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शनिवार, 11 जून 2016

ईमानदार


   एक कब्रिस्तान में एक दिन मैंने एक सुन्दर नक्काशी करी हुई कब्र पर एक अनूठा समाधि-लेख देखा; उस पर लिखा था " जे. हौलगेट: एक ईमानदार व्यक्ति"। मैं इस व्यक्ति हौलगेट या उसके जीवन के बारे में कुछ नहीं जानता, लेकिन जैसी सुन्दर उसकी कब्र बनाई गई थी उससे यही लगता है कि वह कोई समृद्ध व्यक्ति रहा होगा, और उसने अपने जीवनकाल में भरपूरी से प्राप्त किया होगा। लेकिन मृत्योपरांत उसके स्मारक पर उसके लिए केवल एक ही बात याद करी गई "एक ईमानदार व्यक्ति"। प्रगट है कि हौलगेट अपनी सभी उपलब्धियों से बढ़कर अपनी ईमानदारी के लिए जाना जाता था।

   युनानी दार्शनिक डायोजिनीस ने अपना जीवनकाल ईमानदारी की खोज में लगा दिया और अन्ततः इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि कोई ईमानदार व्यक्ति मिल नहीं सकता। किसी भी युग में ईमानदार लोगों को खोज पाना कठिन कार्य रहा है, परन्तु ईमानदारी बहुत महत्वपूर्ण गुण है। खरे जीवन के लिए ईमानदारी सर्वोत्त्म नीति नहीं, वरन एकमात्र नीति है; ईमानदारी ही परमेश्वर की उपस्थिति में रहने और चलने वाले व्यक्ति की पहचान करवाती है। परमेश्वर के वचन बाइबल में दाऊद ने प्रश्न किया, "हे परमेश्वर तेरे तम्बू में कौन रहेगा? तेरे पवित्र पर्वत पर कौन बसने पाएगा?" (भजन 15:1); और फिर आगे इन प्रश्नों के उत्तर को भी लिखा।

   मैं अपने आप से पूछता हूँ: क्या मैं अपने जीवन की सभी बातों में विश्वासयोग्य एवं आदरणीय हूँ? क्या मेरे सभी शब्द सदा सच्चे ही होते हैं? क्या मैं सत्य को सप्रेम बोलता हूँ? क्या उन्हें प्रभावी बनाने के लिए या अपने स्वार्थ के लिए मैं तथ्यों को यदा-कदा तोड़-मरोड़ कर, या फिर बढ़ा-चढ़ाकर तो नहीं प्रस्तुत करता हूँ?

   यदि ऐसा है तो मुझे परमेश्वर की ओर संपूर्ण विश्वास के साथ फिरने और उससे क्षमा माँगने की आवश्यकता है; साथ ही उससे एक पूर्णत्या अच्छा और ईमानदार हृदय भी माँगना है जिस से ईमानदारी मेरे जीवन और चरित्र का एक अभिन्न अंग बन जाए। हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि, "...हे मेरे परमेश्वर! मैं जानता हूँ कि तू मन को जांचता है और सिधाई से प्रसन्न रहता है..." (1 इतिहास 29:17)।

   मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल का आशवासन है कि जिसने मेरे जीवन में यह उत्त्म कार्य आरंभ किया है, वह इस कार्य को मेरे जीवन में पूरा भी करेगा (फिलिप्पियों 1:6)। - डेविड रोपर


ऐसा जीवन जीऐं कि जब लोग ईमानदारी और सत्यनिष्ठा के बारे में सोचें, 
तो उन्हें आपके जीवन तथा चरित्र का ध्यान आए।

और मुझे इस बात का भरोसा है, कि जिसने तुम में अच्छा काम आरम्भ किया है, वही उसे यीशु मसीह के दिन तक पूरा करेगा। - फिलिप्पियों 1:6

बाइबल पाठ: भजन 15
Psalms 15:1 हे परमेश्वर तेरे तम्बू में कौन रहेगा? तेरे पवित्र पर्वत पर कौन बसने पाएगा? 
Psalms 15:2 वह जो खराई से चलता और धर्म के काम करता है, और हृदय से सच बोलता है; 
Psalms 15:3 जो अपनी जीभ से निन्दा नहीं करता, और न अपने मित्र की बुराई करता, और न अपने पड़ोसी की निन्दा सुनता है; 
Psalms 15:4 वह जिसकी दृष्टि में निकम्मा मनुष्य तुच्छ है, और जो यहोवा के डरवैयों का आदर करता है, जो शपथ खाकर बदलता नहीं चाहे हानि उठानी पड़े; 
Psalms 15:5 जो अपना रूपया ब्याज पर नहीं देता, और निर्दोष की हानि करने के लिये घूस नहीं लेता है। जो कोई ऐसी चाल चलता है वह कभी न डगमगाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • एज़्रा 1-2
  • यूहन्ना 19:23-42


