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सोमवार, 21 नवंबर 2011

असफलता की रचना

   मेंढक की शारीरिक संरचना ऐसी है कि वह अपने वातावरण के तापमान जैसे ही अपने शरीर के तापमान को करता रहता है। यदि धीरे-धीरे गर्म होते पानी में मेंढक को रखा जाए तो वह इस बात से अनभिज्ञ कि वह बढ़ते तापमान से मरने वाला है, अपने शरीर के तापमान को बढ़ाता रहता है और इससे पहले कि वह खतरे को भांपे, गर्म पानी द्वारा मौत उसे आ दबोचती है।

   पतरस का पतन भी अचानक घटने वाली घटना नहीं था, यह एक धीमे धीमे होने वाले आत्मिक पतन का नतीजा था। उसने प्रभु द्वारा अपने पकड़वाए जाने की चेतावनी को हलके में लिया और उसपर विश्वास नहीं किया, प्रभु यीशु के साथ अन्तिम भोज में जब प्रभु इस बारे में और सिखा रहा था तब पतरस अपने आत्मविश्वास और योग्यता के घमंड में था। फिर गतस्मनी के बाग़ में जब प्रभु ने उससे प्रार्थना के लिए कहा तो वह प्रार्थना करने की बजाए सो गया। जब उसी बाग़ में सैनिकों ने प्रभु को पकड़ने के लिए हाथ बढ़ाए तो पतरस ने शारीरिक प्रतिक्रीया के अन्तरगत अपनी तलवार निकाल कर चलाई और महापुरोहित के सेवक का कान काट डाला। और पतन का निम्न बिन्दु था अपने प्रभु के चेले के रूप में पहचाने जाने के बाद, भय से ग्रसित हो कर उसने तीन बार सेवक लड़की के सामने प्रभु का इन्कार किया।

   पतरस द्वारा प्रभु के इन्कार का दुख उन सभी मसीही विश्वासियों को पता है जिन्होंने विश्वास करने के बाद भी किसी न किसी रूप में अपने जीवन में प्रभु यीशु को ठोकर दी है और फिर उसका एहसास होने के बाद खेद में अपने हाथ मले हैं। पतरस के समान ही हमारी असफलताएं भी अचानक होने वाली घटना नहीं वरन एक पतन के सिलसिले का अन्त होती हैं जो किसी छोटी प्रतीत होने वाली अनआज्ञाकारिता या किसी घमण्ड से आरंभ होकर धीरे धीरे हमें भयानक अन्त तक ले आती हैं।

   इसलिए यह अनिवार्य है कि प्रतिदिन हम परमेश्वर पर निर्भर रहें और उसके वचन का पालन करते रहें। केवल यही एक तरीका है उस मेंढक के समान बिना पहचाने ही धीरे धीरे अपने आप को मृत्यु तक ले जाने से बचाने का। - मार्ट डी हॉन

मसीही जीवन में असफलता कभी अचानक नहीं होती, वह मसीही जीवन में आत्मिक पतन के सिलसिले का नतीजा होती है।

इसलिये जो समझता है, कि मैं स्थिर हूं, वह चौकस रहे कि कहीं गिर न पड़े। - १ कुरिन्थियों १०:१२

बाइबल पाठ: लूका २२:५४-६२

    Luk 22:54  फिर वे उसे पकड़ कर ले चले, और महायाजक के घर में लाए और पतरस दूर ही दूर उसके पीछे पीछे चलता था।
    Luk 22:55  और जब वे आंगन में आग सुलगा कर इकट्ठे बैठे, तो पतरस भी उन के बीच में बैठ गया।
    Luk 22:56  और एक लौंडी उसे आग के उजियाले में बैठे देख कर और उस की ओर ताक कर कहने लगी, यह भी तो उसके साथ था।
    Luk 22:57  परन्तु उस ने यह कह कर इन्‍कार किया, कि हे नारी, मैं उसे नहीं जानता।
    Luk 22:58  थोड़ी देर बाद किसी और ने उसे देख कर कहा, तू भी तो उन्‍हीं में से है: पतरस ने कहा, हे मनुष्य मैं नहीं हूं।
    Luk 22:59  कोई घंटे भर के बाद एक और मनुष्य दृढ़ता से कहने लगा, निश्‍चय यह भी तो उसके साथ था क्‍योंकि यह गलीली है।
    Luk 22:60  पतरस ने कहा, हे मनुष्य, मैं नहीं जानता कि तू क्‍या कहता है वह कह ही रहा था कि तुरन्‍त मुर्ग ने बांग दी।
    Luk 22:61  तब प्रभु ने घूम कर पतरस की ओर देखा, और पतरस को प्रभु की वह बात याद आई जो उस ने कही थी, कि आज मुर्ग के बांग देने से पहिले, तू तीन बार मेरा इन्‍कार करेगा।
    Luk 22:62  और वह बाहर निकल कर फूट फूट कर रोने लगा।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल १६-१७ 
  • याकूब ३

