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गुरुवार, 28 अप्रैल 2016

प्रश्न


   अमेरीकी गृह युद्ध के कुछ वर्ष पश्चात जनरल ल्यु वॉलेस का ट्रेन में यात्रा करते हुए कर्नल रॉबर्ट इन्गरसौल से सामना हुआ। इन्गरसौल 19वीं शताबदी के प्रमुख नास्तिकवादियों में से एक थे, जबकि ल्यु वॉलेस प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास करते थे। परस्पर बातचीत के दौरान, वार्तालाप उनके आपसी आत्मिक मतभेदों की ओर मुड़ी, और वॉलेस को एहसास हुआ कि वे इन्गरसौल द्वारा उठाए जा रहे प्रश्नों और शंकाओं के समुचित उत्तर नहीं दे पा रहे हैं। अपने विश्वास की जानकारी और समझ के बारे में अपनी कमी से शर्मिंदा होकर ल्यु वॉलेस ने उत्तरों को परमेश्वर के वचन बाइबल तथा प्रभु यीशु मसीह के जीवन काल के समय के संबंधित ऐतिहासिक द्स्तावेज़ों से खोजना आरंभ किया। उनकी इस खोज से मिले उत्तरों को उन्होंने एक ऐतिहासिक उपन्यास Ben-Hur: A Tale of Christ के रूप में प्रस्तुत किया और जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह की सच्चाई की विश्वस्त घोषणा करी।

   हमारे मसीही विश्वास को स्वीकार ना करने वाले लोगों द्वारा उठाए जाने वाले प्रश्नों को हमें अपने विश्वास के लिए खतरा या धमकी नहीं समझना चाहिए। वरन इसे अपने मसीही विश्वास को और गहराई से जानने और समझने, तथा किसी अन्य के द्वारा जब ऐसे ही प्रश्न उठाए जाएं तो प्रेम और बुद्दिमता से उनका कैसे उत्तर दिया जाए यह सीखने का एक अवसर समझना चाहिए। बाइबल में प्रेरित पतरस ने परमेश्वर की बातों को सीखते-समझते रहने के लिए लिखा है: "...और जो कोई तुम से तुम्हारी आशा के विषय में कुछ पूछे, तो उसे उत्तर देने के लिये सर्वदा तैयार रहो, पर नम्रता और भय के साथ" (1 पतरस 3:15)।

   ज़रूरी नहीं है कि हमारे पास हर एक के प्रत्येक प्रश्न का उत्तर हो; लेकिन हमारे पास ऐसा विश्वास, हिम्मत और संकल्प अवश्य होना चाहिए जो हमें मसीह यीशु के प्रेम और आशा को दूसरों के साथ बाँटने की सामर्थ देता है। - बिल क्राउडर


जीवन के बड़े-से-बड़े प्रश्न का एकमात्र उत्तर प्रभु यीशु मसीह में है।

क्योंकि उसके ईश्वरीय सामर्थ ने सब कुछ जो जीवन और भक्ति से सम्बन्‍ध रखता है, हमें उसी की पहचान के द्वारा दिया है, जिसने हमें अपनी ही महिमा और सद्गुण के अनुसार बुलाया है। - 2 पतरस 1:3

बाइबल पाठ: 1 पतरस 3:8-17
1 Peter 3:8 निदान, सब के सब एक मन और कृपामय और भाईचारे की प्रीति रखने वाले, और करूणामय, और नम्र बनो। 
1 Peter 3:9 बुराई के बदले बुराई मत करो; और न गाली के बदले गाली दो; पर इस के विपरीत आशीष ही दो: क्योंकि तुम आशीष के वारिस होने के लिये बुलाए गए हो। 
1 Peter 3:10 क्योंकि जो कोई जीवन की इच्छा रखता है, और अच्‍छे दिन देखना चाहता है, वह अपनी जीभ को बुराई से, और अपने होंठों को छल की बातें करने से रोके रहे। 
1 Peter 3:11 वह बुराई का साथ छोड़े, और भलाई ही करे; वह मेल मिलाप को ढूंढ़े, और उस के यत्‍न में रहे। 
1 Peter 3:12 क्योंकि प्रभु की आंखे धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान उन की बिनती की ओर लगे रहते हैं, परन्तु प्रभु बुराई करने वालों के विमुख रहता है।
1 Peter 3:13 और यदि तुम भलाई करने में उत्तेजित रहो तो तुम्हारी बुराई करने वाला फिर कौन है? 
1 Peter 3:14 और यदि तुम धर्म के कारण दुख भी उठाओ, तो धन्य हो; पर उन के डराने से मत डरो, और न घबराओ। 
1 Peter 3:15 पर मसीह को प्रभु जान कर अपने अपने मन में पवित्र समझो, और जो कोई तुम से तुम्हारी आशा के विषय में कुछ पूछे, तो उसे उत्तर देने के लिये सर्वदा तैयार रहो, पर नम्रता और भय के साथ। 
1 Peter 3:16 और विवेक भी शुद्ध रखो, इसलिये कि जिन बातों के विषय में तुम्हारी बदनामी होती है उनके विषय में वे, जो तुम्हारे मसीही अच्‍छे चालचलन का अपमान करते हैं लज्ज़ित हों। 
1 Peter 3:17 क्योंकि यदि परमेश्वर की यही इच्छा हो, कि तुम भलाई करने के कारण दुख उठाओ, तो यह बुराई करने के कारण दुख उठाने से उत्तम है।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 राजा 3-5
  • लूका 20:1-26


