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सोमवार, 14 जुलाई 2014

दो पाठ


   इस पुस्तिका, Our Daily Bread के लिए नियम पालन करने की आवश्यकता पर लेख लिखने के कुछ ही सप्ताह के अन्दर मुझे इस से संबंधित दो पाठ सीखने को मिले। एक पाठ तो मैंने तब सीखा जब मैं 850 मील गाड़ी चलाने की यात्रा पर निकला; मैंने निश्चय किया कि मैं निर्धारित गति सीमा से अधिक रफतार से गाड़ी नहीं चलाऊँगा। एक छोटे से नगर में से होकर निकलते समय मैं गाड़ी चलाते हुए खाने के प्रयास में सैण्डविच का बाहरी आवरण खोलने लगा और वहाँ लगे गति संबंधी संकेतों पर तथा अपनी गाड़ी की गति पर ध्यान देना भूल गया - परिणाम था मुझे सीमा से अधिक रफतार से गाड़ी चलाने के लिए चालान का भुगतान करना पड़ा। तो मेरा पहला पाठ था कि जानबूझकर गति सीमा का उल्लंघन किया जाय या यह अनजाने में हो जाए, दोनों का परिणाम एक ही होता है! और अभी मुझे 700 मील गाड़ी और चलानी बाकी थी।

   इसके साथ ही जो दूसरा पाठ मैंने सीखा वह था कि हमारे प्रत्येक निर्णय की परीक्षा अवश्य ही होगी। मुझे मूसा द्वारा इस्त्राएलियों को कहे गए शब्द स्मरण हो आए, जब वे वाचा किए हुए देश में प्रवेश करने की तैयारी में थे: "और स्मरण रख कि तेरा परमेश्वर यहोवा उन चालीस वर्षों में तुझे सारे जंगल के मार्ग में से इसलिये ले आया है, कि वह तुझे नम्र बनाए, और तेरी परीक्षा कर के यह जान ले कि तेरे मन में क्या क्या है, और कि तू उसकी आज्ञाओं का पालन करेगा वा नहीं" (व्यस्थाविवरण 8:2)।

   लेखक एवं प्रचारक यूजीन पीटरसन ने मसीह यीशु का अनुकरण करने की प्रक्रिया को "आज्ञाकारिता का एक लंबा मार्ग" कहा है। परमेश्वर के आज्ञाकारी होने के प्रत्येक निर्णय के साथ उस आज्ञाकारिता में बने रहने के अनेक निर्णय करना आवश्यक रहता है। परमेश्वर ने मुझे नम्र किया और सिखाया कि उसके पीछे चलने के लिए कितना महत्वपूर्ण है उसकी आज्ञाकारिता के लिए अपने मन को तैयार करना और मार्ग के संकेतों तथा बातों का ध्यान रखते हुए अपने निर्णय को निभाते रहना। - डेविड मैक्कैसलैंण्ड


परमेश्वर से प्रेम करने का अर्थ है परमेश्वर का आज्ञाकारी होना।

इस बात पर भी तुम ने अपने उस परमेश्वर यहोवा पर विश्वास नहीं किया, जो तुम्हारे आगे आगे इसलिये चलता रहा, कि डेरे डालने का स्थान तुम्हारे लिये ढूंढ़े, और रात को आग में और दिन को बादल में प्रगट हो कर चला, ताकि तुम को वह मार्ग दिखाए जिस से तुम चलो। - व्यस्थाविवरण 1:32-33

बाइबल पाठ: व्यस्थाविवरण 8:1-10
Deuteronomy 8:1 जो जो आज्ञा मैं आज तुझे सुनाता हूं उन सभों पर चलने की चौकसी करना, इसलिये कि तुम जीवित रहो और बढ़ते रहो, और जिस देश के विषय में यहोवा ने तुम्हारे पूर्वजों से शपथ खाई है उस में जा कर उसके अधिकारी हो जाओ। 
Deuteronomy 8:2 और स्मरण रख कि तेरा परमेश्वर यहोवा उन चालीस वर्षों में तुझे सारे जंगल के मार्ग में से इसलिये ले आया है, कि वह तुझे नम्र बनाए, और तेरी परीक्षा कर के यह जान ले कि तेरे मन में क्या क्या है, और कि तू उसकी आज्ञाओं का पालन करेगा वा नहीं। 
Deuteronomy 8:3 उसने तुझ को नम्र बनाया, और भूखा भी होने दिया, फिर वह मन्ना, जिसे न तू और न तेरे पुरखा ही जानते थे, वही तुझ को खिलाया; इसलिये कि वह तुझ को सिखाए कि मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं जीवित रहता, परन्तु जो जो वचन यहोवा के मुंह से निकलते हैं उन ही से वह जीवित रहता है। 
Deuteronomy 8:4 इन चालीस वर्षों में तेरे वस्त्र पुराने न हुए, और तेरे तन से भी नहीं गिरे, और न तेरे पांव फूले। 
Deuteronomy 8:5 फिर अपने मन में यह तो विचार कर, कि जैसा कोई अपने बेटे को ताड़ना देता है वैसे ही तेरा परमेश्वर यहोवा तुझ को ताड़ना देता है। 
Deuteronomy 8:6 इसलिये अपने परमेश्वर यहोवा की आज्ञाओं का पालन करते हुए उसके मार्गों पर चलना, और उसका भय मानते रहना। 
Deuteronomy 8:7 क्योंकि तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे एक उत्तम देश में लिये जा रहा है, जो जल की नदियों का, और तराइयों और पहाड़ों से निकले हुए गहिरे गहिरे सोतों का देश है। 
Deuteronomy 8:8 फिर वह गेहूं, जौ, दाखलताओं, अंजीरों, और अनारों का देश है; और तेलवाली जलपाई और मधु का भी देश है। 
Deuteronomy 8:9 उस देश में अन्न की महंगी न होगी, और न उस में तुझे किसी पदार्थ की घटी होगी; वहां के पत्थर लोहे के हैं, और वहां के पहाड़ों में से तू तांबा खोदकर निकाल सकेगा। 
Deuteronomy 8:10 और तू पेट भर खाएगा, और उस उत्तम देश के कारण जो तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे देगा उसका धन्य मानेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 8-11


