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बुधवार, 12 अक्टूबर 2016

शरणस्थान


   मलेशिया के क्लांग शहर के एक चर्च में प्रवेश करते समय, वहाँ बाहर लगे एक स्वागत-चिन्ह ने मेरा ध्यान खींचा; उस पर लिखा था: "बोझ से दबे लोगों के लिए शरणस्थान।"

   प्रभु यीशु मसीह के मन को प्रतिबिंबित करने वाली बातों में से शायद ही कोई और बात इससे बेहतर होगी, यदि प्रभु यीशु मसीह की विश्वासी मण्डली थके हुओं के लिए विश्राम स्थल और उनके बोझों को हलका करने वाली हो। यह प्रभु यीशु की सेवकाई में बहुत महत्वपूर्ण है; प्रभु यीशु ने स्वयं ही कहा है, "हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा" (मत्ती 11:28)।

   प्रभु यीशु ने यह वायदा किया है कि वह हमारे भारी बोझों को लेकर उनके स्थान पर अपना हलका बोझ हमें प्रदान कर देगा: "मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो; और मुझ से सीखो; क्योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूं: और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे। क्योंकि मेरा जूआ सहज और मेरा बोझ हल्का है" (मत्ती 11:29-30)।

   उसके इस वायदे के पीछे उसकी महान सामर्थ है; हमारे बोझ चाहे जैसे भी हों, कितने भी भारी क्यों ना हों, मसीह यीशु में हम परमेश्वर के पुत्र के मज़बूत कंधों का सहारा और सहायता पाते हैं, जो उन बोझों को स्वयं उठा लेता है और उनके स्थान पर अपने कार्य के हलके बोझ को हमें सौंप देता है।

   मसीह यीशु, जिसने हम से अनन्त काल के प्रेम से प्रेम किया है, हमारे संघर्षों को जानता है, और हम भरोसा रख सकते हैं कि वह हमें ऐसा विश्राम प्रदान करेगा जैसा हम अपने प्रयासों से कभी प्राप्त नहीं कर सकते हैं। उसकी सामर्थ हमारी कमज़ोरियों के लिए काफी है, इसी कारण वह सारे संसार के सभी "बोझ से दबे लोगों के लिए शरणस्थान" है। - बिल क्राउडर


परमेश्वर बेचैन लोगों को बुलाता है 
जिससे वे उसमें स्थाई और अनन्तकालीन चैन सेंत-मेंत पाएं।

यहोवा जो तेरा छुड़ाने वाला और इस्राएल का पवित्र है, वह यों कहता है, मैं ही तेरा परमेश्वर यहोवा हूं जो तुझे तेरे लाभ के लिये शिक्षा देता हूं, और जिस मार्ग से तुझे जाना है उसी मार्ग पर तुझे ले चलता हूं। भला होता कि तू ने मेरी आज्ञाओं को ध्यान से सुना होता! तब तेरी शान्ति नदी के समान और तेरा धर्म समुद्र की लहरों के नाईं होता; - यशायाह 48:17-18

बाइबल पाठ: मत्ती 11:25-30
Matthew 11:25 उसी समय यीशु ने कहा, हे पिता, स्वर्ग और पृथ्वी के प्रभु; मैं तेरा धन्यवाद करता हूं, कि तू ने इन बातों को ज्ञानियों और समझदारों से छिपा रखा, और बालकों पर प्रगट किया है। 
Matthew 11:26 हां, हे पिता, क्योंकि तुझे यही अच्छा लगा। 
Matthew 11:27 मेरे पिता ने मुझे सब कुछ सौंपा है, और कोई पुत्र को नहीं जानता, केवल पिता; और कोई पिता को नहीं जानता, केवल पुत्र और वह जिस पर पुत्र उसे प्रगट करना चाहे। 
Matthew 11:28 हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। 
Matthew 11:29 मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो; और मुझ से सीखो; क्योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूं: और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे। 
Matthew 11:30 क्योंकि मेरा जूआ सहज और मेरा बोझ हल्का है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 39-40
  • कुलुस्सियों 4


मंगलवार, 11 अक्टूबर 2016

परिवर्तन


   शिक्षक तथा सर्वाधिक बिकने वाली पुस्तकों के एक लेखक टोनी वैगनर विघटन द्वारा परिवर्तन में दृढ़ विश्वास रखते हैं, जिससे संसार के सोचने और कार्य करने की प्रणाली में परिवर्तन आ सके। अपनी पुस्तक, Creating Innovators: The Making of Young People Who Will Change the World, में वे कहते हैं कि "मनुष्य के प्रत्येक प्रयास के द्वारा परिवर्तन आता है", और, "यदि सही वातावरण और अवसर मिले तो अधिकांश लोग और अधिक रचनात्मक तथा परिवर्तनकारी हो सकते हैं।"

