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सोमवार, 10 फ़रवरी 2014

दोषपूर्ण और सिद्ध


   एक जाने-पहचाने कलाकार ने एक बार टिप्पणी करी कि उसे चल-चित्रों में दोषपूर्ण चरित्र वाले किरदार निभाना अधिक पसन्द है क्योंकि दर्षक सिद्ध की बजाए दोषपूर्ण चरित्रों के साथ अपने आप को बेहतर जोड़ पाते हैं। हम में से अधिकांश इस बात से सहमत होंगे कि सिद्ध लोगों की बजाए हमें अपूर्ण लोगों को समझना अधिक सरल होता है क्योंकि हम जानते हैं कि हम भी अपूर्ण हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में परमेश्वर ने ऐसे लोगों की कहानियाँ रखवाईं हैं जो ऐसे ही अपूर्ण थे - कोई धोखेबाज़, कोई कमज़ोर, कोई अविश्वासयोग्य तो कोई क्रोधी आदि। याकूब को ही लीजिए, अपने बड़े भाई की आशीषें हथियाने के लिए उसने बुढापे से लगभग अन्धे हो चले अपने पिता से झूठ बोला और अपने पिता तथा बड़े भाई दोनो को धोखा दिया (उत्पत्ति 27:1-29)। फिर गिदौन के बारे में विचार कीजिए जो डरपोक था, लेकिन फिर भी परमेश्वर ने उसे चुना और इस्त्राएलियों के छुटकारे के लिए उसे इस्त्राएलियों का नेतृत्व करने का बीड़ा दिया; गिदौन को विश्वास नहीं हुआ और उसने दो बार परमेश्वर से उसके इस चुनाव और ज़िम्मेदारी दिए जाने की पुष्टि माँगी (न्यायियों 6:39)। और पतरस के विषय में तो हम जानते ही हैं कि वह कैसा बड़बोला था, और कैसे प्रभु से अपनी विश्वासयोग्यता के दावे करने के बाद उसने तीन बार प्रभु यीशु का इन्कार किया (मरकुस 14:66-72)।

   लेकिन इन सब पात्रों की कहानियाँ उनकी इन कमज़ोरियों और अयोग्यता के वर्णनों के साथ ही समाप्त नहीं हो जातीं। बाइबल हमें यह भी दिखाती है कि अपनी इन अपूर्णताओं और दोषों के बावजूद ये सब, और इनके जैसे अनेक अन्य लोग, परमेश्वर के लिए सामर्थी और उपयोगी हुए, परमेश्वर के लिए बड़े बड़े काम किए और अब इन सब के नाम बड़े आदर के साथ परमेश्वर के वचन में सदा सदा के लिए दर्ज हैं। वे लोग ऐसा तब कर पाए जब उन्होंने अपनी अयोग्यताओं की ओर नहीं वरन उन्हें सामर्थ देकर परिपूर्ण बनाने वाले परमेश्वर की ओर देखा और उसपर तथा उसकी योजनाओं और विधियों पर विश्वास किया।

   जैसे वे सब थे, जिन्हें आज हम विश्वास के योद्धा कहते हैं, वैसे ही आज हमारे जीवनों में भी दोष और कमज़ोरियाँ हैं। लेकिन वही परमेश्वर जिसने उनको सामर्थी और पराक्रमी बना दिया था, आज हमें भी वैसे ही अपनी महिमा के लिए उपयोग कर सकते है, यदि हम उसमें अपने विश्वास को दृढ़ करें, उसके आज्ञाकारी बनें और उसके दिखाए मार्ग पर चलते रहें; क्योंकि जैसे प्रेरित पौलुस ने अपने जीवन के अनुभव से लिखा, "और उसने मुझ से कहा, मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है; क्योंकि मेरी सामर्थ निर्बलता में सिद्ध होती है; इसलिये मैं बड़े आनन्द से अपनी निर्बलताओं पर घमण्‍ड करूंगा, कि मसीह की सामर्थ मुझ पर छाया करती रहे" (2 कुरिन्थियों 12:9)। अपनी अविश्वासयोग्यता पर नहीं वरन परमेश्वर की विश्वासयोग्यता पर भरोसा बनाए रखिए। - सिंडी हैस कैसपर


हमारा अपनी कमज़ोरियों को जानना भला है यदि वे हमें परमेश्वर की सामर्थ पर विश्वास करने की ओर ले जाती हैं।

