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शुक्रवार, 22 नवंबर 2013

धन्यवादी


   किसी को, उसके द्वारा दिए गए किसी उपहार के लिए, ’धन्यवाद’ कहकर हम उसे इस बात की जानकारी देते हैं कि उसके द्वारा हमें दिया गया उपहार हमारी नज़रों में मूल्यवान है तथा हम उसका आदर करते हैं। लेखक जी. बी. स्टर्न ने एक बार कहा, "एक मूक धन्यवाद किसी के लिए भी किसी काम का नहीं है"। जब हमारा बेटा छोटा था तो हमें अनेक बार उसे स्मरण दिलाना पड़ता था कि सर झुकाकर, बिना आँखों से आँखें मिलाए, धीमी आवाज़ में मात्र कुछ अस्पष्ट से शब्द बुदबुदा देना एक मान्य धन्यवाद देना नहीं है।

   शादी के कई वर्षों बाद भी मैं और मेरे पति, हम दोनो ही यह अभी भी सीख रहे हैं कि यह आवश्यक है कि हम परस्पर एक दूसरे को धन्यवाद कहते रहें। जब भी हम में से एक किसी दूसरे के प्रति धन्यवादी अनुभव करता है तो यह आवश्यक है कि हम उस भावना को प्रगट करें, शब्दों में व्यक्त भी करें - चाहे हम वही बात अनेक बार पहले भी कह चुके हों। विलियम आर्थर वार्ड ने कहा, "धन्यवादी अनुभव करने के बाद उसे व्यक्त ना करना, उपहार को सुन्दर रीति से लपेट और तैयार करके फिर उसे ना देने के समान ही है।" मानव संबंधों में धन्यवाद व्यक्त करना वास्तव में महत्वपूर्ण है।

   परमेश्वर के प्रति प्रगट रूप में धन्यवादी होना, मनुष्यों के प्रति प्रगट रूप में धन्यवादी होने से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि परमेश्वर का प्रेम और अनुग्रह अपार है; वह तो उनको भी देता रहता है जो उसे मानते तक नहीं। दिन में जितनी बार हम परमेश्वर से मिली आशीष अथवा सहायता को अनुभव करते हैं, या बीते समय में मिली सहायता और आशीषें हमें स्मरण आती हैं तो क्या हम परमेश्वर को उसी समय उनके लिए अपना धन्यवाद व्यक्त करते हैं? और हमारे पापों की क्षमा और हमारे उद्धार के लिए जो महान बलिदान उसने दिया, जब वह स्मरण करते हैं तो क्या हमारे हृदय परमेश्वर के प्रति श्रद्धा, आदर और धन्यवाद से उमड़ते हैं? (रोमियों 6:23; 2 कुरिन्थियों 9:15)

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 107:1 में दिए गए निर्देश को कभी ना भूलें, उसे प्रतिदिन स्मरण रखें: "यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करूणा सदा की है!" (भजन 107:1) - सिंडी हैस कैस्पर


हमारे उद्धार तथा पापों की क्षमा के लिए परमेश्वर की महान भेंट, सदैव ही हमारी सबसे गहन कृतज्ञता के योग्य है।

यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करूणा सदा की है! यहोवा के छुड़ाए हुए ऐसा ही कहें, जिन्हें उसने द्रोही के हाथ से दाम दे कर छुड़ा लिया है, - भजन 107:1-2

बाइबल पाठ: भजन 107:31-43
Psalms 107:31 लोग यहोवा की करूणा के कारण, और उन आश्चर्यकर्मों के कारण जो वह मनुष्यों के लिये करता है, उसका धन्यवाद करें। 
Psalms 107:32 और सभा में उसको सराहें, और पुरनियों के बैठक में उसकी स्तुति करें।
Psalms 107:33 वह नदियों को जंगल बना डालता है, और जल के सोतों को सूखी भूमि कर देता है। 
Psalms 107:34 वह फलवन्त भूमि को नोनी करता है, यह वहां के रहने वालों की दुष्टता के कारण होता है। 
Psalms 107:35 वह जंगल को जल का ताल, और निर्जल देश को जल के सोते कर देता है। 
Psalms 107:36 और वहां वह भूखों को बसाता है, कि वे बसने के लिये नगर तैयार करें; 
Psalms 107:37 और खेती करें, और दाख की बारियां लगाएं, और भांति भांति के फल उपजा लें। 
Psalms 107:38 और वह उन को ऐसी आशीष देता है कि वे बहुत बढ़ जाते हैं, और उनके पशुओं को भी वह घटने नहीं देता। 
Psalms 107:39 फिर अन्धेर, विपत्ति और शोक के कारण, वे घटते और दब जाते हैं। 
Psalms 107:40 और वह हाकिमों को अपमान से लाद कर मार्ग रहित जंगल में भटकाता है; 
Psalms 107:41 वह दरिद्रों को दु:ख से छुड़ा कर ऊंचे पर रखता है, और उन को भेड़ों के झुंड सा परिवार देता है। 
Psalms 107:42 सीधे लोग देख कर आनन्दित होते हैं; और सब कुटिल लोग अपने मुंह बन्द करते हैं। 
Psalms 107:43 जो कोई बुद्धिमान हो, वह इन बातों पर ध्यान करेगा; और यहोवा की करूणा के कामों पर ध्यान करेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 18-19 
  • याकूब 4


