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शुक्रवार, 18 नवंबर 2011

करुणा भाव

   वे जिनका स्वास्थ्य अच्छा होता है कई बार उनकी उपेक्षा करते हैं जो इतने भाग्यवान नहीं हैं, और कभी कभी तो उनके साथ निष्ठुरता का व्यवहार भी करते हैं। मैंने कुछ अन्य युवकों को एक मन्द बुद्धि मनुष्य का मज़ाक बनाते देखा है; मैंने कुछ ऐसे लोगों को भी देखा है जो उनकी अन्देखी करते हैं जो या तो अपंग हैं या ’दिखने’ में भिन्न होते हैं।

   इसके विपरीत मैंने अपनी एक कुटुंबी को ऐसे लोगों के प्रति बहुत करुणामय देखा है जिनकी अन्य लोग उपेक्षा करते हैं। वे प्रति सप्ताह अपने समय का एक बड़ा भाग दो ऐसे वृद्धों कि देखभाल में लगाती हैं जिनका कोई सहायक नहीं है। उनकी गली में रहने वाले एक मानसिक रोगी से भी उनकी अच्छी मित्रता है, और लगभग प्रति दिन वह उनके पास कुछ पल के लिए मिलने आता है, और उसके चेहरे की खुशी बताती है कि इस छोटी सी मुलाकात से उसे कितनी प्रसन्नता होती है और मेरी कुटुंबी उसके जीवन में कितना आनन्द देती है।

   प्रभु यीशु ने भी सदा करुणा के साथ लोगों से व्यवहार किया। वह रोगियों और दुखियों के प्रति दयालु था और वे उसे घेरे रहते थे। उसने एक अन्धे व्यक्ति को चँगा करने से पहले उसका हाथ पकड़ कर उसे भीड़ से निकाला। वे बिमारों को, यहाँ तक कि कोढियों को भी छू कर चँगा करते थे, और दुष्टात्माओं से ग्रसित लोगों को दुष्टात्माओं से छुटकारा दिलवाने के लिए समय देते थे।

   मसीही विश्वासी की मसीह से समानता का एक सूचक है उसका ऐसे अभागे लोगों से किया गया व्यवहार। क्योंकि ये त्रस्त और अभागे लोग प्रत्युत्तर में हमें कुछ नहीं दे सकते इसलिए उनके प्रति हमारी भलाई वास्तव में निस्वार्थ होती है। उनके प्रति जिन्हें बहुत की आवश्यक्ता है लेकिन प्राप्त थोड़ा ही होता है, मसीह के समान करुणा भाव दिखाने के ऐसे प्रत्येक अवसर का हम मसीही विश्वासियों को स्वागत और उपयोग करना चाहिए। - हर्ब वैण्डर लुग्ट


जो प्रत्युत्तर में हमारी सहायता नहीं कर सकते, उनकी सहायता के लिए हाथ बढ़ाना हमारे मसीही प्रेम की परीक्षा है।

और एक कोढ़ी ने उसके पास आकर, उस से बिनती की, और उसके साम्हने घुटने टेक कर, उस से कहा; यदि तू चाहे तो मुझे शुद्ध कर सकता है। उस ने उस पर तरस खाकर हाथ बढ़ाया, और उसे छूकर कहा, मैं चाहता हूं तू शुद्ध हो जा। - मरकुस १:४०, ४१

बाइबल पाठ: मरकुस १:३२-४२
    Mar 1:32  सन्‍ध्या के समय जब सूर्य डूब गया तो लोग सब बीमारों को और उन्‍हें जिन में दुष्‍टात्मा थीं उसके पास लाए।
    Mar 1:33  और सारा नगर द्वार पर इकट्ठा हुआ।
    Mar 1:34  और उस ने बहुतों को जो नाना प्रकार की बीमारियों से दुखी थे, चंगा किया; और बहुत से दुष्‍टात्माओं को निकाला; और दुष्‍टात्माओं को बोलने न दिया, क्‍योंकि वे उसे पहचानती थीं।
    Mar 1:35  और भोर को दिन निकलने से बहुत पहिले, वह उठकर निकला, और एक जंगली स्थान में गया और वहां प्रार्थाना करने लगा।
    Mar 1:36  तब शमौन और उसके साथी उस की खोज में गए।
    Mar 1:37  जब वह मिला, तो उस से कहा; कि सब लोग तुझे ढूंढ रहे हैं।
    Mar 1:38  उस न उन से कहा, आओ; हम और कहीं आस पास की बस्‍तियों में जाएं, कि मैं वहां भी प्रचार करूं, क्‍योंकि मैं। इसी लिये निकला हूं।
    Mar 1:39  सो वह सारे गलील में उन की सभाओं में जा जाकर प्रचार करता और दुष्‍टात्माओं को निकालता रहा।
    Mar 1:40  और एक कोढ़ी ने उसके पास आकर, उस से बिनती की, और उसके साम्हने घुटने टेककर, उस से कहा; यदि तू चाहे तो मुझे शुद्ध कर सकता है।
    Mar 1:41  उस ने उस पर तरस खाकर हाथ बढ़ाया, और उसे छूकर कहा; मैं चाहता हूं तू शुद्ध हो जा।
    Mar 1:42  और तुरन्‍त उसका कोढ़ जाता रहा, और वह शुद्ध हो गया।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल ८-१० 
  • इब्रानियों १३

