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गुरुवार, 21 अक्टूबर 2010

विरोध निवारण

आज के दिन को बहुत से देशों में विरोध निवारण दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य है कि लोगों को प्रोत्साहित करें कि वे अपने मतभेद अपसी बातचीत या किसी की मध्यस्तता द्वारा सुलझा लें न कि कानूनी तरीकों का सहारा लें।

यह कहा जाता है कि "चर्च में होने वाले झगड़े सबसे बुरे झगड़े होते हैं" क्योंकि ये झगड़े उन लोगों में होते हैं जो एकता और प्रेम में विश्वास करते हैं और उनका प्रचार करते हैं। कई मसीही किसी दूसरे मसीही द्वारा ऐसे दुखी हुए हैं कि वे फिर कभी लौटकर चर्च में नहीं आये।

बाइबल में यूआदिया और सुन्‍तुखे को नाम द्वारा संबोधित करके उनसे अनुरोध किया गया कि अपने मतभेद भुलाकर "वे प्रभु में एक मन रहें" (फिलिप्पियों ४:२)"। इस कार्य में उन्हें अकेला छोड़ देने के स्थान पर पौलुस ने एक सहविश्वासी से अनुरोध किया कि "हे सच्‍चे सहकर्मी मैं तुझ से भी बिनती करता हूं, कि तू उन स्‍त्रियों की सहयता कर, क्‍योंकि उन्‍होंने मेरे साथ सुसमाचार फैलाने में, क्‍लेमेंस और मेरे उन और सहकिर्मयों समेत परिश्र्म किया, जिन के नाम जीवन की पुस्‍तक में लिखे हुए हैं" (फिलिप्पियों ४:३)। इसी संदर्भ में पौलुस ने फिलिप्पियों के अन्य विश्वासियों से आग्रह किया कि वे अपने निवेदन परमेश्वर के सन्मुख लाएं क्योंकि प्रार्थना परमेश्वर की शान्ति को लाती है और उसकी सदा बनी रहने वाली उपस्थिति का एहसास दिलाती है (फिलिप्पियों ४:७, ९)। मसीही मण्डली में टूटे हुए रिशते, समस्त मण्डली की सामूहिक ज़िम्मेवारी हैं।

जब मतभेद और दुखी मन हों तो धैर्य से उनकी सुनकर, उन्हें प्रोत्साहित करके और उनके साथ प्रार्थना करके इन बातों का निवारण किया जा सकता है। - डेविड मैककैसलैंड


क्षमा ही वह उपाय है जो टूटे रिशते जोड़ देता है।

मैं यूआदिया को भी समझाता हूं, और सुन्‍तुखे को भी, कि वे प्रभु में एक मन रहें। - फिलिप्पियों ४:२

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों ४:१-९

इसलि्ये हे मेरे प्रिय भाइयों, जिन में मेरा जी लगा रहता है जो मेरे आनन्‍द और मुकुट हो, हे प्रिय भाइयो, प्रभु में इसी प्रकार स्थिर रहो।
मैं यूआदिया को भी समझाता हूं, और सुन्‍तुखे को भी, कि वे प्रभु में एक मन रहें।
और हे सच्‍चे सहकर्मी मैं तुझ से भी बिनती करता हूं, कि तू उन स्‍त्रियों की सहयता कर, क्‍योंकि उन्‍होंने मेरे साथ सुसमाचार फैलाने में, क्‍लेमेंस और मेरे उन और सहकिर्मयों समेत परिश्र्म किया, जिन के नाम जीवन की पुस्‍तक में लिखे हुए हैं।
प्रभु में सदा आनन्‍दित रहो, मैं फिर कहता हूं, आनन्‍दित रहो।
तुम्हारी कोमलता सब मनुष्यों पर प्रगट हो: प्रभु निकट है।
किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्‍तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं।
तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरक्षित रखेगी।
निदान, हे भाइयों, जो जो बातें सत्य हैं, और जो जो बातें आदरणीय हैं, और जो जो बातें उचित हैं, और जो जो बातें पवित्र हैं, और जो जो बातें सुहावनी हैं, और जो जो बातें मनभावनी हैं, निदान, जो जो सदगुण और प्रशंसा की बातें हैं, उन्‍हीं पर ध्यान लगाया करो।
जो बातें तुम ने मुझ से सीखीं, और ग्रहण की, और सुनी, और मुझ में देखीं, उन्‍हीं का पालन किया करो, तब परमेश्वर जो शान्‍ति का सोता है तुम्हारे साथ रहेगा।

