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गुरुवार, 9 फ़रवरी 2012

सहभागिता

   सामान्य रीति से परमेश्वर अपनी सृष्टि में होकर और सृष्टि के द्वारा कार्य करता है; इसी कारण प्रार्थनाओं के उत्तर प्रमाणित कर पाना कठिन हो जाता है। सी.एस. ल्यूइस ने लिखा है, "केवल विश्वास ही इस संबंध की पुष्टि कर सकता है; इसके लिए कोई प्रयोगसिद्ध प्रमाण नहीं दिया जा सकता।" हमारा यह मानना कि हमारी प्रार्थना का उत्तर मिला है किसी वैज्ञानिक कसौटी पर प्रमाणित हो सकने वाली किसी बात पर आधारित नहीं है, वरन हमारे विश्वास पर आधारित है।

   परमेश्वर को अनुभव करने के जो माध्यम और विधियां हमें उपलब्ध हैं - प्रकृति, बाइबल, प्रभु भोज, चर्च, अन्य लोग आदि, वे भौतिक हैं, स्पर्श किए जा सकते हैं या अनुभव किए जा सकते हैं। किंतु परमेश्वर की स्थिति भौतिक नहीं है, वह आत्मिक है। प्रार्थना इसी अंतर को प्रतिबिंबित करती है।

   चाहे हम परमेश्वर से किसी समस्या में सीधे सीधे हस्तक्षेप करने के लिए प्रार्थना करते हैं, किंतु हमें इस बात से कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि वह हमारे स्वभाव और विकल्पों में होकर परोक्ष रूप से ही उस प्रार्थना का कोई उत्तर दे दे। एक नशे की आदत से ग्रसित व्यक्ति प्रार्थना कर सकता है कि, "प्रभु मुझे आज नशे से बचा कर रखना।" उसकी इस प्रार्थना का उत्तर किसी अप्रत्याशित रीति से शराब की बोतलों या नशे की किसी अन्य वस्तु का उसकी अलमारी ग़ायब हो जाना नहीं होगा, वरन उसके अन्दर ही नशे के विरुद्ध उसके निर्णय की दृढ़ता द्वारा अथवा किसी अनपेक्षित किंतु वफादार मित्र से सहायता के रूप में या ऐसे ही किसी तरह से आ जाएगा।

   चाहे परमेश्वर किसी आलौकिक रीति से हमारी स्मस्या सुलझाए, या अपनी आज्ञाकारिता के लिए हमें सामर्थ दे, हम परमेश्वर के स्वभाव पर भरोसा रख सकते हैं कि वह हमारी प्रार्थना सुनता है और उत्तर देता है; क्योंकि अपने प्रत्येक विश्वासी और और उस पर किए गए विश्वास द्वारा बनी अपनी प्रत्येक सन्तान से उसकी घनिष्ठ और आत्मीय सहभागिता है। - फिलिप यैन्सी


प्रार्थना का एक महत्वपूर्ण भाग है उस प्रार्थना के उत्तर का एक भाग बनने को तैयार रहना।

किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्‍तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। - फिलिप्पियों ४:६

बाइबल पाठ: इब्रानियों ११:१-१०
Heb 11:1  अब विश्वास आशा की हुई वस्‍तुओं का निश्‍चय, और अन देखी वस्‍तुओं का प्रमाण है।
Heb 11:2  क्‍योंकि इसी के विषय में प्राचीनों की अच्‍छी गवाही दी गई।
Heb 11:3  विश्वास ही से हम जान जाते हैं, कि सारी सृष्‍टि की रचना परमेश्वर के वचन के द्वारा हुई है। यह नहीं, कि जो कुछ देखने में आता है, वह देखी हुई वस्‍तुओं से बना हो।
Heb 11:4  विश्वास की से हाबिल ने कैन से उत्तम बलिदान परमेश्वर के लिये चढ़ाया और उसी के द्वारा उसके धर्मी होने की गवाही भी दी गई: क्‍योंकि परमेश्वर ने उस की भेंटों के विषय में गवाही दी; और उसी के द्वारा वह मरने पर भी अब तक बातें करता है।
Heb 11:5  विश्वास ही से हनोक उठा लिया गया, कि मृत्यु को न देखे, और उसका पता नहीं मिला, क्‍योंकि परमेश्वर ने उसे उठा लिया था, और उसके उठाए जाने से पहिले उस की यह गवाही दी गई थी, कि उस ने परमेश्वर को प्रसन्न किया है।
Heb 11:6  और विश्वास बिना उसे प्रसन्न करना अनहोना है, क्‍योंकि परमेश्वर के पास आने वाले को विश्वास करना चाहिए, कि वह है; और अपने खोजने वालों को प्रतिफल देता है।
Heb 11:7  विश्वास ही से नूह ने उन बातों के विषय में जो उस समय दिखाई न पड़ती थीं, चितौनी पाकर भक्ति के साथ अपने घराने के बचाव के लिये जहाज बनाया, और उसके द्वारा उस ने संसार को दोषी ठहराया; और उस धर्म का वारिस हुआ, जो विश्वास से होता है।
Heb 11:8  विश्वास ही से इब्राहीम जब बुलाया गया तो आज्ञा मानकर ऐसी जगह निकल गया जिसे मीरास में लेने वाला था, और यह न जानता था, कि मैं किधर जाता हूं, तौभी निकल गया।
Heb 11:9  विश्वास ही से उस ने प्रतिज्ञा किए हुए देश में जैसे पराए देश में परदेशी रहकर इसहाक और याकूब समेत जो उसके साथ उसी प्रतिज्ञा के वारिस थे, तम्बूओं में वास किया।
Heb 11:10 क्‍योंकि वह उस स्थिर नेव वाले नगर की बाट जोहता था, जिस का रचने वाला और बनाने वाला परमेश्वर है।
 
एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था ६-७ 
  • मत्ती २५:१-३०

बुधवार, 8 फ़रवरी 2012

द्रुत एवं धीमा

   मुझे लगता है कि यदि आज के समय में सबसे लोकप्रीय गुण जानने के लिए कोई प्रतियोगिता आयोजित करी जाए तो "उत्तम करने" से बढ़्कर स्थान "जल्दी करना" प्राप्त करेगा। संसार के बहुतेरे लोगों और संस्थाओं पर द्रुत गति की धुन सवार है। लेकिन द्रुत गति से कार्य कर पाना हमें जलदी ही कहीं पहुंचाने वाला नहीं है।

   अपनी पुस्तक In Praise of Slowness में लेखक कार्ल ओनोरे ने लिखा, "समय आ गया है कि हम कार्य को जलदी से कर लेने की अपनी धुन को चुनौती दें। द्रुत गति अपनाना ही सदा सबसे बेहतर नीति नहीं होती।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल के अनुसार, कार्ल बिल्कुल सही हैं। प्रभु यीशु के चेले और प्रेरित पतरस ने चिताया था कि अंत के दिनों में लोग प्रभु यीशु पर यह कह कर सन्देह करेंगे क्योंकि वह लौट कर आने की अपनी वाचा को पूरा करने में धीमा है (धीरज धरता है)। लेकिन साथ ही पतरस ने ध्यान दिलाया कि प्रभु का यह विलम्ब वास्तव में संसार के लिए भला है, क्योंकि वह लोगों को पापों से पश्चाताप करने, उद्धार पाने और नरक के दण्ड से बचने के लिए अधिक से अधिक संभव समय दे रहा है (२ पतरस ३:९); साथ ही यह उसके धीरजवन्त होने और विलम्ब से कोप करने के गुण (निर्गमन ३४:६) की भी पूर्ति है।

   प्रभु के एक अन्य चेले ने भी अपनी पत्री में लिखा कि हमें, जो प्रभु के अनुयायी हैं, "हे मेरे प्रिय भाइयो, यह बात तुम जानते हो: इसलिये हर एक मनुष्य सुनने के लिये तत्‍पर और बोलने में धीरा और क्रोध में धीमा हो" (याकूब १:१९)। ज़रा सोचिए, संसार में हम कितने आपसी बखेड़े और लड़ाई-झगड़े से बच सकते हैं यदि हम सचमुच सुनना - केवल चुप हो जाना ही नहीं, वरन कोई भी प्रत्युत्तर देने या बोलने से पहले, ध्यान देकर दूसरे की सुनना आरंभ कर दें।

   संसार के कार्यों में अपनी व्यस्तताओं और लक्ष्यों की पूर्ति की तेज़ भाग-दौड़ में, स्मरण रखें कि सुनने में द्रुत और प्रत्युत्तर देने तथा क्रोध करने में धीमे होने के द्वारा हम ना केवल प्रभु की आज्ञा का पालन करेंगे, वरन साथ ही अपना तथा दूसरों का भी भला भी करेंगे; और संसार को बेहतर स्थान बनाने में योगदान देंगे। - जूली ऐकैरमैन लिंक


जब दूसरे के प्रति अधीर होने का कारण हो तो स्मरण कर लें कि परमेश्वर आपके प्रति कितना धीरजवन्त रहता है।

