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रविवार, 12 अक्टूबर 2014

कार्यकारी


   हमारी शादी की पचासवीं सालगिरह पर मैं अपनी पत्नि के साथ नौर्वे के भ्रमण पर निकला। उत्तर की ओर अपनी यात्रा करते हुए हम अनेक नगरों और गाँवों से होकर निकले, वहाँ रुकते हुए उनमें घूमे और वहाँ के चर्च भवनों को भी देखा। उन में 12वीं सदी में बना एक चर्च ऐसा था जिसे हमारे गाइड ने बड़े गर्व के साथ "अभी तक कार्यकारी" बताया। मैंने उससे पूछा, "अभी तक कार्यकारी का क्या अर्थ है?" उसने समझाया कि जब नौर्वे के चर्च, शासन की आधीनता में चले गए थे तब प्रशासन की ओर से ही उनमें पास्टर नियुक्त किए जाते थे, और वे पास्टर कभी अपना कार्य नहीं करते थे वरन बस अपनी तनख्वाह लेते रहते थे, कोई सेवकाई के लिए नहीं आता था। लेकिन यह चर्च एक ऐसा चर्च था जिसमें लगभग 1000 वर्ष से परमेश्वर की आराधना और सेवकाई अविरल चल रही थी!

   यह सुनकर तुरंत ही मेरा ध्यान परमेश्वर के वचन में प्रकाशितवाक्य 2 तथा 3 अध्यायों में उल्लेखित उन साथ कलीसियाओं की ओर गया जिनसे प्रभु यीशु कहता है, "मैं तेरे काम जानता हूँ (2:2, 9, 13, 19; 3:1, 8, 15)।" साथ ही मुझे थिस्सुलुनीकिया का चर्च भी स्मरण आय जिसकी प्रशंसा प्रेरित पौलुस ने उनकी विश्वासयोग्यता के लिए करी (1 थिस्सुलुनीकियों 1:2-3)।

   मेरा ध्यान मेरे अपने घर पर स्थित चर्च की ओर भी गया जो पिछले 130 वर्ष से भी अधिक समय से विश्वासयोग्यता के साथ प्रभु यीशु का प्रचार, मण्डली के लोगों की देखभाल तथा वहाँ के समाज की सेवा कर रहा है। वह वास्तव में एक "कार्यकारी चर्च" है। यदि मसीही विश्वासी होने के नाते जिस चर्च के हम भाग हैं वह ऐसे ही प्रचार तथा सेवकाई करने वाला चर्च है तो हम कितने भाग्यशाली लोग हैं। - डेव एग्नर


मसीह यीशु का चर्च एक जीवित देह है, उसके सभी अंग कार्यशील होने चाहिएं।

हम अपनी प्रार्थनाओं में तुम्हें स्मरण करते और सदा तुम सब के विषय में परमेश्वर का धन्यवाद करते हैं। और अपने परमेश्वर और पिता के साम्हने तुम्हारे विश्वास के काम, और प्रेम का परिश्रम, और हमारे प्रभु यीशु मसीह में आशा की धीरता को लगातार स्मरण करते हैं। - 1 थिस्सुलुनीकियों 1:2-3

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 2:1-7
Revelation 2:1 इफिसुस की कलीसिया के दूत को यह लिख, कि, जो सातों तारे अपने दाहिने हाथ में लिये हुए है, और सोने की सातों दीवटों के बीच में फिरता है, वह यह कहता है कि 
Revelation 2:2 मैं तेरे काम, और परिश्रम, और तेरा धीरज जानता हूं; और यह भी, कि तू बुरे लोगों को तो देख नहीं सकता; और जो अपने आप को प्रेरित कहते हैं, और हैं नहीं, उन्हें तू ने परख कर झूठा पाया। 
Revelation 2:3 और तू धीरज धरता है, और मेरे नाम के लिये दु:ख उठाते उठाते थका नहीं। 
Revelation 2:4 पर मुझे तेरे विरुद्ध यह कहना है कि तू ने अपना पहिला सा प्रेम छोड़ दिया है। 
Revelation 2:5 सो चेत कर, कि तू कहां से गिरा है, और मन फिरा और पहिले के समान काम कर; और यदि तू मन न फिराएगा, तो मैं तेरे पास आकर तेरी दीवट को उस स्थान से हटा दूंगा। 
Revelation 2:6 पर हां तुझ में यह बात तो है, कि तू नीकुलइयों के कामों से घृणा करता है,
Revelation 2:7 जिस के कान हों, वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है: जो जय पाए, मैं उसे उस जीवन के पेड़ में से जो परमेश्वर के स्‍वर्गलोक में है, फल खाने को दूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • मलाकी 1-4


