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शनिवार, 19 मार्च 2011

भरोसा

एक नाविक बार-बार समुद्र में भटक जाता था, इसलिए उसके मित्रों ने उसे एक कुतुबनुमा (compass) दिया और सलाह दी कि अपनी यात्राओं में इसका प्रयोग किया करो। अगली बार जब वह समुद्र में अपनी नाव लेकर निकला तो दोस्तों की सलाह मानकर उनका दिया कुतुबनुमा भी साथ ले गया, लेकिन हमेशा की तरह वह फिर भटक गया और तट का रास्ता नहीं पा सका। उसके मित्र फिर उसे ढूंढने निकले, उसे ढूंढ कर बचाया और तट पर लाकर पूछा कि "तुमने उस कुतुबनुमा का प्रयोग क्यों नहीं किया? यदि करते तो हम इस कष्ट से बच सकते थे।" नाविक ने उत्तर दिया "मैंने बहुत कोशिश करी लेकिन सफल नहीं हुआ। मैं उत्तर दिशा को जाना चाहता था और कुतुबनुमा की सूई दक्षिण-पूर्व की ओर थी; मेरे लाख कोशिश करने के बावजूद कि उसकी सूई उत्तर दिशा की ओर नहीं मुड़ी, इसलिए मेरी उसपर भरोसा करने की हिम्मत नहीं हुई, और मैं अपनी समझ से उत्तर दिशा की ओर निकल पड़ा!" वह नाविक अपनी इच्छा के अनुसार कुतुबनुमा की सूई को मोड़ना चाहता था, न कि कुतुबनुमा के अनुसार अपनी नाव को। उसके इस हट ने उसे फिर खतरे में और उसके मित्रों को परेशानी में डाल दिया।

जब परमेश्वर इस्त्राएलियों को मिस्त्र के दासत्व से निकाल कर लाया, तो इस्त्राएलियों ने भी कुछ ऐसा ही किया। परमेश्वर पर भरोसा करके उसके निर्देषों को मानने की बजाए, उन्होंने अपनी समझ पर अधिक भरोसा किया और कुछ दिनों की अपनी यात्रा को ४० वर्ष की यात्रा बना डाला।

जैसा भजनकार ने लिखा है, परमेश्वर का वायदा है कि वह हमें समझ देगा और हमारे मार्ग में हमारी अगुवाई करेगा कि हम सही राह पर चल सकें। जो उसके निर्देषों और चेतावनियों को मानते हैं उन्हें वह तकलीफों, भटकने और बरबादी से बचाए रखेगा।

जब हम परमेश्वर से किसी विष्य में दिशा निर्देष की प्रार्थना करें, तो ध्यान रखें के उसके वचन रूपी कुतुबनुमे पर भरोसा भी बनाए रखें। - रिचर्ड डी हॉन


जब आप परमेश्वर से मार्गदर्शन की प्रार्थना करें और यदि उसके मार्गदर्शन को अपनी इच्छा से भिन्न पाएं तो खिन्न होकर ढीठ न बन जाएं।

मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपादृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा। - भजन ३२:८


