

असफलता की रचना

   मेंढक की शारीरिक संरचना ऐसी है कि वह अपने वातावरण के तापमान जैसे ही अपने शरीर के तापमान को करता रहता है। यदि धीरे-धीरे गर्म होते पानी में मेंढक को रखा जाए तो वह इस बात से अनभिज्ञ कि वह बढ़ते तापमान से मरने वाला है, अपने शरीर के तापमान को बढ़ाता रहता है और इससे पहले कि वह खतरे को भांपे, गर्म पानी द्वारा मौत उसे आ दबोचती है।

   पतरस का पतन भी अचानक घटने वाली घटना नहीं था, यह एक धीमे धीमे होने वाले आत्मिक पतन का नतीजा था। उसने प्रभु द्वारा अपने पकड़वाए जाने की चेतावनी को हलके में लिया और उसपर विश्वास नहीं किया, प्रभु यीशु के साथ अन्तिम भोज में जब प्रभु इस बारे में और सिखा रहा था तब पतरस अपने आत्मविश्वास और योग्यता के घमंड में था। फिर गतस्मनी के बाग़ में जब प्रभु ने उससे प्रार्थना के लिए कहा तो वह प्रार्थना करने की बजाए सो गया। जब उसी बाग़ में सैनिकों ने प्रभु को पकड़ने के लिए हाथ बढ़ाए तो पतरस ने शारीरिक प्रतिक्रीया के अन्तरगत अपनी तलवार निकाल कर चलाई और महापुरोहित के सेवक का कान काट डाला। और पतन का निम्न बिन्दु था अपने प्रभु के चेले के रूप में पहचाने जाने के बाद, भय से ग्रसित हो कर उसने तीन बार सेवक लड़की के सामने प्रभु का इन्कार किया।

   पतरस द्वारा प्रभु के इन्कार का दुख उन सभी मसीही विश्वासियों को पता है जिन्होंने विश्वास करने के बाद भी किसी न किसी रूप में अपने जीवन में प्रभु यीशु को ठोकर दी है और फिर उसका एहसास होने के बाद खेद में अपने हाथ मले हैं। पतरस के समान ही हमारी असफलताएं भी अचानक होने वाली घटना नहीं वरन एक पतन के सिलसिले का अन्त होती हैं जो किसी छोटी प्रतीत होने वाली अनआज्ञाकारिता या किसी घमण्ड से आरंभ होकर धीरे धीरे हमें भयानक अन्त तक ले आती हैं।

   इसलिए यह अनिवार्य है कि प्रतिदिन हम परमेश्वर पर निर्भर रहें और उसके वचन का पालन करते रहें। केवल यही एक तरीका है उस मेंढक के समान बिना पहचाने ही धीरे धीरे अपने आप को मृत्यु तक ले जाने से बचाने का। - मार्ट डी हॉन

मसीही जीवन में असफलता कभी अचानक नहीं होती, वह मसीही जीवन में आत्मिक पतन के सिलसिले का नतीजा होती है।

इसलिये जो समझता है, कि मैं स्थिर हूं, वह चौकस रहे कि कहीं गिर न पड़े। - १ कुरिन्थियों १०:१२

बाइबल पाठ: लूका २२:५४-६२

    Luk 22:54  फिर वे उसे पकड़ कर ले चले, और महायाजक के घर में लाए और पतरस दूर ही दूर उसके पीछे पीछे चलता था।
    Luk 22:55  और जब वे आंगन में आग सुलगा कर इकट्ठे बैठे, तो पतरस भी उन के बीच में बैठ गया।
    Luk 22:56  और एक लौंडी उसे आग के उजियाले में बैठे देख कर और उस की ओर ताक कर कहने लगी, यह भी तो उसके साथ था।
    Luk 22:57  परन्तु उस ने यह कह कर इन्‍कार किया, कि हे नारी, मैं उसे नहीं जानता।
    Luk 22:58  थोड़ी देर बाद किसी और ने उसे देख कर कहा, तू भी तो उन्‍हीं में से है: पतरस ने कहा, हे मनुष्य मैं नहीं हूं।
    Luk 22:59  कोई घंटे भर के बाद एक और मनुष्य दृढ़ता से कहने लगा, निश्‍चय यह भी तो उसके साथ था क्‍योंकि यह गलीली है।
    Luk 22:60  पतरस ने कहा, हे मनुष्य, मैं नहीं जानता कि तू क्‍या कहता है वह कह ही रहा था कि तुरन्‍त मुर्ग ने बांग दी।
    Luk 22:61  तब प्रभु ने घूम कर पतरस की ओर देखा, और पतरस को प्रभु की वह बात याद आई जो उस ने कही थी, कि आज मुर्ग के बांग देने से पहिले, तू तीन बार मेरा इन्‍कार करेगा।
    Luk 22:62  और वह बाहर निकल कर फूट फूट कर रोने लगा।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल १६-१७ 
  • याकूब ३