बुधवार, 27 अप्रैल 2016

प्रेम


   जब हैन्स ऐग्डे 1721 में मिशनरी होकर ग्रीनलैंड गए, तब वे वहाँ की स्थानीय इन्युइट लोगों की भाषा नहीं जानते थे। साथ ही, क्योंकि वे स्वभाव से अपना रौब बना कर रखने वाले थे, इस कारण उन्हें स्थानीय लोगों के प्रति प्रेम तथा दया दिखाने के लिए काफी प्रयास करना पड़ता था। सन 1733 में ग्रीनलैंड में चेचक की महामारी फैली जिससे दो तिहाई इन्युइट लोगों का सफाया हो गया; मृतकों में ऐग्डे की पत्नि भी थीं। इन्युइट लोगों के समान ही दुखः भोगने के इस अनुभव ने ऐग्डे के कठोर स्वभाव को पिघला दिया, और वे लोगों की शारीरिक तथा आत्मिक सेवा जी-जान से करने लगे। क्योंकि उनकी यह नई जीवन शैली परमेश्वर के प्रेम की उन बातों के अनुरूप थी जिन्हें वे लोगों को बताते और सुनाते थे, इन्युइट लोग जान और समझ सके कि परमेश्वर उन से भी प्रेम करता है, उनका भला चाहता है। अपने दुखः के समय में भी वे लोग परमेश्वर की ओर मुड़े और उसे ग्रहण किया।

   हो सकता है कि इस घटना के इन्युइट लोगों के समान आप की भी स्थिति हो, और आप अपने आस-पास के लोगों में परमेश्वर और उसके प्रेम को नहीं देख पा रहे हों। या, हो सकता है कि आप हैन्स ऐग्डे के समान हों, जो परमेश्वर के प्रेम को अपने जीवन से ऐसे जी कर दिखाने के लिए संघर्ष कर रहे थे जिससे लोग परमेश्वर की ओर मुड़ें।

   क्योंकि परमेश्वर जानता है कि हम मनुष्य कमज़ोर और ज़रुरतमन्द हैं, इसलिए अपने प्रेम को हमें दिखाने और समझाने के लिए परमेश्वर ने अपने पुत्र प्रभु यीशु मसीह को हमारे पापों के निवारण के लिए बलिदान होने को भेजा (यूहन्ना 3:16)। हमारी भलाई के लिए अपने निष्पाप और निष्कलंक पुत्र के बलिदान कर देने के द्वारा परमेश्वर ने सप्रमाण दिखाया कि वह हम से कितना प्रेम करता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में 1 कुरिन्थियों 13 में लिखित प्रेम की व्याख्या का सदेह उदाहरण प्रभु यीशु मसीह हैं। केवल प्रभु यीशु से ही हम सच्चा निस्वार्थ प्रेम करने का अर्थ सीखते हैं और उसे अपना उद्धारकर्ता ग्रहण करने से हम उससे दूसरों के प्रति सच्चा प्रेम करने की सामर्थ पाते हैं। - रैंडी किलगोर