बाइबल पाठ: यहोशू १:१-९

Jos 1:1 यहोवा के दास मूसा की मृत्यु के बाद यहोवा ने उसके सेवक यहोशू से जो नून का पुत्र था कहा,
Jos 1:2 मेरा दास मूसा मर गया है; सो अब तू उठ, कमर बान्ध, और इस सारी प्रजा समेत यरदन पार होकर उस देश को जा जिसे मैं उनको अर्थात इस्राएलियों को देता हूं।
Jos 1:3 उस वचन के अनुसार जो मैं ने मूसा से कहा, अर्थात जिस जिस स्थान पर तुम पांव धरोगे वह सब मैं तुम्हे दे देता हूं।
Jos 1:4 जंगल और उस लबानोन से लेकर परात महानद तक, और सूर्यास्त की ओर महासमुद्र तक हित्तियों का सारा देश तुम्हारा भाग ठहरेगा।
Jos 1:5 तेरे जीवन भर कोई तेरे साम्हने ठहर न सकेगा; जैसे मैं मूसा के संग रहा वैसे ही तेरे संग भी रहूंगा, और न तो मैं तुझे धोखा दूंगा, और न तुझ को छोडूंगा।
Jos 1:6 इसलिये हियाव बान्धकर दृढ़ हो जा; क्योंकि जिस देश के देने की शपथ मैं ने इन लोगों के पूर्वजों से खाई थी उसका अधिकारी तू इन्हें करेगा।
Jos 1:7 इतना हो कि तू हियाव बान्धकर और बहुत दृढ़ होकर जो व्यवस्था मेरे दास मूसा ने तुझे दी है उन सब के अनुसार करने में चौकसी करना और उस से न तो दहिने मुड़ना और न बांए, तब जहां जहां तू जाएगा वहां वहां तेरा काम सुफल होगा।
Jos 1:8 व्यवस्था की यह पुस्तक तेरे चित्त से कभी न उतरने पाए, इसी में दिन रात ध्यान दिए रहना, इसलिये कि जो कुछ उस में लिखा है उसके अनुसार करने की तू चौकसी करे, क्योंकि ऐसा ही करने से तेरे सब काम सुफल होंगे, और तू प्रभावशाली होगा।
Jos 1:9 क्या मैं ने तुझे आज्ञा नहीं दी? हियाव बान्धकर दृढ़ हो जा, भय न खा, और तेरा मन कच्चा न हो; क्योंकि जहां जहां तू जाएगा वहां वहां तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे संग रहेगा।

एक साल में बाइबल:
  • यहोशू १-३
  • मरकुस १६

शुक्रवार, 18 मार्च 2011

परमेश्वर की योजना समझिए

एक युवती एक प्रचारक के पास आयी और उससे जानना चाहा कि वह कैसे अपनी उन इच्छाओं की समस्या का समाधान कर सकती है जो परमेश्वर की मन्सा के विरोध में हैं? प्रचारक ने एक छोटा कागज़ लिया, उसपर दो शब्द लिखे और उसे युवती को दे दिया। तब प्रचारक ने युवती से कहा, "इसपर दस मिनिट तक विचार करो, फिर इन में से एक शब्द काट दो और कागज़ मेरे पास वापस ले आओ।" उस युवती ने कागज़ पर लिखे शब्दों को देखा, एक था "नहीं" और दूसरा था "प्रभु"। विचार करने के थोड़े समय में ही वह समझ गयी कि यदि वह "नहीं" को, यानि कि इन्कार करने को चुनती है, तो फिर यीशु को प्रभु नहीं कह सकती; और अगर वह "प्रभु" को चुनती है तो फिर यीशु को "नहीं" यानि इन्कार नहीं कर सकती।

यही हमारे जीवनों के लिये परमेश्वर की इच्छा को समझने का भेद है। जब तक हम परमेश्वर के हाथों में अपने आप को पूर्णतः तथा बिना किसी शर्त के नहीं रख देते, हम अपने प्रति उसकी इच्छा के विकल्पों को नहीं जान सकते। हमें अपने सारे अधिकार उसके आधीन कर देने हैं, तब ही हम उससे मिलने वाले अधिकारों को जान और समझ पाएंगे। अपने शरीरों को "जीवित बलिदान करके चढ़ाना" प्रभु की प्रत्येक आज्ञा के लिए सहमत और समर्पित होना है।

जब हम परमेश्वर को पूर्णतः समर्पित हो जाते हैं, तब ही हम इससे अगला कदम, अर्थात अपने व्यवहार में बदलाव, को उठा पाते हैं। व्यवहार में यह बदलाव तब ही संभव है जब हम अपने सोच-विचार को अपने चारों ओर प्रचलित संसार के सिद्धांतों से हटा कर परमेश्वर के वचन के सिद्धांतों के अनुरूप कर दें; और यह वो ही कर सकता है जिसका तन, मन और बुद्धि संसार को नहीं परमेश्वर को समर्पित हो।

यदि आप अपने जीवन के लिए परमेश्वर की योजना को जानना चाहते हैं, तो सर्वप्रथम अपने आप को परमेश्वर को समर्पित कीजीए। - डेनिस डी हॉन


जो अपनी इच्छा परमेश्वर की इच्छा के आधीन कर देते हैं, वे परमेश्वर से सर्वोत्तम ही पाते हैं।

इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरो को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान करके चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है। - रोमियों १२:१


