ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

मंगलवार, 7 फ़रवरी 2012

भंग ध्यान?

   जिस विश्वविद्यालय में मैं पढ़ाता हूँ, वहाँ छात्रों को, उनके अध्ययन में सुविधा के लिए, लैपटॉप कंप्यूटर उपलब्ध कराए जाते हैं। यद्यपि यह सुविधा उनके अध्ययन के लिए निसंदेह सहायक है, किंतु मैंने पाया है कि कक्षा में यह उनके अध्ययन में बाधा भी बन जाती है।

   क्योंकि विद्यार्थी अपने लैपटॉप्स पर ही लेक्चर के नोट्स बनाते हैं, इसलिए कक्षा में लेक्चर के समय वे सब अपने लैपटॉप खोल कर बैठते हैं। किंतु समस्या यह है कि लेक्चर के नोट्स बनाने के स्थान पर उनमें से कई अपने मित्रों के साथ संपर्क करना, फेसबुक पर देखना और लिखना या इंटरनैट पर अन्य किसी बात के लिए सर्फ करना आदि में लगे रहते हैं। ऐसे में, स्वाभाविक है कि उनका ध्यान मेरे लेक्चर की ओर नहीं वरन इन ध्यान भंग करने वाली बातों में रहेगा। चाहे अपने आप में वे बातें उचित हों, सकारात्मक हों, भली हों, ज्ञानवर्धक हों किंतु ऐसे में लैपटॉप की यह भली सुविधा उनके अध्ययन में सहायक नहीं नुकसानदेह बन जाती है।

   कई भली बातें ऐसे ही हमारे जीवनों में मुख्य उद्देश्य से ध्यान हटा कर, हमारे लिए नुकसानदेह हो जाती हैं, क्योंकि जिस प्राथमिकता पर हमें अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए, वे उससे हमारा ध्यान हटा देती हैं। यही प्रभु यीशु से प्रेम करने वाले एक परिवार में घटित हुआ; उस परिवार ने प्रभु को अपने घर आमंत्रित किया और प्रभु की सेवा टहल के लिए एक बहन मार्था तो दौड़-धूप में लग गई, किंतु दूसरी बहन मरियम प्रभु के चरणों पर बैठकर उस की सुनने लगी। थोड़ी देर में "पर मार्था सेवा करते करते घबरा गई..." और प्रभु ही को उलाहना देने लगी "...और उसके पास आकर कहने लगी; हे प्रभु, क्‍या तुझे कुछ भी सोच नहीं कि मेरी बहिन ने मुझे सेवा करने के लिये अकेली ही छोड़ दिया है सो उस से कह, कि मेरी सहायता करे" (लूका १०:४०)।

   क्या आपके जीवन में भी कोई ऐसी आदत या गतिविधि या कोई शौक है जो अपने आप में तो ज़रा भी बुरा नहीं है, लेकिन वह आपके परिवार की ज़िम्मेदारियां निभाने में और प्रभु के साथ उचित समय बिताने में बाधा बनता है? क्या कुछ ’भली बातें’ आपका ध्यान आपकी प्राथमिकताओं से भंग कर रहीं हैं? यदि हाँ, तो यह समय है कि आप इस बात की ओर ध्यान दें, और अपने जीवन में आवश्यक परिवर्तन लाएं।

   जैसे प्रभु यीशु ने मार्था को समझाया, भले की नहीं उत्तम की सोचें और उससे अपना ध्यान भंग ना होने दें; अपने सर्वोत्तम उद्देश्य को पूरा करें। - डेव ब्रैनन


हम परमेश्वर की महिमा के लिए सृजे गए हैं; यही हमारे जीवन का सर्वोत्तम उद्देश्य है।

पर मार्था सेवा करते करते घबरा गई और उसके पास आकर कहने लगी; हे प्रभु, क्‍या तुझे कुछ भी सोच नहीं कि मेरी बहिन ने मुझे सेवा करने के लिये अकेली ही छोड़ दिया है सो उस से कह, कि मेरी सहायता करे। - लूका १०:४०

