ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

रविवार, 11 अक्टूबर 2015

सुन्दर


   एक व्यस्त राज्मार्ग पर स्थित वह एक साधारण सा दिखने वाला मकान था। उसकी बनावट या बाहरी रूप में कोई विशेष बात नहीं थी, और मार्ग से गुज़रते हुए लोगों द्वारा उसका नज़रंदाज़ होना कोई अनोखी बात नहीं थी। लेकिन एक दिन जब मैं उसके सामने से गुज़र रहा था तो मैंने घर के बाहर बड़े अक्षरों में लिखा देखा, "बिकाऊ है", और इसके नीचे उससे कुछ छोटे अक्षरों में लिखा था "अन्दर से सुन्दर"! मैं मकान खरीदने की फिराक में तो नहीं हूँ, लेकिन फिर भी मुझ में जिज्ञासा जागृत हुई कि भला ऐसा क्या होगा जो बाहर से साधारण से दिखने वाले इस मकान को अन्दर से सुन्दर बनाता है?

   इस संदर्भ में फिर यही जिज्ञासा मेरे आत्मिक जीवन के बारे में भी उठी; क्या एक मसीही विश्वासी होने के नाते मैं अपने जीवन के बाहर भी यही लिखकर लगा सकता हूँ? हम बाहार से चाहे जैसे दिखाई दें, क्या हम मसीही विश्वासियों के अन्दर वह भीतरी सुन्दरता नहीं होनी चाहिए जो हमारे जीवनों में हुए परमेश्वर के प्रेम और कार्य को दिखाती हो?

   परमेश्वर के वचन बाइबल से भीतरी सुन्दरता के बारे में कुछ बातों को देखें: रोम के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में प्रेरित पौलुस कहता है, "क्योंकि मैं भीतरी मनुष्यत्व से तो परमेश्वर की व्यवस्था से बहुत प्रसन्न रहता हूं" (रोमियों 7:22); फिर कुछ और आगे चलकर वह परमेश्वर के पवित्रात्मा पर केंद्रित मन के विषय में लिखता है, "शरीर पर मन लगाना तो मृत्यु है, परन्तु आत्मा पर मन लगाना जीवन और शान्ति है" (रोमियों 8:6)। गलतिया के मसीही विश्वासियों को लिखी पत्री में पौलुस ने पवित्रात्मा को समर्पित भीतरी मनुष्यत्व के लिए लिखा कि उससे "आत्मा के फल" उत्पन्न होते हैं (गलतियों 5:22-23) जो जीवनों को सुसज्जित कर देते हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में आनन्दित रहने और परमेश्वर के पवित्रात्मा को अपने जीवन में कार्यरत होने देने से हमारे अन्दर वह सुन्दरता आती है जिसे बनाए रखने के लिए हमें किसी कृत्रिम सांसारिक साधन का उपयोग नहीं करना पड़ेगा, जो हमारे जीवनों से परमेश्वर को महिमा देगी और कभी नाश नहीं होगी। - डेव ब्रैनन


मन की धार्मिकता चरित्र की सुन्दरता का निर्माण करती है।

पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज, और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई भी व्यवस्था नहीं। - गलतियों 5:22-23 

बाइबल पाठ: रोमियों 8:1-11
Romans 8:1 सो अब जो मसीह यीशु में हैं, उन पर दण्ड की आज्ञा नहीं: क्योंकि वे शरीर के अनुसार नहीं वरन आत्मा के अनुसार चलते हैं। 
Romans 8:2 क्योंकि जीवन की आत्मा की व्यवस्था ने मसीह यीशु में मुझे पाप की, और मृत्यु की व्यवस्था से स्वतंत्र कर दिया। 
Romans 8:3 क्योंकि जो काम व्यवस्था शरीर के कारण दुर्बल हो कर न कर सकी, उसको परमेश्वर ने किया, अर्थात अपने ही पुत्र को पापमय शरीर की समानता में, और पाप के बलिदान होने के लिये भेज कर, शरीर में पाप पर दण्ड की आज्ञा दी। 
Romans 8:4 इसलिये कि व्यवस्था की विधि हम में जो शरीर के अनुसार नहीं वरन आत्मा के अनुसार चलते हैं, पूरी की जाए। 
Romans 8:5 क्योंकि शरीरिक व्यक्ति शरीर की बातों पर मन लगाते हैं; परन्तु आध्यात्मिक आत्मा की बातों पर मन लगाते हैं। 
Romans 8:6 शरीर पर मन लगाना तो मृत्यु है, परन्तु आत्मा पर मन लगाना जीवन और शान्ति है। 
Romans 8:7 क्योंकि शरीर पर मन लगाना तो परमेश्वर से बैर रखना है, क्योंकि न तो परमेश्वर की व्यवस्था के आधीन है, और न हो सकता है। 
Romans 8:8 और जो शारीरिक दशा में है, वे परमेश्वर को प्रसन्न नहीं कर सकते। 
Romans 8:9 परन्तु जब कि परमेश्वर का आत्मा तुम में बसता है, तो तुम शारीरिक दशा में नहीं, परन्तु आत्मिक दशा में हो। यदि किसी में मसीह का आत्मा नहीं तो वह उसका जन नहीं। 
Romans 8:10 और यदि मसीह तुम में है, तो देह पाप के कारण मरी हुई है; परन्तु आत्मा धर्म के कारण जीवित है। 
Romans 8:11 और यदि उसी का आत्मा जिसने यीशु को मरे हुओं में से जिलाया तुम में बसा हुआ है; तो जिसने मसीह को मरे हुओं में से जिलाया, वह तुम्हारी मरनहार देहों को भी अपने आत्मा के द्वारा जो तुम में बसा हुआ है जिलाएगा। 