रविवार, 13 जुलाई 2014

चींटी


   अपनी पुस्तक, Adventures Among Ants: A Global Safari with a Cast of Trillions में लेखक मार्क मौफैट बचपन से ही चींटियों के प्रति उनके आकर्षण के बारे में बताते हैं। उनका यह आकर्षण आयु बढ़ने के साथ कम नहीं हुआ, वे चींटियों से इतना लगाव रखते थे कि इस विषय पर उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त कर ली और फिर इस विषय पर एक विशेषज्ञ के रूप में सारे संसार में भ्रमण किया। इन छोटे से आकार के जन्तुओं के अध्ययन ने उन्हें इनके मेहनती जीवन के बारे में अद्भुत बातें सिखाई हैं।

   मौफैट द्वारा चींटियों के बारे में अचरज भरी बातें पता लगाने से बहुत पहले परमेश्वर के वचन बाइबल में इन जन्तुओं के कार्य कौशल के बारे में टिप्पणी करी गई है। राजा सुलेमान ने अपने नीतिवचनों में इनका उल्लेख किया है और उनसे शिक्षा लेने को कहा है कि कैसे वे योजनाबद्ध रीति से कार्य करती हैं, समय रहते कठिन समयों के लिए जुटा लेती हैं तथा स्वतः ही अनुशासन में रहकर कार्य करती रहती हैं।

   परमेश्वर ने हमें शिक्षा देने के लिए अपनी सृष्टि में विस्मित कर देने वाली बातें बना कर रखीं हैं। परमेश्वर ने अपनी बातों की शिक्षाओं को भौतिक प्रकृति में प्रदर्शित किया है, और वह चाहता है कि हम चींटी जैसी उसकी छोटी सी रचना से व्यावाहरिक जीवन और आत्मिक महत्व की बड़ी बड़ी बातें सीखें। परमेश्वर का वचन बाइबल और परमेश्वर कि सृष्टि उसके अद्भुत प्रताप की शिक्षाओं से भरे पड़े हैं; आवश्यकता है तो केवल ध्यान से उनका अध्ययन करने की, उन बातों को देखने समझने और पहचानने की। - डेनिस फिशर


परमेश्वर की रची प्रकृति पर ध्यान देने से हम बहुत से महत्वपूर्ण पाठ सीख सकते हैं।

पशुओं से तो पूछ और वे तुझे दिखाएंगे; और आकाश के पक्षियों से, और वे तुझे बता देंगे। पृथ्वी पर ध्यान दे, तब उस से तुझे शिक्षा मिलेगी; ओर समुद्र की मछलियां भी तुझ से वर्णन करेंगी। कौन इन बातों को नहीं जानता, कि यहोवा ही ने अपने हाथ से इस संसार को बनाया है। - अय्युब 12:7-9

बाइबल पाठ: नीतिवचन 6:6-11
Proverbs 6:6 हे आलसी, च्यूंटियों के पास जा; उनके काम पर ध्यान दे, और बुद्धिमान हो। 
Proverbs 6:7 उन के न तो कोई न्यायी होता है, न प्रधान, और न प्रभुता करने वाला, 
Proverbs 6:8 तौभी वे अपना आहार धूपकाल में संचय करती हैं, और कटनी के समय अपनी भोजन वस्तु बटोरती हैं। 
Proverbs 6:9 हे आलसी, तू कब तक सोता रहेगा? तेरी नींद कब टूटेगी? 
Proverbs 6:10 कुछ और सो लेना, थोड़ी सी नींद, एक और झपकी, थोड़ा और छाती पर हाथ रखे लेटे रहना, 
Proverbs 6:11 तब तेरा कंगालपन बटमार की नाईं और तेरी घटी हथियारबन्द के समान आ पड़ेगी।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 4-7


