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शनिवार, 11 मई 2013

शांति एवं मेल


   सन 1865 में जब अमेरीकी गृह-युद्ध समाप्त हुआ तो लाखों सैनिक मर चुके थे, राष्ट्र की अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो गई थी और राजनैतिक रूप से लोगों में बहुत मतभेद तथा गहरा विभाजन था। ऐसे शोक और कटुता के समय में दो महिलाओं ने शान्ति और मेल को बढ़ावा देने के लिए वर्ष में एक बार माताओं को स्मरण करने का दिवस मनाने की योजना को बढ़ावा दिया। सन 1870 में जूलिया वार्ड हाओ ने अन्तर्राष्ट्रीय मात्र दिवस का प्रस्ताव रखा, जिस दिन सभी महिलाएं एक जुट होकर युद्ध के हर स्वरूप का विरोध करें। इसके कुछ वर्ष पश्चात अन्ना रीव्स जार्विस ने युद्ध के कारण अलग और विमुख हुए परिवारों और पड़ौसियों को फिर से एक करने के लिए सालाना मात्र मित्रता दिवस मनाना आरंभ किया। जब भी परिवार और मित्र एक दुसरे के विमुख होकर बिखर जाते हैं तो यह बहुत कष्टदायक होता है।

   परमेश्वर भी अपनी सृष्टि को अपने से अलग नहीं देखना चाहता; वह भी चाहता है कि सब एक होकर साथ रहें। इस मेल-मिलाप और शांति के लिए ही उसने अपने पुत्र प्रभु यीशु को संसार में भेजा, जिससे लोग पापों से मुक्ति पाकर आपसी प्रेम में एक दूसरे के साथ और परमेश्वर के साथ जुड़ जाएं। इस शान्ति और मिलाप का एक बहुत महत्वपूर्ण आधार है क्षमा - जो प्रभु यीशु में होकर परमेश्वर हर एक पश्चातापी पापी को सेंत-मेंत उपलब्ध कराता है। यही क्षमा परमेश्वर अपने लोगों में भी देखना चाहता है। प्रभु यीशु से एक बार उनके शिष्य पतरस ने जानना चाहा कि वह अपने भाई को कितनी बार क्षमा करे यदि वह बार बार उसके विरुद्ध अपराध करे। प्रभु के उत्तर "सात के सत्तर गुणा तक" ने सब को चौंका दिया। फिर प्रभु यीशु ने एक अविस्मरणीय कहानी - एक दास को अपने स्वामी से बहुत बड़े अपराध की क्षमा मिली किंतु यह बड़ी क्षमा पाकर भी वह अपने एक संगी दास को एक छोटे से अपराध के लिए क्षमा ना कर सका और अपनी क्षमा के लाभ को खो बैठा; द्वारा यह बात समझाई (मत्ती 18:21-35)।

   इस कहानी के द्वारा प्रभु यीशु ने सब सुनने वालों को स्मरण दिलाया कि जैसे परमेश्वर ने उनके बड़े बड़े पाप और अपराध क्षमा किए हैं वैसे ही उन्हें भी आपस में एक दुसरे के पापों और अपराधों को क्षमा करना है। जहाँ क्षमा और सहिषुण्ता होगी वहाँ शांति और मेल भी होंगे। - डेविड मैक्कैसलैंड


क्षमाशील व्यवहार व्यावाहरिक मसीही जीवन है।

सो जैसा मैं ने तुझ पर दया की, वैसे ही क्या तुझे भी अपने संगी दास पर दया करना नहीं चाहिए था? - मत्ती 18:33

