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मंगलवार, 30 अक्टूबर 2012

क्षति


   एक किशोर की आदत बन गई थी कि वह कुछ गलत काम या गड़बड़ी करता और जब पकड़ा जाता तो अपने माता-पिता से उसकी क्षमा मांग लेता। अपने इन कामों से उसने अपने माता-पिता को चाहे कितना भी आहत क्यों ना किया हो, फिर भी अगली बार गलती करने से वह रुकता नहीं था क्योंकि उसे पूरा विश्वास था कि उसके माता-पिता उसे क्षमा कर देंगे। जब एक और बार ऐसा हुआ तो उसके पिता ने इसके बारे में उसे कुछ सीख देने का निर्णय किया।

   पिता उसे घर के गैराज में ले गए और एक कील उठाई और हथौड़े से उसे दीवार में ठोंक दिया। फिर अपने उस किशोर पुत्र से कहा कि वह उस कील को निकाले। पुत्र ने बेपरवाही से अपने कंधे झटके, औज़ार लिए और दीवार से कील को खींच कर निकाल दिया। पिता ने कहा, बेटा, यह क्षमा के समान है। जब तुम कोई गलती करते हो तो यह उस कील के ठोंके जाने के समान है, जब हम क्षमा करते हैं तो यह उस ठोंकी गई कील के निकाले जाने के समान है; अब एक कार्य और करो, दीवार से कील का वह निशान हटा कर दीवार को पहले के समान निशान रहित कर दो। पुत्र आश्चर्यचकित रह गया और विस्मय से बोला, यह कैसे हो सकता है? निशान थोड़े ही मिटेगा! पिता ने फिर कहा इसी प्रकार क्षमा मांग लेने और दे देने से जीवन से गलती के निशान भी चले नहीं जाते। जितनी अधिक गलतीयां करोगे, क्षमा मिलने पर भी उन गलतीयों के प्रभावों के कारण तुम्हारा जीवन भी उतना ही भद्दा होता चला जाएगा।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में राजा दाऊद के जीवन की एक घटना इस कहानी को प्रमाणित करती है कि पाप के दुष्परिणाम जीवन को क्षति पहुंचाते हैं। दाऊद ने पाप किया, और जब परमेश्वर ने उस पाप का एहसास उसके सामने रखा तो दाऊद ने पश्चाताप भी किया और क्षमा भी मांगी। परमेश्वर ने उसे क्षमा तो किया लेकिन दाऊद के पाप के प्रभाव उसके अपने जीवन तथा परिवार में बहुत सी परेशानीयां छोड़ कर गए (२ शमूएल १२:१०)।

   पाप के द्वारा जीवन में होने वाली अवश्यंभावी क्षति के प्रति हम सचेत रहें और पाप को हलके में ना लें। जो पाप हो गए हैं उनके लिए पश्चाताप कर के और प्रभु यीशु से क्षमा मांग कर आगे को उसकी आज्ञाकारिता में रहें और अपने जीवनों में पाप को अवसर ना दें। - डेव ब्रैनन


हमारे पाप क्षमा होकर मिटाए जा सकते हैं, परन्तु उनके प्रभाव हमें भोगने होंगे।

इसलिये अब तलवार तेरे घर से कभी दूर न होगी, क्योंकि तू ने मुझे तुच्छ जानकर हित्ती ऊरिय्याह की पत्नी को अपनी पत्नी कर लिया है। - २ शमूएल १२:१०

बाइबल पाठ: २ शमूएल १२:१-१४
2Sa 12:1  तब यहोवा ने दाऊद के पास नातान को भेजा, और वह उसके पास जाकर कहने लगा, एक नगर में दो मनुष्य रहते थे, जिन में से एक धनी और एक निर्धन था। 
2Sa 12:2  धनी के पास तो बहुत सी भेड़-बकरियां और गाय बैल थे; 
2Sa 12:3  परन्तु निर्धन के पास भेड़ की एक छोटी बच्ची को छोड़ और कुछ भी न था, और उसको उस ने मोल लेकर जिलाया था। और वह उसके यहां उसके बाल-बच्चों के साथ ही बढ़ी थी; वह उसके टुकड़े में से खाती, और उसके कटोरे में से पीती, और उसकी गोद मे सोती थी, और वह उसकी बेटी के समान थी। 
2Sa 12:4  और धनी के पास एक बटोही आया, और उस ने उस बटोही के लिये, जो उसके पास आया था, भोजन बनवाने को अपनी भेड़-बकरियों वा गाय बैलों में से कुछ न लिया, परन्तु उस निर्धन मनुष्य की भेड़ की बच्ची लेकर उस जन के लिये, जो उसके पास आया था, भोजन बनवाया। 
2Sa 12:5  तब दाऊद का कोप उस मनुष्य पर बहुत भड़का; और उस ने नातान से कहा, यहोवा के जीवन की शपथ, जिस मनुष्य ने ऐसा काम किया वह प्राण दण्ड के योग्य है; 
2Sa 12:6  और उसको वह भेड़ की बच्ची का चौगुणा भर देना होगा, क्योंकि उस ने ऐसा काम किया, और कुछ दया नहीं की। 
2Sa 12:7  तब नातान ने दाऊद से कहा, तू ही वह मनुष्य है। इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यों कहता है, कि मैं ने तेरा अभिशेक करा के तुझे इस्राएल का राजा ठहराया, और मैं ते तुझे शाऊल के हाथ से बचाया; 
2Sa 12:8  फिर मैं ने तेरे स्वामी का भवन तुझे दिया, और तेरे स्वामी की पत्नियां तेरे भाग के लिये दीं; और मैं ने इस्राएल और यहूदा का घराना तुझे दिया था; और यदि यह थोड़ा था, तो मैं तुझे और भी बहुत कुछ देने वाला था। 
2Sa 12:9  तू ने यहोवा की आज्ञा तुच्छ जान कर क्यों वह काम किया, जो उसकी दृष्टि में बुरा है? हित्ती ऊरिय्याह को तू ने तलवार से घात किया, और उसकी पत्नी को अपनी कर लिया है, और ऊरिय्याह को अम्मोनियों की तलवार से मरवा डाला है। 
2Sa 12:10  इसलिये अब तलवार तेरे घर से कभी दूर न होगी, क्योंकि तू ने मुझे तुच्छ जान कर हित्ती ऊरिय्याह की पत्नी को अपनी पत्नी कर लिया है। 
2Sa 12:11  यहोवा यों कहता है, कि सुन, मैं तेरे घर में से विपत्ति उठा कर तुझ पर डालूंगा, और तेरी पत्नियों को तेरे साम्हने लेकर दूसरे को दूंगा, और वह दिन दुपहरी में तेरी पत्नियों से कुकर्म करेगा। 
2Sa 12:12  तू ने तो वह काम छिपा कर किया, पर मैं यह काम सब इस्राएलियों के साम्हने दिन दुपहरी कराऊंगा। 
2Sa 12:13  तब दाऊद ने नातान से कहा, मैं ने यहोवा के विरुद्ध पाप किया है। नातान ने दाऊद से कहा, यहोवा ने तेरे पाप को दूर किया है। तू न मरेगा। 
2Sa 12:14  तौभी तू ने जो इस काम के द्वारा यहोवा के शत्रुओं को तिरस्कार करने का बड़ा अवसर दिया है, इस कारण तेरा जो बेटा उत्पन्न हुआ है वह अवश्य ही मरेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यर्मियाह २०-२१ 
  • २ तिमुथियुस ४

