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सोमवार, 10 दिसंबर 2012

चुनाव


   परमेश्वर के वचन बाइबल से लिए गए कुछ वाक्यांशों पर विचार कीजिए: "...सब मूढ़ झगड़ने को तैयार होते हैं" (नीतिवचन २०:३); "...दुष्टों का नाम मिट जाता है" (नीतिवचन १०:७); "...वह पशु सरीखा है" (नीतिवचन १२:१)। क्या परमेश्वर प्रेम और दया का परमेश्वर नहीं है? क्या परमेश्वर के वचन में किसी को मूढ़, दुष्ट या पशु सरीखा कहना उचित है?

   जी हां, वास्तव में परमेश्वर प्रेम है, दया और करुणा से भरा हुआ है। उसने इस संसार की सृष्टि करी और उसमें आनन्द और संतुष्टि के बहुत अवसर और साधन भी दिए हैं। परन्तु साथ ही परमेश्वर हमें यह भी स्मरण दिलाता है कि अपने प्रेम में वह हमारी मूर्खताओं और बुद्धिहीन कार्यों को नज़रांदाज़ नहीं करता है। नीतिवचन से लिए गए ऊपर लिखे पद हमें स्मरण दिलाते हैं कि परमेश्वर प्रेम तो है, किंतु साथ ही हमसे बहुत आशाएं भी रखता है और जो व्यक्ति उसके मार्गों को तजकर, जानबूझकर पाप से खेलेते हैं वे अपने ऊपर परेशानीयां लाते हैं, उनके लिए जीवन कठोर भी हो जाता है।

   नीतिवचन से लिए गए उपरोक्त पदों में प्रयुक्त हर नकारात्मक शब्द का एक सकारात्मक प्रतिपक्ष भी उसी पद में दिया गया है - वह सकारात्मक विधि जो परमेश्वर हमारे जीवनों से चाहता है। अब उपरोक्त दिए गए वाक्यांशों के स्थान पर उनके पूर्ण वाक्यों को देखिए और वास्तविक पक्ष-प्रतिपक्ष पर विचार कीजिए: "मुकद्दमें से हाथ उठाना, पुरूष की महिमा ठहरती है; परन्तु सब मूढ़ झगड़ने को तैयार होते हैं" (नीतिवचन २०:३); "धर्मी को स्मरण करके लोग आशीर्वाद देते हैं, परन्तु दुष्टों का नाम मिट जाता है" (नीतिवचन १०:७); "जो शिक्षा पाने में प्रीति रखता है वह ज्ञान से प्रीति रखता है, परन्तु जो डांट से बैर रखता, वह पशु सरीखा है" (नीतिवचन १२:१)।

   जीवन में सदा ही एक चुनाव हमारे समक्ष बना रहता है और हमारा यही चुनाव निर्धारित करता है कि जीवन हमारे लिए कठोर होगा अथवा कोमल। परमेश्वर के वचन के अनुसार जीवन व्यतीत कीजिए और उसकी सम्मति की मुस्कान के साथ सफलता का जीवन बिताईये, या मूर्ख बनकर उसकी अनाज्ञाकारिता में जीवन व्यतीत कीजिए और विनाश के दुख को उठाईये - चुनाव तो आप ही के हाथ में है। परमेश्वर के संसार में जीने के यही कोमल एवं कठोर सत्य हैं। अब आपका चुनाव क्या है? - डेव ब्रैनन


मूर्ख ही पाप के साथ खेलते हैं।

खरे मनुष्य पर दृष्टि कर और धर्मी को देख, क्योंकि मेल से रहने वाले पुरूष का अन्तफल अच्छा है। परन्तु अपराधी एक साथ सत्यानाश किए जाएंगे; दुष्टों का अन्तफल सर्वनाश है। - भजन ३७:३७-३८

बाइबल पाठ: भजन ३७:३०-४०
Psa 37:30  धर्मी अपने मुंह से बुद्धि की बातें करता, और न्याय का वचन कहता है। 
Psa 37:31  उसके परमेश्वर की व्यवस्था उसके हृदय में बनी रहती है, उसके पैर नहीं फिसलते।
Psa 37:32  दुष्ट धर्मी की ताक में रहता है। और उसके मार डालने का यत्न करता है। 
Psa 37:33  यहोवा उसको उसके हाथ में न छोड़ेगा, और जब उसका विचार किया जाए तब वह उसे दोषी न ठहराएगा।
Psa 37:34  यहोवा की बाट जोहता रह, और उसके मार्ग पर बना रह, और वह तुझे बढ़ाकर पृथ्वी का अधिकारी कर देगा; जब दुष्ट काट डाले जाएंगे, तब तू देखेगा।
Psa 37:35  मैं ने दुष्ट को बड़ा पराक्रमी और ऐसा फैलता हुए देखा, जैसा कोई हरा पेड़ अपने निज भूमि में फैलता है। 
Psa 37:36  परन्तु जब कोई उधर से गया तो देखा कि वह वहां है ही नहीं? और मैं ने भी उसे ढूंढ़ा, परन्तु कहीं न पाया।
Psa 37:37  खरे मनुष्य पर दृष्टि कर और धर्मी को देख, क्योंकि मेल से रहने वाले पुरूष का अन्तफल अच्छा है। 
Psa 37:38  परन्तु अपराधी एक साथ सत्यानाश किए जाएंगे; दुष्टों का अन्तफल सर्वनाश है।
Psa 37:39  धर्मियों की मुक्ति यहोवा की ओर से होती है; संकट के समय वह उनका दृढ़ गढ़ है। 
Psa 37:40  और यहोवा उनकी सहायता करके उनको बचाता है; वह उनको दुष्टों से छुड़ाकर उनका उद्धार करता है, इसलिये कि उन्होंने उस में अपनी शरण ली है।

