ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2017

बढ़ोतरी


   चीन में मुहावरों का प्रयोग आम बात है, और उनके मुहावरों के पीछे बहुधा कुछ नीति-कथाएं होती हैं। ऐसा ही एक मुहावरा "बढ़ने के लिए फसल को खींचना" सौंग राजवंश के शासन काल के समय के एक किसान से संबंधित है। वह किसान बहुत आतुर था कि चावल के पौधों की उसकी फसल तेज़ी से बढ़े; इसके लिए उसे एक उपाय सूझा - वह पौधों को थोड़ा सा खींचकर उन्हें लंबा कर देगा। दिन भर ऐसा करने के बाद उस किसान ने अपने चावल के खेत पर दृष्टि की, और देखकर प्रसन्न हुआ कि उसके खेत के पौधे पहले से कुछ बढ़े हुए दिखाई दे रहे थे। लेकिन उसका यह आनन्द थोड़े ही समय का था; क्योंकि अगले ही दिन उसने देखा कि सारे पौधे मुर्झा गए हैं, क्योंकि उसके कार्य से उनकी जड़ों को क्षति पहुँची थी।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में तिमुथियुस को लिखी अपनी पत्री में प्रभु यीशु में मिलने वाले उद्धार के सुसमाचार के प्रचार का कार्य करने वाले सेवक को किसान के समान बताया है। पौलुस ने तिमुथियुस को प्रोत्साहित करने के लिए लिखा कि खेती के समान, प्रभु यीशु के चेले बनाना एक लगातार चलते रहने वाला कठिन मेहनत का कार्य है। किसान के समान ही सेवक भी लोगों के जीवनों में हल जोतता है, परमेश्वर के वचन के बीज बोता है, उन बीजों के अंकुरित होने की प्रतीक्षा करता है, उनके लिए प्रार्थना करता है। हम सभी चाहते हैं कि हमारे परिश्रम का फल भी शीघ्र दिखाई दे, परन्तु बढ़ोतरी समय लेती है। और जैसा उपरोक्त चीनी मुहावरे की कहानी सिखाती है, उस बढ़ोतरी में तेज़ी लाने के प्रयास बहुधा लाभदायक नहीं वरन नुकसानदेह ही होते हैं। बाइबल टीकाकार विलियम हैंड्रिकसन ने लिखा: "यदि तिमुथियुस...परमेश्वर द्वारा उसे दिए गए कार्य को अच्छे से करने के लिए पूरा-पूरा प्रयास करेगा...तो वह दूसरों के जीवनों में उसे...उन महिमामय फलों का आरंभ दिखेगा जिनका उल्लेख गलतियों 5:22-23 में है।"

   जब हम विश्वासयोग्यता के साथ परिश्रम करते हैं, धीरज के साथ प्रभु परमेश्वर के समय की प्रतीक्षा करते हैं, तो परमेश्वर से मिलने वाली बढ़ोतरी और फल भी देखने पाते हैं। - पोह पैंग चिया


खेत जोतना तथा बीज बोना हमारा कार्य है;
उस परिश्रम से फसल उत्पन्न करना परमेश्वर का।

पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज, और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई भी व्यवस्था नहीं। - गलतियों 5:22-23

बाइबल पाठ: 2 तिमुथियुस 2:1-6; 1 कुरिन्थियों 3:5-9
2 Timothy 2:1 इसलिये हे मेरे पुत्र, तू उस अनुग्रह से जो मसीह यीशु में है, बलवन्‍त हो जा। 
2 Timothy 2:2 और जो बातें तू ने बहुत गवाहों के साम्हने मुझ से सुनी हैं, उन्हें विश्वासी मनुष्यों को सौंप दे; जो औरों को भी सिखाने के योग्य हों। 
2 Timothy 2:3 मसीह यीशु के अच्‍छे योद्धा की नाईं मेरे साथ दुख उठा। 
2 Timothy 2:4 जब कोई योद्धा लड़ाई पर जाता है, तो इसलिये कि अपने भरती करने वाले को प्रसन्न करे, अपने आप को संसार के कामों में नहीं फंसाता 
2 Timothy 2:5 फिर अखाड़े में लड़ने वाला यदि विधि के अनुसार न लड़े तो मुकुट नहीं पाता। 
2 Timothy 2:6 जो गृहस्थ परिश्रम करता है, फल का अंश पहिले उसे मिलना चाहिए।

1 Corinthians 3:5 अपुल्लोस क्या है? और पौलुस क्या है? केवल सेवक, जिन के द्वारा तुम ने विश्वास किया, जैसा हर एक को प्रभु ने दिया। 
1 Corinthians 3:6 मैं ने लगाया, अपुल्लोस ने सींचा, परन्तु परमेश्वर ने बढ़ाया। 
1 Corinthians 3:7 इसलिये न तो लगाने वाला कुछ है, और न सींचने वाला, परन्तु परमेश्वर जो बढ़ाने वाला है। 
1 Corinthians 3:8 लगाने वाला और सींचने वाला दानों एक हैं; परन्तु हर एक व्यक्ति अपने ही परिश्रम के अनुसार अपनी ही मजदूरी पाएगा। 
1 Corinthians 3:9 क्योंकि हम परमेश्वर के सहकर्मी हैं; तुम परमेश्वर की खेती और परमेश्वर की रचना हो।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 31-33
  • मत्ती 22:1-22


