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शनिवार, 20 जून 2020

प्रत्येक पल


     मैं जब एडा से मिला, वह अकेली रहने वाली वृद्धा थी, और एक नर्सिंग होम में रहती थी। उसके साथ के परिवार तथा मित्र जन अपनी आयु पूरी करके सँसार से जा चुके थे। एडा ने मुझ से कहा, “वृद्ध होने का यह सबसे कठिन भाग है, आप के देखते-देखते, सभी आप को छोड़कर चले जाते हैं।” एक दिन मैंने एडा से पूछा कि वह अपना समय कैसे बिताती है, उसकी पसंद की बातें क्या हैं? उसने परमेश्वर के वचन बाइबल में से प्रेरित पौलुस द्वारा लिखे एक पद के द्वारा उत्तर दिया: “क्योंकि मेरे लिये जीवित रहना मसीह है, और मर जाना लाभ है” (फिलिप्पियों 1:21)। फिर उस ने कहा, जब तक मैं यहाँ हूँ, मेरे पास करने के लिए कार्य है। अपने अच्छे दिनों में मैं यहाँ के लोगों के साथ प्रभु यीशु के बारे में बातचीत करती हूँ; और कठिन दिनों में, मैं प्रार्थना करती रहती हूँ।

     यह महत्वपूर्ण है कि पौलुस ने फिलिप्प्यों को यह पत्री कैद से लिखी थी, और उसने एक ऐसी वास्तविकता को पहचाना था जिसे बहुतेरे मसीही भी समझते हैं, जब वे अपने दिनों के समाप्त होने की प्रतीक्षा कर रहे होते हैं। पौलुस का अभिप्राय था, यद्यपि स्वर्ग इतना आकर्षक प्रतीत होता है, किन्तु फिर भी हमारा जो भी समय यहाँ पृथ्वी पर शेष है, परमेश्वर के लिए उसका महत्त्व है।

     पौलुस के समान, एडा ने पहचाना कि हर साँस जो वह लेती है, परमेश्वर की सेवा करने और उसे महिमा देने का एक अवसर होता है। इसलिए एडा अपने दिनों को औरों के प्रति प्रेम प्रदर्शित करने और उन्हें अपने उद्धाकर्ता से परिचित करवाने में व्यतीत करती थी।

     हमारे सबसे कठिन समयों में भी, हम मसीही विश्वासी परमेश्वर के साथ मिलने वाले अनन्तकालीन परमानन्द की प्रतिज्ञा में आश्वस्त बने रह सकते हैं। और हम जब तक जीवित हैं, हम अपने प्रभु परमेश्वर के साथ संगति का आनन्द लेते रह सकते हैं, क्योंकि वह हमारे जीवन के प्रत्येक पल को महत्वपूर्ण बनाए रखता है। - रैंडी किलगोर

 

जब परमेश्वर हमें घर ले जाने के लिए, तो वह हमको उसके कार्य में व्यस्त पाए।


इसलिये तुम भी तैयार रहो, क्योंकि जिस घड़ी के विषय में तुम सोचते भी नहीं हो, उसी घड़ी मनुष्य का पुत्र आ जाएगा। - मत्ती 24:44

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 1:12-24

फिलिप्पियों 1:12 हे भाइयों, मैं चाहता हूं, कि तुम यह जान लो, कि मुझ पर जो बीता है, उस से सुसमाचार ही की बढ़ती हुई है।

फिलिप्पियों 1:13 यहां तक कि कैसरी राज्य की सारी पलटन और शेष सब लोगों में यह प्रगट हो गया है कि मैं मसीह के लिये कैद हूं।

फिलिप्पियों 1:14 और प्रभु में जो भाई हैं, उन में से बहुधा मेरे कैद होने के कारण, हियाव बान्‍ध कर, परमेश्वर का वचन निधड़क सुनाने का और भी हियाव करते हैं।

फिलिप्पियों 1:15 कितने तो डाह और झगड़े के कारण मसीह का प्रचार करते हैं और कितने भली मनसा से।

फिलिप्पियों 1:16 कई एक तो यह जान कर कि मैं सुसमाचार के लिये उत्तर देने को ठहराया गया हूं प्रेम से प्रचार करते हैं।

फिलिप्पियों 1:17 और कई एक तो सीधाई से नहीं पर विरोध से मसीह की कथा सुनाते हैं, यह समझ कर कि मेरी कैद में मेरे लिये क्‍लेश उत्पन्न करें।

फिलिप्पियों 1:18 सो क्या हुआ? केवल यह, कि हर प्रकार से चाहे बहाने से, चाहे सच्चाई से, मसीह की कथा सुनाई जाती है, और मैं इस से आनन्‍दित हूं, और आनन्‍दित रहूंगा भी।

फिलिप्पियों 1:19 क्योंकि मैं जानता हूं, कि तुम्हारी बिनती के द्वारा, और यीशु मसीह की आत्मा के दान के द्वारा इस का प्रतिफल मेरा उद्धार होगा।