प्रभु अपनी प्रतिज्ञा के विषय में देर नहीं करता, जैसी देर कितने लोग समझते हैं; पर तुम्हारे विषय में धीरज धरता है, और नहीं चाहता, कि कोई नाश हो; वरन यह कि सब को मन फिराव का अवसर मिले। - २ पतरस ३:९

बाइबल पाठ: २ पतरस ३:१-११

2Pe 3:1  हे प्रियो, अब मैं तुम्हें यह दूसरी पत्री लिखता हूं, और दोनों में सुधि दिलाकर तुम्हारे शुद्ध मन को उभारता हूं।
2Pe 3:2  कि तुम उन बातों को, जो पवित्र भविश्यद्वक्ताओं ने पहिले से कही हैं और प्रभु, और उद्धारकर्ता की उस आज्ञा को स्मरण करो, जो तुम्हारे प्रेरितों के द्वारा दी गई थी।
2Pe 3:3 और यह पहिले जान लो, कि अन्‍तिम दिनों मे हंसी ठट्ठा करने वाले आएंगे, जो अपनी ही अभिलाषाओं के अनुसार चलेंगे।
2Pe 3:4 और कहेंगे, उसके आने की प्रतिज्ञा कहां गई; क्‍योंकि जब से बाप-दादे सो गए हैं, सब कुछ वैसा ही है, जैसा सृष्‍टि के आरम्भ से था?
2Pe 3:5  वे तो जान बूझकर यह भूल गए, कि परमेश्वर के वचन के द्वारा से आकाश प्राचीन काल से वर्तमान है और पृथ्वी भी जल में से बनी और जल में स्थिर है।
2Pe 3:6 इन्‍हीं के द्वारा उस युग का जगत जल में डूब कर नाश हो गया।
2Pe 3:7 पर वर्तमान काल के आकाश और पृ्थ्वी उसी वचन के द्वारा इसलिये रखे हैं, कि जलाए जाएं; और वह भक्तिहीन मनुष्यों के न्याय और नाश होने के दिन तक ऐसे ही रखे रहेंगे।
2Pe 3:8  हे प्रियों, यह एक बात तुम से छिपी न रहे, कि प्रभु के यहां एक दिन हजार वर्ष के बराबर है, और हजार वर्ष एक दिन के बराबर हैं।
2Pe 3:9  प्रभु अपनी प्रतिज्ञा के विषय में देर नहीं करता, जैसी देर कितने लोग समझते हैं; पर तुम्हारे विषय में धीरज धरता है, और नहीं चाहता, कि कोई नाश हो; वरन यह कि सब को मन फिराव का अवसर मिले।
2Pe 3:10  परन्‍तु प्रभु का दिन चोर की नाईं आ जाएगा, उस दिन आकाश बड़ी हड़हड़ाहट के शब्‍द से जाता रहेगा, और तत्‍व बहुत ही तप्‍त होकर पिघल जाएंगे, और पृथ्वी और उस पर के काम जल जाऐंगे।
2Pe 3:11  तो जब कि ये सब वस्‍तुएं, इस रीति से पिघलने वाली हैं, तो तुम्हें पवित्र चालचलन और भक्ति में कैसे मनुष्य होना चाहिए।
एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था ४-५ 
  • मत्ती २४:२९-५१

मंगलवार, 7 फ़रवरी 2012

भंग ध्यान?

   जिस विश्वविद्यालय में मैं पढ़ाता हूँ, वहाँ छात्रों को, उनके अध्ययन में सुविधा के लिए, लैपटॉप कंप्यूटर उपलब्ध कराए जाते हैं। यद्यपि यह सुविधा उनके अध्ययन के लिए निसंदेह सहायक है, किंतु मैंने पाया है कि कक्षा में यह उनके अध्ययन में बाधा भी बन जाती है।

   क्योंकि विद्यार्थी अपने लैपटॉप्स पर ही लेक्चर के नोट्स बनाते हैं, इसलिए कक्षा में लेक्चर के समय वे सब अपने लैपटॉप खोल कर बैठते हैं। किंतु समस्या यह है कि लेक्चर के नोट्स बनाने के स्थान पर उनमें से कई अपने मित्रों के साथ संपर्क करना, फेसबुक पर देखना और लिखना या इंटरनैट पर अन्य किसी बात के लिए सर्फ करना आदि में लगे रहते हैं। ऐसे में, स्वाभाविक है कि उनका ध्यान मेरे लेक्चर की ओर नहीं वरन इन ध्यान भंग करने वाली बातों में रहेगा। चाहे अपने आप में वे बातें उचित हों, सकारात्मक हों, भली हों, ज्ञानवर्धक हों किंतु ऐसे में लैपटॉप की यह भली सुविधा उनके अध्ययन में सहायक नहीं नुकसानदेह बन जाती है।