शनिवार, 12 जुलाई 2014

पवित्र आत्मा


   संसार भर में कभी ना कभी सभी लोग एक अदृश्य सामर्थ के नाट्कीय प्रभावों को देखते हैं - आँधी-तूफान और बवंडरों के द्वारा मनुष्य के बनाए हुए ढांचों को तिनकों के समान उड़ते हुए। वायु का यह प्रचण्ड बल किसी को दिखाई नहीं देता, हम केवल उसके प्रभावों को ही देख पाते हैं और उन प्रभावों को देखकर ही उस की वास्तविकता, उस की उपस्थिति तथा उसके बल का आंकलन कर लेते हैं।

   ऐसे ही परमेश्वर के पवित्र आत्मा के विषय में भी है - हम अपनी भौतिक आँखों से उसे देख तो नहीं पाते किंतु उसके द्वारा लोगों के जीवनों में लाए गए परिणामों के द्वारा हम उसके कार्य और सामर्थ को पहचान सकते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरितों के कार्य के दूसरे अध्याय में पवित्र-आत्मा के द्वारा पिन्तेकुस्त के दिन मसीही विश्वासियों के उससे भरे जाने का विवरण दर्ज है: "और एकाएक आकाश से बड़ी आंधी की सी सनसनाहट का शब्द हुआ, और उस से सारा घर जहां वे बैठे थे, गूंज गया" (प्रेरितों 2:2)। यह घटना उन प्रारंभिक मसीही विश्वासियों तथा यरुशलेम के निवासियों के लिए एक प्रत्यक्ष प्रमाण था कि परमेश्वर का पवित्र आत्मा मसीही विश्वासियों के जीवनों में कार्यरत है।

   परमेश्वर का पवित्र आत्मा आज भी हम सभी मसीही विश्वासियों के जीवन में कार्यरत है, इसलिए यदि आप मसीही विश्वासी हैं तो उत्साहित हों और परमेश्वर के कार्यों को पहिचानें। पवित्र आत्मा आपके जीवन में ईश्वरीय गुणों के फल लाता है (गलतियों 5:22-23), सभी मसीही विश्वासियों को एक देह बनाता है (1 कुरिन्थियों 12:13) और सबको परमेश्वर की उपस्थिति का विश्वास दिलाता है (1 यूहन्ना 3:4)।

   परमेश्वर का पवित्र आत्मा हम मसीही विश्वासियों के जीवनों में कार्यरत एक सामर्थी व्यक्ति है; चाहे हम उसे देख नहीं सकते किंतु उसके द्वारा हमारे जीवनों में होने वाले कार्य और प्रभाव उसकी वास्तविकता और सामर्थ की पहचान हैं। - बिल क्राउडर


पवित्र आत्मा अदृश्य किंतु सामर्थी रीति से कार्य करता है।

तब उसने मुझे उत्तर देकर कहा, जरूब्बाबेल के लिये यहोवा का यह वचन है : न तो बल से, और न शक्ति से, परन्तु मेरे आत्मा के द्वारा होगा, मुझ सेनाओं के यहोवा का यही वचन है। हे बड़े पहाड़, तू क्या है? जरूब्बाबेल के साम्हने तू मैदान हो जाएगा; और वह चोटी का पत्थर यह पुकारते हुए आएगा, उस पर अनुग्रह हो, अनुग्रह! - ज़कर्याह 4:6-7

बाइबल पाठ: प्रेरितों 2:1-11
Acts 2:1 जब पिन्‍तेकुस का दिन आया, तो वे सब एक जगह इकट्ठे थे। 
Acts 2:2 और एकाएक आकाश से बड़ी आंधी की सी सनसनाहट का शब्द हुआ, और उस से सारा घर जहां वे बैठे थे, गूंज गया। 
Acts 2:3 और उन्हें आग की सी जीभें फटती हुई दिखाई दीं; और उन में से हर एक पर आ ठहरीं। 
Acts 2:4 और वे सब पवित्र आत्मा से भर गए, और जिस प्रकार आत्मा ने उन्हें बोलने की सामर्थ दी, वे अन्य अन्य भाषा बोलने लगे। 
Acts 2:5 और आकाश के नीचे की हर एक जाति में से भक्त यहूदी यरूशलेम में रहते थे। 
Acts 2:6 जब वह शब्द हुआ तो भीड़ लग गई और लोग घबरा गए, क्योंकि हर एक को यही सुनाईं देता था, कि ये मेरी ही भाषा में बोल रहे हैं। 
Acts 2:7 और वे सब चकित और अचम्भित हो कर कहने लगे; देखो, ये जो बोल रहे हैं क्या सब गलीली नहीं? 
Acts 2:8 तो फिर क्यों हम में से हर एक अपनी अपनी जन्म भूमि की भाषा सुनता है? 
Acts 2:9 हम जो पारथी और मेदी और एलामी लोग और मिसुपुतामिया और यहूदिया और कप्‍पदूकिया और पुन्‍तुस और आसिया। 
Acts 2:10 और फ्रूगिया और पमफूलिया और मिसर और लिबूआ देश जो कुरेने के आस पास है, इन सब देशों के रहने वाले और रोमी प्रवासी, क्या यहूदी क्या यहूदी मत धारण करने वाले, क्रेती और अरबी भी हैं। 
Acts 2:11 परन्तु अपनी अपनी भाषा में उन से परमेश्वर के बड़े बड़े कामों की चर्चा सुनते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 1-3


