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शनिवार, 27 जुलाई 2013

रिश्वत

   एक देश में यात्रा करते समय हमने पाया कि पक्की सड़कों पर बड़े बड़े गड्ढे हो गए थे जिनके कारण ठीक से गाड़ी चलाना कठिन हो गया था। मेरे पति ने हमारे टैक्सी चालक से इस के बारे में पूछा तो उसने कहा कि ये गड्ढे भारी ट्रकों द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक मात्रा में भार लेकर चलने के कारण हुए थे। जब भी पुलिस वाले उन ट्रक वालों को रोकते तो वे ट्रक वाले पुलिस वालों को रिश्वत देकर दण्ड से बच निकलते। ऐसा करने से पुलिस और ट्रक वाले तो अपनी कमाई कर लेते थे लेकिन क्षति अन्य वाहन चालकों और सामान्य जनता की होती थी जो इन सड़कों के बनाने के लिए कर भी चुकाती थी, फिर खराब सड़कों के कारण परेशानी भी उठाती थी।

   सभी प्रकार की रिश्वत इतनी प्रत्यक्ष नहीं होती, कुछ प्रकार की रिश्वत अप्रत्यक्ष भी होती है; और हर रिश्वत वित्तीय भी नहीं होती। चापलूसी भी एक प्रकार कि रिश्वत ही है जो शब्दों के द्वारा दी जाती है। यदि कोई हमारे बारे में अच्छी अच्छी बातें कहता रहे और हमारी प्रशंसा करता रहे और हम इस कारण से उसे अन्य लोगों की बजाए अधिक महत्व दें और उसकी गलतीयों की अनदेखी करें या उन पर पर्दा डालें तो यह रिश्वतखोरी के समान  ही है। परमेश्वर की नज़र में हर प्रकार का पक्षपात अन्याय है। इस बारे में हम परमेश्वर के दृष्टिकोण को इस बात से भी समझ सकते हैं कि जब परमेश्वर ने इस्त्राएल को मिस्त्र के दासत्व से निकाल कर कनान देश में लाकर बसाया तो उन्हें चिताया कि उनका वहाँ बना रहना उनके परस्पर न्यायपूर्ण व्यवहार पर निर्भर करेगा: "तुम न्याय न बिगाड़ना; तू न तो पक्षपात करना; और न तो घूस लेना, क्योंकि घूस बुद्धिमान की आंखें अन्धी कर देती है, और धर्मियों की बातें पलट देती है। जो कुछ नितान्त ठीक है उसी का पीछा पकड़े रहना, जिस से तू जीवित रहे, और जो देश तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे देता है उसका अधिकारी बना रहे" (व्यवस्थाविवरण 16:19-20 )।

   रिश्वत दूसरों को न्याय से वंचित करती है, जो परमेश्वर के चरित्र के विरुद्ध है: "क्योंकि तुम्हारा परमेश्वर यहोवा वही ईश्वरों का परमेश्वर और प्रभुओं का प्रभु है, वह महान पराक्रमी और भय योग्य ईश्वर है, जो किसी का पक्ष नहीं करता और न घूस लेता है" (व्यवस्थाविवरण 10:17)। जैसा परमेश्वर का चरित्र है, वैसा ही चरित्र वह अपने लोगों में भी देखना चाहता है: "पर जैसा तुम्हारा बुलाने वाला पवित्र है, वैसे ही तुम भी अपने सारे चाल चलन में पवित्र बनो। क्योंकि लिखा है, कि पवित्र बनो, क्योंकि मैं पवित्र हूं" (1 पतरस 1:15-16)।

   परमेश्वर की इस इच्छा को पूरा करना हम मसीही विश्वासियों का कर्तव्य है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


रिश्वतखोरी से पक्षपात होता है; प्रेम से न्याय आता है।

घूस न लेना, क्योंकि घूस देखने वालों को भी अन्धा कर देता, और धर्मियों की बातें पलट देता है। - निर्गमन 23:8 

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 10:12-22
Deuteronomy 10:12 और अब, हे इस्राएल, तेरा परमेश्वर यहोवा तुझ से इसके सिवाय और क्या चाहता है, कि तू अपने परमेश्वर यहोवा का भय मानें, और उसके सारे मार्गों पर चले, उस से प्रेम रखे, और अपने पूरे मन और अपने सारे प्राण से उसकी सेवा करे,
Deuteronomy 10:13 और यहोवा की जो जो आज्ञा और विधि मैं आज तुझे सुनाता हूं उन को ग्रहण करे, जिस से तेरा भला हो?
Deuteronomy 10:14 सुन, स्वर्ग और सब से ऊंचा स्वर्ग भी, और पृथ्वी और उस में जो कुछ है, वह सब तेरे परमेश्वर यहोवा ही का है;
Deuteronomy 10:15 तौभी यहोवा ने तेरे पूर्वजों से स्नेह और प्रेम रखा, और उनके बाद तुम लोगों को जो उनकी सन्तान हो सर्व देशों के लोगों के मध्य में से चुन लिया, जैसा कि आज के दिन प्रगट है।
Deuteronomy 10:16 इसलिये अपने अपने हृदय का खतना करो, और आगे को हठीले न रहो।
Deuteronomy 10:17 क्योंकि तुम्हारा परमेश्वर यहोवा वही ईश्वरों का परमेश्वर और प्रभुओं का प्रभु है, वह महान्‌ पराक्रमी और भय योग्य ईश्वर है, जो किसी का पक्ष नहीं करता और न घूस लेता है।
Deuteronomy 10:18 वह अनाथों और विधवा का न्याय चुकाता, और परदेशियों से ऐसा प्रेम करता है कि उन्हें भोजन और वस्त्र देता है।
Deuteronomy 10:19 इसलिये तुम भी परदेशियों से प्रेम भाव रखना; क्योंकि तुम भी मिस्र देश में परदेशी थे।
Deuteronomy 10:20 अपने परमेश्वर यहोवा का भय मानना; उसी की सेवा करना और उसी से लिपटे रहना, और उसी के नाम की शपथ खाना।
Deuteronomy 10:21 वही तुम्हारी स्तुति के योग्य है; और वही तेरा परमेश्वर है, जिसने तेरे साथ वे बड़े महत्व के और भयानक काम किए हैं, जिन्हें तू ने अपनी आंखों से देखा है।
Deuteronomy 10:22 तेरे पुरखा जब मिस्र में गए तब सत्तर ही मनुष्य थे; परन्तु अब तेरे परमेश्वर यहोवा ने तेरी गिनती आकाश के तारों के समान बहुत कर दिया है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 43-45 
  • प्रेरितों 27:27-44


