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मंगलवार, 25 जुलाई 2017

साथ चलना


   मुझे मेरे एक मित्र ने एक छोटा परचा पढ़ने के लिए दिया; उस परचे का शीर्षक था, "प्रभु के साथ संबंध के 86 वर्षों की कहानी बाँटने का प्रयास।" उस पर्चे में ऐल ऑकेनहेल ने अपने लगभग नौ दशक के जीवन में मसीही विश्वास की यात्रा से संबंधित कुछ प्रमुख लोगों और घटनाओं के बारे में बताया है। जो उस समय साधारण से चुनाव लगते थे - बाइबल पदों को स्मरण करना, प्रार्थना करने के लिए औरों के साथ मिलना, अपने पड़ौसियों को प्रभु यीशु के बारे में बताना, आदि - वे ही उनके जीवन को भले के लिए बदलने वाले बिंदु बन गए। कैसे परमेश्वर के हाथ ने ऐल के जीवन का मार्गदर्शन और प्रोत्साहन किया, यह सब उस पर्चे में पढ़ना बहुत रोमांचक था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने लिखा, "मनुष्य की गति यहोवा की ओर से दृढ़ होती है, और उसके चलन से वह प्रसन्न रहता है" (भजन 37:23)। इस परिच्छेद में एक सुन्दर वर्णन मिलता है कि कैसे परमेश्वर उनकी विश्वासयोग्यता के साथ देखभाल करता है जो उसके साथ चलना चाहते हैं; "उसके परमेश्वर की व्यवस्था उसके हृदय में बनी रहती है, उसके पैर नहीं फिसलते" (भजन 37:31)।

   प्रत्येक मसीही विश्वासी परमेश्वर की उसके प्रति विश्वासयोग्यता तथा मार्गदर्शन का अपना ऐसा विवरण बना सकता है, जिसमें विश्वास की उनकी यात्रा में आने वाले प्रमुख लोगों, स्थानों और घटनाओं का उल्लेख हो। परमेश्वर की भलाई का प्रत्येक स्मरण हमें उसके साथ चलते रहने के लिए प्रोत्साहित करता है और उनके प्रति धन्यवादी बनाता है जिन्होंने किसी रीति से भलाई के लिए हम पर प्रभाव डाला है।

   जितने प्रभु परमेश्वर के साथ चलते हैं, वह उन सब को मार्गदर्शन और सुरक्षा प्रदान करता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


जब आप परमेश्वर के साथ चलेंगे, वह आपको सही मार्ग में ले चलेगा।

तेरा वचन मेरे पांव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है। - भजन 119:105

बाइबल पाठ: भजन 37:23-31
Psalms 37:23 मनुष्य की गति यहोवा की ओर से दृढ़ होती है, और उसके चलन से वह प्रसन्न रहता है; 
Psalms 37:24 चाहे वह गिरे तौभी पड़ा न रह जाएगा, क्योंकि यहोवा उसका हाथ थामे रहता है।
Psalms 37:25 मैं लड़कपन से ले कर बुढ़ापे तक देखता आया हूं; परन्तु न तो कभी धर्मी को त्यागा हुआ, और न उसके वंश को टुकड़े मांगते देखा है। 
Psalms 37:26 वह तो दिन भर अनुग्रह कर कर के ऋण देता है, और उसके वंश पर आशीष फलती रहती है।
Psalms 37:27 बुराई को छोड़ भलाई कर; और तू सर्वदा बना रहेगा। 
Psalms 37:28 क्योंकि यहोवा न्याय से प्रीति रखता; और अपने भक्तों को न तजेगा। उनकी तो रक्षा सदा होती है, परन्तु दुष्टों का वंश काट डाला जाएगा। 
Psalms 37:29 धर्मी लोग पृथ्वी के अधिकारी होंगे, और उस में सदा बसे रहेंगे।
Psalms 37:30 धर्मी अपने मुंह से बुद्धि की बातें करता, और न्याय का वचन कहता है। 
Psalms 37:31 उसके परमेश्वर की व्यवस्था उसके हृदय में बनी रहती है, उसके पैर नहीं फिसलते।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 37-39
  • प्रेरितों 26