मैं कभी किसी के लिए परमेश्वर के स्वरूप को देखने से बाधित करने वाली बाधा ना बनूँ।

क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। - यूहन्ना 3:16

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 13:1-13
1 Corinthians 13:1 यदि मैं मनुष्यों, और सवर्गदूतों की बोलियां बोलूं, और प्रेम न रखूं, तो मैं ठनठनाता हुआ पीतल, और झंझनाती हुई झांझ हूं। 
1 Corinthians 13:2 और यदि मैं भविष्यद्वाणी कर सकूं, और सब भेदों और सब प्रकार के ज्ञान को समझूं, और मुझे यहां तक पूरा विश्वास हो, कि मैं पहाड़ों को हटा दूं, परन्तु प्रेम न रखूं, तो मैं कुछ भी नहीं। 
1 Corinthians 13:3 और यदि मैं अपनी सम्पूर्ण संपत्ति कंगालों को खिला दूं, या अपनी देह जलाने के लिये दे दूं, और प्रेम न रखूं, तो मुझे कुछ भी लाभ नहीं। 
1 Corinthians 13:4 प्रेम धीरजवन्‍त है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं। 
1 Corinthians 13:5 वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता। 
1 Corinthians 13:6 कुकर्म से आनन्‍दित नहीं होता, परन्तु सत्य से आनन्‍दित होता है। 
1 Corinthians 13:7 वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है। 
1 Corinthians 13:8 प्रेम कभी टलता नहीं; भविष्यद्वाणियां हों, तो समाप्‍त हो जाएंगी, भाषाएं हो तो जाती रहेंगी; ज्ञान हो, तो मिट जाएगा। 
1 Corinthians 13:9 क्योंकि हमारा ज्ञान अधूरा है, और हमारी भविष्यद्वाणी अधूरी। 
1 Corinthians 13:10 परन्तु जब सवर्सिद्ध आएगा, तो अधूरा मिट जाएगा। 
1 Corinthians 13:11 जब मैं बालक था, तो मैं बालकों की नाईं बोलता था, बालकों का सा मन था बालकों की सी समझ थी; परन्तु सियाना हो गया, तो बालकों की बातें छोड़ दी। 
1 Corinthians 13:12 अब हमें दर्पण में धुंधला सा दिखाई देता है; परन्तु उस समय आमने साम्हने देखेंगे, इस समय मेरा ज्ञान अधूरा है; परन्तु उस समय ऐसी पूरी रीति से पहिचानूंगा, जैसा मैं पहिचाना गया हूं। 
1 Corinthians 13:13 पर अब विश्वास, आशा, प्रेम थे तीनों स्थाई है, पर इन में सब से बड़ा प्रेम है।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 राजा 1-2
  • लूका 19:28-48


मंगलवार, 26 अप्रैल 2016

नम्र


   मैंने एक रोचक वीडियो देखा - एक पिल्ला, डेज़ी, सीढ़ी के ऊपरी छोर पर खड़ा है, भयभीत है और सीढ़ियों से नीचे नहीं आ पा रही है। नीचे बहुत से लोग खड़े उसे बुला रहे हैं, प्रोत्साहित कर रहे हैं किंतु वह नीचे नहीं उतरना समझ नहीं पा रही है। वह चाह तो रही है कि नीचे की ओर आए किंतु उसका भय उसे यह करने नहीं दे रहा है। फिर एक बड़ा कुत्ता, साइमन, डेज़ी की सहायता के लिए आता है। साइमन भाग कर सीढ़ियाँ चढ़ता हुआ डेज़ी के पास आता है और फिर वापस नीचे की ओर जाता है, डेज़ी को दिखाता है कि ऐसा करना कितना सरल है। डेज़ी अभी भी भयभीत है और नहीं कर पा रही है; साइमन फिर से उसके पास आता है और अबकी बार और धीरे से उसे उतर कर दिखाता है, डेज़ी को प्रोत्साहित करता है, किंतु डेज़ी अभी भी हिचकिचा रही है। साइमन फिर से उसके पास जाता है और डेज़ी को नीचे उतरने का तरीका करके दिखाता है। अन्ततः डेज़ी की हिम्मत बंधती है, वह हिम्मत करके अपने पिछले पैरों को अगले पैरों के साथ मिला कर निचली सीढ़ी पर आ जाती है, साइमन उसके साथ ही बना रहता है, फिर ऐसे ही प्रयास करते हुए डेज़ी सीढ़ियाँ उतरना सीख लेती है; और सभी आनन्दित होते हैं।

   शिष्यता सिखाने का यह एक बहुत सुन्दर वीडियो था। हम अपना बहुत सा समय दूसरों को ऊपर चढ़ना सिखाने में बिता देते हैं, लेकिन अधिक आवश्यक और अधिक कठिन है दूसरों को सिखाना कि नम्र होकर कैसे अपने आप को नीचा किया जाए। बाइबल में सभी स्थानों पर हम पाते हैं कि परमेश्वर ने अपने लोगों से नम्रता का स्वभाव चाहा है, अनेक स्थानों पर परमेश्वर ने स्वयं अपने आप को नीचा कर के नम्रता का यह पाठ पढ़ाया है (निर्गमन 3:7-8; 19:10-12; मीका 1:3)। और जब जब परमेश्वर के लोग नम्र हुए हैं, परमेश्वर ने उनके अपराधों को क्षमा किया और उनके दण्ड को टाल दिया (2 इतिहास 12:7)। 