शुक्रवार, 10 जून 2016

मुकुट


   युनाइटिड किंगडम के राज मुकुट और ज़ेवर टावर ऑफ लंडन में गहन सुरक्षा में सैलानियों के देखने के लिए प्रदर्शित रखे रहते हैं। प्रति वर्ष लाखों लोग आकर इनको देखते हैं और इनकी भव्य सुन्दरता तथा बहुमूल्यता को सराहते हैं। ये राज मुकुट और ज़ेवर ना केवल साम्राज्य की सामर्थ के प्रतीक हैं, वरन उन्हें धारण करने वालों के ओहदे तथा शान को भी दर्शाते हैं। वे राज मुकुट तीन प्रकार के हैं - पहला है राज्याभिषेक के मुकुट, जो तब धारण किए जाते हैं जब कोई राजा बनता है; दूसरा है राज्य मुकुट जो विभिन्न राजसी तथा औपचारिक अवसरों पर धारण किए जाते हैं; और तीसरे हैं वे मुकुट जो राजा की पत्नि धारण करती है। विभिन्न मुकुट, विभिन्न उद्देश्यों के लिए हैं।

   स्वर्ग तथा सृष्टि के राजा, सृष्टि के सबसे महानतम मुकुट और सर्वोच्च आदर के हकदार, प्रभु यीशु ने, अपनी सृष्टि के लिए एक भिन्न ही प्रकार का मुकुट धारण किया। जब उसे क्रूस पर चढ़ाए जाने की प्रक्रिया चल रही थी, क्रूस पर चढ़ाए जाने के पहले के उसके अपमान और पीड़ा के समय में, "...सिपाहियों ने कांटों का मुकुट गूंथकर उसके सिर पर रखा..." (यूहन्ना 19:2)। उस दिन मुकुट को, जो सामान्यतः आदर और राज्याधिकार का प्रतीक होता है, अपमान, घृणा और उपहास का माध्यम बना दिया गया। लेकिन जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु ने समस्त मानव जाति के पाप और लज्जा को सहते हुए उस काँटों के मुकुट को भी बिना कोई प्रतिरोध दिखाए, स्वेच्छा से धारण कर लिया।

   वह जो सर्वश्रेष्ठ मुकुट का हकदार है, हमारे उद्धार और पाप क्षमा के लिए सबसे निकृष्ट मुकुट धारण करने से नहीं हिचकिचाया, जिस से कि हम उस पर विश्वास लाकर, उसे अपना जीवन समर्पण करके तथा उस से अपने पापों की क्षमा माँग कर उस से स्वर्गीय मुकुट प्राप्त करने तथा धारण करने के हकदार बन सकें (2 तिमुथियुस 4:8)। क्या आप उस स्वर्गीय मुकुट को धारण करने के लिए तैयार हैं? - बिल क्राउडर


क्रूस के कार्य के बिना कोई स्वर्गीय मुकुट नहीं है।

भविष्य में मेरे लिये धर्म का वह मुकुट रखा हुआ है, जिसे प्रभु, जो धर्मी, और न्यायी है, मुझे उस दिन देगा और मुझे ही नहीं, वरन उन सब को भी, जो उसके प्रगट होने को प्रिय जानते हैं। - 2 तिमुथियुस 4:8

बाइबल पाठ: यूहन्ना 19:1-8
John 19:1 इस पर पीलातुस ने यीशु को ले कर कोड़े लगवाए। 
John 19:2 और सिपाहियों ने कांटों का मुकुट गूंथकर उसके सिर पर रखा, और उसे बैंजनी वस्‍त्र पहिनाया। 
John 19:3 और उसके पास आ आकर कहने लगे, हे यहूदियों के राजा, प्रणाम! और उसे थप्पड़ भी मारे। 
John 19:4 तब पीलातुस ने फिर बाहर निकलकर लोगों से कहा, देखो, मैं उसे तुम्हारे पास फिर बाहर लाता हूं; ताकि तुम जानो कि मैं कुछ भी दोष नहीं पाता। 
John 19:5 तब यीशु कांटों का मुकुट और बैंजनी वस्‍त्र पहिने हुए बाहर निकला और पीलातुस ने उन से कहा, देखो, यह पुरूष। 
John 19:6 जब महायाजकों और प्यादों ने उसे देखा, तो चिल्लाकर कहा, कि उसे क्रूस पर चढ़ा, क्रूस पर: पीलातुस ने उन से कहा, तुम ही उसे ले कर क्रूस पर चढ़ाओ; क्योंकि मैं उस में दोष नहीं पाता। 
John 19:7 यहूदियों ने उसको उत्तर दिया, कि हमारी भी व्यवस्था है और उस व्यवस्था के अनुसार वह मारे जाने के योग्य है क्योंकि उसने अपने आप को परमेश्वर का पुत्र बनाया। 
John 19:8 जब पीलातुस ने यह बात सुनी तो और भी डर गया।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 34-36
  • यूहन्ना 19:1-22