बाइबल पाठ: रोमियों १२:१-८

Rom 12:1 इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरो को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान करके चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है।
Rom 12:2 और इस संसार के सदृश न बनो; परन्‍तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्‍छा अनुभव से मालूम करते रहो।
Rom 12:3 क्‍योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूं, कि जैसा समझना चाहिए, उस से बढ़कर कोई भी अपने आप को न समझे पर जैसा परमेश्वर ने हर एक को परिमाण के अनुसार बांट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे।
Rom 12:4 क्‍योंकि जैसे हमारी एक देह में बहुत से अंग हैं, और सब अंगों का एक ही सा काम नहीं।
Rom 12:5 वैसा ही हम जो बहुत हैं, मसीह में एक देह होकर आपस में एक दूसरे के अंग हैं।
Rom 12:6 और जब कि उस अनुग्रह के अनुसार जो हमें दिया गया है, हमें भिन्न भिन्न वरदान मिले हैं, तो जिस को भविष्यद्वाणी का दान मिला हो, वह विश्वास के परिमाण के अनुसार भविष्यद्वाणी करे।
Rom 12:7 यदि सेवा करने का दान मिला हो, तो सेवा में लगा रहे, यदि कोई सिखाने वाला हो, तो सिखाने में लगा रहे।
Rom 12:8 जो उपदेशक हो, वह उपदेश देने में लगा रहे, दान देने वाला उदारता से दे, जो अगुआई करे, वह उत्‍साह से करे, जो दया करे, वह हर्ष से करे।

एक साल में बाइबल:
  • व्यवस्थाविवरण ३२-३४
  • मरकुस १५:२६-४७

गुरुवार, 17 मार्च 2011

सच्चा उद्धारकर्ता

एक युवा विद्वान ने एक नया धर्म बनाया और उसके सिद्धांतों को समझाने के लिये एक पुस्तक लिखी। कुछ समय पश्चात वह ब्रिटिश राजनीतिज्ञ एवं दार्शनिक बैनजामिन डिज़्राएली के पास आया और कहने लगा कि उसे समझ नहीं आता कि लोग क्यों उसके धर्म में विश्वास करने को राज़ी नहीं होते, जबकि उसका धर्म मसीह की शिक्षाओं और क्रूस पर बलिदान से कहीं अधिक उत्तम है। बुज़ुर्ग बैनजामिन ने उसके कंधे पर हाथ रखकर कहा, "बेटा, लोग तब तक तुम्हारी पुस्तक को नहीं पढ़ेंगे और न ही तुम्हारे धर्म में विश्वास लाएंगे जब तक तुम्हारा भी किसी क्रूस पर चढ़ाए जाकर बलिदान न हो और तुम भी फिर मृतकों में से जी न उठो।"

एक अंग्रेज़ प्रचारक एलेक्ज़ैंडर मैक्लरेन ने मसीह यीशु के व्यक्तित्व के संदर्भ में प्रश्न किया, "ऐसा क्यों है कि संसार के इतिहास में केवल एक और सिर्फ एक ही ऐसा व्यक्ति है जो समय और स्थान से कभी बंधा नहीं रहा है; जो आज भी उन करोड़ों लोगों का, जिनके हृदय उसके प्रेम से धड़कते हैं, वैसा ही घनिष्ठ मित्र है, जैसा वह उनका था जो उसके साथ पृथ्वी पर रहते थे?" यह एक बड़ा गंभीर और वाजिब प्रश्न है, जिसपर विचार आवश्यक है। मैक्लैरन के इस प्रश्न का उत्तर बैनजामिन डिज़्राएली द्वारा उस युवक को दिये उत्तर में ही है।

केवल परमेश्वर का निष्कलंक और निर्दोष पुत्र ही उद्धार प्रदान कर सकता है। केवल वही उद्धारकर्ता हो सकता है और हमारे पापों का बोझ उठा सकता है जिसने अपने बलिदान की सार्थकता को अपने पुनरुत्थान द्वारा प्रमाणित किया हो। क्योंकि यीशु ने हमसे प्रेम किया और अपने आप को हमारे लिये दे दिया, हमें भी अपना हृदय उसके लिये खोल कर उसे अर्पित कर देना चाहिये।

यदि हमने उसपर विश्वास किया है, तो प्रभु के चेले थोमा की तरह हम भी थोमा के समान प्रेम और भक्ति में पुकार सकते हैं, "हे मेरे प्रभु, हे मेरे परमेश्वर!" वही सच्चा उद्धारकर्ता है जो हमारी आराधना का सच्चा पात्र है। - पौल वैन गौर्डर


