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रविवार, 24 जुलाई 2016

आशा


   दक्षिणी अमेरिका के चिली देश के एटाकामा रेगिस्तान में एक ऊँचे पठार पर संसार के सबसे विशाल रेडियो टेलिस्कोपों में से एक स्थित है। इस रेडियो टेलिस्कोप के द्वारा खगोलशास्त्री सृष्टि के ऐसे दश्य देखने पाते हैं जो अन्य किसी दूरबीन द्वारा पहले कभी नहीं देखे गए। एक समाचार संवाददाता, लुइस अन्द्रेस हेनाओ ने इस रेडियो टेलिस्कोप से हो रहे कार्य पर अपने एक लेख में लिखा, अनेकों देशों से आने वाले वैज्ञानिक इसके द्वारा सृष्टि के आरंभ समय को बताने वाले संकेत ढूँढ़ रहे हैं, सबसे ठंडे और दूरस्त गैस तथा धूल पिंडों से लेकर, जहाँ नक्षत्र समूहों तथा सितारों का जन्म होता है, बिग बैंग के समय उत्पन्न ऊर्जा के विशलेषण तक।

   परमेश्वर का वचन बाइबल इस समस्त सृष्टि के रचियता परमेश्वर की महान सामर्थ और समझ-बूझ के बारे में बताती है; बाइबल का भजन 147 इसी विषय पर लिखा गया है। इस भजन में हम देखते हैं कि परमेश्वर उन सितारों को भी जो हमें अनगिनित लगते हैं, गिनकर रखता है, उन्हें नाम लेकर बुलाता है (पद 4)। लेकिन परमेश्वर कहीं दूर रहने वाला बेपरवाह बल नहीं है, वह प्रेमी पिता है जो "खेदित मन वालों को चंगा करता है, और उनके शोक पर मरहम- पट्टी बान्धता है" (पद 3) तथा "नम्र लोगों को सम्भलता है" (पद 6)। वह तो "अपने डरवैयों ही से प्रसन्न होता है, अर्थात उन से जो उसकी करूणा की आशा लगाए रहते हैं" (पद 11)।

   परमेश्वर ने तो "...जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए" (यूहन्ना 3:16)। ब्रिटिश लेखक जे. बी. फिलिप्स ने पृथ्वी को ऐसा ग्रह बताया है जहाँ महिमा का राजकुमार अर्थात प्रभु यीशु आया है और अपनी योजनाएं पूरी कर रहा है।

   हमारी आज तथा अनन्तकाल की आशा उसी महान, प्रेमी, अनुग्रहकारी प्रभु परमेश्वर से है जो सृष्टिकर्ता तथा हमारा सृजनहार है, जो सितारों को भी नाम से बुलाता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


वह प्रभु परमेश्वर जो सृष्टि के सभी सितारों के नाम जानता है, वह हमारे नाम भी जानता है।

क्योंकि यहोवा अपनी प्रजा से प्रसन्न रहता है; वह नम्र लोगों का उद्धार कर के उन्हें शोभायमान करेगा। - भजन 149:4

बाइबल पाठ: भजन 147:1-11
Psalms 147:1 याह की स्तुति करो! क्योंकि अपने परमेश्वर का भजन गाना अच्छा है; क्योंकि वह मन भावना है, उसकी स्तुति करनी मन भावनी है। 
Psalms 147:2 यहोवा यरूशलेम को बसा रहा है; वह निकाले हुए इस्राएलियों को इकट्ठा कर रहा है। 
Psalms 147:3 वह खेदित मन वालों को चंगा करता है, और उनके शोक पर मरहम- पट्टी बान्धता है। 
Psalms 147:4 वह तारों को गिनता, और उन में से एक एक का नाम रखता है। 
Psalms 147:5 हमारा प्रभु महान और अति सामर्थी है; उसकी बुद्धि अपरम्पार है। 
Psalms 147:6 यहोवा नम्र लोगों को सम्भलता है, और दुष्टों को भूमि पर गिरा देता है।
Psalms 147:7 धन्यवाद करते हुए यहोवा का गीत गाओ; वीणा बजाते हुए हमारे परमेश्वर का भजन गाओ। 
Psalms 147:8 वह आकाश को मेघों से छा देता है, और पृथ्वी के लिये मेंह की तैयारी करता है, और पहाड़ों पर घास उगाता है। 
Psalms 147:9 वह पशुओं को और कौवे के बच्चों को जो पुकारते हैं, आहार देता है।
Psalms 147:10 न तो वह घोड़े के बल को चाहता है, और न पुरूष के पैरों से प्रसन्न होता है; 
Psalms 147:11 यहोवा अपने डरवैयों ही से प्रसन्न होता है, अर्थात उन से जो उसकी करूणा की आशा लगाए रहते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 35-36
  • प्रेरितों 25