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 37-38
  • कुलुस्सियों 3


शनिवार, 10 अक्टूबर 2015

गवाह


   अपनी किशोरावस्था में मैंने एक वाहन दुर्घटना देखी। अपने आप में यही एक स्तब्ध कर देने वाला अनुभव था, लेकिन जो कुछ इसके बाद हुआ वह इससे भी अधिक परेशान कर देने वाला था। क्योंकि उस दुर्घटना का मैं ही एक मात्र गवाह था, इसलिए कुछ महीनों तक मुझे बार बार पुलिस, वकीलों और बीमा कंपनियों के प्रतिनिधियों को उस दुर्घटना का विवरण देना पड़ा। उन्हें मुझ से उस दुर्घटना के घटित होने के पीछे के कारण या उस दुर्घटना से उत्पन्न हुई चिकित्सा संबंधित बातों पर मेरी राय अथवा टिप्पणी नहीं चाहिए थी, उन्हें केवल जो मैंने होते देखा उसका ही विवरण चाहिए था।

   प्रभु यीशु के अनुयायी होने के नाते हमें संसार के सामने वह रखना है जो हमने अपने जीवनों में प्रभु यीशु के द्वारा होते देखा या अनुभव किया है। लोगों को प्रभु यीशु की ओर प्रेरित करने के लिए आवश्यक नहीं कि हम उनके सभी प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर देने पाएं या धर्मविज्ञान को समझाने पाएं। जो हमें करना है वह इतना ही है कि हम प्रभु यीशु के क्रूस और पुनरुत्थान के कारण हमारे जीवन में जो कुछ हुआ उसे लोगों को बताएं। इसमें सब से अच्छी बात यह है कि ऐसा करने के लिए हमें अपनी किसी क्षमता पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है; हमारे गवाह होने के लिए प्रभु यीशु ने हमारे लिए एक सहायक नियुक्त किया है: "परन्तु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ पाओगे; और यरूशलेम और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होगे" (प्रेरितों 1:8)।

   हम जितना परमेश्वर के पवित्रात्मा के मार्गदर्शन और सामर्थ पर निर्भर होकर प्रभु यीशु के गवाह होने की अपनी ज़िम्मेदारी को निभाएंगे, उतने ही अधिक प्रभावी रीति से हम पाप से आहत संसार को पाप से राहत देने वाले प्रभु यीशु की ओर प्रेरित कर सकेंगे। प्रभु यीशु द्वारा हमारे बदले गए जीवनों की गवाही दूसरों के भी इस आशीष को पाने में उपयोगी हो जाएगी। - बिल क्राउडर


हमारी गवाही परमेश्वर द्वारा हमारे जीवन में हुए कार्यों का बताना ही है।

इसलिये तुम जा कर सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ और उन्हें पिता और पुत्र और पवित्रआत्मा के नाम से बपतिस्मा दो। और उन्हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ: और देखो, मैं जगत के अन्‍त तक सदैव तुम्हारे संग हूं। मत्ती 28:19-20

बाइबल पाठ: प्रेरितों 1:1-9
Acts 1:1 हे थियुफिलुस, मैं ने पहिली पुस्तिका उन सब बातों के विषय में लिखी, जो यीशु ने आरम्भ में किया और करता और सिखाता रहा। 
Acts 1:2 उस दिन तक जब वह उन प्रेरितों को जिन्हें उसने चुना था, पवित्र आत्मा के द्वारा आज्ञा देकर ऊपर उठाया न गया। 
Acts 1:3 और उसने दु:ख उठाने के बाद बहुत से पड़े प्रमाणों से अपने आप को उन्हें जीवित दिखाया, और चालीस दिन तक वह उन्हें दिखाई देता रहा: और परमेश्वर के राज्य की बातें करता रहा। 
Acts 1:4 ओर उन से मिलकर उन्हें आज्ञा दी, कि यरूशलेम को न छोड़ो, परन्तु पिता की उस प्रतिज्ञा के पूरे होने की बाट जोहते रहो, जिस की चर्चा तुम मुझ से सुन चुके हो। 
Acts 1:5 क्योंकि यूहन्ना ने तो पानी में बपतिस्मा दिया है परन्तु थोड़े दिनों के बाद तुम पवित्रात्मा से बपतिस्मा पाओगे। 
Acts 1:6 सो उन्हों ने इकट्ठे हो कर उस से पूछा, कि हे प्रभु, क्या तू इसी समय इस्त्राएल को राज्य फेर देगा? 
Acts 1:7 उसने उन से कहा; उन समयों या कालों को जानना, जिन को पिता ने अपने ही अधिकार में रखा है, तुम्हारा काम नहीं। 
Acts 1:8 परन्तु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ पाओगे; और यरूशलेम और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होगे। 
Acts 1:9 यह कहकर वह उन के देखते देखते ऊपर उठा लिया गया; और बादल ने उसे उन की आंखों से छिपा लिया। 