गुरुवार, 9 जून 2016

उदार परमेश्वर


 बहुत साल पहले, जब हमारा परिवार शिकागो में रहता था, हमें वहाँ रहने के अनेकों लाभ मिलते रहते थे। उन लाभों की सूची के आरंभिक लाभों में से एक था वहाँ के रेस्टोराँ जो एक दुसरे से बढ़-चढ़कर अपने ग्राहकों को सन्तुष्ट करने के प्रयासों में लगे रहते थे - ना केवल भोजन की गुणवन्ता में वरन परोसे गए भोजन की मात्रा में भी! वहाँ का एक इटैलियन रेस्टोराँ ऐसा था जिसमें मैं और मेरी पत्नि अपने पसन्दीदा पास्ता को आधी मात्रा में मँगाते थे, और भरपेट खाने के बाद भी इतना बच जाता था कि हम उसे घर लाकर अगली रात्री के भोजन के लिए इस्तेमाल कर लेते थे। इतनी उदार मात्रा में मिलने वाली उस भोजन-सामग्री को पाकर हमें लगता था कि हम अपनी दादी के घर में हैं और खाना बना तथा परोसकर वे अपने प्रेम को हम पर उँडेल रही हैं।

   जब मैं परमेश्वर के वचन बाइबल में पढ़ता हूँ कि हमारे परमेश्वर पिता ने हम पर अपने अनुग्रह के धन को बहुतायत से उँडेला है (इफिसियों 1:7-8) और वह हमारे लिए "...हमारी बिनती और समझ से कहीं अधिक काम कर सकता है..." (इफिसियों 3:20) तो मुझे अपने ऊपर बहाई गई उसके प्रेम की भरपूरी का एहसास होता है। मैं बहुत धन्यवादी हूँ कि हमारा पिता परमेश्वर कोई कंजूस परमेश्वर नहीं है जो अपनी आशीषें थोड़ी-थोड़ी मात्रा में और संकोच के साथ हमें प्रदान करता है, और ना ही वह ऐसा परमेश्वर पिता है जिसे प्रसन्न करने और उससे कुछ प्राप्त करने के लिए मुझे अपने आप को कोई कष्ट या दुःख देने की आवश्यकता होती है। वरन वह ऐसा प्रेमी, कृपालु और द्यालु पिता परमेश्वर है जिसके दरवाज़े और बाँहें अपने उड़ाऊ पुत्र को भी पूरे आदर और सम्मान के साथ वापस ले लेने को खुले रहते हैं, आतुर रहते हैं (लूका 15), और प्रतिदिन "वही तो तेरे प्राण को नाश होने से बचा लेता है, और तेरे सिर पर करूणा और दया का मुकुट बान्धता है" (भजन 103:4)।

   हम कभी-कभी सोचते हैं कि परमेश्वर ने हमें वैसा नहीं दिया जैसा हम चाहते हैं। लेकिन सच तो यह है कि हमारे पाप क्षमा करने और हमें स्वर्ग का वारिस बनाने के इलावा यदि परमेश्वर हमारे लिए और कुछ भी ना करता, तो भी उसने बड़ी उदारता के साथ हमारे लिए बहुतायात से अनुग्रह कर दिया है। इसलिए आईऐ, उन सारी आशीषों और भलाईयों के लिए जो उसने हम पर बहुतायत से उँडेली हैं, हम आज अपने इस उदार परमेश्वर पिता का धन्यवाद करें, उसके कृतज्ञ बनें और उसमें आनन्दित रहें। - जो स्टोवैल


उस उदार परमेश्वर की, जिससे सभी आशीषें आती हैं
 सदा धन्यवाद, स्तुति और महिमा हो।

हम को उस में उसके लोहू के द्वारा छुटकारा, अर्थात अपराधों की क्षमा, उसके उस अनुग्रह के धन के अनुसार मिला है। जिसे उसने सारे ज्ञान और समझ सहित हम पर बहुतायत से किया। - इफिसियों 1:7-8

बाइबल पाठ: इफिसियों 3:14-21
Ephesians 3:14 मैं इसी कारण उस पिता के साम्हने घुटने टेकता हूं, 
Ephesians 3:15 जिस से स्वर्ग और पृथ्वी पर, हर एक घराने का नाम रखा जाता है। 
Ephesians 3:16 कि वह अपनी महिमा के धन के अनुसार तुम्हें यह दान दे, कि तुम उसके आत्मा से अपने भीतरी मनुष्यत्‍व में सामर्थ पाकर बलवन्‍त होते जाओ। 
Ephesians 3:17 और विश्वास के द्वारा मसीह तुम्हारे हृदय में बसे कि तुम प्रेम में जड़ पकड़ कर और नेव डाल कर। 
Ephesians 3:18 सब पवित्र लोगों के साथ भली भांति समझने की शक्ति पाओ; कि उसकी चौड़ाई, और लम्बाई, और ऊंचाई, और गहराई कितनी है। 
Ephesians 3:19 और मसीह के उस प्रेम को जान सको जो ज्ञान से परे है, कि तुम परमेश्वर की सारी भरपूरी तक परिपूर्ण हो जाओ।
Ephesians 3:20 अब जो ऐसा सामर्थी है, कि हमारी बिनती और समझ से कहीं अधिक काम कर सकता है, उस सामर्थ के अनुसार जो हम में कार्य करता है, 
Ephesians 3:21 कलीसिया में, और मसीह यीशु में, उस की महिमा पीढ़ी से पीढ़ी तक युगानुयुग होती रहे। आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 32-33
  • यूहन्ना 18:19-40


