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सोमवार, 21 मई 2012

स्वार्थ


   १९७० के दशक में उस समय के प्रसिद्ध गायक दल बीटल्स (The Beatles) ने यह दिखाने के उद्देश्य से कि उनके संगीत की रचना कैसे होती है, अपने दल के सदस्यों और उनके कार्यों पर एक चलचित्र (documentary) बनाना आरंभ किया। परन्तु जब चलचित्र बना तब बजाए यह दिखाने के कि उनके संगीत की रचना कैसे होती थी, जो सामने आया वह था उनमें से प्रत्येक का स्वार्थ और आपसी कलह। दल का हर सदस्य दल की उन्नति के लिए नहीं वरन अपनी ही उन्नति की चाह और महत्वकांक्षाओं से भरा हुआ था, और अपने स्वार्थ में होकर ही कार्य कर रहा था। इस चलचित्र के बनने के कुछ समय पश्चात ही यह प्रसिद्ध संगीत दल टूट कर बिखर गया; कारण था स्वार्थ से उपजा आपसी विवाद और टूटी मित्रता।

   स्वार्थ, मानव संबंधों को बिगाड़ने वाली एक बहुत पुरानी समस्या रही है। प्रथम ईसवीं में प्रेरित पौलुस को भय था कि फिलिप्पी की मण्डली भी इसी व्याधि का शिकार न बन जाए। वह भली भांति जानता था कि जब व्यक्तिगत उन्नति की भावना, मण्डली की सामूहिक उन्नति की लालसा पर भारी पड़ने लगती है तो शीघ्र ही लोगों के रवैये भी एक दूसरे के प्रति फूट और द्वेष के हो जाते हैं, और मण्डली पतन की ओर चल निकलती है।
   इस खतरनाक प्रवृति को पनपने से रोकने के लिए पौलुस ने उन्हें अपनी पत्री में लिखा: "विरोध या झूठी बड़ाई के लिए कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्‍छा समझो। हर एक अपने ही हित की नहीं, वरन दूसरों के हित की भी चिन्‍ता करे" (फिलिप्पियों २:३-४)।

   आज यदि आपके जीवन पर एक चलचित्र बनाया जाए तो वह क्या प्रगट करेगा; स्वार्थी या निस्वार्थी जीवन? हम मसीही विश्वासियों को विशेषकर इस बात में बहुत सावधान रहना है और अपने प्रभु यीशु के जीवन के अनुरूप अपने जीवनों में भी औरों के लिए निस्वार्थ चिंता प्रगट करनी है। निस्वार्थ भावना द्वारा ही हम चर्च और परिवारों में टूटना और बिखरना रोक सकेंगे और सामूहिक उन्न्ति की राह पर अग्रसर हो सकेंगे। - बिल क्राउडर


जो मन दुसरों के हित की भावना से भरा रहता है वह कभी स्वार्थ द्वारा नष्ट नहीं हो सकता।

विरोध या झूठी बड़ाई के लिए कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्‍छा समझो। - फिलिप्पियों २:३

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों २:१-११
Php 2:1  सो यदि मसीह में कुछ शान्‍ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करूणा और दया है।
Php 2:2  तो मेरा यह आनन्‍द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो।
Php 2:3  विरोध या झूठी बड़ाई के लिए कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्‍छा समझो।
Php 2:4  हर एक अपने ही हित की नहीं, वरन दूसरों के हित की भी चिन्‍ता करे।
Php 2:5  जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो।
Php 2:6  जिस ने परमेश्वर के स्‍वरूप में होकर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्‍तु न समझा।
Php 2:7  वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया।
Php 2:8   और मनुष्य के रूप में प्रगट होकर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली।
Php 2:9  इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्‍ठ है।
Php 2:10  कि जो स्‍वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे हैं वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें।
Php 2:11  और परमेश्वर पिता की महिमा के लिए हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है।


एक साल में बाइबल: 

  • १ इतिहास १३-१५ 
  • यूहन्ना ७:१-२७


रविवार, 20 मई 2012

उपयुक्त भेंट

   मुझे जान कर बहुत प्रसन्नता हुई कि मेरे एक मित्र ने मेरे पड़ौसी को, जो उसका भी मित्र था, परमेश्वर के वचन बाइबल की एक प्रति भेंट करी। किंतु कुछ समय बाद मैंने जाना कि उस पड़ौसी ने बाइबल पढ़ना बन्द कर दिया क्योंकि वह समझ नहीं पाई कि परमेश्वर कैन द्वारा लाई गई भेंट अस्वीकार करने का अन्याय कैसे कर सकता है? उनका तर्क था कि कैन तो किसान था, इसलिए स्वाभाविक है कि जो उसकी उपज थी, वह उसी को परमेश्वर के पास लेकर आएगा। फिर क्यों परमेश्वर को कैन की भेंट स्वीकार नहीं हुई; क्या इसलिए कि वह जीव-जन्तु नहीं वरन खेती की उपज थी?

