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बुधवार, 13 अगस्त 2014

दीवार


   "दीवार"; पूर्वी जर्मनी के निवासियों के लिए 13 अगस्त 1961 को खड़ी करी गई देश को दो भागों में विभाजित करने वाली बाधा की पहचान कराने के लिए बस यही शब्द काफी था। यह तिथि कॉन्क्रीट की उस मज़बूत दीवार के निर्माण को आरंभ किए जाने की तिथि थी जो जर्मनी के पूर्वी और पश्चिमी भाग को पृथक करती थी। अन्ततः वह दीवार अभेद्य हो गई, उसकी रक्षा के लिए सशस्त्र सैनिक बल और काँटेदार तार की बाड़ लगा दी गई। किंतु सन 1989 में वह दीवार गिरा दी गई, और देश के दोनों भाग फिर से मिलकर एक हो गए।

   एक अन्य दीवार है, मानव जाति और परमेश्वर के बीच खड़ी मनुष्य के पाप की दीवार। इस दीवार का निर्माण अदन की वाटिका में हमारे आदि माता-पिता, आदम और हव्वा, द्वारा परमेश्वर की अनाज्ञाकारिता के कारण संसार में हुए पाप के प्रवेश से हुआ, और तब से परमेश्वर की अवहेलना, उसकी अनाज्ञाकारिता और मनुष्य का पाप इस दीवार को बनाए हुए हैं। लेकिन परमेश्वर ने स्वयं ही पहल करके पाप में गिरे मनुष्यों को अपने से मेल-मिलाप करने का मार्ग तैयार करके दिया है।

   प्रभु यीशु के कलवरी के क्रूस पर समस्त मानव जाति के सभी पापों के लिए दिए गए बलिदान और उसके मृतकों में से पुनरुत्थान के द्वारा हम मनुष्यों का परमेश्वर से मेल-मिलाप हो पाना संभव हो गया है (2 कुरिन्थियों 5:17-21)। अब जो कोई भी, स्वेच्छा तथा साधारण विश्वास से प्रभु यीशु के क्रूस पर किए गए कार्य को ग्रहण करता है और उससे पापों की क्षमा माँगता है, उसके पाप क्षमा हो जाते हैं, उसके लिए परमेश्वर से पृथक करने वाली पाप की दीवार गिर जाती है और उसका मेल-मिलाप परमेश्वर से हो जाता है। प्रभु यीशु द्वारा क्रूस पर किए गए इस महान कार्य द्वारा ना केवल हमारा मेल परमेश्वर से हो जाता है, वरन मानव जाति को परस्पर विभाजित करने वाली दीवारें भी ढह जाती हैं; अब यहूदी तथा गैर-यहूदी, दास तथा स्वतंत्र, पुरुष तथा स्त्री आदि में कोई विभाजन शेष नहीं रहता (गलतियों 3:28)।

   संभव है आज अनिश्चय की दीवार आपको प्रभु यीशु के पक्ष में निर्णय लेने से रोक रही हो; इस दीवार को परमेश्वर से मिलने वाली पापों की क्षमा और उद्धार की आशीष से आपको वंचित ना रखने दीजिए। अपने अविश्वास की दीवार को गिरा कर प्रभु यीशु की ओर हाथ बढ़ाईए और अनन्त आशीष के संभागी हो जाईए। - सिंडी हैस कैस्पर


बाइबल, पाप में मनुष्य की पूर्ण बरबादी तथा मसीह यीशु में उसकी पूर्ण बहाली का अभिलेख है। - बार्नहाउस

सो जब हम विश्वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के साथ मेल रखें। जिस के द्वारा विश्वास के कारण उस अनुग्रह तक, जिस में हम बने हैं, हमारी पहुंच भी हुई, और परमेश्वर की महिमा की आशा पर घमण्ड करें। - रोमियों 5:1-2

बाइबल पाठ: इफिसियों 2:13-18
Ephesians 2:13 पर अब तो मसीह यीशु में तुम जो पहिले दूर थे, मसीह के लोहू के द्वारा निकट हो गए हो। 
Ephesians 2:14 क्योंकि वही हमारा मेल है, जिसने दोनों को एक कर लिया: और अलग करने वाली दीवार को जो बीच में थी, ढा दिया। 
Ephesians 2:15 और अपने शरीर में बैर अर्थात वह व्यवस्था जिस की आज्ञाएं विधियों की रीति पर थीं, मिटा दिया, कि दोनों से अपने में एक नया मनुष्य उत्पन्न कर के मेल करा दे। 
Ephesians 2:16 और क्रूस पर बैर को नाश कर के इस के द्वारा दानों को एक देह बनाकर परमेश्वर से मिलाए।
Ephesians 2:17 और उसने आकर तुम्हें जो दूर थे, और उन्हें जो निकट थे, दानों को मेल-मिलाप का सुसमाचार सुनाया। 
Ephesians 2:18 क्योंकि उस ही के द्वारा हम दोनों की एक आत्मा में पिता के पास पंहुच होती है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 52-54