बुधवार, 8 जून 2016

बर्ताव


   सुप्रसिद्ध मसीही विश्वासी और लेखक सी. एस. ल्युईस ने अपनी जानी-मानी पुस्तक Mere Christianity में लिखा: "बचपन में मुझे अकसर दाँत में दर्द होता था, और मैं जानता था कि यदि मैं अपनी मां के पास गया तो वे मुझे कुछ ऐसा देंगी जिससे उस रात के लिए दर्द दब जाएगा और मैं सो सकूँगा। लेकिन मैं अपनी माँ के पास केवल तब ही जाता था जब दर्द बहुत बढ़ जाता था और सहना कठिन हो जाता था....क्योंकि मैं यह भी जानता था कि अगले दिन प्रातः ही मेरी माँ मुझे दाँतों के डॉक्टर के पास भी ले जाएंगी...मुझे दर्द से तुरंत राहत तो चाहिए होती थी लेकिन स्थाई राहत के लिए मेरे दाँतों को अन्दर गहराई से सही करवाने की भी आवश्यकता होती थी जो मैं नहीं करवाना चाहता था।"

   कुछ ऐसा ही हमारे साथ हमारे जीवनों में भी होता है: जब हम किसी समस्या में होते हैं, किसी बात को लेकर संघर्ष कर रहे होते हैं, तब अकसर हम तुरंत ही उसके निवारण के लिए परमेश्वर के पास नहीं जाते। हम जानते हैं कि परमेश्वर हमारी उस समस्या या संघर्ष का समाधान दे सकता है, लेकिन साथ ही हम यह भी जानते हैं कि वह केवल अस्थायी समाधानों से संतुष्ट नहीं होता, वह हमारे जीवनों में उस समस्या या संघर्ष की तह तक जाकर जड़ से उसका समाधान और निवारण करना चाहता है; और इस बात से हम डरते हैं क्योंकि ऐसा करने में वे बातें भी खुल कर सामने आ सकती हैं जिनका हम सामना नहीं करना चाहते या जिन्हें हम सबकी नज़रों से छिपाए या दबाए रखना चाहते हैं।

   ऐसे समयों में हमें अपने आप को यह स्मरण दिलाना चाहिए कि "तुम दुख को ताड़ना समझकर सह लो: परमेश्वर तुम्हें पुत्र जान कर तुम्हारे साथ बर्ताव करता है, वह कौन सा पुत्र है, जिस की ताड़ना पिता नहीं करता?" (इब्रानियों 12:7)। परमेश्वर का अनुशासन, चाहे हमें कष्टप्रद लगे, परन्तु वह बुद्धिमतापूर्ण, हमारी भलाई के लिए (रोमियों 8:28) और हमारे प्रति उसके प्रेम से भरा होता है। वह हमसे इतना प्रेम करता है कि हमें ऐसे ही अपनी समस्याओं और संघर्षों में पड़े देखना नहीं चाहता; वह हमारे स्वरूप को बदल कर हमारे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की समानता में लाना चाहता है (रोमियों 8:9)।

   हमारे प्रति परमेश्वर के प्रेम भरे बर्ताव तथा हर बात द्वारा हमारी भलाई करने के उद्देश्यों पर हम अपनी किसी भी भावना और भय से कहीं अधिक बढ़कर भरोसा कर सकते हैं। - पोह फैंग चिया


परमेश्वर के अनुशासन का हाथ उसके प्रेम और भलाई का हाथ होता है।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। क्योंकि जिन्हें उसने पहिले से जान लिया है उन्हें पहिले से ठहराया भी है कि उसके पुत्र के स्वरूप में हों ताकि वह बहुत भाइयों में पहिलौठा ठहरे। - रोमियों 8:28-29