शनिवार, 23 जुलाई 2016

समर्पण


   हाल ही में मैं दक्षिणी अमेरिका में हुई एक चर्च सभा का वीडियो देख रहा था; उस वीडियो में मैंने कुछ ऐसा देखा जो किसी चर्च में पहले कभी नहीं देखा था। सन्देश के दौरान पादरी ने अपनी मण्डली के लोगों को भावविभोर होकर आवाहन दिया कि वे अपने जीवन प्रभु यीशु को समर्पण करें, उनके इस आवाहन के प्रत्युत्तर में वहाँ उपस्थित लोगों में से एक ने अपनी जेब से सफेद रुमाल निकाला और उसे हवा में हिलाने लगा; फिर एक और ने, एक और ने और एक के बाद एक अनेकों ने ऐसा ही करना आरंभ कर दिया। उन लोगों की आँखों से आंसू बह रहे थे और वे प्रभु यीशु मसीह को अपने जीवन पूर्णतः समर्पित करने के अपने निर्णय को दिखा रहे थे।

   लेकिन संभवतः समर्पण के उस रुमाल रूपी झंडे को हिलाने के पीछे एक और भावना भी थी - वे लोग परमेश्वर के प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करने वाले झंडे भी लहरा रहे थे। परमेश्वर के वचन बाइबल में जब परमेश्वर ने लोगों से कहा कि वे उससे सारे मन, और सारे जीव, और सारी शक्ति के साथ प्रेम रखें (व्यवस्थाविवरण 6:5), तब वह उन लोगों द्वारा परमेश्वर को अपने जीवन समर्पित करने के संदर्भ में था।

   परमेश्वर के दृष्टिकोण से, उसके साथ जीवन व्यतीत करने का तात्पर्य भला बनने से कहीं अधिक बढ़कर है। परमेश्वर के साथ जीवन बिताने का अर्थ है उसके साथ एक संबंध स्थापित करना; एक ऐसा संबंध जिसमें हम उसके प्रति पूर्णतः समर्पित होने के द्वारा उसके प्रति अपना प्रेम व्यक्त करते हैं। प्रेम में ऐसा महान समर्पण करना हमें पहले प्रभु यीशु ने करके  दिखाया जब उन्होंने हमारे तथा सारे जगत के सभी लोगों के पापों की क्षमा के लिए अपने आप को क्रूस पर बलिदान होने के लिए समर्पित कर दिया। प्रभु यीशु के इसी समर्पण द्वारा हमें पाप के बन्धनों से मुक्ति और हर भली तथा महिमामय बात को दिलाने वाले यात्रा-मार्ग, अर्थात परमेश्वर के मार्ग पर चलने का सौभाग्य मिला है।

   हमारे पास वे शब्द नहीं हैं जिनके द्वारा हम परमेश्वर के प्रति अपने प्रेम को हम पूर्णतः बयान कर सकें; लेकिन अपने समपूर्ण समर्पण के द्वारा हम अपने इस प्रेम को व्यक्त अवश्य कर सकते हैं। - जो स्टोवैल