   बहुत से अन्य लोगों के समान, मेरे उस पड़ौसी ने भी वास्तविकता को समझे बिना ही एक गलत धारणा बना ली और उस के आधार पर निर्णय ले लिया। ऐसा नहीं है कि परमेश्वर को साग-पात पसन्द नहीं, वरन बात यह थी कि कैन अपनी भेंट के पीछे अपनी गलत प्रवृति और मनसाएं छिपाने का प्रयास कर रहा था। भेंट अस्वीकार करने से जब कैन क्रोधित हुआ तब परमेश्वर ने कैन से कहा, "यदि तू भला करे, तो क्या तेरी भेंट ग्रहण न की जाएगी? और यदि तू भला न करे, तो पाप द्वार पर छिपा रहता है, और उसकी लालसा तेरी और होगी, और तू उस पर प्रभुता करेगा" (उत्पत्ति ४:७)। कैन अपने अन्दर से परमेश्वर के प्रति पूर्णतः समर्पित हुए बिना ही बाहरी क्रियाओं और विधि-विधानों के आडम्बर द्वारा परमेश्वर को प्रसन्न करना चाह रहा था, जिसे परमेश्वर जानता था और जो परमेश्वर को स्वीकार नहीं था।

   यही गलती आज भी बहुत से लोग परमेश्वर के साथ अपने संबंध के विषय में करते हैं। उनके मन ना तो परमेश्वर को समर्पित होते हैं और ना ही वे सच्चे मन से परमेश्वर की उपासना करते हैं; वे केवल रीति-रिवाज़ों के पालन और विधि-विधानों की पूर्ति के द्वारा परमेश्वर को बाध्य करना चाहते हैं कि वह उनसे प्रसन्न हो और उन्हें आशीष दे। वे बाहर से धर्मी दिखते हैं परन्तु उनके मन परमेश्वर से दूर और अपनी ही लालसाओं को समर्पित रहते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में यहूदा ने अपनी पत्री में ऐसे लोगों के विषय में कैन के उदाहरण के साठ लिखा: "उन पर हाय! कि वे कैन की सी चाल चले, और मजदूरी के लिए बिलाम की नाईं भ्रष्‍ट हो गए हैं: और कोरह की नाईं विरोध करके नाश हुए हैं" (यहूदा १:११)। हम चाहे जितने जोश के साथ परमेश्वर के नाम में भले कार्य करें, उसका स्तुतिगान करें, उसके नाम में दान-पुण्य इत्यादि करें, किंतु यदि हमारा मन परमेश्वर में नहीं है तो सब व्यर्थ है, कुछ भी परमेश्वर को स्वीकारीय नहीं है।

   विचार कीजिए, क्या वास्तव में परमेश्वर आपकी प्राथमिकता है? क्या वह आप के लिए आपकी योजनाओं और लालसाओं से अधिक महत्वपूर्ण है? क्या वह उस बात से, उस पाप से अधिक रोचक तथा वांछनीय है जो आप को भरमा कर उससे दूर ले जाता है?

   जब आपकी भेंट सच्चे और समर्पित मन के साथ परमेश्वर के सम्मुख प्रस्तुत की जाएगी तब ही वह ऐसी उपयुक्त भेंट होगी जिसे परमेश्वर कभी अस्वीकार नहीं करेगा। उस सर्वोच्च और सर्वोत्तम को आपकी संपत्ति की नहीं आपके मन कि लालसा है; एक टूटा और पिसा हुआ मन ही परमेश्वर के लिए उपयुक्त भेंट है; "क्योकि तू मेलबलि में प्रसन्न नहीं होता, नहीं तो मैं देता; होमबलि से भी तू प्रसन्न नहीं होता। टूटा मन परमेश्वर के योग्य बलिदान है; हे परमेश्वर, तू टूटे और पिसे हुए मन को तुच्छ नहीं जानता" (भजन ५१:१६-१७)। - जो स्टोवैल


अपने प्रति समर्पित हृदय की भेंट को परमेश्वर कभी अस्वीकार नहीं करता।

यदि तू भला करे, तो क्या तेरी भेंट ग्रहण न की जाएगी? और यदि तू भला न करे, तो पाप द्वार पर छिपा रहता है, और उसकी लालसा तेरी और होगी, और तू उस पर प्रभुता करेगा। - उत्पत्ति ४:७

बाइबल पाठ: उत्पत्ति ४:१-७
Gen 4:1  जब आदम अपनी पत्नी हव्वा के पास गया तब उस ने गर्भवती होकर कैन को जन्म दिया और कहा, मैं ने यहोवा की सहायता से एक पुरूष पाया है।
Gen 4:2  फिर वह उसके भाई हाबिल को भी जन्मी, और हाबिल तो भेड़-बकरियों का चरवाहा बन गया, परन्तु कैन भूमि की खेती करने वाला किसान बना।
Gen 4:3 कुछ दिनों के पश्चात्‌ कैन यहोवा के पास भूमि की उपज में से कुछ भेंट ले आया।
Gen 4:4  और हाबिल भी अपनी भेड़-बकरियों के कई एक पहिलौठे बच्चे भेंट चढ़ाने ले आया और उनकी चर्बी भेंट चढ़ाई; तब यहोवा ने हाबिल और उसकी भेंट को तो ग्रहण किया,
Gen 4:5  परन्तु कैन और उसकी भेंट को उस ने ग्रहण न किया। तब कैन अति क्रोधित हुआ, और उसके मुंह पर उदासी छा गई।
Gen 4:6  तब यहोवा ने कैन से कहा, तू क्यों क्रोधित हुआ? और तेरे मुंह पर उदासी क्यों छा गई है?
Gen 4:7  यदि तू भला करे, तो क्या तेरी भेंट ग्रहण न की जाएगी? और यदि तू भला न करे, तो पाप द्वार पर छिपा रहता है, और उसकी लालसा तेरी और होगी, और तू उस पर प्रभुता करेगा।