शुक्रवार, 26 जुलाई 2013

दृढ़ प्रतिज्ञा

   कोहरे के कारण कार के शीशे धुँधला गए थे और ऐन्जी ठीक से बाहर का दृश्य देख नहीं पा रही थी और अन्जाने में ही उसने कार एक सामने से आते हुए ट्रक के मार्ग में मोड़ दी। दुर्घटना भयानक थी, ऐन्जी जीवित तो बच गई लेकिन उसके मस्तिष्क को भारी क्षति पहुँची और वह कुछ भी बोलने में और अपनी देखभाल आप ही कर पाने में बिलकुल असमर्थ हो गई।

   तब से अब तक कई वर्ष बीत चुके हैं और मैं ऐन्जी के माता-पिता का हौंसला देखकर चकित होता हूँ। हाल ही में मैंने उनसे पूछा, "इस कटु अनुभव से होकर आप कैसे निकलने पाए?" ऐन्जी के पिता ने कुछ विचार करके उत्तर दिया, "सच कहूँ तो यह केवल इसलिए संभव हो सका क्योंकि हम परमेश्वर के निकट बने रहे। उसी ने हमें यह सामर्थ दी कि हम इस दुर्घटना को सह सकें और इससे उभर सकें।" ऐन्जी की माँ ने भी सहमति जताते हुए कहा कि दुर्घटना के तुरंत बाद उनका दुख और शोक इतना गहरा था कि उन्हें कोई आशा नहीं थी कि वे फिर कभी आनन्दित हो पाएंगे।

   ऐन्जी के माता-पिता ने इस दुख और निराशा में परमेश्वर को अपना सहारा बनाया और उसपर निर्भर होकर रहने लगे, और उन्होंने पाया कि अनेक अनपेक्षित आत्मिक और भौतिक प्रावधान और मार्ग ऐन्जी की देखभाल करने एवं ऐन्जी तथा सारे परिवार की सहायता के लिए उपलब्ध होने लगे उनके साथ खड़े होने लगे। चाहे ऐन्जी कभी बोलने नहीं पाएगी, लेकिन वह माता-पिता की देखभाल के प्रत्युत्तर में मुस्कराती है, जो उन्हें आनन्दित करता है। आज भी ऐन्जी के माता-पिता का मनपसन्द बाइबल पद है" "क्योंकि उसका क्रोध, तो क्षण भर का होता है, परन्तु उसकी प्रसन्नता जीवन भर की होती है। कदाचित् रात को रोना पड़े, परन्तु सबेरे आनन्द पहुंचेगा" (भजन 30:5)।

   क्या आप भी किसी बड़े दुख का सामना कर रहे हैं? प्रभु यीशु को अपना सहारा बना लीजिए, उसके आश्रय में आजाईए। उसकी दृढ़ प्रतिज्ञा है कि वह आपको विश्राम देगा (मत्ती 11:28) और आपके वर्तमान आँसुओं के बावजूद एक आनन्दमय भविष्य आपके लिए तैयार रहेगा। - डेनिस फिशर


अपने सभी दुख प्रभु यीशु को सौंप दें और उससे उसकी अनन्तकाल की शांति ले लें।

हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो; और मुझ से सीखो; क्योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूं: और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे। क्योंकि मेरा जूआ सहज और मेरा बोझ हल्का है। - मत्ती 11:28-30

बाइबल पाठ: भजन 30:5
Psalms 30:1 हे यहोवा मैं तुझे सराहूंगा, क्योंकि तू ने मुझे खींचकर निकाला है, और मेरे शत्रुओं को मुझ पर आनन्द करने नहीं दिया।
Psalms 30:2 हे मेरे परमेश्वर यहोवा, मैं ने तेरी दोहाई दी और तू ने मुझे चंगा किया है।
Psalms 30:3 हे यहोवा, तू ने मेरा प्राण अधोलोक में से निकाला है, तू ने मुझ को जीवित रखा और कब्र में पड़ने से बचाया है।
Psalms 30:4 हे यहोवा के भक्तों, उसका भजन गाओ, और जिस पवित्र नाम से उसका स्मरण होता है, उसका धन्यवाद करो।
Psalms 30:5 क्योंकि उसका क्रोध, तो क्षण भर का होता है, परन्तु उसकी प्रसन्नता जीवन भर की होती है। कदाचित् रात को रोना पड़े, परन्तु सबेरे आनन्द पहुंचेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 40-42 
  • प्रेरितों 27:1-26


गुरुवार, 25 जुलाई 2013

आनन्द

   मैं सदा ही ग्रीष्म काल के आने की बाट जोहता हूँ। ठंड के एक लम्बे समय के पश्चात धूप की गर्मी में बाहर निकलना, बेसबॉल खेलना, समुद्र तट पर विचरण करना और दोस्तों के साथ रात को बाहर आग पर खाना पकाकर खाना और बातचीत में समय बिताना आदि सब ऐसे आनन्द हैं जिनकी प्रतीक्षा ठंड के मौसम के बाद मुझे रहती है। लेकिन आनन्द मनाना और मौज करना किसी ऋतु पर निर्भर नहीं है; ऋतु कोई भी हो, क्या हम सब को अच्छा भोजन, मित्रों के साथ समय बिताना और बातचीत करना या परिवार के साथ समय बिताना आनन्दित नहीं करता?