समर्पण परमेश्वर के प्रेम की भाषा है।

क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। - यूहन्ना 3:16 

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 6:1-9
Deuteronomy 6:1 यह वह आज्ञा, और वे विधियां और नियम हैं जो तुम्हें सिखाने की तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने आज्ञा दी है, कि तुम उन्हें उस देश में मानो जिसके अधिकारी होने को पार जाने पर हो; 
Deuteronomy 6:2 और तू और तेरा बेटा और तेरा पोता यहोवा का भय मानते हुए उसकी उन सब विधियों और आज्ञाओं पर, जो मैं तुझे सुनाता हूं, अपने जीवन भर चलते रहें, जिस से तू बहुत दिन तक बना रहे। 
Deuteronomy 6:3 हे इस्राएल, सुन, और ऐसा ही करने की चौकसी कर; इसलिये कि तेरा भला हो, और तेरे पितरों के परमेश्वर यहोवा के वचन के अनुसार उस देश में जहां दूध और मधु की धाराएं बहती हैं तुम बहुत हो जाओ। 
Deuteronomy 6:4 हे इस्राएल, सुन, यहोवा हमारा परमेश्वर है, यहोवा एक ही है; 
Deuteronomy 6:5 तू अपने परमेश्वर यहोवा से अपने सारे मन, और सारे जीव, और सारी शक्ति के साथ प्रेम रखना। 
Deuteronomy 6:6 और ये आज्ञाएं जो मैं आज तुझ को सुनाता हूं वे तेरे मन में बनी रहें; 
Deuteronomy 6:7 और तू इन्हें अपने बाल-बच्चों को समझाकर सिखाया करना, और घर में बैठे, मार्ग पर चलते, लेटते, उठते, इनकी चर्चा किया करना। 
Deuteronomy 6:8 और इन्हें अपने हाथ पर चिन्हानी कर के बान्धना, और ये तेरी आंखों के बीच टीके का काम दें। 
Deuteronomy 6:9 और इन्हें अपने अपने घर के चौखट की बाजुओं और अपने फाटकों पर लिखना।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 33-34
  • प्रेरितों 24


शुक्रवार, 22 जुलाई 2016

क्षमा


   मैं एक प्रतिभाशाली प्यानों वादिका से वार्तालाप कर रहा था; उसने मुझ से पूछा कि क्या मैं कोई साज़ बजाता हूँ? मैंने उत्तर दिया, "मैं रेडियो बजा लेता हूँ"; उसने हंसते हुए फिर पूछा कि क्या मैंने कभी कोई साज़ बजा पाने की इच्छा रखी है? मैंने थोड़ी शर्मिन्दगी के साथ उत्तर दिया, "लड़कपन में मैंने कुछ समय तक प्यानो सीखा था, फिर उसे छोड़ दिया।" अब अपने व्यसक जीवन में मुझे पछतावा होता है कि मैंने प्यानो सीखना ज़ारी क्यों नहीं रखा, क्योंकि मुझे संगीत का शौक है और मेरी इच्छा होती है कि आज मैं भी कोई साज़ बजा सकूँ। यह वार्तालाप मेरे लिए इस बात को पुनःस्मरण करने का अवसर था कि हमारे जीवनों में हमारे चुनावों का बहुत प्रभाव होता है - और कुछ चुनावों के कारण हमें पछतावा होता है।

    लेकिन कुछ गलत चुनाव ऐसे भी होते हैं जो हमारे अन्दर दीर्घ-कालीन एवं कष्टदायक पछतावा छोड़ जाते हैं - जैसा परमेश्वर के वचन बाइबल के एक नायक राजा दाऊद के साथ हुआ। पहले दाऊद ने एक अन्य पुरुष की स्त्री के साथ व्यभिचार किया और फिर अपने पाप को छुपाने के लिए उस स्त्री के पति को मरवा डाला। इस पाप का दोष-बोध उसके लिए बहुत कष्टदायक बना और इससे ग्रसित होकर उसने अपने एक भजन में लिखा, "जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हडि्डयां पिघल गई। क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई" (भजन 32:3-4)। लेकिन दाऊद ने अपने पाप का अंगीकार किया और उसे परमेश्वर के सामने मान लिया, जो उसके लिए परमेश्वर से क्षमा और शांति को लेकर आया (पद 5)।

   जब हमारे चुनाव और कार्य हमें पाप और बुराई में ढकेल दें, तो उनका अंगीकार करने और उनके लिए प्रभु यीशु से क्षमा माँग लेने के द्वारा (1 यूहन्ना 1:9) केवल परमेश्वर के अनुग्रह से ही हमें पाप के दोष से छुटकारा मिल सकता है; केवल उस से ही हमें क्षमा की शांति मिल सकती है। केवल परमेश्वर ही है जो हमें सही चुनाव एवं निर्णय ले पाने की बुद्धिमता प्रदान करता है (भजन 32:8)। - बिल क्राउडर