शनिवार, 11 अक्टूबर 2014

घबराहट या प्रार्थना


   एक 85 वर्षीय वृद्धा जो उस समय एक मठ में अकेली थी, लिफ्ट में 4 रात तथा 3 दिन तक फंसी रही। संयोग से उसके पास एक बर्तन में पानी, कुछ खाने का सामान और खाँसी की गोलियाँ थीं। उसने पहले तो लिफ्ट का दरवाज़ा खोलने और सेल-फोन का सिग्नल प्राप्त करने का असफल प्रयास किया, और फिर प्रार्थना में परमेश्वर की ओर मुड़ गई। बाद में उसने सी.एन.एन. को दिए साक्षात्कार में बताया, उसके सामने दो ही विकल्प थे, या तो वह परिस्थिति से घबरा कर कुछ उल्टा-सीधा करती या फिर प्रार्थना कर के शान्ति से रहती। अपनी विकट परिस्थिति में उसने परमेश्वर पर भरोसा रखा और अपने बचाए जाने की प्रतीक्षा शान्ति से करी।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में यहूदियों के एक राजा आसा के पास भी यही विकल्प थे - घबराए या प्रार्थना करे (2 इतिहास 14)। आसा पर कुश (इतोपिया) देश के राजा ने दस लाख सैनिकों के साथ चढ़ाई करी थी। इस बड़े आक्रमण का सामना करने के लिए ना तो आसा ने किसी सैनिक रणनीति पर भरोसा किया और ना ही भयभीत होकर छिपने का प्रयास किया, वरन तुरंत ही वह प्रार्थना में परमेश्वर की ओर मुड़ गया। एक विनम्र किंतु प्रभावी प्रार्थना में आसा ने परमेश्वर पर अपनी संपूर्ण निर्भरता का अंगीकार किया, उससे सहायता मांगी, और परमेश्वर से विनती करी कि वो अपने नाम के निमित उन्हें बचाने का प्रयोजन करे (2 इतिहास 14:11)। परमेश्वर ने आसा की प्रार्थना सुनी और उसका उत्तर दिया, और आसा ने उस आक्रमण को विफल कर दिया, आक्रमणकारियों पर जयवन्त हुआ।

   हम सब के जीवन में ऐसी परिस्थितियाँ आ सकती हैं जब हम किसी कठिन परिस्थिति में पड़ जाएं, हमारे पास संसाधन कम हों, समस्याओं का एक बड़ा समूह हमें घेर ले, किसी परिस्थिति का कोई समाधान हमें सूझ ना पड़ रहा हो, इत्यादि। ऐसे समय घबराने और हड़बड़ी में कुछ उल्टा-सीधा करने के नहीं वरन प्रार्थना में परमेश्वर के पास आने के समय होने चाहिएं, क्योंकि परमेश्वर अपने लोगों के लिए, जो उस पर भरोसा रखते हैं, लड़ता है, उन्हें विजयी करता है। - मार्विन विलियम्स


प्रार्थना परेशानी और घबराहट में शान्ति पाने का मार्ग है।

तब आसा ने अपने परमेश्वर यहोवा की यों दोहाई दी, कि हे यहोवा! जैसे तू सामथीं की सहायता कर सकता है, वैसे ही शक्तिहीन की भी; हे हमारे परमेश्वर यहोवा! हमारी सहायता कर, क्योंकि हमारा भरोसा तुझी पर है और तेरे नाम का भरोसा कर के हम इस भीड़ के विरुद्ध आए हैं। हे यहोवा, तू हमारा परमेश्वर है; मनुष्य तुझ पर प्रबल न होने पाएगा। - 2 इतिहास 14:11

