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गुरुवार, 3 दिसंबर 2015

भरोसेमन्द सत्य


   कई सालों से सारा कमर दर्द से परेशान थी, और दर्द बढ़ता ही जा रहा था। उसके चिकित्सक ने उसे फिज़्योथैरपिस्ट के पास भेजा, और वहाँ उसे प्रतिदिन 25 व्यायाम करने के लिए दिए गए। दर्द कुछ कम तो हुआ लेकिन पूरी तरह से हटा नहीं। इसलिए चिकित्सक ने एक्स-रे करवाए और फिर उसे एक दूसरे फिज़ियोथैरपिस्ट के पास भेजा, जिसने उसे पहले फिज़ियोथैरपिस्ट द्वारा बताए गए सभी व्यायामों को बन्द करके उनके स्थान पर केवल एक ही सरल सा व्यायाम करने को कहा। आश्चर्य की बात यह रही कि जो वे 25 व्यायाम नहीं कर पाए, वह कार्य उस एक सरल से व्यायाम ने कर दिया।

   कई दफा बिलकुल सरल और सामान्य प्रतीत होने वाले सत्य ही सबसे कारगर होते हैं। जब कार्ल बार्थ से कहा गया कि आध्यात्मवाद के अपने जीवन भर के अनुभव को एक ही वाक्य में संक्षिप्त करें, तो उन्होंने कहा, "यीशु मुझसे प्रेम करता है!" कुछ लोगों का कहना है उन्होंने साथ ही यह भी कहा, "क्योंकि बाइबल मुझसे यह कहती है और मैं इसे जानता हूँ।"

   हमारे प्रति परमेश्वर का प्रेम प्रगट है; उसने हमें हमारे ही पापों से बचाने के लिए अपने पुत्र को बलिदान होने दिया। मसीह यीशु हमारे पापों को अपने ऊपर लिए क्रूस पर मारा गया, और अपने साथ हमें नया जीवन देने के लिए तीसरे दिन फिर मृतकों में से जी उठा। अद्भुत प्रेम! परमेश्वर के वचन बाइबल में जैसे यूहन्ना कहता है, "देखो पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है, कि हम परमेश्वर की सन्तान कहलाएं, और हम हैं भी..." (1 यूहन्ना 3:1)।

   हम मनुष्यों के प्रति प्रभु यीशु का प्रेम समझ पाना मानव बुद्धि से संभव नहीं है, उसे तो केवल अनुभव के द्वारा ही जाना जा सकता है। ना ही हम अपनी बुद्धि से इस तथ्य को समझ सकते हैं कि प्रभु यीशु का प्रेम हमारे जीवनों को कठिनाईयों और परेशानियों में पड़ने से तो नहीं बचाता किंतु उन सभी विपरीत परिस्थितियों में प्रभु यीशु हमारे साथ ही खड़ा होता है, हमारे समान ही उन में दुखी होता है, उनसे जूझने के लिए हमें ढ़ाढ़स, सांत्वना और सामर्थ प्रदान करता है और हमें उन पर जयवन्त बनाता है।

   प्रभु यीशु का प्रेम वह भरोसेमन्द सत्य है जो हमारे जीवनों को दिशा, उद्देश्य और परमेश्वर की शान्ति प्रदान करता है, जो हमें कहीं और से नहीं मिल सकती। - ऐनी सेटास


सबसे बड़े अचरज की बात; जरा सोचिए, प्रभु यीशु मुझसे प्रेम करता है!

मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे। - यूहन्ना 14:27 

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 2:24-3:3
1 John 2:24 जो कुछ तुम ने आरम्भ से सुना है वही तुम में बना रहे: जो तुम ने आरम्भ से सुना है, यदि वह तुम में बना रहे, तो तुम भी पुत्र में, और पिता में बने रहोगे। 
1 John 2:25 और जिस की उसने हम से प्रतिज्ञा की वह अनन्त जीवन है। 
1 John 2:26 मैं ने ये बातें तुम्हें उन के विषय में लिखी हैं, जो तुम्हें भरमाते हैं। 
1 John 2:27 और तुम्हारा वह अभिषेक, जो उस की ओर से किया गया, तुम में बना रहता है; और तुम्हें इस का प्रयोजन नहीं, कि कोई तुम्हें सिखाए, वरन जैसे वह अभिषेक जो उस की ओर से किया गया तुम्हें सब बातें सिखाता है, और यह सच्चा है, और झूठा नहीं: और जैसा उसने तुम्हें सिखाया है वैसे ही तुम उस में बने रहते हो।
1 John 2:28 निदान, हे बालकों, उस में बने रहो; कि जब वह प्रगट हो, तो हमें हियाव हो, और हम उसके आने पर उसके साम्हने लज्ज़ित न हों। 
1 John 2:29 यदि तुम जानते हो, कि वह धार्मिक है, तो यह भी जानते हो, कि जो कोई धर्म का काम करता है, वह उस से जन्मा है। 
1 John 3:1 देखो पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है, कि हम परमेश्वर की सन्तान कहलाएं, और हम हैं भी: इस कारण संसार हमें नहीं जानता, क्योंकि उसने उसे भी नहीं जाना। 
1 John 3:2 हे प्रियों, अभी हम परमेश्वर की सन्तान हैं, और अब तक यह प्रगट नहीं हुआ, कि हम क्या कुछ होंगे! इतना जानते हैं, कि जब वह प्रगट होगा तो हम भी उसके समान होंगे, क्योंकि उसको वैसा ही देखेंगे जैसा वह है। 
1 John 3:3 और जो कोई उस पर यह आशा रखता है, वह अपने आप को वैसा ही पवित्र करता है, जैसा वह पवित्र है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 45-46
  • 1यूहन्ना 2


बुधवार, 2 दिसंबर 2015

खराई और ईमानदारी


   हम उसे ’खराई का संघ’ कहकर संबोधित करते हैं, किंतु वह दोपहर के भोजनकाल समय में हम बास्केटबॉल खेलने वाले कुछ लोगों का समूह ही है। खेलते समय हम से हुए नियमोलंघन हम स्वयं ही स्वीकार कर लेते हैं, पूरा प्रयास करते हैं कि खेल के आवेश में क्रोधित होकर अपशब्द ना बोलें और सब कुछ को सरल और आनन्दायक बनाए रखें। हम परस्पर प्रतियोगिता में तो रहते हैं और हम में से कोई भी हारना नहीं चाहता लेकिन हम सभी इस बात पर सहमत और समर्पित हैं कि खराई और ईमानदारी ही सर्वोपरि बनी रहनी चाहिए।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें खराई और ईमानदारी के महत्व के बारे में स्पष्ट बताती है, और जब हम खराई और ईमानदारी का अपने जीवनों में पालन करते हैं, हम अपने सृष्टिकर्ता तथा उद्धारकर्ता परमेश्वर का आदर करते हैं। अपने वचन बाइबल के द्वारा परमेश्वर ने हमें खराई और ईमानदारी में चलते रहने के लिए स्पष्ट कारण दिए हैं (भजन 26:11)। जिस व्यक्ति के जीवन में खराई और ईमानदारी है उसके जीवन में शान्ति तथा सुरक्षा है (नीतिवचन 10:9)। परमेश्वर के अनुयायी जो खराई और ईमानदारी में विश्वास रखते हैं, परमेश्वर में अपने भरोसे के द्वारा सुरक्षित भी रहते हैं, क्योंकि वे अपने जीवन की हर परिस्थिति में परमेश्वर के नियंत्रण और मार्गदर्शन का सहारा लेते हैं (भजन 25:21)। साथ ही जो खराई और ईमानदारी का पालन करते हैं उन्हें सही मार्गदर्शन और दिशानिर्देश भी प्रदान किए जाते हैं: "सीधे लोग अपनी खराई से अगुवाई पाते हैं, परन्तु विश्वासघाती अपने कपट से विनाश होते हैं" (नीतिवचन 11:3)।

   हमारे लिए अपने जीवनों को ’खराई का संघ’ बनाना और मानना क्यों आवश्यक है? आवश्यक इसलिए है क्योंकि इस प्रकार परमेश्वर की आज्ञाकारिता के द्वारा हम दिखाते हैं कि हम अपने जीवनों में परमेश्वर और उसकी आज्ञाओं, उसके वचन बाइबल का आदर करते हैं, उस पर भरोसा रखते हैं और उसके प्रेम की ज्योति को दूसरों के जीवनों में चमकाना चाहते हैं। - डेव ब्रैनन


खराई और ईमानदारी मसीही चरित्र का व्यावाहरिक जीवन में प्रदर्शन है।

जो खराई से चलता है वह निडर चलता है, परन्तु जो टेढ़ी चाल चलता है उसकी चाल प्रगट हो जाती है। - नीतिवचन 10:9