प्रभु परमेश्वर से मिलने वाली क्षमा हमें पछतावे के बन्धनों से स्वतंत्र करती है।

यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। - 1 यूहन्ना 1:9 

बाइबल पाठ: भजन 32
Psalms 32:1 क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, और जिसका पाप ढ़ाँपा गया हो। 
Psalms 32:2 क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो।
Psalms 32:3 जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हडि्डयां पिघल गई। 
Psalms 32:4 क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई।
Psalms 32:5 जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के साम्हने अपने अपराधों को मान लूंगा; तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया।
Psalms 32:6 इस कारण हर एक भक्त तुझ से ऐसे समय में प्रार्थना करे जब कि तू मिल सकता है। निश्चय जब जल की बड़ी बाढ़ आए तौभी उस भक्त के पास न पहुंचेगी। 
Psalms 32:7 तू मेरे छिपने का स्थान है; तू संकट से मेरी रक्षा करेगा; तू मुझे चारों ओर से छुटकारे के गीतों से घेर लेगा।
Psalms 32:8 मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपा दृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा। 
Psalms 32:9 तुम घोड़े और खच्चर के समान न बनो जो समझ नहीं रखते, उनकी उमंग लगाम और बाग से रोकनी पड़ती है, नहीं तो वे तेरे वश में नहीं आने के।
Psalms 32:10 दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी; परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करूणा से घिरा रहेगा। 
Psalms 32:11 हे धर्मियों यहोवा के कारण आनन्दित और मगन हो, और हे सब सीधे मन वालों आनन्द से जयजयकार करो!

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 31-32
  • प्रेरितों 23:16-35



गुरुवार, 21 जुलाई 2016

जल


   यद्यपि पृथ्वी का 70 प्रतिशत भाग जल से ढका हुआ है, फिर भी उस जल का 1 प्रतिश्त से भी कम अंश मनुष्यों के पीने योग्य है। जल का संरक्षण और स्वच्छता संसार के अनेकों भागों में बहुत महत्वपूर्ण विषय हैं, क्योंकि जीवन स्वच्छ और पीने योग्य जल के उपलब्ध होने पर निर्भर करता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि एक पापों में भटकी हुई स्त्री को जीवन-जल तक लाने के लिए प्रभु यीशु मसीह ने मार्ग से हटकर यात्रा करी। प्रभु यीशु जान-बूझकर सामरिया के एक ऐसे स्थान से होकर गए, जहाँ से कोई भी शिष्ट एवं सम्मानयोग्य प्रचारक नहीं जाता था। वहाँ उन्होंने उस महिला को जीवन-जल के बारे में बताया; प्रभु यीशु ने उससे कहा, "परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा" (यूहन्ना 4:14)।

   यह जीवन-जल स्वयं प्रभु यीशु मसीह ही हैं। जो उन्हें स्वीकार कर लेते हैं, वे अनन्त अविनाशी जीवन भी पा लेते हैं। प्रभु यीशु के अनुयायियों के अन्दर यह जीवन जल एक कार्य और करता है - उनमें से उमड़कर बहने वाला यह जीवन-जल औरों को भी तृप्त करता है, और फिर उन तृप्त होने वालों में से होकर अन्य लोगों की तृप्ति के लिए प्रवाहित होने लग जाता है (यूहन्ना 7:38)।

   जैसे संसार में स्वच्छ पेय जल की उपलब्धता असमान है, वैसा ही इस जीवन-जल के संबंध में भी है। संसार के कई स्थानों पर अभी भी अनेकों ऐसे लोग हैं जो प्रभु यीशु और उसमें लाए गए विश्वास द्वारा सेंत-मेंत मिलने वाली पापों की क्षमा तथा उद्धार के बारे में या तो जानते ही नहीं हैं, या फिर अच्छे से और सही रीति से नहीं जानते हैं। हम मसीही विश्वासियों का यह विशेषाधिकार एवं ज़िम्मेदारी है कि इस पाप और बुराई से भरे संसार के लोगों में उन्हें सच्ची तृप्ति देने वाले इस जीवन-जल को पहुँचाने वाले बनें। - सी. पी. हिया


प्यासे संसार के लिए जीवन-जल का कभी ना समाप्त होने वाले स्त्रोत प्रभु यीशु मसीह ही हैं।

जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्र शास्त्र में आया है उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियां बह निकलेंगी। - यूहन्ना 7:38 

