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सोमवार, 24 मई 2010

मित्रों की गवाही

पुलिट्ज़र पुरुस्कार विजेता डेविड हलबेरस्ट्रोम, कोरिया युद्ध में अमेरिका की भूमिका पर लिखी अपनी महान कृति के प्रकाशन से ५ महीने पूर्व एक सड़क दुर्घटना में चल बसे। उस लेखक की मृत्यु के बाद उसके सहलेखकों और मित्रों ने स्वेच्छापूर्वक उसकी पुस्तक को लेकर सारे देश का दौरा किया। हर स्थान पर जहां वे जाते, वे हलबेरस्ट्रोम के सम्मान में उसकी की पुस्तक के कुछ अंश पढ़ते और अपने दिवंगत मित्र से संबंधित अपनी यादें बांटते।

किसी व्यक्ति की महानता और उसके व्यक्तित्व का बयान एक मित्र से बेहतर कोई नहीं कर सकता। प्रभु यीशु के मृतकों में से पुनुरुत्थान और स्वर्गारोहण के बाद उसके शिष्यों ने उस अनुपम व्यक्ति के साथ अपने अनुभवों बारे में औरों को बताना आरम्भ कर दिया - "हम ने उसे देखा, और उस की गवाही देते हैं, और तुम्हें उस अनन्‍त जीवन का समाचार देते हैं, जो पिता के साथ था, और हम पर प्रगट हुआ" (१ यूहन्ना १:२)। उनका उद्देश्य था कि लोग परमेश्वर पिता और उसके पुत्र यीशु को जानें (पद ३)।

कभी कभी हमें लग सकता है कि दूसरों के सामने गवाही देना और मसीह में अपने विश्वास का बयान करना एक भयावह या बोझिल कार्य है। किंतु इसे यदि एक ऐसे मित्र के बारे में बात करने के रूप में देखें, जिसकी उपस्थिति और प्रभाव ने हमारा जीवन बदल दिया है, तो इस कार्य के प्रति हमारा नज़रिया बदल सकता है।

मसीह का सुसमाचार सदा उसके मित्रों की गवाही के द्वारा ही सबसे प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया जाता है। - डेविड मैककैस्लैंड


आप यीशु से जितना अधिक प्रेम रखेंगे, उतना ही अधिक आप उसके बारे में बताएंगे।


बाइबल पाठ: १ यूहन्ना १:१-७


हम ने उसे देखा, और उस की गवाही देते हैं, और तुम्हें उस अनन्‍त जीवन का समाचार देते हैं, जो पिता के साथ था, और हम पर प्रगट हुआ। - १ यूहन्ना १:२


एक साल में बाइबल:
  • १ इतिहास २२-२४
  • यूहन्ना ८:२८-५९

रविवार, 23 मई 2010

मार्ग बनाओ

डवाईट डी. आईज़नहावर, द्वितीय विश्वयुद्ध में अपने साहसी नेतृत्व के लिये प्रसिद्ध थे। उनके युद्धकौशल से उनकी सेना ने योरप पर पुनः कब्ज़ा किया। एक वीर नायक के रूप में अमेरिका वापस लौटने के कुछ समय बाद उन्हें वहां का राष्ट्रपति चुन लिया गया।

जब वे योरप में थे तो आईज़नहावर ने वहां टेढ़े-मेढ़े रास्ते पार करने की कठिनाइयों और खतरों का अनुभव किया था। इसलिये अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये उन्होंने सड़कों का एक जाल सारे देश में फैलाने की योजना बनाई जो राष्ट्रिय़ राजमार्ग प्रणाली बनी। इसके लिये पहाड़ों में सुरंगें बनाईं गईं और तराईयों पर विशाल पुल बांधे गये।