गुरुवार, 21 नवंबर 2013

दक्ष कारीगर


   मैंने हाल ही में एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म देखी जिसमें स्टेन्वे प्यानो बनाए जाने की प्रक्रिया को दिखाया गया है। उस चित्र में उस अति-उत्तम साज़ के बनाए जाने में उठाए गए अतिसावधानीपूर्ण हर कदम को दिखाया गया है, पेड़ के काटे जाने से लेकर प्यानो के तैयार होकर दुकान में आने तक। हर कदम पर कुशल कारीगर बारीकी से जाँचते हुए हर कार्य को पूरा करते हैं। एक प्यानो के बनने में एक वर्ष का समय लगता है, और इस साल भर लंबी प्रक्रिया के बाद जब निपुण संगीतज्ञ उसे बजाते हैं तो उनका यही निषकर्ष होता है कि संगीत की जो मधुर ध्वनि एक स्टेन्वे प्यानो से आती है वह अन्य किसी साधारण रीति से बने प्यानो से कभी नहीं आती। जंगल में उग रहे एक पेड़ से इतना उत्तम संगीत निकल सकेगा, और वह इतना मूल्यवान होने पाएगा, यह कलपना करना भी कठिन है; किंतु जंगली पेड़ से एक उत्कृष्ट उत्पाद बनने, तथा उसकी उत्तमता और प्रसिद्धी होने का राज़ है उसके निर्माण के हर कदम पर दक्ष कारीगरों का कार्य।

   जब परमेश्वर ने इस्त्राएल के लोगों को आराधना के लिए एक स्थान बनाने को कहा तो उसमें प्रयोग होने वाले सामान के बनाने के लिए भी परमेश्वर ने एक उत्तम कारीगर के कार्य को महत्व दिया। परमेश्वर ने मूसा को आराधना के स्थान का सारा नमूना दिखाते और समझाते हुए कहा कि उसने बसलेल को इस कार्य के करने के लिए चुना है और इस कार्य के लिए आवश्यक सारा कौशल और कला उसके अन्दर डाल दी है, अपने आत्मा से उसे भर दिया है (निर्गमन 31:3-5)।

   आज परमेश्वर प्रत्येक मसीही विश्वासी के हृदय में निवास करता है, लेकिन उसकी कारीगरी के कार्य का अन्त नहीं हुआ है। आज प्रत्येक मसीही विश्वासी उसके हाथ की कलाकृति है (इफिसियों 2:10) और हर विश्वासी को संवारने तराशने वाला कुशल कारीगर परमेश्वर पवित्र आत्मा है। वह हमारे हर एक दोष और खामी को तराश कर निकालता रहता है और हमारे चरित्र को प्रभु यीशु की समानता में ढालता रहता है (रोमियों 8:28-29)। जैसे जैसे हम उसकी कारीगरी के आधीन अपने आप को समर्पित करते जाते हैं हम पाते हैं कि एक निपुण कारीगर के समान वह हमें उत्तमता में और उन्नत करता जाता है; अन्ततः हम द्खेंगे कि उस दक्ष कारीगर की कुशल कारीगरी ही हमारे उत्कृष्ट जीवन का राज़ है।

   अपने जीवनों को उस महान और सर्वोत्तम कारीगर परमेश्वर प्रभु यीशु के हाथ में समर्पित कर दीजिए। अपनी किसी क्षमता अथवा कौशल पर नहीं वरन उसकी दक्ष कारीगरी पर भरोसा रखिए और उसे अपना कार्य स्वतंत्रता पूर्वक कर लेने दीजिए; वह आपके स्वरूप को ऐसा संवार देगा जैसा कि आपने कभी कलपना भी नहीं करी होगी। - डेनिस फिशर


पिता परमेश्वर ने हमें अपने पुत्र की समानता में लाने के लिए हमें अपना पवित्र आत्मा दिया है।

क्योंकि हम उसके बनाए हुए हैं; और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्हें परमेश्वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया। - इफिसियों 2:10

बाइबल पाठ: निर्गमन 31:1-5
Exodus 31:1 फिर यहोवा ने मूसा से कहा, 
Exodus 31:2 सुन, मैं ऊरी के पुत्र बसलेल को, जो हूर का पोता और यहूदा के गोत्र का है, नाम ले कर बुलाता हूं। 
Exodus 31:3 और मैं उसको परमेश्वर की आत्मा से जो बुद्धि, प्रवीणता, ज्ञान, और सब प्रकार के कार्यों की समझ देनेवाली आत्मा है परिपूर्ण करता हूं, 
Exodus 31:4 जिस से वह कारीगरी के कार्य बुद्धि से निकाल निकाल कर सब भांति की बनावट में, अर्थात सोने, चांदी, और पीतल में, 
Exodus 31:5 और जड़ने के लिये मणि काटने में, और लकड़ी के खोदने में काम करे।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 16-17 
  • याकूब 3


बुधवार, 20 नवंबर 2013

पारिवारिक गुण


   मेरे बचपन का एक सन्डे स्कूल का गीत है जो मुझे कभी कभी स्मरण हो आता है। उस गीत के बोल प्रभु यीशु से बड़ी उदारता से मिलने वाली शान्ति की आशीषों का वर्णन करते हैं; गीत का आरंभ है: "मेरे हृदय में यीशु की शान्ति है, जो वर्णन से बाहर है।" 