गुरुवार, 2 फ़रवरी 2017

धन्यवादी


   ड्यूक यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के एक सुविख्यात शोधकर्ता के अनुसार, "यदि धन्यवादी होना कोई दवा होती तो हमारे शरीरों के प्रत्येक अंग पर भला प्रभाव डालने की क्षमता रखने के कारण वह संसार में सबसे अधिक बिकने वाली दवा बन जाती।"

   कुछ लोगों के लिए धन्यवादी होने का अर्थ होता है कि अपने विचारों को उन वस्तुओं पर केंद्रित करके उलझे रहने की बजाए जो हमारे पास नहीं हैं, जो हमारे पास हैं उन पर ध्यान केंद्रित कर के उनके लिए कृतज्ञ रहने के भाव के साथ जीवन व्यतीत करना। लेकिन परमेश्वर का वचन बाइबल हमें धन्यवादी होने के इससे भी अधिक गहरे अर्थ को समझाती है। हमारा धन्यवादी होना हमारा ध्यान वहाँ लेकर जाता है जो हमारी हर आशीष का स्त्रोत है (याकूब 1:17)।

   बाइबल में अनेकों भजनों का लिखने वाला, राजा दाऊद जानता था कि वाचा के सन्दूक को सुरक्षित यरूशलेम पहुँचाने वाला वह नहीं वरन परमेश्वर था (1 इतिहास 15:26)। इसलिए उसने इस घटना को लेकर परमेश्वर के लिए धन्यवाद का भजन लिखा जो केवल कार्य सफलतापूर्वक होने के कारण आनन्दित होने पर नहीं परन्तु परमेश्वर के गुणों पर आधारित है। इस भजन के आरंभिक भाग में दाऊद कहता है: "यहोवा का धन्यवाद करो, उस से प्रार्थना करो; देश देश में उसके कामों का प्रचार करो" (1 इतिहास 16:8)। इससे आगे दाऊद का यह भजन परमेश्वर की महानता में आनन्दित होने, उसके द्वारा प्रदान किए जाने वाले उद्धार, सृष्टि करने की उसकी सामर्थ और मनुष्यों के प्रति उसकी करुणा को प्रमुख करता है (पद 25-36)।

   आज हम हमें मिलने वाले उपहारों पर ध्यान केंद्रित करने की बजाए उन्हें देने वाले की आराधना और महिमा करने के द्वारा वास्तव में उसके धन्यवादी हो सकते हैं। हमारे जीवन की अच्छी बातों पर ध्यान लगाना हमारे शरीरों के लिए लाभकारी हो सकता है, परन्तु परमेश्वर पर ध्यान लगाना और सदा उसके प्रति धन्यवादी रहना हमारे प्राण-देह-आत्मा के लिए लाभकारी होता है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


सच्चा धन्यवादी मन देने वाले को महत्व देता है ना कि उससे मिलने वाले उपहारों को।

क्योंकि हर एक अच्छा वरदान और हर एक उत्तम दान ऊपर ही से है, और ज्योतियों के पिता की ओर से मिलता है, जिस में न तो कोई परिवर्तन हो सकता है, ओर न अदल बदल के कारण उस पर छाया पड़ती है। - याकूब 1:17

बाइबल पाठ: 1 इतिहास 16:7-14
1 Chronicles 16:7 तब उसी दिन दाऊद ने यहोवा का धन्यवाद करने का काम आसाप और उसके भाइयों को सौंप दिया। 
1 Chronicles 16:8 यहोवा का धन्यवाद करो, उस से प्रार्थना करो; देश देश में उसके कामों का प्रचार करो। 
1 Chronicles 16:9 उसका गीत गाओ, उसका भजन करो, उसके सब आश्चर्य-कर्मों का ध्यान करो। 
1 Chronicles 16:10 उसके पवित्र नाम पर घमंड करो; यहोवा के खोजियों का हृदय आनन्दित हो। 
1 Chronicles 16:11 यहोवा और उसकी सामर्थ की खोज करो; उसके दर्शन के लिये लगातार खोज करो। 
1 Chronicles 16:12 उसके किए हुए आश्चर्यकर्म, उसके चमत्कार और न्यायवचन स्मरण करो। 
1 Chronicles 16:13 हे उसके दास इस्राएल के वंश, हे याकूब की सन्तान तुम जो उसके चुने हुए हो! 
1 Chronicles 16:14 वही हमारा परमेश्वर यहोवा है, उसके न्याय के काम पृथ्वी भर में होते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 29-30
  • मत्ती 21:23-46