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 34-36
  • कुलुस्सियों 2


शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2015

रोटी


   ऐसे समाज में जहाँ भोजन वस्तुओं की बहुतायत और विविधता हो, रोटी को दैनिक भोजन के अनिवार्य भाग के रूप में नहीं देखा जाता है; कुछ लोग कई दिन तक बिना रोटी खाए भी अन्य वस्तुओं को खाते हुए सरलता से रह लेते हैं। लेकिन प्रभु यीशु के जीवनकाल में रोटी भोजन का अनिवार्य भाग थी; रोटी बिना भोजन की कलपना भी नहीं की जा सकती थी।

   एक दिन लोगों की एक भीड़ प्रभु यीशु को खोजती हुई आई क्योंकि उन्होंने पाँच रोटी और दो मछलियों के सहारे पाँच हज़ार से अधिक लोगों की भीड़ को खिलाया था (यूहन्ना 6:11, 26)। लोगों ने चाहा कि प्रभु यीशु उनके सामने कोई आश्चर्यकर्म करें, जैसे कि परमेश्वर ने स्वर्ग से मन्ना बरसा कर अपने लोगों की बियाबान में आवश्यकता-पूर्ति करी थी (यूहन्ना 6:30-31, निर्गमन 16:4)। लेकिन जब प्रभु यीशु ने उनसे कहा कि यीशु स्वयं ही स्वर्ग से उतरने वाली सच्ची रोटी हैं तो लोगों को उनकी बात समझ नहीं आई। लोग अपने सामने प्रत्यक्ष दैनिक भोजन वाली रोटी चाहते थे, परन्तु प्रभु यीशु उनसे उनकी आध्यात्मिक आवश्यकताओं की पूर्ति करने वाली आत्मिक रोटी की बात कर रहा था। प्रभु यीशु का तात्पर्य था कि यदि वे साधारण सामान्य विश्वास से उसके वचनों को ग्रहण करें और अपने जीवन में उन्हें लागू करें, तो वे ना केवल अपने दैनिक जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति को होता देखेंगे वरन अनन्त आत्मिक संतुष्टि को भी अनुभव करेंगे (पद 35)।

   प्रभु यीशु हमारे जीवनों में वैकल्पिक संसाधन बनकर नहीं आना चाहता; वह हमारे जीवन का अनिवार्य भाग बनकर रहना चाहता है, ऐसा भाग जिसके बिना हमारे लिए कुछ भी कर पाने की सामर्थ रखना असंभव हो। जैसे प्रभु यीशु के समय के वे लोग बिना रोटी के भोजन की कलपना भी नहीं कर सकते थे, वैसे ही आज हम भी बिना प्रभु यीशु के जीवन की कलपना ना करें। - मार्विन विलियम्स


केवल सच्ची आत्मिक रोटी ही आत्मा की भूख मिटा सकती है।

जीवन की रोटी जो स्वर्ग से उतरी मैं हूं। यदि कोई इस रोटी में से खाए, तो सर्वदा जीवित रहेगा और जो रोटी मैं जगत के जीवन के लिये दूंगा, वह मेरा बदन है। - यूहन्ना 6:51 