   चाहे इस गीत के लेखक ने इसे एक भली इच्छा से लिखा है, लेकिन इस गीत के बोलों में कुछ कहे जाने से रह गया है, जो प्रभु यीशु के सुसमाचार के लिए आवश्यक है। यह बिलकुल सत्य है कि परमेश्वर की शान्ति हमें परमेश्वर से मिलने वाली एक भेंट है, जिससे अपने हृदयों में हम उसकी उपस्थिति को अनुभव करने पाते हैं, उससे संगति करने पाते हैं (यूहन्ना 14:27; 16:33)। लेकिन परमेश्वर की कदापि यह इच्छा नहीं है कि हम इस शान्ति को अपने पास ही समेट कर रखे रहें। परमेश्वर यह चाहता है कि हम इस अद्भुत शान्ति को अपने आस-पास के और संसार के सभी लोगों तक पहुँचाएं। मसीही विश्वासी होने के नाते यह शान्ति हमारे व्यवहार, संबंधों और हमारे अराधनालयों के वातावरण का अभिन्न अंग होनी चाहिए।

   प्रभु यीशु ने अपने ’पहाड़ी उपदेश’ में कहा था, "धन्य हैं वे, जो मेल करवाने वाले हैं, क्योंकि वे परमेश्वर के पुत्र कहलाएंगे" (मत्ती 5:9)। यह दिखाता है कि हम मसीही विश्वासियों को आगे बढ़कर परमेश्वर की इस शान्ति को लोगों के जीवनों तक पहुँचाना है, उसे अपने संबंधों में दिखाना है। क्योंकि सामान्य मानव प्रवृति शान्ति नहीं उत्पात और गड़बड़ मचाने की होती है, इसलिए प्रभु यीशु की ओर से अपने अनुयायियों के लिए यह एक बहुत महत्वपूर्ण आज्ञा है। तो, मेल कराने वाले कैसे होते हैं? इसी अध्याय में प्रभु यीशु ने इस बात की भी पहचान दी: मेल कराने वाले अपने सताने वालों की ओर दूसरा गाल भी फेर देते हैं (पद 39); वे आशा से अधिक कार्य कर देने वाले होते हैं (पद 41); वे अपने सताने वालों के लिए प्रार्थना करने वाले और उनसे प्रेम करने वाले होते हैं (पद 44)।

   हम मसीही विश्वासियों को यह सब क्यों करना है? क्योंकि हमारा परमेश्वर शान्ति का दाता है, और जब हम शान्ति लाते हैं तब हम भी "परमेश्वर के पुत्र कहलाएंगे" (पद 9)। यानि कि यह शान्ति या मेलजोल कराना हमारा पारिवारिक गुण है और हमें अपने पिता के गुण प्रगट करने हैं। - जो स्टोवैल


प्रभु यीशु मसीह में परमेश्वर के साथ हमारी शान्ति और परमेश्वर से हमें मिली शान्ति के कारण हमें परमेश्वर की शान्ति को संसार में पहुँचाना है।

धन्य हैं वे, जो मेल करवाने वाले हैं, क्योंकि वे परमेश्वर के पुत्र कहलाएंगे। - मत्ती 5:9

बाइबल पाठ: मत्ती 5:9, 38-48
Matthew 5:9 धन्य हैं वे, जो मेल करवाने वाले हैं, क्योंकि वे परमेश्वर के पुत्र कहलाएंगे।
Matthew 5:38 तुम सुन चुके हो, कि कहा गया था, कि आंख के बदले आंख, और दांत के बदले दांत। 
Matthew 5:39 परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि बुरे का सामना न करना; परन्तु जो कोई तेरे दाहिने गाल पर थप्पड़ मारे, उस की ओर दूसरा भी फेर दे। 
Matthew 5:40 और यदि कोई तुझ पर नालिश कर के तेरा कुरता लेना चाहे, तो उसे दोहर भी ले लेने दे। 
Matthew 5:41 और जो कोई तुझे कोस भर बेगार में ले जाए तो उसके साथ दो कोस चला जा। 
Matthew 5:42 जो कोई तुझ से मांगे, उसे दे; और जो तुझ से उधार लेना चाहे, उस से मुंह न मोड़।
Matthew 5:43 तुम सुन चुके हो, कि कहा गया था; कि अपने पड़ोसी से प्रेम रखना, और अपने बैरी से बैर। 
Matthew 5:44 परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सताने वालों के लिये प्रार्थना करो। 
Matthew 5:45 जिस से तुम अपने स्‍वर्गीय पिता की सन्तान ठहरोगे क्योंकि वह भलों और बुरों दोनों पर अपना सूर्य उदय करता है, और धर्मियों और अधर्मियों दोनों पर मेंह बरसाता है। 
Matthew 5:46 क्योंकि यदि तुम अपने प्रेम रखने वालों ही से प्रेम रखो, तो तुम्हारे लिये क्या फल होगा? क्या महसूल लेने वाले भी ऐसा ही नहीं करते? 
Matthew 5:47 और यदि तुम केवल अपने भाइयों ही को नमस्‍कार करो, तो कौन सा बड़ा काम करते हो? क्या अन्यजाति भी ऐसा नहीं करते? 
Matthew 5:48 इसलिये चाहिये कि तुम सिद्ध बनो, जैसा तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता सिद्ध है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 14-15 
  • याकूब 2