वह थके हुए को बल देता है और शक्तिहीन को बहुत सामर्थ देता है। - यशायाह 40:29

बाइबल पाठ: इब्रानियों 11:32-40
Hebrews 11:32 अब और क्या कहूँ क्योंकि समय नहीं रहा, कि गिदोन का, और बाराक और समसून का, और यिफतह का, और दाऊद का और शामुएल का, और भविष्यद्वक्ताओं का वर्णन करूं। 
Hebrews 11:33 इन्‍होंने विश्वास ही के द्वारा राज्य जीते; धर्म के काम किए; प्रतिज्ञा की हुई वस्तुएं प्राप्त की, सिंहों के मुंह बन्‍द किए। 
Hebrews 11:34 आग की ज्‍वाला को ठंडा किया; तलवार की धार से बच निकले, निर्बलता में बलवन्‍त हुए; लड़ाई में वीर निकले; विदेशियों की फौजों को मार भगाया। 
Hebrews 11:35 स्‍त्रियों ने अपने मरे हुओं को फिर जीवते पाया; कितने तो मार खाते खाते मर गए; और छुटकारा न चाहा; इसलिये कि उत्तम पुनरुत्थान के भागी हों। 
Hebrews 11:36 कई एक ठट्ठों में उड़ाए जाने; और कोड़े खाने; वरन बान्‍धे जाने; और कैद में पड़ने के द्वारा परखे गए। 
Hebrews 11:37 पत्थरवाह किए गए; आरे से चीरे गए; उन की परीक्षा की गई; तलवार से मारे गए; वे कंगाली में और क्‍लेश में और दुख भोगते हुए भेड़ों और बकिरयों की खालें ओढ़े हुए, इधर उधर मारे मारे फिरे। 
Hebrews 11:38 और जंगलों, और पहाड़ों, और गुफाओं में, और पृथ्वी की दरारों में भटकते फिरे। 
Hebrews 11:39 संसार उन के योग्य न था: और विश्वास ही के द्वारा इन सब के विषय में अच्छी गवाही दी गई, तौभी उन्हें प्रतिज्ञा की हुई वस्तु न मिली। 
Hebrews 11:40 क्योंकि परमेश्वर ने हमारे लिये पहिले से एक उत्तम बात ठहराई, कि वे हमारे बिना सिद्धता को न पहुंचे।

एक साल में बाइबल: 

  • गिनती 18-20


रविवार, 9 फ़रवरी 2014

मृत्यु में महिमा


   हम जब जवान और बलवन्त होते हैं तब अकसर यह तो सोचते हैं कि किस प्रकार अपने जीवन से परमेश्वर की महिमा करें, लेकिन क्या हमें यह भी नहीं सोचना चाहिए कि हम अपनी मृत्यु के द्वारा भी परमेश्वर की महिमा करने पाएं?

   पतरस ने तीन बार प्रभु यीशु का इन्कार करा (युहन्ना 18:15-27) लेकिन फिर भी प्रभु यीशु ने उसे अवसर दिया कि वह प्रभु के प्रति अपने प्रेम को बता सके (युहन्ना 21:15-17); तीन बार प्रभु यीशु ने पतरस से पूछा, "क्या तू मुझ से प्रेम करता है?" और फिर तुरंत अनापेक्षित रीति से विषय बदलते हुए प्रभु यीशु ने पतरस से कहा, "मैं तुझ से सच सच कहता हूं, जब तू जवान था, तो अपनी कमर बान्‍धकर जहां चाहता था, वहां फिरता था; परन्तु जब तू बूढ़ा होगा, तो अपने हाथ लम्बे करेगा, और दूसरा तेरी कमर बान्‍धकर जहां तू न चाहेगा वहां तुझे ले जाएगा। उसने इन बातों से पता दिया कि पतरस कैसी मृत्यु से परमेश्वर की महिमा करेगा; और यह कहकर, उस से कहा, मेरे पीछे हो ले" (युहन्ना 21:18-19)। प्रभु यीशु ने पतरस से स्पष्ट कह दिया कि उसके जीवन में वह समय आएगा जब लोग उसे जबरन वहाँ ले जाएंगे जहाँ वह जाना नहीं चाहता, लेकिन मृत्यु की उस अनचाही रीति से भी वह परमेश्वर की महिमा करेगा।

   प्रेरित पौलुस ने भी कहा, "मैं तो यही हादिर्क लालसा और आशा रखता हूं, कि मैं किसी बात में लज्ज़ित न होऊं, पर जैसे मेरे प्रबल साहस के कारण मसीह की बड़ाई मेरी देह के द्वारा सदा होती रही है, वैसा ही अब भी हो चाहे मैं जीवित रहूं या मर जाऊं" (फिलिप्पियों 1:20)। मसीही मण्डली तथा मसीही विश्वासियों के इतिहास को यदि हम देखें तो ना केवल उस आरंभिक मण्डली के सदस्यों को, वरन प्रत्येक काल और स्थान पर मसीह के विश्वासियों को हमेशा ही सताव, क्लेष और संकट से होकर गुज़रना पड़ा है और बहुतों ने अपने विश्वास के लिए प्राण बलिदान करके अपने विश्वास की सार्थकता प्रमाणित करी है, प्रभु के नाम को महिमा दी है।

   यह सौभाग्य केवल हम मसीही विश्वासियों ही को है कि हम ना केवल जीते जी अपने जीवनों से अपने और समस्त संसार के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की महिमा करें, वरन अपनी मृत्यु के द्वारा भी अपने प्रभु को महिमा दे सकें। प्रार्थना में प्रभु से माँगिए कि ना केवल अपने जीवन से वरन अपनी मृत्यु से भी आप प्रभु यीशु की महिमा करने पाएं। - डेविड मैक्कैसलैंड