गुरुवार, 17 नवंबर 2011

सर्वाधिक महिमा

   प्रभु यीशु के अनेक सच्चे विश्वासी यह मानते हैं कि अस्वस्थता मनुष्य के लिए परमेश्वर की इच्छा में नहीं है। इसलिए हमें पूरा ज़ोर लगाकर चंगाई के लिए प्रार्थना करते रहना चाहिए और प्रार्थना के उत्तर में इन्कार को स्वीकार कभी नहीं करना चाहिए। उनका मानना है कि शारीरिक अस्वस्थता इसलिए बनी रहती है क्योंकि हम उसके आदी हो गए हैं; और इस से निकलने के लिए जो हमें चाहिए वह है और भी अधिक विश्वास। वे इस बात को विश्वास की कमी का सूचक मानते हैं जब प्रार्थना में परमेश्वर से लोग कहते हैं कि "यदि आपकी इच्छा हो तो..."।

   किंतु अपने क्रूस पर चढ़ाए जाने के लिए पकड़वाए जाने से पहले गतसमनी के बाग़ में प्रभु यीशु की प्रार्थना पर विचार करें। यद्यपि उनकी प्रार्थना किसी बीमारी के लिए नहीं वरन उस आने वाले दुख से निकल पाने के विष्य में थी जो वे भोगने को थे, उस प्रार्थना के लिए परमेश्वर का प्रत्युत्तर स्पष्ट दिखाता है कि उसकी महिमा हमेशा परिस्थितियों के तुरंत या नाटकीय रूप से निवारण द्वारा नहीं होती।

   प्रभु जो पाप से अनजान था, निष्पाप और निष्कलंक था, समस्त मानव जाति के पापों को अपने ऊपर लेने जा रहा था, सबके लिए पाप बनकर प्रत्येक व्यक्ति के लिए पाप का दण्ड भोगने जा रहा था। ऐसे में उसका विचिलित होना, और उसका प्रार्थना करना कि यदि सम्भव हो तो यह दुख का प्याला उसे ना पीना पड़े स्वभाविक था। लेकिन उस ने अपनी इच्छा मनवाने के लिए परमेश्वर को बाध्य नहीं किया; अपने भाव व्यक्त करने के पश्चात, जो भी होना हो उसने वह परमेश्वर के हाथों में छोड़ दिया, और अपने आप को उसकी आज्ञाकारिता को समर्पित कर दिया।

   अपने प्रभु के समान हमें भी अपने दुखों और आवश्यक्ताओं में अपने परमेश्वर के सन्मुख अपनी भावनाएं व्यक्त करने और प्रार्थनाएं करने की स्वतंत्रता है, लेकिन प्रभु के समान ही उन विषयों के लिए परमेश्वर की इच्छा पुरी होने देने की भी ज़िम्मेदारी है।

   नौर्वे के एक बाइबल शिक्षक ओले हैल्सबी ने कहा कि अपनी अस्वस्थताओं के लिए हमें कुछ इस प्रकार प्रार्थना करनी चाहिए: "प्रभु, यदि आपकी महिमा हो तो मुझे तुरंत ठीक कर दीजिए; यदि अधिक महिमा उस में हो तो धीरे धीरे ठीक कीजिए; यदि उससे भी अधिक महिमा उससे होती हो तो अपने दास को कुछ समय अस्वस्थ रहने दीजिए; और यदि उससे सर्वाधिक महिमा होती हो तो अपने दास को अपने पास स्वर्ग में बुला लीजिए।"

   हर बात में हमें यह विचार करना चाहिए कि परमेश्वर की सर्वाधिक महिमा किस बात से होगी? - डेनिस डी हॉन

यदि परमेश्वर किसी बात के लिए हमें इन्कार करता है तो वह इसलिए कि वो हमें कुछ बेहतर दे सके।

और वह थोड़ा आगे बढ़ा, और भूमि पर गिर कर प्रार्थना करने लगा, कि यदि हो सके तो यह घड़ी मुझ पर से टल जाए। और कहा, हे अब्‍बा, हे पिता, तुझ से सब कुछ हो सकता है; इस कटोरे को मेरे पास से हटा ले: तौभी जैसा मैं चाहता हूं वैसा नहीं, पर जो तू चाहता है वही हो। - मरकुस १४:३५, ३६

बाइबल पाठ: मरकुस १४:३२-३८
    Mar 14:32  फिर वे गतसमने नाम एक जगह में आए, और उस ने अपने चेलों से कहा, यहां बैठे रहो, जब तक मैं प्रार्थना करूं।
    Mar 14:33  और वह पतरस और याकूब और यूहन्ना को अपने साथ ले गया: और बहुत ही अधीर, और व्याकुल होने लगा।
    Mar 14:34  और उन से कहा, मेरा मन बहुत उदास है, यहां तक कि मैं मरने पर हूं: तुम यहां ठहरो, और जागते रहो।
    Mar 14:35  और वह थोड़ा आगे बढ़ा, और भूमि पर गिर कर प्रार्थना करने लगा, कि यदि हो सके तो यह घड़ी मुझ पर से टल जाए।
    Mar 14:36  और कहा, हे अब्‍बा, हे पिता, तुझ से सब कुछ हो सकता है; इस कटोरे को मेरे पास से हटा ले: तौभी जैसा मैं चाहता हूं वैसा नहीं, पर जो तू चाहता है वही हो।
    Mar 14:37  फिर वह आया, और उन्‍हें सोते पाकर पतरस से कहा, हे शमौन तू सो रहा है? क्‍या तू एक घड़ी भी न जाग सका?
    Mar 14:38  जागते और प्रार्थना करते रहो कि तुम परीक्षा में न पड़ो: आत्मा तो तैयार है, पर शरीर र्दुबल है।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल ५-७ 
  • इब्रानियों १२