सोमवार, 24 जुलाई 2017

साहस


   जब मैं उन युवकों की कहानियाँ सुनता हूँ जिन्हें डरा-धमका कर दबाया गया है, तो मैं पाता हूँ कि उनके अन्दर दो स्तर की चोट है। पहली और सबसे प्रकट चोट उन्हें डराने-धमकाने वालों के नीच व्यवहार के कारण होती है; अपने आप में यही काफी भयानक होती है। लेकिन एक और, इससे भी अधिक गहरी चोट है जो पहली वाली से भी अधिक नुकसानदेह हो सकती है: अन्य सभी लोगों की खामोशी। जिसे डरा-धमका कर दबाया जा रहा है वह अन्य लोगों के इस व्यवहार से कि कोई उसकी सहायाता के लिए नहीं आ रहा है स्तब्ध रह जाता है। और यही निष्क्रियता उन दबाने वालों को और अधिक नीचता करने का बढ़ावा देती है। इस खामोशी से उस नीचता से पीड़ित व्यक्ति की घबराहट, झूठी शर्मिंदगी, और एकाकीपन और अधिक हो जाते हैं। इसलिए यह अनिवार्य है कि हम औरों के लिए अपनी आवाज़ उठाएं, नीच व्यवहार के विरुद्ध बोलें (नीतिवचन 31:8)।

   प्रभु यीशु मसीह इस प्रकार के नीच व्यवहार और अकेले छोड़ दिए जाने की भावना को भली-भांति जानते हैं। कोई दोष न होते हुए भी उन्हें ज़बर्दस्ती बन्दी बनाया गया, पीटा गया, उन्हें ठट्ठों में उड़ाया गया। ऐसे में उनके सभी शिष्य भी उन्हें छोड़ कर भाग गए, और उनके निकटतम शिष्यों में से एक, पतरस ने तो तीन बार एक दासी के सामने उनका इंकार भी कर दिया। इसलिए चाहे और कोई ऐसे व्यवहार से उत्पन्न होने वाली भावना चाहे न जानता हो, प्रभु यीशु तो अवश्य जानते और समझते हैं।

   इसलिए हम जब भी किसी को इस प्रकार प्रताड़ित होते देखें, तो इस बात को प्रभु यीशु के सामने रखें और उससे साहस माँगें कि हम ऐसे व्यावहार के विरुद्ध बोल सकें। - रैंडी किलगोर


एक साहसी मसीही की आवाज़ परमेश्वर की आवाज़ की प्रतिध्वनि है।

गूंगे के लिये अपना मुंह खोल, और सब अनाथों का न्याय उचित रीति से किया कर। - नीतिवचन 31:8

बाइबल पाठ: लूका 22:54-65
Luke 22:54 फिर वे उसे पकड़कर ले चले, और महायाजक के घर में लाए और पतरस दूर ही दूर उसके पीछे पीछे चलता था। 
Luke 22:55 और जब वे आंगन में आग सुलगाकर इकट्ठे बैठे, तो पतरस भी उन के बीच में बैठ गया। 
Luke 22:56 और एक दासी ने उसे आग के उजियाले में बैठे देखकर और उस की ओर ताककर कहने लगी, यह भी तो उसके साथ था। 
Luke 22:57 परन्तु उसने यह कहकर इन्कार किया, कि हे नारी, मैं उसे नहीं जानता। 
Luke 22:58 थोड़ी देर बाद किसी और ने उसे देखकर कहा, तू भी तो उन्‍हीं में से है: पतरस ने कहा; हे मनुष्य मैं नहीं हूं। 
Luke 22:59 कोई घंटे भर के बाद एक और मनुष्य दृढ़ता से कहने लगा, निश्‍चय यह भी तो उसके साथ था; क्योंकि यह गलीली है। 
Luke 22:60 पतरस ने कहा, हे मनुष्य, मैं नहीं जानता कि तू क्या कहता है! वह कह ही रहा था कि तुरन्त मुर्ग ने बांग दी। 
Luke 22:61 तब प्रभु ने घूमकर पतरस की ओर देखा, और पतरस को प्रभु की वह बात याद आई जो उसने कही थी, कि आज मुर्ग के बांग देने से पहिले, तू तीन बार मेरा इन्कार करेगा। 
Luke 22:62 और वह बाहर निकलकर फूट फूट कर रोने लगा।
Luke 22:63 जो मनुष्य यीशु को पकड़े हुए थे, वे उसे ठट्ठों में उड़ाकर पीटने लगे। 
Luke 22:64 और उस की आंखे ढांपकर उस से पूछा, कि भविष्यद्वाणी कर के बता कि तुझे किसने मारा। 
Luke 22:65 और उन्होंने बहुत सी और भी निन्‍दा की बातें उसके विरोध में कहीं।