   आनन्द मनाना और मौज करना अपने आप में कोई बुरी बात नहीं है, परमेश्वर ने हमें आनन्दित रहने के लिए ही बनाया है और सृष्टि की चीज़ें दी हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस लिखता है: "इस संसार के धनवानों को आज्ञा दे, कि वे अभिमानी न हों और चंचल धन पर आशा न रखें, परन्तु परमेश्वर पर जो हमारे सुख के लिये सब कुछ बहुतायत से देता है" (1 तिमुथियुस 6:17)। ना केवल परमेश्वर हमारे सुख के लिए हमें बहुतायत से देता है, वरन बाइबल में अन्य स्थानों पर इस बहुतायत से मिलने वाले अच्छे भोजन, अच्छे मित्रों, अच्छे वैवाहिक संबंधों आदि के सदुपयोग से मिलने वाले भले आनन्द का उल्लेख भी है। लेकिन यह दृष्टिकोण रखना कि इन सांसारिक बातों से स्थाई और वास्तविक आनन्द मिल जाएगा एक भ्रम है।

   स्थाई और वास्तविक आनन्द संसार के अल्प कालीन रोमांच और ऐसा रोमांच देने वाली वस्तुओं में नहीं अपितु सृष्टिकर्ता परमेश्वर के साथ एक दीर्घकालीन निकट संबंध बनाने और उसे गहरा बनाते जाने में है। राजा सुलेमान ने भी इस बात को सीखा और पहचाना, लेकिन कुछ कटु अनुभवों के बाद; उसने अपने आप को संसार और संसार के भोग-विलास में लिप्त कर लिया, लेकिन नतीजा एक व्यर्थता का अनुभव ही था: "और जितनी वस्तुओं के देखने की मैं ने लालसा की, उन सभों को देखने से मैं न रूका; मैं ने अपना मन किसी प्रकार का आनन्द भोगने से न रोका क्योंकि मेरा मन मेरे सब परिश्रम के कारण आनन्दित हुआ; और मेरे सब परिश्रम से मुझे यही भाग मिला। तब मैं ने फिर से अपने हाथों के सब कामों को, और अपने सब परिश्रम को देखा, तो क्या देखा कि सब कुछ व्यर्थ और वायु को पकड़ना है, और संसार में कोई लाभ नहीं" (सभोपदेशक 2:10-11)। इसलिए इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि अपने सब अनुभवों के आधार पर उसने चिताया कि सांसारिक भोग-विलास के आनन्द के पीछे भागने वाले अन्ततः नुक्सान में ही रहेंगे "जो रागरंग से प्रीति रखता है, वह कंगाल होता है; और जो दाखमधु पीने और तेल लगाने से प्रीति रखता है, वह धनी नहीं होता" (नीतिवचन 21:17)।

   जिस स्थाई और वास्तविक आनन्द कि हमें तलाश है, उसकी प्राप्ति और तृप्ति उसी से होती है जो सब वस्तुओं का बनाने वाला और उन्हें हमें देने वाला है। सृष्टिकर्ता और उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के साथ एक दृढ़ संबंध बना लीजिए, उसकी संगति से मिलने वाले अद्भुत आनन्द को चखने के बाद फिर सांसारिक बातों का आनन्द फीका ही लगेगा। - जो स्टोवैल


आपके जीवन का उद्देश्य क्या है - अपना सुख-विलास या परमेश्वर की प्रसन्नता?

सब कुछ सुना गया; अन्त की बात यह है कि परमेश्वर का भय मान और उसकी आज्ञाओं का पालन कर; क्योंकि मनुष्य का सम्पूर्ण कर्त्तव्य यही है। क्योंकि परमेश्वर सब कामों और सब गुप्त बातों का, चाहे वे भली हों या बुरी, न्याय करेगा। - सभोपदेशक 12:13-14 

बाइबल पाठ: सभोपदेशक 2:1-11
Ecclesiastes 2:1 मैं ने अपने मन से कहा, चल, मैं तुझ को आनन्द के द्वारा जांचूंगा; इसलिये आनन्दित और मगन हो। परन्तु देखो, यह भी व्यर्थ है।
Ecclesiastes 2:2 मैं ने हंसी के विषय में कहा, यह तो बावलापन है, और आनन्द के विषय में, उस से क्या प्राप्त होता है?
Ecclesiastes 2:3 मैं ने मन में सोचा कि किस प्रकार से मेरी बुद्धि बनी रहे और मैं अपने प्राण को दाखमधु पीने से क्योंकर बहलाऊं और क्योंकर मूर्खता को थामे रहूं, जब तक मालूम न करूं कि वह अच्छा काम कौन सा है जिसे मनुष्य जीवन भर करता रहे।
Ecclesiastes 2:4 मैं ने बड़े बड़े काम किए; मैं ने अपने लिये घर बनवा लिये और अपने लिये दाख की बारियां लगवाईं;
Ecclesiastes 2:5 मैं ने अपने लिये बारियां और बाग लगावा लिये, और उन में भांति भांति के फलदाई वृक्ष लगाए।
Ecclesiastes 2:6 मैं ने अपने लिये कुण्ड खुदवा लिये कि उन से वह वन सींचा जाए जिस में पौधे लगाए जाते थे।
Ecclesiastes 2:7 मैं ने दास और दासियां मोल लीं, और मेरे घर में दास भी उत्पन्न हुए; और जितने मुझ से पहिले यरूशलेम में थे उन से कहीं अधिक गाय-बैल और भेड़-बकरियों का मैं स्वामी था।
Ecclesiastes 2:8 मैं ने चान्दी और सोना और राजाओं और प्रान्तों के बहुमूल्य पदार्थों का भी संग्रह किया; मैं ने अपने लिये गवैयों और गानेवालियों को रखा, और बहुत सी कामिनियां भी, जिन से मनुष्य सुख पाते हैं, अपनी कर लीं।
Ecclesiastes 2:9 इस प्रकार मैं अपने से पहिले के सब यरूशलेमवासियों अधिक महान और धनाढय हो गया; तौभी मेरी बुद्धि ठिकाने रही।
Ecclesiastes 2:10 और जितनी वस्तुओं के देखने की मैं ने लालसा की, उन सभों को देखने से मैं न रूका; मैं ने अपना मन किसी प्रकार का आनन्द भोगने से न रोका क्योंकि मेरा मन मेरे सब परिश्रम के कारण आनन्दित हुआ; और मेरे सब परिश्रम से मुझे यही भाग मिला।
Ecclesiastes 2:11 तब मैं ने फिर से अपने हाथों के सब कामों को, और अपने सब परिश्रम को देखा, तो क्या देखा कि सब कुछ व्यर्थ और वायु को पकड़ना है, और संसार में कोई लाभ नहीं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 37-39 
  • प्रेरितों 26