   प्रेरित पौलुस प्रथम शताब्दी में परिवर्तन लाने वाला एक व्यक्ति था जो प्रभु यीशु में लाए गए विश्वास द्वारा जीवन में आने वाले आधारभूत परिवर्तन का प्रचार करता हुआ एशिया माइनर में यात्रा करता रहा। रोम में रहने वाले मसीही विश्वासियों को पौलुस ने लिखा, कि वे अपने आप को पूर्णतः परमेश्वर को समर्पित कर दें, "और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो" (रोमियों 12:2)। पौलुस ने उन्हें सिखाया कि कैसे एक स्वार्थी, लालची और छीन कर ले लेने वाले संसार में वे मसीह यीशु पर केन्द्रित और औरों को देने वाला जीवन व्यतीत कर सकते हैं।

   पौलुस के समय से आज संसार बहुत भिन्न हो गया है, लेकिन संसार के लोगों के अन्दर प्रेम, क्षमा और परिवर्तन की लालसा वैसी ही है। संसार के इतिहास का महानतम परिवर्तनकारी प्रभु यीशु यही सब देता है और उसका संसार के सभी लोगों को खुला निमंत्रण है कि वे उसके पास आएं, और उस पर लाए गए विश्वास द्वारा एक नए और भिन्न परिवर्तित जीवन का अनुभव करें। - डेविड मैक्कैसलैंड


जैसे भी हम हैं, परमेश्वर हमें वैसा ही स्वीकार तो कर लेता है, 
परन्तु फिर वैसा रहने नहीं देता वरन अपनी समानता में ले आता है।

परन्तु जब हम सब के उघाड़े चेहरे से प्रभु का प्रताप इस प्रकार प्रगट होता है, जिस प्रकार दर्पण में, तो प्रभु के द्वारा जो आत्मा है, हम उसी तेजस्‍वी रूप में अंश अंश कर के बदलते जाते हैं। - 2 कुरिन्थियों 3:18

बाइबल पाठ: रोमियों 12:1-8
Romans 12:1 इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान कर के चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है। 
Romans 12:2 और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो। 
Romans 12:3 क्योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूं, कि जैसा समझना चाहिए, उस से बढ़कर कोई भी अपने आप को न समझे पर जैसा परमेश्वर ने हर एक को परिमाण के अनुसार बांट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे। 
Romans 12:4 क्योंकि जैसे हमारी एक देह में बहुत से अंग हैं, और सब अंगों का एक ही सा काम नहीं। 
Romans 12:5 वैसा ही हम जो बहुत हैं, मसीह में एक देह हो कर आपस में एक दूसरे के अंग हैं। 
Romans 12:6 और जब कि उस अनुग्रह के अनुसार जो हमें दिया गया है, हमें भिन्न भिन्न वरदान मिले हैं, तो जिस को भविष्यद्वाणी का दान मिला हो, वह विश्वास के परिमाण के अनुसार भविष्यद्वाणी करे। 
Romans 12:7 यदि सेवा करने का दान मिला हो, तो सेवा में लगा रहे, यदि कोई सिखाने वाला हो, तो सिखाने में लगा रहे। 
Romans 12:8 जो उपदेशक हो, वह उपदेश देने में लगा रहे; दान देने वाला उदारता से दे, जो अगुआई करे, वह उत्साह से करे, जो दया करे, वह हर्ष से करे।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 37-38
  • कुलुस्सियों 3


सोमवार, 10 अक्टूबर 2016

शान्त आज्ञाकारिता


   बचपन में मुझे बहुत पसन्द आने वाला एक खेल था हूला-हूप (कमर पर घुमाने वाला छल्ला) घुमाना, जो अब पुनः लोकप्रीय हो रहा है। मैं और मेरी सहेली घंटों घर के सामने वाले लॉन पर स्पर्धा में लगे रहते थे, यह देखने के लिए कौन उस छल्ले को सबसे अधिक देर तक अपनी कमर पर घुमाता रह सकता है। इस वर्ष मैंने अपने बचपन के उस समय के आनन्द को फिर से अनुभव किया; एक पार्क में बैठे हुए मैं देख रही थी कि सभी उम्र के बच्चे अपनी अपनी कमर पर छल्ले को घुमाने और उसे धरती पर गिरने से बचाए रखने का प्रयास करने में लगे हुए थे। वे अपनी भरसक शक्ति और प्रयत्नों से, अपने शरीर को इधर-उधर झुका कर छल्ले को कमर के आस-पास रखने के प्रयास में लगे हुए थे, परन्तु उनके सभी प्रयासों के बावजूद छल्ला नीचे गिर ही जा रहा था। फिर एक युवती ने एक छल्ला उठाया और बिना अधिक हिले-डुले, शरीर की लयभद्ध हरकत के द्वारा, वह उस छल्ले को अपनी कमर पर घुमाने लगी, उसे ऊपर अपने कंधों तक और फिर वापस कमर पर लाने-लेजाने लगी। उन बच्चों की अपेक्षा, उसकी छल्ले को घुमा पाने की इस सफलता का राज़ उसका वेग से नहीं वरन लय में हिलना-घुमाना था।