शुक्रवार, 11 जुलाई 2014

शांति


   फोटोग्राफर ऐन गेडेस ने सोए हुए बच्चों की तस्वीरों को एक कला का रूप दे दिया है। उनके द्वारा ली गई सोए हुए बच्चों की तस्वीरें मुस्कुराहट उत्पन्न करती हैं; आराम से सोए हुए बच्चे की तस्वीर से बढ़कर कुछ और शांति की छवि नहीं हो सकती।

   लेकिन सभी माता-पिता भली-भांति जानते हैं कि बच्चों की देखभाल करना, उन्हें शांत रखना और फिर आराम से सुला देना कितना थका देने वाला और अन्वरत ज़िम्मेदारी का कार्य है क्योंकि अपनी उत्सुकतता और मासूमियत में बच्चे अनायास ही पल भर ही में किसी जोखिम में पड़ जाने की क्षमता रखते हैं। उन्हें दिन भर सुरक्षित रखने, उनके पीछे पीछे भागने, उनका मनोरंजन करने, उनका मार्गदर्शन करने, उनकी लड़ाईयाँ सुलझाने, उन्हें तैयार रखने के बाद जब शाम ढलती है तब सभी अभिभावक बच्चों को आराम से सुलाने के इच्छुक हो जाते हैं। रात में सभी खिलौनों को वापस स्थान पर रखने और बच्चों को पाएजामे पहनाने के बाद, बच्चे धीमे हो जाते हैं और माता या पिता के साथ लिपटकर लेटकर कोई कहानी सुनने के साथ सो जाते हैं। उस सोते हुए बच्चे की मनोरम शांति को देखकर दिन भर करी गई दौड़धूप और उठाई गई परेशानी निरर्थक नहीं लगती।

   परमेश्वर का वचन बाइबल भी बताती है कि परमेश्वर पिता का भी अपने बच्चों के प्रति इच्छित स्थिति शांति की ही है (लैव्यवस्था 26:6), लेकिन बहुधा अपनी अपरिपक्वता के कारण हम परेशानियों में पड़ जाते हैं और झगड़े उत्पन्न कर लेते हैं। बच्चों के अभिभावकों के समान ही परमेश्वर भी हर पल हर क्षण हमारी देखभाल करता रहता है, हमें सुरक्षित रखता है, हमारी आवश्यकताएं पूरी करता रहता है, और चाहता है कि गलत बातों के करने और उनमें पड़ने से हटकर हम उन्हें छोड़ कर उसके निकट आ जाएं और शांत होकर उसके प्रेम भरे मार्गों में सुरक्षा और तसल्ली के साथ विश्राम करें। - जूली ऐकैरमैन लिंक


उसकी इच्छा में ही हमारी शांति है। - डान्ते

मैं शान्ति से लेट जाऊंगा और सो जाऊंगा; क्योंकि, हे यहोवा, केवल तू ही मुझ को एकान्त में निश्चिन्त रहने देता है। - भजन 4:8

बाइबल पाठ: लैव्यवस्था 26:1-12
Leviticus 26:1 तुम अपने लिये मूरतें न बनाना, और न कोई खुदी हुई मूर्ति वा लाट अपने लिये खड़ी करना, और न अपने देश में दण्डवत करने के लिये नक्काशीदार पत्थर स्थापन करना; क्योंकि मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं। 
Leviticus 26:2 तुम मेरे विश्राम दिनों का पालन करना और मेरे पवित्रस्थान का भय मानना; मैं यहोवा हूं। 
Leviticus 26:3 यदि तुम मेरी विधियों पर चलो और मेरी आज्ञाओं को मानकर उनका पालन करो, 
Leviticus 26:4 तो मैं तुम्हारे लिये समय समय पर मेंह बरसाऊंगा, तथा भूमि अपनी उपज उपजाएगी, और मैदान के वृक्ष अपने अपने फल दिया करेंगे; 
Leviticus 26:5 यहां तक कि तुम दाख तोड़ने के समय भी दावनी करते रहोगे, और बोने के समय भी भर पेट दाख तोड़ते रहोगे, और तुम मनमानी रोटी खाया करोगे, और अपने देश में निश्चिन्त बसे रहोगे। 
Leviticus 26:6 और मैं तुम्हारे देश में सुख चैन दूंगा, और तुम सोओगे और तुम्हारा कोई डराने वाला न हो; और मैं उस देश में दुष्ट जन्तुओं को न रहने दूंगा, और तलवार तुम्हारे देश में न चलेगी। 
Leviticus 26:7 और तुम अपने शत्रुओं को मार भगा दोगे, और वे तुम्हारी तलवार से मारे जाएंगे। 
Leviticus 26:8 और तुम में से पांच मनुष्य सौ को और सौ मनुष्य दस हजार को खदेड़ेंगे; और तुम्हारे शत्रु तलवार से तुम्हारे आगे आगे मारे जाएंगे; 
Leviticus 26:9 और मैं तुम्हारी ओर कृपा दृष्टि रखूंगा और तुम को फलवन्त करूंगा और बढ़ाऊंगा, और तुम्हारे संग अपनी वाचा को पूर्ण करूंगा। 
Leviticus 26:10 और तुम रखे हुए पुराने अनाज को खाओगे, और नये के रहते भी पुराने को निकालोगे। 
Leviticus 26:11 और मैं तुम्हारे बीच अपना निवासस्थान बनाए रखूंगा, और मेरा जी तुम से घृणा नहीं करेगा। 
Leviticus 26:12 और मैं तुम्हारे मध्य चला फिरा करूंगा, और तुम्हारा परमेश्वर बना रहूंगा, और तुम मेरी प्रजा बने रहोगे।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 148-150