रविवार, 20 नवंबर 2011

खेद की दवा

   एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति ने अपने आप को समाज और अपने चर्च के लोगों से अलग-थलग कर लिया क्योंकि वह अपने बीते दिनों की गलती के कारण अति खेदित था, जिस कारण उसका परिवार टूट कर बिखर गया। एक वृद्ध स्त्री को बार-बार उभारे जाने और संभाले जाने की आवश्यक्ता रहती है क्योंकि वह ५० वर्ष पूर्व के एक प्रेम संबंध के खेद को भूल नहीं पा रही है। एक जवान युवती को मनोवैज्ञानिक चिकित्सा की आवश्यक्ता रहती है क्योंकि वह अपने गर्भपात कराने के निर्णय के लिए अपने आप को क्षमा नहीं कर पा रही है और इस कारण सदा खेदित रहती है। खेद बहुत से मनुष्यों के जीवन में ज़हर घोल देता है और उनके आनन्द तथा शान्ति को छीन लेता है।

   लेकिन मसीही विश्वासी के पास इसकी दवा है। यदि किसी को खेदित होकर निकम्मा हो जाने का कोई कारण था तो वह था प्रभु यीशु का चेला पतरस। उसने बहुत कायरता का व्यवहार किया जब अपने प्रभु को अपने कई दावों के बावजूद वह गतस्मनी के बाग़ में अकेला छोड़कर भाग गया, और फिर प्रभु के पकड़वाए जाने के बाद अधिकारियों की सेवक लड़कियों के सामने तीन बार उसने इस बात का भी इन्कार कर दिया कि वह प्रभु यीशु को जानता है। बाद में उसे इस बात का ऐसा खेद हुआ कि वह अपने इस व्यवहार के लिए फूट-फूट कर रोया। लेकिन उसने अपनी असफलताओं को प्रभु के लिए अपनी सेवकाई में आड़े नहीं आने दिया - क्योंकि उसने प्रभु यीशु द्वारा दी गई क्षमा को स्वीकार किया और प्रभु यीशु ही से नई सामर्थ और नई आशा प्राप्त करी, जब तीन बार प्रभु यीशु ने उससे कहा, "मेरी भेड़ों की रखवाली कर"। प्रेरितों १:१५ में हम पतरस को पहले के समान पुनः चेलों की अगुवाई करते देखते हैं। प्रभु यीशु कि क्षमा को हृदय से ग्रहण करने और फिर स्वयं अपने आप को भी क्षमा करने के कारण पतरस अपने अतीत की कमज़ोरी को मसीह के लोहू के नीचे दबा सका और उस गलती के खेद द्वारा उत्पन्न हो सकने वाले निकम्मेपन पर जयवंत हो सका।

   जब हम अपने पापों को प्रभु यीशु के समक्ष पश्चाताप के साथ मान लेते हैं, तब हम उन्हें वहीं उसके कदमों पर छोड़ कर उन्हें भुला भी सकते हैं क्योंकि, "यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है" (१ युहन्ना १:९)।

   तब हम उस दुखदायी अतीत से आगे बढ़कर आनन्द के साथ उसकी सेवा में लग सकते हैं। खेद कभी हमारे आनन्द को नष्ट नहीं कर सकता क्योंकि प्रत्येक मसीही विश्वासी के पास खेद की कारगर दवा है। - हर्ब वैण्डर लुग्ट

जिन पापों को परमेश्वर ने अपनी क्षमा द्वारा मसीही विश्वासी के जीवन-वृतांत से हटा दिया है, उन्हें मसीही विश्वासी को अपने मन से भी हटा देना चाहिए।

और उन्‍हीं दिनों में पतरस भाइयों के बीच में जो एक सौ बीस व्यक्ति के लगभग इकट्ठे थे, खड़ा होकर कहने लगा। - प्रेरितों १:१५

बाइबल पाठ: यूहन्ना २१:१५-१९
    Joh 21:15  भोजन करने के बाद यीशु ने शमौन पतरस से कहा, हे शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्‍या तू इन से बढ़कर मुझ से प्रेम रखता है? उस ने उस से कहा, हां प्रभु तू तो जानता है, कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूं: उस ने उस से कहा, मेरे मेमनों को चरा।
    Joh 21:16  उस ने फिर दूसरी बार उस से कहा, हे शमौन यूहन्ना के पुत्र, क्‍या तू मुझ से प्रेम रखता है? उस ने उन से कहा, हां, प्रभु तू जानता है, कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूं: उस ने उस से कहा, मेरी भेड़ों की रखवाली कर।
    Joh 21:17  उस ने तीसरी बार उस से कहा, हे शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्‍या तू मुझ से प्रीति रखता है? पतरस उदास हुआ, कि उस ने उसे तीसरी बार ऐसा कहा कि क्‍या तू मुझ से प्रीति रखता है? और उस से कहा, हे प्रभु, तू तो सब कुछ जानता है: तू यह जानता है कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूं: यीशु ने उस से कहा, मेरी भेड़ों को चरा।
    Joh 21:18  मैं तुझ से सच सच कहता हूं, जब तू जवान था, तो अपनी कमर बान्‍ध कर जहां चाहता था, वहां फिरता था; परन्‍तु जब तू बूढ़ा होगा, तो अपने हाथ लम्बे करेगा, और दूसरा तेरी कमर बान्‍धकर जहां तू न चाहेगा वहां तुझे ले जाएगा।
    Joh 21:19  उस ने इन बातों से पता दिया कि पतरस कैसी मृत्यु से परमेश्वर की महिमा करेगा; और यह कहकर, उस से कहा, मेरे पीछे हो ले।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल १४-१५ 
  • याकूब २