आप परमेश्वर की अनूठी और अनुपम रचना हैं; अपने जीवन और अपनी मृत्यु, दोनो ही से, जो महिमा आप परमेश्वर को दे सकते हैं, वह कोई और नहीं दे सकता।

तब उन्होंने उस की बात मान ली; और प्रेरितों को बुलाकर पिटवाया; और यह आज्ञा देकर छोड़ दिया, कि यीशु के नाम से फिर बातें न करना। वे इस बात से आनन्‍दित हो कर महासभा के साम्हने से चले गए, कि हम उसके नाम के लिये निरादर होने के योग्य तो ठहरे। - प्रेरितों 5:40-41

बाइबल पाठ: युहन्ना 21:12-19
John 21:12 यीशु ने उन से कहा, कि आओ, भोजन करो और चेलों में से किसी को हियाव न हुआ, कि उस से पूछे, कि तू कौन है? क्योंकि वे जानते थे, कि हो न हो यह प्रभु ही है। 
John 21:13 यीशु आया, और रोटी ले कर उन्हें दी, और वैसे ही मछली भी। 
John 21:14 यह तीसरी बार है, कि यीशु ने मरे हुओं में से जी उठने के बाद चेलों को दर्शन दिए।
John 21:15 भोजन करने के बाद यीशु ने शमौन पतरस से कहा, हे शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्या तू इन से बढ़कर मुझ से प्रेम रखता है? उसने उस से कहा, हां प्रभु तू तो जानता है, कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूं: उसने उस से कहा, मेरे मेमनों को चरा। 
John 21:16 उसने फिर दूसरी बार उस से कहा, हे शमौन यूहन्ना के पुत्र, क्या तू मुझ से प्रेम रखता है? उसने उन से कहा, हां, प्रभु तू जानता है, कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूं: उसने उस से कहा, मेरी भेड़ों की रखवाली कर। 
John 21:17 उसने तीसरी बार उस से कहा, हे शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्या तू मुझ से प्रीति रखता है? पतरस उदास हुआ, कि उसने उसे तीसरी बार ऐसा कहा; कि क्या तू मुझ से प्रीति रखता है? और उस से कहा, हे प्रभु, तू तो सब कुछ जानता है: तू यह जानता है कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूं: यीशु ने उस से कहा, मेरी भेड़ों को चरा। 
John 21:18 मैं तुझ से सच सच कहता हूं, जब तू जवान था, तो अपनी कमर बान्‍धकर जहां चाहता था, वहां फिरता था; परन्तु जब तू बूढ़ा होगा, तो अपने हाथ लम्बे करेगा, और दूसरा तेरी कमर बान्‍धकर जहां तू न चाहेगा वहां तुझे ले जाएगा। 
John 21:19 उसने इन बातों से पता दिया कि पतरस कैसी मृत्यु से परमेश्वर की महिमा करेगा; और यह कहकर, उस से कहा, मेरे पीछे हो ले।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 15-17


शनिवार, 8 फ़रवरी 2014

भला परमेश्वर


   जोएल और लॉरेन ने वॉशिंगटन राज्य से वापस अपने राज्य मिशिगन लौट जाने का निर्णय लिया। जब जाने का दिन आया तो अपने शहर एडमन्ड्स की अन्तिम यादगार के लिए वे अपने मन पसन्द कैफे में गए और वहाँ की कॉफी पी, फिर अपनी पसन्दीदा किताबों की दुकान में जाकर उस शहर के नाम से जुड़े हुए आदर्श वाक्य के दो बड़े स्टिकर खरीदे, और अपनी यात्रा पर निकल पड़े।

   दो सप्ताह और 3000 मील की यात्रा करने के बाद वे मिशिगन राज्य में दाखिल हुए। अपने राज्य में अपनी वापसी की खुशी मनाने और अपनी भूख को मिटाने के लिए उन्होंने किसी रेस्टोरेन्ट का पता पूछा तो मालुम हुआ कि वह कुछ मील पीछे रह गया है और उन्हें उतना वापस लौटना पड़ा। वह एक छोटा किंतु सुन्दर कैफे था, जिसमें एक महिला वेटर्स एम्मा ने उनके लिए प्रबंध किया। एम्मा को यह जानकर बहुत खुशी हुई कि उसके ये दोनों ग्राहक एम्मा के प्रदेश वॉशिंगटन से आए हैं। जब एम्मा ने उन दोनों से उनके शहर का नाम पूछा, और उन्होंने उत्तर दिया ’एडमन्ड्स’ तो एम्मा की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। एम्मा की खुशी को और बढ़ाने के लिए जोएल ने कार से लाकर उसे ’एडमन्ड्स’ शहर के आदर्श वाक्य वाला वह बड़ा सा स्टिकर भेंट किया। जब एम्मा ने उसके बारे में उन से पूछा तो मालुम हुआ कि जिस दुकान से जोएल और लॉरेन ने वह स्टिकर खरीदा था वह एम्मा की माताजी की दुकान थी। वह स्टिकर माँ के हाथों से निकलकर 3000 मील की यात्रा करने के बाद दो अजनबियों के द्वारा बेटी के हाथों तक पहुँच गया था।