फिलिप्पियों 1:20 मैं तो यही हादिर्क लालसा और आशा रखता हूं, कि मैं किसी बात में लज्ज़ित न होऊं, पर जैसे मेरे प्रबल साहस के कारण मसीह की बड़ाई मेरी देह के द्वारा सदा होती रही है, वैसा ही अब भी हो चाहे मैं जीवित रहूं या मर जाऊं।

फिलिप्पियों 1:21 क्योंकि मेरे लिये जीवित रहना मसीह है, और मर जाना लाभ है।

फिलिप्पियों 1:22 पर यदि शरीर में जीवित रहना ही मेरे काम के लिये लाभदायक है तो मैं नहीं जानता, कि किस को चुनूं।

फिलिप्पियों 1:23 क्योंकि मैं दोनों के बीच अधर में लटका हूं; जी तो चाहता है कि कूच कर के मसीह के पास जा रहूं, क्योंकि यह बहुत ही अच्छा है।

फिलिप्पियों 1:24 परन्तु शरीर में रहना तुम्हारे कारण और भी आवश्यक है।    

 

एक साल में बाइबल: 

  • एस्तेर 1-2
  • प्रेरितों 5:1-21


शुक्रवार, 19 जून 2020

अनुग्रह


     मैं जब भी लोगों को अपने मोबाइल फोन के प्रयोग में मगन होकर सड़क पर चलते हुए देखती थी, तो मन ही मन में मैं उन्हें लापरवाह होने का दोषी ठहराती थी। मुझे समझ में नहीं आता था कि वे अपनी सुरक्षा को लेकर इतने लापरवाह कैसे हो सकते हैं की आती-जाती गाड़ियों से टकरा जाने का जोखिम उठाए हुए ध्यान कहीं और लगाए हुए सड़क पर चलते चले जाते हैं। परन्तु एक दिन एक गली के मुहाने को पार करते हुए मैं अपने मोबाइल फोन पर आए एक सन्देश में इतनी मगन थी, कि मैंने गली में से आती हुई कार को देखा ही नहीं, उसके सामने आ गई। परन्तु उस कार के चालक ने मुझे देख लिया था, और उसने तुरंत ब्रेक लगा कर दुर्घटना होने से बचा लिया; परन्तु उसके चहरे पर जो खिसियाहट के भाव उभर कर आए, उन्हें मैं भुला नहीं सकती हूँ। मैं जिस बात के लिए लोगों पर दोष मढ़ती रहती थी, अपने आप को भला और उन्हें बुरा समझती रहती थी, मैं भी उसी गलती की दोषी थी; मेरा पाखण्ड मेरे सामने था।

     परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु मसीह ने अपने पहाड़ी उपदेश में इसी प्रकार के पाखण्ड को संबोधित किया है। प्रभु ने कहा, “हे कपटी, पहले अपनी आंख में से लट्ठा निकाल ले, तब तू अपने भाई की आंख का तिनका भली भांति देखकर निकाल सकेगा” (मत्ती 7:5)। मैं भी अपनी आँखों में एक बड़ा सा लट्ठा लिए चल रही थी, जो मुझे अपनी ही गलतियों को देखने नहीं दे रहा था; और मैं दूसरों को ही दोषी समझती रहती थी। जिस खिसियाहट को मैं दूसरों के प्रति व्यक्त करती थी, उस दिन वही मेरे लिए भी उस कार चालक के चेहरे पर प्रकट थी।

     हम में से कोई भी सिद्ध नहीं है, हम सभी गलतियाँ करते हैं; वही गलतियाँ जिनके लिए हम औरों को दोषी ठहराते हैं। हम भूल जाते हैं कि हमारा अनुग्रहकारी परमेश्वर पिता हमारी कितनी बर्दाश्त करता है, हमें कितने अवसर देता है, हमें कितनी गलतियों के दुष्परिणामों से बचाता है। यह उसका अनुग्रह और प्रेम ही है जो हमें नष्ट नहीं होने देता है। - लिंडा वॉशिंगटन

 

औरों पर दोष लगाने में जल्दबाज़ी कभी न करें।


यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। - 1 यूहन्ना 1:9

बाइबल पाठ: मत्ती 7:1-6

मत्ती 7:1 दोष मत लगाओ, कि तुम पर भी दोष न लगाया जाए।

मत्ती 7:2 क्योंकि जिस प्रकार तुम दोष लगाते हो, उसी प्रकार तुम पर भी दोष लगाया जाएगा; और जिस नाप से तुम नापते हो, उसी से तुम्हारे लिये भी नापा जाएगा।

मत्ती 7:3 तू क्यों अपने भाई की आंख के तिनके को देखता है, और अपनी आंख का लट्ठा तुझे नहीं सूझता?

