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सोमवार, 12 अगस्त 2013

उद्देश्य और उपयोग

   कैन्सस में एक 60 वर्ष पुराने होटल को रिहायशी मकानों में परिवर्तित किया जा रहा है। फिलेडैल्फिया में एक पुराने ज़ंग लगे पानी के जहाज़ का नवीनिकरण चल रहा है और उसे एक होटल या संग्रहालय के रूप में प्रयोग करने की योजना है। कॉलेरैडो में स्थित पुराने स्टेपलटन एयरपोर्ट के हैंगर 61 को, जो अपनी वास्तुकला के लिए जाना जाता था, एक चर्च में परिवर्तित किया जा रहा है। इन सब ढाँचों का कभी एक विशेष उद्देश्य और प्रयोग था जो अब समय के साथ समाप्त हो गया है, लेकिन फिर भी किसी ना किसी की नज़र में ये उपयोगी हैं, एक नए उद्देश्य और उपयोग के योग्य हैं, और वे इन ढाँचों को एक नया रूप देकर उस नए उद्देश्य और उपयोग के लिए तैयार कर रहे हैं।

   यदि पुराने ढाँचे एक नया उद्देश्य और उपयोग पा सकते हैं तो मनुष्य क्यों नहीं? परमेश्वर के वचन बाइबल के कुछ नायकों के बारे में विचार कीजिए, जिनके जीवन अनायास ही एक अनेपक्षित दिशा में मुड़ गए और वे साधारण सांसारिक मनुष्यों से परिवर्तित हो कर अनन्त काल के लिए परमेश्वर के वचन में आदर पाने वाले नायक बन गए। याकूब - स्वभाव से स्वार्थी, अड़ंगीमार और धोखेबाज़ था; परमेश्वर के दूत के साथ एक रात जूझने के बाद उसका जीवन और नाम बदल गया (उत्पत्ति 32), वह याकूब से इस्त्राएल हो गया, उसके वंशज आज भी उसके नाम से जाने जाते हैं तथा परमेश्वर ने उसके बारह पुत्रों को इस्त्राएल के बारह गोत्रों का स्त्रोत बना दिया। मूसा - एक अहंकारी राजकुमार था जो अपनी जान बचा कर भागा और जंगल में रहकर भेड़ें चराने लगा, एक जलती हुई झाड़ी में दर्शन देकर (निर्गमन 3) परमेश्वर ने उसे इस्त्राएल को मिस्त्र के दासत्व से निकालकर लाने वाला, परमेश्वर के नियमों और व्यवस्था को इस्त्राएलियों तक पहुँचाने वाला और परमेश्वर के वचन की पहली पाँच पुस्तकों का लिखने वाला बना दिया। शाउल - एक धार्मिक उन्माद से भरा मसीही विश्वासियों का घोर विरोधी होता था, जिसे प्रभु यीशु ने एक चकाचौंध कर देने वाली रौशनी में दर्शन देकर कुछ दिनों के लिए अन्धा तो कर दिया (प्रेरितों 9), लेकिन फिर जब उसकी आँखें खोली गईं तो वह पौलुस नाम से प्रभु यीशु मसीह का एक ऐसा अनुयायी बना जो आज तक सभी मसीही विश्वासियों के लिए एक नमूना है और बाइबल के नए नियम खंड का लगभग दो-तिहाई भाग परमेश्वर ने उसी शाउल से पौलुस बन गए व्यक्ति के द्वारा लिखवाया। ऐसे ही अनेक अन्य उदाहरण ना केवल बाइबल में वरन संसार भर में मसीही समाज में मिल जाएंगे - साधारण और सांसारिक लोग जिन्होंने परमेश्वर को अनुभव किया और उनके जीवन सदा के लिए एक नए उद्देश्य और उपयोग के लिए एक नयी दिशा में चल निकले।

   यही अनुभव हमारे साथ भी हो सकता है; कोई अनेपक्षित घटना हमारे जीवन की दिशा बदल सकती है। यह घटना हमारे लिए तो अनायास और अनेपक्षित हो सकता है, लेकिन परमेश्वर के लिए नहीं। हम जैसे भी हैं, परमेश्वर के लिए उपयोगी हैं; वह हम में कुछ ऐसा देखता है जो संसार तो क्या हम स्वयं भी अपने अन्दर नहीं देख पाते। परमेश्वर ने अपने वचन में कहा है कि इससे पहले हम उससे प्रेम करते उसने हम से प्रेम किया। वह हमें एक उद्देश्य, आशा और भविष्य देना चाहता है जो ऐसा आशीशित, अनुपम और विलक्षण है जैसा संसार की कोई सामर्थ, हमारी अपनी कोई योजना हमें दे नहीं सकती। परमेश्वर चाहता है कि हम अपनी सारी चिन्ताएं, अपना सारा जीवन उसे सौंप दें क्योंकि उसे हमारा खयाल सदा ही रहता है (1 यहून्ना 4:19; यर्मियाह 29:11; 1 पतरस 5:7; यूहन्ना 10:10)।

   परमेश्वर के वायदों पर भरोसा कीजिए, उन्हें थामें रखिए, उसे जीवन समर्पित करके उससे प्रार्थना कीजिए कि वह आपको भी आपके जीवन के लिए एक नया उद्देश्य दे और और अपने लिए उपयोगी बनाए; वह यह करना चाहता भी है, उसे केवल आपकी सहमति की प्रतीक्षा है। - सिंडी हैस कैसपर


अपनी आँखें परमेश्वर पर लगाए रखिए और आप अपने जीवन के उद्देश्य से कभी नहीं भटकेंगे।

क्योंकि यहोवा की यह वाणी है, कि जो कल्पनाएं मैं तुम्हारे विषय करता हूँ उन्हें मैं जानता हूँ, वे हानी की नहीं, वरन कुशल ही की हैं, और अन्त में तुम्हारी आशा पूरी करूंगा। - यर्मियाह 29:11