बाइबल पाठ: यूहन्ना 6:24-35
John 6:24 सो जब भीड़ ने देखा, कि यहां न यीशु है, और न उसके चेले, तो वे भी छोटी छोटी नावों पर चढ़ के यीशु को ढूंढ़ते हुए कफरनहूम को पहुंचे। 
John 6:25 और झील के पार उस से मिलकर कहा, हे रब्बी, तू यहां कब आया? 
John 6:26 यीशु ने उन्हें उत्तर दिया, कि मैं तुम से सच सच कहता हूं, तुम मुझे इसलिये नहीं ढूंढ़ते हो कि तुम ने अचम्भित काम देखे, परन्तु इसलिये कि तुम रोटियां खाकर तृप्‍त हुए। 
John 6:27 नाशमान भोजन के लिये परिश्रम न करो, परन्तु उस भोजन के लिये जो अनन्त जीवन तक ठहरता है, जिसे मनुष्य का पुत्र तुम्हें देगा, क्योंकि पिता, अर्थात परमेश्वर ने उसी पर छाप कर दी है। 
John 6:28 उन्होंने उस से कहा, परमेश्वर के कार्य करने के लिये हम क्या करें? 
John 6:29 यीशु ने उन्हें उत्तर दिया; परमेश्वर का कार्य यह है, कि तुम उस पर, जिसे उसने भेजा है, विश्वास करो। 
John 6:30 तब उन्होंने उस से कहा, फिर तू कौन का चिन्ह दिखाता है कि हम उसे देखकर तेरी प्रतीति करें, तू कौन सा काम दिखाता है? 
John 6:31 हमारे बाप दादों ने जंगल में मन्ना खाया; जैसा लिखा है; कि उसने उन्हें खाने के लिये स्वर्ग से रोटी दी। 
John 6:32 यीशु ने उन से कहा, मैं तुम से सच सच कहता हूं कि मूसा ने तुम्हें वह रोटी स्वर्ग से न दी, परन्तु मेरा पिता तुम्हें सच्ची रोटी स्वर्ग से देता है। 
John 6:33 क्योंकि परमेश्वर की रोटी वही है, जो स्वर्ग से उतरकर जगत को जीवन देती है। 
John 6:34 तब उन्होंने उस से कहा, हे प्रभु, यह रोटी हमें सर्वदा दिया कर। 
John 6:35 यीशु ने उन से कहा, जीवन की रोटी मैं हूं: जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा न होगा और जो मुझ पर विश्वास करेगा, वह कभी प्यासा न होगा। 

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 32-33
  • कुलुस्सियों 1


गुरुवार, 8 अक्टूबर 2015

पूर्ति


   मेरे घर में मेरे कार्यस्थल की खिड़की के बाहर गिलहरियां शीघ्र ही आने वाली शीतऋतु की तैयारी में लगी हैं; वे अपने लिए बांझ वृक्ष के फल एकत्रित कर के रख रही हैं जिससे जब बर्फ पड़े और सब कुछ बर्फ से धक जाए तब भी उनके पास उनकी आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त भोजन एकत्रित हो। ऐसा करने में उनके द्वारा मचाया जाने वाला शोर मुझे मनोरंजक लगता है। इसके बिलकुल विपरीत हिरण हैं; हिरणों का पूरा झुंड मेरे घर के पिछले आंगन से होकर निकल भी जाए तो मुझे पता नहीं चल पाता क्योंकि वे शान्त रहते हैं, परन्तु एक भी गिलहरी बाहर कुछ कर रही हो तो उसका शोर सबकि उसकी उपस्थिति का एहसास करवा देता है।

   इन दोनों प्राणियों में एक और भी भिन्नता है; गिलहरियों के समान, शीतऋतु के लिए हिरण अपना भोजन एकत्रित करके नहीं रखते। जब सब तरफ बर्फ की चादर फैल जाती है तो हिरण इधर-उधर घूम्नते हुए, उन्हें जो भी मिलता है, चाहे वह घर के बाग़ीचे में लगे पौधे ही क्यों ना हों, खाते रहते हैं। किंतु यदि गिलहरियाँ ऐसा करें तो वे आवश्यक भोजन के आभाव में भूखी मर जाएंगी।

   हिरण और गिलहरियाँ परमेश्वर द्वारा हमारी देखरेख और पूर्ति करे जाने के दो उदाहरणों को दिखाते हैं। परमेश्वर ने हमें कार्य करके भविष्य के लिए संजोने की क्षमता भी दी है, और जब स्त्रोत पूरे ना पड़ने की स्थिति हो तब भी वह हमारे लिए संसाधन उपलब्ध करवा देता है।  जैसे परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन की पुस्तक में दिया गया है, परमेश्वर हमें बहुतायत के समय प्रदान करता है जिससे हम घटी के दिनों के लिए तैयार हो सकें (नीतिवचन 12:11)। साथ ही बाइबल में भजन 23 हमें आश्वस्त करता है कि संकट की स्थितियों में भी परमेश्वर हमें संभाले रखकर सुखद चारागाहों में ले जाता है। एक और तरीका है जिसके द्वारा परमेश्वर हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति करता है - जिनके पास बहुतायत से हो, वे उनके साथ बांटें जो घटी में हों (व्यवस्थाविवरण 24:19)।

   अतः हमारी आवश्यकातों की पूर्ति के लिए बाइबल की शिक्षा है कि, जब हम कार्य सकते हैं तो कार्य करें, जब संचय कर सकते हैं तो संचय करें, और जो आवश्यकता में हैं उनके साथ अपनी आशीषों को बाँटने से ना कतराएं, और परमेश्वर पर हमारी सभी आवश्यक्ताओं की पूर्ति करते रहने के लिए विश्वास को बनाए रखें। - जूली ऐकैरमैन लिंक


हमारी आवश्यकताएं कभी भी परमेश्वर के संसाधनों से बढ़कर नहीं हो पाएंगी।

जिनका भला करना चाहिये, यदि तुझ में शक्ति रहे, तो उनका भला करने से न रुकना। यदि तेरे पास देने को कुछ हो, तो अपने पड़ोसी से न कहना कि जा कल फिर आना, कल मैं तुझे दूंगा। नीतिवचन 3:27-28