बाइबल पाठ: लूका १०:३८-४२

Luk 10:38  फिर जब वे जा रहे थे, तो वह एक गांव में गया, और मार्था नाम एक स्त्री ने उसे अपने घर में उतारा।
Luk 10:39  और मरियम नाम उस की एक बहिन थी; वह प्रभु के पांवों के पास बैठकर उसका वचन सुनती थी।
Luk 10:40  पर मार्था सेवा करते करते घबरा गई और उसके पास आकर कहने लगी; हे प्रभु, क्‍या तुझे कुछ भी सोच नहीं कि मेरी बहिन ने मुझे सेवा करने के लिये अकेली ही छोड़ दिया है सो उस से कह, कि मेरी सहायता करे।
Luk 10:41  प्रभु ने उसे उत्तर दिया, मार्था, हे मार्था; तू बहुत बातों के लिये चिन्‍ता करती और घबराती है।
Luk 10:42  परन्‍तु एक बात अवश्य है, और उस उत्तम भाग को मरियम ने चुन लिया है: जो उस से छीना न जाएगा।
 
एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था १-३ 
  • मत्ती २४:१-२८

सोमवार, 6 फ़रवरी 2012

ज्योति बनें

   मेरे एक मित्र को प्रति वर्ष यह अवसर मिलता है कि राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली सालाना फुटबॉल प्रतियोगिता में पत्रकार की हैसियत से शामिल हो। उसका काम होता है वहां पर जो खिलाड़ियों और खेल संबंधित कर्मचारियों में मसीही विश्वासी हैं, मसीही विश्वास से संबंधित कार्यक्रम में प्रसारण के लिए उनके साक्षातकार ले।

   कुछ साल पहले जब पहले-पहल उसने यह काम करना आरंभ किया तो वहां पर लोगों मे प्रचलित घमंड, स्वार्थ, मौज-मस्ती के वातावरण के कारण उसका मन विचलित और निराश हो गया। उसका कहना था कि, "मैंने उस स्थान को बड़े अंधकार का स्थान पाया।"

   एक दिन उसने एक मसीही विश्वासी और भूतपूर्व फुटबॉल खिलाड़ी से अपनी व्यथा बयान करी। उस खिलाड़ी ने मेरे मित्र की ओर देखा और कहा, "भाई, इस अंधकार के स्थान में आप ज्योति का कार्य कर रहें हैं।" उस बात ने मेरे मित्र को स्मरण दिलाया कि वह वहां क्यों है, और उसे इससे परमेश्वर की सेवकाई के लिए अपनी कटिबद्धता को दृढ़ करने में सहायता मिली। पाप के अंधकार से भरे स्थान में सुसमाचार की ज्योति चमकाने के लिए वह प्रोत्साहित हो सका।

   हो सकता है कि आप भी किसी ऐसे स्थान पर कार्य कर रहें हैं जहां परमेश्वर को कोई महत्व नहीं देता, विश्वास की खिल्ली उड़ाई जाती है और भक्तिहीन, स्वार्थी जीवनशैली तथा नास्तिक विचारधारा का अनुमोदन किया जाता है। शायद आपको भी लगता है कि आप किसी बहुत अंधकार से भरे स्थान में से होकर निकल रहे हैं।

   क्यों न ऐसे में ज्योति बन जाएं: "क्‍योंकि तुम तो पहले अन्‍धकार थे परन्‍तु अब प्रभु में ज्योति हो, सो ज्योति की सन्‍तान की नाईं चलो" (इफिसियों ५:८)। कठिनाईयों में भी अपनी मुस्कान, अपने विनम्र स्वभाव, दयालु कार्य और कार्य में मेहनत, खराई तथा ईमानदारी के द्वारा अपने आस-पास के माहौल को रौशन कर दें।

   परमेश्वर से कहें कि आपको सुसमाचार दूसरों के साथ बांटने के अवसर दे, और आप उन अवसरों सदुपयोग करने वाले हों। हो सकता है कि किसी के लिए परमेश्वर की ओर से पाप के अंधकार में सच्ची ज्योति को दिखाने वाले आप ही एक माध्यम हों। - डेव ब्रैनन

मसीह के लिए हमारे जीवन कि गवाही इस अंधियारे संसार में ज्योति के समान है।

क्‍योंकि तुम तो पहले अन्‍धकार थे परन्‍तु अब प्रभु में ज्योति हो, सो ज्योति की सन्‍तान की नाईं चलो। - इफिसियों ५:८