एक साल में बाइबल:
  • यशायाह ६२-६४
  • १ तिमुथियुस १

बुधवार, 20 अक्टूबर 2010

दुखी लोगों की सहायता

जब भी मैंने किसी दुखी व्यक्ति से पूछा है कि "आपकी सहायता किसने की?" तो किसी ने भी कभी किसी ऐसे जन का नाम नहीं लिया जो कोई प्रसिद्ध दार्शनिक हो या धर्म के अध्ययन में जिसने कोई उँची उपलब्धी प्राप्त करी हो। उनकी सहायता करने वाले साधारण लोग ही थे। हममें से प्रत्येक के पास दुखियारों की सहायता करने की समान क्षमता है।

हर एक के दुख के निवारण के लिये सब पर एक समान काम करना वाला कोई उपाय नहीं है। यदि आप दुख भोगने वालों से पूछें तो कोई किसी ऐसे मित्र को याद करेगा जिसने खुश-मिज़ाजी से उन्हें दुख से ध्यान हटाने में उनकी सहायता करी; तो कुछ ऐसे भी हैं जो दुख में इस तरह की खुश-मिज़ाजी को अपमानजनक मानते हैं। कुछ ऐसे हैं जो सीधी, स्पष्ट बात द्वारा सांत्वना पाते हैं तो दूसरे ऐसी स्पष्ट और सीधी बातों को अत्यधिक निराशाजनक मानते हैं।

दुखी जन के लिये कोई जादूई इलाज नहीं है, परन्तु फिर भी एक बात है जिसकी सब को आवश्यक्ता होती है, वह है उनस्के प्रति प्रेम दिखाने की; सच्चा प्रेम सहजबोध से स्वतः ही समझ जाता है कि दुखी जन को क्या चाहिये। जौं वानियर, जिसने जन्म से अपंग लोगों के लिये "L'Arche" आन्दोलन चलाया, का कहना है कि: "दुखी और आहत लोग जो कष्ट और बिमारियों द्वारा टूट चुके हैं, बस एक ही बात चाहते हैं - एक प्रेम करने वाला हृदय जो उनको समर्पित हो, एक हृदय जो उनमें आशा जगाने की लालसा से भरा हो।"

ऐसा प्रेम दिखाना हमारे लिये बहुत कठिन हो सकता है। लेकिन पौलुस प्रेरित सच्चे प्रेम की परिभाषा में याद दिलाता है कि "वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है" (१ कुरिन्थियों १३:७)।

जैसा परमेश्वर के काम करने की रीति है, वह बहुत साधारण को लोगों को अपनी चंगाई पहुंचाने का माध्यम बनाता है। जो दुखी हैं उन्हें हमारा ज्ञान और सूझ-बूझ नहीं चाहिये, उन्हें हमसे केवल सच्चा प्रेम चाहिये। - फिलिप यैन्सी


जो अपना प्रेम प्रकट नहीं करते, वे सच्चा प्रेम भी नहीं करते। - शेक्स्पीयर

पर अब विश्वास, आशा, प्रेम ये तीनों स्थाई हैं, पर इन में सब से बड़ा प्रेम है। - १ कुरिन्थियों १३:१३


बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों १३

यदि मैं मनुष्यों, और सवर्गदूतों की बोलियां बोलूं, और प्रेम न रखूं, तो मैं ठनठनाता हुआ पीतल, और झंझनाती हुई झांझ हूं।
और यदि मैं भविष्यद्वाणी कर सकूं, और सब भेदों और सब प्रकार के ज्ञान को समझूं, और मुझे यहां तक पूरा विश्वास हो, कि मैं पहाड़ों को हटा दूं, परन्तु प्रेम न रखूं, तो मैं कुछ भी नहीं।
और यदि मैं अपनी सम्पूर्ण संपत्ति कंगालों को खिला दूं, या अपनी देह जलाने के लिये दे दूं, और प्रेम न रखूं, तो मुझे कुछ भी लाभ नहीं।
प्रेम धीरजवन्त है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं।
वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता।
कुकर्म से आनन्दित नहीं होता, परन्तु सत्य से आनन्दित होता है।
वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है।
प्रेम कभी टलता नहीं; भविष्यद्वाणियां हों, तो समाप्त हो जाएंगी, भाषाएं हो तो जाती रहेंगी; ज्ञान हो, तो मिट जाएगा।
क्योंकि हमारा ज्ञान अधूरा है, और हमारी भविष्यद्वाणी अधूरी।
परन्तु जब सवर्सिद्ध आएगा, तो अधूरा मिट जाएगा।
जब मैं बालक था, तो मैं बालकों की नाईं बोलता था, बालकों का सा मन था बालकों की सी समझ थी; परन्तु सियाना हो गया, तो बालकों की बातें छोड़ दी।
अब हमें दर्पण में धुंधला सा दिखाई देता है; परन्तु उस समय आमने साम्हने देखेंगे, इस समय मेरा ज्ञान अधूरा है; परन्तु उस समय ऐसी पूरी रीति से पहिचानूंगा, जैसा मैं पहिचाना गया हूं।
पर अब विश्वास, आशा, प्रेम ये तीनों स्थाई है, पर इन में सब से बड़ा प्रेम है।

एक साल में बाइबल:
  • यशायाह ५९-६१
  • २ थिसुलिनीकियों ३

मंगलवार, 19 अक्टूबर 2010

सेवा-निवृति या सेवाकाई का आरंभ?

४० वर्ष तक अध्यापिका का कार्य करके जेन हैन्सन सेवा-निवृत हुईं। उस समय वे और उनके पति अपने पहिले पोते या पोती के आने की प्रतीक्षा कर रहे थे।

सेवा-निवृति वह समय होता है जब लोग बस आराम करने या घूमने फिरने या अपनी किसी मन पसन्द बात के लिये समय बिताना चाहते हैं। किंतु जेन ने अपने घर के पास के एक नगर में कुछ जोखिम में पड़े हुए यवकों के मध्य सेवाकाई के विष्य में सुना, और उसने ठान लिया कि वह इसमें सम्मिलित होगी। उन्होंने कहा "मैंने जाना कि वहां ऐसे युवक हैं जिन्हें सहायता की प्रतीक्षा है और मैं यह सहायता कर सकती थी और उनके जीवनों में फर्क ला सकती थी।" जेने ने एक जवान लाईबीरियाई युवक को अंग्रेज़ी भाषा सिखानी आरंभ करी, जो अपने देश में चल रहे गृह युद्ध के कारण जान बचा कर भागने को मजबूर हुआ था, और अब वह सुरक्षित तो था लेकिन भाषा ना आने के कारण अपने शरणस्थान में परेशान था। अपनी इस नयी सेवाकाई के विषय में जेन ने कहा, "मैं अपना समय व्यतीत करने के लिये दुकानों में घूमना और खरीददारी करना भी कर सकती थी, पर उससे मुझे क्या खुशी मिलती?"

आज जेन किसी की ज़िन्दगी में एक फर्क ला रही है। शायद उसने कुछ हद तक प्रभु यीशु की इस बात को समझा "क्‍योंकि जो कोई अपना प्राण बचाना चाहे, वह उसे खोएगा; और जो कोई मेरे लिये अपना प्राण खोएगा, वह उसे पाएगा" (मत्ती १६:२५)। दूसरों की सहायता करने और अपने आप को प्रभु को समर्पित करने में अपने आप का और अपनी लालसाओं का इन्कार करना पड़ता है, किंतु एक दिन प्रभु इस खुद-इन्कारी का प्रतिफल देगा (मती १६:२७)।

आज हम जीवन के किसी भी पड़ाव पर हों, जेन का उदाहरण हमें प्रेरित करता है कि उसकी तरह हम भी परमेश्वर के प्रति अपने प्रेम के कारण अपने आप को किसी के जीवन में भला करने के लिये उपयोगी बनाएं। - ऐनी सेटास