बुधवार, 1 फ़रवरी 2017

एक साथ


   मेरी पत्नी जैनेट ने मेरे 65वें जन्मदिन के उपल्क्ष में मेरे लिए एक नया ड्रैडनॉट डी-35 गिटार खरीदा। इस गिटार को इसके मूल रूप में 1900 के आरंभ में विकसित किया गया था। उस समय में बनाए गए गिटारों से ड्रैडनॉट कुछ अधिक बड़ा होता है, और अपनी भारी तथा ऊँची आवाज़ के लिए जाना जाता है। इसका नाम प्रथम विश्वयुद्ध में काम देने वाले विशाल युद्धपोत एच.एम.एस. ड्रैडनॉट के नाम पर पड़ा था। डी-35 का पिछला भाग अनुपम है। उच्च गुणवंता की रोज़वुड लकड़ी की चौड़ी तख़्तियों की कमी होने के कारण कारिगरों ने इसे तीन पतली तख़्तियों को एक साथ जोड़कर बनाया, जिससे इससे निकलने वाली ध्वनि और भी बेहतर हो गई।

   परमेश्वर की कारीगरी भी इस गिटार की कारीगरी के समान है। प्रभु यीशु हम बिखरे हुए मनुष्यों को एक साथ जोड़कर ऐसा बना देता है जिससे हम सामूहिक रूप से उसकी महिमा का कारण हो जाते हैं। यदि हम प्रभु यीशु की इस पृथ्वी की सेवकाई के दिनों में उनके चेलों की पृष्ठभूमि को देखें तो पाएंगे कि प्रभु ने चुँगी लेने वालों, यहूदी क्रांतिकारियों और मछुआरों को लेकर अपने चेलों का समूह बनाया, जिन्होंने फिर सारे संसार में प्रभु यीशु में लाए गए विश्वास के द्वारा मिलने वाली पापों की क्षमा और सेंत-मेंत उद्धार का सुसमाचार फैला दिया। तब से लेकर आज तक भी प्रभु जीवन के हर क्षेत्र से अपने लिए लोगों को बुलाता आ रहा है, उन्हें एक साथ एक देह - उसकी जीवित मण्डली में जोड़कर उनसे अपनी महिमा और सेवा लेता आ रहा है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने लिखा, "जिस से सारी देह हर एक जोड़ की सहायता से एक साथ मिलकर, और एक साथ गठकर उस प्रभाव के अनुसार जो हर एक भाग के परिमाण से उस में होता है, अपने आप को बढ़ाती है, कि वह प्रेम में उन्नति करती जाए" (इफिसियों 4:16)।

   हमारे स्वामी के हाथों में अनेकों प्रकार के लोग एक साथ जुड़कर परमेश्वर की महिमा और आराधना का स्त्रोत बनकर उसकी और अन्य लोगों की सेवा में कार्य करने लग जाते हैं। विभिन्न पृष्ठभूमियों से आए मसीही विश्वासियों का एक साथ जुड़कर परमेश्वर की महिमा का माध्यम बन जाना परमेश्वर की अद्भुत कारिगरी का उदहारण है। - डेनिस फिशर


जितना हम अकेले रहकर नहीं कर सकते, 
उससे कहीं अधिक हम एक साथ जुड़ जाने से कर पाते हैं।

क्योंकि हम उसके बनाए हुए हैं; और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्हें परमेश्वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया। - इफिसियों 2:10

बाइबल पाठ: इफिसियों 4:1-16
Ephesians 4:1 सो मैं जो प्रभु में बन्‍धुआ हूं तुम से बिनती करता हूं, कि जिस बुलाहट से तुम बुलाए गए थे, उसके योग्य चाल चलो। 
Ephesians 4:2 अर्थात सारी दीनता और नम्रता सहित, और धीरज धरकर प्रेम से एक दूसरे की सह लो। 
Ephesians 4:3 और मेल के बन्ध में आत्मा की एकता रखने का यत्‍न करो। 
Ephesians 4:4 एक ही देह है, और एक ही आत्मा; जैसे तुम्हें जो बुलाए गए थे अपने बुलाए जाने से एक ही आशा है। 
Ephesians 4:5 एक ही प्रभु है, एक ही विश्वास, एक ही बपतिस्मा। 
Ephesians 4:6 और सब का एक ही परमेश्वर और पिता है, जो सब के ऊपर और सब के मध्य में, और सब में है।
Ephesians 4:7 पर हम में से हर एक को मसीह के दान के परिमाण से अनुग्रह मिला है। 
Ephesians 4:8 इसलिये वह कहता है, कि वह ऊंचे पर चढ़ा, और बन्‍धुवाई को बान्‍ध ले गया, और मनुष्यों को दान दिए। 
Ephesians 4:9 (उसके चढ़ने से, और क्या पाया जाता है केवल यह, कि वह पृथ्वी की निचली जगहों में उतरा भी था। 
Ephesians 4:10 और जो उतर गया यह वही है जो सारे आकाश से ऊपर चढ़ भी गया, कि सब कुछ परिपूर्ण करे)। 
Ephesians 4:11 और उसने कितनों को भविष्यद्वक्ता नियुक्त कर के, और कितनों को सुसमाचार सुनाने वाले नियुक्त कर के, और कितनों को रखवाले और उपदेशक नियुक्त कर के दे दिया। 
Ephesians 4:12 जिस से पवित्र लोग सिद्ध हों जाएं, और सेवा का काम किया जाए, और मसीह की देह उन्नति पाए। 
Ephesians 4:13 जब तक कि हम सब के सब विश्वास, और परमेश्वर के पुत्र की पहिचान में एक न हो जाएं, और एक सिद्ध मनुष्य न बन जाएं और मसीह के पूरे डील डौल तक न बढ़ जाएं। 
Ephesians 4:14 ताकि हम आगे को बालक न रहें, जो मनुष्यों की ठग-विद्या और चतुराई से उन के भ्रम की युक्तियों की, और उपदेश की, हर एक बयार से उछाले, और इधर-उधर घुमाए जाते हों। 
Ephesians 4:15 वरन प्रेम में सच्चाई से चलते हुए, सब बातों में उस में जो सिर है, अर्थात मसीह में बढ़ते जाएं। 
Ephesians 4:16 जिस से सारी देह हर एक जोड़ की सहायता से एक साथ मिलकर, और एक साथ गठकर उस प्रभाव के अनुसार जो हर एक भाग के परिमाण से उस में होता है, अपने आप को बढ़ाती है, कि वह प्रेम में उन्नति करती जाए।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 27-28
  • मत्ती 21:1-22