मंगलवार, 19 नवंबर 2013

सफाई


   इस सप्ताह परमेश्वर ने कुछ शरद ऋतु वाली सफाई करी - उसने हमारे रहने के इलाके में एक तेज़ आंधी चलाकर पेड़ों को हिलाया और झकझोरा। इससे उन के सूखे हुए पत्ते और कई टहनियाँ पेड़ से अलग होकर नीचे गिर पड़े। अब आते बसंत ऋतु में नई कोंपलों और पत्तों के उगने और सूर्य की रौशनी से ऊर्जा प्राप्त कर के बढ़ने के लिए पर्याप्त स्थान तैयार हो गया। उन टूट कर गिरे पत्तों और टहनियों को जमा कर के अपने बागीचे से साफ करते समय मुझे यह शिक्षा भी मिली कि जब परमेश्वर मेरे जीवन से व्यर्थ बातों को अलग करे, तो भला होगा कि जो उसने अलग कर दिया है उसे मैं अपने जीवन से साफ भी कर दूँ, जैसे मैंने अपने बाग़ से उन गिरे हुए पत्तों और टहनियों को साफ कर रही थी। मैं ने यह भी सीखा कि इसी प्रकार मेरे जीवन में भी परमेश्वर कभी कभी किसी आँधी को या मुझे झकझोर देने वाले किसी अनुभव को आ लेने देता है जिससे मेरे जीवन के वे व्यर्थ भाग मुझ से अलग किए जा सकें जो सामान्य प्रक्रिया से अलग नहीं हो पा रहे हैं।

   ये ’व्यर्थ’ भाग मेरी कुछ ऐसी आदतें या पसन्द की बातें हो सकतीं हैं जिन्हें मैं ढिटाई से पकड़े हुए हूँ और छोड़ना नहीं चाहती। वे मेरी सेवकाई के ऐसे अंश भी हो सकते हैं जो कभी मेरे लिए भले और लाभदायक थे परन्तु अब उनकी उपयोगिता मेरे जीवन और मेरी सेवकाई के लिए समाप्त हो गई है, परमेश्वर उनके स्थान पर अब कुछ नया मेरे जीवन में लाना चाहता है। लेकिन अधिकांशतः यह कोई बुरी आदत या ज़िद्दी व्यवहार, जैसे कड़ुवाहट, क्रोध, निन्दा (इफिसियों 4:31) आदि होता है जिसे मैं परमेश्वर द्वारा स्मरण दिलाए जाने पर भी, या फिर उसकी चेतावनियों को प्राप्त करने अथवा हलकी डाँट के बावजूद भी छोड़ने को तैयार नहीं होती, ढिटाई से उनमें बनी रहती हूँ। मुझे साफ करने के लिए फिर परमेश्वर को मुझे हिलाना और झकझोरना ही पड़ता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के पुराने नियम खण्ड में योना नबी ने जाना कि जब कोई किसी ढिटाई के आचरण को छोड़ने को तैयार नहीं होता तब क्या कुछ हो सकता है। योना परमेश्वर का नबी था, लेकिन निनेवे के दुष्ट लोगों के प्रति उसकी कड़ुवाहट परमेश्वर के प्रति उसके प्रेम से कहीं अधिक थी। जब परमेश्वर ने योना को कहा कि वह निनेवे के लोगों के मध्य जा कर पश्चाताप करने का प्रचार करे, तो वह परमेश्वर की आज्ञा को मानने की बजाए, निनेवे से विपरीत दिशा में एक पानी जहाज़ पर चढ़कर चल निकला। लेकिन परमेश्वर से भागना संभव नहीं था; परमेश्वर ने एक प्रचण्ड आँधी के द्वारा उस जहाज़ को झकझोरा, योना ने स्वीकार किया की जहाज़ की यह स्थिति उसके कारण हुई है, और उसके कहने पर उसे पानी में फेंक दिया गया, जहाँ योना के लिए परमेश्वर ने एक बड़े मगरमच्छ को तैयार कर रखा था। तीन दिन तक मगरमच्छ के पेट में रहने के बाद मगरमच्छ ने योना को निनेवे के तट पर उगल दिया और अन्ततः योना ने जाकर निनेवे में परमेश्वर के प्रति पापों से पश्चाताप का प्रचार किया जिससे सारा निनेवे पश्चाताप में परमेश्वर के सामने झुक गया और विनाश से बच गया।

   परमेश्वर तो अपने लोगों को साफ देखना चाहता है, और उन्हें साफ रहने की शिक्षा भी देता है; अब यह हम पर है कि हम कैसे साफ होते हैं - उसकी सुनकर या उसके द्वारा हिलाए और झकझोरे जा कर। हमारी सफाई उसकी ज़िम्मेदारी है, और वह उसे पूरा भी करेगा; इसलिए जो सहज से हो जाए उसके लिए तकलीफ क्यों सहें? - जूली ऐकैरमैन लिंक


मसीह यीशु के कलवरी के क्रूस पर बहाए लहु की सामर्थ पाप के गहरे से गहरे दाग़ को भी धो कर साफ कर सकती है।

पर जैसा तुम्हारा बुलाने वाला पवित्र है, वैसे ही तुम भी अपने सारे चाल चलन में पवित्र बनो। क्योंकि लिखा है, कि पवित्र बनो, क्योंकि मैं पवित्र हूं। - 1 पतरस 1:15-16