सोमवार, 29 अक्टूबर 2012

झूठ या सच


   स्टीव अकसर अपने सह-कर्मियों के साथ प्रभु यीशु और उद्धार के बारे में बातें करता है। किंतु जब भी वह सीधे परमेश्वर के वचन बाइबल से कोई बात कहता है तो कोई न कोई अवश्य यह कह उठता है कि "जरा ठहरो! किसी भी अन्य पुस्तक के समान यह भी तो मनुष्यों द्वारा ही लिखा गया है।" एक स्थानीय अखबार में छपे संपादक को लिखे पत्र में एक पाठक ने भी यही बात कही; उस पाठक ने लिखा: "मसीही विश्वासी बाइबल को परमेश्वर का वचन और अचूक बताते हैं, लेकिन मुझे कोई ऐसा कारण नहीं दीख पड़ता कि मैं स्वीकार कर लूँ कि बाइबल में मनुष्यों द्वारा लिखे शब्द किसी विज्ञान पत्रिका में लिखे मनुष्यों के शब्दों से अधिक विश्वासयोग्य हैं।"

   जब ऐसी आलोचना और परमेश्वर के वचन को मानव रचना एवं त्रुटिपूर्ण कहकर उसकी उपेक्षा का सामना करना पड़े तो हम मसीही विश्वासी प्रत्युत्तर में क्या कहें? संभव है कि हम में से बहुत से बाइबल के ज्ञाता नहीं हैं, इसलिए हम से कोई उत्तर बन ना पड़े। इसीलिए सबसे पहली आवश्यकता है कि हम परमेश्वर के वचन बाइबल का नियमित रूप से प्रार्थना के साथ अध्ययन करें और बाइबल के इतिहास तथा उससे संबंधित पुरातत्व खोजों के बारे में जानकारी अपने पास रख लें। जब हम ध्यान और नियम से बाइबल का अध्ययन करेंगे (२ तिमुथियुस २:१५) तो हम जानेंगे कि उसका परमेश्वर की प्रेर्णा से लिखा होना स्वयं बाइबल ही का दावा है (२ तिमुथियुस ३:१६) और विश्वासयोग्य है; ऐसा दावा जिसे आज तक कभी कोई गलत साबित नहीं कर पाया है।

   बाइबल से संबंधित थोड़े से तथ्यों पर विचार कीजिए - यह १६०० वर्षों के अन्तराल में लिखी ६६ भिन्न पुस्तकों का संकलन है। ये पुस्तकें ४० लेखकों द्वारा, जिनका सामाजिक और शैक्षिक स्तर बिलकुल भिन्न था, तीन भिन्न भाषाओं में, भिन्न परिस्थितियों में लिखी गईं। ये लेखक किसी दूसरे लेखक की कृति से अनभिज्ञ थे और ना ही उन्हें इस बात का आभास भी था कि कभी उनके द्वार लिखी बात एक पुस्तक के रूप में संकलित होगी। ना ही उनमें से कोई स्वभाव या पेशे लेखक था, वे सब परमेश्वर द्वारा प्रेरित होकर जो परमेश्वर उन्हें बताता गया लिखते गए, और जब उनका कार्य पूरा हो गया तो उनकी लेखनी भी शांत हो गई। बाइबल के प्रथम खंड ’पुराने नियम’ और दूसरे खंड ’नए नियम’ के बीच ४०० वर्षों की शांत अवधि है जब परमेश्वर द्वारा कोई वचन नहीं दिया गया। इतनी भिन्नता के बावजूद इस संकलन की प्रथम पुस्तक ’उत्पत्ति’ से लेकर अन्तिम पुस्तक ’प्रकाशितवाक्य’ तक एक ही वृतांत का वर्णन है, उसमें कोई परसपर विरोधाभास नहीं है और सभी पुस्तकें एक दुसरे की पूरक हैं। यह तभी संभव है जब उनका मानवीय लेखक चाहे जो भी हो, किंतु उन सब का मूल लेखक एक ही हो जो ना केवल बाइबल वरन सृष्टि के आरंभ से अन्त तक सब कुछ जानता हो - अर्थात परमेश्वर।

   यद्यपि हम बाइबल को परमेश्वर का वचन विश्वास द्वारा मानते हैं, तो भी यह कोई अन्ध-विश्वास नहीं है, क्योंकि परमेश्वर का वचन उसे परखने और जांचने का खुला निमंत्रण देता है। जिसने भी खुले और निषपक्ष मन से जांचा है, बाइबल को खरा और विश्वासयोग्य ही पाया है।