   कई भली बातें ऐसे ही हमारे जीवनों में मुख्य उद्देश्य से ध्यान हटा कर, हमारे लिए नुकसानदेह हो जाती हैं, क्योंकि जिस प्राथमिकता पर हमें अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए, वे उससे हमारा ध्यान हटा देती हैं। यही प्रभु यीशु से प्रेम करने वाले एक परिवार में घटित हुआ; उस परिवार ने प्रभु को अपने घर आमंत्रित किया और प्रभु की सेवा टहल के लिए एक बहन मार्था तो दौड़-धूप में लग गई, किंतु दूसरी बहन मरियम प्रभु के चरणों पर बैठकर उस की सुनने लगी। थोड़ी देर में "पर मार्था सेवा करते करते घबरा गई..." और प्रभु ही को उलाहना देने लगी "...और उसके पास आकर कहने लगी; हे प्रभु, क्‍या तुझे कुछ भी सोच नहीं कि मेरी बहिन ने मुझे सेवा करने के लिये अकेली ही छोड़ दिया है सो उस से कह, कि मेरी सहायता करे" (लूका १०:४०)।

   क्या आपके जीवन में भी कोई ऐसी आदत या गतिविधि या कोई शौक है जो अपने आप में तो ज़रा भी बुरा नहीं है, लेकिन वह आपके परिवार की ज़िम्मेदारियां निभाने में और प्रभु के साथ उचित समय बिताने में बाधा बनता है? क्या कुछ ’भली बातें’ आपका ध्यान आपकी प्राथमिकताओं से भंग कर रहीं हैं? यदि हाँ, तो यह समय है कि आप इस बात की ओर ध्यान दें, और अपने जीवन में आवश्यक परिवर्तन लाएं।

   जैसे प्रभु यीशु ने मार्था को समझाया, भले की नहीं उत्तम की सोचें और उससे अपना ध्यान भंग ना होने दें; अपने सर्वोत्तम उद्देश्य को पूरा करें। - डेव ब्रैनन


हम परमेश्वर की महिमा के लिए सृजे गए हैं; यही हमारे जीवन का सर्वोत्तम उद्देश्य है।

पर मार्था सेवा करते करते घबरा गई और उसके पास आकर कहने लगी; हे प्रभु, क्‍या तुझे कुछ भी सोच नहीं कि मेरी बहिन ने मुझे सेवा करने के लिये अकेली ही छोड़ दिया है सो उस से कह, कि मेरी सहायता करे। - लूका १०:४०

बाइबल पाठ: लूका १०:३८-४२

Luk 10:38  फिर जब वे जा रहे थे, तो वह एक गांव में गया, और मार्था नाम एक स्त्री ने उसे अपने घर में उतारा।
Luk 10:39  और मरियम नाम उस की एक बहिन थी; वह प्रभु के पांवों के पास बैठकर उसका वचन सुनती थी।
Luk 10:40  पर मार्था सेवा करते करते घबरा गई और उसके पास आकर कहने लगी; हे प्रभु, क्‍या तुझे कुछ भी सोच नहीं कि मेरी बहिन ने मुझे सेवा करने के लिये अकेली ही छोड़ दिया है सो उस से कह, कि मेरी सहायता करे।
Luk 10:41  प्रभु ने उसे उत्तर दिया, मार्था, हे मार्था; तू बहुत बातों के लिये चिन्‍ता करती और घबराती है।
Luk 10:42  परन्‍तु एक बात अवश्य है, और उस उत्तम भाग को मरियम ने चुन लिया है: जो उस से छीना न जाएगा।
 
एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था १-३ 
  • मत्ती २४:१-२८

सोमवार, 6 फ़रवरी 2012

ज्योति बनें

   मेरे एक मित्र को प्रति वर्ष यह अवसर मिलता है कि राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली सालाना फुटबॉल प्रतियोगिता में पत्रकार की हैसियत से शामिल हो। उसका काम होता है वहां पर जो खिलाड़ियों और खेल संबंधित कर्मचारियों में मसीही विश्वासी हैं, मसीही विश्वास से संबंधित कार्यक्रम में प्रसारण के लिए उनके साक्षातकार ले।

   कुछ साल पहले जब पहले-पहल उसने यह काम करना आरंभ किया तो वहां पर लोगों मे प्रचलित घमंड, स्वार्थ, मौज-मस्ती के वातावरण के कारण उसका मन विचलित और निराश हो गया। उसका कहना था कि, "मैंने उस स्थान को बड़े अंधकार का स्थान पाया।"