    परमेश्वर के वचन बाइबल मात्र में ही हम पाते हैं कि कैसे परमेश्वर ने, प्रभु यीशु के रूप में, अपने ही उदाहराण द्वारा, हमें नम्र होना, सहनशील तथा धैर्यवान होना, दुशमनों तथा विरोधियों के प्रति भी क्षमाशील होना और अपने आप को दूसरों के हित के लिए बलिदान कर देना स्वयं अपने जीवन में करके दिखाया तथा सिखाया है। क्योंकि प्रभु यीशु ने अपने आप को सबसे अधिक दीन और नम्र कर लिया, इसीलिए उसे सृष्टि में सबसे अधिक महिमामय और गौर्वपूर्ण स्थान भी मिला है; अन्ततः उसी के सामने सृष्टि का हर घुटना झुकेगा और और प्रत्येक जीभ उसकी प्रभुता का अंगीकार करेगी (फिलिप्पियों 2:10-11)। - जूली ऐकैरमैन लिंक


जब तक कोई नम्र होना नहीं सीख लेता, वह अन्य कुछ भी नहीं सीख सकता।

जब यहोवा ने देखा कि वे दीन हुए हैं, तब यहोवा का यह वचन शमायाह के पास पहुंचा कि वे दीन हो गए हैं, मैं उन को नष्ट न करूंगा; मैं उनका कुछ बचाव करूंगा, और मेरी जलजलाहट शीशक के द्वारा यरूशलेम पर न भड़केगी। - 2 इतिहास 12:7

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 2:1-11
Philippians 2:1 सो यदि मसीह में कुछ शान्‍ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करूणा और दया है। 
Philippians 2:2 तो मेरा यह आनन्द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो। 
Philippians 2:3 विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो। 
Philippians 2:4 हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे। 
Philippians 2:5 जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो। 
Philippians 2:6 जिसने परमेश्वर के स्‍वरूप में हो कर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा। 
Philippians 2:7 वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया। 
Philippians 2:8 और मनुष्य के रूप में प्रगट हो कर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली। 
Philippians 2:9 इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है। 
Philippians 2:10 कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे है; वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें।
Philippians 2:11 और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है।
Philippians 2:11 और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 23-24
  • लूका 19:1-27


सोमवार, 25 अप्रैल 2016

जीवन का दान


   मुझे शीघ्र ही पता चल गया कि समुद्री मछलियों को पालने के लिए समुद्री जल के अक्वेरियम की देख-रेख करना कोई सरल कार्य नहीं है। मुझे इसके लिए एक रासयनिक प्रयोगशाला बना कर रखनी पड़ी जिसमें पानी के विभिन्न तत्वों और लवणों की मात्रा बारंबार जाँची जाती और उसके अनुसार आवश्यक तत्व और लवण समय-समय पर पानी में मिलाए जाते। पानी को साफ और मछलियों को स्वस्थ रखने के लिए पानी में आवश्यकतानुसार विटामिन, एन्ज़ाईम्स, और किटाणुरोधक एन्टिबायोटिक्स तथा सल्फा ड्रग्स मिलाए जाते; पानी को विभिन्न प्रकार की रासायनिक छलनियों से निकाला जाता जिससे वह छनकर साफ हो जाए और उसमें यदि कोई हानिकारक वस्तु विद्यमान हो तो वह निकल जाए।