बाइबल पाठ: योना 1
Jonah 1:1 यहोवा का यह वचन अमितै के पुत्र योना के पास पहुंचा, 
Jonah 1:2 उठ कर उस बड़े नगर नीनवे को जा, और उसके विरुद्ध प्रचार कर; क्योंकि उसकी बुराई मेरी दृष्टि में बढ़ गई है। 
Jonah 1:3 परन्तु योना यहोवा के सम्मुख से तर्शीश को भाग जाने के लिये उठा, और यापो नगर को जा कर तर्शीश जाने वाला एक जहाज पाया; और भाड़ा देकर उस पर चढ़ गया कि उनके साथ हो कर यहोवा के सम्मुख से तर्शीश को चला जाए।
Jonah 1:4 तब यहोवा ने समुद्र में एक प्रचण्ड आंधी चलाई, और समुद्र में बड़ी आंधी उठी, यहां तक कि जहाज टूटने पर था। 
Jonah 1:5 तब मल्लाह लोग डर कर अपने अपने देवता की दोहाई देने लगे; और जहाज में जो व्यापार की सामग्री थी उसे समुद्र में फेंकने लगे कि जहाज हल्का हो जाए। परन्तु योना जहाज के निचले भाग में उतरकर सो गया था, और गहरी नींद में पड़ा हुआ था। 
Jonah 1:6 तब मांझी उसके निकट आकर कहने लगा, तू भारी नींद में पड़ा हुआ क्या करता है? उठ, अपने देवता की दोहाई दे! सम्भव है कि परमेश्वर हमारी चिन्ता करे, और हमारा नाश न हो।
Jonah 1:7 तब उन्होंने आपस में कहा, आओ, हम चिट्ठी डाल कर जान लें कि यह विपत्ति हम पर किस के कारण पड़ी है। तब उन्होंने चिट्ठी डाली, और चिट्ठी योना के नाम पर निकली। 
Jonah 1:8 तब उन्होंने उस से कहा, हमें बता कि किस के कारण यह विपत्ति हम पर पड़ी है? तेरा उद्यम क्या है? और तू कहां से आया है? तू किस देश और किस जाति का है? 
Jonah 1:9 उसने उन से कहा, मैं इब्री हूं; और स्वर्ग का परमेश्वर यहोवा जिसने जल स्थल दोनों को बनाया है, उसी का भय मानता हूं। 
Jonah 1:10 तब वे निपट डर गए, और उस से कहने लगे, तू ने यह क्या किया है? वे जान गए थे कि वह यहोवा के सम्मुख से भाग आया है, क्योंकि उसने आप ही उन को बता दिया था।
Jonah 1:11 तब उन्होंने उस से पूछा, हम तेरे साथ क्या करें जिस से समुद्र शान्त हो जाए? उस समय समुद्र की लहरें बढ़ती ही जाती थीं। 
Jonah 1:12 उसने उन से कहा, मुझे उठा कर समुद्र में फेंक दो; तब समुद्र शान्त पड़ जाएगा; क्योंकि मैं जानता हूं, कि यह भारी आंधी तुम्हारे ऊपर मेरे ही कारण आई है। 
Jonah 1:13 तौभी वे बड़े यत्न से खेते रहे कि उसको किनारे पर लगाएं, परन्तु पहुंच न सके, क्योंकि समुद्र की लहरें उनके विरुद्ध बढ़ती ही जाती थीं। 
Jonah 1:14 तब उन्होंने यहोवा को पुकार कर कहा, हे यहोवा हम बिनती करते हैं, कि इस पुरूष के प्राण की सन्ती हमारा नाश न हो, और न हमें निर्दोष की हत्या का दोषी ठहरा; क्योंकि हे यहोवा, जो कुछ तेरी इच्छा थी वही तू ने किया है। 
Jonah 1:15 तब उन्होंने योना को उठा कर समुद्र में फेंक दिया; और समुद्र की भयानक लहरें थम गईं। 
Jonah 1:16 तब उन मनुष्यों ने यहोवा का बहुत ही भय माना, और उसको भेंट चढ़ाई और मन्नतें मानीं।
Jonah 1:17 यहोवा ने एक बड़ा सा मगरमच्छ ठहराया था कि योना को निगल ले; और योना उस मगरमच्छ के पेट में तीन दिन और तीन रात पड़ा रहा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 11-13 
  • याकूब 1


सोमवार, 18 नवंबर 2013

बहुभाषीय


   क्या यह संभव है कि ऐसे समाज तक, जो प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार के प्रति अधिकाधिक उदासीन होते जा रहा है, और उन लोगों तक जो मसीही विश्वास को नहीं मानते यह सुसमाचार सन्देश पहुँचाया जा सके? ऐसा कर सकने का एक माध्यम हो सकता है हम मसीही विश्वासियों का सांसकृतिक रूप से "बहुभाषीय" हो जाना - उन लोगों ’भाषा’ के प्रयोग द्वारा, अर्थात उन लोगों की रुचि और लगाव की बातों के माध्यम से, उन तक प्रभु यीशु मसीह में सेंत-मेंत मिलने वाली मुक्ति के सन्देश को पहुँचाना।

   सामान्यतः आम लोगों की रुचि संगीत, सिनेमा, टी.वी., खेल-कूद आदि में होती है और वे ऐसे ही विषयों पर आपस में बातचीत करते हैं। यदि हम मसीही विश्वासी भी इन बातों की आलोचना या निन्दा किए बिना, इन विषयों को बातचीत आरंभ करने का माध्यम बना कर उन तक इन विषयों के सन्दर्भ में परमेश्वर के वचन और उद्धार के मार्ग को प्रस्तुत करें तो सुसमाचार के प्रति लोगों की रुचि जागृत करना सम्भव होगा।