बाइबल पाठ: इब्रानियों 12:1-14
Hebrews 12:1 इस कारण जब कि गवाहों का ऐसा बड़ा बादल हम को घेरे हुए है, तो आओ, हर एक रोकने वाली वस्तु, और उलझाने वाले पाप को दूर कर के, वह दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें। 
Hebrews 12:2 और विश्वास के कर्ता और सिद्ध करने वाले यीशु की ओर ताकते रहें; जिसने उस आनन्द के लिये जो उसके आगे धरा था, लज्ज़ा की कुछ चिन्‍ता न कर के, क्रूस का दुख सहा; और सिंहासन पर परमेश्वर के दाहिने जा बैठा। 
Hebrews 12:3 इसलिये उस पर ध्यान करो, जिसने अपने विरोध में पापियों का इतना वाद-विवाद सह लिया कि तुम निराश हो कर हियाव न छोड़ दो। 
Hebrews 12:4 तुम ने पाप से लड़ते हुए उस से ऐसी मुठभेड़ नहीं की, कि तुम्हारा लोहू बहा हो। 
Hebrews 12:5 और तुम उस उपदेश को जो तुम को पुत्रों की नाईं दिया जाता है, भूल गए हो, कि हे मेरे पुत्र, प्रभु की ताड़ना को हलकी बात न जान, और जब वह तुझे घुड़के तो हियाव न छोड़। 
Hebrews 12:6 क्योंकि प्रभु, जिस से प्रेम करता है, उस की ताड़ना भी करता है; और जिसे पुत्र बना लेता है, उसको कोड़े भी लगाता है। 
Hebrews 12:7 तुम दुख को ताड़ना समझकर सह लो: परमेश्वर तुम्हें पुत्र जान कर तुम्हारे साथ बर्ताव करता है, वह कौन सा पुत्र है, जिस की ताड़ना पिता नहीं करता? 
Hebrews 12:8 यदि वह ताड़ना जिस के भागी सब होते हैं, तुम्हारी नहीं हुई, तो तुम पुत्र नहीं, पर व्यभिचार की सन्तान ठहरे! 
Hebrews 12:9 फिर जब कि हमारे शारीरिक पिता भी हमारी ताड़ना किया करते थे, तो क्या आत्माओं के पिता के और भी आधीन न रहें जिस से जीवित रहें। 
Hebrews 12:10 वे तो अपनी अपनी समझ के अनुसार थोड़े दिनों के लिये ताड़ना करते थे, पर यह तो हमारे लाभ के लिये करता है, कि हम भी उस की पवित्रता के भागी हो जाएं। 
Hebrews 12:11 और वर्तमान में हर प्रकार की ताड़ना आनन्द की नहीं, पर शोक ही की बात दिखाई पड़ती है, तौभी जो उसको सहते सहते पक्के हो गए हैं, पीछे उन्हें चैन के साथ धर्म का प्रतिफल मिलता है। 
Hebrews 12:12 इसलिये ढीले हाथों और निर्बल घुटनों को सीधे करो। 
Hebrews 12:13 और अपने पांवों के लिये सीधे मार्ग बनाओ, कि लंगड़ा भटक न जाए, पर भला चंगा हो जाए।
Hebrews 12:14 सब से मेल मिलाप रखने, और उस पवित्रता के खोजी हो जिस के बिना कोई प्रभु को कदापि न देखेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 30-31
  • यूहन्ना 18:1-18


मंगलवार, 7 जून 2016

चाह


   मेरी एक सहेली ने एक बार मुझे बताया कि वह चर्च में गाए जाने वाले स्तुति-गीतों की प्रत्येक पंक्ति या कोरस नहीं गा पाती है; उसने समझाया, "मुझे गाने में यह कहना ईमानदारी नहीं लगती कि ’मैं केवल यीशु की चाह रखती हूँ’ जबकि मेरे जीवन में कई और बातों की चाह है। क्योंकि मैं इस पंक्ति को और ऐसे ही अन्य गीतों की कुछ पंक्तियों को ईमानदारी से नहीं गा पाती हूँ इसलिए उन्हें गाती ही नहीं हूँ।" मैंने अपनी सहेली की इस ईमानदारी की सराहना करी।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 73 के 25वें पद में भजनकार आसफ एक ऐसा आत्मिक व्यक्ति प्रतीत होता है जिसे केवल परमेश्वर ही की चाह है: "स्वर्ग में मेरा और कौन है? तेरे संग रहते हुए मैं पृथ्वी पर और कुछ नहीं चाहता" (भजन 73:25)। लेकिन उसके इस भजन का आरंभ ऐसी भावना के साथ नहीं हुआ है; भजन के आरंभ में आसफ ने स्वीकार किया कि "क्योंकि जब मैं दुष्टों का कुशल देखता था, तब उन घमण्डियों के विषय डाह करता था" (पद 3) अर्थात अपने आस-पास के लोगों के समान उसे भी वैसी ही संपन्नता की चाह थी, और ना होने के कारण वह उनके प्रति डाह रखता था। लेकिन जब वह परमेश्वर की निकटता में आया तो उसे एहसास हुआ कि उसका डाह रखना व्यर्थ और मूर्खता है (पद 21-22, 28)।

   अनेकों बार, यद्यपि हम परमेश्वर को जानते हैं, तो भी दूसरों की समृद्धि के कारण भटक जाते हैं। सुप्रसिद्ध मसीही विश्वासी और लेखक सी. एस. ल्यूईस ने लिखा, "ऐसा लगता है कि हमारा प्रभु हमारी चाह को बहुत मज़बूत या बड़ा नहीं वरन बहुत कमज़ोर और छोटा पाता है...हम बहुत शीघ्र ही व्यर्थ और छोटी बातों से, उनसे जो उस से कमतर हैं, संतुष्ट और प्रसन्न हो जाते हैं।"

   आसफ के इस भजन से हम ऐसा क्या सीख सकते हैं जो हमारा तब सहायक हो सकता है जब हमारी चाह हमारा ध्यान हमारे प्रभु परमेश्वर के सर्वोत्तम से भटकाती है? यहां हम पाते हैं कि दूसरों की समृद्धि को देखकर चाहे लालच और डाह के कारण हमारा ध्यान परमेश्वर से और उसके वचन से हट सकता है, लेकिन परमेश्वर का ध्यान हम पर से कभी नहीं हटता। वह लगातार हमारा मार्गदर्शन करता रहता है और हमारे ध्यान अपनी ओर केंद्रित करे रखने में लगा रहता है। इसीलिए हम आसफ के साथ कह सकते हैं: "मेरे हृदय और मन दोनों तो हार गए हैं, परन्तु परमेश्वर सर्वदा के लिये मेरा भाग और मेरे हृदय की चट्टान बना है" (पद 26)। - ऐनी सेटास


