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शुक्रवार, 31 जनवरी 2020

शुद्ध और स्वच्छ



      पिछले दिसंबर में हम सपरिवार पहाड़ों में गए। हमने सारा जीवन  गरम इलाकों में निवास करते बिताया है, इसलिए यह पहली बार था जब हम ने इतनी शानदार बर्फ देखी। हम जब खेतों, मैदानों, और पेड़-पौधों पर बिछी बर्फ की सफ़ेद चादर पर ध्यान कर रहे थे, तो मेरे पति ने परमेश्वर के वचन बाइबल में से यशायाह 1:18 उद्धृत किया, “...तुम्हारे पाप चाहे लाल रंग के हों, तौभी वे हिम के समान उजले हो जाएंगे; और चाहे अर्गवानी रंग के हों, तौभी वे ऊन के समान श्वेत हो जाएंगे।”

      हमारी तीन वर्षीय बेटी ने लाल रंग का अर्थ पूछने के बाद, प्रश्न किया, “क्या लाल रंग बुरा होता है?” वह यह तो जानती है कि परमेश्वर को पाप बिलकुल पसंद नहीं है; परन्तु यह पद किसी रंग के बारे में नहीं है। यहाँ भविष्यद्वाकता एक छोटे से कीड़े के अण्डों से निकलने वाले चमकदार लाल रंग के लिए कह रहा था, जिसका प्रयोग कपड़े रंगने के लिए किया जाता था। इस रंग को पक्का चढ़ाने के लिए कपड़ों को दो बार इसमें डाला जाता था। तब रंग इतना पक्का चढ़ जाता था कि फिर धुलने से भी वह हटाया नहीं जा सकता था। पाप का प्रभाव भी ऐसा ही है; मनुष्य का कोई भी प्रयास उसके प्रभाव को मिटा नहीं सकता है। पाप तो मन में जड़ पकड़कर रहता है।

      केवल परमेश्वर ही है जो मन को पाप से साफ़ कर सकता है। जब हम बर्फ से ढके पहाड़ों को देख रहे थे, तो हम उस स्वच्छ और शुद्ध सफेदी की सराहना कर रहे थे जो कैसी भी धुलाई और रगड़ाई करने पर भी उस लाल रंग चढ़े कपड़े पर कभी नहीं आ सकती थी। जब हम पतरस द्वारा लिखी गई शिक्षा, “इसलिये, मन फिराओ और लौट आओ कि तुम्हारे पाप मिटाए जाएं, जिस से प्रभु के सम्मुख से विश्रान्ति के दिन आएं” (प्रेरितों 3:19) का पालन करते हैं, तब परमेश्वर हमारे पाप क्षमा कर के हमें एक नया और स्वच्छ जीवन प्रदान करता है। केवल प्रभु यीशु मसीह के बलिदान के द्वारा ही हमें वह मिलता है जो कोई और कभी नहीं दे सकता है – एक शुद्ध और स्वच्छ मन; परमेश्वर के उपहार के रूप में।

परमेश्वर जब क्षमा करता है, तो साथ ही स्वच्छ भी कर देता है।

जूफा से मुझे शुद्ध कर, तो मैं पवित्र हो जाऊंगा; मुझे धो, और मैं हिम से भी अधिक श्वेत बनूंगा। - भजन 51:7

बाइबल पाठ: यशायाह 1:16-20
Isaiah 1:16 अपने को धोकर पवित्र करो: मेरी आंखों के साम्हने से अपने बुरे कामों को दूर करो; भविष्य में बुराई करना छोड़ दो,
Isaiah 1:17 भलाई करना सीखो; यत्न से न्याय करो, उपद्रवी को सुधारो; अनाथ का न्याय चुकाओ, विधवा का मुकद्दमा लड़ो।।
Isaiah 1:18 यहोवा कहता है, आओ, हम आपस में वादविवाद करें: तुम्हारे पाप चाहे लाल रंग के हों, तौभी वे हिम के समान उजले हो जाएंगे; और चाहे अर्गवानी रंग के हों, तौभी वे ऊन के समान श्वेत हो जाएंगे।
Isaiah 1:19 यदि तुम आज्ञाकारी हो कर मेरी मानो,
Isaiah 1:20 तो इस देश के उत्तम से उत्तम पदार्थ खाओगे; और यदि तुम ना मानो और बलवा करो, तो तलवार से मारे जाओगे; यहोवा का यही वचन है।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 25-26
  • मत्ती 20:17-34