   प्रेरित पौलुस ने इस बात का उदाहरण अथेने के लोगों के साथ अपने वार्तालाप में दिया। प्रेरितों के कार्य के अध्याय 17 में हम पाते हैं कि अथेने के अरियुपगुस में पौलुस को अवसर हुआ कि एक पूर्णतः गैरमसीही संसकृति के लोगों को मसीही विश्वास और मसीह यीशु में उद्धार के मार्ग के बारे में बताए। ऐसा करने के लिए पौलुस ने उन युनानी लोगों के कवियों की लिखी बातों को संदर्भ बनाकर सुसमाचार को उनके सामने प्रस्तुत किया; पौलुस ने कहा: "क्योंकि हम उसी में जीवित रहते, और चलते-फिरते, और स्थिर रहते हैं; जैसे तुम्हारे कितने कवियों ने भी कहा है, कि हम तो उसी के वंश भी हैं" (प्रेरितों 17:28)।

   जैसे पौलुस ने उस संसकृति के लोगों तक अपनी बात उसे आधार बनाकर पहुँचाई जो वे पढ़ रहे थे, हम भी लोगों तक प्रभु यीशु मसीह में पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार को अधिक प्रभावी रीति से लोगों तक पहुँचा सकते हैं यदि हम उन की रुचि के विषय को आधार बनाएं तो। क्या आप किसी पड़ौसी या सहकर्मी तक सुसमाचार पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं? ’बहुभाषीय’ बन कर देखिए, शायद ऐसा करना कारगर हो जाए। - बिल क्राउडर


बाइबल का सन्देश संसार के संपर्क में लाना आवश्यक है।

क्योंकि हम उसी में जीवित रहते, और चलते-फिरते, और स्थिर रहते हैं; जैसे तुम्हारे कितने कवियों ने भी कहा है, कि हम तो उसी के वंश भी हैं। - प्रेरितों 17:28

बाइबल पाठ: प्रेरितों 17:18-31
Acts 17:18 तब इपिकूरी और स्‍तोईकी पण्‍डितों में से कितने उस से तर्क करने लगे, और कितनों ने कहा, यह बकवादी क्या कहना चाहता है परन्तु औरों ने कहा; वह अन्य देवताओं का प्रचारक मालूम पड़ता है, क्योंकि वह यीशु का, और पुनरुत्थान का सुसमाचार सुनाता था। 
Acts 17:19 तब वे उसे अपने साथ अरियुपगुस पर ले गए और पूछा, क्या हम जान सकते हैं, कि यह नया मत जो तू सुनाता है, क्या है? 
Acts 17:20 क्योंकि तू अनोखी बातें हमें सुनाता है, इसलिये हम जानना चाहते हैं कि इन का अर्थ क्या है? 
Acts 17:21 (इसलिये कि सब अथेनवी और परदेशी जो वहां रहते थे नई नई बातें कहने और सुनने के सिवाय और किसी काम में समय नहीं बिताते थे)। 
Acts 17:22 तब पौलुस ने अरियुपगुस के बीच में खड़ा हो कर कहा; हे अथेने के लोगों मैं देखता हूं, कि तुम हर बात में देवताओं के बड़े मानने वाले हो। 
Acts 17:23 क्योंकि मैं फिरते हुए तुम्हारी पूजने की वस्‍तुओं को देख रहा था, तो एक ऐसी वेदी भी पाई, जिस पर लिखा था, कि अनजाने ईश्वर के लिये। सो जिसे तुम बिना जाने पूजते हो, मैं तुम्हें उसका समाचार सुनाता हूं। 
Acts 17:24 जिस परमेश्वर ने पृथ्वी और उस की सब वस्‍तुओं को बनाया, वह स्वर्ग और पृथ्वी का स्‍वामी हो कर हाथ के बनाए हुए मन्‍दिरों में नहीं रहता। 
Acts 17:25 न किसी वस्तु का प्रयोजन रखकर मनुष्यों के हाथों की सेवा लेता है, क्योंकि वह तो आप ही सब को जीवन और स्‍वास और सब कुछ देता है। 
Acts 17:26 उसने एक ही मूल से मनुष्यों की सब जातियां सारी पृथ्वी पर रहने के लिये बनाईं हैं; और उन के ठहराए हुए समय, और निवास के सिवानों को इसलिये बान्‍धा है। 
Acts 17:27 कि वे परमेश्वर को ढूंढ़ें, कदाचित उसे टटोल कर पा जाएं तौभी वह हम में से किसी से दूर नहीं! 
Acts 17:28 क्योंकि हम उसी में जीवित रहते, और चलते-फिरते, और स्थिर रहते हैं; जैसे तुम्हारे कितने कवियों ने भी कहा है, कि हम तो उसी के वंश भी हैं। 
Acts 17:29 सो परमेश्वर का वंश हो कर हमें यह समझना उचित नहीं, कि ईश्वरत्‍व, सोने या रूपे या पत्थर के समान है, जो मनुष्य की कारीगरी और कल्पना से गढ़े गए हों। 
Acts 17:30 इसलिये परमेश्वर आज्ञानता के समयों में अनाकानी कर के, अब हर जगह सब मनुष्यों को मन फिराने की आज्ञा देता है। 
Acts 17:31 क्योंकि उसने एक दिन ठहराया है, जिस में वह उस मनुष्य के द्वारा धर्म से जगत का न्याय करेगा, जिसे उसने ठहराया है और उसे मरे हुओं में से जिलाकर, यह बात सब पर प्रामाणित कर दी है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 8-10 
  • इब्रानियों 13