बाइबल पाठ: यूहन्ना 4:4-14
John 4:4 और उसको सामरिया से हो कर जाना अवश्य था। 
John 4:5 सो वह सूखार नाम सामरिया के एक नगर तक आया, जो उस भूमि के पास है, जिसे याकूब ने अपने पुत्र यूसुफ को दिया था। 
John 4:6 और याकूब का कूआं भी वहीं था; सो यीशु मार्ग का थका हुआ उस कूएं पर यों ही बैठ गया, और यह बात छठे घण्टे के लगभग हुई। 
John 4:7 इतने में एक सामरी स्त्री जल भरने को आई: यीशु ने उस से कहा, मुझे पानी पिला। 
John 4:8 क्योंकि उसके चेले तो नगर में भोजन मोल लेने को गए थे। 
John 4:9 उस सामरी स्त्री ने उस से कहा, तू यहूदी हो कर मुझ सामरी स्त्री से पानी क्यों मांगता है? (क्योंकि यहूदी सामरियों के साथ किसी प्रकार का व्यवहार नहीं रखते)। 
John 4:10 यीशु ने उत्तर दिया, यदि तू परमेश्वर के वरदान को जानती, और यह भी जानती कि वह कौन है जो तुझ से कहता है; मुझे पानी पिला तो तू उस से मांगती, और वह तुझे जीवन का जल देता। 
John 4:11 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, तेरे पास जल भरने को तो कुछ है भी नहीं, और कूआं गहिरा है: तो फिर वह जीवन का जल तेरे पास कहां से आया? 
John 4:12 क्या तू हमारे पिता याकूब से बड़ा है, जिसने हमें यह कूआं दिया; और आप ही अपने सन्तान, और अपने ढोरों समेत उस में से पीया? 
John 4:13 यीशु ने उसको उत्तर दिया, कि जो कोई यह जल पीएगा वह फिर प्यासा होगा। 
John 4:14 परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 29-30
  • प्रेरितों 23:1-15



बुधवार, 20 जुलाई 2016

मात्रा या माप


   मसीही सेवकाई के भ्रमण के समयों में मुझे अनेकों ऐसे लोगों से मिलने और बात करने के अवसर मिले हैं जो छोटे-छोटे कार्यों द्वारा छोटे स्थानों पर सेवकाई कर रहे हैं। अकसर ये लोग एकाकीपन से ग्रसित रहते हैं, उन्हें लगता है कि उनकी वह सेवकाई बहुत गौण है, उसका कोई विशेष महत्व नहीं है। जब मैं उन लोगों की बातें सुनता हूँ तो मुझे सुप्रसिद्ध मसीही लेखक सी. एस. ल्यूईस की पुस्तक Out of the Silent Planet में एक स्वर्गदूत द्वारा कही गई बात: "मेरे लोगों के पास एक नियम है कि वे कभी मात्रा या माप की बातें आप से नहीं करेंगे...ऐसा करने से आप महत्वहीन को आदर देने लगते हैं और महत्वपूर्ण को नज़रन्दाज़ कर देते हैं" स्मरण हो आती है।

   हमारे समाज की धारणाएं कभी-कभी हम से कहती है कि जितना अधिक या जितना बड़ा उतना ही बेहतर - अर्थात आकार ही सफलता का मापदण्ड है। इस धारणा का सामना करने, इसको अनदेखा करने, इसे बदलने के लिए बहुत सामर्थ चाहिए, विशेषकर किसी ऐसे व्यक्ति को जो किसी छोटे से स्थान पर किसी छोटे प्रतीत होने वाले कार्य द्वारा सेवकाई में मेहनत कर रहा हो। ऐसे में हमें ध्यान बनाए रखना है कि कहीं हम भी तो उसे जो महत्वपूर्ण है, नज़रन्दाज़ तो नहीं कर दे रहे हैं।

   ऐसा नहीं है कि संख्या का कोई महत्व ही नहीं है। संख्या अननतकाल की आवश्यकता रखने वाले जीवित मनुष्यों को दर्शाती है; और हम सब को यह प्रार्थना करते रहना चाहिए कि अधिक से अधिक लोग प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास लाकर, उस से पापों की क्षमा माँगकर, सेंत-मेंत में उद्धार पाएं और परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करें; लेकिन हमारे कार्य और उसके महत्व का माप संख्याएं नहीं हैं।

   प्रभु परमेश्वर ने हमें उसके लिए करे गए कार्य की मात्रा में, या फिर उस कार्य में संलग्न लोगों की संख्या में संतुष्टि प्राप्त करने के लिए नहीं बुलाया है; वरन उसने हमें बुलाया है कि हम विश्वासयोयता के साथ उसके द्वारा हमें दिए कार्य को उसके लिए पूरा करते रहें। हमारे महान और सर्वसामर्थी प्रभु परमेश्वर की सेवा, उसके द्वारा प्रदान करी गई सामर्थ में होकर करना ही हमारे लिए महानता है - वह सेवा चाहे मात्रा या माप में कैसी ही क्यों ना हो। - डेविड रोपर