   इतनी मेहनत करने के पश्चात आप सोचेंगे कि मेरी पालतु समुद्री मछलियाँ मेरे प्रति आभारी रहती होंगी; जी नहीं! उन्हें खाना डालने के लिए जैसे ही मेरी परछाईं भी उनके पानी पर पड़ती वे सबसे निकट के कोने या पत्थर के पीछे छिपने के लिए भाग लेतीं। मेरा आकार उनके लिए बहुत बड़ा था और मेरी गतिविधियां बहुत रहस्यमय तथा उनकी समझ के बाहर थीं। वे नहीं पहचान पा रही थीं कि मेरे सभी कार्य उनके प्रति मेरे प्रेम के कारण थे, उनकी भलाई के लिए थे। मेरे प्रति उनकी गलतफहमियों को दूर करने के लिए मुझे उनके समान बनकर, उनके मध्य में जाकर, उनसे उन्हीं की भाषा में बात करनी थी, लेकिन ऐसा कर पाना मेरे लिए असंभव है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के अनुसार, इस सृष्टि के सृष्टिकर्ता परमेश्वर ने यही असंभव कार्य हमारे लिए करा। वह हमारे लिए मानव रूप में, एक शिशु बनकर आ गया। यूहन्ना लिखता है कि "वह जगत में था, और जगत उसके द्वारा उत्पन्न हुआ, और जगत ने उसे नहीं पहिचाना" (यूहन्ना 1:10) इसलिए उसी परमेश्वर ने जिसने सब कुछ रचा था, स्वयं अपनी रचना का स्वरूप ले लिया; मानों एक नाटककार स्वयं अपने ही नाटक का पात्र बन गया "और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण हो कर हमारे बीच में डेरा किया..." (यूहन्ना 1:14)। परमेश्वर ने प्रभु यीशु के रूप में हमसे बातें करीं, हमें अपनी योजना और कार्यविधि समझाई, हमारे पापों के निवारण के लिए अपना बलिदान दिया और तीसरे दिन मृतकों में से पुनः जीवित हो उठा; और आज वह जीवित परमेश्वर हमारी प्रतीक्षा कर रहा है कि हम पश्चाताप और समर्पण के साथ उसके पास स्वेच्छा से आएं और उससे उद्धार एवं अनन्त जीवन का दान पाएं। - फिलिप यैन्सी


परमेश्वर ने मानव इतिहास में प्रवेश किया ताकि मानव जाति को उद्धार और अनन्त जीवन मिल सके।

और किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिस के द्वारा हम उद्धार पा सकें। - प्रेरितों 4:12

बाइबल पाठ: यूहन्ना 1:6-14
John 1:6 एक मनुष्य परमेश्वर की ओर से आ उपस्थित हुआ जिस का नाम यूहन्ना था। 
John 1:7 यह गवाही देने आया, कि ज्योति की गवाही दे, ताकि सब उसके द्वारा विश्वास लाएं। 
John 1:8 वह आप तो वह ज्योति न था, परन्तु उस ज्योति की गवाही देने के लिये आया था। 
John 1:9 सच्ची ज्योति जो हर एक मनुष्य को प्रकाशित करती है, जगत में आनेवाली थी। 
John 1:10 वह जगत में था, और जगत उसके द्वारा उत्पन्न हुआ, और जगत ने उसे नहीं पहिचाना। 
John 1:11 वह अपने घर आया और उसके अपनों ने उसे ग्रहण नहीं किया। 
John 1:12 परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। 
John 1:13 वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं। 
John 1:14 और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण हो कर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उस की ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 21-22
  • लूका 18:24-43


रविवार, 24 अप्रैल 2016

सदा साथ


   बचपन का मेरा एक बहुत पसन्दीदा खेल था घर के निकट के एक पार्क में सीसौ पर खेलना। एक बच्चा, बीच में घिरनी लगे लंबे से लकड़ी के तख्ते के एक किनारे पर बैठता, और दूसरा बच्चा दूसरे किनारे पर, और दोनों एक दूसरे को बारी-बारी ऊपर उछालते। कभी-कभी जो नीचे होता वह तख्ते के अपने छोर नीचे ही रखे रहता और दूसरे छोर पर जो ऊपर होता वह नीचे लाए जाने के लिए चिल्लाता रहता। लेकिन इससे भी क्रूर तब होता था जब नीचे के छोर वाल तख्ते से एकदम हट जाता और ऊपर के छोर वाला धड़ाम से नीचे आकर धरती से टकराता, चोटिल हो जाता था।

   कभी-कभी हमें लगता है कि प्रभु यीशु ने भी हमारे साथ ऐसा ही किया है। हमने उसपर विश्वास किया कि वह सदा हमारे साथ बना रहेगा, जीवन के उतार-चढ़ाव में हमारा साथ देता रहेगा; लेकिन ऐसा भी होता है कि जीवन अनायास ही कोई अनेपक्षित मोड़ ले लेता है और हम दुःखी तथा चोटिल हो कर रह जाते हैं; हमें लगता है कि प्रभु हमारे जीवनों को छोड़कर चला गया है और हम धड़ाम से नीचे गिर गए हैं।