जब हम यीशु के प्रभुत्व को पहिचानेंगे तो उसे उसकी उपासना भी करेंगे।

यह सुन थोमा ने उत्तर दिया, हे मेरे प्रभु, हे मेरे परमेश्वर! - यूहन्ना २०:२८


बाइबल पाठ: यूहन्ना २०:२८

Joh 20:26 आठ दिन के बाद उस के चेले फिर घर के भीतर थे, और थोमा उन के साथ था, और द्वार बन्‍द थे, तब यीशु ने आकर और बीच में खड़ा होकर कहा, तुम्हें शान्‍ति मिले।
Joh 20:27 तब उस ने थोमा से कहा, अपनी उंगली यहां लाकर मेरे पंजर में डाल और अविश्वासी नहीं परन्‍तु विश्वासी हो।
Joh 20:28 यह सुन थोमा ने उत्तर दिया, हे मेरे प्रभु, हे मेरे परमेश्वर!
Joh 20:29 यीशु ने उस से कहा, तू ने तो मुझे देख कर विश्वास किया है, धन्य हैं वे जिन्‍होंने बिना देखे विश्वास किया।
Joh 20:30 यीशु ने और भी बहुत चिन्‍ह चेलों के साम्हने दिखाए, जो इस पुस्‍तक में लिखे नहीं गए।
Joh 20:31 परन्‍तु ये इसलिये लिखे गए हैं, कि तुम विश्वास करो, कि यीशु ही परमेश्वर का पुत्र मसीह है: और विश्वास करके उसके नाम से जीवन पाओ।

एक साल में बाइबल:
  • व्यवस्थाविवरण ३०-३१
  • मरकुस १५:१-२५

बुधवार, 16 मार्च 2011

हमारा निर्दोष एवज़ी

एक अनाथ युवती के गुर्दों ने काम करना बन्द कर दिया। बहुत इलाज के बाद भी जब कुछ सफलता नहीं मिली, उसकी हालत बिगड़ने लगी और उसके जीवित रहने की आशा क्षीण होने लगी। अन्तिम उपाय के तौर पर चिकित्सकों ने गुर्दे बदलने का निर्णय किया, किंतु कोई रिश्तेदार नहीं था जो उसके लिये अपना गुर्दा दान करता। चिकित्सकों ने समाज के सामने युवती के लिये निशुल्क गुर्दा दान देने के लिये आग्रह जारी किया। एक युवक आगे आया और अपना गुर्दा दान करने के लिये राज़ी हो गया। युवक का गुर्दा निकालते समय ऑपरेशन में कुछ दिक्कतें आईं और युवक की मृत्यु हो गई, लेकिन उसके दान किये हुए गुर्दे के कारण युवती की जान बच सकी। उस युवक ने केवल गुर्दा ही नहीं वरन अपने प्राण देकर उस युवती को नया जीवन दिया।

हमारे प्रभु में ऐसा कोई कारण नहीं था जिससे उसे मृत्यु दण्ड सहना पड़ता, फिर भी उसने स्वेच्छा से हमारे स्थान पर मृत्यु दण्ड सहना स्वीकार किया। एक कवि ने उसके इस बलिदान के लिये कुछ यूँ लिखा: "उसने हमारे स्थान पर मृत्यु सही/ उसने अपने लोगों को बचा लिया/ जो श्राप और दण्ड उसपर गिरा/ वह हमारे पापों का था।

एलिज़ाबेथ बैरेट ब्राउनिंग ने मसीह के क्रूस पर दिये महान बलिदान के आत्मिक मर्म को इन श्ब्दों में व्यक्त किया: वह त्यागा गया! परमेश्वर ने भी उससे अपना मुँह मोड़ लिया/ आदम का पाप धर्मी पुत्र और पिता के बीच आ गया/ हाँ एक बार इम्मैनुएल की कराह ने इस सृष्टी को झकझोर दिया/ वह तन्हा कराह "हे मेरे परमेश्वर, मैं त्यागा गया"।

परमेश्वर के पुत्र के बलिदान द्वारा बचाए जाकर अब हमें अपने उस निर्दोष एवज़ी के लिये अपने हृदय खोल देने चाहियें। - पौल वैन गौर्डर