बुधवार, 16 नवंबर 2011

आँसुओं का मूल्य

   आँसू, भावनाएं व्यक्त करने में शब्दों से और संबंधों के बनाने में वाचाओं से अधिक सामर्थी होते हैं। सन १९४७ में तत्कालीन अमेरीकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन पड़ौसी देश मेक्सिको के दौरे पर थे और वे वहाँ के एक सैनिक प्रशिक्षण केंद्र पर श्रद्धांजलि देने गए। तब से लगभग सौ वर्ष पूर्व, अमेरीकी सैनिकों ने जब उस स्थान पर कब्ज़ा किया था तो प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षण ले रहे सैनिक छात्रों ने भी युद्ध में भाग लिया और उस युद्ध में सभी शहीद हो गए। जब ट्रूमैन उन शहीदों के स्मरण में बने स्मारक पर उनके लिए अपने श्रद्धा सुमन चढ़ा कर और उनके आदर में अपने सर को झुका कर खड़े हुए तो वहाँ उपस्थित सैनिकों की आँखों से आँसू बहने लगे। उस समय पर व्यक्त किए गए इस भावोद्वेग ने दोनो देशों के संबंध को दृढ़ करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

   मसीही विश्वासी भी अपने सबसे घोर संघर्ष और सबसे उत्तम भावनाएं अपने आँसुओं के माध्यम से प्रकट कर सकते हैं। जब आँसु प्रार्थना और संवेदना के साथ मिलाकर अर्पित करे जाते हैं, तो वे विश्वासी के विश्वास और भावनाओं की सुन्दर अभिव्यक्ति हो जाते हैं।

   मुझे कोई संदेह नहीं है कि प्रभु यीशु भी जीवन के सच्चे आनन्दों में आनन्दित होते थे; लेकिन अपने चारों ओर विद्यमान पाप के कारण उत्पन्न दुख से भी वो आहत होते थे। वे बेझिझक अपने मित्र की कब्र पर भी रोए और यरुशलेम के अविश्वास पर भी उनके आँसू बह निकले।

   हमारे उद्धाकर्ता के आँसू हमें प्रोतसाहित करते हैं कि हम भी अपने भावों की सच्ची अभिव्यक्ति के लिए आँसू बहाने से न हिचकिचाएं, बिगड़े संबंधों को सुधारने और अवरोधों को दूर करने के लिए हम अपने आँसुओं का पवित्र आत्मा को प्रयोग करने दें।

   क्योंकि कठोर, दुखी और अविश्वासी लोगों को यीशु के प्रेम, क्षमा और उद्धार की आवश्यक्ता है, इसलिए हमें उनके लिए परमेश्वर के सन्मुख आँसू बहाने की आवश्यक्ता है। उनके लिए हमारे आँसुओं को देख कर उनके कठोर मन पिघल सकते हैं और वे भी यीशु को ग्रहण करने वाले हो सक्ते हैं। - डेनिस डी हॉन