प्राचीन कल में भी कब्ज़ा करने वाले राजा, नये इलाकों में अपनी सेना के लिये बनाये गये मार्गों से प्रवेश पाते थे। यशायाह के मन में यह रूपक था जब उसने कहा, "जंगल में यहोवा का मार्ग सुधारो, हमारे परमेश्वर के लिये अराबा में एक राजमार्ग चौरस करो" (यशायाह ४०:३)। तथा यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले ने लोगों को पश्चाताप के लिये पुकारा, आने वाले राजा यीशु के लिये उनके मनों में मार्ग बनाने के लिये।

आपके हृदय में यीशु के निर्बाध्य प्रवेश के लिये किस तैयारी की आवश्यक्ता है? क्या वहां कोई कड़ुवाहट की चट्टाने हैं जिन्हें क्षमा के द्वारा ढाया जाना ज़रूरी है? क्या शिकायत की खाईयां हैं जिन्हें सन्तुष्टि से भरा जाना ज़रूरी है?

हम इस आत्मिक कार्य को नज़रांदाज़ नहीं कर सकते। आईये राजा के लिये राजमार्ग तैयार करें। - जो स्टोवैल


मनफिराव राजा के साथ हमारे संबंध को ठीक करने के मार्ग को साफ कर देता है।


बाइबल पाठ: यशायाह ४०:३-५


जंगल में यहोवा का मार्ग सुधारो, हमारे परमेश्वर के लिये अराबा में एक राजमार्ग चौरस करो। - यशायाह ४०:३


एक साल में बाइबल:
  • १ इतिहास १९-२१
  • यूहन्ना ८:१-२७

शनिवार, 22 मई 2010

मैं तो सही हूं; आप ही गलत होंगे!

मेरी सहेली रिया, विशाल नीले सारस के पंखों के ६ फुट के फैलाव और उसके शनदार रूप से बहुत प्रभावित है। उसके घर के पास एक तालाब में स्थित एक छोटे टापु पर उस सारस को नीचे उतरने के लिये पंख फैलाये हुए आते देखना उसे बहुत अच्छा लगता है।

अब, मैं भी मानती हूं कि सारस एक अनुपम और अद्‍भुत पक्षी है, किंतु अपने घर के पिछवाड़े में मैं उसे कभी देखना नहीं चाहती। यह इसलिये क्योंकि मैं जनती हूं कि यदि वह वहां आया तो केवल बाग़ की सुन्दरता निहारने नहीं आयेगा; यह अवांछित आगन्तुक तालाब से मछलियां खाने आयेगा।

तो अब मैं सही हूं या रिया? हम सहमत क्यों नहीं हो सकते? अलग अलग व्यक्तित्व, अनुभव, या ज्ञान लोगों के दृष्टिकोण में फर्क ला सकते हैं। इसका यह मतलब नहीं है कि एक व्यक्ति सही है और दूसरा गलत; फिर भी कभी कभी यदि आपसी सहमति न हो तो हम निर्दयी, कठोर और दोष लगाने वाले बन जाते हैं। मैं पाप के विष्य में बात नहीं कर रही हूं - केवल दृष्टिकोण या विचारों की भिन्नता की। किसी के विचारों, उद्देश्यों या कार्यों की आलोचाना करने या उनपर दोष लगाने से पहले हमें सतर्क रहना चाहिये, क्योंकि हम भी नहीं चाहेंगे कि हम पर दोष लगाया जाय (लूका ६:३७)।

जो हमसे भिन्न दृष्टिकोण रखते हैं क्या उनसे हम कुछ सीख सकते हैं? क्या हमें कुछ धीरज और प्रेम के व्यवहार का पालन करने की आवश्यक्ता है? मैं बहुत धन्यवादी हूं कि परमेश्वर मुझसे बहुत प्रेम रखता है और मेरे प्रति अति धैर्यवान रहता है। - सिंडी हैस कैस्पर


थोड़ा प्यार बड़ा बदलाव लाता है।


बाइबल पाठ: लूका ६:३७-४२


दोष मत लगाओ; तो तुम पर भी दोष नहीं लगाया जाएगा: दोषी न ठहराओ, तो तुम भी दोषी नहीं ठहराए जाओगे। - लूका ६:३७


एक साल में बाइबल:
  • १ इतिहास १६-१८
  • यूहन्ना ७:२८-५३

शुक्रवार, 21 मई 2010

क्या वह काफी है?