बाइबल पाठ: इफिसियों ५:८-१४

Eph 5:8  क्‍योंकि तुम तो पहले अन्‍धकार थे परन्‍तु अब प्रभु में ज्योति हो, सो ज्योति की सन्‍तान की नाईं चलो।
Eph 5:9  (क्‍योंकि ज्योति का फल सब प्रकार की भलाई, और धामिर्कता, और सत्य है)।
Eph 5:10  और यह परखो, कि प्रभु को क्‍या भाता है
Eph 5:11  और अन्‍धकार के निष्‍फल कामों में सहभागी न हो, वरन उन पर उलाहना दो।
Eph 5:12  क्‍योंकि उन के गुप्‍त कामों की चर्चा भी लाज की बात है।
Eph 5:13  पर जितने कामों पर उलाहना दिया जाता है वे सब ज्योति से प्रगट होते हैं, क्‍योंकि जो सब कुछ को प्रगट करता है, वह ज्योति है।
Eph 5:14  इस कारण वह कहता है, हे सोनेवाले जाग और मुर्दों में से जी उठ; तो मसीह की ज्योति तुझ पर चमकेगी।
Eph 5:15  इसलिये ध्यान से देखो, कि कैसी चाल चलते हो; निर्बुद्धियों की नाईं नहीं पर बुद्धिमानों की नाईं चलो।
Eph 5:16  और अवसर को बहुमोल समझो, क्‍योंकि दिन बुरे हैं।
Eph 5:17  इस कारण निर्बुद्धि न हो, पर ध्यान से समझो, कि प्रभु की इच्‍छा क्‍या है।
 
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन ३९-४० 
  • मत्ती २३:२३-३९

रविवार, 5 फ़रवरी 2012

निहारना

   अपने जीवन की संध्या में मैं केवल पेड़ों को बढ़ते हुए देखना चाहता हूँ। तीस से भी अधिक साल पहले मैंने अपने आंगन में एक पौधा लगाया था। आज हमारी खिड़की के बाहर वह अपनी परिपक्वता की भव्यता में खड़ा है, हर ऋतु में सुन्दर। मैं उसे निहारते रहना चाहता हूँ।

   हमारे आत्मिक प्रयासों के साथ भी कुछ ऐसा ही होता है। हम ने कई छोटे "पौधे" लगाए होंगे - वे लोग, हमने जिन को आत्मिक जीवन की शिक्षाएं दीं, उन्हें सींचा, ध्यान से उनकी देख भाल करी, उनका पोषण किया। हम "पौधे" तो लगा सकते हैं परन्तु उन पौधों को "पेड़" बनाना परमेश्वर ही कर सकता है।

   कभी कभी मुझे उन लोगों से कोई सन्देश आता है जिन्हें मैंने कई वर्ष पहले सिखाया था, और मैं यह जानकर आनन्दित होता हूँ कि अब वे बढ़ कर परिपक्व हो गए हैं और परमेश्वर के द्वारा बहुत उपयोग करे जा रहे हैं - मेरी किसी सहायता के बिना। यह मुझे हलके से समझाता है कि मेरा कार्य पौधा लगाना और कुछ समय के लिए उसे सींचने का हो सकता है, और उन्हें सिखाने का कि वे "प्रेम में सच्‍चाई से चलते हुए, सब बातों में उस में जा सिर है, अर्थात मसीह में बढ़ते जाएं" (इफिसीयों ४:१५); किंतु केवल परमेश्वर ही है जो उन्हें बढ़ा कर परिपक्व फलदायी पेड़ बना सकता है (१ कुरिन्थियों ३:६-७)।

   जर्मन धर्मशास्त्री हेलमुट थेइलिके ने लिखा, "वह मनुष्य जो समयानुसार अपनी पकड़ ढीली करना नहीं जानता, जो परमेश्वर में शांति और विश्वास के आनन्द को नहीं जानता - उसमें जो अपने उद्देश्य हमारी सहायता के बिना (या हमारे बावजूद) करना जानता है, उसके हाथों में छोड़ना नहीं जानता जो पौधों को पेड़ बना देता है...ऐसा मनुष्य अपने बुढ़ापे में केवल एक निराश और दुखी मनुष्य ही हो सकता है।"

   इसलिए, अब मेरी उम्र में शायद मैं एक-दो "पौधे" लगा लूँ और उनकी देखभाल करूं, लेकिन मुख्यतः मेरा समय तो "पेड़ों" को निहारने में ही गुज़रेगा। - डेविड रोपर

जो मसीह में आगे बढ़ते हैं वे औरों को भी आगे बढ़ाते हैं।

वह उस वृक्ष के समान है, जो बहती नालियों के किनारे लगाया गया है। और अपनी ऋतु में फलता है, और जिसके पत्ते कभी मुरझाते नहीं। इसलिये जो कुछ वह पुरूष करे वह सफल होता है। - भजन १:३

बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों ३:४-११

1Co 3:4  इसलिये कि जब एक कहता है, कि मैं पौलुस का हूं, और दूसरा कि मैं अपुल्लोस का हूं, तो क्‍या तुम मनुष्य नहीं?
1Co 3:5  अपुल्लोस क्‍या है और पौलुस क्‍या केवल सेवक, जिन के द्वारा तुम ने विश्वास किया, जैसा हर एक को प्रभु ने दिया।
1Co 3:6  मैं ने लगाया, अपुल्लोस ने सींचा, परन्‍तु परमेश्वर ने बढ़ाया।
1Co 3:7  इसलिये न तो लगाने वाला कुछ है, और न सींचने वाला, परन्‍तु परमेश्वर जो बढ़ाने वाला है।
1Co 3:8  लगाने वाला और सींचने वाला दानों एक हैं; परन्‍तु हर एक व्यक्ति अपने ही परिश्रम के अनुसार अपनी ही मजदूरी पाएगा।
1Co 3:9  क्‍योंकि हम परमेश्वर के सहकर्मी हैं; तुम परमेश्वर की खेती और परमेश्वर की रचना हो।
1Co 3:10  परमेश्वर के उस अनुग्रह के अनुसार, जो मुझे दिया गया, मैं ने बुद्धिमान राजमिस्री की नाईं नेव डाली, और दूसरा उस पर रद्दा रखता है; परन्‍तु हर एक मनुष्य चौकस रहे, कि वह उस पर कैसा रद्दा रखता है।
1Co 3:11  क्‍योंकि उस नेव को छोड़ जो पड़ी है, और वह यीशु मसीह है कोई दूसरी नेव नहीं डाल सकता।
 
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन ३६-३८ 
  • मत्ती २३:१-२२

शनिवार, 4 फ़रवरी 2012

प्रश्न मूल्यों का

   अपनी एक यात्रा के दौरान मैंने एक ऐसा विज्ञापन देखा जो सोचने पर बाध्य करता था। विज्ञापन कारोबार प्रबंधकों की एक गोष्ठि के विषय में था, और उसमें लिखा था "किसी अगुवे का मूल्य उसके मूल्यों के सीधे अनुपात में है।" इस कथन की सार्थकता ने मुझे प्रभावित किया। हम जिस बात को मूल्य देते हैं, वही हमारे चरित्र को बनाती है, और अन्ततः निर्धारित करती है कि हम कैसे अगुवे होंगे या हम नेतृत्व कर भी पाएंगे कि नहीं। किंतु यह बात केवल नेताओं या प्रबंधकों या अगुवों पर ही लागू नहीं होती।

   मसीह के अनुयायियों के लिए मूल्यों का महत्व और भी अधिक हो जाता है। पौलुस ने कुलुस्से के मसीही विश्वासियों को अपनी पत्री में लिखा: "पृथ्वी पर की नहीं परन्‍तु स्‍वर्गीय वस्‍तुओं पर ध्यान लगाओ" (कुलुस्सियों ३:२)। यह लिखने में उसका उद्देश्य था कि मसीह के प्रभावी सन्देशवाहक होने के लिए हमारे मूल्यों का निर्धारण अस्थायी सांसारिक बातों से नहीं परन्तु चिरस्थायी स्वर्गीय बातों द्वारा होना चाहिए। इस संसार के जीवन में यह समझ और मानकर चलना कि हम यहां पर्यटक नहीं तीर्थयात्री हैं, ही हमारे दृष्टिकोण को स्पष्ट और केंद्रित रखेगा, और हम अपने उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह के सेवाकाई में प्रभावी हो पाएंगे।

   यह कहा जाता है कि हम एक ऐसे संसार में रहते हैं जो हर बात की भौतिक कीमत तो जानता है किंतु किसी बात का आत्मिक मूल्य और महत्व नहीं जानता। इस "अभी और यहां" के संसार में, हम मसीही विश्वासियों को उन बातों के द्वारा अपने मूल्य स्थापित करने हैं जो चिरस्थायी और सदाकालीन हैं - परमेश्वर और उसके वचन की बातें।

   दूसरे शब्दों में, एक मसीही विश्वासी का प्रभावी मूल्य उसे प्रभावित करने वाले मूल्यों के सीधे अनुपात में है। - बिल क्राउडर