मंगलवार, 31 जनवरी 2017

द्वार


   ट्रेन चलने को थी; ट्रेन के बन्द होते द्वारों की सूचक ध्वनि बजनी आरंभ हो गई थी। लेकिन फिर भी विलंब से आने वाले कुछ लोग भागकर ट्रेन में चढ़ने का प्रयास करने लगे; उनमें से एक के ऊपर द्वार बन्द भी हुआ, परन्तु उससे टकराकर द्वार फिर से खुल गया, और वह यात्री सुरक्षित ट्रेन के अन्दर आ गया। मैं सोचने लगा कि लोग इतना जोखिम क्यों उठाते हैं जब कि इस से अगली ट्रेन मात्र 4 मिनट में आने वाली थी।

   लेकिन एक द्वार है जो कभी भी, बिना किसी चेतावनी के, सदा के लिए बन्द हो जाएगा और किसी के लिए किसी भी परिस्थिति में फिर कभी नहीं खुलेगा - परमेश्वर के अनुग्रह का द्वार। समस्त मानव जाति को उनके पापों की क्षमा प्रदान करने तथा उन्हें सेंत-मेंत उद्धार का मार्ग देने के लिए परमेश्वर ने प्रभु यीशु मसीह को संसार में भेजा और उन्होंने यह कार्य पूरा करके आज सबके लिए यह मार्ग तैयार करके दे दिया है। अब इसे स्वीकार करना और इसपर अग्रसर होना यह प्रत्येक व्यक्ति का अपना निर्णय है; लेकिन परमेश्वर के इस अनुग्रह का द्वार आज सब के लिए खुला है, उसका निमंत्रण सबके लिए है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने लिखा है, "...देखो, अभी वह प्रसन्नता का समय है; देखो, अभी उद्धार का दिन है" (2 कुरिन्थियों 6:2)।

   प्रभु यीशु मसीह ने यह भी बताया कि उनके दूसरे आगमन और अनुग्रह के द्वार के बन्द होने से पहले क्या चिन्ह होंगे (मत्ती 24); और आज हम अपनी आँखों के सामने उन बातों को पूरा होते देख रहे हैं, जो इस द्वार के बन्द होने का समय पूरा होने के सूचक हैं। इसलिए यह निश्चित है कि अनुग्रह का यह समय कभी भी पूरा हो जाएगा, द्वार बन्द हो जाएगा, और संसार अपने न्याय के लिए खड़ा किया जाएगा। जिन्होंने प्रभु यीशु मसीह में विश्वास किया और उससे अपने पापों की क्षमा माँगकर अपना जीवन उसे समर्पित किया है, उन्हें प्रभु यीशु कहेगा, "तब राजा अपनी दाहिनी ओर वालों से कहेगा, हे मेरे पिता के धन्य लोगों, आओ, उस राज्य के अधिकारी हो जाओ, जो जगत के आदि से तुम्हारे लिये तैयार किया हुआ है" (मत्ती 25:34), परन्तु शेष सभी उसके पास से अनन्त विनाश में चले जाएंगे, "तब वह बाईं ओर वालों से कहेगा, हे श्रापित लोगो, मेरे साम्हने से उस अनन्त आग में चले जाओ, जो शैतान और उसके दूतों के लिये तैयार की गई है" (मत्ती 25:41)।

   प्रभु यीशु मसीह के निमंत्रण और कार्य के प्रति हमारा प्रत्युत्तर हमारे अनन्तकाल को निर्धारित करता है। प्रभु यीशु ने कहा: "द्वार मैं हूं: यदि कोई मेरे द्वारा भीतर प्रवेश करे तो उद्धार पाएगा और भीतर बाहर आया जाया करेगा और चारा पाएगा" (यूहन्ना 10:9); तथा, "यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता" (यूहन्ना 14:6); और उसका यह निमंत्रण आज आपके लिए खुला है। इससे पहले कि द्वार सदा के लिए बन्द हो जाए, परमेश्वर के अनुग्रह का लाभ उठाएं और अपना अनन्तकाल सुनिश्चित कर लें। - पोह फैंग चिया