शनिवार, 19 नवंबर 2011

पहचान

   साधारणतया फलों की गुणवन्ता जाँचने के लिए उनके रंग और ठोस होने को परखा जाता है, किंतु क्रैन्बेरी नामक एक फल ऐसा है जिसे उसके गेंद के समान उछाल लेने के द्वारा परखा जाता है - जितना अच्छा उछाल, क्रैनबेरी उतनी ही बेहतर मानी जाती है। Science Digest में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार ताज़ी तोड़ी गई क्रैनबेरियों को सीढ़ीनुमा पट्टीयों पर नीचे की ओर लुढ़्काया जाता है, और जो क्रैन्बेरियाँ ८-१० इंच ऊँची उछलती हैं वे ही अच्छी मानी जाती हैं और स्वीकार करी जाती हैं।

   मसीही विश्वासी भी ऐसे ही परखे जा सकते हैं; उनके विश्वास की गुण्वन्ता इस बात से परखी जा सकती है कि किसी असफलता का सामना करने के बाद वे उछल कर पुनः अपने विश्वास की पूर्व स्थिति पर आ जाते हैं कि नहीं। यद्यपि असफलता दुखदायी होती है, लेकिन वह अवसर भी देती है कि हम मसीह में अपने विश्वास की दृढ़ता को और उसके प्रति अपने समर्पण को जाँच सकें।

   प्रभु यीशु मसीह जानते थे कि पतरस अपनी योग्यताओं पर अपने अत्याधिक आत्मविश्वास और उत्साह के कारण ठोकर खाकर गिरने वाला है, और तीन बार उसका इन्कार करेगा। लेकिन प्रभु यीशु इसके आगे भी जानते थे कि इस असफलता के बाद उसके अन्दर पश्चाताप होगा और उसका विश्वास बहाल होगा। जब प्रभु यीशु ने पतरस के लिए प्रार्थना करी कि उसका विश्वास जाता ना रहे, और इसका आश्वासन पतरस को दिया, तो प्रभु यीशु का उससे कहने का तात्पर्य था कि "पतरस, मैं जानता हूँ कि तू गिरने के बाद पुनः उछल कर खड़ा हो जाएगा और मेरे लिए फिर उपयोगी होगा।"

   यदि आपने किसी आत्मिक असफलता का सामना किया है तो निराश मत हों, मसीह आपको भी बहाल कर सकता है। किसी बड़ी ठोकर और गिरने के बाद भी मसीह आपको अपने लिए पुनः उपयोगी बना सकता है। परमेश्वर की क्षमाशीलता और आपके विश्वास की उछाल आपके पुनः स्थापित हो पाने की पहचान हैं। - मार्ट डी हॉन

पराजय तब ही कड़ुवी लगती है जब हम उसे निगलते हैं।

परन्‍तु मैं ने तेरे लिये बिनती की, कि तेरा विश्वास जाता न रहे: और जब तू फिरे, तो अपने भाइयों को स्थिर करना। - लूका २२:३२

बाइबल पाठ: लूका २२:३१-३४
    Luk 22:31  शमौन, हे शमौन, देख, शैतान ने तुम लोगों को मांग लिया है कि गेंहूं की नाई फटके।
    Luk 22:32  परन्‍तु मैं ने तेरे लिये बिनती की, कि तेरा विश्वास जाता न रहे: और जब तू फिरे, तो अपने भाइयों को स्थिर करना।
    Luk 22:33  उस ने उस से कहा, हे प्रभु, मैं तेरे साथ बन्‍दीगृह जाने, वरन मरने को भी तैयार हूं।
    Luk 22:34  उस ने कहा, हे पतरस मैं तुझ से कहता हूं, कि आज मुर्ग बांग न देगा जब तक तू तीन बार मेरा इन्‍कार न कर लेगा कि मैं उसे नहीं जानता।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल ११-१३ 
  • याकूब १

शुक्रवार, 18 नवंबर 2011

करुणा भाव

   वे जिनका स्वास्थ्य अच्छा होता है कई बार उनकी उपेक्षा करते हैं जो इतने भाग्यवान नहीं हैं, और कभी कभी तो उनके साथ निष्ठुरता का व्यवहार भी करते हैं। मैंने कुछ अन्य युवकों को एक मन्द बुद्धि मनुष्य का मज़ाक बनाते देखा है; मैंने कुछ ऐसे लोगों को भी देखा है जो उनकी अन्देखी करते हैं जो या तो अपंग हैं या ’दिखने’ में भिन्न होते हैं।

   इसके विपरीत मैंने अपनी एक कुटुंबी को ऐसे लोगों के प्रति बहुत करुणामय देखा है जिनकी अन्य लोग उपेक्षा करते हैं। वे प्रति सप्ताह अपने समय का एक बड़ा भाग दो ऐसे वृद्धों कि देखभाल में लगाती हैं जिनका कोई सहायक नहीं है। उनकी गली में रहने वाले एक मानसिक रोगी से भी उनकी अच्छी मित्रता है, और लगभग प्रति दिन वह उनके पास कुछ पल के लिए मिलने आता है, और उसके चेहरे की खुशी बताती है कि इस छोटी सी मुलाकात से उसे कितनी प्रसन्नता होती है और मेरी कुटुंबी उसके जीवन में कितना आनन्द देती है।