मत्ती 7:4 और जब तेरी ही आंख मे लट्ठा है, तो तू अपने भाई से क्योंकर कह सकता है, कि ला मैं तेरी आंख से तिनका निकाल दूं।

मत्ती 7:5 हे कपटी, पहले अपनी आंख में से लट्ठा निकाल ले, तब तू अपने भाई की आंख का तिनका भली भांति देखकर निकाल सकेगा।

मत्ती 7:6 पवित्र वस्तु कुत्तों को न दो, और अपने मोती सूअरों के आगे मत डालो; ऐसा न हो कि वे उन्हें पांवों तले रौंदें और पलट कर तुम को फाड़ डालें।   

 

एक साल में बाइबल: 

  • नहेम्याह 12-13
  • प्रेरितों 4:23-37


गुरुवार, 18 जून 2020

मुसीबत


     यद्यपि मैं अनुग्रहकारी परमेश्वर में विश्वास करती हूँ, फिर भी कभी-कभी मेरी प्रवृत्ति रहती है कि मुझे उसकी सहायता तब ही उपलब्ध होगी, जब मैं उसके योग्य बनूँगी; और ऐसे में मेरा विचार रहता है, ‘ये मुसीबत मैंने ही अपने लिए खड़ी की है; अब मुझे ही इस में से निकलने का मार्ग भी बनाना होगा।’

     परमेश्वर के वचन बाइबल में हम याकूब के जीवन से देखते हैं कि यह धारणा रखना कितना गलत है। याकूब ने अपनी नियति बदलने के लिए हर संभव प्रयास किया। वह दो भाइयों में से छोटा था, और उन दिनों में पहलौठे पुत्र को पिता की आशीषें दी जाती थीं, और माना जाता था कि यह उनके संपन्न भविष्य को निश्चित करता था। इसलिए अपने पिता की आशीषों को प्राप्त करने के लिए याकूब ने हर हथकंडा अपना लिया। अंततः, उसने धोखे के द्वारा, अपने पिता की पहलौठे की आशीषें प्राप्त तो कर लीं (उत्पत्ति 27:19-29), परन्तु परिणाम परिवार का विभाजन था, और उसे अपने बड़े भाई के क्रोध से अपनी जान बचा कर भागना पड़ा (पद 41-43)।

     रात में अकेले, मैदान में पत्थर को तकिया बना कर लेटे हुए, उसे परमेश्वर ने दर्शन दिया, उस से बातचीत की (उत्पत्ति 28:11); और याकूब ने जाना कि आशीषें पाने के लिए उसे दुस्साहसिक योजनाएँ बनाने की आवश्यकता नहीं है, वह तो पहले से ही आशीषित है। उसकी नियति, उसके जीवन का उद्देश्य, जो सांसारिक समृद्धि और सम्पन्नता से कहीं बढ़कर था (पद 14), उस परमेश्वर के हाथों में सुरक्षित था, जो उसे कभी नहीं छोड़ेगा (पद 15)। यह एक ऐसा पाठ था, जिसकी शिक्षाएँ याकूब जीवन भर सीखता रहा।

     यही हम मसीही विश्वासियों के लिए भी सत्य है। हम चाहे कितनी भी निराशाएँ जीवन में लेकर चलें, या हमें परमेश्वर कितना भी दूर प्रतीत हो, परन्तु वह सदा हमारे पास है, हमारे साथ है, हमारे लिए उपलब्ध है। वह कोमलता से हमें हमारी मुसीबतों में से निकालकर, अपनी आशीषों में लिए चलता रहता है। - मोनिका ब्रैंड्स

 

हमारे जीवनों के लिए उस के प्रेम और निर्धारित उद्देश्यों को परमेश्वर कभी नहीं छोड़ता है।


और मुझे इस बात का भरोसा है, कि जिसने तुम में अच्छा काम आरम्भ किया है, वही उसे यीशु मसीह के दिन तक पूरा करेगा। - फिलिप्पियों 1:6

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 28:10-22

उत्पत्ति 28:10 सो याकूब बेर्शेबा से निकल कर हारान की ओर चला।

उत्पत्ति 28:11 और उसने किसी स्थान में पहुंच कर रात वहीं बिताने का विचार किया, क्योंकि सूर्य अस्त हो गया था; सो उसने उस स्थान के पत्थरों में से एक पत्थर ले अपना तकिया बना कर रखा, और उसी स्थान में सो गया।

उत्पत्ति 28:12 तब उसने स्वप्न में क्या देखा, कि एक सीढ़ी पृथ्वी पर खड़ी है, और उसका सिरा स्वर्ग तक पहुंचा है: और परमेश्वर के दूत उस पर से चढ़ते उतरते हैं।

उत्पत्ति 28:13 और यहोवा उसके ऊपर खड़ा हो कर कहता है, कि मैं यहोवा, तेरे दादा इब्राहीम का परमेश्वर, और इसहाक का भी परमेश्वर हूं: जिस भूमि पर तू पड़ा है, उसे मैं तुझ को और तेरे वंश को दूंगा।

उत्पत्ति 28:14 और तेरा वंश भूमि की धूल के किनकों के समान बहुत होगा, और पच्छिम, पूरब, उत्तर, दक्खिन, चारों ओर फैलता जाएगा: और तेरे और तेरे वंश के द्वारा पृथ्वी के सारे कुल आशीष पाएंगे।

उत्पत्ति 28:15 और सुन, मैं तेरे संग रहूंगा, और जहां कहीं तू जाए वहां तेरी रक्षा करूंगा, और तुझे इस देश में लौटा ले आऊंगा: मैं अपने कहे हुए को जब तक पूरा न कर लूं तब तक तुझ को न छोडूंगा।