   परमेश्वर के वचन का नियमित अध्ययन कीजिए और उसकी आशीषें दूसरों के साथ भी बांटिए और आपका अपना जीवन आशीशों से भरपूर रहेगा। - ऐनी सेटास


बदलते और अस्थिर संसार में आप कभी ना बदलने वाले परमेश्वर के स्थिर और अटल वचन बाइबल पर पूरा भरोसा रख सकते हैं।

अपने आप को परमेश्वर का ग्रहणयोग्य और ऐसा काम करने वाला ठहराने का प्रयत्‍न कर, जो लज्ज़ित होने न पाए, और जो सत्य के वचन को ठीक रीति से काम में लाता हो। - २ तिमुथियुस २:१५

बाइबल पाठ: २ तिमुथियुस ३:१२-१७
2Ti 3:12   पर जितने मसीह यीशु में भक्ति के साथ जीवन बिताना चाहते हैं वे सब सताए जाएंगे। 
2Ti 3:13  और दुष्‍ट, और बहकाने वाले धोखा देते हुए, और धोखा खाते हुए, बिगड़ते चले जाएंगे। 
2Ti 3:14  पर तू इन बातों पर जो तू ने सीखीं हैं और प्रतीति की थी, यह जानकर दृढ़ बना रह कि तू ने उन्‍हें किन लोगों से सीखा था; 
2Ti 3:15  और बालकपन से पवित्र शास्‍त्र तेरा जाना हुआ है, जो तुझे मसीह पर विश्वास करने से उद्धार प्राप्‍त करने के लिये बुद्धिमान बना सकता है। 
2Ti 3:16  हर एक पवित्रशास्‍त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धर्म की शिक्षा के लिये लाभदायक है। 
2Ti 3:17  ताकि परमेश्वर का जन सिद्ध बने, और हर एक भले काम के लिये तत्‍पर हो जाए।

एक साल में बाइबल: 
  • यर्मियाह १८-१९ 
  • २ तिमुथियुस ३

रविवार, 28 अक्टूबर 2012

आपत्काल की तैयारी


   सालों से मैं अपने साथ कार में आपत्काल में प्रयोग करने के सामान को रखता रहा हूँ, परन्तु कभी उसे प्रयोग करने का अवसर कभी नहीं आया। यह सामान मेरी कार में रखे सामान का एक भाग बन गया और इतना सामन्य हो गया कि जब उसे प्रयोग करने का अवसर आया तो मुझे याद भी नहीं रहा कि मेरे पास यह सब सामान है; किंतु सौभाग्यवश मेरी पत्नी को इस सामान का ध्यान रहा।

   हम रात को एक गांव के रास्ते से लौट रहे थे कि हमारी कार एक हिरण से टकराई और क्षतिग्रस्त हो गई। मैं एक छोटी से टॉर्च के सहारे कार को हुई क्षति देखने लगा और कार को गैराज तक ले जाने के लिए खींच कर ले जाने वाली गाड़ी से संपर्क करने का प्रयास करने लगा। मेरी पत्नी ने आपात्कालीन सामान को खोला और दूर से ही दिख जाने वाले संकट सूचक को कार के पास लगाया, फिर सामान में रखी तेज़ रौशनी वाली बड़ी बत्ती जला ली जिस से कार के सर्वेक्षण का मेरा काम आसान हो गया। बाद में हम बात कर रहे थे कि कैसे संकट के समय हम हमारे पास उपलब्ध आपात्कालीन साधनों को प्रयोग करना ही भूल जाते हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने इफिसियों के विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में उन्हें शैतान के हमलों से बचने के विषय में लिखा; पौलुस ने कहा: "परमेश्वर के सारे हथियार बान्‍ध लो कि तुम शैतान की युक्तियों के साम्हने खड़े रह सको" (इफिसीयों ६:११)। उसने उन्हें इन हथियारों का ब्यौरा भी दिया - सच्चाई, धार्मिकता, मेल, विश्वास, उद्धार, प्रार्थना और परमेश्वर का वचन (इफिसीयों ६:१४-१८)। परमेश्वर के ये हथियार एक रक्षा कवच के समान हैं जिन्हें जब हम बांधे रहते हैं तो वे हम मसीही विश्वासियों की रक्षा करते रहते हैं। जब कभी शैतान परमेश्वर और उसके प्रेम में हमारे मसीही विश्वास को डगमगाने और हमें गिराने के प्रयास करे, या कोई आपदा आए, तो इन हथियारों के बारे में स्मरण और मनन तथा इनका उपयोग और भी आवश्यक हो जाता है।

   इस पूरे कवच को पहने रहें और उपयोग करते रहें "इसलिये परमेश्वर के सारे हथियार बान्‍ध लो, कि तुम बुरे दिन में साम्हना कर सको, और सब कुछ पूरा करके स्थिर रह सको" (इफिसीयों ६:१३)। - डेविड मैक्कैसलैंड


रक्षा कवच और हथियार परमेश्वर उपलब्ध कराता है, उन्हें धारण करके उपयोग करना हमारा कार्य है।

इसलिये परमेश्वर के सारे हथियार बान्‍ध लो, कि तुम बुरे दिन में साम्हना कर सको, और सब कुछ पूरा करके स्थिर रह सको। - इफिसीयों ६:१३