एक साल में बाइबल: 
  • होशे १-४ 
  • प्रकाशितवाक्य १

रविवार, 9 दिसंबर 2012

सफलता का नुस्खा


   मेरे खाना बनाने के प्रति मेरे परिवार की प्रतिक्रिया अधिकांशतः सिकोड़ी हुई नाक और बिचकाए हुए होंठ ही होते हैं, विशेषतः तब जब मैं कोई नए भोजन या विधि को आज़मा रही हूँ। अभी हाल ही में मैंने मैकरोनी और पनीर से खाना बनाने की एक नई विधि अपनाई, जो अप्रत्याशित रूप से सफल रही। मैंने तुरंत उस बनाने की विधि और प्रयुक्त सामग्री को एक कागज़ पर लिख कर संजो कर रख लिया, अन्यथा अगली बार जब मैं वह बनाने का प्रयास करती तो इन संजोए गए निर्देशों की सहायता के बिना उसके बनाने में कुछ न कुछ गड़बड़ ही होती और सब व्यर्थ हो जाता।

   यहोशू को परमेश्वर की ओर से ज़िम्मेवारी मिली थी कि वह इस्त्राएल को वाचा के देश में ले जाकर बसाए। परमेश्वर के निर्देशों और सहायता के बिना यहोशू के लिए यह कार्य संभव नहीं था। परमेश्वर ने यहोशू को यह ज़िम्मेवारी ठीक से निभाने के लिए कुछ आवश्यक निर्देश भी दिए। पहला निर्देश था कि वह हिम्मत बांधकर दृढ़ता से कार्य करे (यहोशू १:६); दूसरा था कि वह परमेश्वर की व्यवस्था की पुस्तक पर लगातार मनन करता रहे और तीसरा निर्देश था कि व्यवस्था की उस पुस्तक की आज्ञाओं के पालन से कभी पीछे ना हटे। जब तक वह इन निर्देशों का पालन करता रहेगा, परमेश्वर उसे सफलता में बनाए रखेगा (यहोशू १:८)।

   परमेश्वर द्वारा यहोशू को दी गई सफलता का यह नुस्खा हमारे लिए भी वैसे ही कार्यकारी हो सकता है जैसे यहोशू के लिए। किंतु इस सफलता का अर्थ धन-संपत्ति, लोकप्रीयता या अच्छा स्वास्थ्य पाना नहीं है। मूल इब्रानी भाषा में जिसमें यह बात लिखी गई थी, ’तू सफल होगा’ का तात्पर्य है ’तु बुद्धिमता से कार्य कर सकेगा या निर्णय ले सकेगा’। जैसे परमेश्वर ने यहोशु को बुद्धिमता से चलने और निर्णय लेने और उसकी योग्यता पाने की बात कही, वैसे ही आज वह हम मसीही विश्वासियों से भी यही आशा रखता है: "इसलिये ध्यान से देखो, कि कैसी चाल चलते हो; निर्बुद्धियों की नाईं नहीं पर बुद्धिमानों की नाईं चलो" (इफीसियों ५:१५)।

   जब हम प्रभु परमेश्वर में अपनी हिम्मत बनाए रखते हैं, उसके वचन पर मनन करते रहते हैं और उसकी आज्ञाकारिता में चलते हैं तो सफलता का एक ऐसा नुस्खा हमारे पास होता है जो हमारे अपने किसी भी नुस्खे से अधिक प्रभावी और विश्वासयोग्य है। सफलता के इस नुस्खे को थामे रहें और जीवन में लागू रखें। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परमेश्वर के वचन की आज्ञाकारिता ही जीवन में सफलता की कुंजी है।

व्यवस्था की यह पुस्तक तेरे चित्त से कभी न उतरने पाए, इसी में दिन रात ध्यान दिए रहना, इसलिये कि जो कुछ उस में लिखा है उसके अनुसार करने की तू चौकसी करे; क्योंकि ऐसा ही करने से तेरे सब काम सफल होंगे, और तू प्रभावशाली होगा। - यहोशू १:८

बाइबल पाठ: यहोशू १:१-९
Jos 1:1  यहोवा के दास मूसा की मृत्यु के बाद यहोवा ने उसके सेवक यहोशू से जो नून का पुत्र था कहा, 
Jos 1:2  मेरा दास मूसा मर गया है; सो अब तू उठ, कमर बान्ध, और इस सारी प्रजा समेत यरदन पार होकर उस देश को जा जिसे मैं उनको अर्थात इस्राएलियों को देता हूं। 
Jos 1:3 उस वचन के अनुसार जो मैं ने मूसा से कहा, अर्थात जिस जिस स्थान पर तुम पांव धरोगे वह सब मैं तुम्हे दे देता हूं। 
Jos 1:4  जंगल और उस लबानोन से लेकर परात महानद तक, और सूर्यास्त की ओर महासमुद्र तक हित्तियों का सारा देश तुम्हारा भाग ठहरेगा। 
Jos 1:5  तेरे जीवन भर कोई तेरे साम्हने ठहर न सकेगा; जैसे मैं मूसा के संग रहा वैसे ही तेरे संग भी रहूंगा, और न तो मैं तुझे धोखा दूंगा, और न तुझ को छोडूंगा। 
Jos 1:6  इसलिये हियाव बान्धकर दृढ़ हो जा; क्योंकि जिस देश के देने की शपथ मैं ने इन लोगों के पूर्वजों से खाई थी उसका अधिकारी तू इन्हें करेगा। 
Jos 1:7  इतना हो कि तू हियाव बान्धकर और बहुत दृढ़ हो कर जो व्यवस्था मेरे दास मूसा ने तुझे दी है उन सब के अनुसार करने में चौकसी करना; और उस से न तो दहिने मुड़ना और न बांए, तब जहां जहां तू जाएगा वहां वहां तेरा काम सफल होगा। 
Jos 1:8  व्यवस्था की यह पुस्तक तेरे चित्त से कभी न उतरने पाए, इसी में दिन रात ध्यान दिए रहना, इसलिये कि जो कुछ उस में लिखा है उसके अनुसार करने की तू चौकसी करे; क्योंकि ऐसा ही करने से तेरे सब काम सफल होंगे, और तू प्रभावशाली होगा। 
Jos 1:9  क्या मैं ने तुझे आज्ञा नहीं दी? हियाव बान्धकर दृढ़ हो जा; भय न खा, और तेरा मन कच्चा न हो; क्योंकि जहां जहां तू जाएगा वहां वहां तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे संग रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • दानिय्येल ११-१२ 
  • यहूदा