उत्पत्ति 28:16 तब याकूब जाग उठा, और कहने लगा; निश्चय इस स्थान में यहोवा है; और मैं इस बात को न जानता था।

उत्पत्ति 28:17 और भय खा कर उसने कहा, यह स्थान क्या ही भयानक है! यह तो परमेश्वर के भवन को छोड़ और कुछ नहीं हो सकता; वरन यह स्वर्ग का फाटक ही होगा।

उत्पत्ति 28:18 भोर को याकूब तड़के उठा, और अपने तकिए का पत्थर ले कर उसका खम्भा खड़ा किया, और उसके सिरे पर तेल डाल दिया।

उत्पत्ति 28:19 और उसने उस स्थान का नाम बेतेल रखा; पर उस नगर का नाम पहिले लूज था।

उत्पत्ति 28:20 और याकूब ने यह मन्नत मानी, कि यदि परमेश्वर मेरे संग रहकर इस यात्रा में मेरी रक्षा करे, और मुझे खाने के लिये रोटी, और पहिनने के लिये कपड़ा दे,

उत्पत्ति 28:21 और मैं अपने पिता के घर में कुशल क्षेम से लौट आऊं: तो यहोवा मेरा परमेश्वर ठहरेगा।

उत्पत्ति 28:22 और यह पत्थर, जिसका मैं ने खम्भा खड़ा किया है, परमेश्वर का भवन ठहरेगा: और जो कुछ तू मुझे दे उसका दशमांश मैं अवश्य ही तुझे दिया करूंगा।   

 

एक साल में बाइबल: 

  • नहेम्याह 10-11
  • प्रेरितों 4:1-22


बुधवार, 17 जून 2020

सुरक्षित स्थान


     मेरा सब से पहला काम एक फास्ट-फूड रेस्टोरेंट में था। एक शनिवार की संध्या को, एक लड़का वहाँ रेस्टोरेंट में बैठा रहा, मुझ से पूछता रहा कि मैं काम ख़तम करके कब निकलती हूँ। समय बीतने के साथ, वह कभी कुछ, और कभी कुछ और खरीद कर खाता या पीता रहता, जिससे मैनेजर उसे बाहर न निकाल सके। उसकी यह बातें मुझे परेशान कर रही थीं, मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा था। यद्यपि मेरा घर वहाँ से कुछ अधिक दूर तो नहीं था, किन्तु मुझे चल कर जाना होता था, और रास्ते का कुछ भाग सुनसान था, और ऐसे में मैं देर रात उस सुनसान हिस्से से अकली जाना नहीं चाह रही थी। अंततः लगभग आधी रात के समय, सभी काम समाप्त करके, मैं अन्दर दफतर में गई, वहां से मैंने एक फोन किया। जिस व्यक्ति ने मेरा फोन उठाया, मेरे पिता जी ने, उन्होंने गर्म बिस्तर से बाहर निकल कर मेरे पास आने में कोई परेशानी अनुभव नहीं की; पांच मिनिट में वे मेरे पास थे, और मुझे सुरक्षित घर ले गए।

     मुझे जो इस प्रकार की निश्चितता थी, कि मेरी आवश्यकता के समय में मेरे पिताजी मेरी सहायता के लिए आएँगे, मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में हमारे स्वर्गीय परमेश्वर पिता की विश्वासयोग्यता और आश्वासन की याद दिलाते है जो भजन 91 में दिया गया है। हमारा स्वर्गीय प्रभु परमेश्वर सदैव हमारे साथ बना रहता है, हमारी रक्षा करता रहता है, हमारी देखभाल करता है, और हम जब भी दुविधा में होते हैं, परेशान होते हैं, या भयभीत होते हैं, हमें आश्वस्त करता है, हमारा मार्गदर्शन करता है। वह कहता है, “जब वह मुझ को पुकारे, तब मैं उसकी सुनूंगा; संकट में मैं उसके संग रहूंगा, मैं उसको बचा कर उसकी महिमा बढ़ाऊंगा” (भजन 91:15)। वह केवल हमारी सुनता ही नहीं है, वह हमारा शरणस्थान भी है (पद 1); वह हमारी ऐसी दृढ़ चट्टान है जिसे हम थामे रह सकते हैं (पद 2), जिस पर हम स्थिर बने रहा सकते हैं।

     भय, खतरे, या अनिश्चितता के सभी समयों में हम परमेश्वर की प्रतिज्ञा पर भरोसा रख सकते हैं कि हम जब भी उसे पुकारेंगे, वह हमारी सुनेगा, और हमारे संकट में हमारी सहायता के लिए हमारे साथ होगा (पद 14-15); प्रभु परमेश्वर हमारा सुरक्षित स्थान है। - सिंडी हैस कैस्पर

 