परमेश्वर के लिये काम करें, उसकी सेवा-निवृति योजना इस संसार से परे की है।

जो कोई मेरे लिये अपना प्राण खोएगा, वह उसे पाएगा। - मत्ती १६:२५


बाइबल पाठ: मत्ती १६:२४-२८

तब यीशु ने अपने चेलों से कहा, यदि कोई मेरे पीछे आना चाहे, तो अपने आप का इन्‍कार करे और अपना क्रूस उठाए, और मेरे पीछे हो ले।
क्‍योंकि जो कोई अपना प्राण बचाना चाहे, वह उसे खोएगा, और जो कोई मेरे लिये अपना प्राण खोएगा, वह उसे पाएगा।
यदि मनुष्य सारे जगत को प्राप्‍त करे, और अपने प्राण की हानि उठाए, तो उसे क्‍या लाभ होगा या मनुष्य अपने प्राण के बदले में क्‍या देगा?
मनुष्य का पुत्र अपने स्‍वर्गदूतों के साथ अपने पिता की महिमा में आएगा, और उस समय वह हर एक को उसके कामों के अनुसार प्रतिफल देगा।
मैं तुम से सच कहता हूं, कि जो यहां खड़े हैं, उन में से कितने ऐसे हैं कि जब तक मनुष्य के पुत्र को उसके राज्य में आते हुए न देख लेंगे, तब तक मृत्यु का स्‍वाद कभी न चखेंगे।

एक साल में बाइबल:
  • यशायाह ५६-५८
  • २ थिसुलिनीकियों २

सोमवार, 18 अक्टूबर 2010

बच्चों के भले भविष्य के लिये

मेरे माता पिता चाहते थे कि उनके भी बच्चे उनके जैसे अच्छे संगीत के चहने वाले हों। इसके लिये उन्होंने बच्चों की कहानियों के संगीतमय रूपकों का सहारा लिया। वे लोकप्रीय कहानियां संगीतबद्ध होकर और भी आकर्ष्क हो जाती थीं और उनका गहरा प्रभाव हमारे जीवनों पर हुआ और साथ साथ हम संगीत और वाद्ययंत्रों के बारे में भी सीख सके।

यदि किसी व्यसक को बच्चों कोई बात सिखानी या समाझानी हो तो इसका सबसे अच्छा तरीका होता है उसे किसी कहानी के रूप में बताना, तब वह आसानी से समझाई भी जा सकती है और याद भी हो जाती है। बाइबल की महान सच्चाईयां चरित्र संवारती भी हैं और गलत निर्ण्यों के दुष्परिणाम भी दिखाती हैं (१ कुरिन्थियों १०:११), इसलिये बच्चों को इन सच्चाईयों को सिखाना आवश्यक है, जो कहानियों के रूप में किया जा सकता है। उनके मन की नम्र भूमि में विश्वास के ये बीज बो देने से वे देख पाते हैं कि संसार के इतिहास में परमेश्वर किस प्रकार से अपने प्रेम करने वालों के जीवन में कार्य करता रहा है। साथ ही वे यह भी सीख पाते हैं कि कैसे परमेश्वर सदा अपने लोगों के जीवन में सम्मिलित रहता है।

जो हमने परमेश्वर को अपने जीवन में करते देखा है और जो वह संसार के इतिहास में अपने लोगों के जीवन में करता आया है, उसे अगली पीढ़ी तक पहुँचाना न सिर्फ हमारा कर्तव्य है वरन परमेश्वर द्वारा हमें दी गई ज़िम्मेवारी भी है (व्यवस्थाविवरण ११:१-२१)। बच्चों के भले भविष्य के लिये यह अनिवार्य है कि वे बचपन से ही परमेश्वर और विश्वास के भले प्रतिफलों को जान सकें। - सिंडी हैस कैसपर


आपके बच्चों का कल का चरित्र इस पर निर्भर करता है कि आज आप उनके हृदय में क्या बोते हैं!