मंगलवार, 12 अगस्त 2014

सन्देह और विश्वास


   क्या एक मसीही विश्वासी जो अपने विश्वास की बातों को लेकर कभी-कभी सन्देह में पड़ जाता है, प्रभु यीशु की सेवकाई प्रभावी रीति से करने पाएगा? कुछ लोगों का मानना है कि परिपक्व एवं विश्वास में उन्नति करते रहने वाले मसीही विश्वासी कभी भी अपने विश्वास की बातों पर कोई सन्देह नहीं करते। किंतु जिस प्रकार हम ऐसे अनुभवों से होकर निकलते हैं जो हमारे विश्वास को बढ़ाते हैं, वैसे ही हम कभी कभी ऐसे अनुभवों से होकर भी निकल सकते हैं जो अस्थायी तौर पर हमारे मनों में सन्देह उत्पन्न कर सकते हैं।

   प्रभु यीशु के एक चेले, थोमा को प्रभु यीशु के मृतकों में से जी उठने के समाचार पर एकाएक विश्वास नहीं हुआ: "जब और चेले उस से कहने लगे कि हम ने प्रभु को देखा है: तब उसने उन से कहा, जब तक मैं उस के हाथों में कीलों के छेद न देख लूं, और कीलों के छेदों में अपनी उंगली न डाल लूं, और उसके पंजर में अपना हाथ न डाल लूं, तब तक मैं प्रतीति नहीं करूंगा" (यूहन्ना 20:25)। प्रभु यीशु मसीह ने इस अविश्वास के लिए थोमा की भर्त्सना नहीं करी, वरन उसके सामने वही प्रमाण प्रस्तुत किया जो थोमा को चाहिए था। मृतकों से जी उठे अपने प्रभु को सप्रमण प्रत्यक्ष देखकर थोमा उसके सामने झुक गया और, "यह सुन थोमा ने उत्तर दिया, हे मेरे प्रभु, हे मेरे परमेश्वर!" (यूहन्ना 20:28)। 

   इस घटना के पश्चात परमेश्वर के वचन बाइबल में थोमा का कोई उल्लेख नहीं मिलता है। परन्तु मसीही मण्डली, अर्थात चर्च का इतिहास बताता है कि थोमा भारत आया, और दक्षिण भारत में ही बस गया। उसने प्रभु यीशु में मिलने वाली पाप क्षमा तथा उद्धार का प्रचार किया, अनेक आश्चर्यकर्म किए, चर्च स्थापित किए, और उसके द्वारा स्थापित चर्चों में से कुछ आज भी सक्रीय हैं, और थोमा द्वारा स्थापित किए जाने का दावा करते हैं।

   जीवन में उठने वाले सन्देहों को जीवन का भाग मत बनने दीजिए। परमेश्वर के समक्ष अपने सन्देहों को रखिए, उससे अपने सन्देह के निवारण का मार्ग पूछिए, और परमेश्वर को अपनी गहरी पहिचान आप पर प्रगट करने का अवसर दीजिए और फिर अपने सन्देह से ऊपर उठकर अपने विश्वास को फिर से स्थिर कीजिए और आप परमेश्वर के लिए उपयोगी होने पाएंगे तथा उसके लिए महान कार्य करने पाएंगे। - डेनिस फिशर


अपने सन्देहों पर सन्देह और विश्वास पर विश्वास करना सीखिए।

और यह भी जानते हैं, कि परमेश्वर का पुत्र आ गया है और उसने हमें समझ दी है, कि हम उस सच्चे को पहचानें, और हम उस में जो सत्य है, अर्थात उसके पुत्र यीशु मसीह में रहते हैं: सच्चा परमेश्वर और अनन्त जीवन यही है। - 1 यूहन्ना 5:20