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 35-36
  • प्रेरितों 25


रविवार, 23 जुलाई 2017

केवल परमेश्वर


   सी.एन.एन. ने ग्रेफाईट से बनाए गए एक नए पदार्थ ग्रफीन को "आश्चर्यकर्म पदार्थ" कहा क्योंकि यह हमारे जीवनों में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकता है। ग्रफीन केवल एक अणु जितना मोटा है, और इस तीन-आयामी संसार का एक मात्र वास्तविक्ता में दो-आयामी पदार्थ है। वह स्टील से सौ-गुणा मज़बूत है, हीरे से भी अधिक कठोर है, इसमें तांबे से 1000 गुणा अधिक तीव्रता से विद्युत प्रवाहित हो सकती है, और यह रबर से भी अधिक लचीला है। अपने आप में तकनीकी के ऐसे चमत्कार न तो नैतिक हैं और न ही बुरे। परन्तु हमारे द्वारा अपने लिए बनाई गई वस्तुओं की सीमाओं के लेकर सचेत रहना हमारे लिए बुद्धिमानी होगी।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में यशायाह ने एक ऐसी पीढ़ी को संबोधित किया जो अपने हाथों से बनाए हुए देवताओं को लेकर बन्धुआई में जा रही थी। परमेश्वर ने अपने भविष्यद्वक्ता यशायाह के द्वारा चाहा कि वे इस्त्राएली अपने हाथों से बनाए हुए देवताओं की उपासना करने की विडंबना को पहचाने, क्योंकि उन्हें जिन देवताओं से आशा थी कि वे देवता उनकी देखभाल करेंगे, उन्हें प्रेरणा, सहायता, शान्ति और सुरक्षा देंगे, वासत्व में इस्त्राएलियों को ही उनकी देखभाल करनी पड़ रही थी, और सच्चे जीवते परमेश्वर से विमुख होने के कारण बंधुआई में जाना पड़ रहा था।

   जो उन इस्त्राएलियों के लिए सही था, वही आज हमारे लिए भी सही है। हमारे हाथों तथा मनशा से बनी हुई कोई भी वस्तु हमारे हृदयों की आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर सकती है। ऐसा केवल परमेश्वर ही कर सकता है क्योंकि वही है जो हमारे जन्म से लेकर आज तक हमें संभाले हुए है, आज भी हमारी देखभाल कर रहा है, और हमें आगे भी संभाले रहेगा। - मार्ट डीहॉन


जो भी हमारे जीवनों में परमेश्वर के यथोचित स्थान को ले लेता है,
 हमारे लिए वही मूर्ति बन जाता है।

हे मनुष्य के सन्तान, इन पुरुषों ने तो अपनी मूरतें अपने मन में स्थापित कीं, और अपने अधर्म की ठोकर अपने साम्हने रखी है; फिर क्या वे मुझ से कुछ भी पूछने पाएंगे? - यहेजकेल 14:3

बाइबल पाठ: यशायाह 46:1-10
Isaiah 46:1 बेल देवता झुक गया, नबो देवता नब गया है, उनकी प्रतिमाएं पशुओं वरन घरैलू पशुओं पर लदी हैं; जिन वस्तुओं को तुम उठाए फिरते थे, वे अब भारी बोझ हो गईं और थकित पशुओं पर लदी हैं। 
Isaiah 46:2 वे नब गए, वे एक संग झुक गए, वे उस भार को छुड़ा नहीं सके, और आप भी बंधुआई में चले गए हैं।
Isaiah 46:3 हे याकूब के घराने, हे इस्राएल के घराने के सब बचे हुए लोगो, मेरी ओर कान लगाकर सुनो; तुम को मैं तुम्हारी उत्पत्ति ही से उठाए रहा और जन्म ही से लिये फिरता आया हूं। 
Isaiah 46:4 तुम्हारे बुढ़ापे में भी मैं वैसा ही बना रहूंगा और तुम्हारे बाल पकने के समय तक तुम्हें उठाए रहूंगा। मैं ने तुम्हें बनाया और तुम्हें लिये फिरता रहूंगा; 
Isaiah 46:5 मैं तुम्हें उठाए रहूंगा और छुड़ाता भी रहूंगा। तुम किस से मेरी उपमा दोगे और मुझे किस के समान बताओगे, किस से मेरा मिलान करोगे कि हम एक समान ठहरें? 
Isaiah 46:6 जो थैली से सोना उण्डेलते वा कांटे में चान्दी तौलते हैं, जो सुनार को मजदुरी देकर उस से देवता बनवाते हैं, तब वे उसे प्रणाम करते वरन दण्डवत भी करते हैं! 
Isaiah 46:7 वे उसको कन्धे पर उठा कर लिये फिरते हैं, वे उसे उसके स्थान में रख देते और वह वहीं खड़ा रहता है; वह अपने स्थान से हट नहीं सकता; यदि कोई उसकी दोहाई भी दे, तौभी न वह सुन सकता है और न विपत्ति से उसका उद्धार कर सकता है।
Isaiah 46:8 हे अपराधियों, इस बात को स्मरण करो और ध्यान दो, इस पर फिर मन लगाओ। 
Isaiah 46:9 प्राचीनकाल की बातें स्मरण करो जो आरम्भ ही से है; क्योंकि ईश्वर मैं ही हूं, दूसरा कोई नहीं; मैं ही परमेश्वर हूं और मेरे तुल्य कोई भी नहीं है। 
Isaiah 46:10 मैं तो अन्त की बात आदि से और प्राचीनकाल से उस बात को बताता आया हूं जो अब तक नहीं हुई। मैं कहता हूं, मेरी युक्ति स्थिर रहेगी और मैं अपनी इच्छा को पूरी करूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 33-34
  • प्रेरितों 24