परमेश्वर के परिवार में सम्मिलित होने के लिए आज के दिन से अच्छा और कोई समय नहीं है।

परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं। - यूहन्ना 1:12-13

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 5:14-6:2
2 Corinthians 5:14 क्योंकि मसीह का प्रेम हमें विवश कर देता है; इसलिये कि हम यह समझते हैं, कि जब एक सब के लिये मरा तो सब मर गए। 
2 Corinthians 5:15 और वह इस निमित्त सब के लिये मरा, कि जो जीवित हैं, वे आगे को अपने लिये न जीएं परन्तु उसके लिये जो उन के लिये मरा और फिर जी उठा। 
2 Corinthians 5:16 सो अब से हम किसी को शरीर के अनुसार न समझेंगे, और यदि हम ने मसीह को भी शरीर के अनुसार जाना था, तौभी अब से उसको ऐसा नहीं जानेंगे। 
2 Corinthians 5:17 सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। 
2 Corinthians 5:18 और सब बातें परमेश्वर की ओर से हैं, जिसने मसीह के द्वारा अपने साथ हमारा मेल-मिलाप कर लिया, और मेल-मिलाप की सेवा हमें सौंप दी है। 
2 Corinthians 5:19 अर्थात परमेश्वर ने मसीह में हो कर अपने साथ संसार का मेल मिलाप कर लिया, और उन के अपराधों का दोष उन पर नहीं लगाया और उसने मेल मिलाप का वचन हमें सौंप दिया है।
2 Corinthians 5:20 सो हम मसीह के राजदूत हैं; मानो परमेश्वर हमारे द्वारा समझाता है: हम मसीह की ओर से निवेदन करते हैं, कि परमेश्वर के साथ मेल मिलाप कर लो। 
2 Corinthians 5:21 जो पाप से अज्ञात था, उसी को उसने हमारे लिये पाप ठहराया, कि हम उस में हो कर परमेश्वर की धामिर्कता बन जाएं।
2 Corinthians 6:1 और हम जो उसके सहकर्मी हैं यह भी समझाते हैं, कि परमेश्वर का अनुग्रह जो तुम पर हुआ, व्यर्थ न रहने दो। 
2 Corinthians 6:2 क्योंकि वह तो कहता है, कि अपनी प्रसन्नता के समय मैं ने तेरी सुन ली, और उद्धार के दिन मैं ने तेरी सहायता की: देखो, अभी वह प्रसन्नता का समय है; देखो, अभी उद्धार का दिन है।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 25-26
  • मत्ती 20:17-34


सोमवार, 30 जनवरी 2017

प्रार्थना


   जब मिशिगन बर्फ से ढक जाता है, तब मैं अपने नाती-पोतों तथा प्लास्टिक की स्लेज को लेकर घर के पिछवाड़े में बर्फ के टीले पर चढ़ जाता हूँ और फिर हम स्लेज पर बैठ, बर्फ पर फिसल कर टीले के नीचे आते हैं जिस में लगभग दस सेकेंड का समय लगता है; हम फिर अपनी स्लेज लेकर वापस टीले पर चढ़ जाते हैं और इस प्रकार बारंबार स्लेज के साथ बर्फ पर फिसलने का खेल खेलते रहते हैं।

   जब मैं कुछ किशोरों के साथ अलास्का जाता हूँ, जहाँ सारे वर्ष बर्फ छाई रहती है, तब हम वहाँ भी इसी प्रकार स्लेज पर बैठ बर्फ पर फिसलने का खेल खेलते हैं; फर्क यह है कि अलास्का में हम बर्फ के पहाड़ों पर चढ़कर ऐसा करते थे जिन पर से फिसल कर नीचे तक आने में 10-20 मिनट तक लगते हैं और स्लेज बहुत तेज़ी से नीचे की ओर आती हैं जिनमें हम दिल थामे हुए बैठे रहते हैं।

   चाहे मेरे घर के पिछवाड़े में 10 सेकेंड का फिसलना हो या अलास्का में 10 मिनट का, दोनों को ही स्लेजिंग कहा जाता है, दोनों के लिए एक ही उपकरण - स्लेज काम आती है, दोनों ही बर्फ के होने पर निर्भर करते हैं और दोनों ही हमको रोमांचित तथा आनन्दित करते हैं।

   मैं विचार कर रहा था कि प्रार्थना के बारे में भी कुछ ऐसा ही है। कभी-कभी हम "घर के पिछवाड़े के 10 सेकेंड" वाली प्रार्थनाएँ करते हैं - जैसे कि भोजन से पहले धन्यवाद देने की प्रार्थना, या किसी आकस्मिक परिस्थिति के लिए की गई क्षण भर की प्रार्थना। अन्य समयों पर हम "पहाड़ से नीचे जाने के लंबे समय" की प्रार्थनाएँ करते हैं, जिनमें समय, एकाग्रता, लालसा और भावनाएँ सम्मिलित होती हैं। हमें दोनों ही प्रकार की प्रार्थनाओं की आवश्यकता होती है और हमारे जीवनों में दोनों ही का स्थान है।