सांसारिक वस्तुओं पर अपनी पकड़ ढीली किंतु आत्मिक वस्तुओं पर दृढ़ रखें।

पृथ्वी पर की नहीं परन्‍तु स्‍वर्गीय वस्‍तुओं पर ध्यान लगाओ। - कुलुस्सियों ३:२

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों ३:१-११
Col 3:1  सो जब तुम मसीह के साथ जिलाए गए, तो स्‍वर्गीय वस्‍तुओं की खोज में रहो, जहां मसीह वर्तमान है और परमेश्वर के दाहिनी ओर बैठा है।
Col 3:2  पृथ्वी पर की नहीं परन्‍तु स्‍वर्गीय वस्‍तुओं पर ध्यान लगाओ।
Col 3:3  क्‍योंकि तुम तो मर गए, और तुम्हारा जीवन मसीह के साथ परमेश्वर में छिपा हुआ है।
Col 3:4   जब मसीह जो हमारा जीवन है, प्रगट होगा, तब तुम भी उसके साथ महिमा सहित प्रगट किए जाओगे।
Col 3:5  इसलिये अपने उन अंगो को मार डालो, जो पृथ्वी पर हैं, अर्थात व्यभिचार, अशुद्धता, दुष्‍कामना, बुरी लालसा और लोभ को जो मूर्ति पूजा के बराबर है।
Col 3:6   इन ही के कारण परमेश्वर का प्रकोप आज्ञा न मानने वालों पर पड़ता है।
Col 3:7  और तुम भी, जब इन बुराइयों में जीवन बिताते थे, तो इन्‍हीं के अनुसार चलते थे।
Col 3:8  पर अब तुम भी इन सब को अर्थात क्रोध, रोष, बैरभाव, निन्‍दा, और मुंह से गालियां बकना ये सब बातें छोड़ दो।
Col 3:9  एक दूसरे से झूठ मत बोलो क्‍योंकि तुम ने पुराने मनुष्यत्‍व को उसके कामों समेत उतार डाला है।
Col 3:10  और नए मनुष्यत्‍व को पहिन लिया है जो अपने सृजनहार के स्‍वरूप के अनुसार ज्ञान प्राप्‍त करने के लिये नया बनता जाता है।
Col 3:11  उस में न तो यूनानी रहा, न यहूदी, न खतना, न खतनारिहत, न जंगली, न स्‍कूती, न दास और न स्‍वतंत्र: केवल मसीह सब कुछ और सब में है।
 
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन ३४-३५ 
  • मत्ती २२:२३-४६

शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2012

प्रचार या प्रदर्शन

   मेरा एक बहुत वर्षों का पुराना मित्र और मार्गदर्शक अक्सर कहता है कि परमेश्वर के वचन बाइबल के अध्ययन में उसका उद्देश्य सदैव पढ़े गए को अपने व्यावाहरिक जीवन में लागू करना होता है। मैं उसके इस सीखे हुए को जीवन में लागू कीए जाने पर दिए गए ज़ोर की बहुत सराहना करता हूँ, क्योंकि हम जो बाइबल का अध्ययन करके फिर उसे सिखाते, प्रचार करते और उसके बारे में लिखते हैं, उनके लिए इस प्रबल वचन से संबंधित इन गतिविधियों को मात्र एक दिमाग़ी कसरत बना लेना बहुत आसान होता है।

   प्रसिद्ध बाइबल शिक्षक और टीकाकार ओस्वॉल्ड चैम्बर्स ने कहा था: "यह खतरा कि परमेश्वर की सन्तान उसके पवित्र वचन कि महानता और गूढ़ता के विषय में बेपरवाह हो जाए सदा बना रहता है। हम बाइबल की इन अद्भुत सच्चाईयों के बारे में प्रचार तो बहुत करने लगते हैं किंतु यह भूल जाते हैं कि उन्हीं बातों को हमारे जीवनों में प्रदर्शित भी होना चाहिए। सत्य की विवेचना करने को ही सत्य का पालन करना मान लेने की गलती कर बैठना; इस गलतफहमी में जीना कि क्योंकि हम बाइबल की बातों की व्याख्या कर लेते हैं इसलिए हम उनका पालन करने वाले भी हैं, बहुत आसान होता है"।