बाइबल पाठ: यूहन्ना 20:24-31
John 20:24 परन्तु बारहों में से एक व्यक्ति अर्थात थोमा जो दिदुमुस कहलाता है, जब यीशु आया तो उन के साथ न था। 
John 20:25 जब और चेले उस से कहने लगे कि हम ने प्रभु को देखा है: तब उसने उन से कहा, जब तक मैं उस के हाथों में कीलों के छेद न देख लूं, और कीलों के छेदों में अपनी उंगली न डाल लूं, और उसके पंजर में अपना हाथ न डाल लूं, तब तक मैं प्रतीति नहीं करूंगा।
John 20:26 आठ दिन के बाद उस के चेले फिर घर के भीतर थे, और थोमा उन के साथ था, और द्वार बन्‍द थे, तब यीशु ने आकर और बीच में खड़ा हो कर कहा, तुम्हें शान्‍ति मिले। 
John 20:27 तब उसने थोमा से कहा, अपनी उंगली यहां लाकर मेरे हाथों को देख और अपना हाथ लाकर मेरे पंजर में डाल और अविश्वासी नहीं परन्तु विश्वासी हो। 
John 20:28 यह सुन थोमा ने उत्तर दिया, हे मेरे प्रभु, हे मेरे परमेश्वर! 
John 20:29 यीशु ने उस से कहा, तू ने तो मुझे देखकर विश्वास किया है, धन्य वे हैं जिन्हों ने बिना देखे विश्वास किया।
John 20:30 यीशु ने और भी बहुत चिन्ह चेलों के साम्हने दिखाए, जो इस पुस्‍तक में लिखे नहीं गए। 
John 20:31 परन्तु ये इसलिये लिखे गए हैं, कि तुम विश्वास करो, कि यीशु ही परमेश्वर का पुत्र मसीह है: और विश्वास कर के उसके नाम से जीवन पाओ।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 49-51


सोमवार, 11 अगस्त 2014

थके और प्यासे


   मोआब की पहाड़ियों से उस वाचा की हुई भूमि की वह पहली झलक मेरे लिए बहुत निराशाजनक थी। मुझे लग रहा था कि यरदन नदी के पूर्वी तट के दृश्य की अपेक्षा यहाँ का दृश्य बहुत भिन्न होगा, लेकिन मुझे कुछ खास फर्क नज़र नहीं आया। मैंने अपनी गाईड से पूछा, "जब मिस्त्र की गुलामी से निकलकर इस्त्राएली यहाँ पहली बार आए थे तब क्या यह इलाका इससे भिन्न दिखता था?" उसने उत्तर दिया, "नहीं! यह हज़ारों से वर्षों से ऐसा ही दिखाई देता रहा है।" उससे मैंने अपने प्रश्न को दूसरे शब्दों में पूछा, "जब वे इस्त्राएली यहाँ पहुँचे, तब उन्होंने क्या देखा होगा?" उस गाईड का उत्तर था, "संसार का सबसे बड़ा मरुद्दयान!"

   तब मैं समझ गई। मैंने बंजर मरुभूमि की यहाँ तक की यात्रा एक आरामदायक वातानुकूलित बस में बैठकर जिसमें पीने के पानी की ठंडी बोतलें बहुतायत से उपलब्ध थीं करी थी, मेरे लिए पीने लायक मीठे पानी का स्त्रोत, वह मरूद्दयान कोई विशेष बात नहीं थी। लेकिन वे इस्त्राएली एक तपते हुए बंजर मरुभूमि में वर्षों पैदल यात्रा करते रहे थे; उनके लिए दूर से ही फीकी सी हरियाली दिखाने वाला यह स्थान जीवनदायक जल उपलब्ध होने का आश्वासन रहा होगा। वे जब यहाँ पहुँचे थे, तब थक कर चूर थे, जबकि मैं आराम से थी। उन्हें यहाँ पहुँचने में 40 कठिन वर्ष लगे थे, मुझे केवल 4 घंटे।

   जीवनदायक जल के सोते वाले उस मरुद्दयान के समान ही परमेश्वर की भलाई भी कभी कभी सूखे और कठिन स्थानों में ही मिलती है। मैं सोचती हूँ, हम कितनी ही दफा अपने प्रति परमेश्वर की देख-रेख तथा भलाई को देख नहीं पाते क्योंकि हमारी आत्मिक इन्द्रियाँ सुख-विलास के साधनों ने कुन्द कर दी हैं। इसलिए परमेश्वर की यह भलाईयाँ हमें तब ही दिखाई देती हैं जब जीवन यात्रा में हम थके और प्यासे होते हैं। परमेश्वर हमारी यह थकावट और प्यास यूँ ही बनाए रखे जिससे हम उसके प्रति तथा हमारे लिए उसकी भलाईयों के प्रति संवेदन शील होकर सदा ही उसके धन्यवादी तथा उसको समर्पित बने रहें। - जूली ऐकैरमैन लिंक


प्रभु यीशु ही वह जीवन जल का सोता है जो प्यासी आत्मा को तृप्त कर सकता है।

फिर पर्व के अंतिम दिन, जो मुख्य दिन है, यीशु खड़ा हुआ और पुकार कर कहा, यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आकर पीए। - यूहन्ना 7:37