बाइबल पाठ: 2 इतिहास 14:1-15
2 Chronicles 14:1 निदान अबिय्याह अपने पुरखाओं के संग सो गया, और उसको दाऊदपुर में मिट्टी दी गई; और उसका पुत्र आसा उसके स्थान पर राज्य करने लगा। इसके दिनों में दस वर्ष तक देश में चैन रहा। 
2 Chronicles 14:2 और आसा ने वही किया जो उसके परमेश्वर यहोवा की दृष्टि में अच्छा और ठीक था। 
2 Chronicles 14:3 उसने तो पराई वेदियों को और ऊंचे स्थानों को दूर किया, और लाठों को तुड़वा डाला, और अशेरा नाम मूरतों को तोड़ डाला। 
2 Chronicles 14:4 और यहूदियों को आज्ञा दी कि अपने पूर्वजों के परमेश्वर यहोवा की खोज करें और व्यवस्था और आज्ञा को मानों। 
2 Chronicles 14:5 और उसने ऊंचे स्थानों और सूर्य की प्रतिमाओं को यहूदा के सब नगरों में से दूर किया, और उसके साम्हने राज्य में चैन रहा। 
2 Chronicles 14:6 और उसने यहूदा में गढ़ वाले नगर बसाए, क्योंकि देश में चैन रहा। और उन बरसों में उसे किसी से लड़ाई न करनी पड़ी क्योंकि यहोवा ने उसे विश्राम दिया था। 
2 Chronicles 14:7 उसने यहूदियों से कहा, आओ हम इन नगरों को बसाएं और उनके चारों ओर शहरपनाह, गढ़ और फाटकों के पल्ले और बेड़े बनाएं; देश अब तक हमारे साम्हने पड़ा है, क्योंकि हम ने, अपने परमेश्वर यहोवा की खोज की है हमने उसकी खोज की और उसने हम को चारों ओर से विश्राम दिया है। तब उन्होंने उन नगरों को बसाया और कृतार्थ हुए। 
2 Chronicles 14:8 फिर आसा के पास ढाल और बछीं रखने वालों की एक सेना थी, अर्थात यहूदा में से तो तीन लाख पुरुष और बिन्यामीन में से फरी रखने वाले और धनुर्धारी दो लाख अस्सी हजार ये सब शूरवीर थे। 
2 Chronicles 14:9 और उनके विरुद्ध दस लाख पुरुषों की सेना और तीन सौ रथ लिये हुए जेरह नाम एक कूशी निकला और मारेशा तक आ गया। 
2 Chronicles 14:10 तब आसा उसका साम्हना करने को चला और मारेशा के निकट सापता नाम तराई में युद्ध की पांति बान्धी गई। 
2 Chronicles 14:11 तब आसा ने अपने परमेश्वर यहोवा की यों दोहाई दी, कि हे यहोवा! जैसे तू सामथीं की सहायता कर सकता है, वैसे ही शक्तिहीन की भी; हे हमारे परमेश्वर यहोवा! हमारी सहायता कर, क्योंकि हमारा भरोसा तुझी पर है और तेरे नाम का भरोसा कर के हम इस भीड़ के विरुद्ध आए हैं। हे यहोवा, तू हमारा परमेश्वर है; मनुष्य तुझ पर प्रबल न होने पाएगा। 
2 Chronicles 14:12 तब यहोवा ने कूशियों को आसा और यहूदियों के साम्हने मारा और कूशी भाग गए। 
2 Chronicles 14:13 और आसा और उसके संग के लोगों ने उनका पीछा गरार तक किया, और इतने कूशी मारे गए, कि वे फिर सिर न उठा सके क्योंकि वे यहोवा और उसकी सेना से हार गए, और यहूदी बहुत सा लूट ले गए। 
2 Chronicles 14:14 और उन्होंने गरार के आस पास के सब नगरों को मार लिया, क्योंकि यहोवा का भय उनके रहने वालों के मन में समा गया और उन्होंने उन नगरों को लूट लिया, क्योंकि उन में बहुत सा धन था। 
2 Chronicles 14:15 फिर पशु-शालाओं को जीत कर बहुत सी भेड़-बकरियां और ऊंट लूट कर यरूशलेम को लौटे।

एक साल में बाइबल: 
  • ज़कर्याह 11-14


शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2014

साथ


   चार वर्षीय सैमूएल ने अपना भोजन समाप्त कर लिया था, और अब वह बाहर जाकर खेलना चाह रहा था। लेकिन क्योंकि वह बाहर अकेले जाने के लिए अभी बहुत छोटा था, इसलिए उसकी माँ ने कहा, "नहीं; तुम अकेले बाहर नहीं जा सकते। थोड़ा समय प्रतीक्षा करो, मैं अपना भोजन समाप्त कर के तुम्हारे साथ बाहर आऊँगी।" तुरंत ही सैमूएल ने उत्तर दिया, "परन्तु मम्मी, यीशु तो मेरे साथ है ही।"

   सैमूएल ने अपने माता-पिता से भली-भाँति सीखा था कि प्रभु यीशु सदा हमारे साथ बने रहते हैं। हम आज के बाइबल पाठ में भी देखते हैं कि याकूब ने भी यह पाठ भलि-भांति सीखा था। याकूब, अपने पिता के निर्देश पर, अपनी माता के परिवारजनों में अपने लिए पत्नि खोजने अकेले ही हारान की ओर जा रहा था (उत्पत्ति 28:1-4)। जब रात हुई तो वह एक खुले स्थान पर सो गया, और स्वप्न में उसे परमेश्वर ने दर्शन देकर कहा, "और सुन, मैं तेरे संग रहूंगा, और जहां कहीं तू जाए वहां तेरी रक्षा करूंगा...तुझ को न छोडूंगा" (पद 15)। याकूब जाग उठा और उसने पहचाना कि परमेश्वर ने ही उससे बातचीत करी थी: "तब याकूब जाग उठा, और कहने लगा; निश्चय इस स्थान में यहोवा है..." (पद 16)। अपने साथ परमेश्वर की उपस्थिति से वह आश्वस्त हुआ, उसने परमेश्वर के साथ वाचा बाँधी (पद 20-22) और निश्चिंत होकर अपने मामा के घर  चला गया जहाँ से वह एक बहुत धनवान, सामर्थी और बाल-बच्चों वाला होकर वापस लौटा।

   यदि आपने प्रभु यीशु को अपना उद्धारकर्ता ग्रहण किया है (यूहन्ना 1:12) आप भी आश्वस्त रह सकते हैं कि प्रभु यीशु सदा आपके साथ बने रहते हैं (इब्रानियों 13:5)। इस बात को जानने तथा इसके तात्पर्यों को पहचानने के पश्चात, होने दें कि आप का प्रत्युत्तर भी याकूब के समान ही प्रभु परमेश्वर के प्रति संपूर्ण समर्पण का हो जिससे परमेश्वर की आशीषें आपके जीवन में भी भर जाएं। - ऐनी सेटास