यीशु हमारे पापों के लिये मरा ताकि हम पापों से मुक्त किये जाएं।

जो पाप से अज्ञात था, उसी को उस ने हमारे लिये पाप ठहराया, कि हम उस में होकर परमेश्वर की धामिर्कता बन जाएं। - २ कुरिन्थियों ५:२१


बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों ५:१७-२१

2Co 5:17 सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं, देखो, वे सब नई हो गईं।
2Co 5:18 और सब बातें परमेश्वर की ओर से हैं, जिस ने मसीह के द्वारा अपने साथ हमारा मेल मिलाप कर लिया, और मेल मिलाप की सेवा हमें सौंप दी है।
2Co 5:19 अर्थात परमेश्वर ने मसीह में होकर अपने साथ संसार का मेल मिलाप कर लिया, और उन के अपराधों का दोष उन पर नहीं लगाया और उस ने मेल मिलाप का वचन हमें सौंप दिया है।
2Co 5:20 सो हम मसीह के राजदूत हैं; मानो परमेश्वर हमारे द्वारा समझाता है: हम मसीह की ओर से निवेदन करते हैं, कि परमेश्वर के साथ मेल मिलाप कर लो।
2Co 5:21 जो पाप से अज्ञात था, उसी को उस ने हमारे लिये पाप ठहराया, कि हम उस में होकर परमेश्वर की धामिर्कता बन जाएं।

एक साल में बाइबल:
  • व्यवस्थाविवरण २८-२९
  • मरकुस १४:५४-७२

मंगलवार, 15 मार्च 2011

काठ में अभिव्यक्ति

एक बढ़ई एक अन्धे भूमिहर को अपनी कारीगरी के सिद्धांतों को समझाने की कोशिश कर रहा था। बढ़ई ने कहा कि कलाकार अपने आप को रंगों के द्वारा अपने आप को अभिव्यक्त करते हैं, लेखक शब्दों द्वारा और शिल्पकार पत्थर पर काम करके, मैं अपने आप को काठ पर अपनी कारीगरी के द्वारा ही सबसे बेहतर तरह अभिव्यक्त कर सकता हूँ। भूमीधर ने अद्भुत आत्मिक अन्तःदृष्टि से कहा, "काठ द्वारा? श्रीमान क्या आप जानते हैं कि सारे संसार में मनुष्य की महानत्म अभिव्यक्ति काठ में ही हुई है?" बढ़ई ने भूमिहर से बड़े अचरज से पूछा, "कैसे?" भूमिहर ने उत्तर दिया, "यीशु मसीह के क्रूस द्वारा।"

जब प्रभु यीशु इस पृथ्वी पर रहने के लिये आए तो अपने स्वर्गीय पिता के वचनानुसार आए। जो कुछ भी उन्होंने कहा या किया वह सब परमेश्वर पिता की आज्ञा के अनुसार था, इसलिये उनका जीवन और शिक्षाएं मनुष्य जाति के प्रति परमेश्वर के प्रेम भरे हृदय की सच्ची अभिव्यक्ति हैं। परन्तु प्रभु यीशु ने मनुष्य जाति के लिये परमेश्वर के प्रेम की अनन्त योजना की अभिव्यक्ति किसी महान शिक्षा के प्रचार या किसी बड़े आश्चर्यकर्म द्वारा नहीं करी, वरन उन्होंने परमेश्वर के प्रेम का सबसे प्रभावशाली प्रगटिकरण क्रूस पर स्वेच्छा से अपने बलिदान द्वारा किया।

क्रूस पर प्रभु यीशु का बलिदान परमेश्वर के प्रेम की महानत्म अभिव्यक्ति था। यह बलिदान, यह मृत्यु सहना, यह अनन्त प्रेम की अभिव्यक्ति मेरे और आपके लिये थी। जिसने इस काठ पर करी गई प्रेम की महानतम अभिव्यक्ति के मर्म को समझ लिया और स्वीकार कर लिया, वह अनन्त उद्धार पा गया। - डेव एगनर


मसीह ने हमारे पाप के दोष को अपने ऊपर ले लिया और हमें अपने अनुग्रह तथा आशीश की भेंट दे दी।