यदि आँखों में आँसू ना हों तो आत्मा को कोई मेघधनुष दिखाई नहीं देगा।

आनन्‍द करने वालों के साथ आनन्‍द करो, और रोने वालों के साथ रोओ। - रोमियों १२:१५

बाइबल पाठ: युहन्ना ११:१७-४४
    Joh 11:17  सो यीशु को आकर यह मालूम हुआ कि उसे कब्र में रखे चार दिन हो चुके हैं।
    Joh 11:18  बैतनिय्याह यरूशलेम के समीप कोई दो मील की दूरी पर था।
    Joh 11:19  और बहुत से यहूदी मरथा और मरियम के पास उन के भाई के विषय में शान्‍ति देने के लिये आए थे।
    Joh 11:20  सो मरथा यीशु के आने का समचार सुनकर उस से भेंट करने को गई, परन्‍तु मरियम घर में बैठी रही।
    Joh 11:21  मरथा ने यीशु से कहा, हे प्रभु, यदि तू यहां होता, तो मेरा भाई कदापि न मरता।
    Joh 11:22  और अब भी मैं जानती हूं, कि जो कुछ तू परमेश्वर से मांगेगा, परमेश्वर तुझे देगा।
    Joh 11:23  यीशु ने उस से कहा, तेरा भाई जी उठेगा।
    Joh 11:24  मरथा ने उस से कहा, मैं जानती हूं, कि अन्‍तिम दिन में पुनरूत्थान के समय वह जी उठेगा।
    Joh 11:25  यीशु ने उस से कहा, पुनरूत्थान और जीवन मैं ही हूं, जा कोई मुझ पर विश्वास करता है वह यदि मर भी जाए, तौभी जीएगा।
    Joh 11:26  और जो कोई जीवता है, और मुझ पर विश्वास करता है, वह अनन्‍तकाल तक न मरेगा, क्‍या तू इस बात पर विश्वास करती है
    Joh 11:27  उस ने उस से कहा, हां हे प्रभु, मैं विश्वास कर चुकी हूं, कि परमेश्वर का पुत्र मसीह जो जगत में आने वाला था, वह तू ही है।
    Joh 11:28  यह कह कर वह चली गई, और अपनी बहिन मरियम को चुपके से बुला कर कहा, गुरू यहीं है, और तुझे बुलाता है।
    Joh 11:29  वह सुनते ही तुरन्‍त उठ कर उसके पास आई।
    Joh 11:30  (यीशु अभी गांव में नहीं पहुंचा था, परन्‍तु उसी स्थान में था जहां मरथा ने उस से भेंट की थी।)
    Joh 11:31  तब जो यहूदी उसके साथ घर में थे, और उसे शान्‍ति दे रहे थे, यह देखकर कि मरियम तुरन्‍त उठके बाहर गई है और यह समझ कर कि वह कब्र पर रोने को जाती है, उसके पीछे हो लिये।
    Joh 11:32  जब मरियम वहां पहुंची जहां यीशु था, तो उसे देखते ही उसके पांवों पर गिर के कहा, हे प्रभु, यदि तू यहां होता तो मेरा भाई न मरता।
    Joh 11:33  जब यीशु ने उस को और उन यहूदियों को जो उसके साथ आए थे रोते हुए देखा, तो आत्मा में बहुत ही उदास हुआ, और घबरा कर कहा, तुम ने उसे कहां रखा है?
    Joh 11:34  उन्‍होंने उस से कहा, हे प्रभु, चल कर देख ले।
    Joh 11:35  यीशु के आंसू बहने लगे।
    Joh 11:36  तब यहूदी कहने लगे, देखो, वह उस से कैसी प्रीति रखता था।
    Joh 11:37  परन्‍तु उन में से कितनों ने कहा, क्‍या यह जिस ने अन्‍धे की आंखें खोलीं, यह भी न कर सका कि यह मनुष्य न मरता?
    Joh 11:38  यीशु मन में फिर बहुत ही उदास होकर कब्र पर आया, वह एक गुफा थी, और एक पत्थर उस पर धरा था।
    Joh 11:39  यीशु ने कहा पत्थर को उठाओ: उस मरे हुए की बहिन मरथा उस से कहने लगी, हे प्रभु, उस में से अब तो र्दुगंध आती है क्‍योंकि उसे मरे चार दिन हो गए।
    Joh 11:40  यीशु ने उस से कहा, क्‍या मैं ने तुझ से न कहा कि यदि तू विश्वास करेगी, तो परमेश्वर की महिमा को देखेगी।
    Joh 11:41  तब उन्‍होंने उस पत्थर को हटाया, फिर यीशु ने आंखें उठा कर कहा, हे पिता, मैं तेरा धन्यवाद करता हूं कि तू ने मेरी सुन ली है।
    Joh 11:42  और मै जानता था, कि तू सदा मेरी सुनता है, परन्‍तु जो भीड़ आस पास खड़ी है, उन के कारण मैं ने यह कहा, जिस से कि वे विश्वास करें, कि तू ने मुझे भेजा है।
    Joh 11:43  यह कह कर उस ने बड़े शब्‍द से पुकारा, कि हे लाजर, निकल आ।
    Joh 11:44  जो मर गया था, वह कफन से हाथ पांव बन्‍धे हुए निकल आया और उसका मुंह अंगोछे से लिपटा हुआ था; यीशु ने उन से कहा, उसे खोलकर जाने दो।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल ३-४ 
  • इब्रानियों ११:२०-४०

मंगलवार, 15 नवंबर 2011

अनुकम्पा

   एक दिन प्रसिद्ध मसीही प्रचारक डी.एल.मूडी ने प्रभु यीशु मसीह की अनुकम्पा पर एक हृदय स्पर्शी सन्देश दिया। बाद में उनके एक मित्र ने पूछा कि वे इतना दिल छू लेने वाला सन्देश कैसे तैयार कर सके तो उन्होंने उत्तर दिया, "मैं एक दिन प्रभु यीशु मसीह की करुणा के बरे में विचार करने लगा; इसलिए मैंने अपनी बाइबल ली और उसे पढ़ने और ढूंढ़ने लगा कि परमेश्वर का वचन मसीह की करुणा के विषय में क्या कुछ कहता है। जैसे जैसे मुझे संबंधित पद मिलते गए, मैं उन पर मनन और प्रार्थना करता रहा, कुछ ही देर में मसीह की असीम करुणा ने मुझे ऐसा अभिभूत कर लिया कि मैं अपने अध्ययन कक्ष के फर्श पर लेटकर, बाइबल में मूँह रखकर बच्चे के समान फूट फूट कर रोने लगा।"

   कुछ लोगों को लगता है कि रोना कमज़ोरी की निशानी है। परन्तु स्वयं हमारा प्रभु यीशु रोया था। प्रेरित पौलुस भी, जब उस ने परमेश्वर के लोगों के लिए अपने हृदय के बोझ के बारे में लिखा, तो साथ ही अपने आँसुओं के विषय में लिखने से नहीं लज्जाया। मसीह के भले सेवक ऐसे ही होंगे - उनके हृदय कोमल और करुणामय होंगे; उनके मन प्रेम से ऐसे भरे होंगे कि अकसर उनकी भावनाएं आँसुओं के रूप में प्रवाहित होती मिलेंगी।

   जब हम मसीह के क्रूस की छाया में आकर खड़े होंगे, और परमेश्वर के प्रेम से अपनी आत्मा को विभोर होने देंगे, तो हमारे कठोर मन पिघल जाएंगे और मन का ठंडापन जाता रहेगा और उसकी जगह समस्त मानव जाति के लिए परमेश्वर के प्रेम की गर्माहट मन में भर जाएगी। तब ही पाप के दासत्व में पड़े लोगों के लिए मसीह की अनुकम्पा हमारी भी अनुकम्पा बन जाएगी और मसीह का प्रेम हमें वशीभूत करेगा कि हम दूसरों तक उसके प्रेम और उद्धार के सुसमाचार को पहुँचाने की लालसा रखने तथा हर कष्ट और सताव के बावजूद अपनी इस लालसा की पूर्ति के लिए प्रयास में लगे रहने वाले लोग बन सकें। - पौल वैन गोर्डर