   एक दिन उसने एक मसीही विश्वासी और भूतपूर्व फुटबॉल खिलाड़ी से अपनी व्यथा बयान करी। उस खिलाड़ी ने मेरे मित्र की ओर देखा और कहा, "भाई, इस अंधकार के स्थान में आप ज्योति का कार्य कर रहें हैं।" उस बात ने मेरे मित्र को स्मरण दिलाया कि वह वहां क्यों है, और उसे इससे परमेश्वर की सेवकाई के लिए अपनी कटिबद्धता को दृढ़ करने में सहायता मिली। पाप के अंधकार से भरे स्थान में सुसमाचार की ज्योति चमकाने के लिए वह प्रोत्साहित हो सका।

   हो सकता है कि आप भी किसी ऐसे स्थान पर कार्य कर रहें हैं जहां परमेश्वर को कोई महत्व नहीं देता, विश्वास की खिल्ली उड़ाई जाती है और भक्तिहीन, स्वार्थी जीवनशैली तथा नास्तिक विचारधारा का अनुमोदन किया जाता है। शायद आपको भी लगता है कि आप किसी बहुत अंधकार से भरे स्थान में से होकर निकल रहे हैं।

   क्यों न ऐसे में ज्योति बन जाएं: "क्‍योंकि तुम तो पहले अन्‍धकार थे परन्‍तु अब प्रभु में ज्योति हो, सो ज्योति की सन्‍तान की नाईं चलो" (इफिसियों ५:८)। कठिनाईयों में भी अपनी मुस्कान, अपने विनम्र स्वभाव, दयालु कार्य और कार्य में मेहनत, खराई तथा ईमानदारी के द्वारा अपने आस-पास के माहौल को रौशन कर दें।

   परमेश्वर से कहें कि आपको सुसमाचार दूसरों के साथ बांटने के अवसर दे, और आप उन अवसरों सदुपयोग करने वाले हों। हो सकता है कि किसी के लिए परमेश्वर की ओर से पाप के अंधकार में सच्ची ज्योति को दिखाने वाले आप ही एक माध्यम हों। - डेव ब्रैनन

मसीह के लिए हमारे जीवन कि गवाही इस अंधियारे संसार में ज्योति के समान है।

क्‍योंकि तुम तो पहले अन्‍धकार थे परन्‍तु अब प्रभु में ज्योति हो, सो ज्योति की सन्‍तान की नाईं चलो। - इफिसियों ५:८

बाइबल पाठ: इफिसियों ५:८-१४

Eph 5:8  क्‍योंकि तुम तो पहले अन्‍धकार थे परन्‍तु अब प्रभु में ज्योति हो, सो ज्योति की सन्‍तान की नाईं चलो।
Eph 5:9  (क्‍योंकि ज्योति का फल सब प्रकार की भलाई, और धामिर्कता, और सत्य है)।
Eph 5:10  और यह परखो, कि प्रभु को क्‍या भाता है
Eph 5:11  और अन्‍धकार के निष्‍फल कामों में सहभागी न हो, वरन उन पर उलाहना दो।
Eph 5:12  क्‍योंकि उन के गुप्‍त कामों की चर्चा भी लाज की बात है।
Eph 5:13  पर जितने कामों पर उलाहना दिया जाता है वे सब ज्योति से प्रगट होते हैं, क्‍योंकि जो सब कुछ को प्रगट करता है, वह ज्योति है।
Eph 5:14  इस कारण वह कहता है, हे सोनेवाले जाग और मुर्दों में से जी उठ; तो मसीह की ज्योति तुझ पर चमकेगी।
Eph 5:15  इसलिये ध्यान से देखो, कि कैसी चाल चलते हो; निर्बुद्धियों की नाईं नहीं पर बुद्धिमानों की नाईं चलो।
Eph 5:16  और अवसर को बहुमोल समझो, क्‍योंकि दिन बुरे हैं।
Eph 5:17  इस कारण निर्बुद्धि न हो, पर ध्यान से समझो, कि प्रभु की इच्‍छा क्‍या है।
 
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन ३९-४० 
  • मत्ती २३:२३-३९

रविवार, 5 फ़रवरी 2012

निहारना

   अपने जीवन की संध्या में मैं केवल पेड़ों को बढ़ते हुए देखना चाहता हूँ। तीस से भी अधिक साल पहले मैंने अपने आंगन में एक पौधा लगाया था। आज हमारी खिड़की के बाहर वह अपनी परिपक्वता की भव्यता में खड़ा है, हर ऋतु में सुन्दर। मैं उसे निहारते रहना चाहता हूँ।