बाइबल पाठ: प्रेरितों 9:1-16
Acts 9:1 और शाऊल जो अब तक प्रभु के चेलों को धमकाने और घात करने की धुन में था, महायाजक के पास गया।
Acts 9:2 और उस से दमिश्क की अराधनालयों के नाम पर इस अभिप्राय की चिट्ठियां मांगी, कि क्या पुरूष, क्या स्त्री, जिन्हें वह इस पंथ पर पाए उन्हें बान्‍ध कर यरूशलेम में ले आए।
Acts 9:3 परन्तु चलते चलते जब वह दमिश्क के निकट पहुंचा, तो एकाएक आकाश से उसके चारों ओर ज्योति चमकी।
Acts 9:4 और वह भूमि पर गिर पड़ा, और यह शब्द सुना, कि हे शाऊल, हे शाऊल, तू मुझे क्यों सताता है?
Acts 9:5 उसने पूछा; हे प्रभु, तू कौन है? उसने कहा; मैं यीशु हूं; जिसे तू सताता है।
Acts 9:6 परन्तु अब उठ कर नगर में जा, और जो कुछ करना है, वह तुझ से कहा जाएगा।
Acts 9:7 जो मनुष्य उसके साथ थे, वे चुपचाप रह गए; क्योंकि शब्द तो सुनते थे, परन्तु किसी को दखते न थे।
Acts 9:8 तब शाऊल भूमि पर से उठा, परन्तु जब आंखे खोलीं तो उसे कुछ दिखाई न दिया और वे उसका हाथ पकड़ के दमिश्क में ले गए।
Acts 9:9 और वह तीन दिन तक न देख सका, और न खाया और न पीया।
Acts 9:10 ​दमिश्क में हनन्याह नाम एक चेला था, उस से प्रभु ने दर्शन में कहा, हे हनन्याह! उसने कहा; हां प्रभु।
Acts 9:11 तब प्रभु ने उस से कहा, उठ कर उस गली में जा जो सीधी कहलाती है, और यहूदा के घर में शाऊल नाम एक तारसी को पूछ ले; क्योंकि देख, वह प्रार्थना कर रहा है।
Acts 9:12 और उसने हनन्याह नाम एक पुरूष को भीतर आते, और अपने ऊपर आते देखा है; ताकि फिर से दृष्टि पाए।
Acts 9:13 हनन्याह ने उत्तर दिया, कि हे प्रभु, मैं ने इस मनुष्य के विषय में बहुतों से सुना है, कि इस ने यरूशलेम में तेरे पवित्र लोगों के साथ बड़ी बड़ी बुराईयां की हैं।
Acts 9:14 और यहां भी इस को महायाजकों की ओर से अधिकार मिला है, कि जो लोग तेरा नाम लेते हैं, उन सब को बान्‍ध ले।
Acts 9:15 परन्तु प्रभु ने उस से कहा, कि तू चला जा; क्योंकि यह, तो अन्यजातियों और राजाओं, और इस्त्राएलियों के साम्हने मेरा नाम प्रगट करने के लिये मेरा चुना हुआ पात्र है।
Acts 9:16 और मैं उसे बताऊंगा, कि मेरे नाम के लिये उसे कैसा कैसा दुख उठाना पड़ेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 84-86 
  • रोमियों 12



रविवार, 11 अगस्त 2013

वचन की सहायता

   प्रभु यीशु की पृथ्वी की सेवकाई का आरंभ तो बहुत अच्छा था। परमेश्वर के वचन बाइबल में मत्ती 3 अध्याय में हम पाते हैं कि उसके बपतिस्मे के समय परमेश्वर पिता ने स्वर्ग से आकाशवाणी के द्वारा कहा: "और देखो, यह आकाशवाणी हुई, कि यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिस से मैं अत्यन्‍त प्रसन्न हूं" (मत्ती 3:17)। लेकिन इसके तुरंत बाद परिस्थिति विकट हो गई - प्रभु यीशु को परीक्षा के लिए जाना पड़ा!

   प्रभु यीशु की यह परीक्षा अनायास अथवा अनपेक्षित नहीं थी - पवित्र आत्मा प्रभु यीशु को बियाबान में ले गया जहाँ स्वर्ग और नरक की ताकतों का सामना हो सके। चालीस दिन तक प्रभु यीशु उपवास में रहा और शैतान द्वारा परखा गया (लूका 4:1)। अपनी इस परीक्षा से विजयी होकर निकलने के द्वारा प्रभु यीशु ने हम मसीही विश्वासियों के लिए एक उदाहराण दिया जिसके द्वारा हम भी अपनी परीक्षाओं के समय में प्रभु यीशु के समान ही जयवंत हो सकते हैं। जैसे शैतान ने हमारे प्रभु की परीक्षा करी थी, वैसे ही आज भी वह प्रभु यीशु के अनुयायीयों की परीक्षा करता रहता है, उन्हें भरमाने और पाप में गिराने के प्रयास करता रहता है।

    मत्ती और लूका रचित सुसमाचारों में दिए प्रभु यीशु की परीक्षा से संबंधित इस खंड में हम यह भी पाते हैं कि शैतान ने उस चालिस दिन के उपवास के अन्त में, जब प्रभु भूखा और थका हुआ था, उसे परमेश्वर पिता के विरुद्ध भड़काने और स्वार्थ सिद्धि के लिए कार्य करने को उकसाने का प्रयास किया। शैतान हमारे साथ भी यही कार्य करता है - जब हम थकित और कमज़ोर होते हैं तब वह प्रलोभनों, अनुचित मार्गों और विधियों के प्रयोग और परमेश्वर के प्रति अनाज्ञाकारी होने के सुझावों के द्वारा हमें बहकाने और गिराने के प्रयास करता है। ऐसी स्थिति में उसकी युक्तियों को व्यर्थ करने और उस पर जयवंत होने के लिए हमें भी वही करना चाहिए जो प्रभु यीशु ने किया - परमेश्वर के वचन की सहायता लेना।