शनिवार, 8 दिसंबर 2012

घमण्ड या नम्रता


   सुप्रसिद्ध प्रचारक ड्वाईट मूडी ने कहा था, "जब कोई मनुष्य यह समझने लगे कि उसके पास बहुत सामर्थ है और वह अपने आप पर घमंड करने लगे तो समझ लीजिए कि वह नाश के कगार पर पहुँच गया है। हो सकता है कि उसका विनाश प्रगट होने में कुछ समय या कुछ वर्ष लग जाएं, किंतु घमंड के साथ ही विनाश की प्रक्रिया उसके जीवन में आरंभ हो गई है।" यही बात राजा उज़्ज़ियाह के जीवन में हुई।

   राजा उज़्ज़ियाह के जीवन में सब कुछ बहुत भला प्रतीत हो रहा था। वह आज्ञाकारी था, परामर्शदाताओं से मिले आत्मिक निर्देशों का पालन करता था, अपने शासन के अधिकांश काल में परमेश्वर की इच्छा और मार्गदर्शन का खोजी रहता था। जब तक वह परमेश्वर से सहायता मांगता रहा, परमेश्वर उसे सहायता देता और बढ़ता रहा, जो उज़्ज़ियाह की अनेक महान उपलब्धियों से विदित है (२ इतिहास २६:३-१५)।

   राजा उज़्ज़ियाह का जीवन बड़ी सामर्थ और सफलता की कहानी था, तब तक जब तक कि उसके घमंड ने उसे अन्धा नहीं कर दिया। परमेश्वर के वचन बाइबल में २ इतिहास २६:१६-१९ में हम पाते हैं कि उसका घमंड कई रूप में प्रकट हुआ: उसने परमेश्वर द्वारा स्थापित विधि का उल्लंघन करा और परमेश्वर कि वेदी पर धूप जलाई, जो केवल याजकों (पुरोहितों) के लिए निर्धारित था, और वेदी की पवित्रता को चुनौती दी (पद १६)। उसने परमेश्वर की सामर्थ को भला तथा उपयोगी किंतु अपने जीवन के लिए अनिवार्य नहीं माना (पद ५; १६)। उसने धार्मिक सलाह तथा चेतावनी की अवहेलना करी; पश्चाताप के लिए दिए गए अवसर को तुच्छ जाना और अपने पाप के दण्ड का भय मानने की बजाए उसे अन्देखा किया (पद १८-१९)। परिणाम जीवन भर का दुख और राजा होने के पद से गिराया जाना हुआ।

   जब परमेश्वर हमारे जीवन के किसी क्षेत्र में हमें सफलता दे, तब हम अपनी सफलता के स्त्रोत को कभी ना भूलें। यही वह समय होता है जब हमें नम्र बने रहने की सबसे अधिक आवश्यकता होती है और घमंड द्वारा अन्धे होकर कुछ अनुचित करने का सबसे अधिक प्रलोभन। परमेश्वर का वचन सिखाता है कि: "...इस कारण यह लिखा है, कि परमेश्वर अभिमानियों से विरोध करता है, पर दीनों पर अनुग्रह करता है। इसलिये परमेश्वर के आधीन हो जाओ, और शैतान का साम्हना करो, तो वह तुम्हारे पास से भाग निकलेगा" (याकूब ४:६-७)।

   जीवन में परमेश्वर के अनुग्रह से मिली सफलता का स्वागत नम्रता के साथ करें, घमण्ड को कोई स्थान ना दें। - मार्विन विलियम्स


जब हम विनम्र होकर झुकते हैं, परमेश्वर हमें और भी उठाता तथा बढ़ाता है।

परन्तु जब वह सामर्थी हो गया, तब उसका मन फूल उठा; और उस ने बिगड़ कर अपने परमेश्वर यहोवा का विश्वासघात किया... - २ इतिहास २६:१६