और तुम घर में बैठे, मार्ग पर चलते, लेटते-उठते इनकी [परमेश्वर के वचन की] चर्चा करके अपने लड़के-बालों को सिखाया करना। - व्यवस्थाविवरण ११:१९


बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण ११:१३-२१

और यदि तुम मेरी आज्ञाओं को जो आज मैं तुम्हें सुनाता हूं ध्यान से सुनकर, अपके सम्पूर्ण मन और सारे प्राण के साथ, अपने परमेश्वर यहोवा से प्रेम रखो और उसकी सेवा करते रहो,
तो मैं तुम्हारे देश में बरसात के आदि और अन्त दोनों समयों की वर्षा को अपने अपने समय पर बरसाऊंगा, जिस से तू अपना अन्न, नया दाखमधु, और टटका तेल संचय कर सकेगा।
और मै तेरे पशुओं के लिये तेरे मैदान में घास उपजाऊंगा, और तू पेट भर खाएगा और सन्तुष्ट रहेगा।
इसलिये अपने विषय में सावधान रहो, ऐसा न हो कि तुम्हारे मन धोखा खाएं, और तुम बहक कर दूसरे देवताओं की पूजा करने लगो और उनको दण्डवत करने लगो,
और यहोवा का कोप तुम पर भड़के, और वह आकाश की वर्षा बन्द कर दे, और भूमि अपनी उपज न दे, और तुम उस उत्तम देश में से जो यहोवा तुम्हें देता है शीघ्र नष्ट हो जाओ।
इसलिये तुम मेरे ये वचन अपने अपने मन और प्राण में धारण किए रहना, और चिन्हानी के लिये अपके हाथों पर बान्धना, और वे तुम्हारी आंखों के मध्य में टीके का काम दें।
और तुम घर में बैठे, मार्ग पर चलते, लेटते-उठते इनकी चर्चा करके अपने लड़के-बालों को सिखाया करना।
और इन्हें अपने अपनेके घर के चौखट के बाजुओं और अपने फाटकों के ऊपर लिखना;
इसलिये कि जिस देश के विषय में यहोवा ने तेरे पूर्वजों से शपथ खाकर कहा था, कि मैं उसे तुम्हें दूंगा, उस में तुम्हारे और तुम्हारे लड़के-बालों की दीर्घायु हो, और जब तक पृथ्वी के ऊपर का आकाश बना रहे तब तक वे भी बने रहें।

एक साल में बाइबल:
  • यशायाह ५३-५५
  • २ थिसुलिनीकियों १

रविवार, 17 अक्टूबर 2010

महान कन्धों पर

हमारी कथा-कहानियों में, ऐतिहासिक एवं कालपनिक दोनो रूपों में, विशलकाय मानवों का विशेष स्थान रहा है। ऐतिहासिक भीमकाय गोलियत से लेकर कालपनिक कहानी "Jack and the Beanstalk" के राक्षस तक, इन विशल देह वाले मानवों से हम रोमांचित होते रहे हैं।

कभी कभी हम किसी सामन्य शरीर वाले मनुष्य को भी महामानव के रूप में देखते हैं क्योंकि उसने कुछ असाधारण काम किये होते हैं, इसलिये हम उन्हें महान मानते हैं। ऐसे ही एक महान व्यक्ति थे १७वीं शताब्दी के मशहूर भौतिकशास्त्री सर आइज़क न्यूटन। वे एक मसीही विश्वासी थे और उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने से पहले आए महान लोगों को दिया, उन्होंने कहा "यदि मैं कुछ आगे देख सका हूं तो यह संभव हुआ मेरा महान लोगों के कंधों पर चढ़ पाने के द्वारा।" न्यूटन भी ऐसे ही महान व्यक्तितव बन गए जिनके कंधों पर उनके बाद के वैज्ञानिक चढ़ सके और उनके अविष्कारों के सहारे अन्तरिक्ष की यात्रा संभव हो सकी।

जब परमेश्वर ने यहोशु को इस्त्राएलियों को वाचा की भूमि में ले जाने की आज्ञा दी, तब भी यहोशु के पास सहारे के लिये महान कन्धे थे - वह ४० साल तक परमेश्वर के सेवक मूसा द्वारा इस्त्राएलियों की अगुवाई को देखता रहा था और उससे सीखता रहा था, अब समय था कि जो उसने सीखा उसे कार्यान्वित करे। यहोशु के पास एक लाभ की बात और थी - परमेश्वर के साथ उसकी संगति। अर्थात अब उसके पास मूसा का उदाहरण और परमेश्वर की संगति दोनो थे जो इस्त्राएलियों को वाचा की भूमि में लेजाकर बसाने में उसकी सहायता करते।