   शैतान के हर प्रयास और प्रलोभन का उत्तर प्रभु यीशु ने परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखी परमेश्वर की आज्ञा को उद्धरित करके दिया। जीवन में आने वाली हर परिस्थिति और प्रलोभन तथा आवश्यकता से संबंधित शिक्षा बाइबल में मिलती है। अनेकों ऐसे पद और हवाले हैं जो हमें लुचपन, लालच, झूठ, तरह तरह की बुराइयों आदि के संबंध में चिताते हैं और मार्गदर्शन करते हैं। यदि हम परमेश्वर के वचन को अपने मन में बसा लें और स्मरण रखें तो परिस्थिति के अनुसार शैतान के हमलों का उचित प्रत्युत्तर दे सकते हैं और बुराई तथा पाप में गिरने से बच सकते हैं।

   पाप से बचने के लिए परमेश्वर के वचन की सहायता ही हमारी सर्वोत्तम सहायता है। - जो स्टोवैल


जब शैतान वार करे तो परमेश्वर के वचन से उस पर पलटवार करें।

फिर यीशु पवित्रआत्मा से भरा हुआ, यरदन से लैटा; और चालीस दिन तक आत्मा के सिखाने से जंगल में फिरता रहा; और शैतान उस की परीक्षा करता रहा। - लूका 4:1

बाइबल पाठ: मत्ती 4:1-11
Matthew 4:1 तब उस समय आत्मा यीशु को जंगल में ले गया ताकि इब्‍लीस से उस की परीक्षा हो।
Matthew 4:2 वह चालीस दिन, और चालीस रात, निराहार रहा, अन्‍त में उसे भूख लगी।
Matthew 4:3 तब परखने वाले ने पास आकर उस से कहा, यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो कह दे, कि ये पत्थर रोटियां बन जाएं।
Matthew 4:4 उसने उत्तर दिया; कि लिखा है कि मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं, परन्तु हर एक वचन से जो परमेश्वर के मुख से निकलता है जीवित रहेगा।
Matthew 4:5 तब इब्‍लीस उसे पवित्र नगर में ले गया और मन्दिर के कंगूरे पर खड़ा किया।
Matthew 4:6 और उस से कहा यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो अपने आप को नीचे गिरा दे; क्योंकि लिखा है, कि वह तेरे विषय में अपने स्‍वर्गदूतों को आज्ञा देगा; और वे तुझे हाथों हाथ उठा लेंगे; कहीं ऐसा न हो कि तेरे पांवों में पत्थर से ठेस लगे।
Matthew 4:7 यीशु ने उस से कहा; यह भी लिखा है, कि तू प्रभु अपने परमेश्वर की परीक्षा न कर।
Matthew 4:8 फिर शैतान उसे एक बहुत ऊंचे पहाड़ पर ले गया और सारे जगत के राज्य और उसका वैभव दिखाकर
Matthew 4:9 उस से कहा, कि यदि तू गिरकर मुझे प्रणाम करे, तो मैं यह सब कुछ तुझे दे दूंगा।
Matthew 4:10 तब यीशु ने उस से कहा; हे शैतान दूर हो जा, क्योंकि लिखा है, कि तू प्रभु अपने परमेश्वर को प्रणाम कर, और केवल उसी की उपासना कर।
Matthew 4:11 तब शैतान उसके पास से चला गया, और देखो, स्वर्गदूत आकर उस की सेवा करने लगे।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 81-83 
  • रोमियों 11:19-36


शनिवार, 10 अगस्त 2013

उत्तरदायित्व

   मेरे एक मित्र जैफ से उसकी पुत्री ने निवेदन किया कि वह उसके विवाह समारोह की सभी बातों की देखरेख और संचालन करे। यह उसके लिए बहुत आनन्द की बात थी और वे विवाह के लिए एक दूरगामी और अनुपम सुन्दर स्थल पर पहुँचे। लेकिन एक समस्या थी - क्योंकि विवाह में जाने वाले पारिवारिक सदस्य संख्या में थोड़े ही थे, जैफ को तीन भिन्न भूमिकाएं निभानी थीं, जो परस्पर टकराव की स्थिति उत्पन्न कर सकती थीं - विवाह की रस्म अदा करने वाला पास्टर, आमंत्रित मेहमानों का स्वागत करने वाला दुल्हन का पिता और विवाह समारोह की तस्वीरें उतारने वाला फोटोग्राफर।

   क्या कभी आपने ऐसा अनुभव किया है कि आप अनेक उत्तरदायित्वों को पूरा करने में लगे हैं और यह आपको थका दे रहा है? परमेश्वर के वचन बाइबल में एक ऐसी ही स्थिति का उल्लेख है - मूसा के ससुर जेथरो ने देखा कि मूसा को अनेक उत्तरदायित्वों को निभाना पड़ रहा है (निर्गमन 18)। मूसा को इस्त्राएलियों का नेतृत्व भी करना था, उनके व्यक्तिगत मामलों को सुलझाना भी होता था, गंभीर बातों की सुनवाई करके न्यायिक निर्णय भी देने होते थे, और क्योंकि इस्त्राएली संख्या में लाखों में थे, इसलिए मूसा के पास इन बातों के लिए लोगों की भीड़ लगी रहती थी। अन्ततः जेथरो ने मूसा से कहा: "और इस से तू क्या, वरन ये लोग भी जो तेरे संग हैं निश्चय हार जाएंगे, क्योंकि यह काम तेरे लिये बहुत भारी है; तू इसे अकेला नहीं कर सकता" (निर्गमन 18:18)। फिर उसने मूसा को बुद्धिमानी की सलाह दी कि वह अपनी ज़िम्मेदारियों का बंटवारा करे, अपने साथ अन्य योग्य लोगों को इन विवादों को सुलझाने के लिए नियुक्त करे जिससे छोटे या कम गंभीरता वाले विवाद तो वे सुलझा सकें और बड़ी तथा महत्वपूर्ण बातों एवं नेतृत्व के कार्य पर मूसा ध्यान दे सके (निर्गमन 18:21-23)।