   प्रभु यीशु ने भी सदा करुणा के साथ लोगों से व्यवहार किया। वह रोगियों और दुखियों के प्रति दयालु था और वे उसे घेरे रहते थे। उसने एक अन्धे व्यक्ति को चँगा करने से पहले उसका हाथ पकड़ कर उसे भीड़ से निकाला। वे बिमारों को, यहाँ तक कि कोढियों को भी छू कर चँगा करते थे, और दुष्टात्माओं से ग्रसित लोगों को दुष्टात्माओं से छुटकारा दिलवाने के लिए समय देते थे।

   मसीही विश्वासी की मसीह से समानता का एक सूचक है उसका ऐसे अभागे लोगों से किया गया व्यवहार। क्योंकि ये त्रस्त और अभागे लोग प्रत्युत्तर में हमें कुछ नहीं दे सकते इसलिए उनके प्रति हमारी भलाई वास्तव में निस्वार्थ होती है। उनके प्रति जिन्हें बहुत की आवश्यक्ता है लेकिन प्राप्त थोड़ा ही होता है, मसीह के समान करुणा भाव दिखाने के ऐसे प्रत्येक अवसर का हम मसीही विश्वासियों को स्वागत और उपयोग करना चाहिए। - हर्ब वैण्डर लुग्ट


जो प्रत्युत्तर में हमारी सहायता नहीं कर सकते, उनकी सहायता के लिए हाथ बढ़ाना हमारे मसीही प्रेम की परीक्षा है।

और एक कोढ़ी ने उसके पास आकर, उस से बिनती की, और उसके साम्हने घुटने टेक कर, उस से कहा; यदि तू चाहे तो मुझे शुद्ध कर सकता है। उस ने उस पर तरस खाकर हाथ बढ़ाया, और उसे छूकर कहा, मैं चाहता हूं तू शुद्ध हो जा। - मरकुस १:४०, ४१

बाइबल पाठ: मरकुस १:३२-४२
    Mar 1:32  सन्‍ध्या के समय जब सूर्य डूब गया तो लोग सब बीमारों को और उन्‍हें जिन में दुष्‍टात्मा थीं उसके पास लाए।
    Mar 1:33  और सारा नगर द्वार पर इकट्ठा हुआ।
    Mar 1:34  और उस ने बहुतों को जो नाना प्रकार की बीमारियों से दुखी थे, चंगा किया; और बहुत से दुष्‍टात्माओं को निकाला; और दुष्‍टात्माओं को बोलने न दिया, क्‍योंकि वे उसे पहचानती थीं।
    Mar 1:35  और भोर को दिन निकलने से बहुत पहिले, वह उठकर निकला, और एक जंगली स्थान में गया और वहां प्रार्थाना करने लगा।
    Mar 1:36  तब शमौन और उसके साथी उस की खोज में गए।
    Mar 1:37  जब वह मिला, तो उस से कहा; कि सब लोग तुझे ढूंढ रहे हैं।
    Mar 1:38  उस न उन से कहा, आओ; हम और कहीं आस पास की बस्‍तियों में जाएं, कि मैं वहां भी प्रचार करूं, क्‍योंकि मैं। इसी लिये निकला हूं।
    Mar 1:39  सो वह सारे गलील में उन की सभाओं में जा जाकर प्रचार करता और दुष्‍टात्माओं को निकालता रहा।
    Mar 1:40  और एक कोढ़ी ने उसके पास आकर, उस से बिनती की, और उसके साम्हने घुटने टेककर, उस से कहा; यदि तू चाहे तो मुझे शुद्ध कर सकता है।
    Mar 1:41  उस ने उस पर तरस खाकर हाथ बढ़ाया, और उसे छूकर कहा; मैं चाहता हूं तू शुद्ध हो जा।
    Mar 1:42  और तुरन्‍त उसका कोढ़ जाता रहा, और वह शुद्ध हो गया।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल ८-१० 
  • इब्रानियों १३

गुरुवार, 17 नवंबर 2011

सर्वाधिक महिमा

   प्रभु यीशु के अनेक सच्चे विश्वासी यह मानते हैं कि अस्वस्थता मनुष्य के लिए परमेश्वर की इच्छा में नहीं है। इसलिए हमें पूरा ज़ोर लगाकर चंगाई के लिए प्रार्थना करते रहना चाहिए और प्रार्थना के उत्तर में इन्कार को स्वीकार कभी नहीं करना चाहिए। उनका मानना है कि शारीरिक अस्वस्थता इसलिए बनी रहती है क्योंकि हम उसके आदी हो गए हैं; और इस से निकलने के लिए जो हमें चाहिए वह है और भी अधिक विश्वास। वे इस बात को विश्वास की कमी का सूचक मानते हैं जब प्रार्थना में परमेश्वर से लोग कहते हैं कि "यदि आपकी इच्छा हो तो..."।

   किंतु अपने क्रूस पर चढ़ाए जाने के लिए पकड़वाए जाने से पहले गतसमनी के बाग़ में प्रभु यीशु की प्रार्थना पर विचार करें। यद्यपि उनकी प्रार्थना किसी बीमारी के लिए नहीं वरन उस आने वाले दुख से निकल पाने के विष्य में थी जो वे भोगने को थे, उस प्रार्थना के लिए परमेश्वर का प्रत्युत्तर स्पष्ट दिखाता है कि उसकी महिमा हमेशा परिस्थितियों के तुरंत या नाटकीय रूप से निवारण द्वारा नहीं होती।