गुरुवार, 30 जनवरी 2020

सक्षम और उपलब्ध



      जिस समय मुझे पता चला कि मेरी माँ को कैंसर है, उस समय मेरे पति काम पर बाहर गए हुए थे। मैंने यह बताने के लिए उन्हें एक सन्देश भेजा और फिर अपने मित्रों तथा परिवार जनों से संपर्क करने लगी, उन्हें बताने और उनसे प्रार्थना की सहायता का निवेदन करने के लिए; किन्तु कोई भी उपलब्ध नहीं था। थरथराते हुए हाथों से अपने चहरे को ढांपते हुए मैं सुबकने लगी और परमेश्वर से कहने लगी, “परमेश्वर मेरी सहायता कीजिए।” उस समय में जब मैं बिलकुल अकेली थी, मैंने एक आश्वासन अनुभव किया कि परमेश्वर मेरे साथ है और मुझे शान्ति दे रहा है।

      मैंने प्रभु परमेश्वर का धन्यवाद किया जब मेरे पति घर आए तथा औरों से भी प्रोत्साहन के समाचार आने लगे। परन्तु फिर भी उन अकेले पलों में परमेश्वर की शांत करने वाली उपस्थिति जो मैंने अनुभव की थी, उससे मैं आश्वस्त हुई कि परमेश्वर सहजता से उपलब्ध है और मैं उस पर भरोसा रख सकती हूँ, जब भी और जहां भी मुझे उसकी सहायता की आवश्यकता हो।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार, भजन 46 में कहता है कि परमेश्वर हमारा शरणस्थान है, ऊंचा गढ़, और भरोसेमंद सहायक है (पद 1)। जब हमें ऐसा लगे कि हम अराजकता से घिरे हुए हैं, या, हम जिसे स्थिर समझे हुए थे वह हमारे चारों ओर ढहता जा रहा है, तब भी हमें भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है (पद 2-3)। परमेश्वर कभी लड़खड़ाता नहीं है (पद 4-7)। उसकी सामर्थ्य प्रगट एवं प्रभावी है (पद 8-9)। हमारा सदा संभालने वाला हमें अपने अपरिवर्तनीय चरित्र के द्वारा आश्वस्त करता है (पद 10)। हमारा प्रभु, हमारा सुरक्षित शरणस्थान, सदा हमारे साथ बना रहता है (पद 11)।

      प्रभु ने अपने अनुयायियों को एक दूसरे के साथ बने रहने और सहायता तथा प्रोत्साहित करने का दायित्व दिया है। परन्तु साथ ही वह यह भी आश्वासन देता है कि हमारी हर परिस्थिति के लिए वह सदा उपलब्ध और सक्षम है। वह न केवल अपने अनुयायियों के द्वारा वरन अपनी व्यक्तिगत उपस्थिति के द्वारा भी हमें शान्ति देता है। - जोशील डिक्सन

परमेश्वर हमारे सहायता के लिए सदा उपलब्ध और सक्षम है।

यहोवा के भय मानने से दृढ़ भरोसा होता है, और उसके पुत्रों को शरणस्थान मिलता है। - नीतिवचन 14:26

बाइबल पाठ: भजन 46
Psalms 46:1 परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक।
Psalms 46:2 इस कारण हम को कोई भय नहीं चाहे पृथ्वी उलट जाए, और पहाड़ समुद्र के बीच में डाल दिए जाएं;
Psalms 46:3 चाहे समुद्र गरजे और फेन उठाए, और पहाड़ उसकी बाढ़ से कांप उठें।
Psalms 46:4 एक नदी है जिसकी नहरों से परमेश्वर के नगर में अर्थात परमप्रधान के पवित्र निवास भवन में आनन्द होता है।
Psalms 46:5 परमेश्वर उस नगर के बीच में है, वह कभी टलने का नहीं; पौ फटते ही परमेश्वर उसकी सहायता करता है।
Psalms 46:6 जाति जाति के लोग झल्ला उठे, राज्य राज्य के लोग डगमगाने लगे; वह बोल उठा, और पृथ्वी पिघल गई।
Psalms 46:7 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।
Psalms 46:8 आओ, यहोवा के महाकर्म देखो, कि उसने पृथ्वी पर कैसा कैसा उजाड़ किया है।
Psalms 46:9 वह पृथ्वी की छोर तक लड़ाइयों को मिटाता है; वह धनुष को तोड़ता, और भाले को दो टुकड़े कर डालता है, और रथों को आग में झोंक देता है!
Psalms 46:10 चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं!
Psalms 46:11 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 23-24
  • मत्ती 20:1-16