बाइबल पाठ: (इफिसीयों ६:१०-१८)
Eph 6:10  निदान, प्रभु में और उस की शक्ति में बलवन्‍त बनो। 
Eph 6:11  परमेश्वर के सारे हथियार बान्‍ध लो कि तुम शैतान की युक्तियों के साम्हने खड़े रह सको। 
Eph 6:12  क्‍योंकि हमारा यह मल्लयुद्ध, लोहू और मांस से नहीं, परन्‍तु प्रधानों से और अधिकारियों से, और इस संसार के अन्‍धकार के हाकिमों से, और उस दुष्‍टता की आत्मिक सेनाओं से है जो आकाश में हैं। 
Eph 6:13  इसलिये परमेश्वर के सारे हथियार बान्‍ध लो, कि तुम बुरे दिन में साम्हना कर सको, और सब कुछ पूरा करके स्थिर रह सको। 
Eph 6:14   सो सत्य से अपनी कमर कसकर, और धार्मीकता की झिलम पहिन कर। 
Eph 6:15   और पांवों में मेल के सुसमाचार की तैयारी के जूते पहिन कर। 
Eph 6:16  और उन सब के साथ विश्वास की ढाल लेकर स्थिर रहो जिस से तुम उस दुष्‍ट के सब जलते हुए तीरों को बुझा सको। 
Eph 6:17   और उद्धार का टोप, और आत्मा की तलवार जो परमेश्वर का वचन है, ले लो। 
Eph 6:18   और हर समय और हर प्रकार से आत्मा में प्रार्थना, और विनती करते रहो, और इसी लिये जागते रहो, कि सब पवित्र लोगों के लिये लगातार विनती किया करो।

एक साल में बाइबल: 
  • यर्मियाह १५-१७ 
  • २ तिमुथियुस २

शनिवार, 27 अक्टूबर 2012

लालच


   चन्द्रमा पर कदम रखने वाले प्रथम मानव नील आर्मस्ट्रौंग को अपनी अंतरिक्ष यात्रा से लौटने के बाद समाचार पत्रों, रेडियो तथा टी.वी. के संवादाताओं और उनसे मिलने की इच्छा रखने वाले बहुत से लोगों की भीड़ के कारण परेशानी रहती थी। इन सबसे बचकर अपने तथा अपने पारिवारिक जीवन की शांति बनाए रहने के लिए वे अपने परिवार सहित एक छोटे से नगर में रहने चले गए। किंतु ख्याति की परेशानी ने उन्हें वहां भी नहीं छोड़ा। आर्मस्ट्रौंग के नाई को पता चला कि कुछ लोग हैं जो इस अंतरिक्ष नायक के बालों के लिए एक अच्छी रकम देने को तैयार हैं; इसलिए उसने आर्मस्ट्रौंगे के बालों को कई बार काटने के बाद उन्हें एकत्रित करके $३००० में एक खरीददार को बेच दिया। आर्मस्ट्रौंग को उस नाई के इस लालच और विश्वासघात से बहुत धक्का लगा।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भी विश्वासघात और बालों के काटे जाने की एक घटना दर्ज है। परमेश्वर ने जन्म से ही शिमशौन को इस्त्राएल का न्यायी होने के इए बुलाया था और उसे नाज़िर ठहराया था, और नाज़िर होने के चिन्ह के लिए शिमशौन को कभी अपने बाल नहीं काटने थे (न्यायियों १३:५)। जब आवश्यक्ता हुई तो परमेश्वर की आत्मा की सामर्थ से उसने अलौकिक शक्ति पाई और इस्त्राएल तथा अपने दुशमनों पलिश्तियों पर विजयी हुआ (न्यायियों १५:१४)। उसे हराने और बन्धुवा बनाने के लिए पलिश्तियों नें एक स्त्री दलीला को नियुक्त किया। दलीला ने उससे प्रेम का नाटक करके उससे शादि करी कि उसकी उस अलौकिक शक्ति का रहस्य जान सके। शिमशौन ने अन्ततः उसकी बातों में आकर अपनी शक्ति का रहस्य अर्थात बालों का ना काटा जाना उसे बता दिया। यह जानने के बाद दलीला ने उसे अपनी गोद में सुलाया और जब वह गहरी नींद में था तो उसके बाल कटवा दिए तथा उसे पलिश्तियों के हाथों दे दिया (न्यायियों १६:५, १९)।

   लालच मनुष्य को एक दुसरे के प्रति ही नहीं, परमेश्वर के प्रति भी विश्वासघाती बना देता है, जैसे प्रभु यीशु के चेले यहूदा इस्करियोती ने तीस चांदी के टुकड़ों के लिए यीशु को मारे जाने के लिए पकड़वा दिया। हम मसीही विश्वासियों को संसार के लाभ और संसार की वस्तुओं को प्राप्त करने के लालच से बचकर अपने उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के प्रति पूरी तरह समर्पित मन, तथा दूसरों के प्रति प्रेम और सहायता का रवैया रखना है। परमेश्वर में विश्वास और संतुष्टि ही हमें लालच से बचाए रख सकती है, और हमें फलता-फूलता कर सकती है क्योंकि "यहोवा की दृष्टि सारी पृथ्वी पर इसलिये फिरती रहती है कि जिनका मन उसकी ओर निष्कपट रहता है, उनकी सहायता में वह अपना सामर्थ दिखाए" (२ इतिहास १६:९)।

   परमेश्वर से सहायता और संसार का लालच एक साथ नहीं हो सकते। - डेनिस फिशर


वफादारी ही सच्चे प्रेम का वास्तविक प्रमाण है।

यहोवा की दृष्टि सारी पृथ्वी पर इसलिये फिरती रहती है कि जिनका मन उसकी ओर निष्कपट रहता है, उनकी सहायता में वह अपना सामर्थ दिखाए। - २ इतिहास १६:९