गुरुवार, 10 जुलाई 2014

संदेह


   यह बिलकुल स्वाभाविक है कि हमारे मनों में कभी संदेह उत्पन्न हो, या हमें भय लगे। प्रश्न जैसे, "यदि स्वर्ग वास्तविकता और सत्य ना हुआ तो?"; "क्या वास्तव में प्रभु यीशु ही परमेश्वर तक पहुँचने का एकमात्र मार्ग है?"; "क्या अन्त में जाकर इसका कोई महत्व होगा कि मैंने अपना जीवन कैसा व्यतीत किया है?" इत्यादि, सभी के मन में कभी ना कभी उठते हैं और इन प्रश्नों के उत्तर जल्दबाज़ी में या घिसे-पिटे तरीके से देने से पहले यह देख लेना चाहिए कि परमेश्वर के वचन बाइबल में इस संबंध में क्या शिक्षाएं दी गईं हैं।

   प्रभु यीशु मसीह का संसार से परिचय करवाने वाले यूहन्ना बप्तिस्मा देने वाले के मन में, उसे मृत्यु दण्ड दिए जाने से कुछ पहले, ऐसे ही प्रश्न उठे थे, जब वह जेल की कोठरी में पड़ा था (लूका 7:19)। उसने अपने चेलों को प्रभु यीशु के पास भेजा, यह सुनिश्चित करने के लिए कि वास्तव में यीशु ही वह प्रतीक्षित मसीह था कि नहीं और कहीं यूहन्ना की सेवकाई व्यर्थ तो नहीं हो गई थी।

   जब यूहन्ना के चेले प्रभु यीशु के पास यह प्रश्न लेकर आए तो जैसे प्रत्युत्तर प्रभु यीशु ने दिया वह हम सभी मसीही विश्वासियों के लिए अनुकरणीय है, प्रश्नकर्ताओं के लिए सान्तवना देने वाला है। प्रभु यीशु ने ना तो यूहन्ना की और ना ही उसके चेलों की इस बात को लेकर आलोचना करी, और ना ही इस बात के लिए लोगों के सामने उनकी भर्त्सना करी। प्रभु यीशु ने उनका ध्यान उन आश्चर्यकर्मों की ओर खींचा जो वह कर रहा थ और जिन्हें देख कर वे चेले अपने गुरू यूहन्ना को अपनी आंखों देखा विवरण बयान कर सकते थे; प्रभु यीशु ने परमेश्वर के वचन के पुराने नियम खण्ड से अपने बारे में यशायाह भविष्यद्वक्ता द्वारा दी गई भविष्यवाणियों के शब्दों को उद्धरण किया, क्योंकि यूहन्ना के लिए वे बातें जानी-पहचानी थीं; फिर भीड़ की ओर मुड़कर यूहन्ना की प्रशंसा करी और उसे सभी भविष्यद्वक्तओं में से सर्वश्रेष्ठ ठहराया, जिससे किसी के मन में कोई संदेह ना रह जाए कि प्रभु यीशु यूहन्ना के संदेह के कारण उससे क्षुब्ध था।

   संदेह और प्रश्न दोनों ही स्वाभाविक मानवीय प्रक्रियाएं हैं जिन्हें आलोचना के रूप में नहीं वरन अवसर के रूप में देखना चाहिए जिससे हम सत्य को भली भांति सीख सकें, सिखा सकें, परमेश्वर की बातों को स्मरण कर सकें, उन बातों से आश्वस्त हो सकें तथा जो अनिश्चितताओं से ग्रसित हैं उन्हें सांत्वना दे सकें, उनकी आशंकाओं का समाधान कर सकें। - रैण्डी किलगोर


जब हम अपने संदेहों पर अविश्वास और अपने भरोसे पर विश्वास करते हैं तो आश्वासन स्वयं ही आ जाता है।

पर मसीह को प्रभु जान कर अपने अपने मन में पवित्र समझो, और जो कोई तुम से तुम्हारी आशा के विषय में कुछ पूछे, तो उसे उत्तर देने के लिये सर्वदा तैयार रहो, पर नम्रता और भय के साथ। - 1 पतरस 3:15 