शनिवार, 22 जुलाई 2017

अंगीकार


   जेन अपने बरामदे में बैठी एक चिंतित करने वाले प्रश्न पर विचार कर रही थी: क्या उसे पुस्तक लिखनी चाहिए? उसने ब्लॉग लिखने और सार्वजनिक स्थानों में बोलने का आनन्द तो लिया था, परन्तु अब उसे ऐसा लग रहा था कि परमेश्वर उससे कुछ और अधिक करवाना चाहता है। उसने परमेश्वर से पूछा कि "क्या आप चाहते हैं कि मैं ऐसा करूँ?" उसने इस बारे में परमेश्वर से बातचीत की और उससे मार्गदर्शन माँगा। उसने सोचना आरंभ किया कि क्या परमेश्वर चाहता था कि वह अपने पति की अशलीलता को देखने-पढ़ने की लत, और कैसे परमेश्वर उसके जीवन में तथा उनके वैवाहिक जीवन में कार्य कर रहा है के बारे में लिखे। परन्तु फिर उसने सोचा कि ऐसा करने से उसके पति की सार्वजनिक रीति से बदनामी हो जाएगी। इसलिए उसने प्रार्थना की क्या वे दोनों मिलकर उस पुस्तक को लिखें? फिर उसने अपने पति से इसके बारे में पूछा और वह यह करने के लिए सहमत हो गए।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि राजा दाऊद ने यद्यपि यह तो नहीं लिखा कि उसने क्या पाप किया था, परन्तु वह अपने संघर्ष को लेकर एक सार्वजनिक संवाद में भागीदार हुआ। उसने अपने इस अनुभव को एक भजन के रूप में भी प्रस्तुत किया, और लिखा: "जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हडि्डयां पिघल गईं" (भजन 32:3)। फिर आगे लिखा कि, "जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के साम्हने अपने अपराधों को मान लूंगा; तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया" (भजन 32:5)। हर किसी को अपने प्रत्येक व्यक्तिगत संघर्ष को सार्वजनिक नहीं करना चाहिए। परन्तु जब दाऊद ने परमेश्वर के सामने अपने पाप का अंगीकार किया तो उसे शांति और चँगाई मिली जिससे प्रोत्साहित होकर उसने परमेश्वर की स्तुति का यह भजन लिखा।

   जेन और उसके पति का कहना है कि अपनी गहरी व्यक्तिगत कहानी को मिलकर लिखने से उनकी एक दूसरे के प्रति निकटता और बढ़ी है। यह परमेश्वर के कितना समान है, जो जब हम अपने पापों का अंगीकार करते हैं तो हमारे दोष, लज्जा और अलग किए जाने को ले लेता है, और उन सब के स्थान पर हमें अपनी क्षमा, साहस और संगति प्रदान कर देता है। - टिम गस्टाफसन


जो अपने पाप अंगीकार कर लेते हैं उन्हें पापों से क्षमा भी मिल जाती है।

जो अपने अपराध छिपा रखता है, उसका कार्य सफल नहीं होता, परन्तु जो उन को मान लेता और छोड़ भी देता है, उस पर दया की जायेगी। - नीतिवचन 28:13