बाइबल पाठ: भजन 26
Psalms 26:1 हे यहोवा, मेरा न्याय कर, क्योंकि मैं खराई से चलता रहा हूं, और मेरा भरोसा यहोवा पर अटल बना है। 
Psalms 26:2 हे यहोवा, मुझ को जांच और परख; मेरे मन और हृदय को परख। 
Psalms 26:3 क्योंकि तेरी करूणा तो मेरी आंखों के साम्हने है, और मैं तेरे सत्य मार्ग पर चलता रहा हूं।
Psalms 26:4 मैं निकम्मी चाल चलने वालों के संग नहीं बैठा, और न मैं कपटियों के साथ कहीं जाऊंगा; 
Psalms 26:5 मैं कुकर्मियों की संगति से घृणा रखता हूं, और दुष्टों के संग न बैठूंगा।
Psalms 26:6 मैं अपने हाथों को निर्दोषता के जल से धोऊंगा, तब हे यहोवा मैं तेरी वेदी की प्रदक्षिणा करूंगा, 
Psalms 26:7 ताकि तेरा धन्यवाद ऊंचे शब्द से करूं, 
Psalms 26:8 और तेरे सब आश्चर्यकर्मों का वर्णन करूं। हे यहोवा, मैं तेरे धाम से तेरी महिमा के निवास स्थान से प्रीति रखता हूं। 
Psalms 26:9 मेरे प्राण को पापियों के साथ, और मेरे जीवन को हत्यारों के साथ न मिला। 
Psalms 26:10 वे तो ओछापन करने में लगे रहते हैं, और उनका दाहिना हाथ घूस से भरा रहता है।
Psalms 26:11 परन्तु मैं तो खराई से चलता रहूंगा। तू मुझे छुड़ा ले, और मुझ पर अनुग्रह कर। 
Psalms 26:12 मेरे पांव चौरस स्थान में स्थिर है; सभाओं में मैं यहोवा को धन्य कहा करूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 42-44
  • 1यूहन्ना 1


मंगलवार, 1 दिसंबर 2015

प्रतीक्षा


   क्रिसमस के इस समय और माहौल में हमें अनेक बातों के लिए प्रतीक्षा में रहना पड़ता है। हम सड़कों की भीड़ में फंसे, यातायात के आगे बढ़ने की प्रतीक्षा करते हैं; हम दुकानों में खरीद्दारी करके, कीमत चुकाने के लिए पंक्ति में खड़े प्रतीक्षा करते हैं; हम इस पर्व को इकट्ठे मनाने के लिए परिवारजनों के आने की प्रतीक्षा करते हैं; मेज़ पर स्वादिष्ट तथा मनपसन्द भोजन परोसे जाने के बाद हम उसे खाने के लिए सब के एकत्र होने की प्रतीक्षा करते हैं; हम अपने उपहारों को खोलने और देखने की प्रतीक्षा करते हैं।

   यह सारी प्रतीक्षा हम मसीही विश्वासियों को यह भी स्मरण कराती है कि क्रिसमस केवल परंपरा और छुट्टी मनाने का ही नहीं वरन एक अन्य बहुत महत्वपूर्ण बात की प्रतीक्षा का भी पर्व है - प्रभु यीशु के दोबारा आगमन की प्रतीक्षा का। अब से लगभग 2000 वर्ष पूर्व प्रभु यीशु का प्रथम आगमन उनके सारे जगत के समस्त लोगों के लिए उद्धारकर्ता के रूप में था; अब उनका दूसरा आगमन संसार के शासक के रूप में न्याय करने और उन्हें अपने साथ रहने के लिए एकत्रित करने के लिए होगा जिन्होंने उनपर विश्वास किया और अपना जीवन उन्हें समर्पित किया है, और वे फिर प्रभु के साथ संसार पर राज्य करेंगे।

   साथ ही क्रिसमस हमें यह भी स्मरण कराता है कि परमेश्वर भी प्रतीक्षा कर रहा है; परमेश्वर प्रतीक्षा कर रहा है कि लोग उसकी हस्ति, महिमा और गौरव पर ध्यान करें, उनके प्रति उसके प्रेम को पहिचानें, अपने पापों से पश्चाताप करें, उससे पापों की क्षमा प्राप्त करें, समझने पाएं कि उसके बिना वे अपने पापों के दोष में अनन्तकाल के लिए विनाश में जाने के खतरे में जी रहे हैं। जो हमें प्रभु के दूसरे आगमन में देरी लगती है वह वास्तव में प्रभु का प्रेम और धैर्य है जिससे अधिक से अधिक लोगों को अवसर मिले और वे अनन्तकाल के विनाश से बच सकें (2पतरस 3:9)।