बाइबल पाठ: लूका 7:19-28
Luke 7:19 तब यूहन्ना ने अपने चेलों में से दो को बुलाकर प्रभु के पास यह पूछने के लिये भेजा; कि क्या आनेवाला तू ही है, या हम किसी और दूसरे की बाट देखें? 
Luke 7:20 उन्होंने उसके पास आकर कहा, यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले ने हमें तेरे पास यह पूछने को भेजा है, कि क्या आनेवाला तू ही है, या हम दूसरे की बाट जोहें? 
Luke 7:21 उसी घड़ी उसने बहुतों को बीमारियों; और पीड़ाओं, और दुष्टात्माओं से छुड़ाया; और बहुत से अन्‍धों को आंखे दी। 
Luke 7:22 और उसने उन से कहा; जो कुछ तुम ने देखा और सुना है, जा कर यूहन्ना से कह दो; कि अन्धे देखते हैं, लंगड़े चलते फिरते हैं, कोढ़ी शुद्ध किए जाते हैं, बहिरे सुनते हैं, मुरदे जिलाये जाते हैं; और कंगालों को सुसमाचार सुनाया जाता है। 
Luke 7:23 और धन्य है वह, जो मेरे कारण ठोकर न खाए।
Luke 7:24 जब यूहन्ना के भेजे हुए लोग चल दिए, तो यीशु यूहन्ना के विषय में लोगों से कहने लगा, तुम जंगल में क्या देखने गए थे? क्या हवा से हिलते हुए सरकण्‍डे को? 
Luke 7:25 तो तुम फिर क्या देखने गए थे? क्या कोमल वस्‍त्र पहिने हुए मनुष्य को? देखो, जो भड़कीला वस्‍त्र पहिनते, और सुख विलास से रहते हैं, वे राजभवनों में रहते हैं। 
Luke 7:26 तो फिर क्या देखने गए थे? क्या किसी भविष्यद्वक्ता को? हां, मैं तुम से कहता हूं, वरन भविष्यद्वक्ता से भी बड़े को। 
Luke 7:27 यह वही है, जिस के विषय में लिखा है, कि देख, मैं अपने दूत को तेरे आगे आगे भेजता हूं, जो तेरे आगे मार्ग सीधा करेगा। 
Luke 7:28 मैं तुम से कहता हूं, कि जो स्‍त्रियों से जन्मे हैं, उन में से यूहन्ना से बड़ा कोई नहीं: पर जो परमेश्वर के राज्य में छोटे से छोटा है, वह उस से भी बड़ा है।

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 145-147


बुधवार, 9 जुलाई 2014

संचालक


   इंडोनेशिया में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान हम ने वाद्य वृन्द द्वारा प्रस्तुत संगीत का अद्भुत आनन्द लिया। संगीत समारोह के समापन से ठीक पहले हम सभी उपस्थित दर्शकों को एक एक अंगक्लुंग - जो बाँस से बना एक संगीत वाद्य यान्त्र है दिया गया और हमें सिखाया गया कि कैसे हम उसे संगीत संचालक द्वारा दी जाने वाली ताल के साथ हिलाएं जिससे हम भी संगीत उत्पन्न कर सकें। शीघ्र ही हम सभी एक साथ उस वाद्य वृन्द का भाग बनकर संगीत बजा-सुना रहे थे, और हमें गर्व होने लगा कि हम कितना अच्छा बजा लेते हैं। लेकिन तभी मुझे समझ आया कि अच्छा बजाने वाले हम नहीं हैं वरन इस अच्छे प्रदर्शन का श्रेय तो उस संगीत संचालक को जाता है जो हम सब को एक साथ लेकर एक ही ताल में संगीत उत्पन्न करवा रहा था।

   इसी प्रकार जब जीवन में सब कुछ अच्छा चल रहा होता है, तो हमारे लिए अपने ऊपर घमण्ड करना बड़ा सरल हो जाता है। हमें लगता है कि हम स्वयं भले हैं, और हमने अपनी योग्यताओं के द्वारा ही यह सब सफलता अर्जित करी है। ऐसे पलों में हम यह भूल जाते हैं कि इस सब भलाई और सफलता के पीछे हमारा परमेश्वर पिता है जो हमें प्रोत्साहित करता है, हमारा बचाव करता है, हमारे लिए संसाधन उपलब्ध करवाता है और हमारी सुरक्षा करता है।

   राजा दाऊद ने परमेश्वर के इन कार्यों को अपने जीवन में पहचाना और उसे श्रेय दिया; दाऊद ने लिखा: "तब दाऊद राजा भीतर जा कर यहोवा के सम्मुख बैठा, और कहने लगा, हे यहोवा परमेश्वर! मैं क्या हूँ? और मेरा घराना क्या है? कि तू ने मुझे यहां तक पहुंचाया है?" (1 इतिहास 17:16) - दाऊद का हृदय परमेश्वर की भलाई और देखभाल के कारण, परमेश्वर के प्रति आभार और कृतज्ञता से भरा हुआ था।

   अगली बार जब कोई ऐसा अवसर आए जिसमें हमें मिलने वाली किसी आशीष के लिए हम अपनी योग्यताओं और क्षमताओं पर घमण्ड करके सारा श्रेय स्वयं को ही देने लगें, तब ज़रा थम कर, थोड़ा सोच कर देखें और स्मरण करें कि परमेश्वर ही हमारे जीवनों का संचालक है, वही है जो हमें सब भलाईयों और आशीषों से तृप्त करता है। - एल्बर्ट ली