बाइबल पाठ: मत्ती 18:21-35
Matthew 18:21 तब पतरस ने पास आकर, उस से कहा, हे प्रभु, यदि मेरा भाई अपराध करता रहे, तो मैं कितनी बार उसे क्षमा करूं, क्या सात बार तक?
Matthew 18:22 यीशु ने उस से कहा, मैं तुझ से यह नहीं कहता, कि सात बार, वरन सात बार के सत्तर गुने तक।
Matthew 18:23 इसलिये स्वर्ग का राज्य उस राजा के समान है, जिसने अपने दासों से लेखा लेना चाहा।
Matthew 18:24 जब वह लेखा लेने लगा, तो एक जन उसके साम्हने लाया गया जो दस हजार तोड़े धारता था।
Matthew 18:25 जब कि चुकाने को उसके पास कुछ न था, तो उसके स्‍वामी ने कहा, कि यह और इस की पत्‍नी और लड़के बाले और जो कुछ इस का है सब बेचा जाए, और वह कर्ज चुका दिया जाए।
Matthew 18:26 इस पर उस दास ने गिरकर उसे प्रणाम किया, और कहा; हे स्‍वामी, धीरज धर, मैं सब कुछ भर दूंगा।
Matthew 18:27 तब उस दास के स्‍वामी ने तरस खाकर उसे छोड़ दिया, और उसका धार क्षमा किया।
Matthew 18:28 परन्तु जब वह दास बाहर निकला, तो उसके संगी दासों में से एक उसको मिला, जो उसके सौ दीनार धारता था; उसने उसे पकड़कर उसका गला घोंटा, और कहा; जो कुछ तू धारता है भर दे।
Matthew 18:29 इस पर उसका संगी दास गिरकर, उस से बिनती करने लगा; कि धीरज धर मैं सब भर दूंगा।
Matthew 18:30 उसने न माना, परन्तु जा कर उसे बन्‍दीगृह में डाल दिया; कि जब तक कर्ज को भर न दे, तब तक वहीं रहे।
Matthew 18:31 उसके संगी दास यह जो हुआ था देखकर बहुत उदास हुए, और जा कर अपने स्‍वामी को पूरा हाल बता दिया।
Matthew 18:32 तब उसके स्‍वामी ने उसको बुलाकर उस से कहा, हे दुष्‍ट दास, तू ने जो मुझ से बिनती की, तो मैं ने तो तेरा वह पूरा कर्ज क्षमा किया।
Matthew 18:33 सो जैसा मैं ने तुझ पर दया की, वैसे ही क्या तुझे भी अपने संगी दास पर दया करना नहीं चाहिए था?
Matthew 18:34 और उसके स्‍वामी ने क्रोध में आकर उसे दण्‍ड देने वालों के हाथ में सौंप दिया, कि जब तक वह सब कर्जा भर न दे, तब तक उन के हाथ में रहे।
Matthew 18:35 इसी प्रकार यदि तुम में से हर एक अपने भाई को मन से क्षमा न करेगा, तो मेरा पिता जो स्वर्ग में है, तुम से भी वैसा ही करेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 13-14 
  • यूहन्ना 2


शुक्रवार, 10 मई 2013

आओ और देखो


   बड़े बड़े स्टोर्स और दुकानों में ग्राहकों की सहायता के लिए कर्मचारी तैनात रहते हैं। जब कोई ग्राहक उनसे किसी वस्तु के बारे में पूछता है कि वह कहाँ रखी है तो वे केवल मौखिक निर्देश नहीं देते, वरन ग्राहक के साथ चलकर जाते हैं और दिखाते हैं कि वह वस्तु कहाँ पर रखी है। साथ चलकर जाना उस ग्राहक के प्रति आदर का चिन्ह है। दुकान अथवा स्टोर में ग्राहक को आदर देना और उसके साथ नम्रता से सहायतापूर्ण व्यवहार करना ग्राहक को वहाँ पुनः आने के लिए प्रभावित करता है तथा दुकान की लोकप्रीयता को बढ़ाता है। 

   साधारण शिष्टाचार की यही बात प्रभु यीशु के बारे में जानने में रुचि रखने वालों की सहायता करने और उन्हें मसीह यीशु के निकट लाने में भी बहुत सहायक है। स्वयं प्रभु यीशु ने इसे कर के दिखाया। यूहन्ना रचित सुसमाचार के पहले अध्याय में ही जब यूहन्ना बप्तिसमा देने वाले के दो जिज्ञासु शिष्यों ने प्रभु यीशु से पुछा कि वह कहाँ रहता है तो प्रभु ने उन्हें साथ आकर देखने का निमंत्रण दिया: "...चलो, तो देख लोगे" (यूहन्ना 1:38)। उन चेलों ने वह दिन प्रभु यीशु के साथ बिताया, फिर उनमें से एक अर्थात अन्द्रियास ने जाकर अपने भाई शमौन पतरस को यह बात बताई और उसे प्रभु यीशु के पास ले आया (पद 41-42)। अगले दिन प्रभु यीशु ने एक और व्यक्ति, फिलेप्पुस को अपने पीछे हो लेने का निमंत्रण दिया, और फिर फिलेप्पुस ने जाकर नतनएल को प्रभु यीशु के बारे में बताया। जब नतनएल को शंका हुई तो फिलेप्पुस ने उससे वही बात कही, "...चलकर देख ले" (यूहन्ना 1:46)।

   प्रभु यीशु के लिए साक्षी देना या उसके बारे में बताना, सुनने वाले व्यक्ति के साथ हमारा प्रथम और अन्तिम एकमात्र संपर्क भी हो सकता है; या यह प्रभु यीशु के बारे में किसी जिज्ञासु व्यक्ति या किसी परेशान और हताश व्यक्ति के साथ चलकर उसकी सहायता करना या उसकी जिज्ञासा को शांत करने की एक यात्रा भी हो सकती है। चाहे एकमात्र संपर्क हो या साथ चलने की यात्रा, उनके प्रति हमारी वास्तविक रुचि, उनके लिए हमारी प्रार्थनाएं उनके साथ हमारी सहृदयता, यह सब दिखाता है कि हम उनसे कह रहे हैं, "आओ और देखो; मैं आपको अपने साथ लिए चलता हूँ और प्रभु यीशु से आपकी भेंट करवाता हूँ।"