बुधवार, 24 जुलाई 2013

निकट रहें

   मैं अपनी सहेली के साथ एक यात्रा पर थी, और किसी कारण से मेरी सहेली काफी विचलित और अधीर थी। अपनी इस मनःस्थिति के कारण, एयरपोर्ट पहुँचने पर उसे ध्यान नहीं रहा कि उसने अपना पासपोर्ट और टिकिट आदि कहाँ रखे हुए हैं। जब लाइन में उसका नम्बर आया तो इन सब को ढूँढ निकालने में काफी समय लगा और उतने समय तक वहाँ के कर्मचारी बड़े धीरज के साथ उसकी सहायता करते रहे। जब जाँच की सारी कार्यवाही हो गई और उसे प्रवेश का अनुमति-पत्र मिल गया तो मेरी सहेली ने उस कर्मचारी से पूछा, "अब आगे क्या करना है और कहाँ जाना है?" उस कर्मचारी ने मुस्कुराते हुए मेरी ओर इशारा किया और कहा, "बस अपनी सहेली के निकट बनी रहिए और उनके साथ-साथ चलती रहिए।"

   जीवन की परेशानियों और दुख के समयों का सामना करने के लिए यह एक अच्छी सलाह है - अपने मित्रों के निकट बने रहें। हमारा सबसे अच्छा और सबसे निकटतम मित्र है हमारा उद्धारकर्ता प्रभु यीशु, और उसमें विश्वास द्वारा उसकी मण्डली के सदस्य हो जाने के बाद वह हमें मण्डली के अन्य सदस्यों के साथ सहभागिता में ले आता है जिससे हम एक दूसरे का ध्यान रखें, एक दूसरे का सहारा बनें और आवश्यकतानुसार एक दूसरे को उभारते और सुधारते रहें।

   प्रेरित पतरस ने अपनी पहली पत्री एक ऐसे मसीही विश्वसीयों के समूह को लिखी जो अपने मसीही विश्वास के कारण बहुत दुखों का सामना कर रहे थे और जिन्हें एक दूसरे के साथ और सहायता की आवश्यकता थी। इस पत्री के चौथे अध्याय में पतरस ने उन्हें समझाया कि वे एक दूसरे के प्रति प्रेम को बनाए रखें, एक दूसरे के लिए प्रार्थनाएं करें, एक दूसरे की पहुनाई में लगे रहें और अपने आत्मिक वरदानों का उपयोग एक दूसरे की भलाई और सेवा के लिए करते रहें (पद 7-10)। परमेश्वर के वचन बाइबल में अन्य स्थानों पर भी हम ऐसे ही निर्देश पाते हैं - जैसे परमेश्वर हमें सांत्वना देता है वैसे ही हम भी दूसरों को सांत्वना देने वाले बनें (2 कुरिन्थियों 1:3-4); हम एक दुसरे को प्रेम में बढ़ावा देने और उभारने वाले बनें (1 थिस्सलुनीकियों 5:11)।

   जब जीवन कठिन हो जाए और हम थकित अनुभव करें तो अच्छे मित्रों के निकट रहना सदा ही लाभदायक रहता है, लेकिन सबसे लाभदायक होता है प्रभु यीशु के निकट रहना, वह हमें कभी नहीं छोड़ता और कभी नहीं त्यागता (इब्रानियों 13:5)। - ऐनी सेटास


मसीही मित्रों का साथ मसीह का साथ भी बनाए रखता है।

इस कारण एक दूसरे को शान्‍ति दो, और एक दूसरे की उन्नति के कारण बनो, निदान, तुम ऐसा करते भी हो। - 1 थिस्सलुनीकियों 5:11

बाइबल पाठ: 1 पतरस 4:7-11
1 Peter 4:7 सब बातों का अन्‍त तुरन्त होने वाला है; इसलिये संयमी हो कर प्रार्थना के लिये सचेत रहो।
1 Peter 4:8 और सब में श्रेष्ठ बात यह है कि एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो; क्योंकि प्रेम अनेक पापों को ढांप देता है।
1 Peter 4:9 बिना कुड़कुड़ाए एक दूसरे की पहुनाई करो।
1 Peter 4:10 जिस को जो वरदान मिला है, वह उसे परमेश्वर के नाना प्रकार के अनुग्रह के भले भण्‍डारियों की नाईं एक दूसरे की सेवा में लगाए।
1 Peter 4:11 यदि कोई बोले, तो ऐसा बोले, मानों परमेश्वर का वचन है; यदि कोई सेवा करे; तो उस शक्ति से करे जो परमेश्वर देता है; जिस से सब बातों में यीशु मसीह के द्वारा, परमेश्वर की महिमा प्रगट हो: महिमा और साम्राज्य युगानुयुग उसी की है। आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 35-36 
  • प्रेरितों 25