परमेश्वर पिता का अदृश्य हाथ हमारे जीवन के प्रत्येक कार्य के पीछे होता है।

क्योंकि हर एक अच्छा वरदान और हर एक उत्तम दान ऊपर ही से है, और ज्योतियों के पिता की ओर से मिलता है, जिस में न तो कोई परिवर्तन हो सकता है, ओर न अदल बदल के कारण उस पर छाया पड़ती है। - याकूब 1:17 

बाइबल पाठ: भजन 103:1-22
Psalms 103:1 हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह; और जो कुछ मुझ में है, वह उसके पवित्र नाम को धन्य कहे! 
Psalms 103:2 हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना। 
Psalms 103:3 वही तो तेरे सब अधर्म को क्षमा करता, और तेरे सब रोगों को चंगा करता है, 
Psalms 103:4 वही तो तेरे प्राण को नाश होने से बचा लेता है, और तेरे सिर पर करूणा और दया का मुकुट बान्धता है, 
Psalms 103:5 वही तो तेरी लालसा को उत्तम पदार्थों से तृप्त करता है, जिस से तेरी जवानी उकाब की नाईं नई हो जाती है।
Psalms 103:6 यहोवा सब पिसे हुओं के लिये धर्म और न्याय के काम करता है। 
Psalms 103:7 उसने मूसा को अपनी गति, और इस्राएलियों पर अपने काम प्रगट किए। 
Psalms 103:8 यहोवा दयालु और अनुग्रहकरी, विलम्ब से कोप करने वाला और अति करूणामय है। 
Psalms 103:9 वह सर्वदा वादविवाद करता न रहेगा, न उसका क्रोध सदा के लिये भड़का रहेगा। 
Psalms 103:10 उसने हमारे पापों के अनुसार हम से व्यवहार नहीं किया, और न हमारे अधर्म के कामों के अनुसार हम को बदला दिया है। 
Psalms 103:11 जैसे आकाश पृथ्वी के ऊपर ऊंचा है, वैसे ही उसकी करूणा उसके डरवैयों के ऊपर प्रबल है। 
Psalms 103:12 उदयाचल अस्ताचल से जितनी दूर है, उसने हमारे अपराधों को हम से उतनी ही दूर कर दिया है। 
Psalms 103:13 जैसे पिता अपने बालकों पर दया करता है, वैसे ही यहोवा अपने डरवैयों पर दया करता है। 
Psalms 103:14 क्योंकि वह हमारी सृष्टि जानता है; और उसको स्मरण रहता है कि मनुष्य मिट्टी ही है।
Psalms 103:15 मनुष्य की आयु घास के समान होती है, वह मैदान के फूल की नाईं फूलता है, 
Psalms 103:16 जो पवन लगते ही ठहर नहीं सकता, और न वह अपने स्थान में फिर मिलता है। 
Psalms 103:17 परन्तु यहोवा की करूणा उसके डरवैयों पर युग युग, और उसका धर्म उनके नाती- पोतों पर भी प्रगट होता रहता है, 
Psalms 103:18 अर्थात उन पर जो उसकी वाचा का पालन करते और उसके उपदेशों को स्मरण कर के उन पर चलते हैं।
Psalms 103:19 यहोवा ने तो अपना सिंहासन स्वर्ग में स्थिर किया है, और उसका राज्य पूरी सृष्टि पर है। 
Psalms 103:20 हे यहोवा के दूतों, तुम जो बड़े वीर हो, और उसके वचन के मानने से उसको पूरा करते हो उसको धन्य कहो! 
Psalms 103:21 हे यहोवा की सारी सेनाओं, हे उसके टहलुओं, तुम जो उसकी इच्छा पूरी करते हो, उसको धन्य कहो! 
Psalms 103:22 हे यहोवा की सारी सृष्टि, उसके राज्य के सब स्थानों में उसको धन्य कहो। हे मेरे मन, तू यहोवा को धन्य कह!

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 140-144


मंगलवार, 8 जुलाई 2014

सुसमाचार


   इंटरनैट पर उपलब्ध अनेक प्रकार की सामग्री से संबंधित एक शब्द है "वायरल" अर्थात वह जो बड़ी तेज़ी से एक इंटरनैट प्रयोगकर्ता के द्वारा दूसरे तक पहुँचाया जाता है और इस प्रकार एक से दूसरे स्थान पर संसार भर में फैलता रहता है। इस प्रकार से फैलने वाली यह सामग्री हास्यास्प्रद हो सकती है, प्रेर्णादायक हो सकती है, विचारों को उकसाने वाली हो सकती है, किसी विशेष परिस्थित या घटना का समाचार हो सकती है, और तेज़ी से फैल कर यह बहुत ही कम समय में लाखों लोगों तक पहुँच जाती है।