रविवार, 17 नवंबर 2013

साथी


   मुझे अपने प्रदेश के मार्गों पर पैदल घूमना चलना अच्छा लगता है क्योंकि ऐसा करने से मैं वहाँ की सुरम्य सुन्दरता और भव्यता को भली-भांति निहार सकता हूँ, उसका आनन्द उठा सकता हूँ। यह मुझे इस बात का भी स्मरण दिलाता है कि मैं अपने तथा जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह के साथ एक आत्मिक यात्रा पर भी हूँ, जिसमें प्रभु यीशु मेरा साथी और मार्गदर्शक है। प्रभु यीशु भी, अपने पृथ्वी के समय में सारे इस्त्राएल देश में चलता फिरता और शिष्य बनाता रहा, उनसे यह कह कर, "मेरे पीछे चले आओ" (मत्ती 4:19)।

   जॉन बनयन द्वारा लिखित सुप्रसिद्ध पुस्तक "मसीही मुसाफिर" में एक स्थान पर मसीही यात्री कठिनाई के पहाड़ पर पहुँचता है, और उसे चढ़ने से पहले वह थोड़ा रुककर विश्राम करता है। उस विश्राम के समय में वह अपने पास विद्यमान परमेश्वर के वचन को पढ़ता है जो उसे परमेश्वर की उसके साथ बनी हुई उपस्थिति को स्मरण कराता है और आश्वस्त करता है कि परमेश्वर की सामर्थ उसके साथ है। इस विश्राम और मनन से वह नई स्फूर्ति पाता है और अपनी यात्रा पर आगे बढ़ने और कठिनाई के पहाड़ पर चढ़ने के लिए तैयार हो जाता है।

   मसीही विश्वास के जीवन की यह यात्रा सरल नहीं है; अनेक बार इसमें आगे बढ़ने से सरल और बेहतर लगता है इसे छोड़ देना, पीछे हट जाना, मार्ग बदल लेना। लेकिन जब ऐसे कठिन समय आएं तब उचित होता है थोड़ा समय रुककर विश्राम करना और पुनः सामर्थ प्राप्त करना - बीती यात्रा में हमारे साथ बनी रही परमेश्वर प्रभु यीशु की उपस्थिति और सहायता को स्मरण कर के और कभी साथ ना छोड़ने के उसके वायदे तथा उसके वचनों में दी गई हमारी भलाई की प्रतिज्ञाओं के स्मरण से आश्वासन लेने के द्वारा।

   केवल परमेश्वर ही यह जानता है कि हमारी यह जीवन यात्रा कितनी लंबी है, तथा कब, कहाँ और कैसे समाप्त होगी; लेकिन उसका आश्वासन सदा अपने लोगों के साथ है, "...और देखो, मैं जगत के अन्‍त तक सदैव तुम्हारे संग हूं" (मत्ती 28:20)। प्रभु यीशु का यह आश्वासन किसी कथन को सुन्दर बनाने वाला कोई अलंकार मात्र नहीं है। प्रभु यीशु की साथ बनी रहने वाली उपस्थिति वास्तविक है जो अनेक मसीही विश्वासियों ने अपनी विश्वास की यात्रा में भिन्न समयों और परिस्थितियों में अनुभव की है। ऐसा कोई पल नहीं जिसमें मसीह यीशु अपने विश्वासियों के साथ ना हो, ऐसी कोई यात्रा नहीं जिसके प्रत्येक पग में वह साथी ना हो। 

   मैंने अपने अनुभव से जाना है कि वह मेरा ऐसा साथी है जो मेरी जीवन यात्रा को अपनी सामर्थ और मार्गदरशन से सुगम बना देता है। क्या आपने भी मसीह यीशु को आपनी जीवन यात्रा का साथी बनाया है? - डेविड रोपर


जीवन यात्रा के कठिन मार्ग पर अपने बोझ प्रभु यीशु को सौंप दीजिए।

हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। - मत्ती 11:28

बाइबल पाठ: मत्ती 4:18-22
Matthew 4:18 उसने गलील की झील के किनारे फिरते हुए दो भाइयों अर्थात शमौन को जो पतरस कहलाता है, और उसके भाई अन्द्रियास को झील में जाल डालते देखा; क्योंकि वे मछवे थे। 
Matthew 4:19 और उन से कहा, मेरे पीछे चले आओ, तो मैं तुम को मनुष्यों के पकड़ने वाले बनाऊंगा। 
Matthew 4:20 वे तुरन्त जालों को छोड़ कर उसके पीछे हो लिए। 
Matthew 4:21 और वहां से आगे बढ़कर, उसने और दो भाइयों अर्थात जब्‍दी के पुत्र याकूब और उसके भाई यूहन्ना को अपने पिता जब्‍दी के साथ नाव पर अपने जालों को सुधारते देखा; और उन्हें भी बुलाया 
Matthew 4:22 वे तुरन्त नाव और अपने पिता को छोड़ कर उसके पीछे हो लिए।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 5-7 
  • इब्रानियों 12


शनिवार, 16 नवंबर 2013

सावधान!