हमारा प्रेमी परमेश्वर पिता सदा ही हमारे साथ बना रहता है।

तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। - इब्रानियों 13:5

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 28:10-22
Genesis 28:10 सो याकूब बेर्शेबा से निकल कर हारान की ओर चला। 
Genesis 28:11 और उसने किसी स्थान में पहुंच कर रात वहीं बिताने का विचार किया, क्योंकि सूर्य अस्त हो गया था; सो उसने उस स्थान के पत्थरों में से एक पत्थर ले अपना तकिया बना कर रखा, और उसी स्थान में सो गया। 
Genesis 28:12 तब उसने स्वप्न में क्या देखा, कि एक सीढ़ी पृथ्वी पर खड़ी है, और उसका सिरा स्वर्ग तक पहुंचा है: और परमेश्वर के दूत उस पर से चढ़ते उतरते हैं। 
Genesis 28:13 और यहोवा उसके ऊपर खड़ा हो कर कहता है, कि मैं यहोवा, तेरे दादा इब्राहीम का परमेश्वर, और इसहाक का भी परमेश्वर हूं: जिस भूमि पर तू पड़ा है, उसे मैं तुझ को और तेरे वंश को दूंगा। 
Genesis 28:14 और तेरा वंश भूमि की धूल के किनकों के समान बहुत होगा, और पच्छिम, पूरब, उत्तर, दक्खिन, चारों ओर फैलता जाएगा: और तेरे और तेरे वंश के द्वारा पृथ्वी के सारे कुल आशीष पाएंगे। 
Genesis 28:15 और सुन, मैं तेरे संग रहूंगा, और जहां कहीं तू जाए वहां तेरी रक्षा करूंगा, और तुझे इस देश में लौटा ले आऊंगा: मैं अपने कहे हुए को जब तक पूरा न कर लूं तब तक तुझ को न छोडूंगा। 
Genesis 28:16 तब याकूब जाग उठा, और कहने लगा; निश्चय इस स्थान में यहोवा है; और मैं इस बात को न जानता था। 
Genesis 28:17 और भय खा कर उसने कहा, यह स्थान क्या ही भयानक है! यह तो परमेश्वर के भवन को छोड़ और कुछ नहीं हो सकता; वरन यह स्वर्ग का फाटक ही होगा। 
Genesis 28:18 भोर को याकूब तड़के उठा, और अपने तकिए का पत्थर ले कर उसका खम्भा खड़ा किया, और उसके सिरे पर तेल डाल दिया। 
Genesis 28:19 और उसने उस स्थान का नाम बेतेल रखा; पर उस नगर का नाम पहिले लूज था। 
Genesis 28:20 और याकूब ने यह मन्नत मानी, कि यदि परमेश्वर मेरे संग रहकर इस यात्रा में मेरी रक्षा करे, और मुझे खाने के लिये रोटी, और पहिनने के लिये कपड़ा दे, 
Genesis 28:21 और मैं अपने पिता के घर में कुशल क्षेम से लौट आऊं: तो यहोवा मेरा परमेश्वर ठहरेगा। 
Genesis 28:22 और यह पत्थर, जिसका मैं ने खम्भा खड़ा किया है, परमेश्वर का भवन ठहरेगा: और जो कुछ तू मुझे दे उसका दशमांश मैं अवश्य ही तुझे दिया करूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • ज़कर्याह 7-10

गुरुवार, 9 अक्टूबर 2014

दृढ़ विश्वास


   मसीही कॉलेज का वह मेरा प्रथम वर्ष था, वहाँ मेरी एक नई मित्र, मुझे अपने जीवन के बारे में बता रही थी कि कैसे उसका पति उसे छोड़ कर चल गया है और वह अकेली ही अपने दो छोटे बच्चों की परवरिश कर रही है। अपने जीवन यापन के लिए वह कार्य भी करती थी परन्तु उसका वेतन न्यूनतम वेतन से बस ज़रा सा ही अधिक था, और इतने कम वेतन पर जहाँ वह रहती थी उस मोहल्ले की गरीबी और वातावरण के खतरों से उसके परिवार का अछूते बने रहने की आशा बहुत कम ही थी।

   अपने बच्चों को लेकर उसकी चिंता ने मुझे भी द्रवित किया, क्योंकि मेरे भी अपने बच्चे थे, इसलिए उसके परिवार की दशा और बच्चों की परवरिश को लेकर मैंने उससे पूछा, "तुम यह सब कैसे करने पाती हो?" वह मेरे प्रश्न से अचंभित हुई और उत्तर दिया, "मैं जो कर सकती हूँ वह करती हूँ, और उन्हें मैंने परमेश्वर के हाथों में छोड़ रखा है।" इन कठिन परिस्थितियों में भी परमेश्वर पर उसके विश्वास ने मुझे अचंभित किया तथा अय्युब के विश्वास की याद दिलाई (अय्युब 1:6-22)।