भविष्य की अनिश्चितता का सामना करने के लिये क्या आप किसी सहारे की तलाशा में हैं? किसी ऐसे महान व्यक्तित्व का अनुसरण कीजीए जो इस राह चला हो, और इस अनुसरण में परमेश्वर की संगति को भी अपने साथ ले लीजिए। पौलुस ने कहा "तुम मेरी सी चाल चलो जैसे मैं मसीह की सी चाल चलता हूँ" (१ कुरिन्थियों ११:१); प्रभु यीशु मसीह और बाइबल के विश्वासियों के उदाहरण आपको सही राह पर लेकर चलेंगे। - डेनिस फिशर


अच्छा उदाहरण वह है जो मार्ग जानता हो, मार्ग पर चलता हो और मार्ग दिखाता हो।

यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्‍चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता। - यूहन्ना १४:६


तेरे जीवन भर कोई तेरे साम्हने ठहर न सकेगा, जैसे मैं मूसा के संग रहा वैसे ही तेरे संग भी रहूंगा; और न तो मैं तुझे धोखा दूंगा, और न तुझ को छोडूंगा। - यहोशू १:५


बाइबल पाठ: यहोशु १:१-९

यहोवा के दास मूसा की मृत्यु के बाद यहोवा ने उसके सेवक यहोशू से जो नून का पुत्र था कहा,
मेरा दास मूसा मर गया है, सो अब तू उठ, कमर बान्ध, और इस सारी प्रजा समेत यरदन पार होकर उस देश को जा जिसे मैं उनको अर्थात इस्राएलियों को देता हूं।
उस वचन के अनुसार जो मैं ने मूसा से कहा, अर्थात जिस जिस स्थान पर तुम पांव धरोगे वह सब मैं तुम्हे दे देता हूं।
जंगल और उस लबानोन से लेकर परात महानद तक, और सूर्यास्त की ओर महासमुद्र तक हित्तियों का सारा देश तुम्हारा भाग ठहरेगा।
तेरे जीवन भर कोई तेरे साम्हने ठहर न सकेगा, जैसे मैं मूसा के संग रहा वैसे ही तेरे संग भी रहूंगा; और न तो मैं तुझे धोखा दूंगा, और न तुझ को छोडूंगा।
इसलिये हियाव बान्धकर दृढ़ हो जा, क्योंकि जिस देश के देने की शपथ मैं ने इन लोगों के पूर्वजों से खाई थी उसका अधिकारी तू इन्हें करेगा।
इतना हो कि तू हियाव बान्धकर और बहुत दृढ़ होकर जो व्यवस्था मेरे दास मूसा ने तुझे दी है उन सब के अनुसार करने में चौकसी करना, और उस से न तो दहिने मुड़ना और न बांए, तब जहां जहां तू जाएगा वहां वहां तेरा काम सफल होगा।
व्यवस्था की यह पुस्तक तेरे चित्त से कभी न उतरने पाए, इसी में दिन रात ध्यान दिए रहना, इसलिये कि जो कुछ उस में लिखा है उसके अनुसार करने की तू चौकसी करे; क्योंकि ऐसा ही करने से तेरे सब काम सफल होंगे, और तू प्रभावशाली होगा।
क्या मैं ने तुझे आज्ञा नहीं दी? हियाव बान्धकर दृढ़ हो जा; भय न खा, और तेरा मन कच्चा न हो, क्योंकि जहां जहां तू जाएगा वहां वहां तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे संग रहेगा।

एक साल में बाइबल:
  • यशायाह ५०-५२
  • १ थिसुलिनीकियों ५

शनिवार, 16 अक्टूबर 2010

मृत्यु पर जय

मसीही विश्वास द्वारा हमारे दिन प्रतिदिन के जीवन को जीने की शैली में परिवर्तन आता है, परन्तु इस विश्वास की अन्तिम परीक्षा होती है मृत्यु के समक्ष हमारी प्रतिक्रीया से।