बाइबल पाठ: यहोशु 3:1-11
Joshua 3:1 बिहान को यहोशू सबेरे उठा, और सब इस्राएलियों को साथ ले शित्तीम से कूच कर यरदन के किनारे आया; और वे पार उतरने से पहिले वहीं टिक गए। 
Joshua 3:2 और तीन दिन के बाद सरदारों ने छावनी के बीच जा कर 
Joshua 3:3 प्रजा के लोगों को यह आज्ञा दी, कि जब तुम को अपने परमेश्वर यहोवा की वाचा का सन्दूक और उसे उठाए हुए लेवीय याजक भी देख पड़ें, तब अपने स्थान से कूच कर के उसके पीछे पीछे चलना, 
Joshua 3:4 परन्तु उसके और तुम्हारे बीच में दो हजार हाथ के अटकल अन्तर रहे; तुम सन्दूक के निकट न जाना। ताकि तुम देख सको, कि किस मार्ग से तुम को चलना है, क्योंकि अब तक तुम इस मार्ग पर हो कर नहीं चले। 
Joshua 3:5 फिर यहोशू ने प्रजा के लोगों से कहा, तुम अपने आप को पवित्र करो; क्योंकि कल के दिन यहोवा तुम्हारे मध्य में आश्चर्यकर्म करेगा। 
Joshua 3:6 तब यहोशू ने याजकों से कहा, वाचा का सन्दूक उठा कर प्रजा के आगे आगे चलो। तब वे वाचा का सन्दूक उठा कर आगे आगे चले। 
Joshua 3:7 तब यहोवा ने यहोशू से कहा, आज के दिन से मैं सब इस्राएलियों के सम्मुख तेरी प्रशंसा करना आरम्भ करूंगा, जिस से वे जान लें कि जैसे मैं मूसा के संग रहता था वैसे ही मैं तेरे संग भी हूं। 
Joshua 3:8 और तू वाचा के सन्दूक के उठाने वाले याजकों को यह आज्ञा दे, कि जब तुम यरदन के जल के किनारे पहुंचो, तब यरदन में खड़े रहना।
Joshua 3:9 तब यहोशू ने इस्राएलियों से कहा, कि पास आकर अपने परमेश्वर यहोवा के वचन सुनो। 
Joshua 3:10 और यहोशू कहने लगा, कि इस से तुम जान लोगे कि जीवित ईश्वर तुम्हारे मध्य में है, और वह तुम्हारे सामहने से नि:सन्देह कनानियों, हित्तियों, हिव्वियों, परिज्जियों, गिर्गाशियों, एमोरियों, और यबूसियों को उनके देश में से निकाल देगा। 
Joshua 3:11 सुनो, पृथ्वी भर के प्रभु की वाचा का सन्दूक तुम्हारे आगे आगे यरदन में जाने पर है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 46-48


रविवार, 10 अगस्त 2014

उद्देश्य


   लैक्लैन मेक्युएरी सन 1810-1821 तक न्यू साऊथ वेल्स के राज्यपाल रहे थे; उनके शासन करने का तरीका ऐसा था कि उस नए बसाए गए स्थान में सब को यह लगता था कि सभी निवासियों का समानता का एक ही स्तर है। वे ऊँच-नीच में विश्वास नहीं रखते थे और ना ही किसी को असमानता या अलग होने का व्यवहार करने देते थे। जब "संभ्रांत" लोगों (अर्थात उन्होंने जो स्वतः ही आकर वहाँ बसने लगे थे, जो शासन से संबंधित लोग थे या जो सेना से थे), ने "मुक्त किए हुए" लोगों (अर्थात देश निकाला मिले हुए लोग जिन्हें कुछ शर्तों पर बाहर रहने की अनुमति मिली थी), के समुदाय से अपने आप को अलग रखने का प्रयास किया तब राज्यपाल लैक्लैन मेक्युएरी ने इस बात पर बल दिया कि सबको बिना किसी भेद-भाव के एक साथ ही रहना है और समाज में किसी के साथ कोई ऊँच-नीच का व्यवहार नहीं होगा।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भी हम पाते हैं कि प्रभु यीशु मसीह ने समाज के द्वारा तिरस्कृत चुँगी लेने वाले व्यक्ति ज़क्कई में रुचि दिखाई और उसे भी समस्त संसार के उद्धार की अपनी योजना में बराबरी से सम्मिलित किया (लूका 19:1-10)। अपने व्यवसाय के कारण अपने ही यहूदी समाज से अलग किए हुए और घृणा के पात्र ज़क्कई के मन में तीव्र लालसा थी कि वह एक बार प्रभु यीशु को देखे। लेकिन नाटा होने के कारण वह भीड़ से घिरे हुए प्रभु यीशु को देख नहीं पाता था; इसलिए वह प्रभु यीशु के मार्ग में लगे एक वृक्ष पर चढ़ गया कि प्रभु यीशु की एक झलक देख सके। जब प्रभु यीशु उस वृक्ष के नीचे पहुँचे तो उन्होंने रुककर ज़क्कई को नीचे बुलाया, उससे प्रेम का व्यवहार किया और उसके घर जाकर भोजन भी किया। प्रभु यीशु से मिले इस प्रेम-व्यवहार ने ज़क्कई का जीवन बदल दिया; उसने अपने पापों का सार्वजनिक अंगीकार किया, उनके लिए पश्चाताप किया और जिनसे उसने बेईमानी से लिया था, उन्हें सब लौटा देने का वायदा किया। उस दिन ज़क्कई के घर उद्धार आया।