   प्रभु जो पाप से अनजान था, निष्पाप और निष्कलंक था, समस्त मानव जाति के पापों को अपने ऊपर लेने जा रहा था, सबके लिए पाप बनकर प्रत्येक व्यक्ति के लिए पाप का दण्ड भोगने जा रहा था। ऐसे में उसका विचिलित होना, और उसका प्रार्थना करना कि यदि सम्भव हो तो यह दुख का प्याला उसे ना पीना पड़े स्वभाविक था। लेकिन उस ने अपनी इच्छा मनवाने के लिए परमेश्वर को बाध्य नहीं किया; अपने भाव व्यक्त करने के पश्चात, जो भी होना हो उसने वह परमेश्वर के हाथों में छोड़ दिया, और अपने आप को उसकी आज्ञाकारिता को समर्पित कर दिया।

   अपने प्रभु के समान हमें भी अपने दुखों और आवश्यक्ताओं में अपने परमेश्वर के सन्मुख अपनी भावनाएं व्यक्त करने और प्रार्थनाएं करने की स्वतंत्रता है, लेकिन प्रभु के समान ही उन विषयों के लिए परमेश्वर की इच्छा पुरी होने देने की भी ज़िम्मेदारी है।

   नौर्वे के एक बाइबल शिक्षक ओले हैल्सबी ने कहा कि अपनी अस्वस्थताओं के लिए हमें कुछ इस प्रकार प्रार्थना करनी चाहिए: "प्रभु, यदि आपकी महिमा हो तो मुझे तुरंत ठीक कर दीजिए; यदि अधिक महिमा उस में हो तो धीरे धीरे ठीक कीजिए; यदि उससे भी अधिक महिमा उससे होती हो तो अपने दास को कुछ समय अस्वस्थ रहने दीजिए; और यदि उससे सर्वाधिक महिमा होती हो तो अपने दास को अपने पास स्वर्ग में बुला लीजिए।"

   हर बात में हमें यह विचार करना चाहिए कि परमेश्वर की सर्वाधिक महिमा किस बात से होगी? - डेनिस डी हॉन

यदि परमेश्वर किसी बात के लिए हमें इन्कार करता है तो वह इसलिए कि वो हमें कुछ बेहतर दे सके।

और वह थोड़ा आगे बढ़ा, और भूमि पर गिर कर प्रार्थना करने लगा, कि यदि हो सके तो यह घड़ी मुझ पर से टल जाए। और कहा, हे अब्‍बा, हे पिता, तुझ से सब कुछ हो सकता है; इस कटोरे को मेरे पास से हटा ले: तौभी जैसा मैं चाहता हूं वैसा नहीं, पर जो तू चाहता है वही हो। - मरकुस १४:३५, ३६

बाइबल पाठ: मरकुस १४:३२-३८
    Mar 14:32  फिर वे गतसमने नाम एक जगह में आए, और उस ने अपने चेलों से कहा, यहां बैठे रहो, जब तक मैं प्रार्थना करूं।
    Mar 14:33  और वह पतरस और याकूब और यूहन्ना को अपने साथ ले गया: और बहुत ही अधीर, और व्याकुल होने लगा।
    Mar 14:34  और उन से कहा, मेरा मन बहुत उदास है, यहां तक कि मैं मरने पर हूं: तुम यहां ठहरो, और जागते रहो।
    Mar 14:35  और वह थोड़ा आगे बढ़ा, और भूमि पर गिर कर प्रार्थना करने लगा, कि यदि हो सके तो यह घड़ी मुझ पर से टल जाए।
    Mar 14:36  और कहा, हे अब्‍बा, हे पिता, तुझ से सब कुछ हो सकता है; इस कटोरे को मेरे पास से हटा ले: तौभी जैसा मैं चाहता हूं वैसा नहीं, पर जो तू चाहता है वही हो।
    Mar 14:37  फिर वह आया, और उन्‍हें सोते पाकर पतरस से कहा, हे शमौन तू सो रहा है? क्‍या तू एक घड़ी भी न जाग सका?
    Mar 14:38  जागते और प्रार्थना करते रहो कि तुम परीक्षा में न पड़ो: आत्मा तो तैयार है, पर शरीर र्दुबल है।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल ५-७ 
  • इब्रानियों १२

बुधवार, 16 नवंबर 2011

आँसुओं का मूल्य

   आँसू, भावनाएं व्यक्त करने में शब्दों से और संबंधों के बनाने में वाचाओं से अधिक सामर्थी होते हैं। सन १९४७ में तत्कालीन अमेरीकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन पड़ौसी देश मेक्सिको के दौरे पर थे और वे वहाँ के एक सैनिक प्रशिक्षण केंद्र पर श्रद्धांजलि देने गए। तब से लगभग सौ वर्ष पूर्व, अमेरीकी सैनिकों ने जब उस स्थान पर कब्ज़ा किया था तो प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षण ले रहे सैनिक छात्रों ने भी युद्ध में भाग लिया और उस युद्ध में सभी शहीद हो गए। जब ट्रूमैन उन शहीदों के स्मरण में बने स्मारक पर उनके लिए अपने श्रद्धा सुमन चढ़ा कर और उनके आदर में अपने सर को झुका कर खड़े हुए तो वहाँ उपस्थित सैनिकों की आँखों से आँसू बहने लगे। उस समय पर व्यक्त किए गए इस भावोद्वेग ने दोनो देशों के संबंध को दृढ़ करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