जो कोई परमेश्वर की सेवकाई को परमेश्वर की इच्छानुसार करता है, 
वह परमेश्वर की दृष्टि में महत्वपूर्ण है।

क्योंकि किस ने छोटी बातों के दिन तुच्छ जाना है? यहोवा अपनी इन सातों आंखों से सारी पृथ्वी पर दृष्टि कर के साहुल को जरूब्बाबेल के हाथ में देखेगा, और आनन्दित होगा। - ज़कर्याह 4:10

बाइबल पाठ: यशायाह 49:1-6
Isaiah 49:1 हे द्वीपो, मेरी और कान लगाकर सुनो; हे दूर दूर के राज्यों के लोगों, ध्यान लगा कर मेरी सुनो! यहोवा ने मुझे गर्भ ही में से बुलाया, जब मैं माता के पेट में था, तब ही उसने मेरा नाम बताया। 
Isaiah 49:2 उसने मेरे मुंह को चोखी तलवार के समान बनाया और अपने हाथ की आड़ में मुझे छिपा रखा; उसने मुझ को चमकिला तीर बनाकर अपने तर्कश में गुप्त रखा। 
Isaiah 49:3 और मुझ से कहा, तू मेरा दास इस्राएल है, मैं तुझ में अपनी महिमा प्रगट करूंगा। 
Isaiah 49:4 तब मैं ने कहा, मैं ने तो व्यर्थ परिश्रम किया, मैं ने व्यर्थ ही अपना बल खो दिया है; तौभी निश्चय मेरा न्याय यहोवा के पास है और मेरे परिश्रम का फल मेरे परमेश्वर के हाथ में है।
Isaiah 49:5 और अब यहोवा जिसने मुझे जन्म ही से इसलिये रख कि मैं उसका दास हो कर याकूब को उसकी ओर फेर ले आऊं अर्थात इस्राएल को उसके पास इकट्ठा करूं, क्योंकि यहोवा की दृष्टि में मैं आदरयोग्य हूं और मेरा परमेश्वर मेरा बल है, 
Isaiah 49:6 उसी ने मुझ से यह भी कहा है, यह तो हलकी सी बात है कि तू याकूब के गोत्रों का उद्धार करने और इस्राएल के रक्षित लोगों को लौटा ले आने के लिये मेरा सेवक ठहरे; मैं तुझे अन्यजातियों के लिये ज्योति ठहराऊंगा कि मेरा उद्धार पृथ्वी की एक ओर से दूसरी ओर तक फैल जाए।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 26-28
  • प्रेरितों 22



मंगलवार, 19 जुलाई 2016

विश्वासयोग्य


   मेरे दादाजी को कहानियाँ सुनाने का शौक था, और मुझे कहानियाँ सुनने का। उनकी कहानियाँ दो प्रकार की होती थीं, कालपनिक किस्से - जिनमें सत्य का थोड़ा सा अंश तो होता था लेकिन वे जितनी बार सुनाई जातीं उतनी बार उनमें कुछ बदल जाता था, तथा सच्ची कहानियाँ - जो वास्तविक घटनाएं होती थीं और जिनके तथ्य कभी नहीं बदलते थे चाहे उन्हें वे कितनी ही बार क्यों ना सुनाएं। एक दिन मेरे दादाजी ने एक ऐसी कहानी सुनाई जिसके सत्य होने को मान पाना मुझे बहुत कठिन लग रहा था, इसलिए मैंने तुरंत कहा यह कालपनिक है, लेकिन दादाजी ने ज़ोर देकर कहा कि नहीं यह वास्तविक है। यद्यपि जितनी बार उन्होंने उसे सुनाया, उसमें कोई बदलाव नहीं आया, फिर भी उसकी वास्तविकता को मान लेना मुझे कठिन ही लगता रहा।