परमेश्वर के वचन की दैनिक खुराक ही मन में लगे लोभ और डाह के रोग का इलाज है।

क्योंकि चाहे अंजीर के वृक्षों में फूल न लगें, और न दाखलताओं में फल लगें, जलपाई के वृक्ष से केवल धोखा पाया जाए और खेतों में अन्न न उपजे, भेड़शालाओं में भेड़-बकरियां न रहें, और न थानों में गाय बैल हों, तौभी मैं यहोवा के कारण आनन्दित और मगन रहूंगा, और अपने उद्धारकर्त्ता परमेश्वर के द्वारा अति प्रसन्न रहूंगा। - हबकुक 3:17-18

बाइबल पाठ: भजन 73:1-3; 21-28
Psalms 73:1 सचमुच इस्त्राएल के लिये अर्थात शुद्ध मन वालों के लिये परमेश्वर भला है। 
Psalms 73:2 मेरे डग तो उखड़ना चाहते थे, मेरे डग फिसलने ही पर थे। 
Psalms 73:3 क्योंकि जब मैं दुष्टों का कुशल देखता था, तब उन घमण्डियों के विषय डाह करता था।
Psalms 73:21 मेरा मन तो चिड़चिड़ा हो गया, मेरा अन्त:करण छिद गया था, 
Psalms 73:22 मैं तो पशु सरीखा था, और समझता न था, मैं तेरे संग रह कर भी, पशु बन गया था। 
Psalms 73:23 तौभी मैं निरन्तर तेरे संग ही था; तू ने मेरे दाहिने हाथ को पकड़ रखा। 
Psalms 73:24 तू सम्मति देता हुआ, मेरी अगुवाई करेगा, और तब मेरी महिमा कर के मुझ को अपने पास रखेगा। 
Psalms 73:25 स्वर्ग में मेरा और कौन है? तेरे संग रहते हुए मैं पृथ्वी पर और कुछ नहीं चाहता। 
Psalms 73:26 मेरे हृदय और मन दोनों तो हार गए हैं, परन्तु परमेश्वर सर्वदा के लिये मेरा भाग और मेरे हृदय की चट्टान बना है।
Psalms 73:27 जो तुझ से दूर रहते हैं वे तो नाश होंगे; जो कोई तेरे विरुद्ध व्यभिचार करता है, उसको तू विनाश करता है। 
Psalms 73:28 परन्तु परमेश्वर के समीप रहना, यही मेरे लिये भला है; मैं ने प्रभु यहोवा को अपना शरणस्थान माना है, जिस से मैं तेरे सब कामों का वर्णन करूं।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 28-29
  • यूहन्ना 17


सोमवार, 6 जून 2016

निर्णय


   हाल ही में मैंने अपनी बड़ी बहिन से पूछा कि क्या उसे हमारे परिवार के उस घर में आने के बारे में कुछ याद है जिसमें हमने बचपन बिताया और अनेक वर्ष तक रहे थे। मेरी बहिन ने कहा, "तुम उस समय 9 माह के थे, और मुझे याद है कि हमारे माता-पिता सारी रात जाग कर सामान डब्बों में भरते रहे थे, तथा नौरमैन्डी के आक्रमण के रेडियो पर चल रहे सजीव प्रसारण को सुनते रहे थे - वह दिन था जून 6, 1944।" 

   यह दिन दूसरे विश्वयुद्ध का बहुत महत्वपूर्ण दिन था जहाँ से उस युद्ध का रुख मुड़ गया था। इस दिन को युद्ध इतिहास में "डी-डे" भी कहते हैं और इसी से सैनिक एवं सामान्य प्रयोग के लिए यह वाक्यांश बन गया है जिसका तात्पर्य होता है किसी निर्धारित कार्यवाही को कार्यान्वित करने का दिन। हमारे व्यक्तिगत जीवनों में भी यह वाक्यांश - "डी-डे", किसी निर्णय लेने या समर्पण करने के समय को दिखा सकता है।

   प्राचीन इस्त्राएल में एक ऐसा ही "डी-डे" आया जब उनके अगुवे यहोशु ने उन्हें एक निर्णय लेने, समर्पण करने की चुनौती दी। जिस समय की यह बात है, यहोशु बूढ़ा हो चुका था; उसने कई साल इस्त्राएलियों को परमेश्वर द्वारा उनसे वाचा करी हुई भूमि को दिलवाने के लिए कठिन परिश्रम तथा अनेकों युद्धों में अगुवाई करी थी। अब जब वे अपने-अपने स्थानों को प्राप्त करके उनमें बस गए थे, तो यहोशू ने उनके सामने उस परमेश्वर के लिए एक निर्णय लेने की चुनौती रखी, जो उनके साथ हर परिस्थिति में विश्वासयोग्य बना रहा था। यहोशु ने उनसे कहा: "और यदि यहोवा की सेवा करनी तुम्हें बुरी लगे, तो आज चुन लो कि तुम किस की सेवा करोगे, चाहे उन देवताओं की जिनकी सेवा तुम्हारे पुरखा महानद के उस पार करते थे, और चाहे एमोरियों के देवताओं की सेवा करो जिनके देश में तुम रहते हो; परन्तु मैं तो अपने घराने समेत यहोवा की सेवा नित करूंगा" (यहोशु 24:15)।