प्रेम भरे हृदय रूपी सोते से आँसु उनमुक्त भाव से बहते हैं।

... मैं ने तीन वर्ष तक रात दिन आंसू बहा बहाकर, हर एक को चितौनी देना न छोड़ा। - प्रेरितों २०:३१
 
बाइबल पाठ: १ थिस्सलुनीकियों २:१-२०
    1Th 2:1  हे भाइयों, तुम आप ही जानते हो कि हमारा तुम्हारे पास आना व्यर्थ न हुआ।
    1Th 2:2  वरन तुम आप ही जानते हो, कि पहिले पहिल फिलिप्पी में दुख उठाने और उपद्रव सहने पर भी हमारे परमेश्वर ने हमें ऐसा हियाव दिया, कि हम परमेश्वर का सुसमाचार भारी विरोधों के होते हुए भी तुम्हें सुनाएं।
    1Th 2:3  क्‍योंकि हमारा उपदेश न भ्रम से है और न अशुद्धता से, और न छल के साथ है।
    1Th 2:4  पर जैसा परमेश्वर ने हमें योग्य ठहरा कर सुसमाचार सौंपा, हम वैसा ही वर्णन करते हैं; और इस में मनुष्यों को नहीं, परन्‍तु परमेश्वर को, जो हमारे मनों को जांचता है, प्रसन्न करते हैं।
    1Th 2:5  क्‍योंकि तुम जानते हो, कि हम न तो कभी लल्लोपत्तो की बातें किया करते थे, और न लोभ के लिये बहाना करते थे, परमेश्वर गवाह है।
    1Th 2:6  और यद्यपि हम मसीह के प्रेरित होने के कारण तुम पर बोझ डाल सकते थे, तौभी हम मनुष्यों से आदर नहीं चाहते थे, और न तुम से, न और किसी से।
    1Th 2:7  परन्‍तु जिस तरह माता अपने बालकों का पालन-पोषण करती है, वैसे ही हम ने भी तुम्हारे बीच में रह कर कोमलता दिखाई है।
    1Th 2:8  और वैसे ही हम तुम्हारी लालसा करते हुए, न केवल परमेश्वर को सुसमाचार, पर अपना अपना प्राण भी तुम्हें देने को तैयार थे, इसलिये कि तुम हमारे प्यारे हो गए थे।
    1Th 2:9  क्‍योंकि, हे भाइयों, तुम हमारे परिश्रम और कष्‍ट को स्मरण रखते हो, कि हम ने इसलिये रात दिन काम धन्‍धा करते हुए तुम में परमेश्वर का सुसमाचार प्रचार किया, कि तुम में से किसी पर भार न हों।
    1Th 2:10  तुम आप ही गवाह हो: और परमेश्वर भी, कि तुम्हारे बीच में जो विश्वास रखते हो हम कैसी पवित्रता और धामिर्कता और निर्दोषता से रहे।
    1Th 2:11  जैसे तुम जानते हो, कि जैसा पिता अपने बालकों के साथ बर्ताव करता है, वैसे ही हम तुम में से हर एक को भी उपदेश करते, और शान्‍ति देते, और समझाते थे।
    1Th 2:12  कि तुम्हारा चाल चलन परमेश्वर के योग्य हो, जो तुम्हें अपने राज्य और महिमा में बुलाता है।
    1Th 2:13  इसलिये हम भी परमेश्वर का धन्यवाद निरन्‍तर करते हैं; कि जब हमारे द्वारा परमेश्वर के सुसमाचार का वचन तुम्हारे पास पहुंचा, तो तुम ने उसे मनुष्यों का नहीं, परन्‍तु परमेश्वर का वचन समझ कर (और सचमुच यह ऐसा ही है) ग्रहण किया: और वह तुम में जो विश्वास रखते हो, प्रभावशाली है।
    1Th 2:14  इसलिये कि तुम, हे भाइयो, परमेश्वर की उन कलीसियाओं की सी चाल चलने लगे, जो यहूदिया में मसीह यीशु में हैं, क्‍योंकि तुम ने भी अपने लोगों से वैसा ही दुख पाया, जैसा उन्‍होंने यहूदियों से पाया था।
    1Th 2:15  जिन्‍होंने प्रभु यीशु को और भविष्यद्वक्ताओं को भी मार डाला और हम को सताया, और परमेश्वर उन से प्रसन्न नहीं; और वे सब मनुष्यों को विरोध करते हैं।
    1Th 2:16  और वे अन्यजातियों से उन के उद्धार के लिये बातें करने से हमें रोकते हैं, कि सदा अपने पापों का नपुआ भरते रहें; पर उन पर भयानक प्रकोप आ पहुंचा है।
    1Th 2:17  हे भाइयों, जब हम थोड़ी देर के लिये मन में नहीं बरन प्रगट में तुम से अलग हो गए थे, तो हम ने बड़ी लालसा के साथ तुम्हारा मुंह देखने के लिये और भी अधिक यत्‍न किया।
    1Th 2:18  इसलिये हम ने (अर्थात मुझ पौलुस ने) एक बार नहीं, वरन दो बार तुम्हारे पास आना चाहा, परन्‍तु शैतान हमें रोके रहा।
    1Th 2:19  भला हमारी आशा, या आनन्‍द या बड़ाई का मुकुट क्‍या है? क्‍या हमारे प्रभु यीशु के सम्मुख उसके आने के समय तुम ही न होगे?
    1Th 2:20  हमारी बड़ाई और आनन्‍द तुम ही हो।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल १-२ 
  • इब्रानियों ११:१-१९