क्या यीशु काफी है? कई मसीहियों को यह प्रश्न अपने आप से पूछने की आवश्यक्ता है। उनके पास सांसारिक संपत्ति तो बहुत है, किंतु क्या वे मसीह पर निर्भर करते हैं? या वे अपनी धन-संपत्ति पर निर्भर करते हैं?

बाइबल में धनी होने की निन्दा नहीं की गई है, यदि आपकी प्राथमिकताएं सही हैं और आप दूसरों की आवश्यक्ताओं का ध्यान रखते हैं। जो बहुत धन्वान नहीं हैं, उन्हें इस बात का ध्यान रखना है कि हमें संभालने वाला सांसारिक धन नहीं, वरन यीशु है।

पतरस प्रेरित, यरुशलेम के मन्दिर के दरवाज़े के बाहर बैठ कर भीख मांगने वाले भिखारी की घटना के द्वारा, हमें इस बात को समझने में सहायता करता है। इस मनुष्य ने पतरस से पैसे मांगे, परन्तु पतरस ने उसे उत्तर दिया, "चान्‍दी और सोना तो मेरे पास है नहीं, परन्‍तु जो मेरे पास है, वह तुझे देता हूं: यीशु मसीह नासरी के नाम से चल फिर" (प्रेरितों ३:६)।

मन्दिर के दरवाज़े पर पड़े उस मनुष्य की धारणा थी कि उसकी समस्याओं का समाधान पैसा है, किंतु पतरस ने उसे दिखाया कि समाधान यीशु है। और आज भी संसार की हर समस्या का समाधान यीशु ही है।

मैंने एक चीनी मसीहियों के गुट के बारे में पढ़ा था जो अपने देश में मसीह का सुसमाचार प्रचार करते हैं, हम उनसे बहुत कुछ सीख सकते हैं। इन विश्वासियों का कहना है कि "हमारे पास सुसमाचार प्रचार करने के लिये कोई बड़े कार्यक्रम आयोजित करने की सामर्थ नहीं है। हमारे पास लोगों को देने के लिये केवल यीशु है।"

चीन के इन भाई बहिनों के लिये यीशु काफी है। निर्धनों के लिये भी यीशु काफी है। सोचने की बात है कि क्या वह आपके लिये काफी है? - डेव ब्रैनन


हमारी सबसे बड़ी संपत्ति मसीह में हमारा धन है।


बाइबल पाठ: प्रेरितों के काम ३:१-१०


चान्‍दी और सोना तो मेरे पास है नहीं, परन्‍तु जो मेरे पास है, वह तुझे देता हूं: यीशु मसीह नासरी के नाम से चल फिर। - प्रेरितों ३:६


एक साल में बाइबल:
  • १ इतिहास १३-१५
  • यूहन्ना ७:१-२७

गुरुवार, 20 मई 2010

आत्मिक दृष्टि लौटाना

सन्डुक रूइत एक नेपाली डॉकटर है जिसने अपने ऑपरेशन के ऑज़ारों का प्रयोग एक बहुत सरल विधि द्वारा मोतियाबिंद (cataract) का इलाज करने के लिये किया है। पिछले २३ वर्षों में वह लगभग ७०,००० लोगों की दृष्टि लौटा चुका है। बिल्कुल निर्धन मरीज़ भी जो काठमान्डु में उसके द्वारा चलाये जा रहे ’बिना लाभ के अस्पताल’ में आते हैं, वे केवल अपने आभार से इलाज की कीमत चुकाते हैं।