   हमारे आत्मिक प्रयासों के साथ भी कुछ ऐसा ही होता है। हम ने कई छोटे "पौधे" लगाए होंगे - वे लोग, हमने जिन को आत्मिक जीवन की शिक्षाएं दीं, उन्हें सींचा, ध्यान से उनकी देख भाल करी, उनका पोषण किया। हम "पौधे" तो लगा सकते हैं परन्तु उन पौधों को "पेड़" बनाना परमेश्वर ही कर सकता है।

   कभी कभी मुझे उन लोगों से कोई सन्देश आता है जिन्हें मैंने कई वर्ष पहले सिखाया था, और मैं यह जानकर आनन्दित होता हूँ कि अब वे बढ़ कर परिपक्व हो गए हैं और परमेश्वर के द्वारा बहुत उपयोग करे जा रहे हैं - मेरी किसी सहायता के बिना। यह मुझे हलके से समझाता है कि मेरा कार्य पौधा लगाना और कुछ समय के लिए उसे सींचने का हो सकता है, और उन्हें सिखाने का कि वे "प्रेम में सच्‍चाई से चलते हुए, सब बातों में उस में जा सिर है, अर्थात मसीह में बढ़ते जाएं" (इफिसीयों ४:१५); किंतु केवल परमेश्वर ही है जो उन्हें बढ़ा कर परिपक्व फलदायी पेड़ बना सकता है (१ कुरिन्थियों ३:६-७)।

   जर्मन धर्मशास्त्री हेलमुट थेइलिके ने लिखा, "वह मनुष्य जो समयानुसार अपनी पकड़ ढीली करना नहीं जानता, जो परमेश्वर में शांति और विश्वास के आनन्द को नहीं जानता - उसमें जो अपने उद्देश्य हमारी सहायता के बिना (या हमारे बावजूद) करना जानता है, उसके हाथों में छोड़ना नहीं जानता जो पौधों को पेड़ बना देता है...ऐसा मनुष्य अपने बुढ़ापे में केवल एक निराश और दुखी मनुष्य ही हो सकता है।"

   इसलिए, अब मेरी उम्र में शायद मैं एक-दो "पौधे" लगा लूँ और उनकी देखभाल करूं, लेकिन मुख्यतः मेरा समय तो "पेड़ों" को निहारने में ही गुज़रेगा। - डेविड रोपर

जो मसीह में आगे बढ़ते हैं वे औरों को भी आगे बढ़ाते हैं।

वह उस वृक्ष के समान है, जो बहती नालियों के किनारे लगाया गया है। और अपनी ऋतु में फलता है, और जिसके पत्ते कभी मुरझाते नहीं। इसलिये जो कुछ वह पुरूष करे वह सफल होता है। - भजन १:३

बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों ३:४-११

1Co 3:4  इसलिये कि जब एक कहता है, कि मैं पौलुस का हूं, और दूसरा कि मैं अपुल्लोस का हूं, तो क्‍या तुम मनुष्य नहीं?
1Co 3:5  अपुल्लोस क्‍या है और पौलुस क्‍या केवल सेवक, जिन के द्वारा तुम ने विश्वास किया, जैसा हर एक को प्रभु ने दिया।
1Co 3:6  मैं ने लगाया, अपुल्लोस ने सींचा, परन्‍तु परमेश्वर ने बढ़ाया।
1Co 3:7  इसलिये न तो लगाने वाला कुछ है, और न सींचने वाला, परन्‍तु परमेश्वर जो बढ़ाने वाला है।
1Co 3:8  लगाने वाला और सींचने वाला दानों एक हैं; परन्‍तु हर एक व्यक्ति अपने ही परिश्रम के अनुसार अपनी ही मजदूरी पाएगा।
1Co 3:9  क्‍योंकि हम परमेश्वर के सहकर्मी हैं; तुम परमेश्वर की खेती और परमेश्वर की रचना हो।
1Co 3:10  परमेश्वर के उस अनुग्रह के अनुसार, जो मुझे दिया गया, मैं ने बुद्धिमान राजमिस्री की नाईं नेव डाली, और दूसरा उस पर रद्दा रखता है; परन्‍तु हर एक मनुष्य चौकस रहे, कि वह उस पर कैसा रद्दा रखता है।
1Co 3:11  क्‍योंकि उस नेव को छोड़ जो पड़ी है, और वह यीशु मसीह है कोई दूसरी नेव नहीं डाल सकता।
 