   आज भी प्रति दिन हम सब के लिए एक "डी-डे" है - क्या हम अपने जीवनों को पाप के दास्तव से निकालकर परमेश्वर प्रभु यीशु के हाथों में समर्पित करने का निर्णय लेने को तैयार हैं? जिस दिन हम यह निर्णय लेते हैं, वह दिन हमारे जीवनों के रुख को बदल देने वाला दिन होता है; उस दिन से हम अनन्त जीवन के वारिस और परमेश्वर की सन्तान बन जाते हैं। उस दिन के बाद से हम अपने जीवन का प्रत्येक दिन सहर्ष समर्पण के साथ परमेश्वर की महिमा के लिए उपयोग कर सकते हैं। - डेविड मैक्कैसलैंड


प्रत्येक के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और सबसे बड़ा निर्णय, 
प्रभु यीशु के साथ संबंध का निर्णय है।

और एलिय्याह सब लोगों के पास आकर कहने लगा, तुम कब तक दो विचारों में लटके रहोगे, यदि यहोवा परमेश्वर हो, तो उसके पीछे हो लो; और यदि बाल हो, तो उसके पीछे हो लो। लोगों ने उसके उत्तर में एक भी बात न कही। - 1 राजा 18:21

बाइबल पाठ: यहोशू 24:14-25
Joshua 24:14 इसलिये अब यहोवा का भय मानकर उसकी सेवा खराई और सच्चाई से करो; और जिन देवताओं की सेवा तुम्हारे पुरखा महानद के उस पार और मिस्र में करते थे, उन्हें दूर कर के यहोवा की सेवा करो। 
Joshua 24:15 और यदि यहोवा की सेवा करनी तुम्हें बुरी लगे, तो आज चुन लो कि तुम किस की सेवा करोगे, चाहे उन देवताओं की जिनकी सेवा तुम्हारे पुरखा महानद के उस पार करते थे, और चाहे एमोरियों के देवताओं की सेवा करो जिनके देश में तुम रहते हो; परन्तु मैं तो अपने घराने समेत यहोवा की सेवा नित करूंगा। 
Joshua 24:16 तब लोगों ने उत्तर दिया, यहोवा को त्यागकर दूसरे देवताओं की सेवा करनी हम से दूर रहे; 
Joshua 24:17 क्योंकि हमारा परमेश्वर यहोवा वही है जो हम को और हमारे पुरखाओं को दासत्व के घर, अर्थात मिस्र देश से निकाल ले आया, और हमारे देखते बड़े बड़े आश्चर्य कर्म किए, और जिस मार्ग पर और जितनी जातियों के मध्य में से हम चले आते थे उन में हमारी रक्षा की; 
Joshua 24:18 और हमारे साम्हने से इस देश में रहने वाली एमोरी आदि सब जातियों को निकाल दिया है; इसलिये हम भी यहोवा की सेवा करेंगे, क्योंकि हमारा परमेश्वर वही है। 
Joshua 24:19 यहोशू ने लोगों से कहा, तुम से यहोवा की सेवा नहीं हो सकती; क्योंकि वह पवित्र परमेश्वर है; वह जलन रखने वाला ईश्वर है; वह तुम्हारे अपराध और पाप क्षमा न करेगा। 
Joshua 24:20 यदि तुम यहोवा को त्यागकर पराए देवताओं की सेवा करने लगोगे, तो यद्दपि वह तुम्हारा भला करता आया है तौभी वह फिरकर तुम्हारी हानि करेगा और तुम्हारा अन्त भी कर डालेगा। 
Joshua 24:21 लोगों ने यहोशू से कहा, नहीं; हम यहोवा ही की सेवा करेंगे। 
Joshua 24:22 यहोशू ने लोगों से कहा, तुम आप ही अपने साक्षी हो कि तुम ने यहोवा की सेवा करनी अंगीकार कर ली है। उन्होंने कहा, हां, हम साक्षी हैं। 
Joshua 24:23 यहोशू ने कहा, अपने बीच पराए देवताओं को दूर कर के अपना अपना मन इस्राएल के परमेश्वर की ओर लगाओ। 
Joshua 24:24 लोगों ने यहोशू से कहा, हम तो अपने परमेश्वर यहोवा ही की सेवा करेंगे, और उसी की बात मानेंगे। 
Joshua 24:25 तब यहोशू ने उसी दिन उन लोगों से वाचा बन्धाई, और शकेम में उनके लिये विधि और नियम ठहराया।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 25-27
  • यूहन्ना 16