   प्रभु यीशु का उद्देश्य बहुत साधारण था - बिना किसी भी भेद-भाव के, पाप में खोए हुओं को ढूंढ़ना और उन्हें पाप क्षमा तथा उद्धार पाने की परमेश्वर की योजना प्रस्तुत करना, चाहे उनका सामाजिक स्तर कुछ भी क्यों ना हो। प्रभु यीशु के अनुयायी होने के कारण आज हम मसीही विश्वासियों को भी प्रभु यीशु ने यही उद्देश्य सौंपा है - सारे संसार में सभी के लिए पाप क्षमा और उद्धार की परमेश्वर की योजना का समाचार सभी को देना (मत्ती 28:18-20)।


जो मसीह यीशु का उद्देश्य था वही मसीह यीशु के अनुयायियों का भी है।

यीशु ने उन के पास आकर कहा, कि स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। इसलिये तुम जा कर सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ और उन्हें पिता और पुत्र और पवित्रआत्मा के नाम से बपतिस्मा दो। और उन्हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ: और देखो, मैं जगत के अन्‍त तक सदैव तुम्हारे संग हूं। - मत्ती 28:18-20

बाइबल पाठ: लूका 19:1-10
Luke 19:1 वह यरीहो में प्रवेश कर के जा रहा था। 
Luke 19:2 और देखो, ज़क्कई नाम एक मनुष्य था जो चुंगी लेने वालों का सरदार और धनी था। 
Luke 19:3 वह यीशु को देखना चाहता था कि वह कौन सा है परन्तु भीड़ के कारण देख न सकता था। क्योंकि वह नाटा था। 
Luke 19:4 तब उसको देखने के लिये वह आगे दौड़कर एक गूलर के पेड़ पर चढ़ गया, क्योंकि वह उसी मार्ग से जाने वाला था। 
Luke 19:5 जब यीशु उस जगह पहुंचा, तो ऊपर दृष्टि कर के उस से कहा; हे ज़क्कई झट उतर आ; क्योंकि आज मुझे तेरे घर में रहना अवश्य है। 
Luke 19:6 वह तुरन्त उतर कर आनन्द से उसे अपने घर को ले गया। 
Luke 19:7 यह देख कर सब लोगे कुड़कुड़ा कर कहने लगे, वह तो एक पापी मनुष्य के यहां जा उतरा है। 
Luke 19:8 ज़क्कई ने खड़े हो कर प्रभु से कहा; हे प्रभु, देख मैं अपनी आधी सम्पत्ति कंगालों को देता हूं, और यदि किसी का कुछ भी अन्याय कर के ले लिया है तो उसे चौगुना फेर देता हूं। 
Luke 19:9 तब यीशु ने उस से कहा; आज इस घर में उद्धार आया है, इसलिये कि यह भी इब्राहीम का एक पुत्र है। 
Luke 19:10 क्योंकि मनुष्य का पुत्र खोए हुओं को ढूंढ़ने और उन का उद्धार करने आया है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 43-45


शनिवार, 9 अगस्त 2014

सांत्वना


   10 फरवरी, सन 1675 को 50 उपनिवेशीय परिवार अमेरिका के मैसाचूसट्स प्रांत के लैंकेस्टर इलाके में वहाँ के मूल रेड इन्डियन निवासियों द्वारा हमला किए जाने की आशंका को लेकर भयभीत थे। उन लोगों का पादरी, जोसफ रौलेंडसन, लोगों के बचाव के लिए सहायाता भेजने के लिए सरकार से गुहार लगाने बौस्टन गया हुआ था, उसकी पत्नि मेरी और उनके बच्चे घर पर ही थे। सूर्योदय के साथ ही उन परिवारों पर हमला आरंभ हो गया, उन50 उपनिवेशीय परिवारो में से कुछ लोग मारे गए और मेरी तथा अन्य कई लोग बन्दी बना लिए गए।

   उस कैद में मेरी ने अपने बन्धकों की ओर से क्रूरता और दया दोनों ही अनुभव करीं। वे रेड इन्डियन लोग मेरी तथा उन अन्य लोगों के धार्मिकता के स्वभाव के बारे में जानते थे, इसलिए उन्होंने मेरी को बाइबल की एक प्रति, जो उन्हें लूट में मिली थी, दे दी। बाद में मेरी ने उन दिनों के अपने अनुभवों के बारे में लिखते हुए परमेश्वर के संबंध में लिखा कि, "उसने मेरी बन्धुवाई के दुख के समय में अपने वचन में से कितने ही समय-संगत तथा सांत्वना देने वाले पद मुझे दिए"। परमेश्वर का वचन बाइबल मेरी के लिए बन्धुवाई के उस कठिन समय में एक बड़ी सांत्वना और सामर्थ का स्त्रोत था।