बाइबल पाठ: २ इतिहास २६:३-२१
2Ch 26:3  जब उज्जिय्याह राज्य करने लगा, तब वह सोलह वर्ष का था। और यरूशलेम में बावन वर्ष तक राज्य करता रहा, और उसकी माता का नाम यकील्याह था, जो यरूशलेम की थी। 
2Ch 26:4  जैसे उसका पिता अमस्याह, किया करता था वैसा ही उसने भी किया जो यहोवा की दृष्टि में ठीक था। 
2Ch 26:5  और जकर्याह के दिनों में जो परमेश्वर के दर्शन के विषय समझ रखता था, वह परमेश्वर की खोज में लगा रहता था; और जब तक वह यहोवा की खोज में लगा रहा, तब तक परमेश्वर उसको भाग्यवान किए रहा। 
2Ch 26:6  तब उस ने जाकर पलिश्तियों से युद्ध किया, और गत, यब्ने और अशदोद की शहरपनाहें गिरा दीं, और अशदोद के आसपास और पलिश्तियों के बीच में नगर बसाए। 
2Ch 26:7  और परमेश्वर ने पलिश्तियों और गूर्बालवासी, अरबियों और मूनियों के विरुद्ध उसकी सहायता की। 
2Ch 26:8  और अम्मोनी उज्जिय्याह को भेंट देने लगे, वरन उसकी कीर्ति मिस्र के सिवाने तक भी फैल गई, क्योंकि वह अत्यन्त सामर्थी हो गया था। 
2Ch 26:9  फिर उज्जिय्याह ने यरूशलेम में कोने के फाटक और तराई के फाटक और शहरपनाह के मोड़ पर गुम्मट बनवा कर दृढ़ किए। 
2Ch 26:10  और उसके बहुत जानवर थे इसलिये उस ने जंगल में और नीचे के देश और चौरस देश में गुम्मट बनवाए और बहुत से हौद खुदवाए, और पहाड़ों पर और कर्म्मेल में उसके किसान और दाख की बारियों के माली थे, क्योंकि वह खेती किसानी करने वाला था। 
2Ch 26:11  फिर उज्जिय्याह के योद्धाओं की एक सेना थी जिनकी गिनती यीएल मुंशी और मासेयाह सरदार, हनन्याह नामक राजा के एक हाकिम की आज्ञा से करते थे, और उसके अनुसार वह दल बान्धकर लड़ने को जाती थी। 
2Ch 26:12  पितरों के घरानों के मुख्य मुख्य पुरुष जो शूरवीर थे, उनकी पूरी गिनती दो हजार छ: सौ थी। 
2Ch 26:13  और उनके अधिकार में तीन लाख साढ़े सात हजार की एक बड़ी बड़ी सेना थी, जो शत्रुओं के विरुद्ध राजा की सहायता करने को बड़े बल से युद्ध करने वाले थे। 
2Ch 26:14  इनके लिये अर्थात पूरी सेना के लिये उज्जिय्याह ने ढालें, भाले, टोप, झिलम, धनुष और गोफन के पत्थर तैयार किए। 
2Ch 26:15  फिर उस ने यरूशलेम में गुम्मटों और कंगूरों पर रखने को चतुर पुरुषों के निकाले हुए यन्त्र भी बनवाए जिनके द्वारा तीर और बड़े बड़े पत्थर फेंके जाते थे। और उसकी कीर्ति दूर दूर तक फैल गई, क्योंकि उसे अदभुत सहायता यहां तक मिली कि वह सामर्थी हो गया। 
2Ch 26:16  परन्तु जब वह सामर्थी हो गया, तब उसका मन फूल उठा; और उस ने बिगड़ कर अपने परमेश्वर यहोवा का विश्वासघात किया, अर्थात वह धूप की वेदी पर धूप जलाने को यहोवा के मन्दिर में घुस गया। 
2Ch 26:17  और अजर्याह याजक उसके बाद भीतर गया, और उसके संग यहोवा के अस्सी याजक भी जो वीर थे गए। 
2Ch 26:18  और उन्होंने उज्जिय्याह राजा का साम्हना करके उस से कहा, हे उज्जिय्याह यहोवा के लिये धूप जलाना तेरा काम नहीं, हारून की सन्तान अर्थात उन याजकों ही का काम है, जो धूप जलाने को पवित्र किए गए हैं। तू पवित्रस्थान से निकल जा; तू ने विश्वासघात किया है, यहोवा परमेश्वर की ओर से यह तेरी महिमा का कारण न होगा। 
2Ch 26:19  तब उज्जिय्याह धूप जलाने को धूपदान हाथ में लिये हुए झुंझला उठा। और वह याजकों पर झुंझला रहा था, कि याजकों के देखते देखते यहोवा के भवन में धूप की वेदी के पास ही उसके माथे पर कोढ़ प्रगट हुआ। 
2Ch 26:20  और अजर्याह महायाजक और सब याजकों ने उस पर दृष्टि की, और क्या देखा कि उसके माथे पर कोढ़ निकला है ! तब उन्होंने उसको वहां से झटपट निकाल दिया, वरन यह जानकर कि यहोवा ने मुझे कोढ़ी कर दिया है, उस ने आप बाहर जाने को उतावली की। 
2Ch 26:21  और उज्जिय्याह राजा मरने के दिन तक कोढ़ी रहा, और कोढ़ के कारण अलग एक घर में रहता था, वह तो यहोवा के भवन में जाने न पाता था। और उसका पुत्र योताम राजघराने के काम पर नियुक्त किया गया और वह लोगों का न्याय भी करता था।