   इस प्रकार की "वायरल" फैलाव की क्षमता रखने वाली सामग्री बनाना प्रत्येक विज्ञापन बनाने वाले का सपना होता है, लेकिन इंटरनैट के द्वारा व्यापार करने वाले बहुत ही कम लोग ऐसा कर पाते हैं। लेसी केम्प ने इस संबंध में realnetworksblog.com पर लिखा: "कैसे आप किसी बात को इतनी तीव्रता के साथ फैला सकते हैं? उत्तर है कि आप ऐसा नहीं कर सकते, क्योंकि यह कोई ऐसी बात नहीं है जो किसी योजना या विधि के अन्तर्गत करी जा सके, नहीं तो सभी ऐसा कर लेते। उस बात में स्वतः ही कुछ ऐसा अद्भुत होना चाहिए कि वह अपने ही बूते पर तेज़ी से प्रसारित हो सके।"

   समस्त संसार के लिए प्रभु यीशु में विश्वास द्वारा पापों से क्षमा एवं उद्धार का सुसमाचार भी कुछ ऐसा ही है, जो एक से दूसरे तक फैलता है। जिसने इस सुसमाचार पर विश्वास कर लिया और इसे अपना लिया, फिर वह इसे किसी ना किसी माध्यम द्वारा दूसरे तक पहुँचाए बिना रह नहीं सकता। मसीही विश्वासियों की प्रथम मण्डली का एक अगुवा स्‍तिुफनुस अपने मसीही विश्वास के कारण पत्थरवाह करके मार डाला गया, और फिर यरूशलेम में स्थित सारी मसीही मण्डली पर अत्याचार का पहाड़ टूट पड़ा। इस सताव के कारण बहुत से मसीही विश्वासी बेघर हो गए और यरुशलेम छोड़कर भागने को मजबूर हो गए। लेकिन जान बचाकर भागते हुए भी वे जहाँ कहीं जाते, प्रभु यीशु के सुसमाचार को लोगों को अवश्य बताते (प्रेरितों 8:1-4)। इस प्रकार सुसमाचार को दबाने और नष्ट करने का वह प्रयास सुसमाचार की तेज़ी से बढ़ती तथा फैलने का कारण बन गया।

   आज भी यही स्थिति किसी ना किसी रूप में सारे संसार में बारंबार घटित हो रही है। जितना मसीही विश्वास के सुसमाचार को दबाने का प्रयास किया जाता है, मसीही विश्वासियों को सताया जाता है, मसीह यीशु के विरोध में किया जाता है, वह सब मसीही विश्वास के सुसमाचार को संसार भर में समाचारों या अन्य किसी माध्यम से फैलाने का कारण हो जाता है और अनेक ऐसे लोग जिन्होंने उस सुसमाचार के बारे में सुना नहीं हो या उस पर कभी ध्यान ना दिया हो, उसे सुनने और उसे गंभीरता से देखने को प्रोत्साहित हो जाते हैं। मसीह यीशु का सुसमाचार समस्त संसार में फैलने से रुक नहीं सकता - या तो मसीही विश्वासी इसे फैलाते रहेंगे, नहीं तो उन पर ढाया जाने वाला अत्याचार उसे फैलाने का माध्यम बन जाएगा। - डेविड मैक्कैसलैंड


सुसमाचार संक्रामक है, वह तो फैलेगा ही; उसके फैलने में आपका योगदान क्या है?

हे भाइयों, मैं चाहता हूं, कि तुम यह जान लो, कि मुझ पर जो बीता है, उस से सुसमाचार ही की बढ़ती हुई है। - फिलिप्पियों 1:12

बाइबल पाठ: प्रेरितों 7:59-8:8
Acts 7:59 और वे स्‍तिुफनुस को पत्थरवाह करते रहे, और वह यह कहकर प्रार्थना करता रहा; कि हे प्रभु यीशु, मेरी आत्मा को ग्रहण कर। 
Acts 7:60 फिर घुटने टेककर ऊंचे शब्द से पुकारा, हे प्रभु, यह पाप उन पर मत लगा, और यह कहकर सो गया: और शाऊल उसके बध में सहमत था।
Acts 8:1 उसी दिन यरूशलेम की कलीसिया पर बड़ा उपद्रव होने लगा और प्रेरितों को छोड़ सब के सब यहूदिया और सामरिया देशों में तित्तर बित्तर हो गए। 
Acts 8:2 और भक्तों ने स्‍तिुफनुस को कब्र में रखा; और उसके लिये बड़ा विलाप किया। 
Acts 8:3 शाऊल कलीसिया को उजाड़ रहा था; और घर घर घुसकर पुरूषों और स्‍त्रियों को घसीट घसीट कर बन्‍दीगृह में डालता था।
Acts 8:4 जो तित्तर बित्तर हुए थे, वे सुसमाचार सुनाते हुए फिरे। 
Acts 8:5 और फिलेप्पुस सामरिया नगर में जा कर लोगों में मसीह का प्रचार करने लगा। 
Acts 8:6 और जो बातें फिलेप्पुस ने कहीं उन्हें लोगों ने सुनकर और जो चिन्ह वह दिखाता था उन्हें देख देखकर, एक चित्त हो कर मन लगाया। 
Acts 8:7 क्योंकि बहुतों में से अशुद्ध आत्माएं बड़े शब्द से चिल्लाती हुई निकल गई, और बहुत से झोले के मारे हुए और लंगडे भी अच्‍छे किए गए। 
Acts 8:8 और उस नगर में बड़ा आनन्द हुआ।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 137-139