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शनिवार, 14 नवंबर 2015

सहायक


   जब चारागाहें बर्फ से ढक जाती हैं तब पशु-पालकों को पशुओं के लिए चारा और भूसा अपने हाथों से डालना पड़ता है। जब चारा और भूसा मैदान में डाला जा रहा होता है, तब ताकतवर और कद्दावर जानवर अपने बल के द्वारा आगे आकर पहले खाने लगते हैं और कमज़ोर तथा अस्वस्थ जानवरों को खाने के लिए कुछ नहीं मिलता जब तक कि पशु-पालक स्वयं कुछ यत्न करके उन्हें भोजन उपलब्ध ना करवा दें।

   शरणार्थी शिविरों और ज़रूरतमन्दों के मध्य भोजन बाँटने के भंडारे में कार्य करने वाले भी इसी समस्या का सामना करते हैं; जब भोजन वितरण आरंभ होता है तब बलवान आगे आकर भोजन छीन-झपट लेते हैं और कमज़ोर तथा अस्वस्थ बिना भोजन के रह जाते हैं जब तक कि भंडारे का आयोजन करने वाले कुछ विशेष प्रबंध करके उन कमज़ोरों और अस्वस्थ लोगों को भोजन उपलब्ध ना करवाएं। यह समाज का प्रचलन है कि गरीबों, कमज़ोरों और लाचारों तक अकसर सही सहायता नहीं पहुँचती, जब तक की किसी विशेष प्रबंध के द्वारा उन्हें वह ना पहुँचाई जाए।

   किनारा किए गए लोगों तक विशेष प्रबंध द्वारा सहायता पहुँचाना परमेश्वर द्वारा स्थापित सिद्धांत का पालन करना है। परमेश्वर ने अपने वचन बाइबल में अपनी प्रजा इस्त्राएल के लोगों को निर्देश दिए कि वे अपने खेतों और दाख की बारियों से फसल जमा करते समय कुछ कुछ वहीं छोड़ दिया करें जिससे गरीबों और परदेशियों के पास भोजन के लिए कुछ हो (लैव्यवस्था 19:9-10)।

   आज हम मसीही विश्वासी भी परमेश्वर द्वारा हमें दिए गए गुणों और संसाधनों के सही उपयोग के द्वारा कमज़ोर, थके-मांदे और लाचारों के सहायक बन सकते हैं; शिक्षक भीरु, शर्मीले और दब्बू छात्रों को प्रोत्साहित करके, उनकी सहायता करके उन्हें बेहतर बना सकते हैं; मज़दूर अपने किसी कमज़ोर सह-कर्मी के काम में हाथ बंटा सकते हैं; कैदी नए कैदियों को समझाने और उन्हें शान्त करने में सहायता कर सकते हैं; अभिभावक अपने बच्चों को उभारने और संवारने में सहायक हो सकते हैं - यदि इच्छा हो तो सहायक होने के अवसरों की कमी नहीं है, सहायक बन कर हम परमेश्वर का आदर करते हैं, उसे महिमा देते हैं।

   जैसे परमेश्वर ने हमारी कमज़ोरी की दशा में हम पर अनुकंपा और अनुग्रह किया, हमारा सहायक बना, हमें उठा कर खड़ा किया, वैसे ही आज हम परमेश्वर के इसी गुण और वरदान को दूसरों तक पहुँचा कर परमेश्वर के प्रेम को उनके साथ बांट सकते हैं, उन्हें जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के निकट आने और उसे समझने का अवसर प्रदान कर सकते हैं। - रैंडी किलगोर


दूसरों की सेवा करके हम परमेश्वर की सेवा करते हैं।

हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे। जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो। - फिलिप्पियों 2:4-5

बाइबल पाठ: लैव्यवस्था 19:9-15
Leviticus 19:9 फिर जब तुम अपने देश के खेत काटो तब अपने खेत के कोने कोने तक पूरा न काटना, और काटे हुए खेत की गिरी पड़ी बालों को न चुनना। 
Leviticus 19:10 और अपनी दाख की बारी का दाना दाना न तोड़ लेना, और अपनी दाख की बारी के झड़े हुए अंगूरों को न बटोरना; उन्हें दीन और परदेशी लोगों के लिये छोड़ देना; मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं। 
Leviticus 19:11 तुम चोरी न करना, और एक दूसरे से न तो कपट करना, और न झूठ बोलना। 
Leviticus 19:12 तुम मेरे नाम की झूठी शपथ खाके अपने परमेश्वर का नाम अपवित्र न ठहराना; मैं यहोवा हूं। 
Leviticus 19:13 एक दूसरे पर अन्धेर न करना, और न एक दूसरे को लूट लेना। और मजदूर की मजदूरी तेरे पास सारी रात बिहान तक न रहने पाए। 
Leviticus 19:14 बहिरे को शाप न देना, और न अन्धे के आगे ठोकर रखना; और अपने परमेश्वर का भय मानना; मैं यहोवा हूं। 
Leviticus 19:15 न्याय में कुटिलता न करना; और न तो कंगाल का पक्ष करना और न बड़े मनुष्यों का मुंह देखा विचार करना; उस दूसरे का न्याय धर्म से करना।