   प्रभु उनके साथ, जिन्हें वह प्रेम करता है एक अनन्तकाल का संबंध बनाने की प्रतीक्षा में है। इस संबंध को बनाने के लिए उसने ही पहल करी जब वह संसार में मानव रूप में अवतरित हुआ और सबके पापों के लिए अपना बलिदान दिया और फिर सबके उद्धार के लिए तीसरे दिन मृतकों में से जी उठा। आज वह प्रतीक्षा कर रहा है कि संसार के लोग उसे अपने जीवनों में आमंत्रित करें, अपना मुक्तिदाता और प्रभु स्वीकार करें। - जूली ऐकैअरमैन लिंक


परमेश्वर धीरज के साथ अपने सभी वायदे पूरे करता है।

प्रभु अपनी प्रतिज्ञा के विषय में देर नहीं करता, जैसी देर कितने लोग समझते हैं; पर तुम्हारे विषय में धीरज धरता है, और नहीं चाहता, कि कोई नाश हो; वरन यह कि सब को मन फिराव का अवसर मिले। - 2 पतरस 3:9

बाइबल पाठ: यूहन्ना 14:1-6
John 14:1 तुम्हारा मन व्याकुल न हो, तुम परमेश्वर पर विश्वास रखते हो मुझ पर भी विश्वास रखो। 
John 14:2 मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते, तो मैं तुम से कह देता क्योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूं। 
John 14:3 और यदि मैं जा कर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूं, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहां ले जाऊंगा, कि जहां मैं रहूं वहां तुम भी रहो। 
John 14:4 और जहां मैं जाता हूं तुम वहां का मार्ग जानते हो। 
John 14:5 थोमा ने उस से कहा, हे प्रभु, हम नहीं जानते कि तू हां जाता है तो मार्ग कैसे जानें? 
John 14:6 यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 40-41
  • 2पतरस 3


सोमवार, 30 नवंबर 2015

ध्यान


   सी. एस. ल्युईस एक ऐसे व्यक्तिव थे जिनके लेख और रचनाओं ने बच्चों और विद्वानों, दोनों में ही समान रूप से मसीही विश्वास की अलख जागृत करी थी। सन 1963 में सी. एस. ल्युईस के देहांत के एक सप्ताह पश्चात उनके सहकर्मी और मित्रगण इंगलैंड में ऑक्सफोर्ड स्थित मैगडेलेन कॉलेज के प्रार्थना घर में उन्हें श्रद्धांजलि देने एकत्रित हुए। उस श्रद्धांजलि सभा में सी. एस. ल्युईस के एक करीबी मित्र औस्टिन फेरर ने बताया कि उनके लेखों और रचनाओं को पढ़ने वाले संसार भर के लोगों से जो भी पत्र ल्युईस के पास आते थे वे उन सबका अपने हाथ से लिखकर उत्तर देते थे; लोगों के प्रति उनका व्यवहार और आचरण सबको आदर देने और ध्यान रखने का था, इसीलिए वे आपके द्वारा उन्हें लिखे गए शब्दों का ध्यान रखते थे और अपने उत्तर से सम्मान देते थे।

   अपने इस व्यवहार से ल्युईस ने परमेश्वर के एक गुण को प्रदर्शित किया, परमेश्वर भी हमारी प्रार्थनाओं के प्रत्येक शब्द पर ध्यान रखता है, किसी बात को नज़रन्दाज़ नहीं करता। परमेश्वर के वचन बाइबल में, बड़ी कठिनाई के समय में भजनकार ने परमेश्वर की दोहाई दी (भजन 66:10-14)। बाद में भजनकार ने प्रभु परमेश्वर को उसके द्वारा दी गई सहायता के लिए उसका धन्यवाद और आराधना करते हुए कहा, "परन्तु परमेश्वर ने तो सुना है; उसने मेरी प्रार्थना की ओर ध्यान दिया है" (भजन 66:19)।

    जब हम प्रार्थना में उसके पास आते हैं तो परमेश्वर हमारे शब्दों को भी सुनता है और हमारे मनों की वास्तविक दशा तथा आवश्यकताओं को भी जानता है। हम भी भजनकार के साथ कह सकते हैं, "धन्य है परमेश्वर, जिसने न तो मेरी प्रार्थना अनसुनी की, और न मुझ से अपनी करूणा दूर कर दी है" (भजन 66:20)। परमेश्वर से करी गई हमारी प्रार्थनाएं उसके साथ हमारा एक गहरा संबम्ध बनाने का माध्यम बन जाती हैं। हमारी हर परिस्थिति में, हमारी हर आवश्यकता में, हर कठिनाई में वह हमारी प्रार्थनाओं पर ध्यान रखता है, उनका आदर करता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर का ध्यान सदा हम पर बना रहता है।