   इस वार्तालाप के लगभग एक वर्ष बाद मुझे उसका फोन आया और उसने पूछा कि क्या मैं उसके साथ खड़े होने के लिए कब्रिस्तान पर आ सकता हूँ; सड़क पर हुई एक गोली चलाने की घटना में उसका पुत्र मारा गया था। उसके दुखी जीवन में आने वाली इस एक और दुर्घटना में उसे सान्तवना कैसे दूँ, मैं परमेश्वर से प्रार्थना करने लगा और साथ ही वे उचित शब्द भी माँगने लगा जो मैं उसके साथ बाँट सकूँ तथा यह भी कि जिस बात को समझाने की समझ मेरे पास नहीं थी उसे समझाने के मैं कोई बचकाना प्रयास वहाँ जाकर ना करने लगूँ।

   लेकिन उस दिन वहाँ उसके साथ खड़े होने पर मुझे एक बार फिर उसे लेकर अचंभा हुआ, क्योंकि वहाँ वह स्वयं आने वाले लोगों को सांत्वना दे रही थी, इस त्रासदी के बावजूद परमेश्वर पर उसका दृढ़ विश्वास अडिग बना हुआ था। जब मैं वापस जाने के लिए तैयार हुआ तो उसके मुझ से कहे हुए शब्द उसके दृढ़ विश्वास की गहराई के मार्मिक सूचक थे; उसने मुझ से कहा, "मेरा बेटा आज भी परमेश्वर के हाथों में ही है।" अय्युब के समान ही उसने "...ना तो पाप किया, और न परमेश्वर पर मूर्खता से दोष लगाया" (अय्युब 1:22)।

   यदि हम प्रतिदिन परमेश्वर के साथ समय बिताने वाले होंगे, तो हम भी परमेश्वर पर ऐसा ही दृढ़ विश्वास विकसित कर सकते हैं, जो हर परिस्थिति में हमें शान्ति, सामर्थ तथा सांत्वना देता रहता है। - रैन्डी किलगोर


जो परमेश्वर के हाथ में बने रहते हैं, उन्हें कोई हिला नहीं सकता।

धन्य है वह मनुष्य, जो परीक्षा में स्थिर रहता है; क्योंकि वह खरा निकल कर जीवन का वह मुकुट पाएगा, जिस की प्रतिज्ञा प्रभु ने अपने प्रेम करने वालों को दी है। - याकूब 1:12 

बाइबल पाठ: अय्युब 1:13-22
Job 1:13 एक दिन अय्यूब के बेटे-बेटियां बड़े भाई के घर में खाते और दाखमधु पी रहे थे; 
Job 1:14 तब एक दूत अय्यूब के पास आकर कहने लगा, हम तो बैलों से हल जोत रहे थे, और गदहियां उनके पास चर रही थी, 
Job 1:15 कि शबा के लोग धावा कर के उन को ले गए, और तलवार से तेरे सेवकों को मार डाला; और मैं ही अकेला बचकर तुझे समाचार देने को आया हूँ। 
Job 1:16 वह अभी यह कह ही रहा था कि दूसरा भी आकर कहने लगा, कि परमेश्वर की आग आकाश से गिरी और उस से भेड़-बकरियां और सेवक जलकर भस्म हो गए; और मैं ही अकेला बचकर तुझे समाचार देने को आया हूँ। 
Job 1:17 वह अभी यह कह ही रहा था, कि एक और भी आकर कहने लगा, कि कसदी लोग तीन गोल बान्धकर ऊंटों पर धावा कर के उन्हें ले गए, और तलवार से तेरे सेवकों को मार डाला; और मैं ही अकेला बचकर तुझे समाचार देने को आया हूँ। 
Job 1:18 वह अभी यह कह ही रहा था, कि एक और भी आकर कहने लगा, तेरे बेटे-बेटियां बड़े भाई के घर में खाते और दाखमधु पीते थे, 
Job 1:19 कि जंगल की ओर से बड़ी प्रचण्ड वायु चली, और घर के चारों कोनों को ऐसा झोंका मारा, कि वह जवानों पर गिर पड़ा और वे मर गए; और मैं ही अकेला बचकर तुझे समाचार देने को आया हूँ। 
Job 1:20 तब अय्यूब उठा, और बागा फाड़, सिर मुंड़ाकर भूमि पर गिरा और दण्डवत्‌ कर के कहा, 
Job 1:21 मैं अपनी मां के पेट से नंगा निकला और वहीं नंगा लौट जाऊंगा; यहोवा ने दिया और यहोवा ही ने लिया; यहोवा का नाम धन्य है। 
Job 1:22 इन सब बातों में भी अय्यूब ने न तो पाप किया, और न परमेश्वर पर मूर्खता से दोष लगाया।