   प्रभु यीशु के एक चेले याकूब ने अपनी पत्री में मसीही विश्वासियों को लिखा: "पर जो व्यक्ति स्‍वतंत्रता की सिद्ध व्यवस्था पर ध्यान करता रहता है, वह अपने काम में इसलिये आशीष पाएगा कि सुनकर नहीं, पर वैसा ही काम करता है" (याकूब १:२५)। मुख्य बात शब्दों या लेखों द्वारा प्रचार करना नहीं वरन पालन करना है; उसे जीवन में जी कर दिखाना है।

  हम जब परमेश्वर के वचन का अध्ययन करें तो हमारे मन में उठने वाला पहला प्रश्न यह नहीं होना चाहिए कि "इसके बारे में क्या और कैसे प्रचार कर सकता हूँ?" वरन यह होना चाहिए कि "मैं इसे अपने जीवन में कैसे प्रदर्शित कर सकता हूँ?" - डेविड मैककैसलैंड


आज्ञाकारिता में उठाया एक कदम उस बात के बारे में वर्षों अध्ययन करने से बढ़कर है। - चैम्बर्स

परन्‍तु वचन पर चलने वाले बनो, और केवल सुनने वाले ही नहीं जो अपने आप को धोखा देते हैं। - याकूब १:२२
 
बाइबल पाठ: याकूब १:२१-२६
Jas 1:21   इसलिये सारी मलिनता और बैर भाव की बढ़ती को दूर करके, उस वचन को नम्रता से ग्रहण कर लो, जो हृदय में बोया गया और जो तुम्हारे प्राणों का उद्धार कर सकता है।
Jas 1:22  परन्‍तु वचन पर चलने वाले बनो, और केवल सुनने वाले ही नहीं जो अपने आप को धोखा देते हैं।
Jas 1:23  क्‍योंकि जो कोई वचन का सुनने वाला हो, और उस पर चलने वाला न हो, तो वह उस मनुष्य के समान है जो अपना स्‍वाभाविक मुंह दर्पण में देखता है।
Jas 1:24  इसलिये कि वह अपने आप को देखकर चला जाता, और तुरन्‍त भूल जाता है कि मैं कैसा था।
Jas 1:25  पर जो व्यक्ति स्‍वतंत्रता की सिद्ध व्यवस्था पर ध्यान करता रहता है, वह अपने काम में इसलिये आशीष पाएगा कि सुनकर नहीं, पर वैसा ही काम करता है।
Jas 1:26   यदि कोई अपने आप को भक्त समझे, और अपनी जीभ पर लगाम न दे, पर अपने हृदय को धोखा दे, तो उस की भक्ति व्यर्थ है।
 
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन ३१-३३ 
  • मत्ती २२:१-२२

गुरुवार, 2 फ़रवरी 2012

प्रेम


   एक नई बाल सुखाने वाली मशीन ले लेना शायद मेरे लिए अधिक आसान होता। लेकिन कुछ पैसे बचा लेने के उद्देश्य से मैंने अपनी खराब मशीन की मरम्मत स्वयं ही करनी चाही। ठीक करने के लिए मशीन को खोलना था, और खोलने के लिए उसके हत्थे में गैहराई से बैठाए गए पेच को खोलकर निकालने की आवश्यक्ता थी। पेच खोलने का सबसे आसानी से उपलब्ध ’औज़ार’ था मेरा जेब में रखा हुआ छोटा सा चाकू। सो मैंने चाकू जेब से निकाल कर खोला और उसकी नोक से पेच खोलने का प्रयास करने लगा। ज़ोर लगाते ही चाकू का फल मुड़कर बन्द हुआ, मेरी ऊंगली पर लगा और उसे घायल कर दिया।

   इससे मैंने एक पाठ सीखा: मैं अपने आप से बहुत प्रेम रखता हूँ और अपनी आवश्यक्ताओं की पूर्ति के लिए वक्त बरबाद नहीं कर सकता। ऊंगली कटते ही मुझे उसकी चिंता हुई, तब यह विचार मेरे मन में बिल्कुल भी नहीं आया कि अभी मैं व्यस्त हूँ, इस चोट और बहते हुए खून के बारे में बाद में सोचेंगे, पहले यह कार्य पूरा कर लें। साथ ही मुझे पता चला कि मैं अपनी आवश्यकता के लिए अति संवेदनशील भी हूँ। मैंने तुरंत अपनी प्राथमिक चिकित्सा के लिए अपनी पत्नी और बच्चों को बुलाया, और उनसे अपनी चोट को बड़ी कोमलता से साफ करवाया, फिर उस पर ऐसे पट्टी बंधवाई कि बाद में पट्टी खोलने पर मेरे ऊंगली के बाल न उखड़ें, मुझे और तकलीफ ना हो। इस पूरे प्रकरण में मेरे सभी विचार, शब्द और क्रियाएं मेरे प्रति मेरे प्रेम ही से प्रेरित थे, मेरी तकलीफ पर ही केंद्रित थे।