   मसीही विश्वासी भी अपने सबसे घोर संघर्ष और सबसे उत्तम भावनाएं अपने आँसुओं के माध्यम से प्रकट कर सकते हैं। जब आँसु प्रार्थना और संवेदना के साथ मिलाकर अर्पित करे जाते हैं, तो वे विश्वासी के विश्वास और भावनाओं की सुन्दर अभिव्यक्ति हो जाते हैं।

   मुझे कोई संदेह नहीं है कि प्रभु यीशु भी जीवन के सच्चे आनन्दों में आनन्दित होते थे; लेकिन अपने चारों ओर विद्यमान पाप के कारण उत्पन्न दुख से भी वो आहत होते थे। वे बेझिझक अपने मित्र की कब्र पर भी रोए और यरुशलेम के अविश्वास पर भी उनके आँसू बह निकले।

   हमारे उद्धाकर्ता के आँसू हमें प्रोतसाहित करते हैं कि हम भी अपने भावों की सच्ची अभिव्यक्ति के लिए आँसू बहाने से न हिचकिचाएं, बिगड़े संबंधों को सुधारने और अवरोधों को दूर करने के लिए हम अपने आँसुओं का पवित्र आत्मा को प्रयोग करने दें।

   क्योंकि कठोर, दुखी और अविश्वासी लोगों को यीशु के प्रेम, क्षमा और उद्धार की आवश्यक्ता है, इसलिए हमें उनके लिए परमेश्वर के सन्मुख आँसू बहाने की आवश्यक्ता है। उनके लिए हमारे आँसुओं को देख कर उनके कठोर मन पिघल सकते हैं और वे भी यीशु को ग्रहण करने वाले हो सक्ते हैं। - डेनिस डी हॉन


यदि आँखों में आँसू ना हों तो आत्मा को कोई मेघधनुष दिखाई नहीं देगा।

आनन्‍द करने वालों के साथ आनन्‍द करो, और रोने वालों के साथ रोओ। - रोमियों १२:१५

बाइबल पाठ: युहन्ना ११:१७-४४
    Joh 11:17  सो यीशु को आकर यह मालूम हुआ कि उसे कब्र में रखे चार दिन हो चुके हैं।
    Joh 11:18  बैतनिय्याह यरूशलेम के समीप कोई दो मील की दूरी पर था।
    Joh 11:19  और बहुत से यहूदी मरथा और मरियम के पास उन के भाई के विषय में शान्‍ति देने के लिये आए थे।
    Joh 11:20  सो मरथा यीशु के आने का समचार सुनकर उस से भेंट करने को गई, परन्‍तु मरियम घर में बैठी रही।
    Joh 11:21  मरथा ने यीशु से कहा, हे प्रभु, यदि तू यहां होता, तो मेरा भाई कदापि न मरता।
    Joh 11:22  और अब भी मैं जानती हूं, कि जो कुछ तू परमेश्वर से मांगेगा, परमेश्वर तुझे देगा।
    Joh 11:23  यीशु ने उस से कहा, तेरा भाई जी उठेगा।
    Joh 11:24  मरथा ने उस से कहा, मैं जानती हूं, कि अन्‍तिम दिन में पुनरूत्थान के समय वह जी उठेगा।
    Joh 11:25  यीशु ने उस से कहा, पुनरूत्थान और जीवन मैं ही हूं, जा कोई मुझ पर विश्वास करता है वह यदि मर भी जाए, तौभी जीएगा।
    Joh 11:26  और जो कोई जीवता है, और मुझ पर विश्वास करता है, वह अनन्‍तकाल तक न मरेगा, क्‍या तू इस बात पर विश्वास करती है
    Joh 11:27  उस ने उस से कहा, हां हे प्रभु, मैं विश्वास कर चुकी हूं, कि परमेश्वर का पुत्र मसीह जो जगत में आने वाला था, वह तू ही है।
    Joh 11:28  यह कह कर वह चली गई, और अपनी बहिन मरियम को चुपके से बुला कर कहा, गुरू यहीं है, और तुझे बुलाता है।
    Joh 11:29  वह सुनते ही तुरन्‍त उठ कर उसके पास आई।
    Joh 11:30  (यीशु अभी गांव में नहीं पहुंचा था, परन्‍तु उसी स्थान में था जहां मरथा ने उस से भेंट की थी।)
    Joh 11:31  तब जो यहूदी उसके साथ घर में थे, और उसे शान्‍ति दे रहे थे, यह देखकर कि मरियम तुरन्‍त उठके बाहर गई है और यह समझ कर कि वह कब्र पर रोने को जाती है, उसके पीछे हो लिये।
    Joh 11:32  जब मरियम वहां पहुंची जहां यीशु था, तो उसे देखते ही उसके पांवों पर गिर के कहा, हे प्रभु, यदि तू यहां होता तो मेरा भाई न मरता।
    Joh 11:33  जब यीशु ने उस को और उन यहूदियों को जो उसके साथ आए थे रोते हुए देखा, तो आत्मा में बहुत ही उदास हुआ, और घबरा कर कहा, तुम ने उसे कहां रखा है?
    Joh 11:34  उन्‍होंने उस से कहा, हे प्रभु, चल कर देख ले।
    Joh 11:35  यीशु के आंसू बहने लगे।
    Joh 11:36  तब यहूदी कहने लगे, देखो, वह उस से कैसी प्रीति रखता था।
    Joh 11:37  परन्‍तु उन में से कितनों ने कहा, क्‍या यह जिस ने अन्‍धे की आंखें खोलीं, यह भी न कर सका कि यह मनुष्य न मरता?
    Joh 11:38  यीशु मन में फिर बहुत ही उदास होकर कब्र पर आया, वह एक गुफा थी, और एक पत्थर उस पर धरा था।
    Joh 11:39  यीशु ने कहा पत्थर को उठाओ: उस मरे हुए की बहिन मरथा उस से कहने लगी, हे प्रभु, उस में से अब तो र्दुगंध आती है क्‍योंकि उसे मरे चार दिन हो गए।
    Joh 11:40  यीशु ने उस से कहा, क्‍या मैं ने तुझ से न कहा कि यदि तू विश्वास करेगी, तो परमेश्वर की महिमा को देखेगी।
    Joh 11:41  तब उन्‍होंने उस पत्थर को हटाया, फिर यीशु ने आंखें उठा कर कहा, हे पिता, मैं तेरा धन्यवाद करता हूं कि तू ने मेरी सुन ली है।
    Joh 11:42  और मै जानता था, कि तू सदा मेरी सुनता है, परन्‍तु जो भीड़ आस पास खड़ी है, उन के कारण मैं ने यह कहा, जिस से कि वे विश्वास करें, कि तू ने मुझे भेजा है।
    Joh 11:43  यह कह कर उस ने बड़े शब्‍द से पुकारा, कि हे लाजर, निकल आ।
    Joh 11:44  जो मर गया था, वह कफन से हाथ पांव बन्‍धे हुए निकल आया और उसका मुंह अंगोछे से लिपटा हुआ था; यीशु ने उन से कहा, उसे खोलकर जाने दो।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल ३-४ 
  • इब्रानियों ११:२०-४०