बाइबल पाठ: न्यायियों १६:४-२१
Jdg 16:4  इसके बाद वह सोरेक नाम नाले में रहने वाली दलीला नाम एक स्त्री से प्रीति करने लगा। 
Jdg 16:5  तब पलिश्तियों के सरदारों ने उस स्त्री के पास जाके कहा, तू उसको फुसला कर बूझ ले कि उसके महाबल का भेद क्या है, और कौन उपाय करके हम उस पर ऐसे प्रबल हों, कि उसे बान्धकर दबा रखें? तब हम तुझे ग्यारह ग्यारह सौ टुकड़े चान्दी देंगे। 
Jdg 16:6  तब दलीला ने शिमशोन से कहा, मुझे बता दे कि तेरे बड़े बल का भेद क्या है, और किसी रीति से कोई तुझे बान्धकर दबा रख सके। 
Jdg 16:7  शिमशोन ने उस से कहा, यदि मैं सात ऐसी नई नई तातों से बान्धा जाऊं जो सुखाई न गई हों, तो मेरा बल घट जाएगा, और मैं साधारण मनुष्य सा हो जाऊंगा। 
Jdg 16:8  तब पलिश्तियों के सरदार दलीला के पास ऐसी नई नई सात तातें ले गए जो सुखाई न गई थीं, और उन से उस ने शिमशोन को बान्धा। 
Jdg 16:9  उसके पास तो कुछ मनुष्य कोठरी में घात लगाए बैठे थे। तब उस ने उस से कहा, हे शिमशोन, पलिश्ती तेरी घात में हैं! तब उस ने तांतों को ऐसा तोड़ा जैसा सन का सूत आग में छूते ही टूट जाता है। और उसके बल का भेद न खुला। 
Jdg 16:10  तब दलीला ने शिमशोन से कहा, सुन, तू ने तो मुझ से छल किया, और झूठ कहा है; अब मुझे बता दे कि तू किस वस्तु से बन्ध सकता है। 
Jdg 16:11  उस ने उस से कहा, यदि मैं ऐसी नई नई रस्सियों जो किसी काम में न आई हों कस कर बान्धा जाऊं, तो मेरा बल घट जाएगा, और मैं साधारण मनुष्य के समान हो जाऊंगा। 
Jdg 16:12  तब दलीला ने नई नई रस्सियां लेकर और उसको बान्ध कर कहा, हे शिमशोन, पलिश्ती तेरी घात में हैं! कितने मनुष्य तो उस कोठरी में घात लगाए हुए थे। तब उस ने उनको सूत की नाईं अपनी भुजाओं पर से तोड़ डाला। 
Jdg 16:13  तब दलीला ने शिमशोन से कहा, अब तक तू मुझ से छल करता, और झूठ बोलता आया है; अब मुझे बता दे कि तू काहे से बन्ध सकता है? उस ने कहा यदि तू मेरे सिर की सातों लटें ताने में बुने तो बन्ध सकूंगा। 
Jdg 16:14  सो उस ने उसे खूंटी से जकड़ा। तब उस से कहा, हे शिमशोन, पलिश्ती तेरी घात में हैं! तब वह नींद से चौंक उठा, और खूंटी को धरन में से उखाड़ कर उसे ताने समेत ले गया। 
Jdg 16:15  तब दलीला ने उस से कहा, तेरा मन तो मुझ से नहीं लगा, फिर तू क्यों कहता है, कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूं? तू ने ये तीनों बार मुझ से छल किया, और मुझे नहीं बताया कि तेरे बड़े बल का भेद क्या है। 
Jdg 16:16  सो जब उस ने हर दिन बातें करते करते उसको तंग किया, और यहां तक हठ किया, कि उसके नाकों में दम आ गया, 
Jdg 16:17  तब उस ने अपने मन का सारा भेद खोल कर उस से कहा, मेरे सिर पर छुरा कभी नहीं फिरा, क्योंकि मैं मां के पेट ही से परमेश्वर का नाजीर हूं, यदि मैं मूढ़ा जाऊं, तो मेरा बल इतना घट जाएगा, कि मैं साधारण मनुष्य सा हो जाऊंगा। 
Jdg 16:18  यह देख कर, कि उस ने अपने मन का सारा भेद मुझ से कह दिया है, दलीला ने पलिश्तियों के सरदारों के पास कहला भेजा, कि अब की बार फिर आओ, क्योंकि उस ने अपने मन का सब भेद मुझे बता दिया है। तब पलिश्तियों के सरदार हाथ में रूपया लिए हुए उसके पास गए। 
Jdg 16:19  तब उस ने उसको अपने घुटनों पर सुला रखा; और एक मनुष्य बुलवाकर उसके सिर की सातों लटें मुण्डवा डालीं। और वह उसको दबाने लगी, और वह निर्बल हो गया। 
Jdg 16:20  तब उस ने कहा, हे शिमशोन, पलिश्ती तेरी घात में हैं! तब वह चौंक कर सोचने लगा, कि मैं पहिले की नाईं बाहर जाकर झटकूंगा। वह तो न जानता था, कि यहोवा उसके पास से चला गया है। 
Jdg 16:21  तब पलिश्तियों ने उसको पकड़ कर उसकी आंखें फोड़ डालीं, और उसे अज्जा को ले जाके पीतल की बेडिय़ों से जकड़ दिया; और वह बन्दीगृह में चक्की पीसने लगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यर्मियाह १२-१४ 
  • २ तिमुथियुस १

शुक्रवार, 26 अक्टूबर 2012

निर्भर


   जब बच्चे कुछ अपने आप करना सीखते हैं और करने लगते हैं, जैसे अपने आप तैयार होना, अपने दांत खुद साफ करना, जूतों के तसमे स्वयं बांधना, साइकिल चलाने लगाना इत्यादि तो माता-पिता आनन्दित होते हैं। हम व्यस्क लोग भी किसी पर निर्भर नहीं होना चाहते; हम अपने खर्चे खुद उठाना चाहते हैं, अपने घरों में रहना चाहते हैं, अपने निर्णय स्वयं लेना चाहते हैं, आदि। यदि अनायास ही कोई चुनौती सामने आ जाती है तो किसी की सहायता लेने से पहले हम उस विषय पर किसी सहायता की पुस्तक पढ़कर मार्ग निकालने के प्रयास करते हैं।