बाइबल पाठ: भजन 32:1-11
Psalms 32:1 क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, और जिसका पाप ढ़ाँपा गया हो। 
Psalms 32:2 क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो।
Psalms 32:3 जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हडि्डयां पिघल गईं। 
Psalms 32:4 क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई।
Psalms 32:5 जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के साम्हने अपने अपराधों को मान लूंगा; तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया।
Psalms 32:6 इस कारण हर एक भक्त तुझ से ऐसे समय में प्रार्थना करे जब कि तू मिल सकता है। निश्चय जब जल की बड़ी बाढ़ आए तौभी उस भक्त के पास न पहुंचेगी। 
Psalms 32:7 तू मेरे छिपने का स्थान है; तू संकट से मेरी रक्षा करेगा; तू मुझे चारों ओर से छुटकारे के गीतों से घेर लेगा।
Psalms 32:8 मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपा दृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा। 
Psalms 32:9 तुम घोड़े और खच्चर के समान न बनो जो समझ नहीं रखते, उनकी उमंग लगाम और बाग से रोकनी पड़ती है, नहीं तो वे तेरे वश में नहीं आने के।
Psalms 32:10 दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी; परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करूणा से घिरा रहेगा। 
Psalms 32:11 हे धर्मियों यहोवा के कारण आनन्दित और मगन हो, और हे सब सीधे मन वालों आनन्द से जयजयकार करो!

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 31-32
  • प्रेरितों 23:16-35


शुक्रवार, 21 जुलाई 2017

पास


   मेरी सहेली अपने परिवार और जीवन से संबंधित कुछ कठिन परिस्थितियों से होकर निकल रही थी, और मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मैं उससे क्या कहूँ या उसके लिए क्या करूँ। मैंने उससे अपनी यही दुविधा कही; उसने मेरी ओर देखकर कहा, "बस मेरे निकट बनी रहो।" मैंने ऐसा ही किया, और कुछ समय के बाद हमने परमेश्वर के प्रेम के बारे में बातें करनी आरंभ कर दीं।

   बहुधा हमें समझ नहीं आता है कि जब दूसरे दुःख से होकर निकल रहे हैं तो हम उनके साथ क्या बात करें, उन्हें क्या कहें, क्योंकि कई बार शब्द भलाई के स्थान पर बुरा कर देते हैं। दूसरों की सेवा करने के लिए हमें यह समझना आवश्यक है कि वे क्या चाहते हैं, उन्हें किस बात की आवश्यकता है; और तब हम व्यावाहरिक रीति से उनकी सहायाता कर सकते हैं। लेकिन दुःखी लोगों को प्रोत्साहित करने का एक सबसे अच्छा तरीका है उनके साथ बैठना, उनकी सुनना।

   हम जब भी उसे पुकारते हैं, परमेश्वर सदा ही हमारे निकट होता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने लिखा, "धर्मी दोहाई देते हैं और यहोवा सुनता है, और उन को सब विपत्तियों से छुड़ाता है। यहोवा टूटे मन वालों के समीप रहता है, और पिसे हुओं का उद्धार करता है" (भजन 34:17-18)।

   अपने आप को दूसरों के स्थान पर रखने, और अपने हृदय को उनके प्रति अनुकंपा अनुभव करने देने के द्वारा हम दुःखी लोगों के सहायक हो सकते हैं। जैसे परमेश्वर हमारे निकट रहता और हमारी सुनता है, वैसे ही हमें औरों के निकट रहना और उनके मन की बात को सुनना चाहिए। दुःखियों के निकट रहते हुए, सही अवसर पर परमेश्वर का पवित्र आत्मा हमें बोलने के लिए वह सही शब्द देगा जिनकी उन्हें आवश्यकता होगी। - कीला ओकोआ


दूसरों को प्रोत्साहित करने का सर्वोत्त्म तरीका 
केवल उनके निकट बने रहना भी हो सकता है।

प्रभु यहोवा ने मुझे सीखने वालों की जीभ दी है कि मैं थके हुए को अपने वचन के द्वारा संभालना जानूं। भोर को वह नित मुझे जगाता और मेरा कान खोलता है कि मैं शिष्य के समान सुनूं। - यशायाह 50:4