   हमारे आत्मिक जीवनों में भी, परमेश्वर की सेवा के लिए हम अनेक प्रकार से अपनी शक्ति व्यय कर सकते हैं, दूसरों के समान और साथ बने रहने के प्रयास करते रह सकते हैं। परन्तु इन प्रयासों में थक कर चूर हो जाना कोई सद्गुण नहीं है (गलतियों 6:9)। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि हज़ारों लोगों को केवल पाँच रोटियों और दो मछलियों से भर पेट भोजन करवाने (मरकुस 6:38-44) से पहले, प्रभु यीशु ने अपने चेलों से कहा था कि वे एकांत में आकर पहले कुछ विश्राम कर लें। इस घटना से हम यह समझ सकते हैं कि प्रभु परमेश्वर को अपने उद्देश्यों एवं कार्यों को हमारे द्वारा पूरा करवाने के लिए उसे हम से हमें थका देने वाले परिश्रम की आवश्यकता नहीं वरन हमारे सहयोग की आवश्यकता है।

   जो तथ्य प्रभु यीशु ने तब अपने उन चेलों को सिखाया था, वह चाहता है कि वही तथ्य आज हम भी सीख लें: जितना हम शान्त रह कर उसकी आज्ञाकारिता के द्वारा कर सकते हैं उतना हम अपने अनेकों अन्धाधुंध प्रयासों से कभी नहीं कर सकते हैं। - जूली ऐकैअरमैन लिंक


प्रभु यीशु हमारी स्वेच्छा तथा सहयोग चाहता है, ना कि हमें थका देना।

प्रभु यहोवा, इस्राएल का पवित्र यों कहता है, लौट आने और शान्त रहने में तुम्हारा उद्धार है; शान्त रहते और भरोसा रखने में तुम्हारी वीरता है। परन्तु तुम ने ऐसा नहीं किया - यशायाह 30:15

बाइबल पाठ: मरकुस 6:34-44
Mark 6:34 उसने निकलकर बड़ी भीड़ देखी, और उन पर तरस खाया, क्योंकि वे उन भेड़ों के समान थे, जिन का कोई रखवाला न हो; और वह उन्हें बहुत सी बातें सिखाने लगा। 
Mark 6:35 जब दिन बहुत ढल गया, तो उसके चेले उसके पास आकर कहने लगे; यह सुनसान जगह है, और दिन बहुत ढल गया है। 
Mark 6:36 उन्हें विदा कर, कि चारों ओर के गांवों और बस्‍तियों में जा कर, अपने लिये कुछ खाने को मोल लें। 
Mark 6:37 उसने उन्हें उत्तर दिया; कि तुम ही उन्हें खाने को दो: उन्हों ने उस से कहा; क्या हम सौ दीनार की रोटियां मोल लें, और उन्हें खिलाएं? 
Mark 6:38 उसने उन से कहा; जा कर देखो तुम्हारे पास कितनी रोटियां हैं? उन्होंने मालूम कर के कहा; पांच और दो मछली भी। 
Mark 6:39 तब उसने उन्हें आज्ञा दी, कि सब को हरी घास पर पांति पांति से बैठा दो। 
Mark 6:40 वे सौ सौ और पचास पचास कर के पांति पांति बैठ गए। 
Mark 6:41 और उसने उन पांच रोटियों को और दो मछिलयों को लिया, और स्वर्ग की ओर देखकर धन्यवाद किया और रोटियां तोड़ तोड़ कर चेलों को देता गया, कि वे लोगों को परोसें, और वे दो मछिलयां भी उन सब में बांट दीं। 
Mark 6:42 और सब खाकर तृप्‍त हो गए। 
Mark 6:43 और उन्होंने टुकडों से बारह टोकिरयां भर कर उठाई, और कुछ मछिलयों से भी। 
Mark 6:44 जिन्हों ने रोटियां खाईं, वे पांच हजार पुरूष थे।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 34-36
  • कुलुस्सियों 2