एक साल में बाइबल: 
  • विलापगीत 3-5
  • इब्रानियों 10:19-39


शुक्रवार, 13 नवंबर 2015

पूरक


   क्रिस्टी ने अपने जन्मदिन के उत्सव के दिन आए हुए सब मेहमानों को अपनी ओर से भेंट देकर चकित कर दिया। क्रिस्टी ने हम सब को एक एक व्यक्तिगत चिठ्ठी दी जिसमें उसने प्रत्येक के लिए व्यक्तिगत रिति से लिखा था कि उसके जीवन में हम क्या स्थान रखते हैं, और साथ ही परमेश्वर ने हमें जैसा बनाया और जो जो कार्य सौंपा है उसके विषय में हमें प्रोत्साहित करने के लिए भी कुछ शब्द लिखे थे; प्रत्येक व्यक्ति को लिखी चिठ्ठी के साथ क्रिस्टी ने एक और चीज़ रखी थी - जिग्सौ पहेली के अंश, हमें यह स्मरण दिलाने के लिए हम अपने आप में अद्वितीय तो हैं, किसी के भी बिलकुल जैसा और कोई अन्य नहीं है, लेकिन साथ ही हम एक दूसरे के पूरक भी हैं, जिग्सौ पहेली के समान हम एक साथ मिलकर ही परमेश्वर की योजना का पूरा चित्र बना सकते हैं।

   इस अनुभव ने मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में दिए 1 कुरिन्थियों 12 के विविरण को नए दृष्टिकोण से पढ़ने-समझने में सहायता करी। इस अध्याय में प्रेरित पौलुस ने परमेश्वर के विश्वासियों की मण्डली अर्थात चर्च की तुलना मानव शरीर से करी है, यह समझाने के लिए जैसे शरीर अनेक अंगों जैसे हाथ, पैर, आँख, कान इत्यादि से मिलकर बना है और प्रत्येक अंग का अपना उपयोग, अपनी भूमिका, अपनी आवश्यकता है, वैसे ही मसीही मण्डली या चर्च भी मसीह यीशु के सभी विश्वासियों से मिलकर बनी है और सबकी अपनी उपयोगिता, भूमिका और आवश्यकता है, जिसके बिना मण्डली या चर्च अपूर्ण है।

   बहुत सरल होता है किसी दूसरे की सेवकाई और वरदानों को देखकर अपने आप को गौण और महत्वहीन समझ लेना, विशेषकर तब जब वह दूसरा किसी प्रमुख या प्रगट कार्य में लगा हो। लेकिन प्रभु चाहता है कि हम अपने आप को उस नज़रिए से देखें जिससे प्रभु हमें देखता है - उसके द्वारा सृजन में अद्वितीय और भूमिका तथा उपयोगिता में बहुमूल्य तथा अति महत्वपूर्ण। इस सृष्टि और परमेश्वर की योजना रूपी जिग्सौ पहेली में आप एक महत्वपूर्ण भाग हैं, आपके बिना उसका चित्र पूरा नहीं हो सकता। इस चित्र में अपने स्थान को भरने के लिए परमेश्वर ने आपको एक स्वरूप और कुछ गुण दिए हैं, और आप उन ही संसाधनों के द्वारा परमेश्वर के लिए कार्यकारी, उपयोगी और उसे महिमा देने वाले बन सकते हैं।

   अन्य लोगों से अपनी तुलना करने के स्थान पर अपने आप को परमेश्वर की मण्डली में अन्य लोगों के साथ पूरक बनाईए और उसके द्वारा दिए गए संसाधनों का सदुपयोग कीजिए। - डेविड मैक्कैअसलैंड


आपका जीवन परमेश्वर की ओर से आपको दिया गया उपहार है; इस जीवन को परमेश्वर को भेंट करके उसकी महिमा के लिए कार्य करें।

इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान कर के चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है। - रोमियों 12:1