जब हम अपने किसी सह-विश्वासी की मृत्यु उप्रांत, उसकी याद में आयोजित प्रार्थना सभा में भाग लेने जाते हैं, तो हम एकत्रित होते हैं एक विश्वास के योद्धा को आदर देने जिसके जीवन ने बहुत से जीवनों को आशीशित किया। इन सभाओं मे जो कहा जाता है वह अकसर परमेश्वर के प्रति धन्यवाद और परमेश्वर की प्रशंसा होता है न कि किसी व्यक्ति की बड़ाई। ये सभाएं हमारे प्रभु द्वारा मृत्यु और कब्र पर प्राप्त जय की गवाही और परमेश्वर को महिमा देने का अवसर होतीं हैं (१ कुरिन्थियों १५:५४-५७)।

लेखक आर्थर पोरिट, इंग्लैण्ड के एक कट्टर नास्तिक चार्ल्स ब्रैड्लॉफ के अन्तिम संसकार में शामिल हुए। वहां से लौटकर उन्होंने अपने अनुभव का बयान किया: "वहां, कब्र पर न कोई प्रार्थना करी गई, न किसी ने कुछ कहा। उसके मृत शरीर को एक हलके से कफन में डाल कर, उसे जल्दी से कब्र में उतार दिया गया, मानो सड़े-गले मांस को नज़रों से दूर करने की जल्दी हो। मैं वहां से बहुत आहत और स्तब्ध होकर लौटा। तब मुझे एहसास हुआ कि मृत्यु के साथ इन्सानी व्यक्तित्व के समाप्त हो जाने पर विश्वास करने और मृत्यु के बाद के जीवन का इंकार करने से मृत्यु को कैसी भयानक विजय मिलती है।"

लेकिन मसीही विश्वासीयों के लिये ऐसा नहीं है क्योंकि वे मृत्यु के पश्चात अपने प्रभु से आमने-सामने मिलने और फिर उसकी संगति में रहने, तथा अन्ततः शरीरों के पुनरुत्थान पर विश्वास करते हैं (१ कुरिन्थियों १५:४२-५५, १ थिसुलिनीकियों ४:१५-१८)। मृत्यु उनके लिये अन्त नहीं है वरन एक अनन्त स्वर्गीय आनन्द का आरंभ है।

क्या आपका विश्वास आपको मृत्यु पर जय में आनन्दित होने का कारण देता है? - वेर्नन ग्राउंडस


क्योंकि मसीह जीवित है, इसलिये उसके विश्वासी भी जीवित रहेंगे।

बाइबल पाठ: १ थिसुलिनीकियों ४:१३-१८

हे भाइयों, हम नहीं चाहते, कि तुम उनके विषय में जो सोते हैं, अज्ञान रहो, ऐसा न हो, कि तुम औरों की नाई शोक करो जिन्‍हें आशा नहीं।
क्‍योंकि यदि हम प्रतीति करते हैं, कि यीशु मरा, और जी भी उठा, तो वैसे ही परमेश्वर उन्‍हें भी जो यीशु में सो गए हैं, उसी के साथ ले आएगा।
क्‍योंकि हम प्रभु के वचन के अनुसार तुम से यह कहते हैं, कि हम जो जीवित हैं, और प्रभु के आने तक बचे रहेंगे तो सोए हुओं से कभी आगे न बढ़ेंगे।
क्‍योंकि प्रभु आप ही स्‍वर्ग से उतरेगा, उस समय ललकार, और प्रधान दूत का शब्‍द सुनाई देगा, और परमेश्वर की तुरही फूंकी जाएगी, और जो मसीह में मरे हैं, वे पहिले जी उठेंगे।
तब हम जो जीवित और बचे रहेंगे, उन के साथ बादलों पर उठा लिए जाएंगे, कि हवा में प्रभु से मिलें, और इस रीति से हम सदा प्रभु के साथ रहेंगे।
सो इन बातों से एक दूसरे को शान्‍ति दिया करो।
एक साल में बाइबल:
  • यशायाह ४७-४९
  • १ थिसुलिनीकियों ४