   यहूदा राष्ट्र एक विदेशी ताकत द्वारा बन्धुवाई में जाने की परिस्थिति में था (यशायाह 39:5-7), उन लोगों के सामने बड़ी कठिन परिस्थिति थी। लेकिन उस भयावह प्रत्याशा में भी परमेश्वर का वचन उनके लिए सांत्वना लेकर आया: "हिजकिय्याह ने यशायाह से कहा, यहोवा का वचन जो तू ने कहा है वह भला ही है। फिर उसने कहा, मेरे दिनों में तो शान्ति और सच्चाई बनी रहेगी" (यशायाह 39:8)।

   क्या आज परिस्थितियाँ आप पर हावी होकर आपको बन्धक बनाए हुए हैं? परमेश्वर के वचन बाइबल को पढ़ने और उस पर मनन करने में समया बिताना आरंभ कीजिए - परमेश्वर की सांत्वना और सामर्थ का अनुभव आप अपने आप करेंगे। - डेनिस फिशर


परमेश्वर का वचन ही सच्ची शांति एवं सांत्वना का स्त्रोत है।

मैं, मैं ही तेरा शान्तिदाता हूं; तू कौन है जो मरने वाले मनुष्य से, और घास के समान मुर्झाने वाले आदमी से डरता है - यशायाह 51:12

बाइबल पाठ: यशायाह 39:5-40:5
Isaiah 39:5 तब यशायाह ने हिजकिय्याह से कहा, सेनाओं के यहोवा का यह वचन सुन ले: 
Isaiah 39:6 ऐसे दिन आने वाले हैं, जिन में जो कुछ तेरे भवन में है और जो कुछ आज के दिन तक तेरे पुरखाओं का रखा हुआ तेरे भण्डारों में हैं, वह सब बाबुल को उठ जाएगा; यहोवा यह कहता है कि कोई वस्तु न बचेगी। 
Isaiah 39:7 और जो पुत्र तेरे वंश में उत्पन्न हों, उन में से भी कितनों को वे बंधुआई में ले जाएंगे; और वह खोजे बनकर बाबुल के राजभवन में रहेंगे। 
Isaiah 39:8 हिजकिय्याह ने यशायाह से कहा, यहोवा का वचन जो तू ने कहा है वह भला ही है। फिर उसने कहा, मेरे दिनों में तो शान्ति और सच्चाई बनी रहेगी।
Isaiah 40:1 तुम्हारा परमेश्वर यह कहता है, मेरी प्रजा को शान्ति दो, शान्ति! 
Isaiah 40:2 यरूशलेम से शान्ति की बातें कहो; और उस से पुकार कर कहो कि तेरी कठिन सेवा पूरी हुई है, तेरे अधर्म का दण्ड अंगीकार किया गया है: यहोवा के हाथ से तू अपने सब पापों का दूना दण्ड पा चुका है।
Isaiah 40:3 किसी की पुकार सुनाई देती है, जंगल में यहोवा का मार्ग सुधारो, हमारे परमेश्वर के लिये अराबा में एक राजमार्ग चौरस करो। 
Isaiah 40:4 हर एक तराई भर दी जाए और हर एक पहाड़ और पहाड़ी गिरा दी जाए; जो टेढ़ा है वह सीधा और जो ऊंचा नीचा है वह चौरस किया जाए। 
Isaiah 40:5 तब यहोवा का तेज प्रगट होगा और सब प्राणी उसको एक संग देखेंगे; क्योंकि यहोवा ने आप ही ऐसा कहा है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 40-42


शुक्रवार, 8 अगस्त 2014

सहानुभूति


   बेसबॉल की राष्ट्रीय स्पर्धा का वह खेल समाप्त हुआ, ग्रीन बे पैकर्स नामक दल अपनी जीत की खुशियाँ मना रहे थे और शिकागो बेर्यस नामक दल अपनी पराजय पर दुखी थे; मेरी बेटी लीज़ा ने ध्यान दिया कि उसकी 4 वर्षीय पुत्री एलियाना रो रही थी। यह बड़ी अजीब बात थी क्योंकि एलियाना के माता-पिता को इससे कोई मतलब नहीं था कि कौन जीतता है और कौन हारता है। जब लीज़ा ने एलियाना से पूछा कि वह क्यों रो रही है, तो बड़ी मासूमियत से उसने उत्तर दिया, "मुझे शिकागो बेर्यस के लिए बुरा लग रहा है, वे सब इतने दुखी दिखाई दे रहे हैं!"