सोमवार, 14 नवंबर 2011

संवेदनशील और कृपालु

    एक छोटी बच्ची की माँ बिमार पड़ी और उसे अस्पताल में भरती होना पड़ा। जीवन में पहली बार वह बच्ची बिना माँ के रहने जा रही थी। जब रात हुई और उसके पिता ने सोने के लिए बत्ती बुझाई, तो उसने पूछा, "पिताजी आप यहीं हैं न?" पिता ने उसे आश्वासन दिया कि वह वहीं उसके साथ है। थोड़ी देर में बच्ची ने फिर प्रश्न किया, "पिताजी, आप मुझे देख रहे हैं ना?" पिता ने फिर उसे आश्वस्त किया और उसका ढाढस बंधाया, और तब वह बच्ची निश्चिंत होकर सो गई।

   ऐसे ही परमेश्वर की प्रत्येक सन्तान अपने प्रेमी स्वर्गीय पिता पर आश्वस्त रह सकती है। परिस्थिति चाहे कैसी भी हो, दुख चाहे कितना भी गंभीर क्यों न हो, उसकी निगाहें सर्वदा हम पर बनी रहती हैं। यह जानते हुए कि हमारे उद्धारकर्ता और परमेश्वर की निगाहें सर्वदा हम पर बनी हुई हैं, हमें भी उसके समान संवेदनशील, सहायक और प्रेम रखने वाले बनना चाहिए।

   यह संसार बहुत कठोर, दूसरों के दुखों के प्रति लापरवाह और निर्दयी हो सकता है। संसार के लोग अपने पड़ौसियों की तकलीफों के प्रति उदासीन और स्वार्थी हो सकते हैं; लेकिन प्रभु यीशु ऐसे नहीं थे। बारंबार उन्होंने दूसरों के दुख तकलीफों में उनकी सहायता करी। लूका ७ में प्रभु यीशु की संवेदना का उल्लेख है जब उन्होंने एक विध्वा को पुत्रवियोग में देखा और तुरंत उसके मृतक पुत्र को जीवित करके उसकी सहायता करी। आज भी प्रभु यीशु संसार के लोगों की ओर संवेदना से देखता है, चाहता है कि कोई पापों में नाश ना हो, उसके कलवरी के क्रूस पर दिए गए बलिदान पर साधारण विश्वास कर के प्रत्येक जन उद्धार प्राप्त करे।

   जिन्होंने उद्धार प्राप्त किया है, अपने उन अनुयायीयों से वह आशा रखता है कि वे भी उसकी तरह संवेदनशील और कृपालु हों और दूसरों की सहायता के लिए तत्पर रहें। - डेव एग्नर

परमेश्वर प्रत्येक व्यक्ति से ऐसे प्रेम करता है मानो उसके प्रेम का पात्र होने के लिए वही एकमात्र है।

उस ने निकलकर बड़ी भीड़ देखी, और उन पर तरस खाया, क्‍योंकि वे उन भेड़ों के समान थे, जिन का कोई रखवाला न हो; और वह उन्‍हें बहुत सी बातें सिखाने लगा। - मरकुस ६:३४
 
बाइबल पाठ: लूका ७:११-१७
    Luk 7:11  थोड़े दिन के बाद वह नाईन नाम के एक नगर को गया, और उसके चेले, और बड़ी भीड़ उसके साथ जा रही थी।
    Luk 7:12  जब वह नगर के फाटक के पास पहुंचा, तो देखो, लोग एक मुरदे को बाहर लिए जा रहे थे; जो अपनी मां का एकलौता पुत्र था, और वह विधवा थी: और नगर के बहुत से लोग उसके साथ थे।
    Luk 7:13  उसे देख कर प्रभु को तरस आया, और उस ने कहा; मत रो।
    Luk 7:14  तब उस ने पास आकर, अर्थी को छुआ, और उठाने वाले ठहर गए, तब उस ने कहा; हे जवान, मैं तुझ से कहता हूं, उठ।
    Luk 7:15  तब वह मुर्दा उठ बैठा, और बोलने लगा: और उस ने उसे उस की मां को सौप दिया।
    Luk 7:16  इस से सब पर भय छा गया और वे परमेश्वर की बड़ाई कर के कहने लगे कि हमारे बीच में एक बड़ा भविष्यद्वक्ता उठा है, और परमेश्वर ने अपने लोगों पर कृपा दृष्‍टि की है।
    Luk 7:17  और उसके विषय में यह बात सारे यहूदिया और आस पास के सारे देश में फैल गई।
 
एक साल में बाइबल: 
  • विलापगीत ३-५ 
  • इब्रानियों १०:१९-३९

रविवार, 13 नवंबर 2011

सहायक

   एडमन्ड हिलेरी और उनके शेरपा साथी तेनज़िंग नौर्गे ने सन १९५३ में एवरेस्ट पर्वत पर एतिहासिक चढ़ाई करी एवं विजय प्राप्त करी। नीचे उतरते समय एक जगह हिलेरी का पांव फिसल गया, और तुरंत तेनज़िंग ने रस्सी को तानकर मज़बूती से पकड़ा और अपनी कुलहाड़ी बर्फ में गड़ा दी। इस स्थिरता के कारण हिलेरी अपना सन्तुलन एवं पैर पुनः जमा सके और दोनो सही सलामत नीचे उतर आए। बाद में जब पत्रकारों ने इस घटना के संदर्भ में तेनज़िंग को प्रशंसा का पात्र बनाना चाहा तो उन्होंने कोई भी श्रेय या प्रशंसा लेने से यह कह कर इन्कार कर दिया कि "यह कोई अनोखी बात नहीं है, पर्वतारोही तो सदैव एक दूसरे की सहायता करते ही हैं"।