बुधवार, 29 जनवरी 2020

बालक



      बहुत वर्ष पहले की बात है, मेरी पत्नी ने हमारी दो वर्षीय बेटी के साथ उसे सुलाने से पहले रात्रि की प्रार्थना की, और उसे बिस्तर में लेटा रही थी, कि उसने प्रश्न पूछा, “मम्मी, यीशु कहाँ हैं?” मेरी पत्नी ने उत्तर दिया, “यीशु स्वर्ग में हैं, और सभी स्थानों पर भी हैं; वे अभी हमारे साथ भी हैं; और यदि तुम उन्हें आने के लिए कहोगी, तो वे तुम्हारे हृदय में भी आ कर रह सकते हैं।” बेटी ने उत्तर दिया, “मैं चाहती हूँ कि यीशु मेरे हृदय में आएं।”

      जब मेरी पत्नी ने कहा, “ठीक है; किसी दिन तुम उन्हें आने के लिए कह सकती हो;” तो हमारी बेटी बोली, “मैं उन्हें अभी अपने हृदय में आने के लिए कहना चाहती हूँ।” तब हमारी बेटी ने प्रार्थना की, “यीशु, कृपया मेरे हृदय में आएं और मेरे साथ रहें।” और यहाँ से उसके मसीही विश्वास की यात्रा का आरंभ हुआ।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा है कि जब प्रभु यीशु के शिष्यों ने उससे पूछा कि स्वर्ग के राज्य में कौन बड़ा है, तो प्रभु ने एक छोटे बालक को अपने पास बुलाया (मत्ती 18:1-2) और शिष्यों से कहा, “मैं तुम से सच कहता हूं, यदि तुम न फिरो और बालकों के समान न बनो, तो स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने नहीं पाओगे। जो कोई अपने आप को इस बालक के समान छोटा करेगा, वह स्वर्ग के राज्य में बड़ा होगा। और जो कोई मेरे नाम से एक ऐसे बालक को ग्रहण करता है वह मुझे ग्रहण करता है” (पद 3-5)।

      प्रभु यीशु के दृष्टिकोण से हम एक भरोसा करने वाले बालक को विश्वास के उदाहरण के रूप में देख सकते हैं। और हम से कहा गया है कि जो भी प्रभु के लिए अपने हृदय को खोलता है, हमें उसका स्वागत करना है, क्योंकि स्वर्ग का राज्य ऐसों ही का है (मत्ती 19:14)। - डेविड मैक्कैसलैंड

प्रभु यीशु मसीह में हमारा विश्वास, बालक द्वारा किए गए भरोसे के समान है।

यीशु ने कहा, बालकों को मेरे पास आने दो: और उन्हें मना न करो, क्योंकि स्वर्ग का राज्य ऐसों ही का है। - मत्ती 19:14

बाइबल पाठ: मत्ती 18:1-5
Matthew 18:1 उसी घड़ी चेले यीशु के पास आकर पूछने लगे, कि स्वर्ग के राज्य में बड़ा कौन है?
Matthew 18:2 इस पर उसने एक बालक को पास बुलाकर उन के बीच में खड़ा किया।
Matthew 18:3 और कहा, मैं तुम से सच कहता हूं, यदि तुम न फिरो और बालकों के समान न बनो, तो स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने नहीं पाओगे।
Matthew 18:4 जो कोई अपने आप को इस बालक के समान छोटा करेगा, वह स्वर्ग के राज्य में बड़ा होगा।
Matthew 18:5 और जो कोई मेरे नाम से एक ऐसे बालक को ग्रहण करता है वह मुझे ग्रहण करता है।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 21-22
  • मत्ती 19



मंगलवार, 28 जनवरी 2020

आनन्द



      मैं जीवन की एक नई ऋतु की ओर बढ़ रही हूँ – वृद्धावस्था की “शरद” ऋतु – किन्तु अभी वहाँ पहुँची नहीं हूँ। यद्यपि मेरे वर्ष तेज़ी से बीतते चले जा रहे हैं, और कभी-कभी मैं उनकी गति को कम भी करना चाहती हूँ, फिर भी मुझ में एक आनन्द है जो मुझे संभाले रहता है। हर दिन मुझे प्रभु परमेश्वर द्वारा दिया गया एक नया दिन है। मैं भी परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार के साथ कह सकती हूँ, “यहोवा का धन्यवाद करना भला है, हे परमप्रधान, तेरे नाम का भजन गाना; प्रात:काल को तेरी करूणा, और प्रति रात तेरी सच्चाई का प्रचार करना” (भजन 92:1-2)।