यहूदी तो चिन्‍ह चाहते हैं, और यूनानी ज्ञान की खोज में हैं। परन्‍तु हम तो उस क्रूस पर चढ़ाए हुए मसीह का प्रचार करते हैं जो यहूदियों के निकट ठोकर का कारण, और अन्यजातियों के निकट मूर्खता है। परन्‍तु जो बुलाए हुए हैं क्‍या यहूदी, क्‍या यूनानी, उन के निकट मसीह परमेश्वर की सामर्थ, और परमेश्वर का ज्ञान है। - १ कुरिन्थियों १:२२-२४


बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों १:१८-२५

1Co 1:18 क्‍योंकि क्रूस की कथा नाश होने वालों के निकट मूर्खता है, परन्‍तु हम उद्धार पाने वालों के निकट परमेश्वर की सामर्थ है।
1Co 1:19 क्‍योंकि लिखा है, कि मैं ज्ञानवानों के ज्ञान को नाश करूंगा, और समझदारों की समझ को तुच्‍छ कर दूंगा।
1Co 1:20 कहां रहा ज्ञानवान? कहां रहा शास्त्री? कहां इस संसार का विवादी? क्‍या परमेश्वर ने संसार के ज्ञान को मूर्खता नहीं ठहराया?
1Co 1:21 क्‍योंकि जब परमेश्वर के ज्ञान के अनुसार संसार ने ज्ञान से परमेश्वर को न जाना तो परमेश्वर को यह अच्‍छा लगा, कि इस प्रकार की मूर्खता के द्वारा विश्वास करने वालों को उद्धार दे।
1Co 1:22 यहूदी तो चिन्‍ह चाहते हैं, और यूनानी ज्ञान की खोज में हैं।
1Co 1:23 परन्‍तु हम तो उस क्रूस पर चढ़ाए हुए मसीह का प्रचार करते हैं जो यहूदियों के निकट ठोकर का कारण, और अन्यजातियों के निकट मूर्खता है।
1Co 1:24 परन्‍तु जो बुलाए हुए हैं क्‍या यहूदी, क्‍या यूनानी, उन के निकट मसीह परमेश्वर की सामर्थ, और परमेश्वर का ज्ञान है।
1Co 1:25 क्‍योंकि परमेश्वर की मूर्खता मनुष्यों के ज्ञान से ज्ञानवान है; और परमेश्वर की निर्बलता मनुष्यों के बल से बहुत बलवान है।

एक साल में बाइबल:
  • व्यवस्थाविवरण २६-२७
  • मरकुस १४:२७-५३

सोमवार, 14 मार्च 2011

"रेड क्रौस" का निशान

अपनी पुस्तक The Great Boer War, जो दक्षिणी अफ्रीका में हुए योरपीय सेनाओं के युद्ध का वृतांत है, सर आरथर कौनन डोयल ने एक घटना दर्ज की: अंग्रेज़ी सैनिकों की एक छोटी टुकड़ी अचानक ही विरोधियों की एक बड़ी सेना के हमले में फंस गई और भयानक गोली बारी ने उन्हें बुरी तरह ज़ख्मी कर के पीछे खदेड़ दिया। उनके घायल सैनिक बड़ी खतरनाक स्थिति में थे और उनकी रक्षा केवल रेड क्रौस के झंडे के संरक्षण में आने से ही होनी संभव थी। उनके पास सफेद कपड़ा तो था लेकिन उस पर रेड क्रौस का निशान बनाने के लिये लाल रंग नहीं था; उन्होंने अपने ज़ख्मों से बहते खून से उस कपड़े पर लाल क्रौस का निशान बना कर वह झण्डा ऊंचा किया। उनके आक्रमणकारियों ने जब वह रेड क्रौस का झण्डा देखा तो अपना हमला रोक दिया और बचाव दल आकर उन्हें सुरक्षित निकाल कर ले गया।

कलवरी के ल्रूस पर बहे मसीह यीशु के लहू के आगे हमारा शत्रु शैतान भी निरुपाय है और हमारा कुछ बिगाड़ नहीं सकता। मसीह का लहु उस महान त्याग का प्रतीक है जिसके कारण हम अपने पाप के दोष और उसके अनन्त मृत्यु के दण्ड की पकड़ से छूट सके। वह हमारे विरुद्ध शैतान के सभी दोषारोपणों से मिलने वाला सिद्ध संरक्षण है और हमारे पापों की क्षमा और पाप की प्रवृति पर विजय का प्रमाण है। इसी कारण हम मसीह के क्रूस में गर्व करते हैं।