मंगलवार, 23 जुलाई 2013

दृष्टि

   मेरा घर अमेरिका के कोलारैडो में है। एक दिन वहाँ अपने घर बैठे बैठे ही मैंने गूगल मैप्स का उपयोग करके अफ्रीका में स्थित कीन्या देश के नैरोबी शहर के उस इलाके को विस्तार से देखा जहाँ मेरा परिवार दो दशक पहले रहा करता था। अपने कंप्यूटर स्क्रीन पर सैटलाईट द्वारा लिए और प्रेशित करे गए चित्र पर मैं वहाँ की सड़कें, इमारतें आदि देख सका और उन्हें पहचान सका। कुछ क्षेत्रों पर तो मैं बिलकुल नीचे गली के स्तर तक जा सका और वहाँ से मैं अपने चारों ओर ऐसे देखने पाया मानों मैं स्वयं ही नीचे गली में खड़ा होकर अपने आस-पास के मकान और स्थान आदि देख रहा हूँ। जो मुझे नीचे गली के स्तर पर आने के बाद नहीं दिख पाता था उसे मैं अपने दृश्य स्तर में थोड़ा और ऊपर जाकर देख सकता था। मैं निर्धारित कर सकता था कि मुझे कितना दृश्य, कितनी बारीकी से, किस दिशा से, कितनी देर तक देखना है। अमेरिका में बैठे बैठे अफ्रीका के मनचाहे इलाके को इतने विस्तरपूर्वक देख पाना, यह एक बड़ा अद्भुत अनुभव था। इस अनुभव ने मुझे यह समझने में सहायता करी कि जब मनुष्य अपने द्वारा बनाए उपकरणों की सहायता से दूर बैठे ही इतने विस्तार और प्रकार से किसी भी स्थान को बारीकी से देख सकता है तो परमेश्वर हमारे जीवनों और पृथ्वी की बातों को कितने अधिक विस्तार और बारीकी से देखता होगा तथा उनकी जानकारी रखता होगा।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने परमेश्वर के पृथ्वी को देखने के बारे में लिखा: "यहोवा स्वर्ग से दृष्टि करता है, वह सब मनुष्यों को निहारता है; अपने निवास के स्थान से वह पृथ्वी के सब रहने वालों को देखता है" (भजन 33:13-14)। भजनकार आगे लिखता है कि परमेश्वर सबके कार्यों पर दृष्टि रखता है, उनके विचारों को जानता है और जो उस पर विश्वास रखते हैं और उसे समर्पित जीवन व्यतीत करते हैं उनकी रक्षा करता है।

   जो एक कंप्यूटर और सैटलाईट नहीं कर सकते, वह परमेश्वर कर सकता है - हमारे मन के अन्दर कि हर बात और हर प्रयोजन को वह भली-भांति जानता है। वह हमारी वास्तविकता जानता है और हमारी कोई मनसा उससे छिपी नहीं है, लेकिन तब भी वह हमसे प्रेम रखता है, हमारे प्रति सहनशील है, हमारी भलाई ही की योजनाएं बनाता है। इसीलिए वह चाहता है कि बजाए उससे दूर रहने के, हम उसपर विश्वास करके उसके निकट बने रहें, हर बात में उसको समर्पित रहें, उसकी आज्ञाकारिता में रहें और चलें, क्योंकि जो हम अपने स्तर पर नहीं देख पाते वह अपने स्तर पर होकर पहले से देखता और जानता है और आने वाली हानि से बचने के उपाय हमें सुझाता है। परमेश्वर की दृष्टि से कोई ओझल नहीं रह सकता, और जिन्होंने उसे अपना जीवन समर्पित किया है उनकी सुरक्षा और भलाई के लिए उन पर तो वह विशेष बारीकी से अपनी दृष्टि बनाए रखता है।

   हम मसीही विश्वासियों के लिए यह एक बहुत शांतिदायक और उत्साहवर्धक बात है कि हम अपने प्रभु और उद्धारकर्ता की दृष्टि से कभी ओझल नहीं रहते। वह सदा हम पर अपनी दृष्टि बनाए रखता है और अपनी आँख की पुतली के समान हमारी रक्षा करता है: "...क्योंकि जो तुम को छूता है, वह मेरी आंख की पुतली ही को छूता है" (ज़कर्याह 2:8)। - डेविड मैक्कैसलैंड


अपनी दृष्टि परमेश्वर कि ओर लगाए रखें क्योंकि उसकी दृष्टि सदा आप पर बनी रहती है।

क्योंकि प्रभु की आंखे धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान उन की बिनती की ओर लगे रहते हैं, परन्तु प्रभु बुराई करने वालों के विमुख रहता है। - 1 पतरस 3:12 