शुक्रवार, 15 अक्टूबर 2010

हमारे मार्ग का रक्षक

पिछले पतझड़, मैं और मेरी पत्नी अपने घर के निकट एक घुमावदार पहाड़ी रास्ते पर कार से जा रहे थे। रास्ते में, हमारे सामने भेड़ों का एक बड़ा झुंड हमारी ओर आता दिखाई दिया, एक अकेला चरवाहा उनके आगे आगे चल रहा था और उसके साथ भेड़ों की रखवाली करने वाले कुते भी थे। वह उन्हें ग्रीष्म काल की चरागाहों से निकालकर, आने वाली शीत ॠतु के लिये सुरक्षित स्थान पर ले जा रहा था। हमने कार सड़क के किनारे खड़ी कर ली और जब तक वह झुंड हमारे इर्द-गिर्द होकर निकलता हुआ आंखों से ओझल नहीं हो गया हम उसे देखते रहे। फिर मेरे मन में प्रश्न आया - "क्या भेड़ें भी बदलाव से, नई जगहों पर जाने से डरती हैं?"

जैसा अधिकतर बुज़ुर्ग लोग करते हैं, मुझे अपने ’बाड़े’ में ही रहना पसन्द है जहां मुझे जाने पहचाने लोग और स्थान दिखते रहें। परन्तु आजकल सब कुछ बदल रहा है, मुझे नए और अन्जान स्थानों पर जाना पड़ता है। मन में प्रश्न उठते हैं कि आते दिनों में कौन सी नई सीमाएं मुझे लांघनी पड़ेंगी? कौन से नए और बेनाम डरों का सामना करना पड़ेगा? ऐसे में यूहन्ना १०:४ में प्रभु यीशु द्वारा कहे गए शब्द तसल्ली देते हैं "जब वह अपनी सब भेड़ों को बाहर निकाल चुकता है, तो उन के आगे आगे चलता है"

आते वर्ष में या उसके बाद हमारे लिये जो कुछ भी रखा हो, हमारा चरवाहा जानता है कि हमें किस मार्ग से जाना है और वह हमारे आगे आगे चलता है, इसलिये हमें भविष्य के लिये चिंतित होने की आवश्यक्ता नहीं है। वह हमारी सीमाएं और क्षमताएं जानता है, इसलिये हमें कभी ऐसे मार्गों पर नहीं लेकर चलेगा जो हमारे लिये खतरनाक या कठिन हों या जिनमें उसकी सहयाता हमारे साथ न हो।

वह हमारे लिये हरियाली चारगाहों और स्वच्छ जल के मार्ग को जानता है, बस हमें उसके पीछे पीछे चलना है। - डेविड रोपर


जो भविष्य हमारे लिये अन्जान है वह हमारे सर्वज्ञाता परमेश्वर के हाथों में सुरक्षित है।

जब वह अपनी सब भेड़ों को बाहर निकाल चुकता है, तो उन के आगे आगे चलता है, और भेड़ें उसके पीछे पीछे हो लेती हैं क्‍योंकि वे उसका शब्‍द पहचानती हैं। - यूहन्ना १०:४


बाइबल पाठ: यूहन्ना १०:१-६

मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि जो कोई द्वार से भेड़शाला में प्रवेश नहीं करता, परन्‍तु और किसी ओर से चढ़ जाता है, वह चोर और डाकू है।
परन्‍तु जो द्वार से भीतर प्रवेश करता है वह भेड़ों का चरवाहा है।
उसके लिये द्वारपाल द्वार खोल देता है, और भेंड़ें उसका शब्‍द सुनती हैं, और वह अपनी भेड़ों को नाम ले लेकर बुलाता है और बाहर ले जाता है।
और जब वह अपनी सब भेड़ों को बाहर निकाल चुकता है, तो उन के आगे आगे चलता है, और भेड़ें उसके पीछे पीछे हो लेती हैं क्‍योंकि वे उसका शब्‍द पहचानती हैं।
परन्‍तु वे पराये के पीछे नहीं जाएंगी, परन्‍तु उस से भागेंगी, क्‍योंकि वे परायों का शब्‍द नहीं पहचानतीं।
यीशु ने उन से यह दृष्‍टान्‍त कहा, परन्‍तु वे न समझे कि ये क्‍या बातें हैं जो वह हम से कहता है।

एक साल में बाइबल:
  • यशायाह ४५, ४६
  • १ थिसुलिनीकियों २