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 12:12-27
1 Corinthians 12:12 क्योंकि जिस प्रकार देह तो एक है और उसके अंग बहुत से हैं, और उस एक देह के सब अंग, बहुत होने पर भी सब मिलकर एक ही देह हैं, उसी प्रकार मसीह भी है। 
1 Corinthians 12:13 क्योंकि हम सब ने क्या यहूदी हो, क्या युनानी, क्या दास, क्या स्‍वतंत्र एक ही आत्मा के द्वारा एक देह होने के लिये बपतिस्मा लिया, और हम सब को एक ही आत्मा पिलाया गया। 
1 Corinthians 12:14 इसलिये कि देह में एक ही अंग नहीं, परन्तु बहुत से हैं। 
1 Corinthians 12:15 यदि पांव कहे कि मैं हाथ नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्या वह इस कारण देह का नहीं? 
1 Corinthians 12:16 और यदि कान कहे; कि मैं आंख नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्या वह इस कारण देह का नहीं? 
1 Corinthians 12:17 यदि सारी देह आंख ही होती तो सुनना कहां से होता? यदि सारी देह कान ही होती तो सूंघना कहां होता? 
1 Corinthians 12:18 परन्तु सचमुच परमेश्वर ने अंगो को अपनी इच्छा के अनुसार एक एक कर के देह में रखा है। 
1 Corinthians 12:19 यदि वे सब एक ही अंग होते, तो देह कहां होती? 
1 Corinthians 12:20 परन्तु अब अंग तो बहुत से हैं, परन्तु देह एक ही है। 
1 Corinthians 12:21 आंख हाथ से नहीं कह सकती, कि मुझे तेरा प्रयोजन नहीं, और न सिर पांवों से कह सकता है, कि मुझे तुम्हारा प्रयोजन नहीं। 
1 Corinthians 12:22 परन्तु देह के वे अंग जो औरों से निर्बल देख पड़ते हैं, बहुत ही आवश्यक हैं। 
1 Corinthians 12:23 और देह के जिन अंगो को हम आदर के योग्य नहीं समझते हैं उन्‍ही को हम अधिक आदर देते हैं; और हमारे शोभाहीन अंग और भी बहुत शोभायमान हो जाते हैं। 
1 Corinthians 12:24 फिर भी हमारे शोभायमान अंगो को इस का प्रयोजन नहीं, परन्तु परमेश्वर ने देह को ऐसा बना दिया है, कि जिस अंग को घटी थी उसी को और भी बहुत आदर हो। 
1 Corinthians 12:25 ताकि देह में फूट न पड़े, परन्तु अंग एक दूसरे की बराबर चिन्‍ता करें। 
1 Corinthians 12:26 इसलिये यदि एक अंग दु:ख पाता है, तो सब अंग उसके साथ दु:ख पाते हैं; और यदि एक अंग की बड़ाई होती है, तो उसके साथ सब अंग आनन्द मनाते हैं। 
1 Corinthians 12:27 इसी प्रकार तुम सब मिल कर मसीह की देह हो, और अलग अलग उसके अंग हो।

एक साल में बाइबल: 
  • विलापगीत 1-2
  • इब्रानियों 10:1-18


गुरुवार, 12 नवंबर 2015

असफलता तथा शर्मिंदगी


   मार्ग के किनारे पुलिस की गाड़ी की जलती-बुझती बत्तियों ने मेरा ध्यान वहाँ खड़ी एक अन्य गाड़ी की ओर खेंचा, उसे यातायात नियम के उल्लंघन के लिए रोका गया था। मुझे पुलिस कार से उतरकर, हाथ में चालान काटने की पुस्तिका लिए उस गाड़ी की ओर बढ़ता हुआ पुलिस अधिकारी दिखाई दिया, और गाड़ी के अन्दर बैठी चालिका भी जो अपने चेहरे को अपने हाथों से ढाँपे हुए थी जिससे आते-जाते लोग उसको पहचान ना सकें। उसकी प्रतिक्रीया दिखा रही थी कि वह अपने गलत चुनाव और उसके दुषपरिणाम को लेकर कैसी शर्मिंदा थी।

   प्रभु यीशु के सामने जब भीड़ एक दोषी स्त्री को लाई, और उसके व्यभिचार को प्रकट किया तो भीड़ की मनसा केवल उस स्त्री को शर्मिंदा मात्र ही करने की नहीं थी; वे देखना चाहते थे कि प्रभु की क्या प्रतिक्रीया होगी। वे उस स्त्री को दोषी और दंड पाने के योग्य देखना चाहते थे, लेकिन प्रभु यीशु ने उस पर दया दिखाई; वह, केवल जिसे पाप का दोष और उसका दण्ड देने का अधिकार है, उस स्त्री के विफल चरित्र के प्रति करुणामय और क्षमाशील था। जब उस स्त्री पर दोषारोपण करने वाले चले गए, तब "यीशु ने कहा, मैं भी तुझ पर दंड की आज्ञा नहीं देता; जा, और फिर पाप न करना" (यूहन्ना 8:11)।