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 24:19-22
Deuteronomy 24:19 जब तू अपने पक्के खेत को काटे, और एक पूला खेत में भूल से छूट जाए, तो उसे लेने को फिर न लौट जाना; वह परदेशी, अनाथ, और विधवा के लिये पड़ा रहे; इसलिये कि परमेश्वर यहोवा तेरे सब कामों में तुझ को आशीष दे। 
Deuteronomy 24:20 जब तू अपने जलपाई के वृक्ष को झाड़े, तब डालियों को दूसरी बार न झाड़ना; वह परदेशी, अनाथ, और विधवा के लिये रह जाए। 
Deuteronomy 24:21 जब तू अपनी दाख की बारी के फल तोड़े, तो उसका दाना दाना न तोड़ लेना; वह परदेशी, अनाथ और विधवा के लिये रह जाए। 
Deuteronomy 24:22 और इस को स्मरण रखना कि तू मिस्र देश में दास था; इस कारण मैं तुझे यह आज्ञा देता हूं। 

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 30-31
  • फिलिप्पियों 4


बुधवार, 7 अक्टूबर 2015

सौभाग्य


   यू-ट्यूब का एक वीडियो मुझे बहुत प्रीय है; यह वीडियो एक शौपिंग मॉल के भोजन-स्थल का है जहाँ सामान्य लोग अपना भोजन कर रहे हैं, तभी अचानक ही एक व्यक्ति खड़ा होकर संगीत्कार हैन्डल की सुप्रसिद्ध  संगीत कृति का एक भाग, "हैलेलुयाह कोरस" को ऊँची आवाज़ में बेधड़क गाने लगता है। सबको चौंकाते हुए, एक अन्य व्यक्ति भी खड़ा होकर पहले का साथ देने लगता है, फिर एक और, उसके बाद फिर और भी व्यक्ति खड़े होकर यही करने लगते हैं, और शीघ्र ही वह भोजन-स्थल परमेश्वर की स्तुति की आवाज़ों से भर जाता है। एक स्थानीय संगीत मण्डली ने अपने गायकों को स्थान-स्थान पर रख दिया था जिससे वे भोजन कर रहे लोगों के जीवनों में परमेश्वर के स्तुतिगान को ला सकें।

   जब कभी मैं इस वीडियो को देखता हूँ, मेरी आँखें भर आती हैं। यह मुझे स्मरण दिलाता है कि लोगों के रोज़मर्रा के जीवनों में प्रभु यीशु की समानता से उत्पन्न हुई सुन्दरता को भरने के द्वारा परमेश्वर की महिमा करना हमारा कर्त्वय है। ज़रा सोचिए, अपनी इस आराधना और स्तुति से किसी ऐसे व्यक्ति के जीवन में जिसे निराशा से निकलने का अवसर चाहिए, आप परमेश्वर का प्रेम और अनुग्रह को उसके सामने ले आते हैं; किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में जिसे परमेश्वर के प्रेम की आवश्यकता है और आपके द्वारा करी जाने वाली परमेश्वर की महिमा उसे परमेश्वर के निकट ले आती है; किसी थके हुए मित्र को सहारा देकर उठाने के लिए आप प्रभु यीशु के हाथ बन जाते हैं; किसी परेशान कर देने वाली अस्त-व्यस्त परिस्थिति में आप शान्ति ले आते हैं। ये सभी हम मसीही विश्वासियों की ज़िम्मेदारियाँ हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार लिखता है, "अन्य जातियों में उसकी महिमा का, और देश देश के लोगों में उसके आश्चर्यकर्मों का वर्णन करो" (भजन 96:3) - हम मसीही विश्वासियों का सौभाग्य यही करना है। - जो स्टोवैल


मसीह के आश्चर्यकर्मों को अपने में होकर चमकने देने के द्वारा संसार को चकित करें।

और उसने उन से कहा, तुम सारे जगत में जा कर सारी सृष्‍टि के लोगों को सुसमाचार प्रचार करो। - मरकुस 16:15 