   ऐसी परिस्थिति किसी के साथ भी हो सकती है - चाहे आप घर की देखभाल करने तथा छोटे बच्चों को संभालने वाली गृहणी हों, किसी व्यवासाय को संभालने वाले अतिश्रमित प्रबंधक, चर्च के कामों और उत्तरदायित्वों में लिप्त पास्टर, या कार्यों की ज़िम्मेदारियों से थकित एक सामन्य व्यक्ति। हम सभी मूसा और जेथरो से सबक ले सकते हैं। जैसा जेथरो ने मुसा से कहा, आप भी परमेश्वर से प्रार्थना करके अपने उत्तरदायित्वों का आँकलन कीजिए और चिन्हित कीजिए कि कौन से ऐसे कार्य हैं जिन्हें आप दूसरों को सौंप सकते हैं या करना बन्द भी कर सकते हैं। शारीरिक और मानसिक थकावट के साथ केवल काम-चलाऊ रीति से बहुत से कार्य करने से भला है कि बिना अनुचित रीति से थके भलि-भांति और उत्तम रीति से थोड़े से कार्य करे जाएं। कार्य करते करते थोड़े समय में थक कर निढाल और शिथिल हो जाने से भला है कि उतना ही कार्य किया जाए जिसमें शरीर तथा मन की स्फूर्ति तथा किए गए कार्य की गुणवन्ता बनी रह सके और लंबे समय तक उत्तम रीति से उत्तरदायित्व निभाए जा सकें। - डेनिस फिशर


यदि समय समय पर कार्य से अलग होकर उचित विश्राम नहीं करेंगे तो टूट कर बिखर जाएंगे।

यदि तू यह उपाय करे, और परमेश्वर तुझ को ऐसी आज्ञा दे, तो तू ठहर सकेगा, और ये सब लोग अपने स्थान को कुशल से पहुंच सकेंगें। - निर्गमन 18:23

बाइबल पाठ: निर्गमन 18:13-27
Exodus 18:13 दूसरे दिन मूसा लोगों का न्याय करने को बैठा, और भोर से सांझ तक लोग मूसा के आसपास खड़े रहे।
Exodus 18:14 यह देखकर कि मूसा लोगों के लिये क्या क्या करता है, उसके ससुर ने कहा, यह क्या काम है जो तू लोगों के लिये करता है? क्या कारण है कि तू अकेला बैठा रहता है, और लोग भोर से सांझ तक तेरे आसपास खड़े रहते हैं?
Exodus 18:15 मूसा ने अपने ससुर से कहा, इसका कारण यह है कि लोग मेरे पास परमेश्वर से पूछने आते है।
Exodus 18:16 जब जब उनका कोई मुकद्दमा होता है तब तब वे मेरे पास आते हैं और मैं उनके बीच न्याय करता, और परमेश्वर की विधि और व्यवस्था उन्हें जताता हूं।
Exodus 18:17 मूसा के ससुर ने उस से कहा, जो काम तू करता है वह अच्छा नहीं।
Exodus 18:18 और इस से तू क्या, वरन ये लोग भी जो तेरे संग हैं निश्चय हार जाएंगे, क्योंकि यह काम तेरे लिये बहुत भारी है; तू इसे अकेला नहीं कर सकता।
Exodus 18:19 इसलिये अब मेरी सुन ले, मैं तुझ को सम्मति देता हूं, और परमेश्वर तेरे संग रहे। तू तो इन लोगों के लिये परमेश्वर के सम्मुख जाया कर, और इनके मुकद्दमों को परमेश्वर के पास तू पहुंचा दिया कर।
Exodus 18:20 इन्हें विधि और व्यवस्था प्रगट कर कर के, जिस मार्ग पर इन्हें चलना, और जो जो काम इन्हें करना हो, वह इन को जता दिया कर।
Exodus 18:21 फिर तू इन सब लोगों में से ऐसे पुरूषों को छांट ले, जो गुणी, और परमेश्वर का भय मानने वाले, सच्चे, और अन्याय के लाभ से घृणा करने वाले हों; और उन को हज़ार-हज़ार, सौ-सौ, पचास-पचास, और दस-दस मनुष्यों पर प्रधान नियुक्त कर दे।
Exodus 18:22 और वे सब समय इन लोगों का न्याय किया करें; और सब बड़े बड़े मुकद्दमों को तो तेरे पास ले आया करें, और छोटे छोटे मुकद्दमों का न्याय आप ही किया करें; तब तेरा बोझ हलका होगा, क्योंकि इस बोझ को वे भी तेरे साथ उठाएंगे।
Exodus 18:23 यदि तू यह उपाय करे, और परमेश्वर तुझ को ऐसी आज्ञा दे, तो तू ठहर सकेगा, और ये सब लोग अपने स्थान को कुशल से पहुंच सकेंगें।
Exodus 18:24 अपने ससुर की यह बात मान कर मूसा ने उसके सब वचनों के अनुसार किया।
Exodus 18:25 सो उसने सब इस्त्राएलियों में से गुणी-गुणी पुरूष चुनकर उन्हें हज़ार-हज़ार, सौ-सौ, पचास-पचास, दस-दस, लोगों के ऊपर प्रधान ठहराया।
Exodus 18:26 और वे सब लोगों का न्याय करने लगे; जो मुकद्दमा कठिन होता उसे तो वे मूसा के पास ले आते थे, और सब छोटे मुकद्दमों का न्याय वे आप ही किया करते थे।
Exodus 18:27 और मूसा ने अपने ससुर को विदा किया, और उसने अपने देश का मार्ग लिया।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 79-80 
  • रोमियों 11:1-18