   सारे संसार के सभी लोगों के लिए प्रभु यीशु का खुला निमंत्रण है - आओ और देखो; जिससे वे स्वयं अपने व्यक्तिगत अनुभव से जान सकें कि प्रभु यीशु की वास्तविकता क्या है। प्रभु यीशु के इस खुले निमंत्रण के यथार्थ के सबसे महत्वपूर्ण प्रमाण हैं हम मसीही विश्वासी और संसार के लोगों के प्रति हमारा व्यवहार। क्या आज आपके जीवन और व्यवहार से लोग प्रभु यीशु के इस निमंत्रण को भांप कर स्वीकार करने पाते हैं? - डेविड मैक्कैसलैंड


लोगों को प्रभु यीशु के निकट लाने के लिए प्रचार की बजाय दयालुता तथा सहृदयता का व्यवहार अधिक प्रभावी होता है।

यीशु ने फिरकर और उन को पीछे आते देखकर उन से कहा, तुम किस की खोज में हो? उन्होंने उस से कहा, हे रब्बी, अर्थात (हे गुरू) तू कहां रहता है? उसने उन से कहा, चलो, तो देख लोगे। - यूहन्ना 1:38

बाइबल पाठ: यूहन्ना 1:35-46
John 1:35 दूसरे दिन फिर यूहन्ना और उसके चेलों में से दो जन खड़े हुए थे।
John 1:36 और उसने यीशु पर जो जा रहा था दृष्टि कर के कहा, देखो, यह परमेश्वर का मेम्ना है।
John 1:37 तब वे दोनों चेले उस की यह सुनकर यीशु के पीछे हो लिए।
John 1:38 यीशु ने फिरकर और उन को पीछे आते देखकर उन से कहा, तुम किस की खोज में हो? उन्होंने उस से कहा, हे रब्बी, अर्थात (हे गुरू) तू कहां रहता है? उसने उन से कहा, चलो, तो देख लोगे।
John 1:39 तब उन्होंने आकर उसके रहने का स्थान देखा, और उस दिन उसी के साथ रहे; और यह दसवें घंटे के लगभग था।
John 1:40 उन दोनों में से जो यूहन्ना की बात सुनकर यीशु के पीछे हो लिये थे, एक तो शमौन पतरस का भाई अन्द्रियास था।
John 1:41 उसने पहिले अपने सगे भाई शमौन से मिलकर उस से कहा, कि हम को ख्रिस्तुस अर्थात मसीह मिल गया।
John 1:42 वह उसे यीशु के पास लाया: यीशु ने उस पर दृष्टि कर के कहा, कि तू यूहन्ना का पुत्र शमौन है, तू केफा, अर्थात पतरस कहलाएगा।
John 1:43 दूसरे दिन यीशु ने गलील को जाना चाहा; और फिलेप्पुस से मिलकर कहा, मेरे पीछे हो ले।
John 1:44 फिलेप्पुस तो अन्द्रियास और पतरस के नगर बैतसैदा का निवासी था।
John 1:45 फिलेप्पुस ने नतनएल से मिलकर उस से कहा, कि जिस का वर्णन मूसा ने व्यवस्था में और भविष्यद्वक्ताओं ने किया है, वह हम को मिल गया; वह यूसुफ का पुत्र, यीशु नासरी है।
John 1:46 नतनएल ने उस से कहा, क्या कोई अच्छी वस्तु भी नासरत से निकल सकती है? फिलेप्पुस ने उस से कहा, चलकर देख ले।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 10-12 
  • यूहन्ना 1:29-51


गुरुवार, 9 मई 2013

प्रेम


   मेरी माँ के इस पृथ्वी पर के अन्तिम दिनों में भी मेरे माता और पिता में प्रगाढ़ प्रेम और मसीह यीशु में अटूट विश्वास था। उन अन्तिम दिनों में माँ को देखभाल के लिए भरती करना पड़ा था और वहाँ उनसे मिलने का समय सीमित ही होता था। उनकी स्मरणशक्ति भी बहुत कमज़ोर हो गई थी और वे परिवार को भी भूलती जा रही थीं। लेकिन पिताजी नियमित रूप से उन से मिलने जाते थे और उनके साथ समय बिताते थे और किसी ना किसी रीति से उनके प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करते थे।

   उदाहरण स्वरूप, वे उनकी मनपसन्द टॉफी ले जाते, और क्योंकि माँ स्वयं उसे खोलकर खाने में असमर्थ थीं, पिताजी टॉफी खोलकर बड़े प्रेम से उनके मुँह में डाल देते, और फिर उनका हाथ प्रेम से थाम कर पास ही बैठ जाते और उन्हें वह टॉफी चूसते हुए देखते रहते। जब मिलने का समय समाप्त होता तो वे एक बड़ी मुस्कान चेहरे पर लिए हुए उठते और कहते, "ऐसे साथ समय बिताने से मुझे बहुत शांति और आनन्द मिलता है।" माँ की सहायता करने और साथ देने से पिताजी को मिलने वाले आनन्द ने मुझे बहुत प्रभावित किया, लेकिन जिस बात ने इससे भी अधिक मुझे प्रभावित किया वह थी कि पिताजी अपने मसीही विश्वास को जी कर दिखा रहे थे, परमेश्वर के अनुग्रह को उदाहरण द्वारा प्रस्तुत कर रहे थे।