यीशु मसीह को अपना निज उद्धारकर्ता स्वीकार करने के बाद कलवरी के क्रूस पर दिये गए उसके महान बलिदान की महिमा सदा हमारे जीवनों से होनी चाहिये। जो मसीह ने हमारे लिये किया उसके लिये प्रातः ही से हमें उसका आभारी होना चाहिये, सारे दिन उसके संरक्षण में रहना चाहिये और रात को उसपर विश्वास से विश्राम करना चाहिये।

मसीह के लहु से रंगे उस क्रूस के बलिदान ही से हमें पापों की क्षमा और उनके दण्ड से छुटकारा मिला है। - डेनिस डी हॉन


कलवरी शैतान को मिली हार का स्थान है।

जिस से हमें छुटकारा अर्थात पापों की क्षमा प्राप्‍त होती है। - कुलुस्सियों १:१४


बाइबल पाठ: इब्रानियों ९:११-२८

परन्‍तु जब मसीह आने वाली अच्‍छी अच्‍छी वस्‍तुओं का महायाजक होकर आया, तो उस ने और भी बड़े और सिद्ध तम्बू से होकर जो हाथ का बनाया हुआ नहीं, अर्थात सृष्‍टि का नहीं।
और बकरों और बछड़ों के लोहू के द्वारा नहीं, पर अपने ही लोहू के द्वारा एक ही बार पवित्र स्थान में प्रवेश किया, और अनन्‍त छुटकारा प्राप्‍त किया।
क्‍योंकि जब बकरों और बैलों का लोहू और कलोर की राख अपवित्र लोगों पर छिड़के जाने से शरीर की शुद्धता के लिये पवित्र करती है।
तो मसीह का लोहू जिस ने अपने आप को सनातन आत्मा के द्वारा परमेश्वर के साम्हने निर्दोष चढ़ाया, तुम्हारे विवेक को मरे हुए कामों से क्‍यों न शुद्ध करेगा, ताकि तुम जीवते परमेश्वर की सेवा करो।
और इसी कारण वह नई वाचा का मध्यस्थ है, ताकि उस मृत्यु के द्वारा जो पहिली वाचा के समय के अपराधों से छुटकारा पाने के लिये हुई है, बुलाए हुए लोग प्रतिज्ञा के अनुसार अनन्‍त मीरास को प्राप्‍त करें।
क्‍योंकि जहां वाचा बान्‍धी गई है वहां वाचा बान्‍धने वाले की मृत्यु का समझ लेना भी अवश्य है।
क्‍योंकि ऐसी वाचा मरने पर पक्की होती है, और जब तक वाचा बान्‍धने वाला जीवित रहता है, तब तक वाचा काम की नहीं होती।
इसी लिये पहिली वाचा भी बिना लोहू के नहीं बान्‍धी गई।
क्‍योंकि जब मूसा सब लोगों को व्यवस्था की हर एक आज्ञा सुना चुका, तो उस ने बछड़ों और बकरों का लोहू लेकर, पानी और लाल ऊन, और जूफा के साथ, उस पुस्‍तक पर और सब लोगों पर छिड़क दिया।
और कहा, कि यह उस वाचा का लोहू है, जिस की आज्ञा परमेश्वर ने तुम्हारे लिये दी है।
और इसी रीति से उस ने तम्बू और सेवा के सारे सामान पर लोहू छिड़का।
और व्यवस्था के अनुसार प्राय: सब वस्‍तुएं लोहू के द्वारा शुद्ध की जाती हैं और बिना लोहू बहाए क्षमा नहीं होती।
इसलिये अवश्य है, कि स्‍वर्ग में की वस्‍तुओं के प्रतिरूप इन के द्वारा शुद्ध किए जाएं, पर स्‍वर्ग में की वस्‍तुएं आप इन से उत्तम बलिदानों के द्वारा।
क्‍योंकि मसीह ने उस हाथ के बनाए हुए पवित्र स्थान में जो सच्‍चे पवित्र स्थान का नमूना है, प्रवेश नहीं किया, पर स्‍वर्ग ही में प्रवेश किया, ताकि हमारे लिये अब परमेश्वर के साम्हने दिखाई दे।
यह नहीं कि वह अपने आप को बार बार चढ़ाए, जैसा कि महायाजक प्रति वर्ष दूसरे का लोहू लिये पवित्रस्थान में प्रवेश किया करता है।
नहीं तो जगत की उत्‍पत्ति से लेकर उस को बार बार दुख उठाना पड़ता; पर अब युग के अन्‍त में वह एक बार प्रगट हुआ है, ताकि अपने ही बलिदान के द्वारा पाप को दूर कर दे।
और जैसे मनुष्यों के लिये एक बार मरना और उसके बाद न्याय का होना नियुक्त है।
वैसे ही मसीह भी बहुतों के पापों को उठा लेने के लिये एक बार बलिदान हुआ और जो लोग उस की बाट जोहते हैं, उन के उद्धार के लिये दूसरी बार बिना पाप के दिखाई देगा।