   प्रभु यीशु की यह करुणा हमें उसके क्षमा करने वाले अनुग्रह की याद दिलाती है, और उस स्त्री को दिया गया उसका निर्देश दिखाता है कि प्रभु चाहता है कि हम इस अनुग्रह के आनन्द में सदा बने रहें; और यह दोनों बातें मिलकर ठोकर खाकर पाप में गिरने वालों के प्रति प्रभु यीशु के नज़रिए को दिखाती हैं कि वह पापियों को भी नाश नहीं वरन पाप से परिवर्तित जीवन, पाप और उसके दोष तथा दुषपरिणामों से रहित आनन्दमय जीवन देना चाहता है।

   हम अपने सबसे बुरी नैतिक असफलता तथा शरमिंदगी की हालात में भी पूरे भरोसे के साथ उसे पुकार सकते हैं, उसकी ओर निःसंकोच हाथ बढ़ा सकते हैं क्योंकि उस की करुणा वास्तव में अद्भुत है, उसकी दया और क्षमा असीम हैं, वह किसी को भी अपने से दूर रखना नहीं चाहता। - बिल क्राउडर


हर परीक्षा का सामना करने के लिए आवश्यक अनुग्रह और सामर्थ हमें केवल प्रभु यीशु से ही प्राप्त हो सकती है।

यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। - 1 यूहन्ना 1:9 

बाइबल पाठ: यूहन्ना 8:1-11
John 8:1 परन्तु यीशु जैतून के पहाड़ पर गया। 
John 8:2 और भोर को फिर मन्दिर में आया, और सब लोग उसके पास आए; और वह बैठकर उन्हें उपदेश देने लगा। 
John 8:3 तब शास्त्री और फरीसी एक स्त्री को लाए, जो व्यभिचार में पकड़ी गई थी, और उसको बीच में खड़ी कर के यीशु से कहा। 
John 8:4 हे गुरू, यह स्त्री व्यभिचार करते ही पकड़ी गई है। 
John 8:5 व्यवस्था में मूसा ने हमें आज्ञा दी है कि ऐसी स्‍त्रियों को पत्थरवाह करें: सो तू इस स्त्री के विषय में क्या कहता है? 
John 8:6 उन्होंने उसको परखने के लिये यह बात कही ताकि उस पर दोष लगाने के लिये कोई बात पाएं, परन्तु यीशु झुककर उंगली से भूमि पर लिखने लगा। 
John 8:7 जब वे उस से पूछते रहे, तो उसने सीधे हो कर उन से कहा, कि तुम में जो निष्‍पाप हो, वही पहिले उसको पत्थर मारे। 
John 8:8 और फिर झुककर भूमि पर उंगली से लिखने लगा। 
John 8:9 परन्तु वे यह सुनकर बड़ों से ले कर छोटों तक एक एक कर के निकल गए, और यीशु अकेला रह गया, और स्त्री वहीं बीच में खड़ी रह गई। 
John 8:10 यीशु ने सीधे हो कर उस से कहा, हे नारी, वे कहां गए? क्या किसी ने तुझ पर दंड की आज्ञा न दी। 
John 8:11 उसने कहा, हे प्रभु, किसी ने नहीं: यीशु ने कहा, मैं भी तुझ पर दंड की आज्ञा नहीं देता; जा, और फिर पाप न करना।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 51-52
  • इब्रानियों 9


बुधवार, 11 नवंबर 2015

आशा


   यीव्स कोंगर 10 वर्ष का बालक था जब प्रथम विश्वयुद्ध आरंभ हुआ और फ्रांस के जिस कसबे में वह रहता था उसपर जर्मन सेना का हमाला हुआ। यीव्स की माँ ने उसे प्रोत्साहित किया कि वह अपने अनुभवों को एक डायरी में लिखे, जिसका परिणाम था उस सैन्य कबज़े का एक स्पष्ट और विस्तृत विवरण जिसमें रंगीन रेखा-चित्र भी सम्मिलित थे। यीव्स की डायरी में एक बच्चे के नज़रिये से उस आपदा का चित्रण किया गया; जो कुछ उसने देखा और अनुभव किया उसका इतना गहरा प्रभाव उसके जीवन पर पड़ा कि उसने अपने आप को विवश महसूस किया कि वो मसीह यीशु में उपलब्ध आश्गा को अन्य लोगों तक पहुँचाने में प्रयासरत रहे।