बाइबल पाठ: भजन 96
Psalms 96:1 यहोवा के लिये एक नया गीत गाओ, हे सारी पृथ्वी के लोगों यहोवा के लिये गाओ! 
Psalms 96:2 यहोवा के लिये गाओ, उसके नाम को धन्य कहो; दिन दिन उसके किए हुए उद्धार का शुभ समाचार सुनाते रहो। 
Psalms 96:3 अन्य जातियों में उसकी महिमा का, और देश देश के लोगों में उसके आश्चर्यकर्मों का वर्णन करो। 
Psalms 96:4 क्योंकि यहोवा महान और अति स्तुति के योग्य है; वह तो सब देवताओं से अधिक भय योग्य है। 
Psalms 96:5 क्योंकि देश देश के सब देवता तो मूरतें ही हैं; परन्तु यहोवा ही ने स्वर्ग को बनाया है। 
Psalms 96:6 उसके चारों और वैभव और ऐश्वर्य है; उसके पवित्र स्थान में सामर्थ्य और शोभा है। 
Psalms 96:7 हे देश देश के कुलों, यहोवा का गुणानुवाद करो, यहोवा की महिमा और सामर्थ्य को मानो! 
Psalms 96:8 यहोवा के नाम की ऐसी महिमा करो जो उसके योग्य है; भेंट ले कर उसके आंगनों में आओ! 
Psalms 96:9 पवित्रता से शोभायमान हो कर यहोवा को दण्डवत करो; हे सारी पृथ्वी के लोगों उसके साम्हने कांपते रहो! 
Psalms 96:10 जाति जाति में कहो, यहोवा राजा हुआ है! और जगत ऐसा स्थिर है, कि वह टलने का नहीं; वह देश देश के लोगों का न्याय सीधाई से करेगा।
Psalms 96:11 आकाश आनन्द करे, और पृथ्वी मगन हो; समुद्र और उस में की सब वस्तुएं गरज उठें; 
Psalms 96:12 मैदान और जो कुछ उस में है, वह प्रफुल्लित हो; उसी समय वन के सारे वृक्ष जयजयकार करेंगे। 
Psalms 96:13 यह यहोवा के साम्हने हो, क्योंकि वह आने वाला है। वह पृथ्वी का न्याय करने को आने वाला है, वह धर्म से जगत का, और सच्चाई से देश देश के लोगों का न्याय करेगा। 

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 28-29
  • फिलिप्पियों 3


मंगलवार, 6 अक्टूबर 2015

खतरे और चुनौतियाँ


   टेलिविज़न पर लाखों लोग देख रहे थे, निक वॉलेन्डा ने न्याग्रा जल-प्रपात के एक से दूसरे छोर तक तने 2 इंच मोटे और 1800 फीट लंबे तार पर चलकर उसे पार किया। यह करने के लिए निक ने यथासंभव सुरक्षा रखी थी। उतनी ऊँचाई पर नीचे तेज़ बहाव वाले पानी को तार पर चलकर पार करने के इस जोखिम भरे कार्य के रोमांच तथा खतरों को कुछ और बातें बढ़ा रही थीं - घना कोहरा जो निक कीदृष्टि को धूँधला कर रहा था, तेज़ हवा जो निक के सन्तुलन को बिगाड़ रही थी और जल-प्रपात से उठती पानी की बौछार जो तार को गीला करके निक के पाँव की पकड़ को चुनौती दे रही थी। निक ने बाद में बताया, इन खतरों और चुनौतियों में, या इनके कारण, वह अपने इस प्रयास में बहुत प्रार्थना और परमेश्वर की आराधना करता रहा था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भी अनेक स्थानों पर खतरों और चुनौतियों में परमेश्वर के लोगों द्वारा परमेश्वर की आराधना का उल्लेख है। जब राजा यहोशापात के विरुद्ध एक बड़ी सेना उठ कर आई तो राजा ने अपनी प्रजा समेत अपने आप तथा सारी परिस्थिति को परमेश्वर के हाथ में सौंप दिया और उससे मार्गदर्शन माँगा (2 इतिहास 20:1-3)। परमेश्वर के निर्देशानुसार यहोशापात अपनी सेना को लेकर युद्ध की भूमि पर गया, और वहां उसकी सेना के आगे आगे एक दल परमेश्वर की स्तुति करते हुए चला। उनकी इस आराधना का प्रभाव था कि यहोशापात के विरुद्ध आने वाली सेना के सैनिक एक दूसरे पर ही हमला करने लगे और एक दूसरे को ही मार डाला। उस दिन एक बार फिर इस्त्राएलियों ने परमेश्वर पर विश्वास को बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण पाठ सीखा।

   खतरे और चुनौती की परिस्थिति में परमेश्वर की स्तुति एवं आराधना करना हमारी स्वाभाविक प्रवृत्ति के विपरीत हो सकता है क्योंकि हमारी स्वाभाविक प्रवृत्ति है ऐसे में चिंता करना, बचाव की योजना बनाना और आत्म-सुरक्षा के इंतिज़ाम करना। लेकिन ऐसी परिस्थित्यों में आराधना और स्तुति हमारे मनों को शान्त रखती है और हमें अपने आप पर भरोसा रखने की बजाए परमेश्वर पर भरोसा बनाए रखने में सहायक होती है। खतरों और चुनौतियों में आराधना और स्तुति करना हमें वही पाठ सिखाता है जो उस दिन इस्त्राएलियों ने सीखा - "...तुम इस बड़ी भीड़ से मत डरो और तुम्हारा मन कच्चा न हो; क्योंकि युद्ध तुम्हारा नहीं, परमेश्वर का है" (2 इतिहास 20:15)। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