एक साल में बाइबल: 
  • दानिय्येल ८-१० 
  • ३ यूहन्ना

शुक्रवार, 7 दिसंबर 2012

शान्ति देने वाले


   न्यू यॉर्क के एक मेडिकल कॉलेज ने, उन छात्रों के लिए जो प्रौढ़ लोगों में पाई जाने वाली बीमारियों के विशेषज्ञ बनने की शिक्षा ले रहे थे, एक विशेष कार्यक्रम चलाया। वे छात्र १० दिन तक बुज़ुर्गों के समान ही किसी नर्सिंग होम में दाखिल रहते हैं। इन १० दिनों में वे बुज़ुर्गों द्वारा अनुभव करी जाने वाली कठिनाईयों को स्वयं अनुभव करके उनके कष्टों को समझना सीखते हैं। वे छात्र पहिए वाली कुर्सी को सामन्य लोगों के लिए बने स्थानों में इधर से उधर ले जाने, पलंग से लिफ्ट की सहायता से बाहर निकलने, कुर्सी पर बैठे हुए स्नानगृह में स्नान करने, अन्दर बाहर होने और एक से दूसरे स्थान पर खिसकने आदि का व्यक्तिगत अनुभव लेते हैं। एक छात्र ने अपने इस प्रशिक्षण के समय पहचाना कि कैसे कमरों पर लगी नाम की पट्टियों को यदि थोड़ा नीचा लगाया जाए तो बुज़ुर्गों के लिए उन्हें पढ़ना सरल हो जाएगा, या यदि टी.वी. का रिमोट यदि किसी एक निर्धारित स्थान पर जहां उसे सरलता से देखा और उठाया जा सके रखा जाए तो बुज़र्गों के लिए उसका उपयोग करना कितना सहज हो जाएगा।

   इन प्रतीत होने में छोटी किंतु कुछ लोगों के लिए बड़ी और महत्वपूर्ण बातों की समझ उन छात्रों को अपने व्यक्तिगत अनुभव द्वारा ही संभव होने पाई। संभवतः वे छात्र बुज़ुर्गों की समस्याओं की पूरी समझ ना भी लेने पाएं, परन्तु जो वे अनुभव करते और सीखते हैं, उसके द्वारा अपनी शिक्षा कार्यक्रम के पूरा करने के बाद उन्हें बुज़ुर्गों की सेवा करने में सहायता मिलेगी, वे उन प्रौढ़ लोगों की मजबूरियों और समस्याओं की बेहतर समझ रख सकेंगे।

   इसी प्रकार, जब हम कठिनाइयों और समस्याओं मे पड़ते हैं और परमेश्वर उनमें हमारी सहायता करके हमें उन से निकालता है तो वह यह भी चाहता है कि हम दूसरों की कठिनाईयों और समस्याओं की समझ रखें और उनकी सहायता करने वाले बने। परमेश्वर ने अपने वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस द्वारा लिखवाया: "हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर, और पिता का धन्यवाद हो, जो दया का पिता, और सब प्रकार की शान्‍ति का परमेश्वर है। वह हमारे सब क्‍लेषों में शान्‍ति देता है; ताकि हम उस शान्‍ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्‍हें भी शान्‍ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्‍लेष में हों" (२ कुरिन्थियों १:३-४)।

   अपनी समस्याओं और कठिनाईयों को अपनी उन्नति की सीढ़ीयाँ बनाएं; उन से प्राप्त होने वाली शिक्षाओं को दूसरों को उनके क्लेषों में शान्ति और सांत्वना देने के लिए प्रयोग करें। स्मरण रखें, लोगों के जीवनों में छोटी छोटी बातों का भी बड़ा महत्व होता है। - ऐनी सेटास


परमेश्वर हमें आरामतलब होने के लिए शान्ति नहीं देता, वरन इसलिए कि हम दूसरों को शान्ति देने वाले हों।

हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर, और पिता का धन्यवाद हो, जो दया का पिता, और सब प्रकार की शान्‍ति का परमेश्वर है। वह हमारे सब क्‍लेषों में शान्‍ति देता है; ताकि हम उस शान्‍ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्‍हें भी शान्‍ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्‍लेष में हों। - २ कुरिन्थियों १:३-४

बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों १:३-७
2Co 1:1  पौलुस की ओर से जो परमेश्वर की इच्‍छा से मसीह यीशु का प्रेरित है, और भाई तीमुथियुस की ओर से परमेश्वर की उस कलीसिया के नाम जो कुरिन्थुस में है; और सारे अखया के सब पवित्र लोगों के नाम।
2Co 1:2  हमारे पिता परमेश्वर और प्रभु यीशु मसीह की ओर से अनुग्रह और शान्‍ति मिलती रहे।
2Co 1:3  हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर, और पिता का धन्यवाद हो, जो दया का पिता, और सब प्रकार की शान्‍ति का परमेश्वर है। 
2Co 1:4  वह हमारे सब क्‍लेषों में शान्‍ति देता है, ताकि हम उस शान्‍ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्‍हें भी शान्‍ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्‍लेष में हों। 
2Co 1:5  क्‍योंकि जैसे मसीह के दुख हम को अधिक होते हैं, वैसे ही हमारी शान्‍ति भी मसीह के द्वारा अधिक होती है। 
2Co 1:6  यदि हम क्‍लेष पाते हैं, तो यह तुम्हारी शान्‍ति और उद्धार के लिये है और यदि शान्‍ति पाते हैं, तो यह तुम्हारी शान्‍ति के लिये है; जिस के प्रभाव से तुम धीरज के साथ उन क्‍लेषों को सह लेते हो, जिन्‍हें हम भी सहते हैं। 
2Co 1:7  और हमारी आशा तुम्हारे विषय में दृढ़ है; क्‍योंकि हम जानते हैं, कि तुम जैसे दुखों के वैसे ही शान्‍ति के भी सहभागी हो।

एक साल में बाइबल: 
  • दानिय्येल ५-७ 
  • २ यूहन्ना

गुरुवार, 6 दिसंबर 2012

परिवर्तन


   अमेरीकी गुप्त सेवा (United States Secret Service) का गठन सन १८६५ में नकली मुद्रा बनाने वालों से अमेरीकी मुद्रा - डॉलर, और अमेरीकी आर्थिक व्यवस्था की रक्षा करने के लिए हुआ था। एक निश्चित उद्देश्य से स्थापित इस कानून तथा देश की रखवाली करने वाली संस्था के उद्देश्यों में १९०२ में परिवर्तन किया गया। यद्यपि अब इस संस्था के कार्य अनेक प्रकार के हैं किंतु आज वे मुख्यतः अमेरीकी राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए जाने जाते हैं। उनके कार्यों और ज़िम्मेदारियों में यह एक अति महत्वपूर्ण दिशा परिवर्तन था।