एक साल में बाइबल: 

  • १ इतिहास १०-१२ 
  • यूहन्ना ६:४५-७१

शनिवार, 19 मई 2012

व्यक्तिगत विश्वास

   बचपन में मेरा पालन-पोषण सिंगापुर में हुआ था और मुझे स्मरण है कि मेरे कई मित्रों को उनके ग़ैर-मसीही माता-पिता द्वारा घरों से इस लिए निकाल बाहर कर दिया गया क्योंकि उन्होंने मसीह यीशु में विश्वास किया। मेरे इन मित्रों को अपने विश्वास के कारण दुखः उठाना पड़ा, किंतु इससे उनका विश्वास और सुदृढ़ हुआ। उनकी तुलना में, मेरा जन्म और पालन-पोषण एक मसीही परिवार में हुआ, इसलिए मुझे उनके समान दुखः तो नहीं उठाने पड़े, किंतु अपने मसीही विश्वास से संबंधित बातों के लिए मुझे भी व्यक्तिगत निर्णय लेने पड़े और फिर उन पर बने रहना पड़ा।

   जो इस्त्राएली यहोशू के साथ, परमेश्वर द्वारा वाचा में दिए गए कनान देश में आए थे, उन्होंने परमेश्वर के महान और सामर्थी कार्य देखे थे और उस पर विश्वास किया था (न्यायियों २:७)। परन्तु उनकी अगली पीढ़ी ही के बारे में लिखा है कि "....तब उसके बाद जो दूसरी पीढ़ी हुई उसके लोग न तो यहोवा को जानते थे और न उस काम को जो उस ने इस्राएल के लिये किया था" (न्यायियों २:१०)। इसका परिणाम यह हुआ कि वे शीघ्र ही अपने परमेश्वर और विश्वास से हट गए और अन्य देवी-देवताओं की उपासना करने लगे (न्यायियों २:१२)। उस पीढ़ी ने अपने पितरों के विश्वास को व्यक्तिगत रीति से अपना विश्वास नहीं बनाया था, इसलिए वे विश्वास में स्थिर नहीं रह सके।

   कोई भी पीढ़ी अपनी पिछली पीढ़ी के विश्वास के आधार पर ही स्थिर नहीं रह सकती; सबको एक नए और ताज़ा व्यक्तिगत विश्वास में आना अनिवार्य है। जब कठिनाईयों और मुसीबतों का सामना करना पड़ता है तो जो विश्वास व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित नहीं है, वह लड़खड़ा जाएगा और ठोकर खाएगा; किंतु जिस के पास विश्वास के व्यक्तिगत अनुभव हैं वह स्थिर भी रहेगा और उन परिस्थितियों में से और दृढ़ भी होकर निकलेगा। जो दूसरी, तीसरी, चौथी या अन्य किसी पीढ़ी के मसीही हैं उनके पास विश्वास की एक बहुत अच्छी विरासत तो है, लेकिन उन्हें भी मसीह में व्यक्तिगत विश्वास की उतनी ही आवश्यक्ता है जितनी कि किसी नए विश्वासी को।

   मसीही विश्वास का एक नया और ताज़ा अनुभव लीजिए, परमेश्वर के वचन के अध्ययन में व्यक्तिगत रुचि दिखाईए। आप अपने व्यक्तिगत विश्वास के आधार पर ही अपने प्रभु के लिए प्रभावशाली जीवन व्यतीत कर सकते हैं। - सी.पी.हिया


यदि आपका विश्वास व्यक्तिगत नहीं है तो सच्चा और खरा भी नहीं है।


और उस पीढ़ी के सब लोग भी अपने अपने पितरों में मिल गए; तब उसके बाद जो दूसरी पीढ़ी हुई उसके लोग न तो यहोवा को जानते थे और न उस काम को जो उस ने इस्राएल के लिए किया था। - न्यायियों २:१०