रविवार, 20 नवंबर 2011

खेद की दवा

   एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति ने अपने आप को समाज और अपने चर्च के लोगों से अलग-थलग कर लिया क्योंकि वह अपने बीते दिनों की गलती के कारण अति खेदित था, जिस कारण उसका परिवार टूट कर बिखर गया। एक वृद्ध स्त्री को बार-बार उभारे जाने और संभाले जाने की आवश्यक्ता रहती है क्योंकि वह ५० वर्ष पूर्व के एक प्रेम संबंध के खेद को भूल नहीं पा रही है। एक जवान युवती को मनोवैज्ञानिक चिकित्सा की आवश्यक्ता रहती है क्योंकि वह अपने गर्भपात कराने के निर्णय के लिए अपने आप को क्षमा नहीं कर पा रही है और इस कारण सदा खेदित रहती है। खेद बहुत से मनुष्यों के जीवन में ज़हर घोल देता है और उनके आनन्द तथा शान्ति को छीन लेता है।

   लेकिन मसीही विश्वासी के पास इसकी दवा है। यदि किसी को खेदित होकर निकम्मा हो जाने का कोई कारण था तो वह था प्रभु यीशु का चेला पतरस। उसने बहुत कायरता का व्यवहार किया जब अपने प्रभु को अपने कई दावों के बावजूद वह गतस्मनी के बाग़ में अकेला छोड़कर भाग गया, और फिर प्रभु के पकड़वाए जाने के बाद अधिकारियों की सेवक लड़कियों के सामने तीन बार उसने इस बात का भी इन्कार कर दिया कि वह प्रभु यीशु को जानता है। बाद में उसे इस बात का ऐसा खेद हुआ कि वह अपने इस व्यवहार के लिए फूट-फूट कर रोया। लेकिन उसने अपनी असफलताओं को प्रभु के लिए अपनी सेवकाई में आड़े नहीं आने दिया - क्योंकि उसने प्रभु यीशु द्वारा दी गई क्षमा को स्वीकार किया और प्रभु यीशु ही से नई सामर्थ और नई आशा प्राप्त करी, जब तीन बार प्रभु यीशु ने उससे कहा, "मेरी भेड़ों की रखवाली कर"। प्रेरितों १:१५ में हम पतरस को पहले के समान पुनः चेलों की अगुवाई करते देखते हैं। प्रभु यीशु कि क्षमा को हृदय से ग्रहण करने और फिर स्वयं अपने आप को भी क्षमा करने के कारण पतरस अपने अतीत की कमज़ोरी को मसीह के लोहू के नीचे दबा सका और उस गलती के खेद द्वारा उत्पन्न हो सकने वाले निकम्मेपन पर जयवंत हो सका।

   जब हम अपने पापों को प्रभु यीशु के समक्ष पश्चाताप के साथ मान लेते हैं, तब हम उन्हें वहीं उसके कदमों पर छोड़ कर उन्हें भुला भी सकते हैं क्योंकि, "यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है" (१ युहन्ना १:९)।

   तब हम उस दुखदायी अतीत से आगे बढ़कर आनन्द के साथ उसकी सेवा में लग सकते हैं। खेद कभी हमारे आनन्द को नष्ट नहीं कर सकता क्योंकि प्रत्येक मसीही विश्वासी के पास खेद की कारगर दवा है। - हर्ब वैण्डर लुग्ट

जिन पापों को परमेश्वर ने अपनी क्षमा द्वारा मसीही विश्वासी के जीवन-वृतांत से हटा दिया है, उन्हें मसीही विश्वासी को अपने मन से भी हटा देना चाहिए।

और उन्‍हीं दिनों में पतरस भाइयों के बीच में जो एक सौ बीस व्यक्ति के लगभग इकट्ठे थे, खड़ा होकर कहने लगा। - प्रेरितों १:१५

बाइबल पाठ: यूहन्ना २१:१५-१९
    Joh 21:15  भोजन करने के बाद यीशु ने शमौन पतरस से कहा, हे शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्‍या तू इन से बढ़कर मुझ से प्रेम रखता है? उस ने उस से कहा, हां प्रभु तू तो जानता है, कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूं: उस ने उस से कहा, मेरे मेमनों को चरा।
    Joh 21:16  उस ने फिर दूसरी बार उस से कहा, हे शमौन यूहन्ना के पुत्र, क्‍या तू मुझ से प्रेम रखता है? उस ने उन से कहा, हां, प्रभु तू जानता है, कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूं: उस ने उस से कहा, मेरी भेड़ों की रखवाली कर।
    Joh 21:17  उस ने तीसरी बार उस से कहा, हे शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्‍या तू मुझ से प्रीति रखता है? पतरस उदास हुआ, कि उस ने उसे तीसरी बार ऐसा कहा कि क्‍या तू मुझ से प्रीति रखता है? और उस से कहा, हे प्रभु, तू तो सब कुछ जानता है: तू यह जानता है कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूं: यीशु ने उस से कहा, मेरी भेड़ों को चरा।
    Joh 21:18  मैं तुझ से सच सच कहता हूं, जब तू जवान था, तो अपनी कमर बान्‍ध कर जहां चाहता था, वहां फिरता था; परन्‍तु जब तू बूढ़ा होगा, तो अपने हाथ लम्बे करेगा, और दूसरा तेरी कमर बान्‍धकर जहां तू न चाहेगा वहां तुझे ले जाएगा।
    Joh 21:19  उस ने इन बातों से पता दिया कि पतरस कैसी मृत्यु से परमेश्वर की महिमा करेगा; और यह कहकर, उस से कहा, मेरे पीछे हो ले।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल १४-१५ 
  • याकूब २