   किंतु थिस्सलुनीकियों के मसीही विश्वासियों के जीवन में आए, और प्रत्येक मसीही विश्वासी के जीवन में मसीही विश्वास में आने से होने वाले परिवर्तन के सामने यह कुछ भी नहीं है। मसीही विश्वास द्वारा जीवन में होने वाले परिवर्तन के प्रभाव दूर दूर तक लोगों को दिखाई देते हैं, जैसे थिस्सलुनीकियों के विश्वासियों के जीवन में दिखाई दिए। प्रेरित पौलुस ने उन्हें लिखी अपनी पत्री में उनके विश्वास और संमर्पण की सराहना करते हुए उन्हें लिखा: "यहां तक कि मकिदुनिया और अखया के सब विश्वासियों के लिये तुम आदर्श बने। क्‍योंकि तुम्हारे यहां से न केवल मकिदुनिया और अखया में प्रभु का वचन सुनाया गया, पर तुम्हारे विश्वास की जो परमेश्वर पर है, हर जगह ऐसी चर्चा फैल गई है, कि हमें कहने की आवश्यकता ही नहीं। क्‍योंकि वे आप ही हमारे विषय में बताते हैं कि तुम्हारे पास हमारा आना कैसा हुआ; और तुम क्‍योंकर मूरतों से परमेश्वर की ओर फिरे ताकि जीवते और सच्‍चे परमेश्वर की सेवा करो" (१ थिस्सलुनीकियों १:७-९)।

   थिस्सलुनीकियों के विश्वासियों के जीवनों में आया यह परिवर्तन अद्भुत था - उन्होंने मूरतों को पूजना छोड़कर जीवते सच्चे परमेश्वर में विश्वास किया, प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और विश्वास द्वारा परमेश्वर से अपना व्यक्तिगत संबंध जोड़ा; और इस परिवर्तन से आए प्रभाव तथा बदलाव सब लोगों के सामने विदित थे, यहां तक कि थिस्सलुनीकिए के वे विश्वासी अब अन्य लोगों के लिए आदर्श बन गए।

   क्या आज मसीही विश्वास में आने के बाद हमारे जीवनों में भी ऐसा परिवर्तन लोगों को दिखाई देता है? क्या हमें और हमारे जीवन को देखकर लोग मसीह यीशु की ओर आकर्षित होते हैं? क्या हमारे मसीही विश्वास की चर्चा लोगों को एक भले जीवन के लिए प्रोत्साहित करती है? - बिल क्राउडर


मसीह यीशु के साथ विश्वास द्वारा जुड़ जाना किसी ज्ञान और बुद्धि की बात नहीं वरन मन और जीवन का संपूर्ण परिवर्तन है।

क्‍योंकि वे आप ही हमारे विषय में बताते हैं कि तुम्हारे पास हमारा आना कैसा हुआ; और तुम क्‍योंकर मूरतों से परमेश्वर की ओर फिरे ताकि जीवते और सच्‍चे परमेश्वर की सेवा करो। - १ थिस्सलुनीकियों १:९

बाइबल पाठ: १ थिस्सलुनीकियों १:१-१०
1Th 1:1 पौलुस और सिलवानुस और तीमुथियुस की ओर से थिस्‍सलुनिकियों की कलीसिया के नाम जो परमेश्वर पिता और प्रभु यीशु मसीह में है। अनुग्रह और शान्‍ति तुम्हें मिलती रहे।
1Th 1:2  हम अपनी प्रार्थनाओं में तुम्हें स्मरण करते और सदा तुम सब के विषय में परमेश्वर का धन्यवाद करते हैं। 
1Th 1:3  और अपने परमेश्वर और पिता के साम्हने तुम्हारे विश्वास के काम, और प्रेम का परिश्रम, और हमारे प्रभु यीशु मसीह में आशा की धीरता को लगातार स्मरण करते हैं। 
1Th 1:4  और हे भाइयो, परमेश्वर के प्रिय लोगों हम जानतें हैं, कि तुम चुने हुए हो। 
1Th 1:5 क्‍योंकि हमारा सुसमाचार तुम्हारे पास न केवल वचन मात्र ही में वरन सामर्थ और पवित्र आत्मा, और बड़े निश्‍चय के साथ पहुंचा है; जैसा तुम जानते हो, कि हम तुम्हारे लिये तुम में कैसे बन गए थे। 
1Th 1:6 और तुम बड़े क्‍लेश में पवित्र आ्त्मा के आनन्‍द के साथ वचन को मानकर हमारी और प्रभु की सी चाल चलने लगे। 
1Th 1:7  यहां तक कि मकिदुनिया और अखया के सब विश्वासियों के लिये तुम आदर्श बने। 
1Th 1:8 क्‍योंकि तुम्हारे यहां से न केवल मकिदुनिया और अखया में प्रभु का वचन सुनाया गया, पर तुम्हारे विश्वास की जो परमेश्वर पर है, हर जगह ऐसी चर्चा फैल गई है, कि हमें कहने की आवश्यकता ही नहीं। 
1Th 1:9 क्‍योंकि वे आप ही हमारे विषय में बताते हैं कि तुम्हारे पास हमारा आना कैसा हुआ; और तुम क्‍योंकर मूरतों से परमेश्वर की ओर फिरे ताकि जीवते और सच्‍चे परमेश्वर की सेवा करो। 
1Th 1:10 और उसके पुत्र के स्‍वर्ग पर से आने की बाट जोहते रहो जिसे उस ने मरे हुओं में से जिलाया, अर्थात यीशु की, जो हमें आने वाले प्रकोप से बचाता है।