रविवार, 9 अक्टूबर 2016

उम्मीद


   अपनी पुस्तक God in the Dock (कटघरे में परमेश्वर) में सुप्रसिद्ध मसीही विश्वासी और लेखक सी. एस. ल्युईस ने लिखा: "कलपना कीजिए कि एक इमारत में, जिसमें कई लोग साथ रहते हैं, आधे यह मानते हैं कि वह इमारत के होटल है, और शेष आधे यह मानते हैं कि वह इमारत एक कैदखाना है। जो उसे होटल मानते हैं, उन्हें वह इमारत काफी कष्टदायक और असहनीय लगेगी; और जो उसे कैदखाना मानते हैं उनके लिए वही इमारत आश्चर्यजनक रूप से आरामदेह होगी।" ल्युईस ने बड़ी चतुराई से इस तुलनात्मक स्थिति के द्वारा इस बात को दिखाया है कि कैसे हम अपनी उम्मीद के आधार पर जीवन के प्रति दृष्टिकोण को बनाते हैं। ल्युईस आगे लिखते हैं, "यदि आप इस संसार को एक होटल के रूप में देखते हैं जो आप के सुख-सुविधा और आनन्द उठाने के लिए है, तो आपको यह संसार कष्टदायक एवं असहनीय लगेगा। परन्तु यदि आप इसी संसार को अपने प्रशिक्षण और सुधार का स्थान मान लेते हैं तो यही संसार आपको फिर उतना बुरा भी नहीं लगेगा।"

   अधिकांशतः उम्मीद करी जाती है कि जीवन को आरामदेह, आनन्दपूर्ण और कष्ट-विहीन होना चाहिए। परन्तु परमेश्वर का वचन बाइबल हमें ऐसा नहीं सिखाती है। एक मसीही विश्वासी के लिए संसार आत्मिक विकास एवं उन्नति का स्थान है, अच्छे और बुरे, दोनों ही प्रकार के अनुभवों के द्वारा। प्रभु यीशु मसीह जीवन के प्रति उम्मीद रखने के विषय में यथार्तवादी थे; उन्होंने अपने चेलों से कहा, "मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्‍ति मिले; संसार में तुम्हें क्‍लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीन लिया है" (यूहन्ना 16:33)। प्रभु यीशु में होकर हमको जीवन की आशीषों और कष्टों को झेलने के समय एक भीतरी शान्ति भी रहती है, क्योंकि हम यह जानते हैं कि सब कुछ परमेश्वर के नियंत्रण में है, और जो भी परमेश्वर हमारे साथ होने दे रहा है वह उसकी सार्वभौमिक योजना के अन्तर्गत, अन्ततः हमारी भलाई और उसकी महिमा के लिए ही हो रहा है।

   हमारे जीवनों में प्रभु यीशु की उपस्थिति, कष्ट के समयों में भी हमें प्रसन्नचित बने रहने की सहायता एवं सामर्थ प्रदान करती है। - डेनिस फिशर


कष्ट के समयों में भी प्रभु यीशु में शान्ति प्राप्त होती है।

मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे। - यूहन्ना 14:27

बाइबल पाठ: यूहन्ना 16:25-33
John 16:25 मैं ने ये बातें तुम से दृष्‍टान्‍तों में कही हैं, परन्तु वह समय आता है, कि मैं तुम से दृष्‍टान्‍तों में और फिर नहीं कहूंगा परन्तु खोल कर तुम्हें पिता के विषय में बताऊंगा। 
John 16:26 उस दिन तुम मेरे नाम से मांगोगे, और मैं तुम से यह नहीं कहता, कि मैं तुम्हारे लिये पिता से बिनती करूंगा। 
John 16:27 क्योंकि पिता तो आप ही तुम से प्रीति रखता है, इसलिये कि तुम ने मुझ से प्रीति रखी है, और यह भी प्रतीति की है, कि मैं पिता कि ओर से निकल आया। 
John 16:28 मैं पिता से निकलकर जगत में आया हूं, फिर जगत को छोड़कर पिता के पास जाता हूं। 
John 16:29 उसके चेलों ने कहा, देख, अब तो तू खोल कर कहता है, और कोई दृष्‍टान्‍त नहीं कहता। 
John 16:30 अब हम जान गए, कि तू सब कुछ जानता है, और तुझे प्रयोजन नहीं, कि कोई तुझ से पूछे, इस से हम प्रतीति करते हैं, कि तू परमेश्वर से निकला है। 
John 16:31 यह सुन यीशु ने उन से कहा, क्या तुम अब प्रतीति करते हो? 
John 16:32 देखो, वह घड़ी आती है वरन आ पहुंची कि तुम सब तित्तर बित्तर हो कर अपना अपना मार्ग लोगे, और मुझे अकेला छोड़ दोगे, तौभी मैं अकेला नहीं क्योंकि पिता मेरे साथ है। 
John 16:33 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्‍ति मिले; संसार में तुम्हें क्‍लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीन लिया है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 32-33
  • कुलुस्सियों 1