एक साल में बाइबल:
  • व्यवस्थाविवरण २३-२५
  • मरकुस १४:१-२६

रविवार, 13 मार्च 2011

प्रेम की सामर्थ

एक गांव के प्रार्थना भवन की दीवार पर दो बारह वर्षीय युवकों की तसवीरें लगीं हैं। एक का नाम है रिक और दूसरे का रोज़ी। वे तसवीरें यादगार हैं एक दुर्घटना की जो कई साल पहले घटी थी। उस गांव के बच्चे एक झील पर नौका विहार के लिये गए थे। नौका अभियान के बाद वे किनारे लौटे और अपने खेमे लगाने लगे। तभी रोज़ी को पानी में कुछ तैरता दिखाई दिया, और वह उसे लेने के लिये नाव पानी में उतार कर उसकी ओर चल दिया। तेज़ हवाओं ने उसे शीघ्र ही किनारे से दूर धकेल दिया। उसकी खतरनाक दशा को देखकर उनके साथ के अधिकारियों ने दो नौकाएं और पानी में उतारीं के उसे बचा लाएं। जब रिक ने देखा कि उसका सबसे अच्छा मित्र खतरे में है तो उसने भी बचाव दल के साथ जाने का हठ किया और उनके साथ चल दिया। तेज़ हवाओं ने उन तीनों नौकाओं को झकझोर दिया और उलट दिया। बचाव दल के लोग किसी तरह तैरकर अपनी जान बचाने में सफल हुए लेकिन रिक और रोज़ी दोनो ही झील की गहराईयों में खो गए। उन दोनो की तसवीर के बीच में एक स्मृति-पटिका पर यह शब्द खुदे हैं "रिक, जिसने इतना प्रेम किया कि अपनी जान दूसरे के लिये दे दी। रोज़ी, जो ऐसे प्रेम के लायक था कि दूसरे ने उसके लिये अपनी जान दे दी।"

यह कहानी स्मरण दिलाती है " देखो पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है..." (१ यूहन्ना ३:१) - ऐसा प्रेम कि हमारे पापों के लिये अपने पुत्र को बलिदान होने को दे दिया। और हम ऐसे प्रेम के भागी बने कि पुत्र स्वेच्छा से हमारे सन्ती बलिदान हो गया।

हमारा उद्धार ही उसके प्रेम की इस सामर्थ का सबसे महान प्रमाण है। - डेव एगनर


परमेश्वर के प्रेम का सच्चा माप यही है कि उसके प्रेम को मापा नहीं जा सकता।

देखो पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है... - १ यूहन्ना ३:१


बाइबल पाठ : १ यूहन्ना ४:७-११

हे प्रियों, हम आपस में प्रेम रखें; क्‍योंकि प्रेम परमेश्वर से है: और जो कोई प्रेम करता है, वह परमेश्वर से जन्मा है और परमेश्वर को जानता है।
जो प्रेम नहीं रखता, वह परमेश्वर को नहीं जानता है, क्‍योंकि परमेश्वर प्रेम है।
जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ, कि परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है, कि हम उसके द्वारा जीवन पाएं।
प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर ने प्रेम किया; पर इस में है, कि उस ने हम से प्रेम किया और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा।
हे प्रियों, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए।

एक साल में बाइबल:
  • व्यवस्थाविवरण २०-२२
  • मरकुस १३:२१-३७