   हमारे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु प्रार्थना करने में अकसर समय व्यतीत करते थे; कभी लंबे समयों तक (लूका 6:12; मरकुस 14:32-42)। चाहे क्षणिक हों या लंबी, आवश्यकता तथा समयानुसार परमेश्वर के साथ अपने मन की बात साझा करने में समय बिताएँ; परमेश्वर को दोनों ही प्रकार की प्रार्थनाएँ स्वीकार हैं, उसे आपसे दोनों ही की लालसा रहती है। प्रार्थना में जितना अधिक संपर्क उसके साथ बनाकर रखेंगे, उसके साथ आपके संबंध उतने ही अधिक घनिष्ठ होते जाएँगे। - डेव ब्रैनन


प्रार्थना का मर्म, हृदय से निकली प्रार्थना है।

और उन दिनों में वह पहाड़ पर प्रार्थना करने को निकला, और परमेश्वर से प्रार्थना करने में सारी रात बिताई। - लूका 6:12

बाइबल पाठ: मरकुस 14:32-42
Mark 14:32 फिर वे गतसमने नाम एक जगह में आए, और उसने अपने चेलों से कहा, यहां बैठे रहो, जब तक मैं प्रार्थना करूं। 
Mark 14:33 और वह पतरस और याकूब और यूहन्ना को अपने साथ ले गया: और बहुत ही अधीर, और व्याकुल होने लगा। 
Mark 14:34 और उन से कहा; मेरा मन बहुत उदास है, यहां तक कि मैं मरने पर हूं: तुम यहां ठहरो, और जागते रहो। 
Mark 14:35 और वह थोड़ा आगे बढ़ा, और भूमि पर गिरकर प्रार्थना करने लगा, कि यदि हो सके तो यह घड़ी मुझ पर से टल जाए। 
Mark 14:36 और कहा, हे अब्‍बा, हे पिता, तुझ से सब कुछ हो सकता है; इस कटोरे को मेरे पास से हटा ले: तौभी जैसा मैं चाहता हूं वैसा नहीं, पर जो तू चाहता है वही हो। 
Mark 14:37 फिर वह आया, और उन्हें सोते पाकर पतरस से कहा; हे शमौन तू सो रहा है? क्या तू एक घड़ी भी न जाग सका? 
Mark 14:38 जागते और प्रार्थना करते रहो कि तुम परीक्षा में न पड़ो: आत्मा तो तैयार है, पर शरीर दुर्बल है। 
Mark 14:39 और वह फिर चला गया, और वही बात कहकर प्रार्थना की। 
Mark 14:40 और फिर आकर उन्हें सोते पाया, क्योंकि उन की आंखे नींद से भरी थीं; और नहीं जानते थे कि उसे क्या उत्तर दें। 
Mark 14:41 फिर तीसरी बार आकर उन से कहा; अब सोते रहो और विश्राम करो, बस, घड़ी आ पहुंची; देखो मनुष्य का पुत्र पापियों के हाथ पकड़वाया जाता है। 
Mark 14:42 उठो, चलें: देखो, मेरा पकड़वाने वाला निकट आ पहुंचा है।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 23-24
  • मत्ती 20:1-16


रविवार, 29 जनवरी 2017

स्त्रोत


   बीस वर्षीय लेगॉन स्टीवेन्स एक अनुभवी पर्वतारोही थीं; इतनी कम आयु में भी उन्होंने मैक्किन्ले पर्वत और रेनियर पर्वत के शिखर, इक्वेडोर में स्थित एण्डियन पर्वत श्रंखला की चार चोटियों और कॉलोराडो के 39 सबसे ऊँचे पहाड़ों की सफलतापूर्वक चढ़ाई की थी। वह कहती थीं, "मैं इसलिए चढ़ती हूँ क्योंकि मुझे पहाड़ अच्छे लगते हैं, और वहाँ मेरी भेंट परमेश्वर से होती है।" जनवरी 2008 में दक्षिण कॉलोराडो की लिटल बीयर चोटी पर अपने भाई के साथ चढ़ते हुए लेगॉन की मृत्यु हिम-स्खलन के कारण हो गई, परन्तु उसका भाई बच गया।

   लेगॉन की मृत्योपरांत उसके माता-पिता को लेगॉन की डायरियाँ मिलीं, जिनमें उसके द्वारा लिखे गए प्रभु यीशु मसीह के साथ उसकी बहुत घनिष्टता के संबंधों को पढ़कर वे बहुत प्रभावित हुए। उसकी माँ ने कहा, "प्रभु यीशु उसके लिए सदा ही एक चमकती हुई ज्योति थे; लेगॉन ने उनके साथ संबंधों की वह गहराई और खराई अनुभव की थी जो मसीही विश्वास के अनुभवी जन भी पाने की लालसा रखते हैं।"