बाइबल पाठ: भजन 34:4-18
Psalms 34:4 मैं यहोवा के पास गया, तब उसने मेरी सुन ली, और मुझे पूरी रीति से निर्भय किया। 
Psalms 34:5 जिन्होंने उसकी ओर दृष्टि की उन्होंने ज्योति पाई; और उनका मुंह कभी काला न होने पाया। 
Psalms 34:6 इस दीन जन ने पुकारा तब यहोवा ने सुन लिया, और उसको उसके सब कष्टों से छुड़ा लिया। 
Psalms 34:7 यहोवा के डरवैयों के चारों ओर उसका दूत छावनी किए हुए उन को बचाता है। 
Psalms 34:8 परखकर देखो कि यहोवा कैसा भला है! क्या ही धन्य है वह पुरूष जो उसकी शरण लेता है। 
Psalms 34:9 हे यहोवा के पवित्र लोगो, उसका भय मानो, क्योंकि उसके डरवैयों को किसी बात की घटी नहीं होती! 
Psalms 34:10 जवान सिंहों तो घटी होती और वे भूखे भी रह जाते हैं; परन्तु यहोवा के खोजियों को किसी भली वस्तु की घटी न होवेगी।। 
Psalms 34:11 हे लड़कों, आओ, मेरी सुनो, मैं तुम को यहोवा का भय मानना सिखाऊंगा। 
Psalms 34:12 वह कौन मनुष्य है जो जीवन की इच्छा रखता, और दीर्घायु चाहता है ताकि भलाई देखे? 
Psalms 34:13 अपनी जीभ को बुराई से रोक रख, और अपने मुंह की चौकसी कर कि उस से छल की बात न निकले। 
Psalms 34:14 बुराई को छोड़ और भलाई कर; मेल को ढूंढ और उसी का पीछा कर। 
Psalms 34:15 यहोवा की आंखे धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान भी उसकी दोहाई की ओर लगे रहते हैं। 
Psalms 34:16 यहोवा बुराई करने वालों के विमुख रहता है, ताकि उनका स्मरण पृथ्वी पर से मिटा डाले। 
Psalms 34:17 धर्मी दोहाई देते हैं और यहोवा सुनता है, और उन को सब विपत्तियों से छुड़ाता है। 
Psalms 34:18 यहोवा टूटे मन वालों के समीप रहता है, और पिसे हुओं का उद्धार करता है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 29-30
  • प्रेरितों 23:1-15


गुरुवार, 20 जुलाई 2017

सेवा


   प्रथम विश्व-युद्ध में सेवा करने के कारण सी. एस. ल्यूईस सेना की सेवा की कठिनाईयों और तनावों से अनभिज्ञ नहीं थे। दुसरे विश्व-युद्ध के समय एक सामाजिक संबोधन के समय उन्होंने एक सैनिक द्वारा सामना की जाने वाली कठिनाईयों का सटीक विवरण दिया: "हम हर प्रकार की विपत्तियों के कारण जो भी भय रखते हैं, वे एक सक्रीय सैनिक जीवन में एक साथ देखने को मिलते हैं। जैसे बीमारी के समय की तकलीफ और मृत्यु का भय; निर्धनता के समय के खराब निवास-स्थान, गर्मी- ठण्ड, भूख-प्यास का भय; दासत्व के समय के कठोर बेगार, निरादर, अन्याय और मनमाने व्यवहार का भय; देश निकाले के समय हर प्रकार के प्रेम से दूर हो जाने का भय।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने एक सैनिक के अपने सैनिक सेवकाई में कठिनाइयाँ उठाने की उपमा के द्वारा मसीह यीशु की सेवकाई में एक मसीही विश्वासी को होने वाली कठिनाइयों को समझाया। पौलुस ने, जो अब अपने जीवन के अन्त के निकट था, मसीह यीशु के सुसमाचार की अपनी सेवा के समय में बहुत कठिनाइयों और दुखों को विश्वासयोग्यता के साथ झेला था। अब अपने अन्त समय के निकट आकर उसने अपने संगी सेवक युवा तिमुथियुस से कहा, "मसीह यीशु के अच्‍छे योद्धा के समान मेरे साथ दुख उठा" (2 तिमुथियुस 2:3)।

   मसीह यीशु की सेवा करने के लिए बहुत धीरज की आवश्यकता होती है। मसीही सेवकों के सामने अस्वस्थता, संबंधों में परेशानियाँ, कठिन परिस्थितियों, आदि जैसी कई बाधाएं आ सकती हैं, परन्तु एक अच्छे सैनिक के समान उन्हें परमेश्वर की सामर्थ्य के सहारे सबका सामना करते हुए आगे ही बढ़ते जाना है - क्योंकि वे राजाओं के राजा और प्रभुओं के प्रभु के सेवक हैं। उसके सेवक हैं जिसने हमारी भलाई के लिए अपना सब कुछ त्याग दिया, अपने आप को हमारे लिए शून्य कर दिया, अपना जीवन बलिदान कर दिया। - डेनिस फिशर