देख, यहोवा की दृष्टि सारी पृथ्वी पर इसलिये फिरती रहती है कि जिनका मन उसकी ओर निष्कपट रहता है, उनकी सहायता में वह अपना सामर्थ दिखाए। - 2 इतिहास 16:9

बाइबल पाठ: भजन 66:10-20
Psalms 66:10 क्योंकि हे परमेश्वर तू ने हम को जांचा; तू ने हमें चान्दी की नाईं ताया था। 
Psalms 66:11 तू ने हम को जाल में फंसाया; और हमारी कटि पर भारी बोझ बान्धा था; 
Psalms 66:12 तू ने घुड़चढ़ों को हमारे सिरों के ऊपर से चलाया, हम आग और जल से हो कर गए; परन्तु तू ने हम को उबार के सुख से भर दिया है।
Psalms 66:13 मैं होमबलि ले कर तेरे भवन में आऊंगा मैं उन मन्नतों को तेरे लिये पूरी करूंगा, 
Psalms 66:14 जो मैं ने मुंह खोल कर मानीं, और संकट के समय कही थीं। 
Psalms 66:15 मैं तुझे मोटे पशुओं के होमबलि, मेंढ़ों की चर्बी के धूप समेत चढ़ऊंगा; मैं बकरों समेत बैल चढ़ाऊंगा।
Psalms 66:16 हे परमेश्वर के सब डरवैयों आकर सुनो, मैं बताऊंगा कि उसने मेरे लिये क्या क्या किया है। 
Psalms 66:17 मैं ने उसको पुकारा, और उसी का गुणानुवाद मुझ से हुआ। 
Psalms 66:18 यदि मैं मन में अनर्थ बात सोचता तो प्रभु मेरी न सुनता। 
Psalms 66:19 परन्तु परमेश्वर ने तो सुना है; उसने मेरी प्रार्थना की ओर ध्यान दिया है।
Psalms 66:20 धन्य है परमेश्वर, जिसने न तो मेरी प्रार्थना अनसुनी की, और न मुझ से अपनी करूणा दूर कर दी है!

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 37-39
  • 2पतरस 2



रविवार, 29 नवंबर 2015

धारणा


   एक दिन जब मैं किराने की दुकान से सामान खरीदने गया तो एक व्यक्ति ने मुझे चोर तो एक अन्य ने मुझे नायक समझ लिया। अपनी खरीद्दारी कर के जब मैं दुकान से बाहर निकलने को था तो दुकान के एक कर्मचारी ने मुझ से कहा, "श्रीमन, क्षमा कीजिए किंतु आपकी रेढ़ी में बहुत सी वस्तुएं ऐसी हैं जो थैलों में नहीं रखी गई हैं", और मेरी जाँच करने लगा। क्योंकि दुकानों से सामान चोरी करने वाले अकसर सामान को बिना थैलों में बाँधे बाहर ले जाते हैं, इसीलिए उस कर्मचारी ने मुझे रोका और जाँचा। जब उसने मेरे सामान का नीरिक्षण करने पर देखा कि मेरी खरीदी हुई वस्तुओं में से कई इतनी बड़ी थीं कि वे थैलों में नहीं रखी जा सकती थीं तो उसने मुझ से क्षमा मांगी और बाहर जाने की अनुमति दे दी।

   बाहर निकलकर जब मैं गाड़ी खड़ी करने के स्थान पर अपनी गाड़ी के निकट सामान लेकर पहुँचा तो पास से निकलती एक महिला ने मुझे देखा और बोली, "देश की रक्षा में योगदान करने के लिए धन्यवाद" और  आगे बढ़ गई। उस महिला को संभवतः मेरी टोपी देखकर यह गलतफहमी हुई कि मैं फौजी हूँ और उसने मुझे धन्यवाद बोला। उस दुकान के कर्मचारी और बाहर मिली उस महिला, दोनों ने मेरे बारे में जल्दबाज़ी में अपनी धारणा बना ली थी, और दोनों ही अपनी धारणा में गलत थे। प्रथमदृष्टया किसी के बारे में धारणा बना लेना बहुत सामान्य और सरल है, और हम प्रतिदिन के जीवन में ऐसा जाने-अनजाने अनेक बार करते रहते हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में एक घटना लिखी है, जब परमेश्वर ने अपने नबी शमूएल को यिशै के घर भेजा कि उसके पुत्रों में से एक को भविष्य में इस्त्राएल का राजा होने के लिए अभिषिक्त करे, तो उसने भी यही गलती करी, प्रथमदृष्टया ही अपनी धारणा बना ली कि किसे अभिषेक करना है। लेकिन परमेश्वर ने उससे कहा, "...न तो उसके रूप पर दृष्टि कर, और न उसके डील की ऊंचाई पर, क्योंकि मैं ने उसे अयोग्य जाना है;..." (1 शमूएल 16:7)।