बाइबल पाठ: न्यायियों २:६-१३
Jdg 2:6  जब यहोशू ने लोगों को विदा किया था, तब इस्राएली देश को अपने अधिकार में कर लेने के लिए अपने अपने निज भाग पर गए।
Jdg 2:7  और यहोशू के जीवन भर, और उन वृद्ध लोगों के जीवन भर जो यहोशू के मरने के बाद जीवित रहे और देख चुके थे कि यहोवा ने इस्राएल के लिए कैसे कैसे बड़े काम किए हैं, इस्राएली लोग यहोवा की सेवा करते रहे।
Jdg 2:8  निदान यहोवा का दास नून का पुत्र यहोशू एक सौ दस वर्ष का होकर मर गया।
Jdg 2:9  और उसको तिम्नथेरेस में जो एप्रैम के पहाड़ी देश में गाश नाम पहाड़ की उत्तर अलंग पर है, उसी के भाग में मिट्टी दी गई।
Jdg 2:10 और उस पीढ़ी के सब लोग भी अपने अपने पितरों में मिल गए; तब उसके बाद जो दूसरी पीढ़ी हुई उसके लोग न तो यहोवा को जानते थे और न उस काम को जो उस ने इस्राएल के लिए किया था।
Jdg 2:11  इसलिए इस्राएली वह करने लगे जो यहोवा की दृष्टि में बुरा है, और बाल नाम देवताओं की उपासना करने लगे;
Jdg 2:12 वे अपने पूर्वजों के परमेश्वर यहोवा को, जो उन्हें मिस्र देश से निकाल लाया था, त्यागकर पराए देवताओं की उपासना करने लगे, और उन्हें दण्डवत्‌ किया, और यहोवा को रिस दिलाई।
Jdg 2:13  वे यहोवा को त्याग कर के बाल देवताओं और अशतोरेत देवियों की उपासना करने लगे।


एक साल में बाइबल: 

  • १ इतिहास ७-९ 
  • यूहन्ना ६:२२-४४

शुक्रवार, 18 मई 2012

विजयी जीवन

   सन १९३५ में अमेरिका के टेक्सस प्रांत के एक छोटे और अज्ञात अश्वेत विद्यार्थियों के कॉलेज से वादविवाद प्रतियोगिता में भाग लेने आए दल ने अप्रत्याशित रीति से दक्षिण कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से आए और राष्ट्रीय स्तर पर विजयी श्वेत विद्यार्थियों के दल को हरा दिया। यह एक अन्जान और असंभावित की, किसी जाने माने और बलवंत पर अप्रत्याशित विजय का अद्भुत उदाहरण था।

   इस्त्राएल के इतिहास में हम ऐसी कई घटनाएं पाते हैं जहां परमेश्वर की सहायता से वे अपने विरोधियों पर, जो उन से अधिक और शक्तिशाली थे, विजयी रहे। ऐसी ही एक घटना है छोटे लड़के दाऊद और दैत्याकार फिल्स्तीनी योद्धा गोलियत की, जिसका विवरण हमें परमेश्वर के वचन बाइबल में १ शमूएल १७ अध्याय में मिलता है। इस्त्राएल और फलिस्तीनीयों के सेनाएं एलाह कि घाटी में आमने-सामने थीं; इस्त्राएली उनका सामना करने से घबारा रहे थे क्योंकि ९’ ९" का एक फिल्स्तीनी योद्धा उन्हें ललकारता था, और वे उसके डील-डौल को देखकर उसका सामना करने से डरते थे।

   इस स्थिति में दाऊद नाम का एक इस्त्राएली लड़का अपने भाईयों की, जो इस्त्राएली सेना में थे, खोज-खबर लेने और उन्हें भोजन का सामान देने के लिए आया। उसने जब इस्त्राएल की डरी हुई सेना और गोलियत की ललकार तथा उसके द्वारा की जाने वाली परमेश्वर की निन्दा को सुना, तो उसने इस्त्राएल के राजा शाउल से अनुमति मांगी कि गोलियत का सामना करे। राजा शाउल ने बड़े हिचकिचाते हुए उसे अनुमति दी और दाऊद अपने गोफन, पांच चिकने पत्थर और परमेश्वर में अपने दृढ़ विश्वास के साथ गोलियत के सामने जा खड़ा हुआ। उसने गोफन में एक पत्थर लगाकर उसने फिल्स्ती के माथे पर दे मारा, जिससे वह गिर गया और दाउद ने फिर उसी की तलवार लेकर उसका काम तमाम कर दिया। अपने दैत्याकार योद्धा का अनजाम देखकर फिल्स्तीनी सेना के पांव उखड़ गए, और वे इस्त्राएलियों के सामने से भाग खड़े हुए और इस्त्राएलियों को एक बड़ी विजय मिली।

   हम सब अपने अपने जीवनों में कई दैत्याकार समस्याओं का सामना करते हैं, जैसे चिंता, शक, भय, पाप, अपराध-बोध इत्यादि और हमें लगता है कि इन पर विजयी होने कि सामर्थ हम में नहीं है। किंतु परमेश्वर पर अपने दृढ़ विश्वास और सच्चे समर्पण के द्वारा हमारा भी इन सभी बातों पर विजयी होना संभव है। हमें आवश्यक्ता है साहस के साथ कदम आगे बढ़ाने और अपने इन दैत्यों का परमेश्वर के नाम में सामना करने को तैयार होने की, अपनी रणभूमि में जाकर खड़ा होने की। वहीं परमेश्वर हमारी सहायता करेगा, हमें जयवंत करेगा। - मार्विन विलियम्स


अपने प्रबल बैरियों का सामना करने और उन पर जयवन्त होने की सामर्थ हमें परमेशवर ही से मिलती है।


फिर दाऊद ने कहा, यहोवा जिस ने मुझ सिंह और भालू दोनों के पंजे से बचाया है, वह मुझे उस पलिश्ती के हाथ से भी बचाएगा। शाऊल ने दाऊद से कहा, जा, यहोवा तेरे साथ रहे। - १ शमूएल १७:३७