   लेकिन परमेश्वर के वचन बाइबल में विलापगीत का तीसरा अध्याय हमें स्मरण दिलाता है, "हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है" (विलापगीत 3:22); अर्थात, परमेश्वर हमारे प्रति हर बात में हर समय विश्वासयोग्य है, चाहे हमें लगे कि सब कुछ समाप्त होता जा रहा है। चाहे हम अपने आप को अकेला अनुभव करें, दुःख में पाएं, तो भी हम अकेले कभी नहीं हैं। चाहे हम उसकी उपस्थिति को अनुभव ना भी करें, तो भी हमारा प्रभु परमेश्वर हमारे साथ बना रहता है, वह हमारा परमविश्वासयोग्य साथी है जो हमें छोड़ कर कभी नहीं जाता, जो कभी हमें नीचे गिरने नहीं देता। - जो स्टोवैल


चाहे सभी साथ छोड़ दें, किंतु प्रभु यीशु कभी साथ नहीं छोड़ता।

तू हियाव बान्ध और दृढ़ हो, उन से न डर और न भयभीत हो; क्योंकि तेरे संग चलने वाला तेरा परमेश्वर यहोवा है; वह तुझ को धोखा न देगा और न छोड़ेगा। व्यवस्थाविवरण 31:6

बाइबल पाठ: विलापगीत 3:13-26
Lamentations 3:13 उसने अपनी तीरों से मेरे हृदय को बेध दिया है; 
Lamentations 3:14 सब लोग मुझ पर हंसते हैं और दिन भर मुझ पर ढालकर गीत गाते हैं, 
Lamentations 3:15 उसने मुझे कठिन दु:ख से भर दिया, और नागदौना पिलाकर तृप्त किया है। 
Lamentations 3:16 उसने मेरे दांतों को कंकरी से तोड़ डाला, और मुझे राख से ढांप दिया है; 
Lamentations 3:17 और मुझ को मन से उतार कर कुशल से रहित किया है; मैं कल्याण भूल गया हूँ; 
Lamentations 3:18 इसलिऐ मैं ने कहा, मेरा बल नाश हुआ, और मेरी आश जो यहोवा पर थी, वह टूट गई है। 
Lamentations 3:19 मेरा दु:ख और मारा मारा फिरना, मेरा नागदौने और-और विष का पीना स्मरण कर! 
Lamentations 3:20 मैं उन्हीं पर सोचता रहता हूँ, इस से मेरा प्राण ढला जाता है। 
Lamentations 3:21 परन्तु मैं यह स्मरण करता हूँ, इसीलिये मुझे आाशा है: 
Lamentations 3:22 हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है। 
Lamentations 3:23 प्रति भोर वह नई होती रहती है; तेरी सच्चाई महान है। 
Lamentations 3:24 मेरे मन ने कहा, यहोवा मेरा भाग है, इस कारण मैं उस में आशा रखूंगा। 
Lamentations 3:25 जो यहोवा की बाट जोहते और उसके पास जाते हैं, उनके लिये यहोवा भला है। 
Lamentations 3:26 यहोवा से उद्धार पाने की आशा रख कर चुपचाप रहना भला है।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 19-20
  • लूका 18:1-23


शनिवार, 23 अप्रैल 2016

आशा और आनन्द


   कुछ दिन पहले मैंने अपने बुज़ुर्ग मित्र बॉब को निकट की एक व्यायामशाला में अपनी ऊँगली पर लगे रक्तचाप मापक यंत्र पर नज़रें गड़ाए हुए, पूरी ताकत से साईकिल चलाते देखा। मैंने उससे पूछा, "यह तुम क्या कर रहे हो?" उसने चढ़ी हुई साँस से भारी हो रखी आवाज़ में व्यंग्य किया, "देख रहा हूँ कि मैं ज़िंदा हूँ या नहीं!" मैंने भी उसी अंदाज़ में एक और प्रश्न पूछा, "और यदि तुम्हें पता चले कि तुम मर चुके हो, तो क्या करोगे?" तो उसने एक बड़ी सी मुस्कुराहट के साथ कहा, "मैं ज़ोर से चिल्लाऊँगा "हालेलुईया" (अर्थात, प्रभु की स्तुति हो)!"

   अनेक वर्षों से उसके साथ रहते हुए मैंने बॉब में एक अद्भुत भीतरी सामर्थ के अनेक चिन्ह देखे हैं: उस की शारीरिक शक्ति के कम होते, और परेशानियों के बढ़ते जाने पर भी उसमें बड़े धैर्य से सहने की सामर्थ है; और अब जब वह अपनी शारीरिक जीवन यात्रा की समाप्ति की ओर बढ़ रहा है उसमें आशा और विश्वास की कोई घटी नज़र नहीं आती। ना केवल उसके पास अद्भुत आशा है, वरन उसे मृत्यु से भी कोई भय नहीं लगता; मृत्यु की संभावना उस के जोश को दबा नहीं पाती।