   सदियों पहले यिर्मयाह नबी भी एक आपदा का गवाह रहा था, यरुशालेम पर राजा नबूक्दनेस्सर की चढ़ाई और विनाश का। यिर्मयाह ने भी अपने अनुभव और जो कुछ उसने देखा एक पुस्तिका में लिखा जो आज ’विलापगीत’ के नाम से परमेश्वर के वचन बाइबल का एक भाग है। उन दिनों के कष्टप्रद अनुभवों और बातों के बावजूद यिर्मयाह ने परमेश्वर में आशा और शान्ति पाई; उसने लिखा, "हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है। प्रति भोर वह नई होती रहती है; तेरी सच्चाई महान है" (विलापगीत 3:22-23)।

   जीवन के भिन्न समयों में हम कटु अनुभवों, त्रास्दियों और आपदाओं से होकर निकल सकते हैं, लेकिन ये कष्ट और परेशानी के समय सदा बने नहीं रहते। यिर्मयाह के समान ही हमारी सबसे भरोसेमन्द आशा है अपने स्वर्गीय परमेश्वर पिता की विश्वासयोग्यता और प्रावधानों पर विचार करना और उसपर अपने विश्वास को बनाए रखना। जब हम ऐसा करना आरंभ करेंगे तो जैसा यिर्मयाह का अनुभव था, हम भी पाएंगे कि परमेश्वर की करुणा हमारे लिए प्रतिदिन नई रहती है, हर परिस्थिति में हमारे प्रति उसकी विश्वासयोग्यता अति महान बनी रहती है। - डेनिस फिशर


परमेश्वर की विश्वासयोग्यता ही हमारी आशा का सर्वोत्तम आधार है।

क्योंकि चाहे अंजीर के वृक्षों में फूल न लगें, और न दाखलताओं में फल लगें, जलपाई  के वृक्ष से केवल धोखा पाया जाए और खेतों में अन्न न उपजे, भेड़शालाओं में भेड़-बकरियां न रहें, और न थानों में गाय बैल हों, तौभी मैं यहोवा के कारण आनन्दित और मगन रहूंगा, और अपने उद्धारकर्त्ता परमेश्वर के द्वारा अति प्रसन्न रहूंगा। यहोवा परमेश्वर मेरा बलमूल है, वह मेरे पांव हरिणों के समान बना देता है, वह मुझ को मेरे ऊंचे स्थानों पर चलाता है। हबकुक 3:17-19

बाइबल पाठ: विलापगीत 3:19-33
Lamentations 3:19 मेरा दु:ख और मारा मारा फिरना, मेरा नागदौने और-और विष का पीना स्मरण कर! 
Lamentations 3:20 मैं उन्हीं पर सोचता रहता हूँ, इस से मेरा प्राण ढला जाता है। 
Lamentations 3:21 परन्तु मैं यह स्मरण करता हूँ, इसीलिये मुझे आाशा है: 
Lamentations 3:22 हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है। 
Lamentations 3:23 प्रति भोर वह नई होती रहती है; तेरी सच्चाई महान है। 
Lamentations 3:24 मेरे मन ने कहा, यहोवा मेरा भाग है, इस कारण मैं उस में आशा रखूंगा। 
Lamentations 3:25 जो यहोवा की बाट जोहते और उसके पास जाते हैं, उनके लिये यहोवा भला है। 
Lamentations 3:26 यहोवा से उद्धार पाने की आशा रख कर चुपचाप रहना भला है। 
Lamentations 3:27 पुरुष के लिये जवानी में जूआ उठाना भला है। 
Lamentations 3:28 वह यह जान कर अकेला चुपचाप रहे, कि परमेश्वर ही ने उस पर यह बोझ डाला है; 
Lamentations 3:29 वह अपना मुंह धूल में रखे, क्या जाने इस में कुछ आशा हो; 
Lamentations 3:30 वह अपना गाल अपने मारने वाले की ओर फेरे, और नामधराई सहता रहे। 
Lamentations 3:31 क्योंकि प्रभु मन से सर्वदा उतारे नहीं रहता, 
Lamentations 3:32 चाहे वह दु:ख भी दे, तौभी अपनी करुणा की बहुतायत के कारण वह दया भी करता है; 
Lamentations 3:33 क्योंकि वह मनुष्यों को अपने मन से न तो दबाता है और न दु:ख देता है।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 50
  • इब्रानियों 8