शुक्रवार, 9 अगस्त 2013

झुण्ड

   भेड़-पालन में सहायता करने वाले विशेष रीति से प्रशिक्षित कुत्तों के एक प्रशिक्षक ने एक प्रदर्शन के दौरान समझाया कि शिकारी जानवरों द्वारा भेड़ों को शिकार कर लेना बहुत सरल होता है क्योंकि भेड़ों के पास अपनी रक्षा का कोई साधन नहीं होता। केवल एक झुण्ड के रूप में ही वे कुछ सुरक्षित रह सकतीं हैं; एक अकेली पड़ गई भेड़ समझो मरी हुई भेड़ है। इसलिए इन सहायक कुत्तों को प्रशिक्षित किया जाता है कि वे भेड़ों को अलग अलग ना होने दें, उन्हें एक साथ एक सघन झुण्ड में बनाए रखें।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में परमेश्वर के लोगों को भेड़ों के समान और परमेश्वर को एक भेड़ों के चरवाहे के रूप में दिखाया गया है। यह हमारे लिए एक सशक्त चित्रण है यह स्मरण रखने का कि हम मसीही विश्वासियों को एक दूसरे के साथ एवं सहयोग की कितनी अधिक आवश्यकता है। भजनकार ने इस्त्राएलियों के मिस्त्र से निकल कर वाचा के देश में जाने के संबंध में लिखा, "परन्तु अपनी प्रजा को भेड़-बकरियों की नाईं प्रस्थान कराया, और जंगल में उनकी अगुवाई पशुओं के झुण्ड की सी की। तब वे उसके चलाने से बेखटके चले और उन को कुछ भय न हुआ, परन्तु उनके शत्रु समुद्र में डूब गए" (भजन 78:52-53)।

   परमेश्वर का झुण्ड होने के कारण, हम मसीही विश्वासी प्रभु यीशु के मार्गदर्शक और सुरक्षित हाथों में हैं और एक दूसरे के सहायक और रक्षक हैं। हमारे प्रभु यीशु से हमें मिली परस्पर संगति, तथा एक दूसरे की चिन्ता और देख-भाल करते रहने की ज़िम्मेदारी हमें एक दूसरे के प्रति जवाबदेह बनाती है। एक दूसरे के साथ बने रहकर और आवश्यकता के समयों में साथ खड़े रहकर ही हम प्रभु द्वारा दी गई इस ज़िम्मेदारी का निर्वाह कर सकते हैं। हमारे दैनिक जीवन और आपसी व्यवहार में हमारा दृष्टिकोण "मैं और मेरा" का नहीं वरन "हम, हमारा और हमारे प्रभु यीशु का" होना अनिवार्य है। जब प्रभु यीशु हमारा चरवाहा और हम एक दूसरे के साथ एक झुण्ड बने रहेंगे तो हमारी सुरक्षा भी बनी रहेगी। - डेविड मैककैसलैंड


परमेश्वर का झुण्ड होने के कारण हम परमेश्वर द्वारा और एक-दूसरे के साथ सुरक्षा पाते हैं।

तू ने मूसा और हारून के द्धारा, अपनी प्रजा की अगुवाई भेड़ों की सी की। - भजन 77:20 

बाइबल पाठ: भजन 77:11-20
Psalms 77:11 मैं याह के बड़े कामों की चर्चा करूंगा; निश्चय मैं तेरे प्राचीन काल वाले अद्भुत कामों को स्मरण करूंगा।
Psalms 77:12 मैं तेरे सब कामों पर ध्यान करूंगा, और तेरे बड़े कामों को सोचूंगा।
Psalms 77:13 हे परमेश्वर तेरी गति पवित्रता की है। कौन सा देवता परमेश्वर के तुल्य बड़ा है?
Psalms 77:14 अद्भुत काम करने वाला ईश्वर तू ही है, तू ने अपने देश देश के लोगों पर अपनी शक्ति प्रगट की है।
Psalms 77:15 तू ने अपने भुजबल से अपनी प्रजा, याकूब और यूसुफ के वंश को छुड़ा लिया है। (सेला)
Psalms 77:16 हे परमेश्वर समुद्र ने तुझे देखा, समुद्र तुझे देख कर ड़र गया, गहिरा सागर भी कांप उठा।
Psalms 77:17 मेघों से बड़ी वर्षा हुई; आकाश से शब्द हुआ; फिर तेरे तीर इधर उधर चले।
Psalms 77:18 बवण्डर में तेरे गरजने का शब्द सुन पड़ा था; जगत बिजली से प्रकाशित हुआ; पृथ्वी कांपी और हिल गई।
Psalms 77:19 तेरे मार्ग समुद्र में है, और तेरा रास्ता गहिरे जल में हुआ; और तेरे पांवों के चिन्ह मालूम नहीं होते।
Psalms 77:20 तू ने मूसा और हारून के द्धारा, अपनी प्रजा की अगुवाई भेड़ों की सी की।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 77-78 
  • रोमियों 10


गुरुवार, 8 अगस्त 2013

प्रेम

   मेरा एक अच्छा मित्र है जिसके साथ मैं कभी कभी मछली पकड़ने चला जाता हूँ। मेरा यह मित्र बहुत विचारशील भी है। जब भी हम मछली पकड़ने जाते हैं, नदी पर पहुँच कर वह पानी में खड़े होने के अपने जूते और कपड़े पहन कर अपनी गाड़ी के पिछले भाग पर बैठ जाता है और लगभग 15 मिनिट या और भी अधिक समय तक पानी की बारीकी से जाँच करता रहता है यह जानने के लिए कि मछलियाँ कहाँ पर उछल रही हैं। उसका कहना और मानना है कि "जहाँ मछलियाँ हैं ही नहीं वहाँ बंसी डालने से क्या फायदा?" उसके इस दृष्टिकोण से मैं एक और बात के बारे में सोचने को बाध्य हुआ - "क्या मैं प्रभु यीशु के लिए वहाँ आत्माएं ढ़ूँढ़ता हूँ जहाँ वे हैं ही नहीं?"