   यही बात मसीही विश्वासियों के साथ भी होनी चाहिए। परमेश्वर तो अपने बच्चों की सहायता करता ही है (इब्रानियों १३:६)। उसने हमें प्रभु यीशु मसीह में उद्धार का मार्ग देकर हमें पाप के दण्ड से बचाया है। वह समय एवं आवश्यक्तानुसार भी हमारी सहायता कई प्रकार से करता है, और चाहता है कि हम भी एक दूसरे कि ऐसे ही सहायता किया करें, क्योंकि हम सब एक ही मार्ग के यात्री हैं।

   प्रेरित पौलुस ने उनकी प्रशंसा करी जिन्हों ने रोम में उसकी तथा वहां के विश्वासियों की सहायता करी थी। रोम के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में उसने लिखा "मरियम को जिस ने तुम्हारे लिये बहुत परिश्र्म किया, नमस्‍कार" (रोमियों १६:६); तथा फीबे के लिए उसने लिखा "...जिस किसी बात में उस को तुम से प्रयोजन हो, उस की सहायता करो; क्‍योंकि वह भी बहुतों की वरन मेरी भी उपकारिणी हुई है" (रोमियों १६:२)।

   जब किसी का बोझ भारी हो जाए या किसी के कदम लड़खड़ाएं तो जो भी सहायता हम कर सकते हैं, हमें करनी चाहिए। सभी लोगों में हमारी यह पहचान होनी चाहिए "यह कोई अनोखी बात नहीं है, मसीही विश्वासी तो सदैव एक दूसरे की सहायता करते ही हैं"। - डेव एग्नर

एक दूसरे के बोझ बांट लेने से हम सहजता से एक साथ चल सकेंगे।

प्रिसका और अक्‍विला को भी यीशु में मेरे सहकर्मी हैं, नमस्‍कार। - रोमियों १६:३

बाइबल पाठ: रोमियों १६:१-१४
    Rom 16:1  मैं तुम से फीबे की, जो हमारी बहिन और किंखिया की कलीसिया की सेविका है, बिनती करता हूं।
    Rom 16:2  कि तुम जैसा कि पवित्र लोगों को चाहिए, उसे प्रभु में ग्रहण करो; और जिस किसी बात में उस को तुम से प्रयोजन हो, उस की सहायता करो; क्‍योंकि वह भी बहुतों की वरन मेरी भी उपकारिणी हुई है।
    Rom 16:3  प्रिसका और अक्‍विला को भी यीशु में मेरे सहकर्मी हैं, नमस्‍कार।
    Rom 16:4  उन्‍होंने मेरे प्राण के लिये अपना सिर दे रखा था और केवल मैं ही नहीं, वरन अन्यजातियों की सारी कलीसियाएं भी उन का धन्यवाद करती हैं।
    Rom 16:5  और उस कलीसिया को भी नमस्‍कार जो उन के घर में है। मेरे प्रिय इपैनितुस को जो मसीह के लिये आसिया का पहिला फल है, नमस्‍कार।
    Rom 16:6  मरियम को जिस ने तुम्हारे लिये बहुत परिश्रम किया, नमस्‍कार।
    Rom 16:7  अन्‍द्रुनीकुस और यूनियास को जो मेरे कुटम्बी हैं, और मेरे साथ कैद हुए थे, और प्रेरितों में नामी हैं, और मुझ से पहिले मसीह में हुए थे, नमस्‍कार।
    Rom 16:8  अम्पलियातुस को, जो प्रभु में मेरा प्रिय है, नमस्‍कार।
    Rom 16:9  उरबानुस को, जो मसीह में हमारा सहकर्मी है, और मेरे प्रिय इस्‍तखुस को नमस्‍कार।
    Rom 16:10  अपिल्लेस को जो मसीह में खरा निकला, नमस्‍कार। अरिस्‍तुबुलुस के घराने को नमस्‍कार।
    Rom 16:11  मेरे कुटुम्बी हेरोदियोन को नमस्‍कार। नरिकयुस के घराने के जो लोग प्रभु में हैं, उन को नमस्‍कार।
    Rom 16:12  त्रूफैना और त्रूफोसा को जो प्रभु में परिश्रम करती हैं, नमस्‍कार। प्रिया परसिस को जिस ने प्रभु में बहुत परिश्रम किया, नमस्‍कार।
    Rom 16:13  रूफुस को जो प्रभु में चुना हुआ है, और उस की माता को जो मेरी भी है, दोनों को नमस्‍कार।
    Rom 16:14  असुक्रितुस और फिलगोन और हिमस ओर पत्रुबास और हिमांस और उन के साथ के भाइयों को नमस्‍कार।
 
एक साल में बाइबल: 
  • विलापगीत १-२ 
  • इब्रानियों १०:१-१८

शनिवार, 12 नवंबर 2011

सहारा

   अमेरिका के कैलिफोर्निया प्रांत में एक विशेष तरह के पेड़ पाए जाते हैं जो सिकोया रेडवुड वृक्ष कहलाते हैं। ये वृक्ष धरती से ३०० फुट की ऊंचाई को प्राप्त कर लेते हैं, किंतु इनकी जड़ें धरती के अन्दर अधिक गहराई तक नहीं जातीं। इनकी जड़ें धरती की उपरी सतह में फैलती हैं और सतह पर होने वाली नमी सोख़ के वृक्ष के लिए जल अर्जित करतीं हैं। ये वृक्ष कभी अकेले नहीं बढ़ते क्योंकि तेज़ हवाएं इन्हें आसानी से गिरा सकतीं हैं। ये वृक्ष सदा झुर्मुट में बढ़ते हैं; झुर्मुट के सभी वृक्षों की जड़ें आपस में उलझी रहती हैं और इस से एक वृक्ष को दूसरे से सहारा मिल जाता है और इतनी ऊंचाई एवं उथली जड़ों के बवजूद तेज़ आंधियां भी इन्हें गिरा नहीं पातीं।