बाइबल पाठ: भजन 33:12-22
Psalms 33:12 क्या ही धन्य है वह जाति जिसका परमेश्वर यहोवा है, और वह समाज जिसे उसने अपना निज भाग होने के लिये चुन लिया हो!
Psalms 33:13 यहोवा स्वर्ग से दृष्टि करता है, वह सब मनुष्यों को निहारता है;
Psalms 33:14 अपने निवास के स्थान से वह पृथ्वी के सब रहने वालों को देखता है,
Psalms 33:15 वही जो उन सभों के हृदयों को गढ़ता, और उनके सब कामों का विचार करता है।
Psalms 33:16 कोई ऐसा राजा नहीं, जो सेना की बहुतायत के कारण बच सके; वीर अपनी बड़ी शक्ति के कारण छूट नहीं जाता।
Psalms 33:17 बच निकलने के लिये घोड़ा व्यर्थ है, वह अपने बड़े बल के द्वारा किसी को नहीं बचा सकता है।
Psalms 33:18 देखो, यहोवा की दृष्टि उसके डरवैयों पर और उन पर जो उसकी करूणा की आशा रखते हैं बनी रहती है,
Psalms 33:19 कि वह उनके प्राण को मृत्यु से बचाए, और अकाल के समय उन को जीवित रखे।
Psalms 33:20 हम यहोवा का आसरा देखते आए हैं; वह हमारा सहायक और हमारी ढाल ठहरा है।
Psalms 33:21 हमारा हृदय उसके कारण आनन्दित होगा, क्योंकि हम ने उसके पवित्र नाम का भरोसा रखा है।
Psalms 33:22 हे यहोवा जैसी तुझ पर हमारी आशा है, वैसी ही तेरी करूणा भी हम पर हो।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 33-34 
  • प्रेरितों 24


सोमवार, 22 जुलाई 2013

सर्वोत्तम तर्क

   मुझे एक आठ घंटे लंबी रेल यात्रा करनी थी, और संयोग से मेरे साथ वाली सीट पर एक सेवा-निवृत अमेरीकी राजदूत बैठा हुआ था। यात्रा के समय पढ़ने के लिए जैसे ही मैंने अपनी बाइबल निकाली, उसने एक लंबी ठंडी साँस ली, और वहीं से हमारी तकरार आरंभ हो गई। पहले तो हम आपस में एक दूसरे पर उत्तर-प्रत्युत्तर द्वारा ताने कसते रहे, लेकिन धीरे धीरे इस टीका-टिपण्णी और बातचीत में हमारे अपने अपने जीवन के अंश तथा व्यक्तिगत अनुभव भी सम्मिलित होने लगे और हमारा वार्तालाप ताने मारने से हटकर चर्चा करने की ओर मुड़ गया। फिर एक दूसरे के कार्य जीवन तथा संबंधित अनुभवों की जिज्ञासा के कारण हम एक दूसरे के कार्य के बारे में सवाल-जवाब करने लगे - वह राजनीति शास्त्र का अनुभवी और दो महत्वपूर्ण स्थानों पर राजदूत का पद संभाल चुका विद्वान था और मैं राजनीति में हलकी-फुलकी शौकिया रुचि रखने वाला साधारण सा व्यक्ति।

   फिर हमारी बात एक दूसरे के व्यक्तिगत जीवन और अनुभवों की ओर मुड़ी और हम एक दूसरे के बारे में और अधिक जानने का प्रयास करने लगे। मैंने देखा कि उसकी रुचि मेरे जीवन में कम किंतु मेरे मसीही विश्वास में अधिक थी; उसकी सबसे बड़ी जिज्ञासा थी यह जानना कि मैं एक मसीही विश्वासी कैसे बना। तानेबाज़ी से आरंभ हुआ यह वार्तालाप रेल यात्रा समाप्त होते समय मित्रभाव के साथ अन्त हुआ और हमने विदा होते समय एक दूसरे के साथ अपने परिचय कार्ड भी अदला-बदली किए। जाते जाते वह मेरी ओर मुड़कर बोला, "आपके तर्क और बातचीत का सब से उत्त्म भाग यह नहीं है कि मसीह यीशु मेरे लिए क्या कर सकता है, वरन यह कि उसने आपके लिए और आपके जीवन में क्या किया है।"

   उस राजनितिज्ञ की यह बात बहुत सार्थक है, शायद वह जानता भी नहीं था कि उसकी यह बात परमेश्वर के वचन बाइबल के अनुसार भी है - हमारे मसीही विश्वास की हमारी गवाही ही हमें पाप तथा शैतान की बातों पर जयवन्त करती है (प्रकाशितवाक्य 12:11) और हमें हमारे उद्धाकर्ता प्रभु के लिए प्रभावी बनाती हैं। हमारे मसीही जीवन की सबसे प्रभावी बात हमारा बाइबल ज्ञान नहीं वरन प्रभु यीशु के साथ हुआ हमारा साक्षात्कार और उसके फलस्वरूप हमारे जीवन में आया परिवर्तन है। यह वह अनुभव है जिसे किसी को हमें सिखाने की आवश्यकता नहीं, क्योंकि हम से अधिक इस के बारे में कोई नहीं जानता और आपके जीवन परिवर्तन का तर्क ही आपका सबसे प्रभावी तर्क है, क्योंकि उसका किसी रीति से इन्कार हो ही नहीं सकता।

   क्या आप एक मसीही विश्वासी हैं, और अपने उद्धारकर्ता प्रभु के लिए उपयोगी तथा प्रभावी होना चाहते हैं? अपने जीवन की गवाही बाँटना, अर्थात, मसीह यीशु द्वारा आपके जीवन में किए गए कार्यों का बयान करना आरंभ कर दीजिए। परिणाम आपको भी अचंभित कर देंगे। - रैन्डी किल्गोर


लोग विश्वास की सच्ची कहानियों को पहचानना जानते हैं और पहचानते भी हैं।

और वे मेम्ने के लोहू के कारण, और अपनी गवाही के वचन के कारण, उस पर जयवन्‍त हुए, और उन्होंने अपने प्राणों को प्रिय न जाना, यहां तक कि मृत्यु भी सह ली। - प्रकाशितवाक्य 12:11 