   क्या यह सब महज़ एक संयोग है? या फिर यह उस भले परमेश्वर के कार्यों का एक नमूना है जो अपने बच्चों की खुशी के लिए कार्य करता रहता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन नामक पुस्तक में लिखा है: "मनुष्य का मार्ग यहोवा की ओर से ठहराया जाता है..." (नीतिवचन 20:24)। उस भले परमेश्वर के भलाई के कार्यों के लिए आईए उसके प्रति धन्यवादी हों, उसकी आराधना करें। - एनी सेटास


प्रत्येक भला उपहार परमेश्वर पिता से आता है।

यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है, और उसकी करूणा सदा की है। - भजन 136:1

बाइबल पाठ: भजन 100:1-5
Psalms 100:1 हे सारी पृथ्वी के लोगों यहोवा का जयजयकार करो! 
Psalms 100:2 आनन्द से यहोवा की आराधना करो! जयजयकार के साथ उसके सम्मुख आओ! 
Psalms 100:3 निश्चय जानो, कि यहोवा ही परमेश्वर है। उसी ने हम को बनाया, और हम उसी के हैं; हम उसकी प्रजा, और उसकी चराई की भेड़ें हैं।। 
Psalms 100:4 उसके फाटकों से धन्यवाद, और उसके आंगनों में स्तुति करते हुए प्रवेश करो, उसका धन्यवाद करो, और उसके नाम को धन्य कहो! 
Psalms 100:5 क्योंकि यहोवा भला है, उसकी करूणा सदा के लिये, और उसकी सच्चाई पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है।

एक साल में बाइबल: 

  • गिनती 11-14


शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2014

प्रतिफल


   बहुत से व्यवसायों ने अपने व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए अनेक ’इनामी योजनाएं’ चला रखी हैं जिन के अन्तर्गत उनके वफादार ग्राहक इनाम पाते रह सकते हैं। जब भी आप इन व्यवसायों के उत्पाद या सेवाओं का प्रयोग करते हैं तो आपके लिए कुछ अंक एकत्रित हो जाते हैं और इन अंकों को जमा करके आप आगे चल कर अपने अंकों की संख्या के अनुसार अपने लिए उपलब्ध इनामों में से कोई ले सकते हैं। इस प्रकार के प्रतिफलों से आकर्षित हो कर बहुत से लोग केवल एक कंपनी विशेष के उत्पाद अथवा सेवाएं ही प्रयोग करते हैं।

   परमेश्वर के पास भी ’इनामी योजनाएं’ हैं। प्रभु यीशु ने अनेक बार अपने चेलों से कहा कि वह उन्हें उनकी सेवकाई के लिए प्रतिफल देना चाहता है। जो लोग परमेश्वर प्रभु यीशु पर अपने विश्वास के लिए सताए जाते हैं उनसे प्रभु यीशु कहता है: "आनन्‍दित और मगन होना क्योंकि तुम्हारे लिये स्वर्ग में बड़ा फल है इसलिये कि उन्होंने उन भविष्यद्वक्ताओं को जो तुम से पहिले थे इसी रीति से सताया था" (मत्ती 5:12)। प्रभु यीशु के समय के धर्म के अगुवों द्वारा सार्वजनिक रूप से, लोगों को दिखाने के लिए किए गए दान, प्रार्थना और उपवास के विप्रीत प्रभु ने अपने चेलों से कहा कि वे यह सब गुप्त में करें क्योंकि, "...तब तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा" (मत्ती 6:4)। जहाँ तक प्रभु यीशु के प्रति वफादार बने रहने की बात है, तो आज चाहे जो भी कीमत चुकानी पड़े, उसके विश्वासी कभी नुकसान में नहीं रहेंगे - "यीशु ने कहा, मैं तुम से सच कहता हूं, कि ऐसा कोई नहीं, जिसने मेरे और सुसमाचार के लिये घर या भाइयों या बहिनों या माता या पिता या लड़के-बालों या खेतों को छोड़ दिया हो। और अब इस समय सौ गुणा न पाए, घरों और भाइयों और बहिनों और माताओं और लड़के-बालों और खेतों को पर उपद्रव के साथ और परलोक में अनन्त जीवन" (मरकुस 10:29-30)। आज जो कुछ भी हमें प्रभु यीशु के लिए छोड़ना पड़े, उसके प्रतिफल उस सब की तुलना में कहीं अधिक और मूल्यवान होवेंगे।