   यह वैसे ही था जैसे मनुष्य की पापी, कमज़ोर और असहाय दशा में प्रभु यीशु स्वर्ग का वैभव और आदर छोड़कर दीन हो गया और हमारे पृथ्वी के स्तर पर उतर आया कि हमारे साथ संबंध बना सके और हमारी सहायता कर सके। प्रभु यीशु के मनुष्य स्वरूप में अवतरित होने के संबंध में यूहन्ना लिखता है: "और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण हो कर हमारे बीच में डेरा किया..." (यूहन्ना 1:14)। उस मानव स्वरूप की सीमाओं में होते हुए भी प्रभु यीशु ने हमारी कमज़ोरियों और ऐबों के प्रति अनुग्रह किया और हमारे लिए अपनी करुणा और दया के अनगिनित कार्य किए। आज भी उसकी यह करुणा और दया बनी हुई है और वह प्रत्येक उस व्यक्ति को अपने साथ ले लेने को तैयार है जो सच्चे मन से पापों के पश्चाताप के साथ उसके पास आना चाहता है।

   क्या आप किसी ऐसे जन को जानते हैं जो प्रभु यीशु की इस करुणा और दया से लाभान्वित हो सकता है; कोई ऐसा व्यक्ति जिसे प्रभु यीशु के उद्धारक प्रेम और अनुग्रह को आपके जीवन में से प्रवाहित होते हुए देखने और अनुभव करने की आवश्यकता है? अपने प्रति प्रभु के प्रेम को दुसरों के प्रति अपने जीवन से अवश्य ही प्रदर्शित करें। - डेनिस फिशर


दूसरों के लिए आशीष का माध्यम बनने के लिए परमेश्वर के प्रेम को प्रवाहित करने का माध्यम बनें।

और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण हो कर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उस की ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा। - यूहन्ना 1:14

बाइबल पाठ: यूहन्ना 1:9-14
John 1:9 सच्ची ज्योति जो हर एक मनुष्य को प्रकाशित करती है, जगत में आनेवाली थी।
John 1:10 वह जगत में था, और जगत उसके द्वारा उत्पन्न हुआ, और जगत ने उसे नहीं पहिचाना।
John 1:11 वह अपने घर आया और उसके अपनों ने उसे ग्रहण नहीं किया।
John 1:12 परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं।
John 1:13 वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं।
John 1:14 और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण हो कर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उस की ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 7-9 
  • यूहन्ना 1:1-28


बुधवार, 8 मई 2013

लौट आ


   अमेलिया अपने डॉक्टर के प्रतीक्षालय में बैठी अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रही थी। वहाँ बज रहे संगीत में उसे एक परिचित और मार्मिक गीत "Softly and Tenderly Jesus is Calling" (नम्रता और कोमलता से यीशु बुला रहा है) सुनाई दिया। उस गीत के बोल स्मरण करके उसके चेहरे पर एक हलकी सी मुस्कान आ गई। शायद एक गीत जिसके बोल में आता है "परछाईयाँ लंबी हो चली हैं, आगे मृत्युशैया भी है" एक डॉक्टर के प्रतीक्षालय में सुनाने के लिए सर्वथा उपयुक्त गीत नहीं होगा, लेकिन यह गीत संसार में भटके हुए पापी मनुष्य को वापस प्रेमी पिता परमेश्वर के पास लौटा लाने के लिए लिखा गया है।

   कुछ लोगों को यह पुराना और प्रचलित गीत बहुत भावनात्मक भी लग सकता है; इस गीत के कोरस का सन्देश भटके हुए पापी को लौटने के लिए प्रोत्साहित करता है: "घर लौट आ, घर लौट आ; तू जो थका और परेशान है घर लौट आ; विन्ती और कोमलता से यीशु तुझे बुलाता है; कहता है ’हे पापी आ घर लौट आ!’ "

   जब कभी एक मसीही विश्वासी अपने जीवन में परमेश्वर कि इच्छा के स्थान पर अपनी इच्छा रख देता है तो वह अपने आप को पतित, परमेश्वर की संगति से दूर और दयनीय दशा में पाता है। हालांकि अनेक बार हम मसीही विश्वासी भी अपने स्वार्थी स्वभाव के आगे झुक जाते हैं, अनुचित कर जाते हैं और फिर अपने आप को परेशानियों से घिरा पाते हैं, लेकिन परमेश्वर का प्रेम हमारे प्रति कभी कम नहीं होता; वह सदा ही हमें अपने साथ बने हुए देखना चाहता है और हमें वापस अपने पास लौटा लाने को तत्पर तथा तैयार रहता है। ऐसा उसके प्रेमी और क्षमाशील स्वभाव तथा उसकी दया और करुणा के कारण ही है जो सदा उसके बच्चों पर बनी रहती है। उसे आनन्द होता है जब हम अपने विद्रोह और पाप से पश्चाताप करके वापस उसके पास लौट आते हैं (भजन 51:1-2; लूका 15)।