बाइबल पाठ: मरकुस 5:1-20
Mark 5:1 और वे झील के पार गिरासेनियों के देश में पहुंचे।
Mark 5:2 और जब वह नाव पर से उतरा तो तुरन्त एक मनुष्य जिस में अशुद्ध आत्मा थी कब्रों से निकल कर उसे मिला।
Mark 5:3 वह कब्रों में रहा करता था। और कोई उसे सांकलों से भी न बान्‍ध सकता था।
Mark 5:4 क्योंकि वह बार बार बेडिय़ों और सांकलों से बान्‍धा गया था, पर उसने सांकलों को तोड़ दिया, और बेडिय़ों के टुकड़े टुकड़े कर दिए थे, और कोई उसे वश में नहीं कर सकता था।
Mark 5:5 वह लगातार रात-दिन कब्रों और पहाड़ो में चिल्लाता, और अपने को पत्थरों से घायल करता था।
Mark 5:6 वह यीशु को दूर ही से देखकर दौड़ा, और उसे प्रणाम किया।
Mark 5:7 और ऊंचे शब्द से चिल्लाकर कहा; हे यीशु, परमप्रधान परमेश्वर के पुत्र, मुझे तुझ से क्या काम? मैं तुझे परमेश्वर की शपथ देता हूं, कि मुझे पीड़ा न दे।
Mark 5:8 क्योंकि उसने उस से कहा था, हे अशुद्ध आत्मा, इस मनुष्य में से निकल आ।
Mark 5:9 उसने उस से पूछा; तेरा क्या नाम है? उसने उस से कहा; मेरा नाम सेना है; क्योंकि हम बहुत हैं।
Mark 5:10 और उसने उस से बहुत बिनती की, हमें इस देश से बाहर न भेज।
Mark 5:11 वहां पहाड़ पर सूअरों का एक बड़ा झुण्ड चर रहा था।
Mark 5:12 और उन्होंने उस से बिनती कर के कहा, कि हमें उन सूअरों में भेज दे, कि हम उन के भीतर जाएं।
Mark 5:13 सो उसने उन्हें आज्ञा दी और अशुद्ध आत्मा निकलकर सूअरों के भीतर पैठ गई और झुण्ड, जो कोई दो हजार का था, कड़ाडे पर से झपटकर झील में जा पड़ा, और डूब मरा।
Mark 5:14 और उन के चरवाहों ने भागकर नगर और गांवों में समाचार सुनाया।
Mark 5:15 और जो हुआ था, लोग उसे देखने आए। और यीशु के पास आकर, वे उसको जिस में दुष्टात्माएं थीं, अर्थात जिस में सेना समाई थी, कपड़े पहिने और सचेत बैठे देखकर, डर गए।
Mark 5:16 और देखने वालों ने उसका जिस में दुष्टात्माएं थीं, और सूअरों का पूरा हाल, उन को कह सुनाया।
Mark 5:17 और वे उस से बिनती कर के कहने लगे, कि हमारे सिवानों से चला जा।
Mark 5:18 और जब वह नाव पर चढ़ने लगा, तो वह जिस में पहिले दुष्टात्माएं थीं, उस से बिनती करने लगा, कि मुझे अपने साथ रहने दे।
Mark 5:19 परन्तु उसने उसे आज्ञा न दी, और उस से कहा, अपने घर जा कर अपने लोगों को बता, कि तुझ पर दया कर के प्रभु ने तेरे लिये कैसे बड़े काम किए हैं।
Mark 5:20 वह जा कर दिकपुलिस में इस बात का प्रचार करने लगा, कि यीशु ने मेरे लिये कैसे बड़े काम किए; और सब अचम्भा करते थे।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 31-32 
  • प्रेरितों 23:16-35


रविवार, 21 जुलाई 2013

दृष्टिकोण और भविष्य

   अपने जीवन के एक लम्बे समय तक मैं उन लोगों के समान ही दृष्टीकोण रखता था जो परमेश्वर के विरुद्ध हैं क्योंकि परमेश्वर ने संसार में पीड़ा को होने दिया है। मैं किसी भी रीति से इस भिन्न-भिन्न प्रकार की पीड़ाओं से भरे विषाक्त संसार को तर्कसंगत नहीं मान सकता था। लेकिन जब मेरा मेलजोल उन लोगों से हुआ जो मुझ से भी अधिक दुख अथवा पीड़ा में से हो कर निकल रहे थे, तो उनके जीवन में इसके प्रभाव को देखकर मैं चकित हुआ। मैंने देखा कि दुख और पीड़ा एक समान ही दो भिन्न कार्य कर सकते हैं, परमेश्वर और उसके कार्यों के प्रति सन्देह उत्पन्न करना, या परमेश्वर में विश्वास और भी दृढ़ कर देना।

   दुख और पीड़ा को लेकर परमेश्वर के विरुद्ध मेरा वैमनस्य एक बात के कारण जाता रहा है - क्योंकि अब मैं परमेश्वर को जानने लगा हूँ और उस पर विश्वास रखता हूँ। उसे इस प्रकार व्यक्तिगत रीति से जानने और उस पर विश्वास लाने से मेरे जीवन में आनन्द, प्रेम और भलाई भर गए हैं। अब मेरा विश्वास मनुष्यों द्वारा गढ़ी गई किसी धारणा या विचारधारा, या किसी किंवदंती अथवा काल्पनिक बात पर नहीं वरन एक प्रमाणित और जीवित ऐतिहासिक व्यक्ति - प्रभु यीशु मसीह पर है, और मेरे प्रभु ने मुझे ऐसा दृढ़ विश्वास दिया है जो किसी भी दुख अथवा पीड़ा से काटा नहीं जा सकता और ना ही कम हो सकता है।