   प्रभु यीशु के लिए कहा जाता था कि वह "...चुंगी लेने वालों का और पापियों का मित्र" (लूका 7:34)। प्रभु यीशु के अनुयायी और मसीही विश्वासी होने के नाते हमें अपने व्यवहार में संसार से पृथक लेकिन फिर भी संसार में विद्यमान जीवन बिताना है, जैसा हमारे प्रभु और उद्धारकर्ता ने किया। इसलिए हमें अपने आप से यह प्रश्न भी पूछना होगा, "क्या प्रभु यीशु के समान ही मेरे मित्रगणों में भी अविश्वासी और सांसारिक लोग हैं? यदि हम केवल मसीही विश्वासियों ही में अपनी मित्र मण्डली बनाते हैं तो हम भी प्रभु के लिए आत्माएं वहाँ खोजने वाले होंगे जहाँ वे हैं ही नहीं।"

   यदि प्रभु यीशु के निकट आत्माओं को लाना है तो अविश्वासियों के साथ रहना इस दिशा में पहला कदम है। इसके पश्चात आता है प्रेम - एक सच्चा और खरा प्रेम जो उनसे उनकी कमियों, खामियों और सांसारिक व्यवहार के बावजूद बना रहता है; जो उनका आलोचक अथवा निन्दक नहीं वरन सहायक होता है। एक ऐसा प्रेम जो उनके बाहरी व्यवहार के नीचे छिपी प्यासी आत्मा की आवाज़ को सुनता है और उस प्यास को बुझाने के लिए जीवन का जल उन्हें देता है - जैसा प्रभु यीशु ने किया। पास्टर जॉर्ज हर्बर्ट (1593-1633) ने इस प्रकार की मित्रता के संबंध में कहा था, "ऐसे मित्र भाव में बहुत उपदेश और शिक्षा होती है।"

   ऐसा सच्चा और खरा प्रेम करना एक सामान्य मानवीय प्रवृति नहीं है, यह सामर्थ केवल परमेश्वर से ही मिलती है। इसलिए हम मसीही विश्वासियों की प्रार्थना रहनी चाहिए: "प्रभु, आज जब मैं अविश्वासियों के साथ रहूँ तो मैं अपनी व्यस्तता में उन्हें नज़रंदाज़ ना करूँ, वरन उनकी आवश्यकताएं और प्यासी आत्मा की आवाज़ के प्रति संवेदनशील रह सकूँ। मैं भी उनके प्रति वैसा ही प्रेम रख सकूँ जैसा आपने रखा, उन्हें वैसी ही अनुकंपा दिखा सकूँ जैसी आपने दिखाई और आपके वचन के जीवन दायक सत्य और शांति को उन के साथ बाँट सकूँ।" - डेविड रोपर


हम प्रभु यीशु के प्रेम और सत्य को संसार में प्रवाहित करने वाली धारा होने के लिए बुलाए गए हैं, उन गुणों को अपने में सीमित रख लेने वाले कुँड होने के लिए नहीं।

फिर किसी फरीसी ने उस से बिनती की, कि मेरे साथ भोजन कर; सो वह उस फरीसी के घर में जा कर भोजन करने बैठा। - लूका 7:36

बाइबल पाठ: लूका 7:34-48
Luke 7:34 मनुष्य का पुत्र खाता-पीता आया है; और तुम कहते हो, देखो, पेटू और पियक्‍कड़ मनुष्य, चुंगी लेने वालों का और पापियों का मित्र।
Luke 7:35 पर ज्ञान अपनी सब सन्‍तानों से सच्चा ठहराया गया है।
Luke 7:36 फिर किसी फरीसी ने उस से बिनती की, कि मेरे साथ भोजन कर; सो वह उस फरीसी के घर में जा कर भोजन करने बैठा।
Luke 7:37 और देखो, उस नगर की एक पापिनी स्त्री यह जानकर कि वह फरीसी के घर में भोजन करने बैठा है, संगमरमर के पात्र में इत्र लाई।
Luke 7:38 और उसके पांवों के पास, पीछे खड़ी हो कर, रोती हुई, उसके पांवों को आंसुओं से भिगाने और अपने सिर के बालों से पोंछने लगी और उसके पांव बारबार चूमकर उन पर इत्र मला।
Luke 7:39 यह देखकर, वह फरीसी जिसने उसे बुलाया था, अपने मन में सोचने लगा, यदि यह भविष्यद्वक्ता होता तो जान लेता, कि यह जो उसे छू रही है, वह कौन और कैसी स्त्री है? क्योंकि वह तो पापिनी है।
Luke 7:40 यह सुन यीशु ने उसके उत्तर में कहा; कि हे शमौन मुझे तुझ से कुछ कहना है वह बोला, हे गुरू कह।
Luke 7:41 किसी महाजन के दो देनदार थे, एक पांच सौ, और दूसरा पचास दीनार धारता था।
Luke 7:42 जब कि उन के पास पटाने को कुछ न रहा, तो उसने दोनों को क्षमा कर दिया: सो उन में से कौन उस से अधिक प्रेम रखेगा।
Luke 7:43 शमौन ने उत्तर दिया, मेरी समझ में वह, जिस का उसने अधिक छोड़ दिया: उसने उस से कहा, तू ने ठीक विचार किया है।
Luke 7:44 और उस स्त्री की ओर फिरकर उसने शमौन से कहा; क्या तू इस स्त्री को देखता है मैं तेरे घर में आया परन्तु तू ने मेरे पांव धाने के लिये पानी न दिया, पर इस ने मेरे पांव आंसुओं से भिगाए, और अपने बालों से पोंछा!
Luke 7:45 तू ने मुझे चूमा न दिया, पर जब से मैं आया हूं तब से इस ने मेरे पांवों का चूमना न छोड़ा।
Luke 7:46 तू ने मेरे सिर पर तेल नहीं मला; पर इस ने मेरे पांवों पर इत्र मला है।
Luke 7:47 इसलिये मैं तुझ से कहता हूं; कि इस के पाप जो बहुत थे, क्षमा हुए, क्योंकि इस ने बहुत प्रेम किया; पर जिस का थोड़ा क्षमा हुआ है, वह थोड़ा प्रेम करता है।
Luke 7:48 और उसने स्त्री से कहा, तेरे पाप क्षमा हुए।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 74-76 
  • रोमियों 9:16-33