बाइबल पाठ: १ शमूएल १७:३२-५२
1Sa 17:32  तब दाऊद ने शाऊल से कहा, किसी मनुष्य का मन उसके कारण कच्चा न हो, तेरा दास जाकर उस पलिश्ती से लड़ेगा।
1Sa 17:33  शाऊल ने दाऊद से कहा, तू जाकर उस पलिश्ती के विरूद्ध नहीं युद्ध कर सकता क्योंकि तू तो लड़का ही है, और वह लड़कपन ही से योद्धा है।
1Sa 17:34  दाऊद ने शाऊल से कहा, तेरा दास अपने पिता की भेड़ बकरियां चराता था, और जब कोई सिंह वा भालू झुंड में से मेम्ना उठा ले गया,
1Sa 17:35  तब मैं ने उसका पीछा करके उसे मारा, और मेम्ने को उसके मुंह से छुड़ाया; और जब उस ने मुझ पर चढ़ाई की, तब मैं ने उसके केश को पकड़ कर उसे मार डाला।
1Sa 17:36  तेरे दास ने सिंह और भालू दोनों को मार डाला और वह खतनारहित पलिश्ती उनके समान हो जाएगा, क्योंकि उस ने जीवित परमेश्वर की सेना को ललकारा है।
1Sa 17:37  फिर दाऊद ने कहा, यहोवा जिस ने मुझ सिंह और भालू दोनों के पंजे से बचाया है, वह मुझे उस पलिश्ती के हाथ से भी बचाएगा। शाऊल ने दाऊद से कहा, जा, यहोवा तेरे साथ रहे।
1Sa 17:38  तब शाऊल ने अपने वस्त्र दाऊद को पहिनाए, और पीतल का टोप उसके सिर पर रख दिया, और झिलम उसको पहिनाया।
1Sa 17:39  और दाऊद ने उसकी तलवार वस्त्र के ऊपर कसी, और चलने का यत्न किया; उस ने तो उनको न परखा था। इसलिये दाऊद ने शाऊल से कहा, इन्हें पहिने हुए मुझ से चला नहीं जाता, क्योंकि मैं ने नहीं परखा। और दाऊद ने उन्हें उतार दिया।
1Sa 17:40  तब उस ने अपनी लाठी हाथ में ले नाले में से पांच चिकने पत्थर छांटकर अपनी चरवाही की थैली, अर्थात अपने झोले में रखे और अपना गोफन हाथ में लेकर पलिश्ती के निकट चला।
1Sa 17:41  और पलिश्ती चलते चलते दाऊद के निकट पहुंचने लगा, और जो जन उसकी बड़ी ढाल लिए था वह उसके आगे आगे चला।
1Sa 17:42  जब पलिश्ती ने दृष्टि कर के दाऊद को देखा, तब उसे तुच्छ जाना क्योंकि वह लड़का ही था, और उसके मुख पर लाली झलकती यी, और वह सुन्दर था।
1Sa 17:43  तब पलिश्ती ने दाऊद से कहा, क्या मैं कुत्ता हूं, कि तू लाठी लेकर मेरे पास आता है? तब पलिश्ती अपने देवताओं के नाम लेकर दाऊद को कोसने लगा।
1Sa 17:44  फिर पलिश्ती ने दाऊद से कहा, मेरे पास आ, मैं तेरा मांस आकाश के पक्षियों और वन पशुओं को दे दूंगा।
1Sa 17:45  दाऊद ने पलिश्ती से कहा, तू तो तलवार और भाला और सांग लिए हुए मेरे पास आता है, परन्तु मैं सेनाओं के यहोवा के नाम से तेरे पास आता हूं, जो इस्राएली सेना का परमेश्वर है, और उसी को तू ने ललकारा है।
1Sa 17:46  आज के दिन यहोवा तुझ को मेरे हाथ में कर देगा, और मैं तुझ को मारूंगा, और तेरा सिर तेरे धड़ से अलग करूंगा; और मैं आज के दिन पलिश्ती सेना की लोथें आकाश के पक्षियों और पृथ्वी के जीव जन्तुओं को दे दूंगा, तब समस्त पृथ्वी के लोग जान लेंगे कि इस्राएल में एक परमेश्वर है।
1Sa 17:47  और यह समस्त मण्डली जान लेगी की यहोवा तलवार वा भाले के द्वारा जयवन्त नहीं करता, इसलिये कि संग्राम तो यहोवा का है, और वही तुम्हें हमारे हाथ में कर देगा।
1Sa 17:48  जब पलिश्ती उठ कर दाऊद का साम्हना करने के लिये निकट आया, तब दाऊद सेना की ओर पलिश्ती का साम्हना करने के लिये फुर्ती से दौड़ा।
1Sa 17:49  फिर दाऊद ने अपनी थैली में हाथ डाल कर उस में से एक पत्थर निकाला, और उसे गोफन में रख कर पलिश्ती के माथे पर ऐसा मारा कि पत्थर उसके माथे के भीतर घुस गया, और वह भूमि पर मुंह के बल गिर पड़ा।
1Sa 17:50  यों दाऊद ने पलिश्ती पर गोफन और एक ही पत्थर के द्वारा प्रबल होकर उसे मार डाला; परन्तु दाऊद के हाथ में तलवार न थी।
1Sa 17:51  तब दाऊद दौड़ कर पलिश्ती के ऊपर खड़ा हुआ, और उसकी तलवार पकड़ कर मियान से खींची, और उसको घात किया, और उसका सिर उसी तलवार से काट डाला। यह देख कर कि हमारा वीर मर गया पलिश्ती भाग गए।
1Sa 17:52  इस पर इस्राएली और यहूद पुरूष ललकार उठे, और गत और एक्रोन से फाटकों तक पलिश्तियों का पीछा करते गए, और घायल पलिश्ती शारैम के मार्ग में और गत और एक्रोन तक गिरते गए।