एक साल में बाइबल: 
  • ज़कर्याह 3-6


बुधवार, 8 अक्टूबर 2014

बाधा


   मेरी बेटी डेब्बी एक छोटी बच्ची थी, उसने बैले नृत्य सीखना आरंभ किया था। उस नृत्य के एक अभ्यास में डेब्बी को लपेट कर रखे हुई व्यायाम करने वाली दरी के ऊपर से कूद कर निकलना था। डेब्बी का पहला प्रयास अच्छा नहीं रहा, वह उस बाधा पर लड़खड़ा कर नीचे गिर गई। गिरते ही पल भर को तो वह भूमि पर स्तब्ध पड़ी रही, और फिर उसने रोना आरंभ कर दिया। मैं एक दम कूद कर उसके पास पहुँचा, उसे उठाया, उससे सांत्वना के शब्द कहे, उसे शान्त करवाया और उसे फिर से प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित किया। अब कि बार मैंने उसका हाथ पकड़कर उसके साथ दौड़ लगाई, और तब तक उसके साथ लगा रहा जब तक कि वह उस बाधा पर से सफलतापूर्वक पार नहीं हो गई। उसके बाद डेब्बी उस बाधा से नहीं डरी; लेकिन ऐसा होने तक उसे मेरी सहायता तथा प्रोत्साहन की आवश्यकता बनी हुई थी।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में जब प्रेरित पौलुस अपने साथी बरनबास के साथ अपनी पहली सेवकाई की यात्रा पर निकला तो उन्होंने अपने साथ एक जवान, मरकुस को भी ले लिया। यात्रा के समय मरकुस को कुछ कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा और वह पौलुस तथा बरनबास को छोड़कर बीच यात्रा से ही वापस घर लौट गया। बाद में जब पौलुस और बरनाबास अपनी दूसरी सेवकाई यात्रा पर निकलने लगे तो बरनबास ने फिर से मरकुस को एक और अवसर देने के लिए साथ ले चलना चाहा, लेकिन पौलुस ने पहली यात्रा के अनुभव के आधार पर इसका विरोध किया। पौलुस और बरनबास में इस बात को लेकर अनबन इतनी बढ़ी कि बरनबास मरकुस के साथ अलग रास्ते चल दिया और पौलुस एक दूसरे साथी को लेकर अलग दिशा में चल दिया (प्रेरितों 15:36-39)।

   बाइबल हमें यह तो नहीं बताती कि सेवकाई की बाधा को पार करवाने के बरनबास के इस प्रयास को लेकर मरकुस की आरंभिक प्रतिक्रीया और अनुभव कैसे थे, या बरनबास ने उससे क्या कहा और कैसे प्रोत्साहित किया, लेकिन यह स्पष्ट है कि मरकुस ने अपने आप को अब कि बार सेवकाई के लिए योग्य प्रमाणित अवश्य कर दिया और फिर आगे चलकर पौलुस के साथ भी उसके मतभेद दूर हो गए, क्योंकि बाद में पौलुस ने मरकुस के विषय में अपनी एक पत्री में लिखा, "...मरकुस को ले कर चला आ; क्योंकि सेवा के लिये वह मेरे बहुत काम का है" (2 तिमुथियुस 4:11)। साथ ही हम पाते हैं कि बाइबल में दी गई प्रभु यीशु की जीवनियों में से एक मरकुस द्वारा लिखी गई।

   जब हम किसी मसीही विश्वासी को असफलता के साथ संघर्ष करते देखते हैं, तो हमारा प्रतिक्रीया क्या होती है? क्या हम उसे सहायता तथा प्रोत्साहन द्वारा उठा कर सफलता की सीढ़ी चढ़वाते हैं, या आलोचना द्वारा निरुत्साहित करके असफलता में और गहरा धंसने देते हैं? हमारा कर्तव्य और मसीही विश्वास उसे सहायता और प्रोत्साहन प्रदान करने को कहता है। क्या आज आपके ध्यान में कोई ऐसा जन है जिसे कोई बाधा पार करने के लिए आपकी सहायता की आवश्यकता है? - डेनिस फिशर


जब समस्याएं और असफलताएं किसी को निराशा में दबाती हैं, तब सहृदयता और प्रेम उन्हें उठा कर खड़ा करवाते हैं।

हे भाइयों, यदि कोई मनुष्य किसी अपराध में पकड़ा भी जाए, तो तुम जो आत्मिक हो, नम्रता के साथ ऐसे को संभालो, और अपनी भी चौकसी रखो, कि तुम भी परीक्षा में न पड़ो। - गलतियों 6:1

बाइबल पाठ: प्रेरितों 15:36-41
Acts 15:36 कुछ दिन बाद पौलुस ने बरनबास से कहा; कि जिन जिन नगरों में हम ने प्रभु का वचन सुनाया था, आओ, फिर उन में चलकर अपने भाइयों को देखें; कि कैसे हैं। 
Acts 15:37 तब बरनबास ने यूहन्ना को जो मरकुस कहलाता है, साथ लेने का विचार किया। 
Acts 15:38 परन्तु पौलुस ने उसे जो पंफूलिया में उन से अलग हो गया था, और काम पर उन के साथ न गया, साथ ले जाना अच्छा न समझा। 
Acts 15:39 सो ऐसा टंटा हुआ, कि वे एक दूसरे से अलग हो गए: और बरनबास, मरकुस को ले कर जहाज पर कुप्रुस को चला गया। 
Acts 15:40 परन्तु पौलुस ने सीलास को चुन लिया, और भाइयों से परमेश्वर के अनुग्रह पर सौंपा जा कर वहां से चला गया। 
Acts 15:41 और कलीसियाओं को स्थिर करता हुआ, सूरिया और किलिकिया से होते हुआ निकला।