बुधवार, 7 अगस्त 2013

सुरक्षा कवच

   चर्च के एक कार्यक्रम में एक बच्चा बाइबल के पद उद्धृरित कर रहा था, और मैं शीघ्र ही समझ गई कि उसे बाइबल के बारे में जानकारी नहीं थी। बाइबल के जिस खंड को वह उद्धृरित कर रहा था वह था इफिसियों 6:17 "और उद्धार का टोप, और आत्मा की तलवार जो परमेश्वर का वचन है, ले लो"।

   जब उस से इस वाक्य का हवाला पूछा गया तो उसका उत्तर था, "मैंने सोचा वह संख्या, 6:17, जो वाक्य के अन्त में लिखी है वह समय बताया गया है, क्योंकि मैं जब इसे याद कर रहा था तो लगभग यही समय था!" मैं उसकी बात सुनकर मुसकुराई, फिर मैंने अपनी बाइबल निकाली और उसे वह खण्ड निकालकर दिखाया और समझाया कि संख्या अध्याय और पद को इंगित करती है।

   बाइबल के कुछ हवाले जानना अच्छा है लेकिन परमेश्वर के वचन बाइबल को अपने हृदय में छिपा लेना वास्तव में आवश्यक है (भजन 119:11)। परमेश्वर के वचन को स्मरण रखने और मन में बसा लेने का सबसे बड़ा लाभ है कि उससे हम शैतान द्वारा हम पर किए जा रहे हमलों से बचाव कर सकते हैं (इफिसियों 6:10-18)। उदाहरणस्वरूप जब शैतान ने प्रभु यीशु की परीक्षा करी तब प्रभु यीशु ने परमेश्वर के वचन का हवाला देकर ही उसका सामना किया और उसे पराजित किया (मत्ती 4:1-11)। इसी प्रकार जब भी हम परमेश्वर के प्रति अनाज्ञाकारी होने के लिए शैतान द्वारा उकसाए जाते हैं तो हम अपने मन में बसे, उस परिस्थिति से संबंधित परमेश्वर के वचन के भाग और शिक्षाओं को स्मरण करके अनाज्ञाकारी होने से बच सकते हैं। यही नहीं, जो वचन हमने स्मरण कर रखा है, उसे आधार बनाकर हम परमेश्वर के वचन की शिक्षाओं को दूसरों के साथ भी बाँट सकते हैं।

   परमेश्वर ने अपना वचन हमें इसीलिए दिया है कि आवश्यकतानुसार वह हमारा मार्गदर्शन और सहायता करे, एक सुरक्षा कवच के समान हमारी रक्षा करे। परमेश्वर के वचन बाइबल को ना केवल अपने मन में बसा लें वरन एक सुरक्षा कवच के समान उसे धारण भी कर लें। - ऐनी सेटास


कोई बुराई परमेश्वर के वचन रूपी सुरक्षा कवच को कभी भेद नहीं सकती है।

जवान अपनी चाल को किस उपाय से शुद्ध रखे? तेरे वचन के अनुसार सावधान रहने से। मैं पूरे मन से तेरी खोज मे लगा हूं; मुझे तेरी आज्ञाओं की बाट से भटकने न दे! मैं ने तेरे वचन को अपने हृदय में रख छोड़ा है, कि तेरे विरुद्ध पाप न करूं। - भजन 119:9-11

बाइबल पाठ: इफिसियों 6:10-18
Ephesians 6:10 निदान, प्रभु में और उस की शक्ति के प्रभाव में बलवन्‍त बनो।
Ephesians 6:11 परमेश्वर के सारे हथियार बान्‍ध लो; कि तुम शैतान की युक्तियों के साम्हने खड़े रह सको।
Ephesians 6:12 क्योंकि हमारा यह मल्लयुद्ध, लोहू और मांस से नहीं, परन्तु प्रधानों से और अधिकारियों से, और इस संसार के अन्धकार के हाकिमों से, और उस दुष्‍टता की आत्मिक सेनाओं से है जो आकाश में हैं।
Ephesians 6:13 इसलिये परमेश्वर के सारे हथियार बान्‍ध लो, कि तुम बुरे दिन में साम्हना कर सको, और सब कुछ पूरा कर के स्थिर रह सको।
Ephesians 6:14 सो सत्य से अपनी कमर कसकर, और धार्मिकता की झिलम पहिन कर।
Ephesians 6:15 और पांवों में मेल के सुसमाचार की तैयारी के जूते पहिन कर।
Ephesians 6:16 और उन सब के साथ विश्वास की ढाल ले कर स्थिर रहो जिस से तुम उस दुष्‍ट के सब जलते हुए तीरों को बुझा सको।
Ephesians 6:17 और उद्धार का टोप, और आत्मा की तलवार जो परमेश्वर का वचन है, ले लो।
Ephesians 6:18 और हर समय और हर प्रकार से आत्मा में प्रार्थना, और बिनती करते रहो, और इसी लिये जागते रहो, कि सब पवित्र लोगों के लिये लगातार बिनती किया करो।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 72-73 
  • रोमियों 9:1-15