   मानव जीवन में भी यह सिद्धांत लागू होता है। क्लेष और कष्ट सभी पर आते हैं, और कुछ परिस्थितियाँ ऐसे भी होती हैं जो जिस पर आती हैं, उसे ही उन्हें सहना भी होता है; लेकिन तौ भी रिश्तेदार, मित्रगण और निकट के लोग प्रार्थनाओं द्वारा, साथ रहकर या अन्य किसी न किसी रूप में क्लेष भोगने वाले को सहारा एवं सान्तवना दे सकते हैं और उसे टूटने से बचा सकते हैं। किंतु परेशानी तब होती है जब क्लेष भोगने वाला सहायता की अपनी आवश्यक्ता को स्वीकार ना करे और अकेले ही सब कुछ सहने का प्रयास करे।

   समस्त संसार के पापों के लिए क्रूस पर अपने बलिदान से पहले गतसमनी के बाग़ में ऐसे ही सहारे की उम्मीद प्रभु यीशु ने अपने चेलों तथा मित्रों पतरस, याकूब और युहन्ना से रखी थी, जब वह उन्हें अपने साथ प्रार्थना करने के लिए लेकर गया, लेकिन उन्होंने उसे निराश ही किया। जो कष्ट प्रभु भोगने पर था, वह कोई और नहीं भोग सकता था, लेकिन वह चाहता था कि परमेश्वर पिता से उस आते दुख को झेलेने की सामर्थ पाने की प्रार्थना में उसके चेले उसके साथ हों। लेकिन उन्हें प्रार्थना करने की बजाए सोते हुए देख कर उसे अपने अकेलेपन का एहसास और भी अधिक कष्टदायी हुआ होगा।

   यदि प्रभु यीशु को प्रार्थना और सहारे की आवश्यक्ता अनुभव हुई तो हम मनुष्यों के लिए एक दूसरे को सहारा देना और एक दूसरे के लिए प्रार्थना करना कितना आवश्यक है। आवश्यक्ता अनुसार अपने लिए और अपने साथ किसी को प्रार्थना के लिए तैयार रखना, अथवा किसी अन्य के लिए प्रार्थना में सदा तत्पर रहना एक दूसरे को सहारा देने का कारगर उपाय है। - डेनिस डी हॉन


जो कष्ट में होते हैं उन्हें सान्तवना से अधिक सहारे की आवश्यक्ता होती है।

तब उस ने उन से कहा; मेरा जी बहुत उदास है, यहां तक कि मेरे प्राण निकला चाहते: तुम यहीं ठहरो, और मेरे साथ जागते रहो। - मत्ती २६:३८

बाइबल पाठ: मत्ती २६:३६-४६
    Mat 26:36  तब यीशु ने अपने चेलों के साथ गतसमनी नाम एक स्थान में आया और अपने चेलों से कहने लगा कि यहीं बैठे रहना, जब तक कि मैं वहां जाकर प्रार्थाना करूं।
    Mat 26:37  और वह पतरस और जब्‍दी के दोनों पुत्रों को साथ ले गया, और उदास और व्याकुल होने लगा।
    Mat 26:38  तब उस ने उन से कहा; मेरा जी बहुत उदास है, यहां तक कि मेरे प्राण निकला चाहते: तुम यहीं ठहरो, और मेरे साथ जागते रहो।
    Mat 26:39  फिर वह थोड़ा और आगे बढ़ कर मुंह के बल गिरा, और यह प्रार्थना करने लगा, कि हे मेरे पिता, यदि हो सके, तो यह कटोरा मुझ से टल जाए, तौभी जैसा मैं चाहता हूं वैसा नहीं, परन्‍तु जैसा तू चाहता है वैसा ही हो।
    Mat 26:40  फिर चेलों के पास आकर उन्‍हें सोते पाया, और पतरस से कहा, क्‍या तुम मेरे साथ एक घड़ी भी न जाग सके?
    Mat 26:41  जागते रहो, और प्रार्थना करते रहो, कि तुम परीक्षा में न पड़ो: आत्मा तो तैयार है, परन्‍तु शरीर र्दुबल है।
    Mat 26:42  फिर उस ने दूसरी बार जाकर यह प्रार्थना की, कि हे मेरे पिता, यदि यह मेरे पीए बिना नहीं हट सकता तो तेरी इच्‍छा पूरी हो।
    Mat 26:43  तब उस ने आकर उन्‍हें फिर सोते पाया, क्‍योंकि उन की आंखें नींद से भरी थीं।
    Mat 26:44  और उन्‍हें छोड़ कर फिर चला गया, और वही बात फिर कह कर, तीसरी बार प्रार्थना की।
    Mat 26:45  तब उस ने चेलों के पास आकर उन से कहा, अब सोते रहो, और विश्राम करो: देखो, घड़ी आ पहुंची है, और मनुष्य का पुत्र पापियों के हाथ पकड़वाया जाता है।
    Mat 26:46  उठो, चलें; देखो, मेरा पकड़वाने वाला निकट आ पहुंचा है।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यर्मियाह ५१-५२ 
  • इब्रानियों ९