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन ३६-३८ 
  • मत्ती २३:१-२२

शनिवार, 4 फ़रवरी 2012

प्रश्न मूल्यों का

   अपनी एक यात्रा के दौरान मैंने एक ऐसा विज्ञापन देखा जो सोचने पर बाध्य करता था। विज्ञापन कारोबार प्रबंधकों की एक गोष्ठि के विषय में था, और उसमें लिखा था "किसी अगुवे का मूल्य उसके मूल्यों के सीधे अनुपात में है।" इस कथन की सार्थकता ने मुझे प्रभावित किया। हम जिस बात को मूल्य देते हैं, वही हमारे चरित्र को बनाती है, और अन्ततः निर्धारित करती है कि हम कैसे अगुवे होंगे या हम नेतृत्व कर भी पाएंगे कि नहीं। किंतु यह बात केवल नेताओं या प्रबंधकों या अगुवों पर ही लागू नहीं होती।

   मसीह के अनुयायियों के लिए मूल्यों का महत्व और भी अधिक हो जाता है। पौलुस ने कुलुस्से के मसीही विश्वासियों को अपनी पत्री में लिखा: "पृथ्वी पर की नहीं परन्‍तु स्‍वर्गीय वस्‍तुओं पर ध्यान लगाओ" (कुलुस्सियों ३:२)। यह लिखने में उसका उद्देश्य था कि मसीह के प्रभावी सन्देशवाहक होने के लिए हमारे मूल्यों का निर्धारण अस्थायी सांसारिक बातों से नहीं परन्तु चिरस्थायी स्वर्गीय बातों द्वारा होना चाहिए। इस संसार के जीवन में यह समझ और मानकर चलना कि हम यहां पर्यटक नहीं तीर्थयात्री हैं, ही हमारे दृष्टिकोण को स्पष्ट और केंद्रित रखेगा, और हम अपने उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह के सेवाकाई में प्रभावी हो पाएंगे।

   यह कहा जाता है कि हम एक ऐसे संसार में रहते हैं जो हर बात की भौतिक कीमत तो जानता है किंतु किसी बात का आत्मिक मूल्य और महत्व नहीं जानता। इस "अभी और यहां" के संसार में, हम मसीही विश्वासियों को उन बातों के द्वारा अपने मूल्य स्थापित करने हैं जो चिरस्थायी और सदाकालीन हैं - परमेश्वर और उसके वचन की बातें।

   दूसरे शब्दों में, एक मसीही विश्वासी का प्रभावी मूल्य उसे प्रभावित करने वाले मूल्यों के सीधे अनुपात में है। - बिल क्राउडर

सांसारिक वस्तुओं पर अपनी पकड़ ढीली किंतु आत्मिक वस्तुओं पर दृढ़ रखें।

पृथ्वी पर की नहीं परन्‍तु स्‍वर्गीय वस्‍तुओं पर ध्यान लगाओ। - कुलुस्सियों ३:२

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों ३:१-११
Col 3:1  सो जब तुम मसीह के साथ जिलाए गए, तो स्‍वर्गीय वस्‍तुओं की खोज में रहो, जहां मसीह वर्तमान है और परमेश्वर के दाहिनी ओर बैठा है।
Col 3:2  पृथ्वी पर की नहीं परन्‍तु स्‍वर्गीय वस्‍तुओं पर ध्यान लगाओ।
Col 3:3  क्‍योंकि तुम तो मर गए, और तुम्हारा जीवन मसीह के साथ परमेश्वर में छिपा हुआ है।
Col 3:4   जब मसीह जो हमारा जीवन है, प्रगट होगा, तब तुम भी उसके साथ महिमा सहित प्रगट किए जाओगे।
Col 3:5  इसलिये अपने उन अंगो को मार डालो, जो पृथ्वी पर हैं, अर्थात व्यभिचार, अशुद्धता, दुष्‍कामना, बुरी लालसा और लोभ को जो मूर्ति पूजा के बराबर है।
Col 3:6   इन ही के कारण परमेश्वर का प्रकोप आज्ञा न मानने वालों पर पड़ता है।
Col 3:7  और तुम भी, जब इन बुराइयों में जीवन बिताते थे, तो इन्‍हीं के अनुसार चलते थे।
Col 3:8  पर अब तुम भी इन सब को अर्थात क्रोध, रोष, बैरभाव, निन्‍दा, और मुंह से गालियां बकना ये सब बातें छोड़ दो।
Col 3:9  एक दूसरे से झूठ मत बोलो क्‍योंकि तुम ने पुराने मनुष्यत्‍व को उसके कामों समेत उतार डाला है।
Col 3:10  और नए मनुष्यत्‍व को पहिन लिया है जो अपने सृजनहार के स्‍वरूप के अनुसार ज्ञान प्राप्‍त करने के लिये नया बनता जाता है।
Col 3:11  उस में न तो यूनानी रहा, न यहूदी, न खतना, न खतनारिहत, न जंगली, न स्‍कूती, न दास और न स्‍वतंत्र: केवल मसीह सब कुछ और सब में है।
 