परमेश्वर का प्रेम हमें परीक्षाओं से बचा कर नहीं रखता है, 
वरन उनमें से सुरक्षित निकाल कर लाता है।

जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो। जिसने परमेश्वर के स्‍वरूप में हो कर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा। वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया। और मनुष्य के रूप में प्रगट हो कर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली। - फिलिप्पियों 2:5-8

बाइबल पाठ: 2 तिमुथियुस 2:1-10
2 Timothy 2:1 इसलिये हे मेरे पुत्र, तू उस अनुग्रह से जो मसीह यीशु में है, बलवन्‍त हो जा।
2 Timothy 2:2 और जो बातें तू ने बहुत गवाहों के साम्हने मुझ से सुनी हैं, उन्हें विश्वासी मनुष्यों को सौंप दे; जो औरों को भी सिखाने के योग्य हों। 
2 Timothy 2:3 मसीह यीशु के अच्‍छे योद्धा के समान मेरे साथ दुख उठा। 
2 Timothy 2:4 जब कोई योद्धा लड़ाई पर जाता है, तो इसलिये कि अपने भरती करने वाले को प्रसन्न करे, अपने आप को संसार के कामों में नहीं फंसाता 
2 Timothy 2:5 फिर अखाड़े में लड़ने वाला यदि विधि के अनुसार न लड़े तो मुकुट नहीं पाता। 
2 Timothy 2:6 जो गृहस्थ परिश्रम करता है, फल का अंश पहिले उसे मिलना चाहिए। 
2 Timothy 2:7 जो मैं कहता हूं, उस पर ध्यान दे और प्रभु तुझे सब बातों की समझ देगा। 
2 Timothy 2:8 यीशु मसीह को स्मरण रख, जो दाऊद के वंश से हुआ, और मरे हुओं में से जी उठा; और यह मेरे सुसमाचार के अनुसार है। 
2 Timothy 2:9 जिस के लिये मैं कुकर्मी की नाईं दुख उठाता हूं, यहां तक कि कैद भी हूं; परन्तु परमेश्वर का वचन कैद नहीं। 
2 Timothy 2:10 इस कारण मैं चुने हुए लोगों के लिये सब कुछ सहता हूं, कि वे भी उस उद्धार को जो मसीह यीशु में हैं अनन्त महिमा के साथ पाएं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 26-28
  • प्रेरितों 22


बुधवार, 19 जुलाई 2017

बड़ाई


   अमेरिका में अश्वेत नागरिकों को उनके अधिकारों को दिलवाने वाली एक प्रमुख महिला रोज़ा पार्कर का निधन 2005 में हुआ। उनके निधन पर प्रसिद्ध टी.वी. कार्यक्रम प्रस्तुतकर्ता, ओप्रा विन्फ्रे ने इसे अपना सौभाग्य समझा कि उन्हें उनके बारे में कुछ कहने का अवसर दिया गया। रोज़ा पार्कर के साथ 1955 में हुई घटना, जब उन्होंने बस में यात्रा करने के समय एक श्वेत व्यक्ति के लिए अपनी सीट छोड़ने से इंकार किया था, के विषय में  उनकी बड़ाई करते हुए ओप्रा ने कहा, "मैं बहुधा सोचती हूँ कि ऐसा करने के लिए कैसे साहस की आवश्यकता रही होगी - उस समय के जातिवाद संबंधी सामाजिक वातावरण को जानते हुए और यह भी जानते हुए कि इस प्रातिरोध के कारण उनके साथ कुछ भी हो सकता था - फिर भी अपनी सीट पर बने रहना, उसे न छोड़ना, इसके लिए उन्हें कैसी कीमत चुकानी पड़ी होगी। परन्तु उन्होंने अपनी भलाई की परवाह किए बिना यह किया और हम सब के लिए जीवन बेहतर बना दिया।"