   क्या इस छोटी सी लड़की से, जिसने अभी स्कूल जाना भी ठीक से आरंभ नहीं किया है, हम कुछ सहानुभूति के बारे में सीख सकते हैं? आज के इस संसार में जहाँ जीतने को इतना महत्व दिया जाता है और हारने वालों को तिरिस्कृत करके भुला दिया जाता है, बदनाम किया जाता है, हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि सभी को सहानुभूति की आवश्यकता होती है। जब हम किसी को हानि उठाकर भी संघर्ष करते हुए देखते हैं तो क्या उनके साथ आँसु बहाने में, उनके कांधे पर हाथ रख कर उन्हें सहायता देने का प्रस्ताव देकर, उनकी परेशानी में हम भी सहभागी होते हैं?

   परमेश्वर के वचन बाइबल में अनेक भाग ऐसे हैं जो हमें दूसरों के प्रति सहानुभूति जताने के लिए कहते हैं। फिलिप्पियों 2:1-3 में लिखा है कि हम दूसरों के बारे में अपने से बढ़कर सोचें, उनके हितों की भी चिंता करें ना कि केवल अपने ही हितों की। 1 पतरस 3:8-12 हमें स्मरण दिलाता है कि सहानुभूति का अर्थ है औरों के प्रति "भाईचारे की प्रीति" रखना; और कुलुस्सियों 3:12-15 बताता है कि करुणा, भलाई और दीनता परमेश्वर द्वारा पाप के दासत्व से छुड़ाकर उद्धार पाए हुए लोगों के गुण हैं।

   अपने चारों ओर देखें, क्या कोई ऐसा है जो किसी कठिन परिस्थिति से होकर निकल रहा है? उन की परिस्थितियों के लिए केवल बुरा अनुभव ही मत कीजिए, सहानुभूति और परमेश्वर के प्रेम के साथ उनकी ओर सहायता के हाथ बढ़ाईए। - डेव ब्रैनन


हमारा मसीह यीशु की समानता में होने का एक नाप है मसीह के समान दूसरों के दुखों में उनके साथ दुखी होना।

विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो। - फिलिप्पियों 2:3

बाइबल पाठ: 1 पतरस 3:8-12
1 Peter 3:8 निदान, सब के सब एक मन और कृपामय और भाईचारे की प्रीति रखने वाले, और करूणामय, और नम्र बनो। 
1 Peter 3:9 बुराई के बदले बुराई मत करो; और न गाली के बदले गाली दो; पर इस के विपरीत आशीष ही दो: क्योंकि तुम आशीष के वारिस होने के लिये बुलाए गए हो। 
1 Peter 3:10 क्योंकि जो कोई जीवन की इच्छा रखता है, और अच्‍छे दिन देखना चाहता है, वह अपनी जीभ को बुराई से, और अपने होंठों को छल की बातें करने से रोके रहे। 
1 Peter 3:11 वह बुराई का साथ छोड़े, और भलाई ही करे; वह मेल मिलाप को ढूंढ़े, और उस के यत्‍न में रहे। 
1 Peter 3:12 क्योंकि प्रभु की आंखे धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान उन की बिनती की ओर लगे रहते हैं, परन्तु प्रभु बुराई करने वालों के विमुख रहता है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 37-39


गुरुवार, 7 अगस्त 2014

विस्मयकारी सृष्टि


   अगस्त 2011 में अमेरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अंतरिक्ष में स्थित हबल दूरबीन से लिए गए चित्रों को मिलाकर बनाया गया एक संयुक्त चित्र प्रकाशित किया, जिसे देखने वाले लोगों के चेहरों पर एक मुस्कुराहट आ गई। चित्र में दो नक्षत्र समूहों को आपस में टकराना आरंभ करते हुए दिखाया गया है, और यह टकराव की स्थिति एक अन्तरिक्षीय विस्मयबोधक चिन्ह (!) के समान दिखाई देती है। जो नवीनतम गणना मैंने पढ़ी है, उसके अनुसार अन्तरिक्ष में लगभग 100 अरब नक्षत्र समूह हैं और प्रत्येक नक्षत्र समूह सैकड़ों अरब तारों से मिलकर बना है, तथा नए नक्षत्र समूह अभी भी खोजे जा रहे हैं।