हमारे सामने चाहे जो भी हो, परमेश्वर सदा हमारे साथ और सहायता में रहता है।

क्योंकि तुम्हारा परमेश्वर यहोवा तुम्हारे शत्रुओं से युद्ध करने और तुम्हें बचाने के लिये तुम्हारे संग चलता है। - व्यवस्थाविवरण 20:4 

बाइबल पाठ: 2 इतिहास 20:1-3, 14-23
2 Chronicles 20:1 इसके बाद मोआबियों और अम्मोनियों ने और उनके साथ कई मूनियों ने युद्ध करने के लिये यहोशापात पर चढ़ाई की। 
2 Chronicles 20:2 तब लोगों ने आकर यहोशापात को बता दिया, कि ताल के पार से एदोम देश की ओर से एक बड़ी भीड़ तुझ पर चढ़ाई कर रही है; और देख, वह हसासोन्तामार तक जो एनगदी भी कहलाता है, पहुंच गई है। 
2 Chronicles 20:3 तब यहोशपात डर गया और यहोवा की खोज में लग गया, और पूरे यहूदा में उपवास का प्रचार करवाया। 
2 Chronicles 20:14 तब आसाप के वंश में से यहजीएल नाम एक लेवीय जो जकर्याह का पुत्र और बनायाह का पोता और मत्तन्याह के पुत्र यीएल का परपोता था, उस में मण्डली के बीच यहोवा का आत्मा समाया। 
2 Chronicles 20:15 और वह कहने लगा, हे सब यहूदियो, हे यरूशलेम के रहने वालों, हे राजा यहोशापात, तुम सब ध्यान दो; यहोवा तुम से यों कहता है, तुम इस बड़ी भीड़ से मत डरो और तुम्हारा मन कच्चा न हो; क्योंकि युद्ध तुम्हारा नहीं, परमेश्वर का है। 
2 Chronicles 20:16 कल उनका साम्हना करने को जाना। देखो वे सीस की चढ़ाई पर चढ़े आते हैं और यरूएल नाम जंगल के साम्हने नाले के सिरे पर तुम्हें मिलेंगे। 
2 Chronicles 20:17 इस लड़ाई में तुम्हें लड़ना न होगा; हे यहूदा, और हे यरूशलेम, ठहरे रहना, और खड़े रह कर यहोवा की ओर से अपना बचाव देखना। मत डरो, और तुम्हारा मन कच्चा न हो; कल उनका साम्हना करने को चलना और यहोवा तुम्हारे साथ रहेगा। 
2 Chronicles 20:18 तब यहोशापात भूमि की ओर मुंह कर के झुका और सब यहूदियों और यरूशलेम के निवासियों ने यहोवा के साम्हने गिर के यहोवा को दण्डवत किया। 
2 Chronicles 20:19 और कहातियों और कोरहियों में से कुछ लेवीय खड़े हो कर इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की स्तुति अत्यन्त ऊंचे स्वर से करने लगे। 
2 Chronicles 20:20 बिहान को वे सबेरे उठ कर तकोआ के जंगल की ओर निकल गए; और चलते समय यहोशापात ने खड़े हो कर कहा, हे यहूदियो, हे यरूशलेम के निवासियो, मेरी सुनो, अपने परमेश्वर यहोवा पर विश्वास रखो, तब तुम स्थिर रहोगे; उसके नबियों की प्रतीत करो, तब तुम कृतार्थ हो जाओगे। 
2 Chronicles 20:21 तब उसने प्रजा के साथ सम्मति कर के कितनों को ठहराया, जो कि पवित्रता से शोभायमान हो कर हथियारबन्दों के आगे आगे चलते हुए यहोवा के गीत गाएं, और यह कहते हुए उसकी स्तुति करें, कि यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि उसकी करुणा सदा की है। 
2 Chronicles 20:22 जिस समय वे गाकर स्तुति करने लगे, उसी समय यहोवा ने अम्मोनियों, मोआबियों और सेईर के पहाड़ी देश के लोगों पर जो यहूदा के विरुद्ध आ रहे थे, घातकों को बैठा दिया और वे मारे गए। 
2 Chronicles 20:23 क्योंकि अम्मोनियों और मोआबियों ने सेईर के पहाड़ी देश के निवासियों डराने और सत्यानाश करने के लिये उन पर चढ़ाई की, और जब वे सेईर के पहाड़ी देश के निवासियों का अन्त कर चुके, तब उन सभों ने एक दूसरे के नाश करने में हाथ लगाया। 