   मृत्यु के सामने भी आशा और शान्ति, तथा आनन्द को भी भला कौन बनाए रख सकता है? केवल वे जो विश्वास द्वारा अनन्तकाल के परमेश्वर से जुड़ चुके हैं और जानते हैं कि उनके पास अनन्तकाल की आशा है (1 कुरिन्थियों 15:52, 54)। जिनके पास यह आश्वासन है, उनके लिए भी, मेरे मित्र बॉब के समान ही, मृत्यु का कोई भय बाकी नहीं है, वरन वे मृत्योप्रांत तुरंत ही प्रभु यीशु मसीह को साक्षात देखने के आनन्द के बारे में बता सकते हैं।

   मृत्यु से भयभीत क्यों हों, या रहें? इसके विपरीत आनन्दित क्यों ना हों? जैसा के कवि जौन डौन (1572-1631) ने लिखा, "नींद का एक छोटा सा पल और फिर हम अनन्तकाल के लिए जागृत रहेंगे।" - डेविड रोपर


एक मसीही विश्वासी के लिए, स्वर्ग की प्रातः से पूर्व, मृत्यु संसार रात की अन्तिम छाया है।

इसलिये जब कि लड़के मांस और लोहू के भागी हैं, तो वह आप भी उन के समान उन का सहभागी हो गया; ताकि मृत्यु के द्वारा उसे जिसे मृत्यु पर शक्ति मिली थी, अर्थात शैतान को निकम्मा कर दे। और जितने मृत्यु के भय के मारे जीवन भर दासत्‍व में फंसे थे, उन्हें छुड़ा ले। इब्रानियों 2:14-15

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 15:50-58
1 Corinthians 15:50 हे भाइयों, मैं यह कहता हूं कि मांस और लोहू परमेश्वर के राज्य के अधिकारी नहीं हो सकते, और न विनाश अविनाशी का अधिकारी हो सकता है। 
1 Corinthians 15:51 देखे, मैं तुम से भेद की बात कहता हूं: कि हम सब तो नहीं सोएंगे, परन्तु सब बदल जाएंगे। 
1 Corinthians 15:52 और यह क्षण भर में, पलक मारते ही पिछली तुरही फूंकते ही होगा: क्योंकि तुरही फूंकी जाएगी और मुर्दे अविनाशी दशा में उठाए जांएगे, और हम बदल जाएंगे। 
1 Corinthians 15:53 क्योंकि अवश्य है, कि यह नाशमान देह अविनाश को पहिन ले, और यह मरनहार देह अमरता को पहिन ले। 
1 Corinthians 15:54 और जब यह नाशमान अविनाश को पहिन लेगा, और यह मरनहार अमरता को पहिन लेगा, तक वह वचन जो लिखा है, पूरा हो जाएगा, कि जय ने मृत्यु को निगल लिया। 
1 Corinthians 15:55 हे मृत्यु तेरी जय कहां रही? 
1 Corinthians 15:56 हे मृत्यु तेरा डंक कहां रहा? मृत्यु का डंक पाप है; और पाप का बल व्यवस्था है। 
1 Corinthians 15:57 परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा हमें जयवन्‍त करता है। 
1 Corinthians 15:58 सो हे मेरे प्रिय भाइयो, दृढ़ और अटल रहो, और प्रभु के काम में सर्वदा बढ़ते जाओ, क्योंकि यह जानते हो, कि तुम्हारा परिश्रम प्रभु में व्यर्थ नहीं है।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 16-18
  • लूका 17:20-37