   किंतु संसार की वासत्वकिता इससे उलट है; हम एक ऐसे संसार में जीते और रहते हैं जहां हमें एक दूसरे की सहायता की आवश्यकता होती ही है। एक के कार्य के लिए दुसरे के किसी उत्पाद का प्रयोग करना होता है, एक के स्वास्थ्य लाभ के लिए किसी अन्य की सहायता लेनी पड़ती ही है, एक को बढ़ने और उठने के लिए औरों के सहायक हाथों की आवश्यकता पड़ती ही है। इसीलिए किसी को सहायता देने के लिए तैयार रहना एक सदगुण माना जाता है। परन्तु यह जानते हुए भी, अपने स्वावलंबी होने के स्वभाव को निभाने और उसके साथ ही कार्य करने तथा जीवन बिताने से हम ना केवल औरों से दूर होने लगते हैं वरन हम अनजाने में ही अपने मनों में परमेश्वर से भी दूर होने लगते हैं, उसपर भी निर्भर रहने से कतराने लगते हैं। जबकि इसी निर्भरता की परमेश्वर को अपने लोगों से चाह रहती है। प्रभु यीशु ने अपने चेलों से कहा "...मुझ से अलग होकर तुम कुछ भी नहीं कर सकते" (यूहन्ना १५:५)।

   नॉर्वे के एक धर्मशास्त्री ओले हैलस्बी ने कहा कि "परमेश्वर को ग्रहणयोग्य प्रार्थना का सिद्धांत है निस्सहायता"। जो अपने आप और संसार से जितना निस्सहाय होगा वह उतने ही अधिक सच्चे मन से प्रार्थना करेगा, उसकी प्रार्थना में परमेश्वर से पाने की उतनी ही अधिक लालसा होगी और ऐसी प्रार्थना ही वह प्रार्थना है जिसका उत्तर देने में परमेश्वर प्रसन्न होगा। परन्तु जो अपनी सामर्थ और योग्यता के दंभ में परमेश्वर के पास आएगा, उसकी प्रार्थना में समर्पण की भी कमी होगी और परमेश्वर से पाने की लालसा भी नहीं होगी, इसलिए उसकी प्रार्थना प्रभावी भी नहीं होगी। जैसे हम संसार में एक दुसरे पर निर्भर हैं वैसे ही यह संसार परमेश्वर पर निर्भर है।

   जब बच्चे बड़े होकर माता-पिता पर निर्भर होना कम कर देते हैं तो इसे बड़े होने की निशानी और एक स्वाभाविक बात मान कर माता-पिता स्वीकार तो करते हैं, परन्तु साथ ही उनके दिल में एक कसक भी उठती है। परन्तु परमेश्वर पिता के साथ यह लागू नहीं है। हम कभी उसपर निर्भर होने में कम नहीं हो सकते। यदि हम यह सोचते और मानने लगते हैं कि किसी समय या किसी बात में अब हमें परमेश्वर पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है, तो यह हमारा भ्रम है जो हमें ही नुकसान पहुँचाएगा।

   परमेश्वर पर हर बात और हर विषय में निर्भरता ही जीवन में सफलता की कुंजी है और प्रार्थना उस निर्भरता की घोषणा है। - फिलिप यैन्सी


ऐसे भाव के साथ प्रार्थना करें कि मानो आपका जीवन ही उस प्रार्थना पर निर्भर है। सच मानिए यही सत्य है।

मैं दाखलता हूं: तुम डालियां हो; जो मुझ में बना रहता है, और मैं उस में, वह बहुत फल फलता है, क्‍योंकि मुझ से अलग होकर तुम कुछ भी नहीं कर सकते। - यूहन्ना १५:५

बाइबल पाठ: यूहन्ना १५:१-८
Joh 15:1 सच्‍ची दाखलता मैं हूं, और मेरा पिता किसान है। 
Joh 15:2  जो डाली मुझ में है, और नहीं फलती, उसे वह काट डालता है, और जो फलती है, उसे वह छांटता है ताकि और फले। 
Joh 15:3  तुम तो उस वचन के कारण जो मैं ने तुम से कहा है, शुद्ध हो। 
Joh 15:4  तुम मुझ में बने रहो, और मैं तुम में: जैसे डाली यदि दाखलता में बनी न रहे, तो अपने आप से नहीं फल सकती, वैसे ही तुम भी यदि मुझ में बने न रहो तो नहीं फल सकते। 
Joh 15:5 मैं दाखलता हूं: तुम डालियां हो; जो मुझ में बना रहता है, और मैं उस में, वह बहुत फल फलता है, क्‍योंकि मुझ से अलग होकर तुम कुछ भी नहीं कर सकते। 
Joh 15:6 यदि कोई मुझ में बना न रहे, तो वह डाली की नाई फेंक दिया जाता, और सूख जाता है; और लोग उन्‍हें बटोरकर आग में झोंक देते हैं, और वे जल जाती हैं। 
Joh 15:7  यदि तुम मुझ में बने रहो, और मेरी बातें तुम में बनी रहें तो जो चाहो मांगो और वह तुम्हारे लिये हो जाएगा। 
Joh 15:8  मेरे पिता की महिमा इसी से होती है, कि तुम बहुत सा फल लाओ, तब ही तुम मेरे चेले ठहरोगे।

एक साल में बाइबल: 
  • यर्मियाह ९-११ 
  • १ तिमुथियुस ६

गुरुवार, 25 अक्टूबर 2012

ढोंगी


   मैं अपने बाग़ीचे की सफाई कर रही थी। यद्यपि मैं सावधानी बरत रही थी, तो भी एक विषाक्त बेल के सम्पर्क में आ गई और मेरी खाल पर लाल दाने हो गए जिनमें होने वाले दर्द और खुजली ने मुझे परेशान रखा। यह बेल अन्य बहुत से साधारण से दिखने वाले पौधों के समान ही दिखती है, और कई सुन्दर पौधों के आस-पास उगती है। मेरी एक सहेली समझ नहीं पा रही थी कि जब भी वह अपने गुलाब के पेड़ों की देख-भाल करती है तो उसे यह दाने और खुजली क्यों हो जाते हैं। उसने जब ध्यान से देखा तो पता चला कि उसके प्रीय गुलाब के पौधों में छिपी हुई यह विषाक्त बेल भी थी और उसके द्वारा गुलाबों की प्रेम भरी देख-भाल का भरपूर लाभ ले कर उसे ही परेशान कर रही थी!