      चाहे मेरे जीवन में कई संघर्ष हों; और चाहे कभी औरों के दुःख और कठिनाइयाँ मुझे अभिभूतित करें, किन्तु प्रभु परमेश्वर मुझे सक्षम करता है कि मैं भी भजनकार के साथ कह सकती हूँ, “हे यहोवा, तू ने मुझ को अपने काम से आनन्दित किया है; और मैं तेरे हाथों के कामों के कारण जयजयकार करूंगा” (पद 4)। जो आशीषें उसने मुझे दी हैं: परिवार, मित्र, संतोषजनक व्यवसाय – वह सब मेरे लिए आनन्द का कारण है। मैं आनन्दित हूँ परमेश्वर की अद्भुत सृष्टि और उसके प्रेरित जीवते वचन के लिए। इसलिए भी आनन्दित हूँ क्योंकि प्रभु यीशु ने मुझ से इतना प्रेम किया कि मेरे पापों के बदले अपने आप को बलिदान कर दिया। मैं आनन्दित हूँ क्योंकि प्रभु परमेश्वर ने हमें अपना पवित्र आत्मा दिया है जो सच्चे आनन्द का स्त्रोत है (रोमियों 15:13)। प्रभु परमेश्वर के अनुग्रह के कारण, उस पर विश्वास रखने वाले, “धर्मी लोग खजूर के समान फूले फलेंगे, और लबानोन के देवदार के समान बढ़ते रहेंगे। वे यहोवा के भवन में रोपे जा कर, हमारे परमेश्वर के आंगनों में फूले फलेंगे। वे पुराने होने पर भी फलते रहेंगे, और रस भरे और लहलहाते रहेंगे” (भजन 92:12-14)।

      यह कौन सा फल है भजनकार जिसके लिए कह रहा है? हमारे जीवन की परिस्थितियाँ या जीवन की ऋतु चाहे जो भी हो, हम अपनी जीवन शैली, अपनी बोलचाल, तथा अपने व्यावहार के द्वारा प्रभु परमेश्वर के प्रेम के उदाहरण हो सकते हैं। प्रभु को जानने, उसके बारे में औरों को बताने, और उसके लिए जीवन जीने में सच्चा और स्थाई आनन्द है। - एलिसन कीडा

परमेश्वर ही सब आनन्द का दाता है।

सो परमेश्वर जो आशा का दाता है तुम्हें विश्वास करने में सब प्रकार के आनन्द और शान्ति से परिपूर्ण करे, कि पवित्र आत्मा की सामर्थ से तुम्हारी आशा बढ़ती जाए। - रोमियों 15:13

बाइबल पाठ: भजन 92
Psalms 92:1 यहोवा का धन्यवाद करना भला है, हे परमप्रधान, तेरे नाम का भजन गाना;
Psalms 92:2 प्रात:काल को तेरी करूणा, और प्रति रात तेरी सच्चाई का प्रचार करना,
Psalms 92:3 दस तार वाले बाजे और सारंगी पर, और वीणा पर गम्भीर स्वर से गाना भला है।
Psalms 92:4 क्योंकि, हे यहोवा, तू ने मुझ को अपने काम से आनन्दित किया है; और मैं तेरे हाथों के कामों के कारण जयजयकार करूंगा।
Psalms 92:5 हे यहोवा, तेरे काम क्या ही बड़े हैं! तेरी कल्पनाएं बहुत गम्भीर हैं!
Psalms 92:6 पशु समान मनुष्य इस को नहीं समझता, और मूर्ख इसका विचार नहीं करता:
Psalms 92:7 कि दुष्ट जो घास के समान फूलते- फलते हैं, और सब अनर्थकारी जो प्रफुल्लित होते हैं, यह इसलिये होता है, कि वे सर्वदा के लिये नाश हो जाएं,
Psalms 92:8 परन्तु हे यहोवा, तू सदा विराजमान रहेगा।
Psalms 92:9 क्योंकि हे यहोवा, तेरे शत्रु, हां तेरे शत्रु नाश होंगे; सब अनर्थकारी तित्तर बित्तर होंगे।
Psalms 92:10 परन्तु मेरा सींग तू ने जंगली सांढ़ का सा ऊंचा किया है; मैं टटके तेल से चुपड़ा गया हूं।
Psalms 92:11 और मैं अपने द्रोहियों पर दृष्टि कर के, और उन कुकर्मियों का हाल मेरे विरुद्ध उठे थे, सुनकर सन्तुष्ट हुआ हूं।
Psalms 92:12 धर्मी लोग खजूर के समान फूले फलेंगे, और लबानोन के देवदार के समान बढ़ते रहेंगे।
Psalms 92:13 वे यहोवा के भवन में रोपे जा कर, हमारे परमेश्वर के आंगनों में फूले फलेंगे।
Psalms 92:14 वे पुराने होने पर भी फलते रहेंगे, और रस भरे और लहलहाते रहेंगे,
Psalms 92:15 जिस से यह प्रगट हो, कि यहोवा सीधा है; वह मेरी चट्टान है, और उस में कुटिलता कुछ भी नहीं।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 19-20
  • मत्ती 18:21-35