मंगलवार, 15 नवंबर 2011

अनुकम्पा

   एक दिन प्रसिद्ध मसीही प्रचारक डी.एल.मूडी ने प्रभु यीशु मसीह की अनुकम्पा पर एक हृदय स्पर्शी सन्देश दिया। बाद में उनके एक मित्र ने पूछा कि वे इतना दिल छू लेने वाला सन्देश कैसे तैयार कर सके तो उन्होंने उत्तर दिया, "मैं एक दिन प्रभु यीशु मसीह की करुणा के बरे में विचार करने लगा; इसलिए मैंने अपनी बाइबल ली और उसे पढ़ने और ढूंढ़ने लगा कि परमेश्वर का वचन मसीह की करुणा के विषय में क्या कुछ कहता है। जैसे जैसे मुझे संबंधित पद मिलते गए, मैं उन पर मनन और प्रार्थना करता रहा, कुछ ही देर में मसीह की असीम करुणा ने मुझे ऐसा अभिभूत कर लिया कि मैं अपने अध्ययन कक्ष के फर्श पर लेटकर, बाइबल में मूँह रखकर बच्चे के समान फूट फूट कर रोने लगा।"

   कुछ लोगों को लगता है कि रोना कमज़ोरी की निशानी है। परन्तु स्वयं हमारा प्रभु यीशु रोया था। प्रेरित पौलुस भी, जब उस ने परमेश्वर के लोगों के लिए अपने हृदय के बोझ के बारे में लिखा, तो साथ ही अपने आँसुओं के विषय में लिखने से नहीं लज्जाया। मसीह के भले सेवक ऐसे ही होंगे - उनके हृदय कोमल और करुणामय होंगे; उनके मन प्रेम से ऐसे भरे होंगे कि अकसर उनकी भावनाएं आँसुओं के रूप में प्रवाहित होती मिलेंगी।

   जब हम मसीह के क्रूस की छाया में आकर खड़े होंगे, और परमेश्वर के प्रेम से अपनी आत्मा को विभोर होने देंगे, तो हमारे कठोर मन पिघल जाएंगे और मन का ठंडापन जाता रहेगा और उसकी जगह समस्त मानव जाति के लिए परमेश्वर के प्रेम की गर्माहट मन में भर जाएगी। तब ही पाप के दासत्व में पड़े लोगों के लिए मसीह की अनुकम्पा हमारी भी अनुकम्पा बन जाएगी और मसीह का प्रेम हमें वशीभूत करेगा कि हम दूसरों तक उसके प्रेम और उद्धार के सुसमाचार को पहुँचाने की लालसा रखने तथा हर कष्ट और सताव के बावजूद अपनी इस लालसा की पूर्ति के लिए प्रयास में लगे रहने वाले लोग बन सकें। - पौल वैन गोर्डर


प्रेम भरे हृदय रूपी सोते से आँसु उनमुक्त भाव से बहते हैं।

... मैं ने तीन वर्ष तक रात दिन आंसू बहा बहाकर, हर एक को चितौनी देना न छोड़ा। - प्रेरितों २०:३१
 