   जब मैंने वह अन्तरिक्षीय विस्मयबोधक चिन्ह वाले चित्र को देखा, तो मेरा ध्यान हमारे विस्मयकारी सृष्टिकर्ता की ओर गया, आकाशमण्डल जिसकी महिमा का वर्णन कर रहा है (भजन 19:1), किंतु वह तो अपने बनाए आकाशमण्डल से भी बढ़कर है। जब राजा सुलेमान परमेश्वर की उपस्थिति के लिए मन्दिर बनवा चुका, तो परमेश्वर कि महानता को स्मरण कर के उसने प्रार्थना में कहा, "क्या परमेश्वर सचमुच पृथ्वी पर वास करेगा, स्वर्ग में वरन सब से ऊंचे स्वर्ग में भी तू नहीं समाता, फिर मेरे बनाए हुए इस भवन में क्योंकर समाएगा" (1 राजा 8:27)। राजा सुलेमान को एहसास हुआ कि जब परमेश्वर की उपस्थिति स्वर्ग में भी सीमित नहीं रह सकती तो पृथ्वी पर बने पत्थर के एक मन्दिर में क्योंकर सीमित हो सकती है?

   हमारे सीमित और नश्वर मन-मस्तिष्क के समझ पाने की क्षमता से कहीं कहीं अधिक बढ़कर प्रभु परमेश्वर की हस्ती है, लेकिन फिर भी उसने हमारे लिए यह संभव किया है कि हम उसे प्रभु यीशु में होकर जान सकें, जिसे उसने हमारे पापों की क्षमा और उद्धार के लिए इस संसार में मरने और फिर मृतकों में से पुनः जी उठने के लिए भेजा है। जब हम प्रभु यीशु पर विश्वास कर के अपने पापों से पश्चाताप करते हैं तथा अपना जीवन उसे समर्पित करते हैं, हमारे जीवन भी उसकी महिमा करने वाली उसकी विस्मयकारी सृष्टि का एक भाग बन जाते हैं। - एनी सेटास


सृष्टि में हम परमेश्वर की हस्तकला, और पापों से हमारे छुटकारे में हम उसके हृदय को देखते हैं।

आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है। - भजन 19:1

बाइबल पाठ: 1 राजा 8:22-30
1 Kings 8:22 तब सुलैमान इस्राएल की पूरी सभा के देखते यहोवा की वेदी के साम्हने खड़ा हुआ, और अपने हाथ स्वर्ग की ओर फैलाकर कहा, हे यहोवा! 
1 Kings 8:23 हे इस्राएल के परमेश्वर! तेरे समान न तो ऊपर स्वर्ग में, और न नीचे पृथ्वी पर कोई ईश्वर है: तेरे जो दास अपने सम्पूर्ण मन से अपने को तेरे सम्मुख जानकर चलते हैं, उनके लिये तू अपनी वाचा पूरी करता, और करुणा करता रहता है। 
1 Kings 8:24 जो वचन तू ने मेरे पिता दाऊद को दिया था, उसका तू ने पालन किया है, जैसा तू ने अपने मुंह से कहा था, वैसा ही अपने हाथ से उसको पूरा किया है, जैसा आज है। 
1 Kings 8:25 इसलिये अब हे इस्राएल के परमेश्वर यहोवा! इस वचन को भी पूरा कर, जो तू ने अपने दास मेरे पिता दाऊद को दिया था, कि तेरे कुल में, मेरे साम्हने इस्राएल की गद्दी पर विराजने वाले सदैव बने रहेंगे: इतना हो कि जैसे तू स्वयं मुझे सम्मुख जानकर चलता रहा, वैसे ही तेरे वंश के लोग अपनी चालचलन में ऐसी ही चौकसी करें। 
1 Kings 8:26 इसलिये अब हे इस्राएल के परमेश्वर अपना जो वचन तू ने अपने दास मेरे पिता दाऊद को दिया था उसे सच्चा सिद्ध कर। 
1 Kings 8:27 क्या परमेश्वर सचमुच पृथ्वी पर वास करेगा, स्वर्ग में वरन सब से ऊंचे स्वर्ग में भी तू नहीं समाता, फिर मेरे बनाए हुए इस भवन में क्योंकर समाएगा। 
1 Kings 8:28 तौभी हे मेरे परमेश्वर यहोवा! अपने दास की प्रार्थना और गिड़गिड़ाहट की ओर कान लगाकर, मेरी चिल्लाहट और यह प्रार्थना सुन! जो मैं आज तेरे साम्हने कर रहा हूँ; 
1 Kings 8:29 कि तेरी आंख इस भवन की ओर अर्थात इसी स्थान की ओर जिसके विषय तू ने कहा है, कि मेरा नाम वहां रहेगा, रात दिन खुली रहें: और जो प्रार्थना तेरा दास इस स्थान की ओर करे, उसे तू सुन ले। 
1 Kings 8:30 और तू अपने दास, और अपनी प्रजा इस्राएल की प्रार्थना जिस को वे इस स्थान की ओर गिड़गिड़ा के करें उसे सुनना, वरन स्वर्ग में से जो तेरा निवासस्थान है सुन लेना, और सुनकर क्षमा करना।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 34-36