सोमवार, 27 जनवरी 2020

नम्र



      एक दिन विश्वविद्यालय की एक दर्शनशास्त्र की कक्षा में, एक छात्र ने अपने शिक्षक द्वारा व्यक्त दृष्टिकोण को लेकर भड़काऊ टिप्पणी की। अन्य छात्र यह देखकर हैरान रह गए कि उस शिक्षक ने उस छात्र का धन्यवाद किया, और अगली टिप्पणी की ओर मुड़ गया। बाद में जब उससे पूछा गया कि उसने उस उद्दण्ड छात्र को उचित उत्तर क्यों नहीं दिया, तो शिक्षक का उत्तर था, “मैं अपनी ही बात को अंतिम बात न रखने के अनुशासन का अभ्यास कर रहा हूँ।”

      यह शिक्षक परमेश्वर से प्रेम करता था और उसका आदर करता था, और परमेश्वर के प्रेम को प्रतिबिंबित करने वाले व्यवहार को दिखाने के लिए वह नम्र भावना रखता था। उस शिक्षक के शब्द मुझे एक अन्य शिक्षक के शब्दों को स्मरण करवाते हैं, और यह दूसरा शिक्षक बहुत समय पहले का है – परमेश्वर के वचन बाइबल में सभोपदेशक का लेखक। यद्यपि इस दूसरे शिक्षक ने यह बात किसी क्रुद्ध व्यक्ति के प्रति व्यवहार करने के सन्दर्भ में नहीं कही थी, वरन परमेश्वर के निकट आने के समय हमारे उचित व्यवहार को सिखाने के लिए कही थी। सभोपदेशक के लेखक ने लिखा, “जब तू परमेश्वर के भवन में जाए, तब सावधानी से चलना; सुनने के लिये समीप जाना मूर्खों के बलिदान चढ़ाने से अच्छा है; क्योंकि वे नहीं जानते कि बुरा करते हैं। बातें करने में उतावली न करना, और न अपने मन से कोई बात उतावली से परमेश्वर के साम्हने निकालना, क्योंकि परमेश्वर स्वर्ग में हैं और तू पृथ्वी पर है; इसलिये तेरे वचन थोड़े ही हों” (सभोपदेशक 5:1-2)।

      आप परमेश्वर के निकट किस मानसिकता के साथ आते हैं? यदि आपको लगता है कि आपके व्यवहार में कुछ सुधार होना चाहिए तो क्यों न कुछ समय परमेश्वर की महानता और महिमा पर विचार करने में बिताएं? जब हम परमेश्वर की असीम बुद्धिमत्ता, सामर्थ्य, और उपस्थिति पर मनन करते हैं, तो हमारे प्रति उसके उमड़ते हुए प्रेम से हम अभिभूतित हो सकते हैं, जो फिर हमें नम्र बनाता है। जब हम ऐसे नम्र रहना पसंद करेंगे, तो फिर अपनी बात को सबसे ऊपर रखने की प्रवृत्ति रहेगी ही नहीं। - एमी बाउचर पाई

ध्यान पूर्वक चुने गए शब्द परमेश्वर को आदर देते हैं।

...यह वही बात है जिसे यहोवा ने कहा था, कि जो मेरे समीप आए अवश्य है कि वह मुझे पवित्र जाने, और सारी जनता के साम्हने मेरी महिमा करे। - लैव्यवस्था 10:3