   क्या आज आप अपने आप को अपने उद्धारकर्ता से दूर अनुभव कर रहे हैं? प्रेमी यीशु आप को आज भी उसी प्रेम से बुला रहा, और आप की प्रतीक्षा में है कि आप लौट कर घर की सुरक्षा और आशीषों में आ जाएं। हे पापी आ घर लौट आ! - सिंडी हैस कैस्पर


परमेश्वर की सन्तान का परमेश्वर के घर में सदा स्वागत ही होता है।

अपने किए हुए उद्धार का हर्ष मुझे फिर से दे, और उदार आत्मा देकर मुझे सम्भाल। - भजन 51:12

बाइबल पाठ: भजन 51:1-13
Psalms 51:1 हे परमेश्वर, अपनी करूणा के अनुसार मुझ पर अनुग्रह कर; अपनी बड़ी दया के अनुसार मेरे अपराधों को मिटा दे।
Psalms 51:2 मुझे भली भांति धोकर मेरा अधर्म दूर कर, और मेरा पाप छुड़ाकर मुझे शुद्ध कर!
Psalms 51:3 मैं तो अपने अपराधों को जानता हूं, और मेरा पाप निरन्तर मेरी दृष्टि में रहता है।
Psalms 51:4 मैं ने केवल तेरे ही विरुद्ध पाप किया, और जो तेरी दृष्टि में बुरा है, वही किया है, ताकि तू बोलने में धर्मी और न्याय करने में निष्कलंक ठहरे।
Psalms 51:5 देख, मैं अधर्म के साथ उत्पन्न हुआ, और पाप के साथ अपनी माता के गर्भ में पड़ा।
Psalms 51:6 देख, तू हृदय की सच्चाई से प्रसन्न होता है; और मेरे मन ही में ज्ञान सिखाएगा।
Psalms 51:7 जूफा से मुझे शुद्ध कर, तो मैं पवित्र हो जाऊंगा; मुझे धो, और मैं हिम से भी अधिक श्वेत बनूंगा।
Psalms 51:8 मुझे हर्ष और आनन्द की बातें सुना, जिस से जो हडि्डयां तू ने तोड़ डाली हैं वह मगन हो जाएं।
Psalms 51:9 अपना मुख मेरे पापों की ओर से फेर ले, और मेरे सारे अधर्म के कामों को मिटा डाल।
Psalms 51:10 हे परमेश्वर, मेरे अन्दर शुद्ध मन उत्पन्न कर, और मेरे भीतर स्थिर आत्मा नये सिरे से उत्पन्न कर।
Psalms 51:11 मुझे अपने साम्हने से निकाल न दे, और अपने पवित्र आत्मा को मुझ से अलग न कर।
Psalms 51:12 अपने किए हुए उद्धार का हर्ष मुझे फिर से दे, और उदार आत्मा देकर मुझे सम्भाल।
Psalms 51:13 तब मैं अपराधियों को तेरा मार्ग सिखाऊंगा, और पापी तेरी ओर फिरेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 4-6 
  • लूका 24:36-53


मंगलवार, 7 मई 2013

शक का लाभ


   थॉमस इन्मैन ने सन 1860 में अपने संगी डॉक्टरों को यह प्रस्ताव दिया कि यदि किसी रोग के इलाज के लिए किसी दवा की उपयोगिता पर उन्हें शक है तो वे रोगी को वह दवा ना दें; उन्हें अपने इस शक का लाभ रोगी को देना चाहिए और व्यर्थ दवाएं देने से बचना चाहिए। यही वाक्यांश, "शक का लाभ" वैधानिक एवं न्याय सम्बंधित बातों से जुड़ा वाक्यांश भी है; यदि पंचों अथवा न्याय मण्डलियों को प्रस्तुत सबूतों की वैधता या सत्यता पर शक है तो उन्हें शक का लाभ देते हुए दोषी ना होने का निर्णय देना चाहिए।