मंगलवार, 10 नवंबर 2015

स्मरण


   जिम डेविडसन रेनियर पहाड़ से नीचे उतर रहा था जब वह बर्फ से ढकी दरार में से बर्फ में बनी एक गहरी अंधेरी खाई में जा गिरा। उस खाई के तले पर जिम लहु-लुहान खड़ा होकर अपने बचपन की बातों को और उसके पिता द्वारा उससे कही गई बातों को स्मरण कर रहा था। जिम को स्मरण आया कैसे उसके पिता उससे कहा करते थे कि यदि वह विपरीत परिस्थितियों में हिम्मत ना हारे और प्रयास करता रहे तो बड़े बड़े कार्य कर सकता है। पिता की बातों को स्मरण करने से उसकी हिम्मत बंधी और बिना किसी विशेष सामान या किसी बाहरी सहायता के पांच घंटों के कड़े परिश्रम के बाद जिम उस बर्फीली खाई से चढ़कर बाहर निकल पाया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार भी जीवन के दुख और कष्ट की खाई से अपने परमेश्वर पिता के वचनों को स्मरण करके बाहर निकल सका। भजनकार ने माना कि यदि परमेश्वर और परमेश्वर का वचन उसका सहारा ना बनते, उसे आनन्द नहीं देते तो वह अपने क्लेष में ही नाश हो जाता (भजन 119:92)। भजनकार ने परमेश्वर के वचन में और परमेश्वर के चरित्र में अपना पूरा भरोसा व्यक्त किया (भजन 119:89-90)। परमेश्वर की इस विश्वासयोग्यता के कारण भजनकार ने यह निर्णय लिया कि वह कभी परमेश्वर के वचनों को नहीं भूलेगा क्योंकि उसे बचाने और सामर्थ देने में वही वचन कारगर हुआ था।

   अपने जीवन में आने वाले दुखों, क्लेषों, सताव और विपरीत परिस्थितियों की खाई में पड़े होने पर भी हमारे प्राण परमेश्वर के वचन और उसके चरित्र को स्मरण करने के द्वारा तरोताज़ा हो सकते हैं, हमें निराशाओं से बाहर निकालकर स्थिर खड़ा कर सकते हैं। परमेश्वर के वचन को सदा स्मरण रखें, वही सदा आपका सही मार्गदर्शक रहेगा। - मार्विन विलियम्स


परमेश्वर के वचन को स्मरण रखना आत्मा को हर्षित रखता है।

तेरी व्यवस्था से प्रीति रखने वालों को बड़ी शान्ति होती है; और उन को कुछ ठोकर नहीं लगती। - भजन 119:165

बाइबल पाठ: भजन 119:89-93
Psalms 119:89 हे यहोवा, तेरा वचन, आकाश में सदा तक स्थिर रहता है। 
Psalms 119:90 तेरी सच्चाई पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है; तू ने पृथ्वी को स्थिर किया, इसलिये वह बनी है। 
Psalms 119:91 वे आज के दिन तक तेरे नियमों के अनुसार ठहरे हैं; क्योंकि सारी सृष्टि तेरे आधीन है। 
Psalms 119:92 यदि मैं तेरी व्यवस्था से सुखी न होता, तो मैं दु:ख के समय नाश हो जाता। 
Psalms 119:93 मैं तेरे उपदेशों को कभी न भूलूंगा; क्योंकि उन्हीं के द्वारा तू ने मुझे जिलाया है।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 48-49
  • इब्रानियों 7


सोमवार, 9 नवंबर 2015

चट्टान


   मैं अपने पति के साथ मैसाचूसेट्स के दौरे पर थी और हम अमेरिका के प्रतिष्ठित प्रतीक प्लेमाउथ रॉक (चट्टान) को देखने गए। परंपरा के अनुसार यह माना जाता है कि सन 1620 में मेफ्लावर नामक जहाज़ से, इंगलैंड से अमेरिका आने वाले यात्रियों ने सबसे पहला कदम इसी चट्टान पर रखा था। हम उस चट्टान के ऐतिहासिक महत्व से प्रभावित तो हुए, लेकिन उस चट्टान के छोटे से आकार को देखकर कुछ निराश भी थे। हमें यह भी जानकारी मिली कि पहले यह चट्टान काफी बड़ी थी किंतु वर्षों के भूक्षरण और सैलिनियों द्वारा चट्टान के छोटे छोटे टुकड़े काट कर ले जाने के कारण अब वह चट्टान अपने मूल आकार की केवल एक-तिहाई मात्र ही रह गई है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु मसीह को भी चट्टान कहकर संबोधित किया गया है (1 कुरिन्थियों 10:4), एक ऐसी चट्टान जो कभी बदलती नहीं है (इब्रानियों 13:8)। प्रभु यीशु एक ऐसी चट्टान है जिस पर बाइबल हमें अपने जीवनों का निर्माण करने को कहती है: "और प्रेरितों और भविष्यद्वक्ताओं की नेव पर जिसके कोने का पत्थर मसीह यीशु आप ही है, बनाए गए हो" (इफिसियों 2:20)। प्रभु यीशु की शिक्षाओं का पालन करना, अपना जीवन चट्टान पर स्थापित करना और बनाना है जहाँ से वह कभी गिर नहीं सकता, क्षय नहीं हो सकता: "इसलिये जो कोई मेरी ये बातें सुनकर उन्हें मानता है वह उस बुद्धिमान मनुष्य की नाईं ठहरेगा जिसने अपना घर चट्टान पर बनाया। और मेंह बरसा और बाढ़ें आईं, और आन्‍धियां चलीं, और उस घर पर टक्करें लगीं, परन्तु वह नहीं गिरा, क्योंकि उस की नेव चट्टान पर डाली गई थी" (मत्ती 7:24-25)।