   बड़ाई केवल अन्तयेष्टि के समय ही नहीं वरन अनेकों अन्य समयों पर की जा सकती है। परमेश्वर के वचन बाइबल में, इफसुस के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री की आरंभिक पंक्तियाँ प्रेरित पौलुस द्वारा की गई परमेश्वर की बड़ाई है; उसने लिखा, "हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर और पिता का धन्यवाद हो, कि उसने हमें मसीह में स्‍वर्गीय स्थानों में सब प्रकार की आशीष दी है" (इफिसियों 1:3)। पौलुस ने इफसुस के मसीही विश्वासियों को आमंत्रित किया कि वे भी उसके साथ मिलकर परमेश्वर की बड़ाई करें, उन सब आत्मिक आशीषों के लिए जो परमेश्वर से मिली हैं: परमेश्वर ने उन्हें चुना और अपनी लेपालक संतान बना लिया; प्रभु यीशु ने पाप के बन्धनों से छुड़ाया, पापों को क्षमा किया और सुसमाचार का भेद प्रकट किया; परमेश्वर के पवित्र आत्मा द्वारा उन पर छाप लगी और गारण्टी मिली। यह महान उद्धार केवल परमेश्वर के अनुग्रह का कार्य था।

   हम मसीह यीशु में होकर मिलने वाली परमेश्वर की आशीषों पर अपने ध्यान केंद्रित रखें; जब हम यह करेंगे, तो हम पाएंगे कि हमारे हृदय, उसकी महिमा और स्तुति करने के लिए, परमेश्वर की बड़ाई से उमड़ रहे हैं। - मार्विन विलियम्स


पाप के बन्धनों से मुक्त हुई आत्मा से निकला स्तुति-गीत ही बड़ाई है।

धन्य है, यहोवा परमेश्वर जो इस्राएल का परमेश्वर है; आश्चर्य कर्म केवल वही करता है। उसका महिमायुक्त नाम सर्वदा धन्य रहेगा; और सारी पृथ्वी उसकी महिमा से परिपूर्ण होगी। आमीन फिर आमीन। - भजन 72:18-19

बाइबल पाठ: इफिसियों 1:1-14
Ephesians 1:1 पौलुस की ओर से जो परमेश्वर की इच्छा से यीशु मसीह का प्रेरित है, उन पवित्र और मसीह यीशु में विश्वासी लोगों के नाम जो इफिसुस में हैं।
Ephesians 1:2 हमारे पिता परमेश्वर और प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शान्‍ति मिलती रहे।
Ephesians 1:3 हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर और पिता का धन्यवाद हो, कि उसने हमें मसीह में स्‍वर्गीय स्थानों में सब प्रकार की आशीष दी है। 
Ephesians 1:4 जैसा उसने हमें जगत की उत्‍पति से पहिले उस में चुन लिया, कि हम उसके निकट प्रेम में पवित्र और निर्दोष हों। 
Ephesians 1:5 और अपनी इच्छा की सुमति के अनुसार हमें अपने लिये पहिले से ठहराया, कि यीशु मसीह के द्वारा हम उसके लेपालक पुत्र हों, 
Ephesians 1:6 कि उसके उस अनुग्रह की महिमा की स्‍तुति हो, जिसे उसने हमें उस प्यारे में सेंत मेंत दिया। 
Ephesians 1:7 हम को उस में उसके लोहू के द्वारा छुटकारा, अर्थात अपराधों की क्षमा, उसके उस अनुग्रह के धन के अनुसार मिला है। 
Ephesians 1:8 जिसे उसने सारे ज्ञान और समझ सहित हम पर बहुतायत से किया। 
Ephesians 1:9 कि उसने अपनी इच्छा का भेद उस सुमति के अनुसार हमें बताया जिसे उसने अपने आप में ठान लिया था। 
Ephesians 1:10 कि समयों के पूरे होने का ऐसा प्रबन्‍ध हो कि जो कुछ स्वर्ग में है, और जो कुछ पृथ्वी पर है, सब कुछ वह मसीह में एकत्र करे। 
Ephesians 1:11 उसी में जिस में हम भी उसी की मनसा से जो अपनी इच्छा के मत के अनुसार सब कुछ करता है, पहिले से ठहराए जा कर मीरास बने। 
Ephesians 1:12 कि हम जिन्हों ने पहिले से मसीह पर आशा रखी थी, उस की महिमा की स्‍तुति के कारण हों। 
Ephesians 1:13 और उसी में तुम पर भी जब तुम ने सत्य का वचन सुना, जो तुम्हारे उद्धार का सुसमाचार है, और जिस पर तुम ने विश्वास किया, प्रतिज्ञा किए हुए पवित्र आत्मा की छाप लगी। 
Ephesians 1:14 वह उसके मोल लिये हुओं के छुटकारे के लिये हमारी मीरास का बयाना है, कि उस की महिमा की स्‍तुति हो।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 23-25
  • प्रेरितों 21:18-40