   हम मसीही विश्वासियों के लिए इस वाक्यांश से शिक्षा लेकर इसे अपने व्यवहार और सम्बंधों में लागू करना अच्छा है, लेकिन परमेश्वर का वचन बाइबल इससे भी आगे बढ़कर इसे अपने ही नहीं वरन दूसरों को लाभ पहुँचाने के लिए प्रयोग करने को कहती है। 1 कुरिन्थियों 13:7 में प्रेम के विषय में लिखा है: "वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है।" बाइबल की एक व्याखया "टिंडेल न्यू टेस्टामेंट कमेंट्रीज़" में, इस पद में आए वाक्यांश "सब बातों की प्रतीति करता है" के संबंध में लियोन मौरिस लिखते हैं: "इसका अर्थ है कि सब बातों में दूसरों में उत्तम को ही देखना...लेकिन इसका यह तात्पर्य नहीं है कि प्रेम भोला होता है और कुटिलता को नहीं पहचानता; वरन यह कि संसार के समान वह दूसरों में सदैव ही बुराई ही नहीं देखता रहता। प्रेम दूसरों में विश्वास को बनाए रखता है; उनसे धोखा नहीं खाता, लेकिन साथ ही हर बात के लिए सदैव दूसरों को बुरा समझ कर उनको शक की दृष्टि से नहीं देखता, वरन दूसरों को शक का लाभ देने को तैयार रहता है।"

   जब कभी हम किसी के बारे में कुछ नकारात्मक सुनें, या उनके किसी कार्य या मंशा के बारे में हमें संषय हो, तो इससे पहले कि हम उन्हें गलत या बुरा करार दें, भला होगा कि कुछ पल रुक कर पूरी बात या परिस्थित का पुनः आंकलन कर लें। यदि कहीं भी शक की कोई गुंजाइश है तो मसीही प्रेम का उदाहरण प्रस्तुत करें और किसी को बुरा जताने या बदनाम करने की बजाए इस शक का लाभ उन्हें दें। - एनी सेटास


प्रेम शक का लाभ दूसरों को देता है।

वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है। - 1 कुरिन्थियों 13:7

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 13
1 Corinthians 13:1 यदि मैं मनुष्यों, और सवर्गदूतों की बोलियां बोलूं, और प्रेम न रखूं, तो मैं ठनठनाता हुआ पीतल, और झंझनाती हुई झांझ हूं।
1 Corinthians 13:2 और यदि मैं भविष्यद्वाणी कर सकूं, और सब भेदों और सब प्रकार के ज्ञान को समझूं, और मुझे यहां तक पूरा विश्वास हो, कि मैं पहाड़ों को हटा दूं, परन्तु प्रेम न रखूं, तो मैं कुछ भी नहीं।
1 Corinthians 13:3 और यदि मैं अपनी सम्पूर्ण संपत्ति कंगालों को खिला दूं, या अपनी देह जलाने के लिये दे दूं, और प्रेम न रखूं, तो मुझे कुछ भी लाभ नहीं।
1 Corinthians 13:4 प्रेम धीरजवन्‍त है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं।
1 Corinthians 13:5 वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता।
1 Corinthians 13:6 कुकर्म से आनन्‍दित नहीं होता, परन्तु सत्य से आनन्‍दित होता है।
1 Corinthians 13:7 वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है।
1 Corinthians 13:8 प्रेम कभी टलता नहीं; भविष्यद्वाणियां हों, तो समाप्‍त हो जाएंगी, भाषाएं हो तो जाती रहेंगी; ज्ञान हो, तो मिट जाएगा।
1 Corinthians 13:9 क्योंकि हमारा ज्ञान अधूरा है, और हमारी भविष्यद्वाणी अधूरी।
1 Corinthians 13:10 परन्तु जब सवर्सिद्ध आएगा, तो अधूरा मिट जाएगा।
1 Corinthians 13:11 जब मैं बालक था, तो मैं बालकों की नाईं बोलता था, बालकों का सा मन था बालकों की सी समझ थी; परन्तु सियाना हो गया, तो बालकों की बातें छोड़ दीं।
1 Corinthians 13:12 अब हमें दर्पण में धुंधला सा दिखाई देता है; परन्तु उस समय आमने साम्हने देखेंगे, इस समय मेरा ज्ञान अधूरा है; परन्तु उस समय ऐसी पूरी रीति से पहिचानूंगा, जैसा मैं पहिचाना गया हूं।
1 Corinthians 13:13 पर अब विश्वास, आशा, प्रेम थे तीनों स्थाई हैं, पर इन में सब से बड़ा प्रेम है।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 1-3 
  • लूका 24:1-35