   परमेश्वर की सहायता लें कि वह आपको उसकी नज़रों से, उसके दृष्टिकोण के समान लोगों और संसार को देखना सिखाए, "...क्योंकि यहोवा का देखना मनुष्य का सा नहीं है; मनुष्य तो बाहर का रूप देखता है, परन्तु यहोवा की दृष्टि मन पर रहती है" (1 शमूएल 16:7) और तब आप गलत धारणा बनाने से बचे रहेंगे। - डेनिस फिशर


प्रथमदृष्टया धारणाएं अकसर गलत निर्णय करवाती हैं।

और हे मेरे पुत्र सुलैमान! तू अपने पिता के परमेश्वर का ज्ञान रख, और खरे मन और प्रसन्न जीव से उसकी सेवा करता रह; क्योंकि यहोवा मन को जांचता और विचार में जो कुछ उत्पन्न होता है उसे समझता है। यदि तू उसकी खोज में रहे, तो वह तुझ को मिलेगा; परन्तु यदि तू उसको त्याग दे तो वह सदा के लिये तुझ को छोड़ देगा। - 1 इतिहास 28:9

बाइबल पाठ: 1 शमूएल 16:1-7
1 Samuel 16:1 और यहोवा ने शमूएल से कहा, मैं ने शाऊल को इस्राएल पर राज्य करने के लिये तुच्छ जाना है, तू कब तक उसके विषय विलाप करता रहेगा? अपने सींग में तेल भर के चल; मैं तुझ को बेतलेहेमी यिशै के पास भेजता हूं, क्योंकि मैं ने उसके पुत्रों में से एक को राजा होने के लिये चुना है। 
1 Samuel 16:2 शमूएल बोला, मैं क्योंकर जा सकता हूं? यदि शाऊल सुन लेगा, तो मुझे घात करेगा। यहोवा ने कहा, एक बछिया साथ ले जा कर कहना, कि मैं यहोवा के लिये यज्ञ करने को आया हूं। 
1 Samuel 16:3 और यज्ञ पर यिशै को न्योता देना, तब मैं तुझे जता दूंगा कि तुझ को क्या करना है; और जिस को मैं तुझे बताऊं उसी को मेरी ओर से अभिषेक करना। 
1 Samuel 16:4 तब शमूएल ने यहोवा के कहने के अनुसार किया, और बेतलहेम को गया। उस नगर के पुरनिये थरथराते हुए उस से मिलने को गए, और कहने लगे, क्या तू मित्रभाव से आया है कि नहीं? 
1 Samuel 16:5 उसने कहा, हां, मित्रभाव से आया हूं; मैं यहोवा के लिये यज्ञ करने को आया हूं; तुम अपने अपने को पवित्र कर के मेरे साथ यज्ञ में आओ। तब उसने यिशै और उसके पुत्रों को पवित्र कर के यज्ञ में आने का न्योता दिया। 
1 Samuel 16:6 जब वे आए, तब उसने एलीआब पर दृष्टि कर के सोचा, कि निश्चय जो यहोवा के साम्हने है वही उसका अभिषिक्त होगा। 
1 Samuel 16:7 परन्तु यहोवा ने शमूएल से कहा, न तो उसके रूप पर दृष्टि कर, और न उसके डील की ऊंचाई पर, क्योंकि मैं ने उसे अयोग्य जाना है; क्योंकि यहोवा का देखना मनुष्य का सा नहीं है; मनुष्य तो बाहर का रूप देखता है, परन्तु यहोवा की दृष्टि मन पर रहती है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 35-36
  • 2पतरस 1


शनिवार, 28 नवंबर 2015

आशीष


   अपनी पुस्तक Daring to Draw Near में लेखक डॉ. जौन व्हाईट लिखते हैं कि बहुत साल पहले परमेश्वर ने उनके लिए संभव किया कि वे अनेक सुविधाओं से युक्त एक सुन्दर और आलीशान घर ले सकें। उस घर को लेकर उनके भावनाएं नाट्कीय रूप से बदलती रहीं।