बाइबल पाठ: सभोपदेशक 5:1-7
Ecclesiastes 5:1 जब तू परमेश्वर के भवन में जाए, तब सावधानी से चलना; सुनने के लिये समीप जाना मूर्खों के बलिदान चढ़ाने से अच्छा है; क्योंकि वे नहीं जानते कि बुरा करते हैं।
Ecclesiastes 5:2 बातें करने में उतावली न करना, और न अपने मन से कोई बात उतावली से परमेश्वर के साम्हने निकालना, क्योंकि परमेश्वर स्वर्ग में हैं और तू पृथ्वी पर है; इसलिये तेरे वचन थोड़े ही हों।
Ecclesiastes 5:3 क्योंकि जैसे कार्य की अधिकता के कारण स्वप्न देखा जाता है, वैसे ही बहुत सी बातों का बोलने वाला मूर्ख ठहरता है।
Ecclesiastes 5:4 जब तू परमेश्वर के लिये मन्नत माने, तब उसके पूरा करने में विलम्ब न करना; क्यांकि वह मूर्खों से प्रसन्न नहीं होता। जो मन्नत तू ने मानी हो उसे पूरी करना।
Ecclesiastes 5:5 मन्नत मान कर पूरी न करने से मन्नत का न मानना ही अच्छा है।
Ecclesiastes 5:6 कोई वचन कहकर अपने को पाप में ने फंसाना, और न ईश्वर के दूत के साम्हने कहना कि यह भूल से हुआ; परमेश्वर क्यों तेरा बोल सुन कर अप्रसन्न हो, और तेरे हाथ के कार्यों को नष्ट करे?
Ecclesiastes 5:7 क्योंकि स्वप्नों की अधिकता से व्यर्थ बातों की बहुतायत होती है: परन्तु तू परमेश्वर को भय मानना।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 16-18
  • मत्ती 18:1-20



रविवार, 26 जनवरी 2020

उद्देश्य



      कहा जाता है कि “जब आप मज़े ले रहे हों, तो समय बहुत तेज़ी से बीतता है।” यह कोई तथ्य तो नहीं है, किन्तु अनुभव इसे सत्य प्रतीत करवाता है। जब जीवन मनोरम हो, तो समय बहुत जल्दी बीत जाता है। यदि मैं कोई ऐसा कार्य कर रही हूँ जो मुझे अच्छा लगता है, या मैं किसी ऐसे व्यक्ति के साथ हूँ जिसकी संगति मुझे अच्छी लगती है, तो फिर समय का कोई महत्व नहीं रहता है।

      इस बात के अनुभव ने मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रकाशितवाक्य 4 अध्याय में वर्णित दृश्य के प्रति एक नई समझ दी है। पहले जब मैं परमेश्वर के सिंहासन के चारों ओर बैठे उन चार प्राणियों के बारे में विचार करती थी, जो वही शब्द बारंबार दोहरा रहे हैं, तो मुझे लगता था, यह कितनी उबाऊ स्थिति होगी।

      परन्तु अब मैं ऐसा नहीं सोचती हूँ। अब जब मैं उन दृश्यों के बारे में सोचती हूँ जो उन्होंने अपनी अनेकों आँखों से देखे हैं (पद 8), और उन दर्शनों के बारे में विचार करती हूँ जिन्हें उन्होंने परमेश्वर के सिंहासन के पास होने के कारण निहारा है (पद 6), तो मुझे लगता है कि वे कितने आश्चर्यचकित होंगे परमेश्वर के गलती करते रहने वाले मनुष्यों के प्रति बुद्धिमान और प्रेम पूर्ण व्यवहार के लिए। इसलिए फिर इस सब के लिए उनके उस प्रत्युत्तर से बेहतर और क्या प्रत्युत्तर हो सकता है? वे और क्या कहेंगे, सिवाए इसके कि “पवित्र, पवित्र, पवित्र”?