सोमवार, 6 मई 2013

चींटी


   हर वर्ष बसन्त ऋतु के आगमन के साथ मैं एक और आगमन भी देखती हूँ - चींटींयों का। ये छोटे से जीव रसोई के फर्श पर भोजन के कण ढूँढने आते हैं। इन्हें भोजन के प्रकार से कोई मतलब नहीं, जो भी खाने योग्य मिलता है - आलू चिप्स का कण या चावल का दाना या पनीर का कण या अन्य कुछ भी, उसे उठा लेते हैं। बड़ी मेहनत से और पंक्तिबद्ध होकर ये अपने काम को करती हैं और इसके लिए एक लंबी दूरी तय करने से नहीं कतरातीं, सारा दिन जब तक सूर्य का प्रकाश इन्हें उपलब्ध है ये इस कार्य में जुटी रहती हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में राजा सुलेमान ने अपने नीतिवचन में इन चींटींयों को उदाहरण बनाकर उनसे शिक्षा लेने को कहा है (नीतिवचन 6:6-11)। सुलेमान ने चींटींयों की प्रशंसा उनके कर्मठ होने के लिए करी। चींटींयों का कोई अधिकारी या निर्देशक नहीं होता, वे स्वतः ही अपने कार्य को करने में लगी रहती हैं। चाहे उन्हें तत्काल उस भोजन की आवश्यकता ना भी हो, फिर भी जितना भी समय उन्हें मिला है उस सारे समय में वे उसे जुटाने में पूरी लगन के साथ लगी रहती हैं। जब तक पुनः शरद ऋतु आती है, इन छोटे से जीवों ने, दाना-दाना और टुकड़ा-टुकड़ा करके अपने भंडार भर लिए होते हैं और अपने स्थान में सुरक्षित रहकर वे शरद ऋतु को बिताने के लिए तैयार रहती हैं। इसी कारण बाइबल इन जीवों से शिक्षा लेने को कहती है।

   जब परमेश्वर हमें भरपूरी के समय देता है तो हम उन समयों के लिए तैयारी कर सकते हैं जब कोई कमी-घटी अथवा कठिनाई आ जाए। हमारी हर आवश्यकता की पूर्ति करने वाला परमेश्वर ही है, और वह ही हमें कार्य करने की शक्ति और क्षमता भी देता है, साथ ही सद्बुद्धि और शिक्षा भी कि उसके द्वारा दी गई इन योग्यताओं का सदुपयोग हम कैसे करें। जो कुछ उसने हमें दिया है, उस सब का उपयोग हमें योग्य भण्डारियों के समान करना है और फिर उसकी हर स्थिति में हमारी देखभाल और पूर्ति करने की प्रतिज्ञा पर विश्वास कर के उसमें आश्वस्त रहना है। मेहनत करने के अपने कर्तव्य का पालन करे बिना केवल इस बात को लेकर बैठ जाना कि परमेश्वर ही हर आवश्यकता को उपलब्ध करायगा, उसकी शिक्षाओं का गलत अर्थ निकालना है। इसीलिए प्रेरित पौलुस ने अपनी एक पत्री में लिखा: "और जब हम तुम्हारे यहां थे, तब भी यह आज्ञा तुम्हें देते थे, कि यदि कोई काम करना न चाहे, तो खाने भी न पाए। हम सुनते हैं, कि कितने लोग तुम्हारे बीच में अनुचित चाल चलते हैं; और कुछ काम नहीं करते, पर औरों के काम में हाथ डाला करते हैं। ऐसों को हम प्रभु यीशु मसीह में आज्ञा देते और समझाते हैं, कि चुपचाप काम कर के अपनी ही रोटी खाया करें" (2 थिस्सुलुनीकियों 3:10-12)।

   राजा सुलेमान में होकर परमेश्वर द्वारा दी गई शिक्षा को स्मरण रखें: "हे आलसी, च्यूंटियों के पास जा; उनके काम पर ध्यान दे, और बुद्धिमान हो" (नीतिवचन 6:6)। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


आज के लिए परमेश्वर पर भरोसा रखें और कल के लिए तैयारी करें।

क्योंकि तुम आप जानते हो, कि किस रीति से हमारी सी चाल चलनी चाहिए; क्योंकि हम तुम्हारे बीच में अनुचित चाल न चले। और किसी की रोटी सेंत में न खाई; पर परिश्रम और कष्‍ट से रात दिन काम धन्‍धा करते थे, कि तुम में से किसी पर भार न हो। - 2 थिस्सुलुनीकियों 3:7-8

बाइबल पाठ: नीतिवचन 6:6-11
Proverbs 6:6 हे आलसी, च्यूंटियों के पास जा; उनके काम पर ध्यान दे, और बुद्धिमान हो।
Proverbs 6:7 उन के न तो कोई न्यायी होता है, न प्रधान, और न प्रभुता करने वाला,
Proverbs 6:8 तौभी वे अपना आहार धूपकाल में संचय करती हैं, और कटनी के समय अपनी भोजन वस्तु बटोरती हैं।
Proverbs 6:9 हे आलसी, तू कब तक सोता रहेगा? तेरी नींद कब टूटेगी?
Proverbs 6:10 कुछ और सो लेना, थोड़ी सी नींद, एक और झपकी, थोड़ा और छाती पर हाथ रखे लेटे रहना,
Proverbs 6:11 तब तेरा कंगालपन बटमार की नाईं और तेरी घटी हथियारबन्द के समान आ पड़ेगी।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 राजा 21-22 
  • लूका 23:26-56


रविवार, 5 मई 2013

प्रार्थना के लिए समय?