   लेखिका मैडलीनी ल-इंगल कहती हैं कि "कभी कभी अच्छा रहता जब हमारे सभी आधार और सहारे हमारे नीचे से हटा लिए जाते हैं। ऐसी परिस्थितियों में ही हमें पता चलता है कि हमने अपने जीवन की नींव चट्टान पर डाली है या रेत पर।" प्लेमाउथ रॉक ऐतिहासिक महत्व की रोचक चट्टान हो सकती है, लेकिन वह अक्षय नहीं है। लेकिन प्रभु यीशु वह आत्मिक चट्टान है जो अक्षय, अटल और चिरस्थाई है। जितनों ने प्रभु यीशु पर विश्वास कर के उसे अपने जीवन का आधार बनाया है वे कभी हानि में नहीं जाएंगे, उनका आधार हमेशा स्थिर और दृढ़ रहेगा। - सिंडी हैस कैसपर


चट्टान मसीह यीशु हमारी कभी ना बदलने, कभी ना टूटने वाली अनन्त्काल तक चिरस्थाई आशा है।

यीशु मसीह कल और आज और युगानुयुग एकसा है। - इब्रानियों 13:8

बाइबल पाठ: मत्ती 7:24-27; इफिसियों 2:18-22
Matthew 7:24 इसलिये जो कोई मेरी ये बातें सुनकर उन्हें मानता है वह उस बुद्धिमान मनुष्य की नाईं ठहरेगा जिसने अपना घर चट्टान पर बनाया। 
Matthew 7:25 और मेंह बरसा और बाढ़ें आईं, और आन्‍धियां चलीं, और उस घर पर टक्करें लगीं, परन्तु वह नहीं गिरा, क्योंकि उस की नेव चट्टान पर डाली गई थी। 
Matthew 7:26 परन्तु जो कोई मेरी ये बातें सुनता है और उन पर नहीं चलता वह उस निर्बुद्धि मनुष्य की नाईं ठहरेगा जिसने अपना घर बालू पर बनाया। 
Matthew 7:27 और मेंह बरसा, और बाढ़ें आईं, और आन्‍धियां चलीं, और उस घर पर टक्करें लगीं और वह गिरकर सत्यानाश हो गया।

Ephesians 2:18 क्योंकि उस ही के द्वारा हम दोनों की एक आत्मा में पिता के पास पंहुच होती है। 
Ephesians 2:19 इसलिये तुम अब विदेशी और मुसाफिर नहीं रहे, परन्तु पवित्र लोगों के संगी स्‍वदेशी और परमेश्वर के घराने के हो गए। 
Ephesians 2:20 और प्रेरितों और भविष्यद्वक्ताओं की नेव पर जिसके कोने का पत्थर मसीह यीशु आप ही है, बनाए गए हो। 
Ephesians 2:21 जिस में सारी रचना एक साथ मिलकर प्रभु में एक पवित्र मन्दिर बनती जाती है। 
Ephesians 2:22 जिस में तुम भी आत्मा के द्वारा परमेश्वर का निवास स्थान होने के लिये एक साथ बनाए जाते हो।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 46-47
  • इब्रानियों 6


रविवार, 8 नवंबर 2015

दान


   उस विधवा का अपने आखिरी कुछ सिक्कों को भी भ्रष्ट धार्मिक संस्थान में दाना कर देना उचित प्रतीत नहीं हो रहा था। यरुशलेम के उस मन्दिर से वे धर्माधिकारी आमदनी पाते थे जो वहाँ आई भेंट और दान पर निर्भर होने के बावजूद "...वे विधवाओं के घरों को खा जाते हैं, और दिखाने के लिये बड़ी देर तक प्रार्थना करते रहते हैं..." (मरकुस 12:40)। लेकिन उस गरीब विधवा द्वारा दिए गए उस दान से प्रभु यीशु को अपने चेलों को धन के प्रति सही रवैये की शिक्षा देने का अवसर मिला, जो आज हमारे लिए भी है।