   जब वे अपने आप को स्मरण दिलाते कि वह घर उन्हें परमेश्वर ने भेंट किया है तो वे आनन्द और धन्यवाद से भर जाते। किंतु जब वे अपने घर की तुलना अन्य मित्रों के घर से करते तो उन्हें गर्व होता कि उनका घर कितना आलीशान है परन्तु साथ ही उनका आनन्द भी जाता रहता। घर की भव्यता पर ध्यान देने से उन्हें वह एक बोझ लगने लगता क्योंकि तब उन्हें वह बड़ा आलीशान स्थान घर नहीं वरन ढेर सारी दीवारें, बगीचे, पेड़-पौधे और बाड़े दिखाई देना लगता जिसकी देख-रेख तथा रख-रखाव में उन्हें निरंतर लगे रहना पड़ता था। अपने इन अनुभवों को लेकर व्हाईट ने कहा, "जब भी घमण्ड मेरी नज़रों को धुंधला और मेरे मन को बोझिल कर देता, कृतज्ञता मेरे बोझ को हलका कर देती और मेरी दृष्टि को स्पष्ट कर देती।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में सभोपदेशक की पुस्तक के लेखक ने भी जीवन में प्रत्येक भौतिक वस्तु का आनन्द ले पाने में परमेश्वर की उपस्थिति को अनुभव किया। लेखक ने पहिचाना कि अपने परिश्रम के फल को आनन्द के साथ भोग पाना, यहाँ तक कि उसे उन फलों का प्राप्त होना और उनसे आनन्दित हो सकना, सब परमेश्वर ही से था (सभोपदेशक 5:18-19)।

   हमारे जीवन के आरंभ से लेकर अन्त तक, समस्त जीवन परमेश्वर के अनुग्रह से हमें मिलती रहने वाली अविरल भेंट है। यदि हम हर बात के लिए और सदा यह स्मरण रखें कि अपने आप में हम किसी भी चीज़ को पाने के योग्य नहीं हैं और परमेश्वर किसी बात को हमें देने के लिए कभी भी बाध्य या हमारा ऋणी नहीं है, लेकिन फिर भी वह अनुग्रह और अनुकंपा में होकर हम पर अपनी आशीषें और भेंटें न्योछावर करता है तो फिर हम कभी ना तो अपनी आशीषों को लेकर स्वार्थी होंगे और ना ही उनका आनन्द लेने में दोषी अनुभव करेंगे।

   हमारी सभी आशीषें, वे चाहे आत्मिक हों या पार्थिव, सब हमारे अनुग्रहकारी दयालु परमेश्वर पिता से हैं, उनका सदुपयोग उसकी महिमा और हमारी उन्नति करेगा। - डेनिस जे. डीहॉन


परमेश्वर जो हमें इतना कुछ देता है, एक और बात भी देता है - एक कृतज्ञ मन। - हर्बर्ट

क्योंकि हर एक अच्छा वरदान और हर एक उत्तम दान ऊपर ही से है, और ज्योतियों के पिता की ओर से मिलता है, जिस में न तो कोई परिवर्तन हो सकता है, ओर न अदल बदल के कारण उस पर छाया पड़ती है। - याकूब 1:17

बाइबल पाठ: सभोपदेशक 5:13-20
Ecclesiastes 5:13 मैं ने धरती पर एक बड़ी बुरी बला देखी है; अर्थात वह धन जिसे उसके मालिक ने अपनी ही हानि के लिये रखा हो, 
Ecclesiastes 5:14 और वह किसी बुरे काम में उड़ जाता है; और उसके घर में बेटा उत्पन्न होता है परन्तु उसके हाथ मे कुछ नहीं रहता। 
Ecclesiastes 5:15 जैसा वह मां के पेट से निकला वैसा ही लौट जाएगा; नंगा ही, जैसा आया था, और अपने परिश्रम के बदले कुछ भी न पाएगा जिसे वह अपने हाथ में ले जा सके। 
Ecclesiastes 5:16 यह भी एक बड़ी बला है कि जैसा वह आया, ठीक वैसा ही वह जाएगा; उसे उस व्यर्थ परिश्रम से और क्या लाभ है? 
Ecclesiastes 5:17 केवल इसके कि उसने जीवन भर बेचैनी से भोजन किया, और बहुत ही दु:खित और रोगी रहा और क्रोध भी करता रहा? 
Ecclesiastes 5:18 सुन, जो भली बात मैं ने देखी है, वरन जो उचित है, वह यह कि मनुष्य खाए और पीए और अपने परिश्रम से जो वह धरती पर करता है, अपनी सारी आयु भर जो परमेश्वर ने उसे दी है, सुखी रहे: क्योंकि उसका भाग यही है। 
Ecclesiastes 5:19 वरन हर एक मनुष्य जिसे परमेश्वर ने धन सम्पत्ति दी हो, और उन से आनन्द भोगने और उस में से अपना भाग लेने और परिश्रम करते हुए आनन्द करने को शक्ति भी दी हो- यह परमेश्वर का वरदान है। 
Ecclesiastes 5:20 इस जीवन के दिन उसे बहुत स्मरण न रहेंगे, क्योंकि परमेश्वर उसकी सुन सुनकर उसके मन को आनन्दमय रखता है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 33-34
  • 1पतरस 5