   हिम-स्खलन से हुई मृत्यु के तीन दिन पहले तंबू में बैठे हुए लेगॉन ने डायरी में अपनी अन्तिम बात लिखी, "परमेश्वर भला है, और हमारे जीवनों के लिए उसकी विशेष योजना है, जो उस सब से कहीं अधिक भली और आशीषित है जो हम स्वयं अपने लिए बनाते हैं; और इस बात के लिए मैं उसकी बहुत धन्यवादी हूँ। मैंने अपना सब कुछ, अपना भविष्य उसके हाथों में छोड़ दिया है, और बस उसे हर बात के लिए धन्यवाद कहती हूँ।"

   लेगॉन के यह शब्द, परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार द्वारा कहे गए शब्दों : "मुझे सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है" (भजन 121:2) के अनुसार है। लेगॉन के समान हमें भी इस एहसास के साथ जीवन व्यतीत करना चाहिए कि परमेश्वर ही हमारे जीवन, हमारे जीवन की प्रत्येक बात का स्त्रोत है; वही हमारे लिए सब कुछ निर्धारित करता है, और वह हर बात में हमारे लिए भला ही करता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


अज्ञात भविष्य के लिए हम अपने सर्वज्ञानी परमेश्वर पर भरोसा रख सकते हैं।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28 

बाइबल पाठ: भजन 121
Psalms 121:1 मैं अपनी आंखें पर्वतों की ओर लगाऊंगा। मुझे सहायता कहां से मिलेगी? 
Psalms 121:2 मुझे सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है।
Psalms 121:3 वह तेरे पाँव को टलने न देगा, तेरा रक्षक कभी न ऊंघेगा। 
Psalms 121:4 सुन, इस्राएल का रक्षक, न ऊंघेगा और न सोएगा।
Psalms 121:5 यहोवा तेरा रक्षक है; यहोवा तेरी दाहिनी ओर तेरी आड़ है। 
Psalms 121:6 न तो दिन को धूप से, और न रात को चांदनी से तेरी कुछ हानि होगी।
Psalms 121:7 यहोवा सारी विपत्ति से तेरी रक्षा करेगा; वह तेरे प्राण की रक्षा करेगा। 
Psalms 121:8 यहोवा तेरे आने जाने में तेरी रक्षा अब से ले कर सदा तक करता रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 21-22
  • मत्ती 19


शनिवार, 28 जनवरी 2017

इच्छा


   चीनी नव-वर्ष के समय एक-दूसरे से कही जाने वाली शुभ-कामनाओं में से बहुधा प्रयुक्त होने वाली एक शुभ-कामना है, "आपकी इच्छानुसार ही सब कुछ हो।" यह सुनने में चाहे जितनी अनोखी और अच्छी लगे, किंतु जीवन की घटनाओं का सर्वोत्तम परिणाम तब ही आता है जब मेरी नहीं वरन मेरे जीवन में परमेश्वर की इच्छा पूरी होने पाए। उदाहरण स्वरूप परमेश्वर के वचन बाइबल में पुराने नियम के एक पात्र यूसुफ के जीवन को देखें।

   यदि उसकी इच्छानुसार किया जाता तो यूसुफ कभी अपने घर-परिवार से दूर मिस्त्र में गुलामी में जाने के लिए सहमत नहीं होता; परन्तु वह दासत्व में गया (उत्पत्ति 39:1)। परन्तु अपने दासत्व में होने के बावजूद वह "भाग्यवान" हुआ अर्थात सफल हुआ, क्योंकि परमेश्वर उसके साथ था (पद 2); यहाँ तक कि यूसुफ के कारण परमेश्वर ने उसके स्वामी घर पर भी आशीष दी (पद 5)।

   यदि यूसुफ की इच्छानुसार होता, तो वह कभी भी मिस्त्र के बन्दीगृह में डाले जाने को स्वीकार नहीं करता, परन्तु पूरी ईमानदारी और खराई से कार्य करने के बावजूद, उसके स्वामी की पत्नी ने उस पर दुराचार का झूठा आरोप लगाया, जिसके कारण उसे बन्दिगृह में डाला गया, लेकिन हम तब भी उसके विषय में पढ़ते हैं कि परमेश्वर वहाँ भी उसके साथ था (पद 21)। वहाँ भी उसने बन्दीगृह के दारोगा के विश्वास को प्राप्त किया (पद 22) और जो भी वह करता था परमेश्वर उसमें उसे सफलता देता था (पद 23)। बन्दीगृह जाने और वहाँ घटित हुई घटनाओं को देखने से लगता है कि यूसुफ परेशानियों में और भी गहरा धंसता जा रहा था, परन्तु आगे का घटनाक्रम दिखाता है कि वास्तव में जो उसका पतन प्रतीत हो रहा था, वह सब उसके मिस्त्र में राजा के बाद के सर्वोच्च पद तक चढ़ाए जाने के लिए सीढ़ी थी।