   प्रभु यीशु अपने चेलों से चाहता है कि वे अपने पड़ौसी से भी अपने समान प्रेम रखें। इसका तात्पर्य है कि हम ऐसा प्रेम दिखाएं जिसमें वैसी ही तत्परता हो जैसी हम अपने प्रति रखते हैं; प्रेम जो दूसरे की आवश्यकता को देखे, पहचाने और उसकी पूर्ति से पहले आराम ना ले। ऐसा प्रेम जो नम्र और कोमल हो, विचार और ध्यान से कार्य करता हो। इस प्रेम का उदाहरण है प्रभु यीशु द्वारा दिया गया वह सामरी व्यक्ति का दृष्टांत जिसने करुणा और बलिदान के साथ एक सर्वथा अनजान घायल यात्री की सहायता करी।

   मसीही विश्वासी से, उसके पड़ौसियों के प्रति, परमेश्वर ऐसे ही प्रेम की आशा रखता है। - जो स्टोवेल


अपने पड़ौसी का मन आप केवल अपने मन ही के द्वारा छू सकते हैं।

...तू प्रभु अपने परमेश्वर से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी शक्ति और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख; और अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख। - लूका १०:२७

बाइबल पाठ: लूका १०:२९-३७
Luk 10:29 परन्‍तु उस ने अपनी तईं धर्मी ठहराने की इच्‍छा से यीशु से पूछा, तो मेरा पड़ोसी कौन है?
Luk 10:30  यीशु ने उत्तर दिया; कि एक मनुष्य यरूशलेम से यरीहो को जा रहा था, कि डाकुओं ने घेरकर उसके कपड़े उतार लिए, और मार-पीट कर उसे अधमूआ छोड़कर चले गए।
Luk 10:31 और ऐसा हुआ कि उसी मार्ग से एक याजक(पुरोहित) जा रहा था: परन्‍तु उसे देख के कतराकर चला गया।
Luk 10:32  इसी रीति से एक लेवी(धर्मशास्त्री) उस जगह पर आया, वह भी उसे देख के कतराकर चला गया।
Luk 10:33 परन्‍तु एक सामरी यात्री वहां आ निकला, और उसे देखकर तरस खाया।
Luk 10:34 और उसके पास आकर और उसके घावों पर तेल और दाखरस डालकर पट्टियां बान्‍धी, और अपनी सवारी पर चढ़ाकर सराय में ले गया, और उस की सेवा टहल की।
Luk 10:35  दूसरे दिन उस ने दो दिनार निकालकर भटियारे को दिए, और कहा, इस की सेवा टहल करना, और जो कुछ तेरा और लगेगा, वह मैं लौटने पर तुझे भर दूंगा।
Luk 10:36  अब तेरी समझ में जो डाकुओं में घिर गया था, इन तीनों में से उसका पड़ोसी कौन ठहरा?
Luk 10:37  उस ने कहा, वही जिस ने उस पर तरस खाया: यीशु ने उस से कहा, जा, तू भी ऐसा ही कर।
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन २९-३० 
  • मत्ती २१:२३-४६

बुधवार, 1 फ़रवरी 2012

लिखित वचन

   जनवरी २००९ में ESPN टेलिविज़न द्वारा एक फुटबॉल खिलाड़ी पेय्टन मैनिंग पर एक प्रभावी कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। पेय्टन को राष्ट्रीय फुटबॉल संघ द्वारा वर्ष का सबसे बहुमूल्य खिलाड़ी घोषित किया गया था। लेकिन जो कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया वह फुटबॉल के बारे में नहीं, वरन पेय्टन के बारे में था। उस कार्यक्रम में बताया गया कि बीते कई वर्षों से जब कोई नामवर ज्येष्ठ फुटबॉल खिलाड़ी खेल से अवकाश लेता था तो पेय्टन उसे अपने हाथों से एक पत्र लिख कर उनके खेल के प्रति लगाव, योगदान और उनके चरित्र के लिए उनकी प्रशंसा करता और उन्हें इसके लिए धनयवाद देता था। पेय्टन के संबंध में जितने भी वरिष्ठ खिलाड़ियों से साक्षात्कार लिया गया, उन सब ने इस बात के लिए उस की सराहना करी और धन्यवादी हुए कि उनके समय के एक सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी ने अपना समय दूसरों की सराहना के लिए दिया।