   बात मेरे बचपन की है, मैं रसोई में बैठा था और अपनी माँ को नाश्ता बनाते हुए देख रहा था। उन्होंने तवे पर तलने के लिए कुछ डाला, और घी के छिटकने से एक दम आग लग गई, और ऊँची लपटें उठीं। मेरी माँ बाहर भागी कि आग बुझाने के लिए उस पर डालने को कुछ ला सके, और मैं एकदम ज़ोर से चिल्लाया, "सहायता करो!" और फिर स्वाभाविक रूप से साथ ही कह बैठा, "काश प्रार्थना के लिए समय भी होता!" हमारे घर में "प्रार्थना के लिए समय" एक बहु-प्रचलित वाक्यांश था, और मैं समझता था कि प्रार्थना बस कुछ निर्धारित समयों पर ही करी जा सकती है।

   लेकिन हर समय प्रार्थना के लिए समय है, विशेषकर मसीही विश्वासियों के लिए; क्योंकि अपने परमेश्वर पिता के पास अपने निवेदन लेकर जाने से उन्हें कोई नहीं रोक सकता, और किसी संकट के समय तो बिलकुल भी नहीं। प्रभु यीशु में मिली पापों से क्षमा और उद्धार के साथ ही हर मसीही विश्वासी को परमेश्वर को "हे अब्बा; हे पिता" कह कर संबोधित करने का अधिकार भी मिला है (रोमियों 8:15)। भय, चिंता, परेशानी, आवश्यकता आदि प्रार्थना के बहुत आम कारण हैं। जब हम उदास, त्यागे हुए और सभी मानवीय सहायता स्त्रोतों से वंचित होते हैं, तो स्वाभाविक रूप से प्रार्थना में ही उपाय ढूँढ़ते हैं। लेकिन परमेश्वर चाहता है कि केवल संकट में ही नहीं वरन हर परिस्थिति में हम हर बात उसके साथ बांटें, उसे बताएं और उससे मार्गदर्शन लें जिससे गलती करने से सदा बचे रहें।

   इस्त्राएल के राजा दाऊद ने भी अपने एक भजन में यह पुकार लगाई: "हे परमेश्वर मुझे छुड़ाने के लिये, हे यहोवा मेरी सहायता करने के लिये फुर्ती कर!" (भजन 70:1)। पाँचवीं शताब्दी के एक मसीही विश्वासी और लेखक जौन कैसियन ने इस पद की व्याख्या में लिखा, "यह एक ऐसे भयभीत व्यक्ति की पुकार है जो शत्रु के फन्दे में हो, जो दिन और रात शत्रुओं के घेरे में हो और जानता हो कि ईश्वरीय सहायता के बगैर वह छूट नहीं सकता।"

   लेकिन हमें परमेश्वर कि सहायता माँगने के लिए किसी संकट में पड़ने की आवश्यकता नहीं है। हमारे लिए परमेश्वर की सहायता सदा उपलब्ध है, हर कार्य के लिए, हर बात के लिए; वह सदैव हमारा मार्गदर्शन और हमारी सहायता करने को तैयार और तत्पर रहता है। हमें बस विश्वास के साथ अपने परमेश्वर पिता से कहना भर है, "हे परमेश्वर सहायता कीजिए!"; चाहे बोल के, चाहे मन में ही कह कर, वह सब एक समान सुनता है।

   एक मसीही विश्वासी के लिए हर समय प्रार्थना का समय है। - डेविड रोपर


ऐसा कोई स्थान या समय नहीं है जिसमें हम प्रार्थना ना कर सकें।

क्योंकि तुम को दासत्व की आत्मा नहीं मिली, कि फिर भयभीत हो परन्तु लेपालकपन की आत्मा मिली है, जिस से हम हे अब्बा, हे पिता कह कर पुकारते हैं। - रोमियों 8:15

बाइबल पाठ: भजन 70
Psalms 70:1 हे परमेश्वर मुझे छुड़ाने के लिये, हे यहोवा मेरी सहायता करने के लिये फुर्ती कर!
Psalms 70:2 जो मेरे प्राण के खोजी हैं, उनकी आशा टूटे, और मुंह काला हो जाए! जो मेरी हानि से प्रसन्न होते हैं, वे पीछे हटाए और निरादर किए जाएं।
Psalms 70:3 जो कहते हैं, आहा, आहा, वे अपनी लज्जा के मारे उलटे फेरे जाएं।
Psalms 70:4 जितने तुझे ढूंढ़ते हैं, वे सब तेरे कारण हर्षित और आनन्दित हों! और जो तेरा उद्धार चाहते हैं, वे निरन्तर कहते रहें, कि परमेश्वर की बड़ाई हो।
Psalms 70:5 मैं तो दीन और दरिद्र हूं; हे परमेश्वर मेरे लिये फुर्ती कर! तू मेरा सहायक और छुड़ाने वाला है; हे यहोवा विलम्ब न कर!

एक साल में बाइबल: 
  • 1 राजा 19-20 
  • लूका 23:1-25