एक साल में बाइबल: 
  • ज़कर्याह 1-2


मंगलवार, 7 अक्टूबर 2014

बुलावा


   कभी कभी फसल देर से तैयार होती है; कभी आप बड़ी आशा से बीज तो बोते हैं किंतु फसल का क्या होगा यह अज्ञात रहता है; और कभी आपके द्वारा बोए गए बीज से फसल ऐसे समय या स्वरूप में आती है जैसी कि आपने कभी कलपना भी नहीं करी होगी।

   हमारी बेटी मेलिस्सा ने परमेश्वर से उद्धार का उपहार छोटी उम्र में ही पा लिया था, लेकिन उसने कभी अपने आप को एक ऐसे महान मसीही विश्वासी के रूप में नहीं देखा था जो लोगों के जीवन बदलने की क्षमता रखता हो। वह तो साधारण सी 17 वर्षीय छात्रा थी जो अपनी पढ़ाई, मित्र-मण्डली, खेल-कूद में रुचि, एक छोटी सी नौकरी आदि के बीच परस्पर तालमेल जमा कर परमेश्वर की इच्छानुसार जीवन जीने का प्रयास कर रही थी। लेकिन अचानक ही सन 2002 में परमेश्वर से उसे बुलावा आ गया और वह इस संसार से कूच करके अपने उद्धा्रकर्ता प्रभु यीशु के पास चली गई। ऐसा होने की कोई चेतावनी नहीं थी, किसी के साथ कोई बिगड़ी हुई बात सुधारने का कोई अवसर नहीं था, ना ही प्रभु यीशु के लिए फलवन्त होने का कोई नया अवसर उसे मिला। बस उसका प्रभु यीशु में विश्वास और उस विश्वास के अनुसार उसका जीवन ही उसके साथ थे, और आज हमारे साथ है।

   मेलिस्सा का सदा यह प्रयास रहा था कि वह ऐसा जीवन जीए जो उसके प्रभु को भावता हुआ हो - और उसका जीवन आज भी प्रभु के लिए फल ला रहा है। अभी हाल ही में मुझे एक ऐसे युवक के बारे में बताया गया जिसने एक खेल शिविर में मेलिस्सा की कहानी सुनी और फलस्वरूप प्रभु यीशु पर विश्वास कर के उसे अपने उद्धारकर्ता के रूप में ग्रहण कर लिया।

   हम सब अपने जीवनों से एक कहानी लिख रहे हैं - ऐसी कहानी जो आज भी दूसरों को प्रभावित कर रही है और हमारे बाद भी करती रहेगी। लेकिन क्या हम परमेश्वर की इच्छानुसार जीवन व्यतीत करने और अपने जीवनों की गवाही द्वारा उसे प्रसन्न रखने, उसे महिमा देने का भी प्रयास कर रहे हैं? हमारा बुलावा कब आ जाएगा, कोई नहीं जानता; इसलिए प्रति दिन उस बुलावे के लिए तैयार रहें, परमेश्वर की इच्छानुसार जीवन व्यतीत करते रहें। - डेव ब्रैनन


परमेश्वर के प्रति विश्वासयोग्य जीवन ही परमेश्वर के लिए फलवन्त जीवन हो सकता है।

उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में है, बड़ाई करें। - मत्ती 5:16

बाइबल पाठ: यूहन्ना 15:8-17
John 15:8 मेरे पिता की महिमा इसी से होती है, कि तुम बहुत सा फल लाओ, तब ही तुम मेरे चेले ठहरोगे। 
John 15:9 जैसा पिता ने मुझ से प्रेम रखा, वैसा ही मैं ने तुम से प्रेम रखा, मेरे प्रेम में बने रहो। 
John 15:10 यदि तुम मेरी आज्ञाओं को मानोगे, तो मेरे प्रेम में बने रहोगे: जैसा कि मैं ने अपने पिता की आज्ञाओं को माना है, और उसके प्रेम में बना रहता हूं। 
John 15:11 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि मेरा आनन्द तुम में बना रहे, और तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए। 
John 15:12 मेरी आज्ञा यह है, कि जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो। 
John 15:13 इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे। 
John 15:14 जो कुछ मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं, यदि उसे करो, तो तुम मेरे मित्र हो। 
John 15:15 अब से मैं तुम्हें दास न कहूंगा, क्योंकि दास नहीं जानता, कि उसका स्‍वामी क्या करता है: परन्तु मैं ने तुम्हें मित्र कहा है, क्योंकि मैं ने जो बातें अपने पिता से सुनीं, वे सब तुम्हें बता दीं। 
John 15:16 तुम ने मुझे नहीं चुना परन्तु मैं ने तुम्हें चुना है और तुम्हें ठहराया ताकि तुम जा कर फल लाओ; और तुम्हारा फल बना रहे, कि तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से मांगो, वह तुम्हें दे। 
John 15:17 इन बातें की आज्ञा मैं तुम्हें इसलिये देता हूं, कि तुम एक दूसरे से प्रेम रखो।