   लेकिन हम मसीही विश्वासी प्रभु यीशु की सेवकाई इसलिए नहीं करते क्योंकि प्रभु यीशु ने बड़े प्रतिफल हमें देने के लिए रखे हुए हैं। जब प्रभु यीशु ने हमारे पापों के लिए क्रूस पर अपना बलिदान दिया तो हम जिसके योग्य थे उससे कहीं अधिक बढ़कर उसने हमारे लिए किया। इसलिए अब हमारी उसके प्रति वफादारी, उसके प्रति हमारे प्रेम और आदर के कारण है, यह उसके लिए हमारी आराधना है। यह उसकी महानता है कि हमारी इस आराधना और हमारी वफादारी से प्रसन्न होकर, हमें और प्रोत्साहित करने के लिए उसने हमारे लिए प्रतिफल रखे हैं। लेकिन हमें प्रभु यीशु के लिए जीना है, प्रतिफलों के लिए नहीं, जैसे प्रेरित पौलुस ने कहा: "क्योंकि मेरे लिये जीवित रहना मसीह है, और मर जाना लाभ है" (फिलिप्पियों 1:21)। यदि हम अपनी नज़रें सही निशाने पर लगाए रखेंगे, तो जो पाएंगे वह किसी भी इनाम से कहीं बढ़कर होगा। - जो स्टोवैल


इस जीवन में जो कुछ भी प्रभु यीशु के लिए किया जाता है, अनन्त जीवन में उसका प्रतिफल अवश्य मिलेगा।

और जो कुछ तुम करते हो, तन मन से करो, यह समझ कर कि मनुष्यों के लिये नहीं परन्तु प्रभु के लिये करते हो। क्योंकि तुम जानते हो कि तुम्हें इस के बदले प्रभु से मीरास मिलेगी: तुम प्रभु मसीह की सेवा करते हो। कुलुस्सियों 3:23-24

बाइबल पाठ: मत्ती 6:1-6, 16-18
Matthew 6:1 सावधान रहो! तुम मनुष्यों को दिखाने के लिये अपने धर्म के काम न करो, नहीं तो अपने स्‍वर्गीय पिता से कुछ भी फल न पाओगे। 
Matthew 6:2 इसलिये जब तू दान करे, तो अपने आगे तुरही न बजवा, जैसा कपटी, सभाओं और गलियों में करते हैं, ताकि लोग उन की बड़ाई करें, मैं तुम से सच कहता हूं, कि वे अपना फल पा चुके। 
Matthew 6:3 परन्तु जब तू दान करे, तो जो तेरा दाहिना हाथ करता है, उसे तेरा बांया हाथ न जानने पाए। 
Matthew 6:4 ताकि तेरा दान गुप्‍त रहे; और तब तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा।
Matthew 6:5 और जब तू प्रार्थना करे, तो कपटियों के समान न हो क्योंकि लोगों को दिखाने के लिये सभाओं में और सड़कों के मोड़ों पर खड़े हो कर प्रार्थना करना उन को अच्छा लगता है; मैं तुम से सच कहता हूं, कि वे अपना प्रतिफल पा चुके। 
Matthew 6:6 परन्तु जब तू प्रार्थना करे, तो अपनी कोठरी में जा; और द्वार बन्‍द कर के अपने पिता से जो गुप्‍त में है प्रार्थना कर; और तब तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा। 
Matthew 6:16 जब तुम उपवास करो, तो कपटियों की नाईं तुम्हारे मुंह पर उदासी न छाई रहे, क्योंकि वे अपना मुंह बनाए रहते हैं, ताकि लोग उन्हें उपवासी जानें; मैं तुम से सच कहता हूं, कि वे अपना प्रतिफल पा चुके। 
Matthew 6:17 परन्तु जब तू उपवास करे तो अपने सिर पर तेल मल और मुंह धो। 
Matthew 6:18 ताकि लोग नहीं परन्तु तेरा पिता जो गुप्‍त में है, तुझे उपवासी जाने; इस दशा में तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 7-10


गुरुवार, 6 फ़रवरी 2014

स्त्रोत


   मुझे दालचीनी का स्वाद बहुत पसन्द है, इसलिए मैं दालचीनी डालकर बनाए गए सभी व्यनजनों को बहुत चाहता हूँ और बड़े आनन्द से खाता हूँ। दालचीनी एक ऐसा मसाला है जो दूसरी वस्तुओं के स्वाद को बेहतर बना देता है। लेकिन इतने वर्षों से दालचीनी डालकर बनाए गए कितने ही व्यनजनों को खाते रहने के बाद भी कभी मैंने यह नहीं सोचा था कि दालचीनी का स्त्रोत कहाँ है। हाल ही में मुझे श्री लंका की अपनी यात्रा के दौरान पता चला कि सारे संसार में उपलब्ध दालचीनी में से 90% श्री लंका से आती है। इतने वर्षों से दालचीनी के स्वाद का आनन्द लेते रहने के बावजूद मैंने कभी यह नहीं सोचा था कि मेरे उस पसन्दीदा स्वाद का स्त्रोत क्या है!