   एक दिन मैं रेडियो पर एक कार्यक्रम सुन रहा था, और उस कार्यक्रम के प्रस्तुतकर्ता ने वही कहानी वैसे ही सुनाई जैसे दादाजी सुनाया करते थे, और दादाजी की वह कहानी मेरे लिए तुरंत कालपनिक से वास्तविक बन गई। वह एक यादगार और मर्मसपर्शी पल था जिसमें दादाजी मेरे लिए और भी अधिक विश्वासयोग्य हो गए थे।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने परमेश्वर के कभी ना बदलने वाले स्वभाव के बारे में लिखकर (भजन 102:27) हमें उसकी इसी विश्वासयोग्यता की दिलासा दी है। विश्वासयोग्यता का यही भाव इब्रानियों 13:8 में इन शब्दों में कहा गया है: "यीशु मसीह कल और आज और युगानुयुग एकसा है।" परमेश्वर का सदा विश्वासयोग्य रहना हमारे हृदयों को प्रतिदिन के जीवन में आने वाली परीक्षाओं में दिलासा देता है, हमारी हिम्मत बंधाता है, हमें स्मरण करवाता है कि हमारा कभी ना बदलने वाला, सदा विश्वासयोग्य परमेश्वर पिता इस परिवर्तनशील और अव्यवस्थित दिखने वाले संसार पर भी अपना नियंत्रण बनाए हुए है और अन्ततः वही और उसकी इच्छा ही सर्वोपरी तथा शिरोमणी होगी। - रैंडी किलगोर


जीवन की आंधियों के समय में परमेश्वर के अपरिवर्तनशील होने की
 शांतिदायक बयार को अपने अन्दर प्रवाहित होने दें।

यहोवा, जो इस्राएल का राजा है, अर्थात सेनाओं का यहोवा जो उसका छुड़ाने वाला है, वह यों कहता है, मैं सब से पहिला हूं, और मैं ही अन्त तक रहूंगा; मुझे छोड़ कोई परमेश्वर है ही नहीं। - यशायाह 44:6

बाइबल पाठ: भजन 102:18-28
Psalms 102:18 यह बात आने वाली पीढ़ी के लिये लिखी जाएगी, और एक जाति जो सिरजी जाएगी वही याह की स्तुति करेगी। 
Psalms 102:19 क्योंकि यहोवा ने अपने ऊंचे और पवित्र स्थान से दृष्टि कर के स्वर्ग से पृथ्वी की ओर देखा है, 
Psalms 102:20 ताकि बन्धुओं का कराहना सुने, और घात होने वालों के बन्धन खोले; 
Psalms 102:21 और सिय्योन में यहोवा के नाम का वर्णन किया जाए, और यरूशलेम में उसकी स्तुति की जाए; 
Psalms 102:22 यह उस समय होगा जब देश देश, और राज्य राज्य के लोग यहोवा की उपासना करने को इकट्ठे होंगे।
Psalms 102:23 उसने मुझे जीवन यात्रा में दु:ख देकर, मेरे बल और आयु को घटाया। 
Psalms 102:24 मैं ने कहा, हे मेरे ईश्वर, मुझे आधी आयु में न उठा ले, मेरे वर्ष पीढ़ी से पीढ़ी तक बने रहेंगे! 
Psalms 102:25 आदि में तू ने पृथ्वी की नेव डाली, और आकाश तेरे हाथों का बनाया हुआ है। 
Psalms 102:26 वह तो नाश होगा, परन्तु तू बना रहेगा; और वह सब कपड़े के समान पुराना हो जाएगा। तू उसको वस्त्र की नाईं बदलेगा, और वह तो बदल जाएगा; 
Psalms 102:27 परन्तु तू वहीं है, और तेरे वर्षों का अन्त नहीं होने का। 
Psalms 102:28 तेरे दासों की सन्तान बनी रहेगी; और उनका वंश तेरे साम्हने स्थिर रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 23-25
  • प्रेरितों 21:18-40



सोमवार, 18 जुलाई 2016

जड़


   भारत के चेरापूँजी इलाके में रहने वाले लोगों ने अपने इलाके में बहने वाले अनेकों नदी-नालों पर से होकर चलने का एक अनोखा तरीका विकसित कर रखा है। वे लोग वहाँ उगने वाले रबर के वृक्षों की जड़ों को एक पार से दूसरे पार पहुँचाते हैं, उनको सेतु के समान प्रयोग करते हैं। इन जड़ों के सेतुओं को बनकर तैयार होने में 10 से 15 वर्ष तो लगते हैं, लेकिन जब वे तैयार हो चुकते हैं तो बहुत मज़बूत और सैकड़ों साल तक स्थिर बने रहने वाले हो जाते हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भी उस मनुष्य के लिए जो परमेश्वर पर विश्वास के साथ रहता है लिखा गया है कि वह, "वह उस वृक्ष के समान होगा जो नदी के तीर पर लगा हो और उसकी जड़ जल के पास फैली हो; जब घाम होगा तब उसको न लगेगा, उसके पत्ते हरे रहेंगे, और सूखे वर्ष में भी उनके विषय में कुछ चिन्ता न होगी, क्योंकि वह तब भी फलता रहेगा" (यिर्मयाह 17:8)। क्योंकि उसकी जड़ें गहरी और अच्छे से पोषित रहती हैं, इसलिए वह "वृक्ष" अत्याधिक तापमान भी सह लेता है और अकाल के समय में भी फल देता रहता है।