      क्या उन्हीं शब्दों को बारंबार कहते रहना उबा देने वाला हो सकता है? यदि आप किसी ऐसे के साथ हैं जिसे आप प्रेम करते हैं, तब तो नहीं; और न ही तब जब आप ठीक वही कर रहे हैं जिसे करने के लिए आपको योजनाबद्ध रीति से बनाया गया है। उन चार प्राणियों के समान जिन्हें परमेश्वर ने अपनी महिमा करने के उद्देश्य से बनाया है, हमें भी परमेश्वर ने अपनी महिमा के उद्देश्य से बनाया है। यदि हम अपने जीवन परमेश्वर द्वारा हमारे लिए रखे गए उद्देश्य पर केंद्रित रखें, और उस उद्देश्य को पूरा करते रहें, तो हमारे जीवन कभी भी उबाऊ नहीं होंगे। - जूली एकरमैन लिंक

परमेश्वर के साथ सामंजस्य में बना हुआ ह्रदय, उसकी स्तुति किए बिना रह नहीं सकता है।

इस प्रजा को मैं ने अपने लिये बनाया है कि वे मेरा गुणानुवाद करें। - यशायाह 43:21

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 4
Revelation 4:1 इन बातों के बाद जो मैं ने दृष्टि की, तो क्या देखता हूं कि स्वर्ग में एक द्वार खुला हुआ है; और जिस को मैं ने पहिले तुरही के से शब्द से अपने साथ बातें करते सुना था, वही कहता है, कि यहां ऊपर आ जा: और मैं वे बातें तुझे दिखाऊंगा, जिन का इन बातों के बाद पूरा होना अवश्य है।
Revelation 4:2 और तुरन्त मैं आत्मा में आ गया; और क्या देखता हूं, कि एक सिंहासन स्वर्ग में धरा है, और उस सिंहासन पर कोई बैठा है।
Revelation 4:3 और जो उस पर बैठा है, वह यशब और मानिक सा दिखाई पड़ता है, और उस सिंहासन के चारों ओर मरकत सा एक मेघधनुष दिखाई देता है।
Revelation 4:4 और उस सिंहासन के चारों ओर चौबीस सिंहासन है; और इन सिंहासनों पर चौबीस प्राचीन श्वेत वस्‍त्र पहिने हुए बैठें हैं, और उन के सिरों पर सोने के मुकुट हैं।
Revelation 4:5 और उस सिंहासन में से बिजलियां और गर्जन निकलते हैं और सिंहासन के साम्हने आग के सात दीपक जल रहे हैं, ये परमेश्वर की सात आत्माएं हैं।
Revelation 4:6 और उस सिंहासन के साम्हने मानो बिल्लौर के समान कांच का सा समुद्र है, और सिंहासन के बीच में और सिंहासन के चारों ओर चार प्राणी हैं, जिन के आगे पीछे आंखे ही आंखे हैं।
Revelation 4:7 पहिला प्राणी सिंह के समान है, और दूसरा प्राणी का मुंह बछड़े के समान है, तीसरे प्राणी का मुंह मनुष्य का सा है, और चौथा प्राणी उड़ते हुए उकाब के समान है।
Revelation 4:8 और चारों प्राणियों के छ: छ: पंख हैं, और चारों ओर, और भीतर आंखे ही आंखे हैं; और वे रात दिन बिना विश्राम लिये यह कहते रहते हैं, कि पवित्र, पवित्र, पवित्र प्रभु परमेश्वर, सर्वशक्तिमान, जो था, और जो है, और जो आने वाला है।
Revelation 4:9 और जब वे प्राणी उस की जो सिंहासन पर बैठा है, और जो युगानुयुग जीवता है, महिमा और आदर और धन्यवाद करेंगे।
Revelation 4:10 तब चौबीसों प्राचीन सिंहासन पर बैठने वाले के साम्हने गिर पड़ेंगे, और उसे जो युगानुयुग जीवता है प्रणाम करेंगे; और अपने अपने मुकुट सिंहासन के साम्हने यह कहते हुए डाल देंगे।
Revelation 4:11 कि हे हमारे प्रभु, और परमेश्वर, तू ही महिमा, और आदर, और सामर्थ के योग्य है; क्योंकि तू ही ने सब वस्तुएं सृजीं और वे तेरी ही इच्छा से थीं, और सृजी गईं।

(इस लेक की लेखिका, जूली, अब स्वर्ग में परमेश्वर की स्तुति करने वालों के साथ हैं)

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 14-15
  • मत्ती 17



शनिवार, 25 जनवरी 2020

आशा



      कुछ समय पहले मैं अपने एक मित्र के साथ एम्पायर स्टेट बिलडिंग देखने गया। हमारे समान उसे देखने आए अन्य लोगों की लाइन छोटी ही लग रही थी, बस थोड़ा सा आगे जाकर कोना मुड़ने तक की। परन्तु जब हम ने उस बिलडिंग में प्रवेश किया तो पाया कि आए हुए लोगों की लाइन लॉबी से आगे सीढ़ियों , और फिर एक कमरे के अन्दर तक तक जा रही थी। हमारा हर मोड़ मुड़ना, कुछ और दूरी को दिखाता था। आकर्षणस्थल और घूमने के स्थानों के संचालक, आने वाले लोगों की भीड़ को ऐसे मार्गों से ले चलते हैं कि देखने वालों को भीड़ कम लगे, किन्तु वास्तविकता तो “मोड़ मुड़ते ही” दिखाई देती है।