जीवता परमेश्वर सदा हमारा सुरक्षित शरणस्थान बना रहेगा।


मेरे लिये सनातन काल की चट्टान का धाम बन, जिस में मैं नित्य जा सकूं; तू ने मेरे उद्धार की आज्ञा तो दी है, क्योंकि तू मेरी चट्टान और मेरा गढ़ ठहरा है। - भजन 71:3

बाइबल पाठ: भजन 91

भजन संहिता 91:1 जो परमप्रधान के छाए हुए स्थान में बैठा रहे, वह सर्वशक्तिमान की छाया में ठिकाना पाएगा।

भजन संहिता 91:2 मैं यहोवा के विषय कहूंगा, कि वह मेरा शरणस्थान और गढ़ है; वह मेरा परमेश्वर है, मैं उस पर भरोसा रखूंगा।

भजन संहिता 91:3 वह तो तुझे बहेलिये के जाल से, और महामारी से बचाएगा;

भजन संहिता 91:4 वह तुझे अपने पंखों की आड़ में ले लेगा, और तू उसके पैरों के नीचे शरण पाएगा; उसकी सच्चाई तेरे लिये ढाल और झिलम ठहरेगी।

भजन संहिता 91:5 तू न रात के भय से डरेगा, और न उस तीर से जो दिन को उड़ता है,

भजन संहिता 91:6 न उस मरी से जो अन्धेरे में फैलती है, और न उस महारोग से जो दिन दुपहरी में उजाड़ता है।

भजन संहिता 91:7 तेरे निकट हजार, और तेरी दाहिनी ओर दस हजार गिरेंगे; परन्तु वह तेरे पास न आएगा।

भजन संहिता 91:8 परन्तु तू अपनी आंखों की दृष्टि करेगा और दुष्टों के अन्त को देखेगा।

भजन संहिता 91:9 हे यहोवा, तू मेरा शरण स्थान ठहरा है। तू ने जो परमप्रधान को अपना धाम मान लिया है,

भजन संहिता 91:10 इसलिये कोई विपत्ति तुझ पर न पड़ेगी, न कोई दु:ख तेरे डेरे के निकट आएगा।

भजन संहिता 91:11 क्योंकि वह अपने दूतों को तेरे निमित्त आज्ञा देगा, कि जहां कहीं तू जाए वे तेरी रक्षा करें।

भजन संहिता 91:12 वे तुझ को हाथों हाथ उठा लेंगे, ऐसा न हो कि तेरे पांवों में पत्थर से ठेस लगे।

भजन संहिता 91:13 तू सिंह और नाग को कुचलेगा, तू जवान सिंह और अजगर को लताड़ेगा।

भजन संहिता 91:14 उसने जो मुझ से स्नेह किया है, इसलिये मैं उसको छुड़ाऊंगा; मैं उसको ऊंचे स्थान पर रखूंगा, क्योंकि उसने मेरे नाम को जान लिया है।

भजन संहिता 91:15 जब वह मुझ को पुकारे, तब मैं उसकी सुनूंगा; संकट में मैं उसके संग रहूंगा, मैं उसको बचा कर उसकी महिमा बढ़ाऊंगा।

भजन संहिता 91:16 मैं उसको दीर्घायु से तृप्त करूंगा, और अपने किए हुए उद्धार का दर्शन दिखाऊंगा।   

 

एक साल में बाइबल: 

  • नहेम्याह 7-9
  • प्रेरितों 3


मंगलवार, 16 जून 2020

कहा है


     छुट्टियों के एक समय में, मैंने और मेरे पति ने एक नदी में शांत नौका विहार करने का निर्णय किया। हमने नौका विहार के विज्ञापन देखे, एक नौका विहार को चुना, उसके लिए पैसे भरे, और नौका विहार करवाने वालों के कहे के अनुसार हम यात्रा के आरम्भ स्थान पर पहुँच गए। वहाँ पहुँच कर हमें ज्ञात हुआ कि उनके द्वारा दिए गए विज्ञापन के विपरीत, नौका विहार में कुछ दूरी तेज़ बहते और उछलते हुए पानी की भी थी। उन्होंने मेरे पति को नौका के चप्पू चलाने और नाव को संभालने की कुछ मूल बातें सिखाईं, और हमें आश्वस्त किया कि वे लोग हमें सुरक्षित हमारे विहार के अंतिम छोर तक ले जाएँगे; हम ने धन्यावद किया कि अनुभवी नौका चालक हमारे साथ थे। हमने अपनी जीवन रक्षक जैकेट पहनीं, और हम नदी में चल दिए; तेज़ बहाव के स्थान पर मैं कसकर नाव के प्लास्टिक के हैंडल को पकड़े हुए चिल्लाती रही, जब तक कि हम शांत बहाव में पहुँच कर किनारे नहीं लग गए। नाव से उतर कर हमने अपने कपड़े निचोड़े, पर्स में से पानी निकाला, और यद्यपि वह यात्रा हमारी अपेक्षा के अनुसार तो नहीं रही थी, फिर भी हम एक-दूसरे को देख कर हँस पड़े।