   जब पेय्टन मैनिंग जैसे प्रख्यात व्यक्ति द्वारा लिखित चन्द शब्दों का इतना महत्व है, तो सोचिए परमेश्वर द्वारा लिखित वचन का कितना महत्व होगा; मनुष्य के कोई शब्द इस का बयान नहीं कर सकते। प्रेरित पौलुस ने लिखा: "जितनी बातें पहिले से लिखी गईं, वे हमारी ही शिक्षा के लिये लिखी गईं हैं कि हम धीरज और पवित्र शास्‍त्र की शान्‍ति के द्वारा आशा रखें" (रोमियों १५:४)।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में परमेश्वर द्वारा हमें दिया गया उसका व्यक्तिगत संदेश है जो हमें बताता है कि परमेश्वर हम से क्या चाहता है; यही वचन परमेश्वर के उस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमारा जीवन बदलने और सुधारने की क्षमता भी रखता है। उसने अपना जीवित वचन हमें इसीलिए दिया है कि हम जीवन तथा जीवन की परिस्थितियों और कठिनाईयों का सामना करने के लिए मार्गदर्शन और सामर्थ पा सकें, और अपनी आशा बनाए रख सकें।

   परमेश्वर का धन्यवादी हो कर उसके इस लिखित वचन का अध्ययन तथा पालन आरंभ कीजिए और अपने जीवन को संवरते सुधरते देखिए। बिलस क्राउडर


जो अपने मन से उसकी सुनते हैं, परमेश्वर अपने वचन से उन से बातें करता है।

जितनी बातें पहिले से लिखी गईं, वे हमारी ही शिक्षा के लिये लिखी गईं हैं कि हम धीरज और पवित्र शास्‍त्र की शान्‍ति के द्वारा आशा रखें। - रोमियों १५:४

बाइबल पाठ: रोमियों १५:४-१३
Rom 15:4 जितनी बातें पहिले से लिखी गईं, वे हमारी ही शिक्षा के लिये लिखी गईं हैं कि हम धीरज और पवित्र शास्‍त्र की शान्‍ति के द्वारा आशा रखें।
Rom 15:5 और धीरज, और शान्‍ति का दाता परमेश्वर तुम्हें यह वरदान दे, कि मसीह यीशु के अनुसार आपस में एक मन रहो।
Rom 15:6 ताकि तुम एक मन और एक मुंह होकर हमारे प्रभु यीशु मसीह के पिता परमेश्वर की बड़ाई करो।
Rom 15:7 इसलिये, जैसा मसीह ने भी परमेश्वर की महिमा के लिये तुम्हें ग्रहण किया है, वैसे ही तुम भी एक दूसरे को ग्रहण करो।
Rom 15:8 मैं कहता हूं, कि जो प्रतिज्ञाएं बाप-दादों को दी गई थीं, उन्‍हें दृढ़ करने के लिये मसीह, परमेश्वर की सच्‍चाई का प्रमाण देने के लिये खतना किए हुए लोगों का सेवक बना।
Rom 15:9  और अन्यजाति भी दया के कारण परमेश्वर की बड़ाई करें, जैसा लिखा है, कि इसलिये मैं जाति जाति में तेरा धन्यवाद करूंगा, और तेरे नाम के भजन गांगा।
Rom 15:10 फिर कहा है, हे जाति जाति के सब लोगों, उस की प्रजा के साथ आनन्‍द करो।
Rom 15:11 और फिर हे जाति जाति के सब लागो, प्रभु की स्‍तुति करो; और हे राज्य राज्य के सब लोगों, उसे सराहो।
Rom 15:12 और फिर यशायाह कहता है, कि यिशै की एक जड़ प्रगट होगी, और अन्यजातियों का हाकिम होने के लिये एक उठेगा, उस पर अन्यजातियां आशा रखेंगी।
Rom 15:13 सो परमेश्वर जो आशा का दाता है तुम्हें विश्वास करने में सब प्रकार के आनन्‍द और शान्‍ति से परिपूर्ण करे, कि पवित्रआत्मा की सामर्थ से तुम्हारी आशा बढ़ती जाए।
 
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन २७-२८ 
  • मत्ती २१:१-२२