एक साल में बाइबल: 

  • १ इतिहास ४-६ 
  • यूहन्ना ६:१-२१

गुरुवार, 17 मई 2012

परमेश्वर की कलाकृति

   कुछ समय पहले मैं जापानी कला ओरिगैमी सीखने गया, जो काग़ज़ को मोड़ कर उससे विभिन्न आकार बनाने की कला है। हमें यह कला सिखाने वाले एक जापानी मसीही विश्वासी भाई हितोशिरो अकेही थे। हमें ओरिगैमी कला के बारे में सिखाने के साथ साथ वे अपने जीवन के अनुभव भी हमारे साथ बांटते जा रहे थे।

   अपने जीवन के बारे में उन्होंने बताया कि वे ११ भाईयों में सबसे छोटे हैं, और दूसरे विश्वयुद्ध में उनके पिता के देहांत के बाद उनकी माता ही ने उन की परवरिश करी। जीवन के कई कठिन उतार-चढ़ाव देखने के बाद उनका परिवार मसीही मिशनरियों के संपर्क में आया और उनके परिवार के कई लोग मसीही विश्वासी हो गए।

   उनके निर्देशों के अनुसार जैसे जैसे मैं एक साधारण और सामन्य काग़ज़ को लेकर मोड़ता जा रहा था और इस प्रक्रिया से एक नया सुन्दर आकार बनता जा रहा था, मैं सोचने लगा कि परमेश्वर भी ऐसे ही हमारे साधारण से जीवनों को लेकर उन्हें भी एक नया आकार देता है। पहले वह परिस्थितियों के द्वारा हमें नम्र और लचीला करता है, और हमें अपनी निकटता में लाता है, हमें अपने ऊपर निर्भर करना सिखाता है जिस से कि हम नए आकार में ढाले जाने के लिए तैयार हो सकें। फिर अपने अनुग्रह में वह जीवन के घुमाव-फिराव और उतार-चढ़ाव के द्वारा हमारे जीवनों को अपने पुत्र और हमारे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के स्वरूप की समानता में लाता जाता है (रोमियों ८:२९)।

   क्या आपके जीवन में कोई अप्रत्याशित मोड़ आया है? विस्मित और निराश ना हों; स्मरण रखें "क्‍योंकि हम उसके बनाए हुए हैं; और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्‍हें परमेश्वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया" (इफिसीयों २:१०)। प्रत्येक मसीही विश्वासी परमेश्वर की अपूर्ण कलाकृति है जिसपर उसका कार्य अभी ज़ारी है।

   जीवन की परिस्थितियां परमेश्वर के औज़ार हैं जिनके द्वारा वह हमें अपने पुत्र और हमारे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के स्वरूप में ढालता जा रहा है। - डेनिस फिशर


मसीही विश्वासी परमेश्वर के हाथों में कार्यरत कलाकृति हैं।


क्‍योंकि हम उसके बनाए हुए हैं; और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्‍हें परमेश्वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया। - इफिसीयों २:१०

बाइबल पाठ: रोमियों ८:२२-३३
Rom 8:22  क्‍योंकि हम जानते हैं, कि सारी सृष्‍टि अब तक मिल कर करहाती और पीड़ाओं में पड़ी तड़पती है।
Rom 8:23   और केवल वही नहीं पर हम भी जिन के पास आत्मा का पहिला फल है, आप ही अपने में करहाते हैं; और लेपालक होने की, अर्थात अपनी देह के छुटकारे की बाट जोहते हैं।
Rom 8:24  आशा के द्वारा तो हमारा उद्धार हुआ है परन्‍तु जिस वस्‍तु की आशा की जाती है जब वह देखने में आए, तो फिर आशा कहां रही? क्‍योंकि जिस वस्‍तु को कोई देख रहा है उस की आशा क्‍या करेगा?
Rom 8:25  परन्‍तु जिस वस्‍तु को हम नहीं देखते, यदि उस की आशा रखते हैं, तो धीरज से उस की बाट जोहते भी हैं।
Rom 8:26  इसी रीति से आत्मा भी हमारी र्दुबलता में सहायता करता है, क्‍योंकि हम नहीं जानते, कि प्रार्थना किस रीति से करना चाहिए, परन्‍तु आत्मा आप ही ऐसी आहें भर भरकर जो बयान से बाहर है, हमारे लिये बिनती करता है।
Rom 8:27  और मनों का जांचने वाला जानता है, कि आत्मा की मनसा क्‍या है क्‍योंकि वह पवित्र लोगों के लिये परमेश्वर की इच्‍छा के अनुसार बिनती करता है।
Rom 8:28  और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिल कर भलाई ही को उत्‍पन्न करती है, अर्थात उन्‍हीं के लिये जो उस की इच्‍छा के अनुसार बुलाए हुए हैं।
Rom 8:29  क्‍योंकि जिन्‍हें उस ने पहिले से जान लिया है उन्‍हें पहिले से ठहराया भी है कि उसके पुत्र के स्‍वरूप में हों ताकि वह बहुत भाइयों में पहिलौठा ठहरे।
Rom 8:30  फिर जिन्‍हें उन से पहिले से ठहराया, उन्‍हें बुलाया भी, और जिन्‍हें बुलाया, उन्‍हें धर्मी भी ठहराया है, और जिन्‍हें धर्मी ठहराया, उन्‍हें महिमा भी दी है।
Rom 8:31  सो हम इन बातों के विषय में क्‍या कहें? यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है?
Rom 8:32  जिस ने अपने निज पुत्र को भी न रख छोड़ा, परन्‍तु उसे हम सब के लिये दे दिया: वह उसके साथ हमें और सब कुछ क्‍योंकर न देगा?
Rom 8:33  परमेश्वर के चुने हुओं पर दोष कौन लगाएगा परमेश्वर वह है जो उनको धर्मी ठहराने वाला है।