शनिवार, 8 अक्टूबर 2016

प्रतीक्षा


   चा सा-सून नामक एक 69 वर्षीय कोरियाई महिला ने, 3 वर्ष के सतत प्रयास के पश्चात, ड्राईविंग लाईसेंस पाने की लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करके वह लाईसेंस प्राप्त कर ही लिया। वह अपने नाती-पोतों को चिड़ियाघर घुमाने लेजाना चाहती थी इसीलिए उसे उस लाईसेंस की आवश्यकता थी। सामन्यतः तुरंत परिणाम प्राप्त करने की इच्छा रखने वाले इस संसार में ऐसा धैर्य और सतत प्रयास कम ही देखने को मिलता है। जब हम किसी चीज़ को पाना चाहते हैं, और वह हमें नहीं मिलती, तो हम अकसर कुड़ाकुड़ाते हैं, तथा और भी अधिक अधीरता से उसकी माँग करते हैं; या फिर, यदि वह चीज़ हमें शीघ्रता से उपलब्ध नहीं होती, तो उसे छोड़कर हम आगे बढ़ जाते हैं। "प्रतीक्षा" एक ऐसा शब्द है जिसे हम सुनना कदापि पसन्द नहीं करते हैं।

   लेकिन परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताता है कि परमेश्वर ने अनेकों स्थानों पर, कई बातों के लिए अपने लोगों से चाहा है कि वे उसके सही समय और सही तरीके की प्रतीक्षा करें। परमेश्वर की प्रतीक्षा करने से तात्पर्य है कि अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए धैर्य के साथ परमेश्वर की ओर देखना। दाऊद ने यह समझ लिया था कि उसे प्रभु परमेश्वर की प्रतीक्षा करना क्यों ज़रूरी है: क्योंकि उसका उद्धार परमेश्वर से था (भजन 62:1); उसे कोई और छुड़ा नहीं सकता था। उसकी सारी आशा केवल परमेश्वर से ही थी (पद 5), क्योंकि केवल परमेश्वर ही है जो प्रार्थनाओं को सुनता है (पद 8)।

   हमारी प्रार्थनाओं में अकसर यह मांग रहती है कि परमेश्वर शीघ्रता से हमारी प्रार्थना सुने, तुरंत ही वैसा कर दे और जो भी हम चाह रहे हैं उस पर आशीष दे। दाऊद के समान ही हम भी प्रार्थना कर सकते हैं: "हे यहोवा, भोर को मेरी वाणी तुझे सुनाई देगी, मैं भोर को प्रार्थना कर के तेरी बाट जोहूंगा" (भजन 5:3)। लेकिन क्या हमने रुक कर कभी यह सोचा है कि यदि परमेश्वर की ओर से हमारी प्रार्थना का उत्तर हो, "धैर्य रखो; मेरी प्रतीक्षा करो" तो हम क्या कहेंगे या करेंगे?

   हम मसीही विश्वासियों को चाहिए कि प्रत्येक बात के लिए हम परमेश्वर के उत्तर की प्रतीक्षा करने वाले बनें, चाहे वह उत्तर हमारे समयानुसार ना भी आए; क्योंकि परमेश्वर के समय और तरीके से मिलने वाला प्रत्येक उत्तर हमारे लिए सर्वोत्तम ही होगा। - सी० पी० हिया


परमेश्वर से करी गई हमारी प्रत्येक प्रार्थना का 
अन्तिम वाक्य होना चाहिए, "आपकी इच्छा ही पूरी हो"।

परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों की नाईं उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे। - यशायाह 40:31