   बहुत से लोगों के मन में प्रश्न रहता है - जब दुख और पीड़ा आती हैं तब परमेश्वर कहाँ होता है? उत्तर स्पष्ट और जगविदित है - वहीं जहाँ आपने अपने जीवन में उसे रखा है। यदि परमेश्वर आप के जीवन का स्वामी है, आपने अपना जीवन उसे समर्पित किया है, और उसकी इच्छानुसार अपना जीवन व्यतीत करने के प्रयास में रहते हैं तो वह आपके जीवन का रखवाला भी है, और हर परिस्थिति में वह आपके साथ बना रहता है और आपकी हर पीड़ा को वह सहता भी है और आपको उसे सहने और उस पर जयवंत होने की सामर्थ भी देता है। यदि आपने परमेश्वर को अपने जीवन से दूर कर रखा है, आप स्वयं अपने जीवन के स्वामी हैं और अपनी मन-मर्ज़ी से, अपनी ही लालसाओं और इच्छाओं की पूर्ति के लिए जीवन व्यतीत करते हैं, तो परमेश्वर भी आपके निर्णय का आदर करते हुए आपके जीवन की किसी बात में दखलंदाज़ी नहीं करता।

   दुख और पीड़ा परमेश्वर द्वारा करी गई सृष्टि की रचना का भाग नहीं हैं; इनका सृष्टि में प्रवेश मनुष्य द्वारा परमेश्वर की अनाज्ञाकारिता और पाप का परिणाम है। जहाँ पाप की उपस्थिति है, वहाँ परमेश्वर कि उपस्थिति नहीं रह सकती है और ऐसी स्थिति शैतान को खुली रीति से अपना कार्य करने की पूरी छूट है। लेकिन परमेश्वर शैतान और उसके कार्यों के प्रति मजबूर नहीं है। परमेश्वर की सामर्थ ऐसी है कि वह शैतान द्वारा लाई गई दुख और पीड़ा की परिस्थितियों को भी अपने बच्चों की भलाई के लिए प्रयोग कर लेता है, उन्हें अपने बारे में और भी गहराई से सिखाने के लिए और अपने प्रति उनके विश्वास को और भी अधिक दृढ़ करने के लिए। इसीलिए आप पाएंगे कि जो लोग मसीही विश्वास में दृढ़ हैं, दुख और पीड़ाएं उनके जीवनों को परमेश्वर के और भी निकट ले आती हैं और उन परिस्थितियों में भी वे एक अद्भुत शांति के साथ रहते हैं, जो संसार की किसी भी शांति से बिलकुल भिन्न तथा श्रेष्ठतम होती है (यूहन्ना 14:27; 16:33)।

   हमारे उद्धाकर्ता प्रभु यीशु ने हमारे लिए दुख और पीड़ा व्यक्तिगत रूप में सहे हैं, वह अपने प्रीयों के दुख को अनुभव करके रोया भी है; आताताईयों द्वारा बड़ी निर्मम रीति से उसका शरीर तोड़ा गया है और उसका लहू बहाया गया है; उसने संसार के हर अपमान, तिरिस्कार और बेवजह क्रूरता को मृत्यु तक सहा है। इसीलिए वह हमारी हर पीड़ा और दुख को जानता है और सदा अपने विश्वासियों के साथ बना रहता है, उन्हें सामर्थ देता रहता है और इन परिस्थितियों द्वारा अपने लोगों को तराश कर, चमका कर, उनके जीवनों से व्यर्थ बातों को निकालकर उन्हें सिद्ध और अपने ही स्वरूप के लोग बना रहा है; "...हम उसी तेजस्‍वी रूप में अंश अंश कर के बदलते जाते हैं" (2 कुरिन्थियों 3:18)। एक दिन आएगा, और संसार के हालात गवाह हैं कि शीघ्र ही आएगा, जब शैतान, पीड़ा और दुख का अन्त किया जाएगा और सृष्टि पर पुनः परमेश्वर का राज्य और शांति स्थापित हो जाएगी।

   क्या आप उस दिन के लिए और उस दिन परमेश्वर के सामने खड़े होने के लिए तैयार हैं? यदि नहीं तो आज अवसर है, हो जाईए; प्रभु यीशु से पापों की क्षमा और उसे जीवन समर्पण की मन से निकली एक प्रार्थना आपका दृष्टिकोण और भविष्य दोनों ही भले के लिए बदल देगी। - फिलिप यैन्सी


दुख और पीड़ा संसार के लोगों को परमेश्वर के विमुख कर सकते हैं परन्तु एक मसीही विश्वासी को परमेश्वर के और निकट ले आते हैं।

मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे। - यूहन्ना 14:27

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 15:51-58
1 Corinthians 15:51 देखो, मैं तुम से भेद की बात कहता हूं: कि हम सब तो नहीं सोएंगे, परन्तु सब बदल जाएंगे।
1 Corinthians 15:52 और यह क्षण भर में, पलक मारते ही पिछली तुरही फूंकते ही होगा: क्योंकि तुरही फूंकी जाएगी और मुर्दे अविनाशी दशा में उठाए जांएगे, और हम बदल जाएंगे।
1 Corinthians 15:53 क्योंकि अवश्य है, कि यह नाशमान देह अविनाश को पहिन ले, और यह मरनहार देह अमरता को पहिन ले।
1 Corinthians 15:54 और जब यह नाशमान अविनाश को पहिन लेगा, और यह मरनहार अमरता को पहिन लेगा, तब वह वचन जो लिखा है, पूरा हो जाएगा, कि जय ने मृत्यु को निगल लिया।
1 Corinthians 15:55 हे मृत्यु तेरी जय कहां रही?
1 Corinthians 15:56 हे मृत्यु तेरा डंक कहां रहा? मृत्यु का डंक पाप है; और पाप का बल व्यवस्था है।
1 Corinthians 15:57 परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा हमें जयवन्‍त करता है।
1 Corinthians 15:58 सो हे मेरे प्रिय भाइयो, दृढ़ और अटल रहो, और प्रभु के काम में सर्वदा बढ़ते जाओ, क्योंकि यह जानते हो, कि तुम्हारा परिश्रम प्रभु में व्यर्थ नहीं है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 29-30 
  • प्रेरितों 23:1-15