बाइबल पाठ: १ थिस्सलुनीकियों २:१-२०
    1Th 2:1  हे भाइयों, तुम आप ही जानते हो कि हमारा तुम्हारे पास आना व्यर्थ न हुआ।
    1Th 2:2  वरन तुम आप ही जानते हो, कि पहिले पहिल फिलिप्पी में दुख उठाने और उपद्रव सहने पर भी हमारे परमेश्वर ने हमें ऐसा हियाव दिया, कि हम परमेश्वर का सुसमाचार भारी विरोधों के होते हुए भी तुम्हें सुनाएं।
    1Th 2:3  क्‍योंकि हमारा उपदेश न भ्रम से है और न अशुद्धता से, और न छल के साथ है।
    1Th 2:4  पर जैसा परमेश्वर ने हमें योग्य ठहरा कर सुसमाचार सौंपा, हम वैसा ही वर्णन करते हैं; और इस में मनुष्यों को नहीं, परन्‍तु परमेश्वर को, जो हमारे मनों को जांचता है, प्रसन्न करते हैं।
    1Th 2:5  क्‍योंकि तुम जानते हो, कि हम न तो कभी लल्लोपत्तो की बातें किया करते थे, और न लोभ के लिये बहाना करते थे, परमेश्वर गवाह है।
    1Th 2:6  और यद्यपि हम मसीह के प्रेरित होने के कारण तुम पर बोझ डाल सकते थे, तौभी हम मनुष्यों से आदर नहीं चाहते थे, और न तुम से, न और किसी से।
    1Th 2:7  परन्‍तु जिस तरह माता अपने बालकों का पालन-पोषण करती है, वैसे ही हम ने भी तुम्हारे बीच में रह कर कोमलता दिखाई है।
    1Th 2:8  और वैसे ही हम तुम्हारी लालसा करते हुए, न केवल परमेश्वर को सुसमाचार, पर अपना अपना प्राण भी तुम्हें देने को तैयार थे, इसलिये कि तुम हमारे प्यारे हो गए थे।
    1Th 2:9  क्‍योंकि, हे भाइयों, तुम हमारे परिश्रम और कष्‍ट को स्मरण रखते हो, कि हम ने इसलिये रात दिन काम धन्‍धा करते हुए तुम में परमेश्वर का सुसमाचार प्रचार किया, कि तुम में से किसी पर भार न हों।
    1Th 2:10  तुम आप ही गवाह हो: और परमेश्वर भी, कि तुम्हारे बीच में जो विश्वास रखते हो हम कैसी पवित्रता और धामिर्कता और निर्दोषता से रहे।
    1Th 2:11  जैसे तुम जानते हो, कि जैसा पिता अपने बालकों के साथ बर्ताव करता है, वैसे ही हम तुम में से हर एक को भी उपदेश करते, और शान्‍ति देते, और समझाते थे।
    1Th 2:12  कि तुम्हारा चाल चलन परमेश्वर के योग्य हो, जो तुम्हें अपने राज्य और महिमा में बुलाता है।
    1Th 2:13  इसलिये हम भी परमेश्वर का धन्यवाद निरन्‍तर करते हैं; कि जब हमारे द्वारा परमेश्वर के सुसमाचार का वचन तुम्हारे पास पहुंचा, तो तुम ने उसे मनुष्यों का नहीं, परन्‍तु परमेश्वर का वचन समझ कर (और सचमुच यह ऐसा ही है) ग्रहण किया: और वह तुम में जो विश्वास रखते हो, प्रभावशाली है।
    1Th 2:14  इसलिये कि तुम, हे भाइयो, परमेश्वर की उन कलीसियाओं की सी चाल चलने लगे, जो यहूदिया में मसीह यीशु में हैं, क्‍योंकि तुम ने भी अपने लोगों से वैसा ही दुख पाया, जैसा उन्‍होंने यहूदियों से पाया था।
    1Th 2:15  जिन्‍होंने प्रभु यीशु को और भविष्यद्वक्ताओं को भी मार डाला और हम को सताया, और परमेश्वर उन से प्रसन्न नहीं; और वे सब मनुष्यों को विरोध करते हैं।
    1Th 2:16  और वे अन्यजातियों से उन के उद्धार के लिये बातें करने से हमें रोकते हैं, कि सदा अपने पापों का नपुआ भरते रहें; पर उन पर भयानक प्रकोप आ पहुंचा है।
    1Th 2:17  हे भाइयों, जब हम थोड़ी देर के लिये मन में नहीं बरन प्रगट में तुम से अलग हो गए थे, तो हम ने बड़ी लालसा के साथ तुम्हारा मुंह देखने के लिये और भी अधिक यत्‍न किया।
    1Th 2:18  इसलिये हम ने (अर्थात मुझ पौलुस ने) एक बार नहीं, वरन दो बार तुम्हारे पास आना चाहा, परन्‍तु शैतान हमें रोके रहा।
    1Th 2:19  भला हमारी आशा, या आनन्‍द या बड़ाई का मुकुट क्‍या है? क्‍या हमारे प्रभु यीशु के सम्मुख उसके आने के समय तुम ही न होगे?
    1Th 2:20  हमारी बड़ाई और आनन्‍द तुम ही हो।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल १-२ 
  • इब्रानियों ११:१-१९