   परमेश्वर ने जिस प्रकार से यूसुफ को आशीषित किया और बढ़ाया, शायद ही कोई उस प्रकार से आशीषित होना और बढ़ाया जाना स्वीकार करेगा। परन्तु परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, चाहे कैसी भी विकट और कठिन ही क्यों ना हों, परमेश्वर उन सब के द्वारा अपने बच्चों को आशीष देता है। जैसा बाद में यूसुफ ने अपने उन भाइयों से कहा जिन्होंने द्वेष में होकर उसे मिस्त्र के दासत्व में बेच दिया था, कि परमेश्वर ही उसे एक उद्देश्य के अन्तर्गत मिस्त्र लेकर आया था (उत्पत्ति 50:19-20)।

   हम मसीही विश्वासी इस बात से आश्वस्त रह सकते हैं कि हम आज जहाँ भी हैं, जैसे भी हैं, हमारे वहाँ और वैसा होने के पीछे परमेश्वर का कोई उद्देश्य है। वह जो कर रहा है, हमारे हित के लिए ही कर रहा है। इसलिए बजाए इसके कि हम यही लालसा करते रहें कि सब कुछ हमारी इच्छानुसार ही हो, हमें अपने उद्धारकर्ता और प्रभु यीशु मसीह के समान परमेश्वर से कहते रहना चाहिए: "...तौभी जैसा मैं चाहता हूं वैसा नहीं, परन्तु जैसा तू चाहता है वैसा ही हो।" (मत्ती 26:39)। - सी. पी. हिया


परमेश्वर की इच्छा को पूरा करने का एक उपाय है 
धीरज के साथ उसके निर्देशों की प्रतीक्षा करना।

यूसुफ ने उन से कहा, मत डरो, क्या मैं परमेश्वर की जगह पर हूं? यद्यपि तुम लोगों ने मेरे लिये बुराई का विचार किया था; परन्तु परमेश्वर ने उसी बात में भलाई का विचार किया, जिस से वह ऐसा करे, जैसा आज के दिन प्रगट है, कि बहुत से लोगों के प्राण बचे हैं। - उत्पत्ति 50:19-20

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 39:1-6;  39:19-23
Genesis 39:1 जब यूसुफ मिस्र में पहुंचाया गया, तब पोतीपर नाम एक मिस्री, जो फिरौन का हाकिम, और जल्लादों का प्रधान था, उसने उसको इश्माएलियों के हाथ, से जो उसे वहां ले गए थे, मोल लिया। 
Genesis 39:2 और यूसुफ अपने मिस्री स्वामी के घर में रहता था, और यहोवा उसके संग था; सो वह भाग्यवान पुरूष हो गया। 
Genesis 39:3 और यूसुफ के स्वामी ने देखा, कि यहोवा उसके संग रहता है, और जो काम वह करता है उसको यहोवा उसके हाथ से सफल कर देता है। 
Genesis 39:4 तब उसकी अनुग्रह की दृष्टि उस पर हुई, और वह उसकी सेवा टहल करने के लिये नियुक्त किया गया: फिर उसने उसको अपने घर का अधिकारी बना के अपना सब कुछ उसके हाथ में सौंप दिया। 
Genesis 39:5 और जब से उसने उसको अपने घर का और अपनी सारी सम्पत्ति का अधिकारी बनाया, तब से यहोवा यूसुफ के कारण उस मिस्री के घर पर आशीष देने लगा; और क्या घर में, क्या मैदान में, उसका जो कुछ था, सब पर यहोवा की आशीष होने लगी। 
Genesis 39:6 सो उसने अपना सब कुछ यूसुफ के हाथ में यहां तक छोड़ दिया: कि अपने खाने की रोटी को छोड़, वह अपनी सम्पत्ति का हाल कुछ न जानता था। और यूसुफ सुन्दर और रूपवान्‌ था। 
Genesis 39:19 अपनी पत्नी की ये बातें सुनकर, कि तेरे दास ने मुझ से ऐसा ऐसा काम किया, यूसुफ के स्वामी का कोप भड़का। 
Genesis 39:20 और यूसुफ के स्वामी ने उसको पकड़कर बन्दीगृह में, जहां राजा के कैदी बन्द थे, डलवा दिया: सो वह उस बन्दीगृह में रहने लगा। 
Genesis 39:21 पर यहोवा यूसुफ के संग संग रहा, और उस पर करूणा की, और बन्दीगृह के दरोगा के अनुग्रह की दृष्टि उस पर हुई। 
Genesis 39:22 सो बन्दीगृह के दरोगा ने उन सब बन्धुओं को, जो कारागार में थे, यूसुफ के हाथ में सौंप दिया; और जो जो काम वे वहां करते थे, वह उसी की आज्ञा से होता था। 
Genesis 39:23 बन्दीगृह के दरोगा के वश में जो कुछ था; क्योंकि उस में से उसको कोई भी वस्तु देखनी न पड़ती थी; इसलिये कि यहोवा यूसुफ के साथ था; और जो कुछ वह करता था, यहोवा उसको उस में सफलता देता था।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 19-20
  • मत्ती 18:21-35