   बैंक में पैसा लेने-देने और संभालने वाले अधिकारियों के प्रशिक्षण के समय उन्हें असली और नकली नोट में भेद करना और नकली को पहचानना सिखाया जाता है। उन्हें असली और नकली दोनों ही नोट दिखाए जाते हैं फिर असली की तुलना में नकली में विद्यमान समानताओं को नहीं वरन भिन्नताओं को देखना और पहचानना सिखाया जाता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित यूहन्ना की पहली पत्री के दुसरे अध्याय में मसीही विश्वासियों के समक्ष झूठे मसीही विश्वासियों और शिक्षकों के उदाहरण रखे गए हैं जिससे वे असली-नकली की पहचान कर सकें। यूहन्ना ने बताया कि अन्त के समयों की एक पहचान होगी झूठे मसीहियों और मसीह विरोधियों की बहुतायत (1 यूहन्ना 2:18)। झूठे मसीही या मसीह विरोधी वे हैं जो अपने में मसीह यीशु की सामर्थ और उससे प्राप्त अधिकार के होने का दावा तो करते हैं लेकिन उनमें ऐसा कुछ भी नहीं होता; या फिर वे जो मसीह यीशु और मसीही विश्वास का और उसकी शिक्षाओं का इन्कार करते हैं, उसका विरोध करते हैं।

   प्रेरित यूहन्ना ने मसीह विरोधियों की पहचान के तीन चिन्ह दिए: वे मसीही संगति और सहभागिता से हट जाते हैं (पद 19); वे प्रभु यीशु को जगत का उद्धारकर्ता मसीहा स्वीकार नहीं करते (पद 22); वे मसीही विश्वासियों को भी मसीह यीशु से दूर कर देने के प्रयास करते हैं (पद 26)। साथ ही यूहन्ना इसी पत्री में ऐसे मसीह विरोधियों से बच कर रहने के उपाय भी बताता है: प्रत्येक मसीही विश्वासी अपने अन्दर वास करने वाले परमेश्वर पवित्र आत्मा पर निर्भर रहे, उसकी आज्ञाकरिता में चले; परमेश्वर के वचन की सच्चाईयों को जाने और उनमें बना रहे तथा मसीह यीशु के साथ संगति बनाए रखे।

   जैसे बैंक के कर्मचारी असली-नकली नोट के तुलनात्मक प्रशिक्षण के द्वारा असली को पहचानने वाले तथा नकली के नुकसान से बचे रहने वाले हो जाते हैं, हम मसीही विश्वासी भी अटल सत्य प्रभु यीशु मसीह की पहचान के द्वारा नकली अर्थात मसीह विरोधियों को पहचान कर उनके षड़यंत्रों और गलत शिक्षाओं से बचे रह सकते हैं। - मार्विन विलियम्स


सचेत रहें; शैतान थोड़े से सत्य का हल्का सा आवरण पहना कर असत्य को स्वीकारयोग्य बनाने के प्रयास में लगा रहता है।

और यह कुछ अचम्भे की बात नहीं क्योंकि शैतान आप भी ज्योतिमर्य स्वर्गदूत का रूप धारण करता है। सो यदि उसके सेवक भी धर्म के सेवकों का सा रूप धरें, तो कुछ बड़ी बात नहीं परन्तु उन का अन्‍त उन के कामों के अनुसार होगा। - 2 कुरिन्थियों 11:14-15

बाइबल पाठ: 1यूहन्ना 2:18-27
1 John 2:18 हे लड़कों, यह अन्‍तिम समय है, और जैसा तुम ने सुना है, कि मसीह का विरोधी आने वाला है, उसके अनुसार अब भी बहुत से मसीह के विरोधी उठे हैं; इस से हम जानते हैं, कि यह अन्‍तिम समय है। 
1 John 2:19 वे निकले तो हम ही में से, पर हम में के थे नहीं; क्योंकि यदि हम में के होते, तो हमारे साथ रहते, पर निकल इसलिये गए कि यह प्रगट हो कि वे सब हम में के नहीं हैं। 
1 John 2:20 और तुम्हारा तो उस पवित्र से अभिषेक हुआ है, और तुम सब कुछ जानते हो। 
1 John 2:21 मैं ने तुम्हें इसलिये नहीं लिखा, कि तुम सत्य को नहीं जानते, पर इसलिये, कि उसे जानते हो, और इसलिये कि कोई झूठ, सत्य की ओर से नहीं। 
1 John 2:22 झूठा कौन है? केवल वह, जो यीशु के मसीह होने का इन्कार करता है; और मसीह का विरोधी वही है, जो पिता का और पुत्र का इन्कार करता है। 
1 John 2:23 जो कोई पुत्र का इन्कार करता है उसके पास पिता भी नहीं: जो पुत्र को मान लेता है, उसके पास पिता भी है। 
1 John 2:24 जो कुछ तुम ने आरम्भ से सुना है वही तुम में बना रहे: जो तुम ने आरम्भ से सुना है, यदि वह तुम में बना रहे, तो तुम भी पुत्र में, और पिता में बने रहोगे। 
1 John 2:25 और जिस की उसने हम से प्रतिज्ञा की वह अनन्त जीवन है। 
1 John 2:26 मैं ने ये बातें तुम्हें उन के विषय में लिखी हैं, जो तुम्हें भरमाते हैं। 
1 John 2:27 और तुम्हारा वह अभिषेक, जो उस की ओर से किया गया, तुम में बना रहता है; और तुम्हें इस का प्रयोजन नहीं, कि कोई तुम्हें सिखाए, वरन जैसे वह अभिषेक जो उस की ओर से किया गया तुम्हें सब बातें सिखाता है, और यह सच्चा है, और झूठा नहीं: और जैसा उसने तुम्हें सिखाया है वैसे ही तुम उस में बने रहते हो।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 3-4 
  • इब्रानियों 11:20-40