एक साल में बाइबल: 

  • १ इतिहास १-३ 
  • यूहन्ना ५:२५-४७

बुधवार, 16 मई 2012

दृढ़ संकल्प


   मूडी बाइबल संस्थान में सेवा करने का एक बड़ा लाभ था उस संस्थान से अध्ययन कर के निकलने और फिर अपनी सेवकाई के द्वारा प्रभु यीशु मसीह के लिए संसार पर छाप छोड़ने वाले लोगों के उत्साहवर्धक जीवनों के बारे में सुनते और जानते रहना। उन लोगों के त्याग, अथक परिश्रम और उद्धार के सुसमाचार के प्रचार के लिए उत्साह की उनकी जीवन गाथाएं बहुत प्रेर्णादायक होती थीं। एक ऐसी ही सच्ची कहानी है मेरी बेथुने की।

   १९वीं सदी के अंतिम भाग में, अफ्रीका में मिशनरी बनकर जाने के उद्देश्य से, अश्वेत रंग की मेरी मैक्लिओड बेथुने ने दो वर्ष मूडी बाइबल संस्थान में लगाए। लेकिन जब वे अपना अध्ययन पूरा कर चुकीं तो किसी भी मिशनरी संस्था ने उन्हें मिशनरी कार्य के लिए लेने और भेजने में रुचि नहीं दिखाई। उनका अफ्रीका में सेवकाई के लिए जाने का सपना पूरा नहीं हो सका। किंतु इससे प्रभु यीशु की सेवकाई के लिए उनके संकल्प में कोई कमी नहीं आई। अपने प्रति मिशनरी संस्थाओं की उदासीनता से हतोसाहित हुए बिना उन्होंने फ्लोरिडा में अश्वेत महिलाओं के लिए एक छोटा बाइबल स्कूल खोला, जो आते समय में बढ़ कर बेथुने-कोल्मैन कॉलेज बन गया और अमेरिका के इतिहास में महिलाओं के दर्जे में परिवर्तन और सुधार लाने में उनकी और इस कॉलेज की बहुत महत्वपुर्ण भूमिका रही।

   अमेरिका को मेरी बेथुने की यह धरोहर टूटे सपनों के बावजुद अपने प्रभु की सेवकाई में कोई कमी ना आने देने के दृढ संकल्प का नतीजा थी। उन्हें निश्चय था कि परमेश्वर ने उन्हें "मेल मिलाप की सेवकाई" (२ कुरिन्थियों ५:१८) सौंपी है, और इस सेवाकाई की पूर्ति के लिए उन्हें परिस्थितियों से हार मान लेना स्वीकार नहीं था।

   प्रभु की सेवकाई की यह पुकार, केवल मेरी बेथुने के लिए ही नहीं, प्रत्येक मसीही विश्वासी के लिए है। हम सब को संसार के पास मसीह का यह सन्देश पहुंचाना है कि मसीह में होकर हमारा मेल मिलाप परमेश्वर के साथ संभव है, मसीह यीशु में होकर इसके लिए मार्ग सब के लिए उपलब्ध है।

   आप जहां भी हैं, वहीं पर मसीह के लिए प्रभावी होने का कोई माध्यम खोजिए और अपने उद्धारकर्ता प्रभु के लिए संसार पर अपनी छाप छोड़िए। प्रभु की सामर्थ से यह आपके द्वारा भी हो सकता है! - जो स्टोवैल


जो एक गुण परमेश्वर अपने लोगों में ढूंढ़ता है वह है उसकी सेवकाई करने वाला समर्पित मन।

और सब बातें परमेश्वर की ओर से हैं, जिस ने मसीह के द्वारा अपने साथ हमारा मेल मिलाप की सेवा हमें सौंप दी है। - २ कुरिन्थियों ५:१८

बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों ५:१६-२१
2Co 5:16  सो अब से हम किसी को शरीर के अनुसार न समझेंगे, और यदि हम ने मसीह को भी शरीर के अनुसार जाना था, तौभी अब से उस को ऐसा नहीं जानेंगे। 
2Co 5:17 सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। 
2Co 5:18  और सब बातें परमेश्वर की ओर से हैं, जिस ने मसीह के द्वारा अपने साथ हमारा मेल मिलाप कर लिया, और मेल मिलाप की सेवा हमें सौंप दी है। 
2Co 5:19  अर्थात परमेश्वर ने मसीह में होकर अपने साथ संसार का मेल मिलाप कर लिया, और उन के अपराधों का दोष उन पर नहीं लगाया और उस ने मेल मिलाप का वचन हमें सौंप दिया है।
2Co 5:20  सो हम मसीह के राजदूत हैं; मानो परमेश्वर हमारे द्वारा समझाता है: हम मसीह की ओर से निवेदन करते हैं, कि परमेश्वर के साथ मेल मिलाप कर लो। 
2Co 5:21  जो पाप से अज्ञात था, उसी को उस ने हमारे लिये पाप ठहराया, कि हम उस में होकर परमेश्वर की धामिर्कता बन जाएं।


एक साल में बाइबल: 

  • २ राजा २४-२५ 
  • यूहन्ना ५:१-२४


मंगलवार, 15 मई 2012

वचन

   मई २००९ में ८७ वर्ष की आयु में चार्ल्स हेवर्ड अपनी मृत्योपरांत अपने बच्चों और नाती-पोतों के लिए एक अद्भुत विरासित छोड़कर गए। चार्ल्स और उनकी पत्नी विर्जीनिया ने भारत और दक्षिण अफ्रीका में बहुत वर्ष मिशनरी कार्य किया था। फिर ७३ वर्ष की आयु में उन्होंने परमेश्वर के वचन बाइबल के खंडों से चुन कर बाइबल के पदों को स्मरण करना आरंभ किया। उनका उद्देश्य था कि वे अपने जीवन का अन्त अपने मन-मस्तिष्क को परमेश्वर के वचन से भली भांति भरकर कर सकें।

   उन्होंने इस के लिए कुलुस्सियों ३:१६ को अपना आधार बनाया और अपनी इस योजना का नाम रखा ’संपुर्ण बाइबल स्मरण योजना’। स्मरण करने के लिए उन्होंने पुराने नियम की प्रत्येक पुस्तक में से कम से कम एक पद, नए नियम की विवरणात्मक पुस्तकों में से कम से कम एक पद और नए नियम की पत्रीयों के प्रत्येक अध्याय में से कम से कम एक या अधिक पद चुने और उन्हें याद किया। उनकी यह स्मरण सूची उत्पत्ति १५:६ "उस ने यहोवा पर विश्वास किया और यहोवा ने इस बात को उसके लेखे में धर्म गिना" से आरंभ हुई और प्रकाशितवाक्य २२:१७ "...जो प्यासा हो, वह आए और जो कोई चाहे वह जीवन का जल सेंतमेंत ले" पर समाप्त हुई।

   कुल मिलाकर चार्ल्स ने बाइबल के २३९ पद कंठस्थ कर लिए। चार्ल्स का यह कार्य मुझे भजनकार द्वारा लिखी बात को स्मरण दिलाता है: "मैं ने तेरे वचन को अपने हृदय में रख छोड़ा है, कि तेरे विरूद्ध पाप न करूं" (भजन ११९:११)। जैसे इस भजन के १५, १६ पद में भजनकार लिखता है, चार्ल्स ने भी वैसे ही परमेश्वर के वचन के मनन और स्मरण में आनन्द पाया।

   परमेश्वर के वचन को अपने मन में भर लेने से बढ़कर उत्तम हमारे लिए और क्या हो सकता है? - सिंडी हैस कैसपर


परमेश्वर के वचन को मन में बसा लेना उत्तम फल्दायी वृक्षों के बीज बोने के समान है जो आते समय में अपने अच्छे फलों से आपको तृप्त करते रहेंगे।

मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से बसने दो; - कुलुस्सियों ३:१६

बाइबल पाठ: भजन ११९:९-१६
Psa 119:9  जवान अपनी चाल को किस उपाय से शुद्ध रखे? तेरे वचन के अनुसार सावधान रहने से।
Psa 119:10  मैं पूरे मन से तेरी खोज में लगा हूं, मुझे तेरी आज्ञाओं की बाट से भटकने न दे!
Psa 119:11  मैं ने तेरे वचन को अपने हृदय में रख छोड़ा है, कि तेरे विरूद्ध पाप न करूं।
Psa 119:12  हे यहोवा, तू धन्य है; मुझे अपनी विधियां सिखा!
Psa 119:13  तेरे सब कहे हुए नियमों का वर्णन, मैं ने अपने मुंह से किया है।
Psa 119:14  मैं तेरी चितौनियों के मार्ग से, मानों सब प्रकार के धन से हर्षित हुआ हूं।
Psa 119:15  मैं तेरे उपदेशों पर ध्यान करूंगा, और तेरे मार्गों की ओर दृष्टि रखूंगा।
Psa 119:16  मैं तेरी विधियों से सुख पाऊंगा, और तेरे वचन को न भूलूंगा।


एक साल में बाइबल: 

  • २ राजा २२-२३ 
  • यूहन्ना ४:३१-५४