बाइबल पाठ: भजन 62:1-12
Psalms 62:1 सचमुच मैं चुपचाप हो कर परमेरश्वर की ओर मन लगाए हूं; मेरा उद्धार उसी से होता है। 
Psalms 62:2 सचमुच वही, मेरी चट्टान और मेरा उद्धार है, वह मेरा गढ़ है; मैं बहुत न डिगूंगा।
Psalms 62:3 तुम कब तक एक पुरूष पर धावा करते रहोगे, कि सब मिलकर उसका घात करो? वह तो झुकी हुई भीत वा गिरते हुए बाड़े के समान है। 
Psalms 62:4 सचमुच वे उसको, उसके ऊंचे पद से गिराने की सम्मति करते हैं; वे झूठ से प्रसन्न रहते हैं। मुंह से तो वे आशीर्वाद देते पर मन में कोसते हैं।
Psalms 62:5 हे मेरे मन, परमेश्वर के साम्हने चुपचाप रह, क्योंकि मेरी आशा उसी से है। 
Psalms 62:6 सचमुच वही मेरी चट्टान, और मेरा उद्धार है, वह मेरा गढ़ है; इसलिये मैं न डिगूंगा। 
Psalms 62:7 मेरा उद्धार और मेरी महिमा का आधार परमेश्वर है; मेरी दृढ़ चट्टान, और मेरा शरणस्थान परमेश्वर है। 
Psalms 62:8 हे लोगो, हर समय उस पर भरोसा रखो; उस से अपने अपने मन की बातें खोल कर कहो; परमेश्वर हमारा शरणस्थान है। 
Psalms 62:9 सचमुच नीच लोग तो अस्थाई, और बड़े लोग मिथ्या ही हैं; तौल में वे हलके निकलते हैं; वे सब के सब सांस से भी हलके हैं। 
Psalms 62:10 अन्धेर करने पर भरोसा मत रखो, और लूट पाट करने पर मत फूलो; चाहे धन सम्पति बढ़े, तौभी उस पर मन न लगाना।
Psalms 62:11 परमेश्वर ने एक बार कहा है; और दो बार मैं ने यह सुना है: कि सामर्थ्य परमेश्वर का है। 
Psalms 62:12 और हे प्रभु, करूणा भी तेरी है। क्योंकि तू एक एक जन को उसके काम के अनुसार फल देता है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 30-31
  • फिलिप्पियों 4


शुक्रवार, 7 अक्टूबर 2016

प्रमाण


   महारानी एलिज़बेथ द्वितीय ब्रिटिश सामराज्य पर 60 वर्ष से भी अधिक समय से राज्य कर रही हैं। उनके शासन का यह समय शालीनता और उच्च कोटि के राजकीय व्यवहार का समय रहा है। उन्होंने अपने जीवन को अपने लोगों की अच्छी सेवा करते रहने के लिए समर्पित किया है, और परिणामस्वरूप उनकी प्रजा उन से बहुत प्रेम करती है, उनका बहुत आदर करती है। इसलिए आप उनके राजमहल, बकिंघम पैलेस के ऊपर फैहराने वाले झण्डे के महत्व को समझ सकते हैं। जब वह झण्डा फहरा रहा होता है तो यह संकेत है कि वे लंदन के मध्य में स्थित अपने महल में हैं; महारानी अपने लोगों के साथ मौजूद हैं।

   जब मैं इसके बारे में सोच रहा था, तो मुझे ध्यान आया कि मसीह यीशु भी हम मसीही विश्वासियों के हृदयों में निवास करता है, और उसका वायदा है कि वह हमें छोड़कर कभी नहीं जाएगा, सदा हमारे साथ बना रहेगा (इब्रानियों 13:5)। यह बात हम सब के लिए व्यक्तिगत रीति से महत्वपूर्ण और अद्भुत तो है, परन्तु क्या हमारे आस-पास के लोग हमारे चाल-चलन और व्यवहार से कभी यह जानने पाते हैं कि मसीह यीशु हमारे साथ, हमारे अन्दर निवास करता है? यदि वह हमारे अन्दर है तो फिर उसकी यह उपस्थिति हमारे जीवन द्वारा बाहर भी प्रकट होनी चाहिए।

   इसके लिए जैसा परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने कहा है, हमें परमेश्वर का अनुकरण करने वाला, और जैसे मसीह यीशु ने हम से प्रेम किया है वैसे ही हमें भी औरों के साथ प्रेम करने वाला होना चाहिए (इफिसियों 5:1-2)। जब हम ऐसा करेंगे तो हम उन आत्मा के फलों को भी प्रकट करेंगे जो परमेश्वर पवित्र आत्मा की हमारे अन्दर उपस्थिति से हम में उत्पन्न होते हैं (गलतियों 5:22-23)। इसलिए आईए हम प्रभु परमेश्वर की हमारे अन्दर रहने वाली उपस्थिति के झण्डे - उसके अनुग्रह, धार्मिकता और प्रेम के प्रदर्शन, को बुलन्द करें जिससे औरों के सामने हमारे अन्दर उसकी उपस्थिति का प्रमाण स्पष्ट प्रकट हो। - जो स्टोवैल


मसीह यीशु की उपस्थिति के झण्डे को अपने जीवनों में फहराएं,
 ताकि लोग जान सकें कि महाराजा अपने सिंहासन पर विराजमान है।

पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज, और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई भी व्यवस्था नहीं। - गलतियों 5:22-23