   कुछ लोग भी इस विशाक्त बेल के समान होते हैं। वे दिखने में बिलकुल भी हानिकारक प्रतीत नहीं होते, भले लोगों के साथ मिले रहते हैं जैसे वह बेल गुलाब के पौधों में मिली हुई थी, किंतु समय आने पर उन के दुषप्रभाव बहुत परेशानियां उत्पन्न करते हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरितों के कार्यों में एक व्यक्ति शमौन टोना करने वाले का वृतांत है जो इस प्रवृत्ति का अच्छा उदाहरण है। शमौन ने समाज के अन्य लोगों के समान ही प्रभु यीशु के अनुयायी फिलिप्पुस से परमेश्वर के वचन को सुना, उसका अनुसरण किया और बपतिस्मा भी ले लिया। किंतु शीघ्र ही उसका असली चरित्र सामने आ गया जब उसने प्रभु के प्रति समर्पण और प्रभु की सामर्थ को धन कमाने और लोगों पर प्रभाव रखने का साधन बनाना चाहा। पतरस प्रेरित ने उसकी यह भावना देखकर उसे चिताया कि वह पश्चाताप करे नहीं तो विनाश में जाएगा (प्रेरितों ८:२२)।

   कभी कभी लोग एक भली संगति और मण्डली का प्रयोग अपनी स्वार्थ-सिद्धि के लिए करते हैं। वे भले होने का ढोंग करके चर्च के भले लोगों के साथ मिल जाते हैं, उनमें होकर चलते फिरते हैं, किंतु उनका व्यवहार चर्च और समाज दोनो में परेशानी उत्पन्न करता है और मसीही विश्वास की बदनामी का कारण ठहरता है। ये ढोंगी जन दिखते तो अच्छे हैं, परन्तु उनके प्रभाव बहुत हानिकारक होते हैं। जैसे पतरस ने शमौन टोना करने वाले को चिताया, आज भी परमेश्वर ऐसे ढोंगियों को मन फिराने के लिए चिताता है, क्योंकि वह प्रेम करने वाला परमेश्वर है और नहीं चाहता कि कोई भी नाश हो "परमेश्वर यहोवा की यह वाणी है, मेरे जीवन की सौगन्ध, मैं दुष्ट के मरने से कुछ भी प्रसन्न नहीं होता, परन्तु इस से कि दुष्ट अपने मार्ग से फिर कर जीवित रहे" (यहेजकेल ३३:११); वरन यह चाहता है कि सब पश्चाताप करें और बच जाएं, उद्धार पाएं "वह यह चाहता है, कि सब मनुष्यों का उद्धार हो; और वे सत्य को भली भांति पहिचान लें" (१ तिमुथियुस २:४)। - जूली ऐकैरमैन लिंक


एक झूठा जीवन सच्चे विश्वास को व्यर्थ कर देता है।

इसलिये अपनी इस बुराई से मन फिराकर प्रभु से प्रार्थना कर, सम्भव है तेरे मन का विचार क्षमा किया जाए। - प्रेरितों ८:२१

बाइबल पाठ: प्रेरितों ८:९-२३
Act 8:9  इस से पहिले उस नगर में शमौन नाम एक मनुष्य था, जो टोना करके सामरिया के लोगों को चकित करता और अपने आप को कोई बड़ा पुरूष बनाता था; 
Act 8:10  और सब छोटे से बड़े तक उसे मान कर कहते थे, कि यह मनुष्य परमेशवर की वह शक्ति है, जो महान कहलाती है। 
Act 8:11  उस ने बहुत दिनों से उन्‍हें अपने टोने के कामों से चकित कर रखा था, इसी लिये वे उस को बहुत मानते थे। 
Act 8:12  परन्‍तु जब उन्‍होंने फिलप्‍पुस की प्रतीति की जो परमेश्वर के राज्य और यीशु के नाम का सुसमाचार सुनाता था तो लोग, क्‍या पुरूष, क्‍या स्त्री बपतिस्मा लेने लगे। 
Act 8:13  तब शमौन ने आप भी प्रतीति की और बपतिस्मा लेकर फिलप्‍पुस के साथ रहने लगा और चिन्‍ह और बड़े बड़े सामर्थ के काम होते देखकर चकित होता था। 
Act 8:14   जब प्ररितों ने जो यरूशलेम में थे सुना कि सामरियों ने परमेश्वर का वचन मान लिया है तो पतरस और यूहन्ना को उन के पास भेजा। 
Act 8:15  और उन्‍होंने जाकर उन के लिये प्रार्थना की कि पवित्र आत्मा पाएं। 
Act 8:16  क्‍योंकि वह अब तक उन में से किसी पर न उतरा था, उन्‍होंने तो केवल प्रभु यीशु में नाम में बपतिस्मा लिया था। 
Act 8:17  तब उन्‍होंने उन पर हाथ रखे और उन्‍होंने पवित्र आत्मा पाया। 
Act 8:18   जब शमौन ने देखा कि प्ररितों के हाथ रखने से पवित्र आत्मा दिया जाता है, तो उन के पास रूपये लाकर कहा। 
Act 8:19   कि यह अधिकार मुझे भी दो, कि जिस किसी पर हाथ रखूं, वह पवित्र आत्मा पाए। 
Act 8:20  पतरस ने उस से कहा, तेरे रूपये तेरे साथ नाश हों, क्‍योंकि तू ने परमेश्वर का दान रूपयों से मोल लेने का विचार किया। 
Act 8:21  इस बात में न तेरा हिस्‍सा है, न बांटा; क्‍योंकि तेरा मन परमेश्वर के आगे सीधा नहीं। 
Act 8:22   इसलिये अपनी इस बुराई से मन फिरा कर प्रभु से प्रार्थना कर, सम्भव है तेरे मन का विचार क्षमा किया जाए। 
Act 8:23  क्‍योंकि मैं देखता हूं, कि तू पित्त की सी कड़वाहट और अधर्म के बन्‍धन में पड़ा है।