एक साल में बाइबल: 
  • दानिय्येल ३-४ 
  • १ यूहन्ना ५

बुधवार, 5 दिसंबर 2012

अन्त और अनन्त


   पत्रकार मिच अल्बॉम, ३० सितिंबर २००९ को, मंच पर ९१ वर्षीय अर्नी हारवेल का साक्षात्कार ले रहे थे। अर्नी अमेरीकी खेल जगत के एक बहुत लोकप्रीय व्यक्तित्व रहे थे। उन्होंने ५० वर्ष से भी अधिक का समय खेलों के रेडियों प्रसारण में बिताया था, मुख्यतः वे डेट्रॉइट टाइगर्स नामक बेसबॉल टीम से संबंधित प्रसारण के साथ जुड़े होते थे। खेल जगत से जुड़े उनके समय में उनकी नम्रता, अनुकंपा और प्रेम ने सभी को प्रभावित किया था तथा उन से मिलने वाले प्रत्येक जन पर एक अमिट छाप छोड़ी थी।

   उस साक्षात्कार से कुछ ही पहले अर्नी ने लोगों को बताया था कि वे लाइलाज कैंसर से पीड़ित हैं। किंतु इस साक्षात्कार में हो रहे वार्तालाप में वे नहीं चाहते थे कि लोग उनके बारे में दुखी हों और उनसे सहानुभूति रखें। वरन अर्नी चाहते थे कि वे १९६१ की उस रात्रि और उनके जीवन पर पड़े उसके प्रभावों के बारे में बातचीत करें जब उन्होंने प्रभु यीशु मसीह को अपन निज उद्धारकर्ता स्वीकार किया था। अपने इस अंतिम साक्षात्कार, वार्तालाप और विदाई में उन्होंने अपनी बात का समापन इन शब्दों से किया: "मैं यह तो नहीं जानता कि मेरे पास कितने और दिन बचे हैं, परन्तु मैं यह अवश्य जानता हूँ कि मैं किस की बाहों में जा रहा हूँ और यह भी कि स्वर्ग कितना अद्भुत स्थान होगा।"

   अर्नी को आने वाले उस अति-विशिष्ट का स्पष्ट पूर्वानुमान था क्योंकि वे जानते थे कि उनका जीवन और अनन्त किस के हाथों में सुरक्षित है। वे जानते थे कि परमेश्वर ने उनके लिए एक महिमामय और अनन्त काल का स्थान तैयार कर के रखा हुआ है (यूहन्ना १४:२-३; फिलिप्पियों १:२१-२३), इसीलिए वे मृत्यु का सामना बिना किसी भय और पछतावे के साथ कर सके और मृत्यु के समक्ष भी परमेश्वर की महिमा कर सके।

   क्या मृत्यु से सामना होने पर आपका रवैया भी अर्नी के समान ही होगा? क्या आपको पता है और विश्वास है कि आप संसार से अंतिम विदाई के बाद किसके पास होंगे? क्या संसार से आपकी अंतिम विदाई किसी अनिशचितता और दुख में नहीं, वरन अर्नी के समान ही आपके लिए भी निशचित तौर से अनन्त आनन्द में प्रवेश करने का द्वार ही होगी?

   संसार की हर उपलब्धि के बाद भी एक अन्त है; और उस अन्त के बाद एक अनन्त है। अन्ततः आपके लिए वह अनन्त कहां और कैसा होगा, यही एक मात्र और महत्वपूर्ण प्रश्न रह जाता है जिसका उत्तर प्रत्येक जन को स्वयं ही और इस जीवन में ही तैयार करना होगा। क्या इस एक मात्र और महत्वपूर्ण प्रश्न का उत्तर आपने तैयार कर लिया है? - डेव ब्रैनन


मसीही विश्वासी के लिए मृत्यु का अर्थ है स्वर्ग, आनन्द और अनन्त तक परमेश्वर का साथ।

हे भाइयो, चौकस रहो, कि तुम में ऐसा बुरा और अविश्वासी न मन हो, जो जीवते परमेश्वर से दूर हट जाए। वरन जिस दिन तक आज का दिन कहा जाता है, हर दिन एक दूसरे को समझाते रहो, ऐसा न हो, कि तुम में से कोई जन पाप के छल में आकर कठोर हो जाए। - इब्रानियों ३:१२-१३

बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों ५:६-११
2Co 5:6  सो हम सदा ढाढ़स बान्‍धे रहते हैं और यह जानते हैं कि जब तक हम देह में रहते हैं, तब तक प्रभु से अलग हैं। 
2Co 5:7  क्‍योंकि हम रूप को देख कर नहीं, पर विश्वास से चलते हैं। 
2Co 5:8  इसलिये हम ढाढ़स बान्‍धे रहते हैं, और देह से अलग होकर प्रभु के साथ रहना और भी उत्तम समझते हैं। 
2Co 5:9   इस कारण हमारे मन की उमंग यह है, कि चाहे साथ रहें, चाहे अलग रहें पर हम उसे भाते रहें। 
2Co 5:10 क्‍योंकि अवश्य है, कि हम सब का हाल मसीह के न्याय आसन के साम्हने खुल जाए, कि हर एक व्यक्ति अपने अपने भले बुरे कामों का बदला जो उस ने देह के द्वारा किए हों पाए।
2Co 5:11  सो प्रभु का भय मान कर हम लोगों को समझाते हैं और परमेश्वर पर हमारा हाल प्रगट है; और मेरी आशा यह है, कि तुम्हारे विवेक पर भी प्रगट हुआ होगा।