हमारा प्रभु यीशु मसीह भी जब पृथ्वी पर था तो उसने कई शारीरिक रूप से अंधों को आंखें दीं। किंतु उसकी ज़्यादा चिंता आत्मिक अन्धेपन के प्रति थी। जब यीशु ने एक जन्म के अन्धे को चंगा किया तो कई धार्मिक अधिकारियों ने इस बात की छान-बीन करी, किंतु यह मानने से सर्वथा इन्कार किया कि यीशु पापी नहीं है (यूहन्ना ९:१३-३४)। उनके इस रवैये पर यीशु ने कहा कि, "मैं इस जगत में न्याय के लिये आया हूं, ताकि जो नहीं देखते वे देखें, और जो देखते हैं वे अन्‍धे हो जाएं" (यूहन्ना ९:३९)।

पौलुस प्रेरित ने इस आत्मिक अंधेपन के संबंध में लिखा "परन्‍तु यदि हमारे सुसमाचार पर परदा पड़ा है, तो यह नाश होने वालों ही के लिये पड़ा है। और उन अविश्वासियों के लिये, जिन की बुद्धि को इस संसार के ईश्वर ने अन्‍धी कर दी है, ताकि मसीह जो परमेश्वर का प्रतिरूप है, उसके तेजोमय सुसमाचार का प्रकाश उन पर न चमके" (२ कुरिन्थियों ४:३, ४)।

भजनकार ने कहा "तेरी बातों के प्रवेश से प्राकाश होता है" (भजन ११९:१३०)।

केवल परमेश्वर का वचन ही है जो हमारे मन की आंखों को खोल देगा और हमारे आत्मिक अंधेपन को चंगा करेगा। - सी. पी. हीया


अंधकार से भरे संसार को यीशु के प्रकाश की आवश्यक्ता है।


बाइबल पाठ: यूहन्ना ९:१-११


तेरी बातों के प्रवेश से प्राकाश होता है; उस से भोले लोग समझ प्राप्त करते हैं। - भजन ११९:१३०


एक साल में बाइबल:
  • १ इतिहास १०-१२
  • यूहन्ना ६:४५-७१

बुधवार, 19 मई 2010

स्वर्ग में युद्ध

फिलिप पुलमैन एक गुणी लेखक हैं। उन्होंने तीन पुस्तकों ( The Golden Compass, The Subtle Knife & The Amber Spyglass) में एक क्रमिक कथा लिखी है जो जवान पाठकों में बहुत लोकप्रीय है। इन कथाओं के संवेदनशील पात्रों और बांध के रखने वाले कथानकों के पीछे एक कुटिल उद्देश्य है। इस कथा का अन्त परमेश्वर के विरुद्ध होने वाले एक बड़े युद्ध में होता है।

इन पुस्तकों में पुलमैन जताता है कि शैतान का स्वर्ग से गिराया जाना एक ’नेक’ कार्य - शैतान की परमेश्वर के अत्याचारी शासन से आज़ादी पाने की इच्छा, का परिणाम था। पुलमैन जताना चाहता है कि शैतान का परमेश्वर के सिंहासन को हड़पने का प्रयास करना एक वाजिब और सही कार्य था!

प्रकाशितवाक्य की पुस्तक में हमें अन्त के समय के बारे में बताया गया है। वहां लिखा है, "फिर स्वर्ग में लड़ाई हुई....और शैतान पृथ्वी पर गिरा दिया गया" (प्रकाशितवाक्य १२:७-९)। इस भावी युद्ध से पहले इस पथ्वी पर हमारे मनों की युद्धभूमि पर एक संघर्ष चल रहा है।

हमें शैतान की वास्तविकता - उसका झूठा होना (युहन्ना ८:४४), को ध्यान रखना है। उसकी चाल है कि परमेश्वर के वचनों को उसके संदर्भ से निकालकर और उन्हें तोड़-मरोड़ कर झूठा कर देना (उत्पत्ति ३:१-७)। उसकी चालकियों के विरुध्द अपनी रक्षा करने का सबसे कारगर तरीका है परमेश्वर के वचन की सच्चाई को दृढ़ता से थामे रहना (इफिसियों ६:१०-१८)।