एक साल में बाइबल: 
  • हग्गै 1-2


सोमवार, 6 अक्टूबर 2014

शिथिल हाथ


   बचपन में मैं बहुत चंचल स्वभाव का था और कुछ स्थानों पर, जैसे कि चर्च में, मेरे लिए शान्त बैठे रहना बहुत कठिन होता था। चर्च में थोड़ी थोड़ी देर में मेरी माँ को मेरे घुटने दबा कर मुझे शान्त बैठे रहने के लिए कहते रहना पड़ता था। इसलिए जब मेरे सामने परमेश्वर के वचन बाइबल का पद, "चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं" (भजन 46:10) आता था तो मेरी समझ यही रहती थी कि इसका तात्पर्य चंचल या व्याकुल ना होने से है।

   कई वर्ष बाद मुझे मालूम हुआ कि मूल इब्रानी भाषा के जिस शब्द का अनुवाद "शान्त" या "चुप" हो जाना हुआ है उसका वास्तविक अर्थ मेरी धारणा से कहीं अधिक गहरा है; उसका वास्तविक अर्थ है "व्याकुलता छोड़ देना"। वह शब्द बताता है कि अपने हाथ और प्रयास शिथिल छोड़कर, सब कुछ परमेश्वर के हाथों में छोड़ दें, अपनी ओर से उसे कार्य करने दें और उसके कार्य में अपने सुझावों या प्रयासों का व्यवधान ना डालें। इस शब्द का यह चित्रण रोचक है क्योंकि हम अकसर अपने हाथों को ही व्यवधान के लिए प्रयोग करते हैं, चाहे वह किसी वस्तु का सामने से हटाने के लिए हो, या फिर उसे सामने लाने के लिए हो, या अपने बचाव के लिए कुछ बीच में लाने के लिए हो अथवा किसी पर प्रहार करने के लिए हो - हमारे हाथ ही सबसे पहले आगे आते हैं। जब हम अपने हाथों को शिथिल कर के नीचे लटका देते हैं तो हम अपने आप को कमज़ोर तथा असुरक्षित अनुभव करने लगते हैं। इस असुरक्षा और असहाय होने की स्थिति से हम तब ही बच सकते हैं जब हम परमेश्वर पर पूरा-पूरा भरोसा कर के यह स्वीकार कर लें कि, "परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक" (पद 1) तथा "सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है" (पद 7); दूसरे शब्दों में, व्याकुल होकर फड़फड़ाने की बजाए परमेश्वर को अपना कार्य अपनी रीति से करने दें और उसके समय की प्रतीक्षा करें।

   जीवन की हर परिस्थिति में हम परमेश्वर पर भरोसा रखने से आने वाली शान्ति का अनुभव कर सकते हैं (यूहन्ना 14:27)। हर परेशानी में परमेश्वर की सामर्थ हम मसीही विश्वासियों के साथ बनी रहती है, हमें बस प्रार्थनापूर्वक और बिना व्याकुल हुए उसके समय और विधि की प्रतीक्षा करनी है, और वह हमारे लिए मार्ग निकालेगा, हमें सुरक्षित रखे हुए उस मार्ग पर लेकर चलता रहेगा जब तक परेशानी से हमारा छुटकारा ना हो जाए। इसलिए अपनी हर परेशानी को परमेश्वर के हाथों में सौंप कर अपने हाथों को शिथिल छोड़ दें, व्याकुल ना हों और परमेश्वर को अपना कार्य अपनी रीति से करने दें; वह जो करेगा सर्वोत्तम करेगा और आपके भले के लिए ही करेगा। आपके शिथिल हाथ ही आपकी सबसे सामर्थी और कारगर सहायता होंगे। - जो स्टोवैल


जब हम अपने हाथ परमेश्वर के हाथों में छोड़ देते हैं, तब वह अपनी शान्ति हमारे मनों में भर देता है।

मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे। - यूहन्ना 14:27  

बाइबल पाठ: भजन 46
Psalms 46:1 परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक। 
Psalms 46:2 इस कारण हम को कोई भय नहीं चाहे पृथ्वी उलट जाए, और पहाड़ समुद्र के बीच में डाल दिए जाएं; 
Psalms 46:3 चाहे समुद्र गरजे और फेन उठाए, और पहाड़ उसकी बाढ़ से कांप उठें।। 
Psalms 46:4 एक नदी है जिसकी नहरों से परमेश्वर के नगर में अर्थात परमप्रधान के पवित्र निवास भवन में आनन्द होता है। 
Psalms 46:5 परमेश्वर उस नगर के बीच में है, वह कभी टलने का नहीं; पौ फटते ही परमेश्वर उसकी सहायता करता है। 
Psalms 46:6 जाति जाति के लोग झल्ला उठे, राज्य राज्य के लोग डगमगाने लगे; वह बोल उठा, और पृथ्वी पिघल गई। 
Psalms 46:7 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।
Psalms 46:8 आओ, यहोवा के महाकर्म देखो, कि उसने पृथ्वी पर कैसा कैसा उजाड़ किया है। 
Psalms 46:9 वह पृथ्वी की छोर तक लड़ाइयों को मिटाता है; वह धनुष को तोड़ता, और भाले को दो टुकड़े कर डालता है, और रथों को आग में झोंक देता है! 
Psalms 46:10 चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं! 
Psalms 46:11 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।

एक साल में बाइबल: 
  • सपन्याह 1-3