शुक्रवार, 22 अप्रैल 2016

कृपा


   कुछ मित्रों के साथ यात्रा करते हुए हमने मार्ग के किनारे एक परिवार को बेबस सा खड़ा हुआ देखा। मेरे मित्रों ने तुरंत सड़क के किनारे होकर अपनी गाड़ी रोकी और उस परिवार की सहायता के लिए उनके पास पहुँचे। उन्होंने उस परिवार की गाड़ी की जांच-पड़ताल करी, उसे पुनः चालू किया और उन लोगों को पैट्रोल भरवाने के लिए कुछ पैसे भी दिए। जब परिवार की माँ बारंबार उनका धन्यवाद करने लगी, तो मेरे मित्रों ने उत्तर दिया, "आपकी सहायाता करके हमें आनन्द मिला है, और हम यह सब प्रभु यीशु के नाम में कर रहे हैं।" जब हम अपनी गाड़ी में बैठकर आगे बढ़े तो मैं विचार करने लागा कि मेरे उन मित्रों के लिए ज़रूरतमन्दों की सहायता करना और अपनी उदारता का स्त्रोत प्रभु यीशु मसीह को बताना कितना स्वाभाविक था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के दो पात्र, प्रभु यीशु के चेले, पतरस और यूहन्ना ने भी आनन्दपूर्वक यरूशालेम के मन्दिर के बाहर बैठे जन्म के लंगड़े भिखारी के प्रति ऐसे ही उदारता दिखाई, और उसे चंगाई दी (प्रेरितों 3:1-10)। इस कारण उन्हें पकड़ कर अधिकारियों के सामने प्रस्तुत किया गया जिन्होंने उनसे पूछा, "...तुम ने यह काम किस सामर्थ से और किस नाम से किया है" (प्रेरितों 4:7)? इस पर पतरस ने उत्तर दिया, "हे लोगों के सरदारों और पुरनियों, इस दुर्बल मनुष्य के साथ जो भलाई की गई है, यदि आज हम से उसके विषय में पूछ पाछ की जाती है, कि वह क्योंकर अच्छा हुआ। तो तुम सब और सारे इस्त्राएली लोग जान लें कि यीशु मसीह नासरी के नाम से जिसे तुम ने क्रूस पर चढ़ाया, और परमेश्वर ने मरे हुओं में से जिलाया, यह मनुष्य तुम्हारे साम्हने भला चंगा खड़ा है" (प्रेरितों 4:9-10)।

   कृपा परमेश्वर के पवित्र आत्मा से मिलने वाले फलों में से एक फल है (गलतियों 5:23), और हम मसीही विश्वासियों के लिए औरों के साथ प्रभु यीशु मसीह के बारे में बाँटने का एक बहुत सामर्थी संदर्भ बना कर देती है। - डेविड मैक्कैसलैंड


कृपा का एक कार्य परमेश्वर के प्रेम के बारे में अनेकों उपदेशों से कहीं अधिक सिखा सकता है।

पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज, और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई भी व्यवस्था नहीं। - गलतियों 5:22-23

बाइबल पाठ: प्रेरितों 4:1-13
Acts 4:1 जब वे लोगों से यह कह रहे थे, तो याजक और मन्दिर के सरदार और सदूकी उन पर चढ़ आए। 
Acts 4:2 क्योंकि वे बहुत क्रोधित हुए कि वे लोगों को सिखाते थे और यीशु का उदाहरण दे देकर मरे हुओं के जी उठने का प्रचार करते थे। 
Acts 4:3 और उन्होंने उन्हें पकड़कर दूसरे दिन तक हवालात में रखा क्योंकि सन्‍धया हो गई थी। 
Acts 4:4 परन्तु वचन के सुनने वालों में से बहुतों ने विश्वास किया, और उन की गिनती पांच हजार पुरूषों के लगभग हो गई।
Acts 4:5 दूसरे दिन ऐसा हुआ कि उन के सरदार और पुरिनये और शास्त्री। 
Acts 4:6 और महायाजक हन्ना और कैफा और यूहन्ना और सिकन्‍दर और जितने महायाजक के घराने के थे, सब यरूशलेम में इकट्ठे हुए। 
Acts 4:7 और उन्हें बीच में खड़ा कर के पूछने लगे, कि तुम ने यह काम किस सामर्थ से और किस नाम से किया है? 
Acts 4:8 तब पतरस ने पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो कर उन से कहा। 
Acts 4:9 हे लोगों के सरदारों और पुरनियों, इस दुर्बल मनुष्य के साथ जो भलाई की गई है, यदि आज हम से उसके विषय में पूछ पाछ की जाती है, कि वह क्योंकर अच्छा हुआ। 
Acts 4:10 तो तुम सब और सारे इस्त्राएली लोग जान लें कि यीशु मसीह नासरी के नाम से जिसे तुम ने क्रूस पर चढ़ाया, और परमेश्वर ने मरे हुओं में से जिलाया, यह मनुष्य तुम्हारे साम्हने भला चंगा खड़ा है। 
Acts 4:11 यह वही पत्थर है जिसे तुम राजमिस्त्रियों ने तुच्‍छ जाना और वह कोने के सिरे का पत्थर हो गया। 
Acts 4:12 और किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिस के द्वारा हम उद्धार पा सकें।
Acts 4:13 जब उन्होंने पतरस और यूहन्ना का हियाव देखा, ओर यह जाना कि ये अनपढ़ और साधारण मनुष्य हैं, तो अचम्भा किया; फिर उन को पहचाना, कि ये यीशु के साथ रहे हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 14-15
  • लूका 17:1-19