हमारा प्रेमी स्वर्गीय पिता नहीं चाहता कि हममें से कोई नाश हो (२ पतरस ३:९) परन्तु वह हमें आज्ञाकारिता के लिये मजबूर भी नहीं करता। उसने निर्णय हम पर छोड़ रखा है। - डेनिस फिशर


जब शैतान हमला करे तो परमेश्वर के वचन से पलटवार कर उसे पराजित करो।


बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य १२:७-१२


फिर स्वर्ग में लड़ाई हुई....और शैतान पृथ्वी पर गिरा दिय गया। (प्रकाशितवाक्य १२:७-९)


एक साल में बाइबल:
  • १ इतिहास ७-९
  • यूहन्ना ६:२२-४४

मंगलवार, 18 मई 2010

स्वर्गीय विकल्प

हाल ही में मैंने अपने एक मित्र को उसके जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं और उससे पूछा कि एक साल और बुज़ुर्ग होना कैसा लगा? उसने विनोद के भाव में चुटकी लेते हुए कहा, "मुझे लगता है कि बुज़ुर्ग होना उसके विकल्प से बेहतर है।" उस समय हम एक साथ इस बात पर हंसे, लेकिन बाद में मैंने सोचा - क्या बुज़ुर्गी अपने विकल्प, अर्थात मृत्यु, से वाकई बेहतर है?

मुझे गलत मत समझिये। जितने भी दिन प्रभु मुझे जीवित रखना चाहता है, मैं जीना चाहता हूं और अपने बच्चों तथा नाती-पोतों को बढ़ते और जीवन के अनुभव लेते देखना चहता हूं। मृत्यु का अवश्यंभावी होना मुझे उत्साहित नहीं करता। लेकिन एक मसीही विश्वासी होने के नाते, मेरे लिये बुज़ुर्ग होने का विकल्प है स्वर्ग - और यह विकल्प ज़रा भी बुरा नहीं है!

२ कुरिन्थियों ५ में पौलुस जीवन कि वास्तविकता - दुख और दर्द के साथ इस शरीर के ’डेरे’ में जीने की बात करता है। किंतु हमें बुढ़ापे के कारण निराशा में रहने की आवश्यक्ता नहीं है; पौलूस तो ऐसी निराशा के विपरीत भावना रखने को प्रोत्साहित करता है। उसने लिखा, "इसलिये हम ढाढ़स बान्‍धे रहते हैं, और देह से अलग होकर प्रभु के साथ रहना और भी उत्तम समझते हैं" (पद ८)। ढाढ़स बान्‍धे रहते हैं! और भी उत्तम समझते हैं! यह सब क्यों? क्योंकि हमारे लिये शारीरिक जीवन का एक ऐसा विकल्प है जो किसी और के पास नहीं है - अनन्त काल तक प्रभु के साथ चिरस्थायी जीवन। आने वाले स्वर्गीय जीवन का दृष्टिकोण बनाए रखने से हम वर्तमान के जीवन के लिये ढाढ़स पा सकते हैं।

यदि हम ने मसीह के साथ अपना संबंध ठीक जोड़ा है, तो मसीह की प्रतिज्ञाएं, एक भजनकार के शब्दों के अनुसार, हमें "आज के लिये सामर्थ और कल के लिये भव्य आशा" दे सकतीं हैं।

यह कितना उत्तम विकल्प है! - बिल क्राउडर


मत्यु लाभ है क्योंकि उसके बाद स्वर्ग, पवित्रता और प्रभु का साथ है।


बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों ५:१-११


इसलिये हम ढाढ़स बान्‍धे रहते हैं, और देह से अलग होकर प्रभु के साथ रहना और भी उत्तम समझते हैं। - २ कुरिन्थियों ५:८


एक साल में बाइबल:
  • १ इतिहास ४-६
  • यूहन्ना ६:१-२१