एक साल में बाइबल: 
  • दानिय्येल १-२ 
  • १ यूहन्ना ४

मंगलवार, 4 दिसंबर 2012

प्रेर्णा तथा परिश्रम


   मेरे दादा तथा नाना, दोनो ही को बागबानी में बहुत रुचि थी, जैसे मेरे अन्य कई मित्रों को भी है। मुझे भी सुन्दर बगीचों में जाना बहुत अच्छा लगाता है; उनसे मुझे प्रेर्णा मिलती है और मेरी भी इच्छा होती है कि मैं भी अपने आंगन में ऐसे ही सुन्दर बगीचे बनाऊं। किंतु मेरी समस्या रहती है बगीचा लगाने की प्रेर्णा पाने से आगे बढ़कर बगीचा लगाने के परिश्रम को करना। मेरे मन में आने वाले अच्छे विचार कार्यान्वित नहीं हो पाते क्योंकि मैं उन्हें वास्तविकता तक लाने की मेहनत नहीं करती, उन के लिए समय नहीं लगाती।

   यही सिद्धांत हमारे आत्मिक जीवनों में भी कार्य करता है। हम कुछ लोगों की गवाही सुन कर, परमेश्वर द्वारा उनके जीवन में किए जा रहे, तथा उन में होकर दूसरों के जीवन में हो रहे अद्भुत कार्यों के बारे में जानकर अचंभित हो सकते हैं। हम एक अच्छा प्रचार सन्देश और अच्छे स्तुति गीत सुनकर और भी अधिक कटिबद्धता से परमेश्वर का अनुसरण करने कि ठान सकते हैं। परन्तु चर्च या सभाग्रह से बाहर आने के बाद वहां किए गए अपने निर्णय को कार्यान्वित करना हमारे लिए कठिन हो जाता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में याकूब की पत्री में ऐसे मसीही विश्वासियों के लिए लिखा गया है कि वे उन लोगों के समान हैं जो दर्पण में अपना स्वाभाविक चेहरा देखते तो हैं परन्तु दिखाई देने वाले विकारों को ठीक करने के लिए कुछ प्रयास नहीं करते; देखने के बाद वे जैसे थे वैसे ही लौट जाते हैं (याकूब १:२३-२४)। वे परमेश्वर का वचन सुनते तो हैं परन्तु उनके जीवनों में वह कार्यकारी नहीं होता। याकूब कहता है कि हमें केवल सुनने वाला ही नहीं वरन कार्य करने वाला भी बनना है।

   जब दूसरों द्वारा हो रहे भले और अद्भुत कार्यों के बारे में केवल सुनने द्वारा मिली प्रेर्णा से आगे बढ़कर हम स्वयं परिश्रम करके कार्य करना आरंभ करते हैं, तब ही हमारे अन्दर बोया गया परमेश्वर के वचन का बीज हमारे जीवनों को सुन्दर और भले आत्मिक फूलों तथा फलों से भरा बगीचा बनाने पाएगा, जो फिर दूसरों के लिए प्रेर्णा स्त्रोत हो सकेगा। - जूली एकैरमैन लिंक


कार्य करने से ही जीवन उन्नति पाता है।

परन्‍तु वचन पर चलने वाले बनो, और केवल सुनने वाले ही नहीं जो अपने आप को धोखा देते हैं। - याकूब १:२२

बाइबल पाठ: याकूब १:१९-२७
Jas 1:19  हे मेरे प्रिय भाइयो, यह बात तुम जानते हो: इसलिये हर एक मनुष्य सुनने के लिये तत्‍पर और बोलने में धीरा और क्रोध में धीमा हो। 
Jas 1:20  क्‍योंकि मनुष्य का क्रोध परमेश्वर के धर्म का निर्वाह नहीं कर सकता है। 
Jas 1:21   इसलिये सारी मलिनता और बैर भाव की बढ़ती को दूर करके, उस वचन को नम्रता से ग्रहण कर लो, जो हृदय में बोया गया और जो तुम्हारे प्राणों का उद्धार कर सकता है। 
Jas 1:22  परन्‍तु वचन पर चलने वाले बनो, और केवल सुनने वाले ही नहीं जो अपने आप को धोखा देते हैं। 
Jas 1:23  क्‍योंकि जो कोई वचन का सुनने वाला हो, और उस पर चलने वाला न हो, तो वह उस मनुष्य के समान है जो अपना स्‍वाभाविक मुंह दर्पण में देखता है। 
Jas 1:24  इसलिये कि वह अपने आप को देख कर चला जाता, और तुरन्‍त भूल जाता है कि मैं कैसा था। 
Jas 1:25  पर जो व्यक्ति स्‍वतंत्रता की सिद्ध व्यवस्था पर ध्यान करता रहता है, वह अपने काम में इसलिये आशीष पाएगा कि सुनकर नहीं, पर वैसा ही काम करता है। 
Jas 1:26   यदि कोई अपने आप को भक्त समझे, और अपनी जीभ पर लगाम न दे पर अपने हृदय को धोखा दे, तो उस की भक्ति व्यर्थ है। 
Jas 1:27  हमारे परमेश्वर और पिता के निकट शुद्ध और निर्मल भक्ति यह है, कि अनाथों और विधवाओं के क्‍लेश में उन की सुधि लें, और अपने आप को संसार से निष्‍कलंक रखें।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल ४७-४८ 
  • १ यूहन्ना ३