मंगलवार, 6 अगस्त 2013

अनपेक्षित असुविधा

   टोनी वह ढूँढ रही थी जो वास्तव में खोया नहीं था, इस प्रयास में उसने वह पाया जिसे वह ढूँढ तो नहीं रही थी लेकिन जिसकी उसे आवश्यकता थी और परिणामस्वरूप कुछ लोगों को एक ऐसा अनपेक्षित आत्मिक उल्लास और उत्थान मिल गया, जिसकी उन्हें अत्यंत आवश्यकता तो थी परन्तु पता नहीं था कि कैसे पाएं।

   नशीले पदार्थों के आदि लोगों के सुधार और पुनर्वासन के एक क्लीनिक में टोनी बाइबल अध्ययन चलाती है। वह अपने पति का खोया हुआ ड्राइविंग लाईसेंस खोज रही थी, और इस प्रयास में जिन जिन स्थानों पर उसके पति पिछले दिन में होकर आए थे वहाँ वहाँ जाकर पूछताछ कर रही; उन में से एक स्थान था एक अस्पताल। जब वह अस्पताल पहुँची तो उसे ड्राइविंग लाईसेंस तो नहीं मिला, लेकिन वहाँ उसकी मुलाकात एक मसीही स्कूली बच्चों की संगीत मण्डली से हो गई, जो अस्पताल के रोगियों के लिए मसीही गीत संगीत प्रस्तुत कर रहे थे। उनके कार्यक्रम से टोनी बहुत प्रभावित हुई और उसने उस संगीत मण्डली के संचालक से पूछा कि क्या वे लोग उसके बाइबल अध्ययन में आने वाले लोगों के लिए भी ऐसा ही एक कार्यक्रम प्रस्तुत कर सकेंगे। संचालक ने इस के लिए अपनी सहमति व्यक्त करी और वह संगीत मण्डली टोनी के बाइबल अध्ययन समूह के लिए कार्यक्रम प्रस्तुत करने आई जिससे बहुत से लोगों ने पहले गीत-संगीत और फिर वार्तालाप द्वारा परमेश्वर के प्रेम, जीवन में नई आशा और अनन्त आनन्द का संदेश सुना और अपने जीवन संवारने के प्रयासों में लगे कई लोगों को अभूतपूर्व प्रेरणा और मार्गदर्शन मिला।

   और वह ड्राइविंग लाईसेंस - जब उस दिन टोनी अस्पताल से वापस घर लौटी तो उसे वह लाईसेंस उसे वहीं एक कुर्सी पर पड़ा हुआ मिल गया। स्पष्टतया, उस दिन उसके लाईसेंस ढूँढने बाहर जाने का एक ही प्रयोजन था - परमेश्वर चाहता था कि वह उन बच्चों से मिले जो फिर नशीले पदार्थों के सेवन से बिगड़े हुए जीवनों को संवारने में योगदान देने वाले हो सकें!

   जब परमेश्वर हमारा मार्गदर्शन करता है (नीतिवचन 16:9) तो अनेक बार वह ऐसी रीति से करता है जो हमारे सोच-विचार और कल्पना से भी परे है। वह हमारी असुविधाओं के द्वारा भी हमारी भलाई और अपने नाम की महिमा करवा सकता है। अगली बार जब आप किसी अनपेक्षित असुविधा में पड़ें और कुछ भी समझ ना आ रहा हो तो अपनी सोच को केवल अपने तक ही सीमित ना रखें वरन इस बात पर भी ध्यान दें कि कहीं परमेश्वर आपके द्वारा किसी अन्य के अथवा स्वयं आपके जीवन में भी कोई भला कार्य तो नहीं करवा रहा है! - डेव ब्रैनन


परमेश्वर पर्दे के पीछे तो रहता है लेकिन पर्दे के आगे की हर बात को नियंत्रित करता रहता है।

मनुष्य मन में अपने मार्ग पर विचार करता है, परन्तु यहोवा ही उसके पैरों को स्थिर करता है। - नीतिवचन 16:9

बाइबल पाठ: नीतिवचन 16:1-9
Proverbs 16:1 मन की युक्ति मनुष्य के वश में रहती है, परन्तु मुंह से कहना यहोवा की ओर से होता है।
Proverbs 16:2 मनुष्य का सारा चाल चलन अपनी दृष्टि में पवित्र ठहरता है, परन्तु यहोवा मन को तौलता है।
Proverbs 16:3 अपने कामों को यहोवा पर डाल दे, इस से तेरी कल्पनाएं सिद्ध होंगी।
Proverbs 16:4 यहोवा ने सब वस्तुएं विशेष उद्देश्य के लिये बनाईं हैं, वरन दुष्ट को भी विपत्ति भोगने के लिये बनाया है।
Proverbs 16:5 सब मन के घमण्डियों से यहोवा घृणा करता है करता है; मैं दृढ़ता से कहता हूं, ऐसे लोग निर्दोष न ठहरेंगे।
Proverbs 16:6 अधर्म का प्रायश्चित कृपा, और सच्चाई से होता है, और यहोवा के भय मानने के द्वारा मनुष्य बुराई करने से बच जाते हैं।
Proverbs 16:7 जब किसी का चाल चलन यहोवा को भावता है, तब वह उसके शत्रुओं का भी उस से मेल कराता है।
Proverbs 16:8 अन्याय के बड़े लाभ से, न्याय से थोड़ा ही प्राप्त करना उत्तम है।
Proverbs 16:9 मनुष्य मन में अपने मार्ग पर विचार करता है, परन्तु यहोवा ही उसके पैरों को स्थिर करता है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 70-71 
  • रोमियों 8:22-39