   अफसोस की बात यह है कि मेरी मसीही जीवन की यात्रा में भी मैं कभी कभी यही रवैया लागू कर लेता हूँ। परमेश्वर ने मुझे बहुत अच्छी पत्नि, पाँच बच्चे और ढेरों नाती-पोते दिए हैं, जो सब मेरे लिए अत्याधिक आनन्द का कारण हैं। उनके बीच में आनन्दित रहते हुए मैं कभी कभी अपने इस आनन्द और अपनी आशीषों के स्त्रोत को भूल जाता हूँ जिसके लिए याकूब ने लिखा: "क्योंकि हर एक अच्छा वरदान और हर एक उत्तम दान ऊपर ही से है, और ज्योतियों के पिता की ओर से मिलता है, जिस में न तो कोई परिवर्तन हो सकता है, ओर न अदल बदल के कारण उस पर छाया पड़ती है" (याकूब 1:17)।

   यदि हम अपने उस स्वर्गीय परमेश्वर पिता के प्रति, जो समस्त सृष्टि और हमारे जीवन का स्त्रोत है, हर बात के लिए धन्यवादी ना बने रहें तो हम कैसे स्वार्थी और कृत्घन ठहरेंगे। परमेश्वर ने अपनी आशीषें हमारे जीवन में बहुतायत से उंडेली हैं, आईए हम भी अपने हृदय और अपना जीवन धन्यवाद के साथ उसे अर्पित कर दें। - बिल क्राउडर


परमेश्वर के प्रति कृतज्ञ होना परमेश्वर को आदर देना है।

क्योंकि यहोवा परमेश्वर सूर्य और ढाल है; यहोवा अनुग्रह करेगा, और महिमा देगा; और जो लोग खरी चाल चलते हैं; उन से वह कोई अच्छा पदार्थ रख न छोड़ेगा। - भजन 84:11

बाइबल पाठ: याकूब 1:12-18
James 1:12 धन्य है वह मनुष्य, जो परीक्षा में स्थिर रहता है; क्योंकि वह खरा निकल कर जीवन का वह मुकुट पाएगा, जिस की प्रतिज्ञा प्रभु ने अपने प्रेम करने वालों को दी है। 
James 1:13 जब किसी की परीक्षा हो, तो वह यह न कहे, कि मेरी परीक्षा परमेश्वर की ओर से होती है; क्योंकि न तो बुरी बातों से परमेश्वर की परीक्षा हो सकती है, और न वह किसी की परीक्षा आप करता है। 
James 1:14 परन्तु प्रत्येक व्यक्ति अपनी ही अभिलाषा में खिंच कर, और फंस कर परीक्षा में पड़ता है। 
James 1:15 फिर अभिलाषा गर्भवती हो कर पाप को जनती है और पाप जब बढ़ जाता है तो मृत्यु को उत्पन्न करता है। 
James 1:16 हे मेरे प्रिय भाइयों, धोखा न खाओ। 
James 1:17 क्योंकि हर एक अच्छा वरदान और हर एक उत्तम दान ऊपर ही से है, और ज्योतियों के पिता की ओर से मिलता है, जिस में न तो कोई परिवर्तन हो सकता है, ओर न अदल बदल के कारण उस पर छाया पड़ती है। 
James 1:18 उसने अपनी ही इच्छा से हमें सत्य के वचन के द्वारा उत्पन्न किया, ताकि हम उस की सृष्‍टि की हुई वस्‍तुओं में से एक प्रकार के प्रथम फल हों।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 4-6


बुधवार, 5 फ़रवरी 2014

अनुसरण


   ग्रीष्म ऋतु की एक खूबसूरत शाम को, एक सुन्दर स्थान पर, कॉलेज समय के मेरे एक मित्र द्वारा प्रस्तुत होने वाले एक संगीत कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए बहुत से लोग आए। वह दिन मेरे उस मित्र का जन्म दिन भी था, इसलिए कार्यक्रम के संचालक ने उपस्थित लोगों यह संकेत दिया कि वे साधारणतया जन्म दिन पर गाए जाने वाले ’हैप्पी बर्थडे’ गीत को गाकर मेरे उस मित्र को मुबारकबाद दें। एक एक करके लोगों ने जन्म दिन का वह गीत गाना आरंभ कर दिया। सब अपने अपने सुर, लय और ताल में गा रहे थे, आपस में किसी का किसी दूसरे से कोई ताल-मेल नहीं था, और परिणाम था कि जो मुबारकबाद का संगीत होना चाहिए था वह शोर बन गया। मेरा मित्र मंच पर आया और उसने सब को वह गीत गाने का एक और अवसर दिया, परन्तु उसके द्वारा दिए गए लय, ताल और सुर में। अब जो गीत गाया गया वह सिद्ध तो नहीं था, परन्तु पहले से कहीं अच्छा था और संगीत जैसा प्रतीत हो रहा था।