      इसी प्रकार जीवन की निराशाएं भी कभी-कभी जितनी दिखाई देती हैं, उससे बढ़कर गंभीर होती हैं। हमने जिस नौकरी के मिलने की आशा रखी थी, वह नहीं मिलती है; जिन मित्रों पर हमने भरोसा किया था उन्होंने हमारे भरोसे को तोड़ दिया; जिस प्रेम संबंध पर हमने आशा रखी थी, वह सफल नहीं हुआ; आदि। परन्तु इन नाकामियों और दिल तोड़ने वाली घटनाओं में परमेश्वर का वचन बाइबल हमें एक नई आशा के प्रति प्रोत्साहित करता है। प्रेरित पौलुस ने लिखा, “केवल यही नहीं, वरन हम क्लेशों में भी घमण्ड करें, यही जानकर कि क्लेश से धीरज। और धीरज से खरा निकलना, और खरे निकलने से आशा उत्पन्न होती है। और आशा से लज्ज़ा नहीं होती, क्योंकि पवित्र आत्मा जो हमें दिया गया है उसके द्वारा परमेश्वर का प्रेम हमारे मन में डाला गया है” (रोमियों 5:3-5)।

      हम जब परमेश्वर में अपना भरोसा बनाए रखते हैं, तो परमेश्वर अपनी आत्मा के द्वारा हमें धीमी आवाज़ में बताता है कि वह हम से बिना किसी शर्त के प्रेम करता है और एक दिन हम उसके साथ होंगे – चाहे आज हमारे सामने कैसी भी बाधाएं क्यों न आ रही हों।

      एक ऐसे संसार में, जो हमें बहुधा निराश करता है, यह जानना कितना अच्छा है कि परमेश्वर में हमें एक वास्तविक आशा मिलती है। - जेम्स बैंक्स

मसीह यीशु में निराश लोगों को भी आशा मिलती है।

प्रभु यीशु ने कहा: “हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा।” (मत्ती 11:28)

बाइबल पाठ: रोमियों 5:1-11
Romans 5:1 सो जब हम विश्वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के साथ मेल रखें।
Romans 5:2 जिस के द्वारा विश्वास के कारण उस अनुग्रह तक, जिस में हम बने हैं, हमारी पहुंच भी हुई, और परमेश्वर की महिमा की आशा पर घमण्ड करें।
Romans 5:3 केवल यही नहीं, वरन हम क्लेशों में भी घमण्ड करें, यही जानकर कि क्लेश से धीरज।
Romans 5:4 और धीरज से खरा निकलना, और खरे निकलने से आशा उत्पन्न होती है।
Romans 5:5 और आशा से लज्ज़ा नहीं होती, क्योंकि पवित्र आत्मा जो हमें दिया गया है उसके द्वारा परमेश्वर का प्रेम हमारे मन में डाला गया है।
Romans 5:6 क्योंकि जब हम निर्बल ही थे, तो मसीह ठीक समय पर भक्तिहीनों के लिये मरा।
Romans 5:7 किसी धर्मी जन के लिये कोई मरे, यह तो र्दुलभ है, परन्तु क्या जाने किसी भले मनुष्य के लिये कोई मरने का भी हियाव करे।
Romans 5:8 परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा।
Romans 5:9 सो जब कि हम, अब उसके लोहू के कारण धर्मी ठहरे, तो उसके द्वारा क्रोध से क्यों न बचेंगे?
Romans 5:10 क्योंकि बैरी होने की दशा में तो उसके पुत्र की मृत्यु के द्वारा हमारा मेल परमेश्वर के साथ हुआ फिर मेल हो जाने पर उसके जीवन के कारण हम उद्धार क्यों न पाएंगे?
Romans 5:11 और केवल यही नहीं, परन्तु हम अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा जिस के द्वारा हमारा मेल हुआ है, परमेश्वर के विषय में घमण्ड भी करते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 12-13
  • मत्ती 16