एक साल में बाइबल: 
  • यर्मियाह ६-८ 
  • १ तिमुथियुस ५

बुधवार, 24 अक्टूबर 2012

सुगन्ध


   मुझे अभी भी स्मरण है कि हम कैसे आनन्द के साथ छुट्टी मनाने के लिए एक परिवार के रूप में निकलते थे, किंतु कार की पिछली सीट पर बैठे बच्चों के आपसी झगड़ों के कारण छुट्टी के आनन्द का सारा मज़ा किरकिरा हो जाता था। ऐसा कौन सा परिवार है जो छोटी छोटी और बिना महत्व की बातों पर बच्चों के आपसी झगड़ों, एक दूसरे की शिकायतों, बच्चों की एक दूसरे से तुलना और एक दूसरे के प्रति माता-पिता के प्रेम के आंकलन से दुखी नहीं हुआ होगा?

   यदि आप ऐसे अनुभव से होकर निकले हैं तो आप भली भांति समझ सकेंगे कि हमारे पिता परमेश्वर को कैसा प्रतीत होता है जब उनकी सन्तान उनके प्रेम को संसार में फैलाने की बजाए आपस में लड़ती-झगड़ती है, एक दूसरे से दुर्व्यहार और एक दूसरे की शिकायतें करने में लगी रहती है। हमारा आपस में मेल-मिलाप से रहना परमेश्वर के लिए महत्वपूर्ण है। प्रभु यीशु ने क्रूस पर चढ़ाए जाने के लिए पकड़वाए जाने से पहले अपने वर्तमान और भविष्य के चेलों की आपसी एकमनता के लिए प्रार्थना करी: "मैं केवल इन्‍हीं के लिये बिनती नहीं करता, परन्‍तु उन के लिये भी जो इन के वचन के द्वारा मुझ पर विश्वास करेंगे, कि वे सब एक हों। जैसा तू हे पिता मुझ में हैं, और मैं तुझ में हूं, वैसे ही वे भी हम में हों, इसलिये कि जगत प्रतीति करे, कि तू ने ही मुझे भेजा है" (यूहन्ना १७:२०-२१)। प्रभु यीशु ने आपस में बड़ा-छोटा होने का विवाद करने वाले अपने चेलों को निर्देष भी दिया कि वे परस्पर डाह और विरोध नहीं वरन प्रेम और सेवा-भाव रखें (यूहन्ना १३:३४-३५; मत्ती २०:२०-२८)। जिन सात बातों से परमेश्वर को जी से घृणा है, उनमें से एक है "... भाइयों के बीच में झगड़ा उत्पन्न करने वाला मनुष्य" (नीतिवचन ६:१९)।

   यह अचरज की बात नहीं कि भजनकार ने परमेश्वर की प्रेर्णा से लिखे गए भजन में लिखा है कि जब भाई लोग आपस में मेल-मिलाप से रहते हैं तो "देखो, यह क्या ही भली और मनोहर बात है कि भाई लोग आपस में मिले रहें! यह तो उस उत्तम तेल के समान है, जो हारून के सिर पर डाला गया था, और उसकी दाढ़ी पर बहकर, उसके वस्त्र की छोर तक पहुंच गया" (भजन १३३:१-२)। प्राचीन समयों में अभिषेक के तेल में कई सुगन्धित द्रव्यों को मिश्रित किया जाता था, और इस तेल से अभिषिक्त जन जब कहीं जाता था तो इस विशेष सुगन्ध के द्वारा ही वह पहचान लिया जाता था; उसके पास से आने वाली सुगन्ध जहां भी वह होता था उस स्थान और वहां के वातावरण को सुगन्धित और मनोहर कर देती थी।

   हम मसीही विश्वासियों का यही प्रयास रहे कि हमारे आपसी प्रेम और सेवा-भाव की सुगन्ध ना केवल हमारे परिवार और चर्च को महकाए वरन हमारे समाज और कार्य-स्थल को भी मसीह के प्रेम की सुगन्ध से भर दे। - जो स्टोवैल


जो मसीही विश्वासी प्रेम और मेल-मिलाप में रहते हैं उन से मसीह यीशु की सुगन्ध फैलती रहती है।

देखो, यह क्या ही भली और मनोहर बात है कि भाई लोग आपस में मिले रहें! - भजन १३३:१

बाइबल पाठ: भजन १३३:१-३; २ कुरिन्थियों २:१४-१६
Psa 133:1  देखो, यह क्या ही भली और मनोहर बात है कि भाई लोग आपस में मिले रहें! 
Psa 133:2  यह तो उस उत्तम तेल के समान है, जो हारून के सिर पर डाला गया था, और उसकी दाढ़ी पर बहकर, उसके वस्त्र की छोर तक पहुंच गया। 
Psa 133:3  वह हेर्मोन् की उस ओस के समान है, जो सिरयोन के पहाड़ों पर गिरती है! यहोवा ने तो वहीं सदा के जीवन की आशीष ठहराई है।
2Co 2:14  परन्‍तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो मसीह में सदा हम को जय के उत्‍सव में लिये फिरता है, और अपने ज्ञान का सुगन्‍ध हमारे द्वारा हर जगह फैलाता है। 
2Co 2:15  क्‍योंकि हम परमेश्वर के निकट उद्धार पाने वालों, और नाश होने वालों, दोनो के लिये मसीह के सुगन्‍ध हैं। 
2Co 2:16  कितनों के लिये तो मरने के निमित्त मृन्यु की गन्‍ध, और कितनों के लिये जीवन के निमित्त जीवन की सुगन्‍ध, और इन बातों के योग्य कौन है?

एक साल में बाइबल: 
  • यर्मियाह ३-५ 
  • १ तिमुथियुस ४