   गौर्डन कौसबी अपने वॉशिंगटन डी. सी. के चर्च ऑफ सेवियर में पास्टर होने के समय की एक घटना का उल्लेख करते हैं; उस चर्च में एक विधवा आया करती थी जिसके छः बच्चे थे। उस विधवा की आमदानी से बड़ी कठिनाई से बच्चों का पालन-पोषण और घर चलाने का खर्चा निकल पाता था; लेकिन वह विधवा नियमित रूप से हर सप्ताह चर्च में 4 डॉलर दान-पात्र में डाला करती थी। चर्च के एक अगुवे ने कौसबी से कहा कि वह जाकर उस विधवा से बात करे कि हालात को देखते हुए दान-पात्र में डालने की बजाए वह अपने घर के खर्चे के लिए उस पैसे का प्रयोग कर ले। कौसबी ने उस अगुवे की सलाह मान ली और उस विधवा के पास बात करने को चला तो गया, लेकिन ऐसा करके उसे शर्मिंदगी ही उठानी पड़ी। कौसबी की बात सुनकर विधवा का प्रत्युत्तर था, "आप मुझसे वह अन्तिम अवसर भी छीन लेना चाहते हैं जो मुझे सर उठा कर जीने तथा जीवन को सार्थक बनाने में सहायता करता है!" उस विधवा ने दान देने के रहस्य को जान लिया था - दान, लेने वाले से अधिक देने वाले के लिए लाभदायक होता है।

   अवश्य ही गरीबों को आर्थिक सहायता की आवश्यकता होती है, लेकिन जितना आवश्यक दान लेना हो सकता है, दान देना उससे कम महत्वपूर्ण नहीं होता। दान देना हमें स्मरण दिलाता है कि हम भी, आकाश के पक्षियों और धरती के फूलों के समान, परमेश्वर के अनुग्रह पर आधारित होकर ही जीते हैं। आकाश के पक्षी और धरती की वनस्पति अपने भविष्य को लेकर चिंतित नहीं रहते; ऐसे ही हम मनुष्यों को भी अपने भविष्य को लेकर चिंतित नहीं रहना चाहिए। समय और आवश्यकतानुसार परमेश्वर सब को देता है। दान देना हमें एक अवसर प्रदान करता है कि हम परमेश्वर में अपने भरोसे को प्रगट कर सकें कि परमेश्वर हमारे लिए भी वैसे ही उपलब्ध करवाएगा जैसे वह सृष्टि के लिए उपलब्ध करवाता है (मत्ती 6:25-34)। - फिलिप यैन्सी


धन दान करके हम अपने ऊपर धन के दुषप्रभाव की संभावनाओं का अन्त करते हैं।

मैं ने तुम्हें सब कुछ कर के दिखाया, कि इस रीति से परिश्रम करते हुए निर्बलों को सम्भालना, और प्रभु यीशु की बातें स्मरण रखना अवश्य है, कि उसने आप ही कहा है; कि लेने से देना धन्य है। - प्रेरितों 20:35

बाइबल पाठ: मरकुस 12:38-44
Mark 12:38 उसने अपने उपदेश में उन से कहा, शस्‍त्रियों से चौकस रहो, जो लम्बे वस्‍त्र पहिने हुए फिरना। 
Mark 12:39 और बाजारों में नमस्‍कार, और आराधनालयों में मुख्य मुख्य आसन और जेवनारों में मुख्य मुख्य स्थान भी चाहते हैं। 
Mark 12:40 वे विधवाओं के घरों को खा जाते हैं, और दिखाने के लिये बड़ी देर तक प्रार्थना करते रहते हैं, ये अधिक दण्‍ड पाएंगे।
Mark 12:41 और वह मन्दिर के भण्‍डार के साम्हने बैठकर देख रहा था, कि लोग मन्दिर के भण्‍डार में किस प्रकार पैसे डालते हैं, और बहुत धनवानों ने बहुत कुछ डाला। 
Mark 12:42 इतने में एक कंगाल विधवा ने आकर दो दमडिय़ां, जो एक अधेले के बराबर होती है, डालीं। 
Mark 12:43 तब उसने अपने चेलों को पास बुलाकर उन से कहा; मैं तुम से सच कहता हूं, कि मन्दिर के भण्‍डार में डालने वालों में से इस कंगाल विधवा ने सब से बढ़कर डाला है। 
Mark 12:44 क्योंकि सब ने अपने धन की बढ़ती में से डाला है, परन्तु इस ने अपनी घटी में से जो कुछ उसका था, अर्थात अपनी सारी जीविका डाल दी है।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 43-45
  • इब्रानियों 5