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन ३४-३५ 
  • मत्ती २२:२३-४६

शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2012

प्रचार या प्रदर्शन

   मेरा एक बहुत वर्षों का पुराना मित्र और मार्गदर्शक अक्सर कहता है कि परमेश्वर के वचन बाइबल के अध्ययन में उसका उद्देश्य सदैव पढ़े गए को अपने व्यावाहरिक जीवन में लागू करना होता है। मैं उसके इस सीखे हुए को जीवन में लागू कीए जाने पर दिए गए ज़ोर की बहुत सराहना करता हूँ, क्योंकि हम जो बाइबल का अध्ययन करके फिर उसे सिखाते, प्रचार करते और उसके बारे में लिखते हैं, उनके लिए इस प्रबल वचन से संबंधित इन गतिविधियों को मात्र एक दिमाग़ी कसरत बना लेना बहुत आसान होता है।

   प्रसिद्ध बाइबल शिक्षक और टीकाकार ओस्वॉल्ड चैम्बर्स ने कहा था: "यह खतरा कि परमेश्वर की सन्तान उसके पवित्र वचन कि महानता और गूढ़ता के विषय में बेपरवाह हो जाए सदा बना रहता है। हम बाइबल की इन अद्भुत सच्चाईयों के बारे में प्रचार तो बहुत करने लगते हैं किंतु यह भूल जाते हैं कि उन्हीं बातों को हमारे जीवनों में प्रदर्शित भी होना चाहिए। सत्य की विवेचना करने को ही सत्य का पालन करना मान लेने की गलती कर बैठना; इस गलतफहमी में जीना कि क्योंकि हम बाइबल की बातों की व्याख्या कर लेते हैं इसलिए हम उनका पालन करने वाले भी हैं, बहुत आसान होता है"।

   प्रभु यीशु के एक चेले याकूब ने अपनी पत्री में मसीही विश्वासियों को लिखा: "पर जो व्यक्ति स्‍वतंत्रता की सिद्ध व्यवस्था पर ध्यान करता रहता है, वह अपने काम में इसलिये आशीष पाएगा कि सुनकर नहीं, पर वैसा ही काम करता है" (याकूब १:२५)। मुख्य बात शब्दों या लेखों द्वारा प्रचार करना नहीं वरन पालन करना है; उसे जीवन में जी कर दिखाना है।

  हम जब परमेश्वर के वचन का अध्ययन करें तो हमारे मन में उठने वाला पहला प्रश्न यह नहीं होना चाहिए कि "इसके बारे में क्या और कैसे प्रचार कर सकता हूँ?" वरन यह होना चाहिए कि "मैं इसे अपने जीवन में कैसे प्रदर्शित कर सकता हूँ?" - डेविड मैककैसलैंड


आज्ञाकारिता में उठाया एक कदम उस बात के बारे में वर्षों अध्ययन करने से बढ़कर है। - चैम्बर्स

परन्‍तु वचन पर चलने वाले बनो, और केवल सुनने वाले ही नहीं जो अपने आप को धोखा देते हैं। - याकूब १:२२
 
बाइबल पाठ: याकूब १:२१-२६
Jas 1:21   इसलिये सारी मलिनता और बैर भाव की बढ़ती को दूर करके, उस वचन को नम्रता से ग्रहण कर लो, जो हृदय में बोया गया और जो तुम्हारे प्राणों का उद्धार कर सकता है।
Jas 1:22  परन्‍तु वचन पर चलने वाले बनो, और केवल सुनने वाले ही नहीं जो अपने आप को धोखा देते हैं।
Jas 1:23  क्‍योंकि जो कोई वचन का सुनने वाला हो, और उस पर चलने वाला न हो, तो वह उस मनुष्य के समान है जो अपना स्‍वाभाविक मुंह दर्पण में देखता है।
Jas 1:24  इसलिये कि वह अपने आप को देखकर चला जाता, और तुरन्‍त भूल जाता है कि मैं कैसा था।
Jas 1:25  पर जो व्यक्ति स्‍वतंत्रता की सिद्ध व्यवस्था पर ध्यान करता रहता है, वह अपने काम में इसलिये आशीष पाएगा कि सुनकर नहीं, पर वैसा ही काम करता है।
Jas 1:26   यदि कोई अपने आप को भक्त समझे, और अपनी जीभ पर लगाम न दे, पर अपने हृदय को धोखा दे, तो उस की भक्ति व्यर्थ है।
 
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन ३१-३३ 
  • मत्ती २२:१-२२