बाइबल पाठ: इफिसियों 5:1-13
Ephesians 5:1 इसलिये प्रिय, बालकों की नाईं परमेश्वर के सदृश बनो। 
Ephesians 5:2 और प्रेम में चलो; जैसे मसीह ने भी तुम से प्रेम किया; और हमारे लिये अपने आप को सुखदायक सुगन्‍ध के लिये परमेश्वर के आगे भेंट कर के बलिदान कर दिया। 
Ephesians 5:3 और जैसा पवित्र लोगों के योग्य है, वैसा तुम में व्यभिचार, और किसी प्रकार अशुद्ध काम, या लोभ की चर्चा तक न हो। 
Ephesians 5:4 और न निर्लज्ज़ता, न मूढ़ता की बातचीत की, न ठट्ठे की, क्योंकि ये बातें सोहती नहीं, वरन धन्यवाद ही सुना जाएं। 
Ephesians 5:5 क्योंकि तुम यह जानते हो, कि किसी व्यभिचारी, या अशुद्ध जन, या लोभी मनुष्य की, जो मूरत पूजने वाले के बराबर है, मसीह और परमेश्वर के राज्य में मीरास नहीं। 
Ephesians 5:6 कोई तुम्हें व्यर्थ बातों से धोखा न दे; क्योंकि इन ही कामों के कारण परमेश्वर का क्रोध आज्ञा ना मानने वालों पर भड़कता है। 
Ephesians 5:7 इसलिये तुम उन के सहभागी न हो। 
Ephesians 5:8 क्योंकि तुम तो पहले अन्धकार थे परन्तु अब प्रभु में ज्योति हो, सो ज्योति की सन्तान की नाईं चलो। 
Ephesians 5:9 (क्योंकि ज्योति का फल सब प्रकार की भलाई, और धामिर्कता, और सत्य है)। 
Ephesians 5:10 और यह परखो, कि प्रभु को क्या भाता है 
Ephesians 5:11 और अन्धकार के निष्‍फल कामों में सहभागी न हो, वरन उन पर उलाहना दो। 
Ephesians 5:12 क्योंकि उन के गुप्‍त कामों की चर्चा भी लाज की बात है। 
Ephesians 5:13 पर जितने कामों पर उलाहना दिया जाता है वे सब ज्योति से प्रगट होते हैं, क्योंकि जो सब कुछ को प्रगट करता है, वह ज्योति है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 28-29
  • फिलिप्पियों 3


गुरुवार, 6 अक्टूबर 2016

सहायक


   मेरे पिता का बचपन एक फार्म पर बीता, जहाँ उन्हें सौंपा गया कार्य था एकत्रित करे गए बचे हुए भोजन और झूठन को सूअरों को डालना। उन्हें यह कार्य बहुत नापसन्द था क्योंकि उनके बाड़े में झूठन लिए हुए घुसते ही सारे सूअर वह खाना खाने के लिए उनकी ओर आते और धक्का-मुक्की करने लगते जिससे मेरे पिता के उनके बीच में गिर जाने का खतरा रहता था। उनके लिए यह कार्य असंभव हो जाता यदि उनके साथ सूअरों के बाड़े में जाने के लिए एक वफादार सहायक ना होता; उनकी सहायक जर्मन शेपर्ड जाति की एक बड़ी सी कुतिया थी जो उनके साथ जाया करती थी और अपने आप को सूअरों और पिताजी के बीच में बनाए रखती थी, जब तक की पिताजी अपना कार्य पूरा करके बाड़े और खतरे से बाहर नहीं आ जाते थे।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में परमेश्वर के एक भविश्यद्वक्ता, यिर्मयाह को भी इस्त्राएलियों को परमेश्वर का वचन पहुंचाने का कठिन कार्य सौंपा गया था। इस ज़िम्मेदारी को पूरा करने के लिए यिर्मयाह को शारीरिक यात्नाएं, निन्दा और बुराई, कैद होना और सबसे अलग किए जा के ’कालापनी’ की सज़ा सहना पड़ा। यिर्मयाह को गहरी निराशा के साथ संघर्ष भी करना पड़ा (यिर्मयाह 20:7), लेकिन यिर्मयाह ने यह भी माना कि इस सारे संघर्ष में परमेश्वर उसका सहायक बनकर सदा साथ बना रहा (यिर्मयाह 20:11), जैसा कि परमेश्वर ने यह ज़िम्मेदारी देते समय उससे वायदा किया था: "वे तुझ से लड़ेंगे तो सही, परन्तु तुझ पर प्रबल न होंगे, क्योंकि बचाने के लिये मैं तेरे साथ हूँ, यहोवा की यही वाणी है" (यिर्मयाह 1:19)।