   इस घटना ने मुझे पहली शताब्दी की मसीही मण्डली की एक समस्या की याद दिलाई। कुरिन्थुस की मण्डली के लोग किसी एक अगुवे को लेकर एकमत नहीं थे; कोई पौलुस का अनुसरण कर रहा था तो कोई अपुल्लौस का तो कोई किसी और का। इसका परिणाम था मण्डली में फूट और कलह और उनकी आत्मिक उन्नति बाधित हो गई थी। सब अपना अपना सुर और राग गा रहे थे जिससे संगीत नहीं शोर सुनाई दे रहा था। जब लोग किसी एक अगुवे पर एकमत नहीं होते तो परिणाम यही होता है, इसीलिए पौलुस ने उन्हें चिताया कि वे किसी मनुष्य की ओर नहीं वरन प्रभु यीशु की ओर देखें और उसका अनुसरण करें।

   यदि हमें संसार के लोगों को प्रभु यीशु की ओर आकर्षित करना है तो हमारे जीवनों से संसार को प्रभु यीशु में उद्धार और पापों की क्षमा का संगीत सुनाई देना चाहिए ना कि प्रभु के नाम में किया गया शोर। इसके लिए अनिवार्य है कि हम में से प्रत्येक प्रभु यीशु की ओर अपना ध्यान लगाए और उसी का अनुसरण करे, किसी मनुष्य या मत अथवा दल का नहीं। - जूली ऐकैरमैन लिंक


मसीह यीशु के साथ स्वर्बद्ध रहने से सारी मण्डली में ताल मेल रहता है।

हे भाइयो, मैं तुम से यीशु मसीह जो हमारा प्रभु है उसके नाम के द्वारा बिनती करता हूं, कि तुम सब एक ही बात कहो; और तुम में फूट न हो, परन्तु एक ही मन और एक ही मत हो कर मिले रहो। - 1 कुरिन्थियों 1:10

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 3:1-17
1 Corinthians 3:1 हे भाइयों, मैं तुम से इस रीति से बातें न कर सका, जैसे आत्मिक लोगों से; परन्तु जैसे शारीरिक लोगों से, और उन से जो मसीह में बालक हैं। 
1 Corinthians 3:2 मैं ने तुम्हें दूध पिलाया, अन्न न खिलाया; क्योंकि तुम उसको न खा सकते थे; वरन अब तक भी नहीं खा सकते हो। 
1 Corinthians 3:3 क्योंकि अब तक शारीरिक हो, इसलिये, कि जब तुम में डाह और झगड़ा है, तो क्या तुम शारीरिक नहीं? और मनुष्य की रीति पर नहीं चलते? 
1 Corinthians 3:4 इसलिये कि जब एक कहता है, कि मैं पौलुस का हूं, और दूसरा कि मैं अपुल्लोस का हूं, तो क्या तुम मनुष्य नहीं? 
1 Corinthians 3:5 अपुल्लोस क्या है? और पौलुस क्या है? केवल सेवक, जिन के द्वारा तुम ने विश्वास किया, जैसा हर एक को प्रभु ने दिया। 
1 Corinthians 3:6 मैं ने लगाया, अपुल्लोस ने सींचा, परन्तु परमेश्वर ने बढ़ाया। 
1 Corinthians 3:7 इसलिये न तो लगाने वाला कुछ है, और न सींचने वाला, परन्तु परमेश्वर जो बढ़ाने वाला है। 
1 Corinthians 3:8 लगाने वाला और सींचने वाला दानों एक हैं; परन्तु हर एक व्यक्ति अपने ही परिश्रम के अनुसार अपनी ही मजदूरी पाएगा। 
1 Corinthians 3:9 क्योंकि हम परमेश्वर के सहकर्मी हैं; तुम परमेश्वर की खेती और परमेश्वर की रचना हो। 
1 Corinthians 3:10 परमेश्वर के उस अनुग्रह के अनुसार, जो मुझे दिया गया, मैं ने बुद्धिमान राजमिस्री की नाईं नेव डाली, और दूसरा उस पर रद्दा रखता है; परन्तु हर एक मनुष्य चौकस रहे, कि वह उस पर कैसा रद्दा रखता है। 
1 Corinthians 3:11 क्योंकि उस नेव को छोड़ जो पड़ी है, और वह यीशु मसीह है कोई दूसरी नेव नहीं डाल सकता। 
1 Corinthians 3:12 और यदि कोई इस नेव पर सोना या चान्दी या बहुमोल पत्थर या काठ या घास या फूस का रद्दा रखता है। 
1 Corinthians 3:13 तो हर एक का काम प्रगट हो जाएगा; क्योंकि वह दिन उसे बताएगा; इसलिये कि आग के साथ प्रगट होगा: और वह आग हर एक का काम परखेगी कि कैसा है। 
1 Corinthians 3:14 जिस का काम उस पर बना हुआ स्थिर रहेगा, वह मजदूरी पाएगा। 
1 Corinthians 3:15 और यदि किसी का काम जल जाएगा, तो हानि उठाएगा; पर वह आप बच जाएगा परन्तु जलते जलते।
1 Corinthians 3:16 क्या तुम नहीं जानते, कि तुम परमेश्वर का मन्दिर हो, और परमेश्वर का आत्मा तुम में वास करता है? 
1 Corinthians 3:17 यदि कोई परमेश्वर के मन्दिर को नाश करेगा तो परमेश्वर उसे नाश करेगा; क्योंकि परमेश्वर का मन्दिर पवित्र है, और वह तुम हो।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 1-3