     उस नौका विहार के विज्ञापन के विपरीत, जिसमें उन लोगों ने उस विहार से सम्बंधित एक मुख्य बात नहीं बताई थी, परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु ने अपने शिष्यों को यह स्पष्ट बता दिया था कि भविष्य में उनके लिए कठिन दिन रखे हुए हैं। प्रभु ने उन से कहा दिया कि वह स्वयं भी मारा जाएगा और उसका पुनरुत्थान होगा, और आते समय में वे भी सताए जाएँगे, मारे जाएँगे। साथ ही उसने उन्हें अपने विश्वासयोग्य होने का भी आश्वासन दिया, और इसका भी कि वह उन्हें एक चिरस्थाई विजय और अनानात्कालीन आशा में ले जाएगा (यूहन्ना 16:16-33)।

     यदि प्रभु का अनुसरण करते हुए जीवन सरल होता तो बहुत अच्छा होता, परन्तु प्रभु ने अपने अनुयायियों को यह स्पष्ट बता दिया है कि उन्हें कठिनाइयों और विरोधों का सामना करना पड़ेगा। हमारी ये परीक्षाएँ परमेश्वर द्वारा हमारे लिए बनाई गई योजनाओं को न तो परिभाषित करेंगी, न ही उन्हें सीमित करेंगी, और न ही उन्हें बिगाडेंगी या नष्ट करेंगी। प्रभु यीशु के पुनरुत्थान और मृत्यु पर विजय ने हमारे लिए अनन्त विजय सुनिश्चित कर दी है, और प्रभु ने हम से यही कहा है। - होकिटिल डिक्सन

 

प्रभु यीशु सबसे कठिन समयों में भी हमारे साथ रहता है।


हे मृत्यु तेरी जय कहां रही? हे मृत्यु तेरा डंक कहां रहा? मृत्यु का डंक पाप है; और पाप का बल व्यवस्था है। परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा हमें जयवन्‍त करता है। - 1 कुरिन्थियों 15:55-57

बाइबल पाठ: यूहन्ना 16:25-33

यूहन्ना 16:25 मैं ने ये बातें तुम से दृष्‍टान्‍तों में कही हैं, परन्तु वह समय आता है, कि मैं तुम से दृष्‍टान्‍तों में और फिर नहीं कहूंगा परन्तु खोल कर तुम्हें पिता के विषय में बताऊंगा।

यूहन्ना 16:26 उस दिन तुम मेरे नाम से मांगोगे, और मैं तुम से यह नहीं कहता, कि मैं तुम्हारे लिये पिता से बिनती करूंगा।

यूहन्ना 16:27 क्योंकि पिता तो आप ही तुम से प्रीति रखता है, इसलिये कि तुम ने मुझ से प्रीति रखी है, और यह भी प्रतीति की है, कि मैं पिता कि ओर से निकल आया।

यूहन्ना 16:28 मैं पिता से निकलकर जगत में आया हूं, फिर जगत को छोड़कर पिता के पास जाता हूं।

यूहन्ना 16:29 उसके चेलों ने कहा, देख, अब तो तू खोल कर कहता है, और कोई दृष्‍टान्‍त नहीं कहता।

यूहन्ना 16:30 अब हम जान गए, कि तू सब कुछ जानता है, और तुझे प्रयोजन नहीं, कि कोई तुझ से पूछे, इस से हम प्रतीति करते हैं, कि तू परमेश्वर से निकला है।

यूहन्ना 16:31 यह सुन यीशु ने उन से कहा, क्या तुम अब प्रतीति करते हो?

यूहन्ना 16:32 देखो, वह घड़ी आती है वरन आ पहुंची कि तुम सब तित्तर बित्तर हो कर अपना अपना मार्ग लोगे, और मुझे अकेला छोड़ दोगे, तौभी मैं अकेला नहीं क्योंकि पिता मेरे साथ है।

यूहन्ना 16:33 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्‍ति मिले; संसार में तुम्हें क्‍लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीत लिया है।    

 

एक साल में बाइबल: 

  • नहेम्याह 4-6
  • प्रेरितों 2:22-47


सोमवार, 15 जून 2020

प्रेम के योग्य


     मेरी बेटी एक प्रातः तैयार हो रही थी, और अचानक ही बड़े उत्साह और आनन्द के साथ ऊँची आवाज़ में बोली “Lovable (प्रेम-योग्य);” मुझे समझ नहीं आया उसका अभिप्राय क्या था। मेरे चहरे के भाव को देखकर उसने अपनी टी-शर्ट पर लिखे हुए शब्द की ओर संकेत किया, जहाँ पर बड़े अक्षरों में लिखा था, “Lovable (प्रेम के योग्य)।” मैंने उसे गले से लगाया, और वह आनन्द से मुस्कुराने लगी, और जब मैंने उस से कहा, “तुम प्रेम के योग्य हो” तो उसकी मुस्कराहट और भी बड़ी हो गई; और वह इस शब्द को बारंबार दोहराती हुई कूदती हुई बाहर चली गई।