   दृढ़ता से गहरी जड़ पकड़े हुए वृक्ष के समान ही वे लोग भी हैं जो परमेश्वर पर भरोसा रखते हैं; उन्हें परेशानी की परिस्थितियों में भी स्थिरता और पोषण मिलता रहेगा। इसकी तुलना में वे लोग हैं जो अपने आप पर या अन्य मनुष्यों पर भरोसा रखते हैं, वे अस्थिरता के साथ जीवन व्यतीत करते हैं। बाइबल इन लोगों को मरुभूमि में उगने वाली झाड़ीयों के समान बताती है, जो अकसर अपूर्ण पोषित और अकेली सी होती हैं (पद 6)। जो लोग परमेश्वर को त्याग कर जीते हैं उनके आत्मिक जीवन भी ऐसे ही कुपोषित तथा तन्हा होते हैं।

   आज आप की जड़ें कहाँ हैं? क्या आपने मसीह यीशु में अपने जीवन की जड़ें जमाई हैं: "और उसी में जड़ पकड़ते और बढ़ते जाओ; और जैसे तुम सिखाए गए वैसे ही विश्वास में दृढ़ होते जाओ, और अत्यन्‍त धन्यवाद करते रहो" (कुलुस्सियों 2:7)? यदि हाँ, तो क्या आप भी ऐसे सेतु बन रहे हैं जो दूसरों को प्रभु परमेश्वर तक पहुँचाता है? यदि आप मसीह यीशु को व्यक्तिगत रीति से जानते हैं तो आप ऐसे सेतु होने का कार्य कर सकते हैं और लोगों को बता सकते हैं कि धन्य हैं वे जो प्रभु परमेश्वर पर भरोसा रखते हैं (यिर्मयाह 17:7)। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


जो व्यक्ति परमेश्वर में जड़ें जमाए हुए है उसे कठिन परीक्षाएं भी डिगा नहीं सकतीं।

क्या ही धन्य है वह पुरूष, जो यहोवा पर भरोसा करता है, और अभिमानियों और मिथ्या की ओर मुड़ने वालों की ओर मुंह न फेरता हो। - भजन 40:4

बाइबल पाठ: यिर्मयाह 17:5-10
Jeremiah 17:5 यहोवा यों कहता है, श्रापित है वह पुरुष जो मनुष्य पर भरोसा रखता है, और उसका सहारा लेता है, जिसका मन यहोवा से भटक जाता है। 
Jeremiah 17:6 वह निर्जल देश के अधमूए पेड़ के समान होगा और कभी भलाई न देखेगा। वह निर्जल और निर्जन तथा लोनछाई भूमि पर बसेगा। 
Jeremiah 17:7 धन्य है वह पुरुष जो यहोवा पर भरोसा रखता है, जिसने परमेश्वर को अपना आधार माना हो। 
Jeremiah 17:8 वह उस वृक्ष के समान होगा जो नदी के तीर पर लगा हो और उसकी जड़ जल के पास फैली हो; जब घाम होगा तब उसको न लगेगा, उसके पत्ते हरे रहेंगे, और सूखे वर्ष में भी उनके विषय में कुछ चिन्ता न होगी, क्योंकि वह तब भी फलता रहेगा। 
Jeremiah 17:9 मन तो सब वस्तुओं से अधिक धोखा देने वाला होता है, उस में असाध्य रोग लगा है; उसका भेद कौन समझ सकता है? 
Jeremiah 17:10 मैं यहोवा मन की खोजता और हृदय को जांचता हूँ ताकि प्रत्येक जन को उसकी चाल-चलन के अनुसार अर्थात उसके कामों का फल दूं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 20-22
  • प्रेरितों 21:1-17