शुक्रवार, 27 नवंबर 2015

जीवन जल


   पृथ्वी के सबसे निर्जल स्थानों में से एक है पूर्वी अफ्रीका; इसीलिए उस इलाके के एक शहर का नाम "नैरिबी" होना बहुत रोचक बात है। यह नाम उस इलाके के एक कबीले, मसाई, की भाषा के एक वाक्यंश, जिसका अर्थ होता है "ठंडा पानी" से लिया गया है और नैरोबी का अर्थ है "जल का स्थान"।

   संसार के इतिहास में जल की उपस्थिति सदैव ही जीवन-दायक और सामरिक रही है। चाहे कोई निर्जल रेगिस्तान में रहे या फिर वर्षा-वन में, जीवन के लिए पानी का कोई विकल्प नहीं है; बिना जल के जीवन संभव नहीं है। किसी सूखे पर्यावरण वाले उजाड़ स्थान पर पानी के स्त्रोत का पता होना जीवन और मृत्यु को निर्धारित करता है।

   हमारे आत्मिक जीवन में भी कुछ बातें हैं जिनका कोई विकल्प नहीं है। इसीलिए जब एक कुएं पर प्रभु यीशु का साक्षात्कार एक आत्मिक रीति से प्यासी स्त्री से हुआ तो उन्होंने उससे कहा कि जिस जीवन जल की उसे आवश्यकता है वह जल उसे केवल वे ही दे सकते हैं। प्रभु ने उस स्त्री से कहा, "परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा" (यूहन्ना 4:14)।

   हमारे मन परमेश्वर के लिए वैसे ही प्यासे होने चाहिएं जैसे जल के लिए हाँफने वाली प्यासी हिरणी की उपमा परमेश्वर के वचन बाइबल में दी गई है (भजन 42:1-2)। हमारी आत्मा केवल उस पोषण से ही तृप्त हो सकती है जो हमें प्रभु यीशु से मिलता है; क्योंकि केवल प्रभु यीशु ही जीवन जल का वह स्त्रोत है जो सबके मनों को तरोताज़ा कर सकता है, नया जीवन प्रदान कर सकता है, अनन्तकाल के लिए सन्तुष्ट कर सकता है। - बिल क्राउडर


प्रभु यीशु सारे संसार के सभी लोगों के लिए सेंत-मेंत उपलब्ध जीवन जल का सोता है।

हे परमेश्वर, तू मेरा ईश्वर है, मैं तुझे यत्न से ढूंढूंगा; सूखी और निर्जल ऊसर भूमि पर, मेरा मन तेरा प्यासा है, मेरा शरीर तेरा अति अभिलाषी है। - भजन 63:1

बाइबल पाठ: भजन 42:1-5
Psalms 42:1 जैसे हरिणी नदी के जल के लिये हांफती है, वैसे ही, हे परमेश्वर, मैं तेरे लिये हांफता हूं। 
Psalms 42:2 जीवते ईश्वर परमेश्वर का मैं प्यासा हूं, मैं कब जा कर परमेश्वर को अपना मुंह दिखाऊंगा? 
Psalms 42:3 मेरे आंसू दिन और रात मेरा आहार हुए हैं; और लोग दिन भर मुझ से कहते रहते हैं, तेरा परमेश्वर कहां है? 
Psalms 42:4 मैं भीड़ के संग जाया करता था, मैं जयजयकार और धन्यवाद के साथ उत्सव करने वाली भीड़ के बीच में परमेश्वर के भवन को धीरे धीरे जाया करता था; यह स्मरण कर के मेरा प्राण शोकित हो जाता है। 
Psalms 42:5 हे मेरे प्राण, तू क्यों गिरा जाता है? और तू अन्दर ही अन्दर क्यों व्याकुल है? परमेश्वर पर आशा लगाए रह; क्योंकि मैं उसके दर्शन से उद्धार पाकर फिर उसका धन्यवाद करूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 30-32
  • 1पतरस 4