मंगलवार, 4 फ़रवरी 2014

वचन और शांति


   लगभग 85 वर्ष पहले हंगरी देश के एक लेखक ने एक लघु-कथा लिखी थी जिसका शीर्षक था ’चेन-लिंक्स’, जिसमें उसने यह विचार दिया था कि संसार में कोई भी दो व्यक्तियों के बीच संबंध की कड़ी में अधिक से अधिक पाँच व्यक्तियों तक की दूरी की कड़ी होती है। यह विचार अब पुनः जागृत किया गया है और इसे अब Six Degrees of Separation अर्थात ’अलगाव के छः स्तर’ कहा जाता है। इस विचार का कोई प्रमाण नहीं है, लेकिन यह हमारा ध्यान इस बात कि ओर खींचती है कि संसार में कुछ ऐसा कार्य कर रहा है जो हमें एक दूसरे के साथ संबंधित करता है, और वह है परमेश्वर की समझ-बूझ और प्रावधान जो उसके वचन में होकर कार्य कर रहे हैं।

   कुछ वर्ष पहले मुझे एक पत्र मिला, जो एक ऐसे व्यक्ति द्वारा लिखा गया था जिसे मैं ना तो जानता था और ना कभी उससे मिला था, और ना ही उससे मेरा कोई संबंध था। उसने मुझे बताया कि मेरे द्वारा मेरे एक मित्र को भेजा गया एक पत्र (जिसे मैंने अपने उस मित्र को उसकी घोर निराशा और परेशानी में प्रोत्साहित करने के लिए लिखा था) उस व्यक्ति तक पहुँच गया था और उस व्यक्ति को उसकी घोर निराशा और परेशानी में उस पत्र से बहुत प्रोत्साहन मिला था। जो पत्र मैंने अपने मित्र को भेजा था, वह उस ने अपने किसी अन्य मित्र को भी दिया, जिसने उसे फिर आगे किसी अन्य मित्र को दे दिया और इस प्रकार एक कड़ी से दूसरी कड़ी जुड़ती चली गई और चलते चलते वह पत्र उस व्यक्ति तक पहुँच गया जिसने मुझे पत्र लिखा था। एक व्यक्ति को दिया गया प्रोत्साहन आगे चलकर ना जाने कितने लोगों के लिए प्रोत्साहन का कारण बन गया।

   यह संभव है कि परमेश्वर की समझ-बूझ में होकर लिखा गया प्रेम का एक छोटा सा सन्देश, परमेश्वर के आत्मा के द्वारा किसी अन्य व्यक्ति के जीवन में अनन्तकालीन प्रभाव ले आए। इसलिए क्या हमें अपने आप को परमेश्वर के वचन से भर नहीं लेना चाहिए और फिर उस वचन को आगे किसी अन्य तक इस प्रार्थना के साथ पहुँचा नहीं देना चाहिए कि परमेश्वर उस वचन को अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए प्रयोग करे (यशायाह 55:11), जिससे वह शांति जो हमने परमेश्वर के वचन से प्राप्त करी है दूसरों को भी प्राप्त हो सके? - डेविड रोपर


जैसे फूल नहीं जानता कि उसकी सुगंध कहाँ क्या प्रभाव ला रही है वैसे ही हम नहीं जानते कि हमारा मसीही प्रेम से भरा व्यवहार कहाँ क्या प्रभाव लाएगा।

क्योंकि परमेश्वर का वचन जीवित, और प्रबल, और हर एक दोधारी तलवार से भी बहुत चोखा है, और जीव, और आत्मा को, और गांठ गांठ, और गूदे गूदे को अलग कर के, वार पार छेदता है; और मन की भावनाओं और विचारों को जांचता है। - इब्रानियों 4:12

बाइबल पाठ: यशायाह 55:8-11
Isaiah 55:8 क्योंकि यहोवा कहता है, मेरे विचार और तुम्हारे विचार एक समान नहीं है, न तुम्हारी गति और मेरी गति एक सी है। 
Isaiah 55:9 क्योंकि मेरी और तुम्हारी गति में और मेरे और तुम्हारे सोच विचारों में, आकाश और पृथ्वी का अन्तर है।
Isaiah 55:10 जिस प्रकार से वर्षा और हिम आकाश से गिरते हैं और वहां यों ही लौट नहीं जाते, वरन भूमि पर पड़कर उपज उपजाते हैं जिस से बोने वाले को बीज और खाने वाले को रोटी मिलती है, 
Isaiah 55:11 उसी प्रकार से मेरा वचन भी होगा जो मेरे मुख से निकलता है; वह व्यर्थ ठहरकर मेरे पास न लौटेगा, परन्तु, जो मेरी इच्छा है उसे वह पूरा करेगा, और जिस काम के लिये मैं ने उसको भेजा है उसे वह सफल करेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 24-27