   परमेश्वर अपने वायदे पर अडिग रहा और यिर्मयाह को कभी अकेला या निःसहाय नहीं होने दिया। परमेश्वर का हम मसीही विश्वासियों से भी ऐसा ही वायदा है कि वह हमें कभी नहीं छोड़ेगा, कभी नहीं त्यागेगा (इब्रनियों 13:5)। हमारी सहायता के लिए परमेश्वर ने अपने पवित्र आत्मा को हमें दिया है जो प्रत्येक मसीही विश्वासी के अन्दर निवास करता है: "और मैं पिता से बिनती करूंगा, और वह तुम्हें एक और सहायक देगा, कि वह सर्वदा तुम्हारे साथ रहे। अर्थात सत्य का आत्मा, जिसे संसार ग्रहण नहीं कर सकता, क्योंकि वह न उसे देखता है और न उसे जानता है: तुम उसे जानते हो, क्योंकि वह तुम्हारे साथ रहता है, और वह तुम में होगा" (यूहन्ना 14:16-17)। हमारा यह सहायक हमें आशा देता है (रोमियों 15:13); हमें आत्मिक सत्यों की ओर ले जाता है (यूहन्ना 16:13) और हमारे हृदयों में परमेश्वर का प्रेम उंडेलता है (रोमियों 5:5)।

   हम विश्वास रख सकते हैं कि परमेश्वर हर कठिनाई में हमारी सहायता करता है जिससे कि हम उस परिस्थिति को झेल सकें और यिर्मयाह के समान ही हम भी कह सकें, "परन्तु यहोवा मेरे साथ है, वह भयंकर वीर के समान है; इस कारण मेरे सताने वाले प्रबल न होंगे, वे ठोकर खाकर गिरेंगे। वे बुद्धि से काम नहीं करते, इसलिये उन्हें बहुत लज्जित होना पड़ेगा। उनका अपमान सदैव बना रहेगा और कभी भूला न जाएगा" (यिर्मयाह 20:11)। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


यहां नीचे इस धरती पर हमारी सबसे बड़ी आशा ऊपर हमारे परमेश्वर पिता से है।

परन्तु जब वह अर्थात सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा, क्योंकि वह अपनी ओर से न कहेगा, परन्तु जो कुछ सुनेगा, वही कहेगा, और आनेवाली बातें तुम्हें बताएगा। - यूहन्ना 16:13 

बाइबल पाठ: यिर्मयाह 20:7-13
Jeremiah 20:7 हे यहोवा, तू ने मुझे धोखा दिया, और मैं ने धोखा खाया; तू मुझ से बलवन्त है, इस कारण तू मुझ पर प्रबल हो गया। दिन भर मेरी हंसी होती है; सब कोई मुझ से ठट्ठा करते हैं। 
Jeremiah 20:8 क्योंकि जब मैं बातें करता हूँ, तब मैं जोर से पुकार पुकारकर ललकारता हूँ कि उपद्रव और उत्पात हुआ, हां उत्पात! क्योंकि यहोवा का वचन दिन भर मेरे लिये निन्दा और ठट्ठा का कारण होता रहता है। 
Jeremiah 20:9 यदि मैं कहूं, मैं उसकी चर्चा न करूंगा न उसके नाम से बोलूंगा, तो मेरे हृदय की ऐसी दशा होगी मानो मेरी हड्डियों में धधकती हुई आग हो, और मैं अपने को रोकते रोकते थक गया पर मुझ से रहा नहीं जाता। 
Jeremiah 20:10 मैं ने बहुतों के मुंह से अपना अपवाद सुना है। चारों ओर भय ही भय है! मेरी जान पहचान के सब जो मेरे ठोकर खाने की बाट जोहते हैं, वे कहते हैं, उसके दोष बताओ, तब हम उनकी चर्चा फैला देंगे। कदाचित वह धोखा खाए, तो हम उस पर प्रबल हो कर, उस से बदला लेंगे। 
Jeremiah 20:11 परन्तु यहोवा मेरे साथ है, वह भयंकर वीर के समान है; इस कारण मेरे सताने वाले प्रबल न होंगे, वे ठोकर खाकर गिरेंगे। वे बुद्धि से काम नहीं करते, इसलिये उन्हें बहुत लज्जित होना पड़ेगा। उनका अपमान सदैव बना रहेगा और कभी भूला न जाएगा। 
Jeremiah 20:12 हे सेनाओं के यहोवा, हे धर्मियों के परखने वाले और हृदय और मन के ज्ञाता, जो बदला तू उन से लेगा, उसे मैं देखूं, क्योंकि मैं ने अपना मुक़द्दमा तेरे ऊपर छोड़ दिया है। 
Jeremiah 20:13 यहोवा के लिये गाओ; यहोवा की स्तुति करो! क्योंकि वह दरिद्र जन के प्राण को कुकमिर्यों के हाथ से बचाता है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 26-27
  • फिलिप्पियों 2