     मैं कोई सिद्ध पिता तो नहीं हूँ, परन्तु वह पल सिद्ध पल था। उस स्वाभाविक, मनोहर वार्तालाप में मैंने अपने बेटी के दमकते हुए चेहरे में देखा कि बिना किसी शर्त के मिलने वाले प्रेम को प्राप्त करना कैसा होता है: वह पूर्ण आनन्द की छवि थी। वह अच्छे से समझ रही थी कि उस की शर्ट पर लिखी बात उसके प्रति उसके पिता की भावनाओं से पूर्णतः मेल खा रही थी।

     हम में से कितने हैं जो अपने हृदय से इस बात पर पूर्ण विश्वास रखते हैं कि हमारा स्वर्गीय परमेश्वर पिता हमें असीम और अनंतकालीन प्रेम करता है? कभी-कभी हम इस सत्य को लेकर संघर्ष करते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि इस्राएलियों ने भी किया। वे सोचने लगे कि क्या उन की परीक्षाओं का यह अर्थ है कि अब परमेश्वर उन से प्रेम नहीं करता है। परन्तु यिर्मयाह 31:3 में भविष्यद्वक्ता ने उन्हें वह स्मरण करवाया जो परमेश्वर ने उन से पहले ही कह रखा था, “मैंने तुझ से सदा प्रेम रखता आया हूँ।”

     हमारी भी लालसा ऐसे ही सिद्ध प्रेम को पाने की होती है। परन्तु जो घाव, निराशाएं और गलतियाँ हम अनुभव करते हैं, वे हमें अपने आप को उस ‘प्रेम के योग्य’ समझ पाने में आड़े आती हैं। परन्तु हमारा प्रभु परमेश्वर अपनी बाहें फैलाए हमें अपने पास आ कर उस प्रेम को अनुभव करने और उसके सिद्ध प्रेम में विश्राम करने के लिए आमंत्रित करता है। - एडम होल्ज़

 

हमारे परमेश्वर पिता के समान कोई हम से प्रेम नहीं कर सकता है।


मेरी दृष्टि में तू अनमोल और प्रतिष्ठित ठहरा है और मैं तुझ से प्रेम रखता हूं, इस कारण मैं तेरी सन्ती मनुष्यों को और तेरे प्राण के बदले में राज्य राज्य के लोगों को दे दूंगा। - यशायाह 43:4

बाइबल पाठ: यिर्मयाह 31:1-6

यिर्मयाह 31:1 उन दिनों में मैं सारे इस्राएली कुलों का परमेश्वर ठहरूंगा और वे मेरी प्रजा ठहरेंगे, यहोवा की यही वाणी है।

यिर्मयाह 31:2 यहोवा यों कहता है: जो प्रजा तलवार से बच निकली, उन पर जंगल में अनुग्रह हुआ; मैं इस्राएल को विश्राम देने के लिये तैयार हुआ।

यिर्मयाह 31:3 यहोवा ने मुझे दूर से दर्शन देकर कहा है। मैं तुझ से सदा प्रेम रखता आया हूँ; इस कारण मैं ने तुझ पर अपनी करुणा बनाए रखी है।

यिर्मयाह 31:4 हे इस्राएली कुमारी कन्या! मैं तुझे फिर बसाऊंगा; वहां तू फिर सिंगार कर के डफ बजाने लगेगी, और आनन्द करने वालों के बीच में नाचती हुई निकलेगी।

यिर्मयाह 31:5 तू शोमरोन के पहाड़ों पर अंगूर की बारियां फिर लगाएगी; और जो उन्हें लगाएंगे, वे उनके फल भी खाने पाएंगे।

यिर्मयाह 31:6 क्योंकि ऐसा दिन आएगा, जिस में एप्रैम के पहाड़ी देश के पहरुए पुकारेंगे: उठो, हम अपने परमेश्वर यहोवा के पास सिय्योन को चलें।    

 

एक साल में बाइबल: 

  • नहेम्याह 1-3
  • प्रेरितों 2:1-21


रविवार, 14 जून 2020

कार्य


     मैं एक टीम के साथ कार्य करती हूँ, जो एक सालाना सामुदायिक समारोह कार्यक्रम आयोजित करती है। हम उस सालाना समारोह के आयोजन के लिए ग्यारह महीने तैयारी करने में बिताते हैं, अनेकों छोटी-बड़ी बातों को योजनाबद्ध करते हैं जिस से कार्यक्रम सफल रहे। हम उसकी तिथि और स्थान को चुनते हैं; टिकिट की कीमत निर्धारित करते हैं; वहाँ दुकानें लगाकर भोजन वस्तुओं के विक्रेताओं का चुनाव करते हैं; सभी स्थानों पर कार्यक्रम ठीक से सुनाई दे सके इसके लिए संबंधित ध्वनि-विशेषज्ञों और टेक्निशयनों को चुनते और उन्हें कार्य सौंपते हैं। जैसे-जैसे कार्यक्रम का समय निकट आता है, हम लोगों के प्रश्नों के उत्तर देते हैं, उनका मार्गदर्शन करते हैं। कार्यक्रम के पश्चात हम लोगों से कार्यक्रम के प्रति उन की प्रतिक्रिया लेते हैं। मिलने वाली प्रतिक्रिया, कुछ अच्छी होती है; कुछ सुनने में कठिन होती है। हमारी टीम के लोग कार्यक्रम में सम्मिलित होने वालों के उत्साह और उत्तेजना पर भी दृष्टि रखते हैं, तथा आने वाली शिकायतों पर भी। कभी-कभी नकारात्मक प्रतिक्रिया बहुत निराशाजनक भी हो सकती है; हम में यह सब करना छोड़ने की भावना भी जागृत कर सकती है।

     परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि नहेम्याह और उसके साथी जब यरूशलेम की टूटी हुई शहरपनाह का पुनःनिर्माण करने के कार्य में लगे तो उन्हें भी आलोचकों और आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। आलोचकों ने उन से यह भी कहा कि, “... यदि कोई गीदड़ भी उस पर चढ़े, तो वह उनकी बनाई हुई पत्थर की शहरपनाह को तोड़ देगा” (नहेम्याह 4:3)। उन आलोचकों के प्रति नहेम्याह की प्रतिक्रिया, आज मुझे अपनी निराशाओं और आलोचनाओं से ऊपर उठने में सहायता करती है: उन आलोचकों की बातों का उन्हें कोई उत्तर देने, या उन से निराश होने की बजाए, नहेम्याह सहायता के लिए परमेश्वर की ओर मुड़ा। अपने आप कोई बात कहने, स्वयं कोई प्रत्युत्तर देने के स्थान पर, उस ने परमेश्वर से प्रार्थना की, कि वह अपने लोगों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार पर ध्यान करे और उनकी रक्षा करे, उन्हें संभाले (पद 4)। उन आलोचनाओं और उपहास की बातों को परमेश्वर के हाथों में सौंप देने के पश्चात, नहेम्याह और उसके साथी उस शहरपनाह को बनाने में मन लगाकर संलग्न हो गए (पद 6)।

     हम नहेम्याह से सीख सकते हैं कि हमारे द्वारा प्रभु के लिए किए जा रहे कार्य की आलोचनाओं और टिप्पणियों से निराश न हों; उन बातों के कारण अपने ध्यान को भटकने न दें। जब भी हमारी आलोचना अथवा उपहास हो, तो अपने आलोचकों को क्रोधित अथवा दुखी हो कर कुछ प्रतिक्रिया देने के स्थान पर, हम परमेश्वर से निवेदन और प्रार्थना कर सकते हैं कि हमें निराशाओं से बचाए, जिस से हम पूरे मन से और ध्यान लगाकर उसके कार्य को कर सकें। - कर्सटन होल्मबर्ग

 

हर आलोचना के लिए परमेश्वर ही हमारा सर्वोत्तम बचाव है।


एलूल महीने के पच्चीसवें दिन को अर्थात बावन दिन के भीतर शहरपनाह बन चुकी। जब हमारे सब शत्रुओं ने यह सुना, तब हमारे चारों ओर रहने वाले सब अन्यजाति डर गए, और बहुत लज्जित हुए; क्योंकि उन्होंने जान लिया कि यह काम हमारे परमेश्वर की ओर से हुआ। - नहेम्याह 6:15-16

बाइबल पाठ: नहेम्याह 4:1-6

नहेम्याह 4:1 जब सम्बल्लत ने सुना कि यहूदी लोग शहरपनाह को बना रहे हैं, तब उसने बुरा माना, और बहुत रिसियाकर यहूदियों को ठट्ठों में उड़ाने लगा।

नहेम्याह 4:2 वह अपने भाइयों के और शोमरोन की सेना के साम्हने यों कहने लगा, वे निर्बल यहूदी क्या किया चाहते हैं? क्या वे वह काम अपने बल से करेंगे? क्या वे अपना स्थान दृढ़ करेंगे? क्या वे यज्ञ करेंगे? क्या वे आज ही सब काम निपटा डालेंगे? क्या वे मिट्टी के ढेरों में के जले हुए पत्थरों को फिर नये सिरे से बनाएंगे?

नहेम्याह 4:3 उसके पास तो अम्मोनी तोबियाह था, और वह कहने लगा, जो कुछ वे बना रहे हैं, यदि कोई गीदड़ भी उस पर चढ़े, तो वह उनकी बनाई हुई पत्थर की शहरपनाह को तोड़ देगा।

नहेम्याह 4:4 हे हमारे परमेश्वर सुन ले, कि हमारा अपमान हो रहा है; और उनका किया हुआ अपमान उन्हीं के सिर पर लौटा दे, और उन्हें बन्धुआई के देश में लुटवा दे।

नहेम्याह 4:5 और उनका अधर्म तू न ढांप, और न उनका पाप तेरे सम्मुख से मिटाया जाए; क्योंकि उन्होंने तुझे शहरपनाह बनाने वालों के साम्हने क्रोध दिलाया है।

नहेम्याह 4:6 और हम लोगों ने शहरपनाह को बनाया; और सारी शहरपनाह आधी ऊंचाई तक जुड़ गई। क्योंकि लोगों का मन उस काम में नित लगा रहा।    

 

एक साल में बाइबल: 

  • एज्रा 9-10
  • प्रेरितों 1