रविवार, 5 जून 2016

निकट


   परमेश्वर के वचन बाइबल में मूसा ने व्यव्स्थाविवरण 32:7-14 में परमेश्वर की अपने बच्चों की देखभाल और सहनशीलता को समझाया है। मूसा ने उस समय के इस्त्राएलियों को उकाब पक्षी के उदाहरण द्वारा समझाया कि जैसे उकाब पक्षी अपने बच्चों को संभाले रहता है, वैसे ही परमेश्वर भी उन्हें उठाए चल रहा है (पद 11-12)। 

   तीन महीनों तक मुझे और अनेकों अन्य पक्षी-प्रेमियों को उकाबों के एक जोड़े में होकर परमेश्वर की अद्भुत कारिगरी का नज़ारा निकट से देखने का अवसर मिला। नॉरफोक बोटैनिकल गार्डन्स में काम करने वालों ने ज़मीन से 90 फुट ऊँचे मचान पर एक कैमरा लगा कर उकाब जाति के एक जोड़े के घोंसले में चल रही गतिविधियों का सजीव प्रसारण किया। जब घोंसले में अण्डे फूटे और बच्चे निकले तो सब देख पा रहे थे कि नर और मादा उकाब कैसे उनकी देखभाल कर रहे थे; एक वहां घोंसले की रखवाली करने के लिए तैनात रहता और दूसरा जाकर भोजन जुटा कर लाता। लेकिन एक दिन, जबकि वे बच्चे अभी छोटे ही थे, घोंसले में से दोनों ही उकाब नदारद दिखे; हमें लगा कि वे किसी मुसीबत में पड़ गए हैं। लेकिन हमारा यह शक बेबुनियाद था; कैमरा संचालित करने वाले ने कैमरा घुमा कर पास ही की एक शाखा पर केंद्रित किया तो हम देखने पाए कि मादा उकाब वहीं बच्चों के निकट ही उस शाखा पर बैठी थी, बच्चों पर नज़रें जमाए हुए थी। क्योंकि कैमरा एक सीमित भाग का दृश्य ही दिखा पाता है, इसलिए देखने वालों को लगा कि माता-पिता उकाब कहीं चले गए हैं, जबकि वे वहीं निकट ही थे।

   मैं इस घटना पर विचार कर रही थी तो मुझे वे समय स्मरण हो आए जब मैंने यह समझ लिया था कि परमेश्वर ने मुझे अकेला छोड़ दिया है। उन उकाबों के उस दृश्य के समान, क्योंकि मेरी भी दृष्टि सीमित ही है, इसलिए मुझे भी यह भ्रम हुआ कि मैं अकेली रह गई हूँ। लेकिन हमें चाहे जैसा भी प्रतीत हो, सच तो यह है कि वह हमें कभी अकेला नहीं छोड़ता (भजन 145:18), चाहे हमें यह लगे कि हम अकेले रह गए हैं किंतु परमेश्वर सदा हमारे निकट रहता है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


क्योंकि परमेश्वर सदैव हमारी निगरानी करता रहता है, 
इसलिए हमें अपने आस-पास के खतरों से डरने की आवश्यकता नहीं है।

जितने यहोवा को पुकारते हैं, अर्थात जितने उसको सच्चाई से पुकारते हें; उन सभों के वह निकट रहता है। - भजन 145:18

बाइबल पाठ: व्यव्स्थाविवरण 32:7-14
Deuteronomy 32:7 प्राचीनकाल के दिनों को स्मरण करो, पीढ़ी पीढ़ी के वर्षों को विचारो; अपने बाप से पूछो, और वह तुम को बताएगा; अपने वृद्ध लोगों से प्रश्न करो, और वे तुझ से कह देंगे।
Deuteronomy 32:8 जब परमप्रधान ने एक एक जाति को निज निज भाग बांट दिया, और आदमियों को अलग अलग बसाया, तब उसने देश देश के लोगों के सिवाने इस्राएलियों की गिनती के अनुसार ठहराए।
Deuteronomy 32:9 क्योंकि यहोवा का अंश उसकी प्रजा है; याकूब उसका नपा हुआ निज भाग है।
Deuteronomy 32:10 उसने उसको जंगल में, और सुनसान और गरजने वालों से भरी हुई मरूभूमि में पाया; उसने उसके चंहु ओर रहकर उसकी रक्षा की, और अपनी आंख की पुतली की नाईं उसकी सुधि रखी।
Deuteronomy 32:11 जैसे उकाब अपने घोंसले को हिला हिलाकर अपने बच्चों के ऊपर ऊपर मण्डलाता है, वैसे ही उसने अपने पंख फैलाकर उसको अपने परों पर उठा लिया।
Deuteronomy 32:12 यहोवा अकेला ही उसकी अगुवाई करता रहा, और उसके संग कोई पराया देवता न था।
Deuteronomy 32:13 उसने उसको पृथ्वी के ऊंचे ऊंचे स्थानों पर सवार कराया, और उसको खेतों की उपज खिलाई; उसने उसे चट्टान में से मधु और चकमक की चट्ठान में से तेल चुसाया।
Deuteronomy 32:14 गायों का दही, और भेड़-बकरियों का दूध, मेम्नों की चर्बी, बकरे और बाशान की जाति के मेढ़े, और गेहूं का उत्तम से उत्तम आटा भी; और तू दाखरस का मधु पिया करता था।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 23-24
  • यूहन्ना 15