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 26-27
  • फिलिप्पियों 2


सोमवार, 5 अक्टूबर 2015

एक की कीमत


   हाई स्कूल पास कर लेने के दीक्षांत समारोह में भाग लेने से कुछ ही घंटे पहले हुई एक वाहन दुर्घटना में किम हैस्किन्स के पिता का देहान्त हो गया और उसे तथा उसकी माता को चोटिल हालत में अस्पताल में दाखिल होना पड़ा। अगले दिन किम के स्कूल के प्रधानाचार्य, जो गैरेट, उससे मिलने अस्पताल गए और उससे कहा कि वे उसके लिए स्कूल में कुछ विशेष करना चाहते हैं। कॉलेराडो स्प्रिंग्स से प्रकाशित अखबार ’दि गैज़े’ में जेम्स ड्रयु द्वारा लिखित लेख में स्कूल के अध्यापकों, विद्यार्थियों और अन्य कर्मचारियों द्वारा किम के प्रति दिखाए गए अपार प्रेम और सहानुभूति का वर्णन किया। कुछ दिन के पश्चात, किम की हानि से द्रवित हुए ये सभी लोग, खास किम के लिए स्कूल के ऑडिटोरियम में आयोजित किए गए एक विशेष दीक्षांत समारोह में सम्मिलित हुए।

   प्रधानाचार्य गैरेट ने कहा, "हम शिक्षा में बहुत कहते हैं कि कोई भी विद्यार्थी पीछे नहीं छूटना चाहिए। सेना में वे कहते हैं कि युद्ध-भूमि में कोई सैनिक पीछे नहीं छूटना चाहिए। आज का यह समारोह इसलिए है कि कोई स्नातक पीछे छूटना नहीं चाहिए।"

   प्रभु यीशु ने भी परमेश्वर के लिए प्रत्येक मनुष्य के महत्व को दिखाने के लिए खोए हुए के ढूँढ़े जाने के तीन दृष्टांतों का प्रयोग किया - खोई हुई भेड़, खोया हुआ सिक्का, खोया हुआ पुत्र (लूका 15)। प्रत्येक दृष्टांत में किसी व्यक्ति का कुछ बहुमूल्य खो गया था; और जब वह मिल गया तो वह व्यक्ति अपने पड़ौसियों और मित्रों के साथ इस बात का आनन्द मनाता है।

   सन्देश स्पष्ट है, हम सब परमेश्वर के लिए बेशकीमती हैं, इसीलिए उसने हमें अपने पास लौटा लाने के लिए प्रभु यीशु में होकर पापों की क्षमा और नया जीवन सेंत-मेंत उपलब्ध कराया है; और वह अपने प्रेम और अनुग्रह के साथ सदा हमारे साथ-साथ बने रहने का वायदा करता है। जब भी कोई एक भी पापी अपने पापों से पश्चाताप करके परमेश्वर के पास आता है तो स्वर्ग में बड़ा आनन्द होता है (पद 7)। - डेविड मैक्कैसलैंड

परमेश्वर की नज़र में हमारी कीमत, उसके द्वारा हमारे लिए चुकाए गए दाम से प्रकट होती है।

तुम तो मेरी भेड़-बकरियां, मेरी चराई की भेड़-बकरियां हो; तुम तो मनुष्य हो, और मैं तुम्हारा परमेश्वर हूँ, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है। - यहेजकेल34:31

बाइबल पाठ: लूका 15:1-10
Luke 15:1 सब चुंगी लेने वाले और पापी उसके पास आया करते थे ताकि उस की सुनें। 
Luke 15:2 और फरीसी और शास्त्री कुड़कुड़ा कर कहने लगे, कि यह तो पापियों से मिलता है और उन के साथ खाता भी है।
Luke 15:3 तब उसने उन से यह दृष्‍टान्‍त कहा। 
Luke 15:4 तुम में से कौन है जिस की सौ भेड़ें हों, और उन में से एक खो जाए तो निन्नानवे को जंगल में छोड़कर, उस खोई हुई को जब तक मिल न जाए खोजता न रहे? 
Luke 15:5 और जब मिल जाती है, तब वह बड़े आनन्द से उसे कांधे पर उठा लेता है। 
Luke 15:6 और घर में आकर मित्रों और पड़ोसियों को इकट्ठे कर के कहता है, मेरे साथ आनन्द करो, क्योंकि मेरी खोई हुई भेड़ मिल गई है। 
Luke 15:7 मैं तुम से कहता हूं; कि इसी रीति से एक मन फिराने वाले पापी के विषय में भी स्वर्ग में इतना ही आनन्द होगा, जितना कि निन्नानवे ऐसे धर्मियों के विषय नहीं होता, जिन्हें मन फिराने की आवश्यकता नहीं।
Luke 15:8 या कौन ऐसी स्त्री होगी, जिस के पास दस सिक्के हों, और उन में से एक खो जाए; तो वह दीया बारकर और घर झाड़ बुहार कर जब तक मिल न जाए, जी लगाकर खोजती न रहे? 
Luke 15:9 और जब मिल जाता है, तो वह अपने सखियों और पड़ोसिनियों को इकट्ठी कर के कहती है, कि मेरे साथ आनन्द करो, क्योंकि मेरा खोया हुआ सिक्‍का मिल गया है। 
Luke 15:10 मैं तुम से कहता हूं; कि इसी रीति से एक मन फिराने वाले पापी के विषय में परमेश्वर के स्‍वर्गदूतों के साम्हने आनन्द होता है। 

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 23-25
  • फिलिप्पियों 1