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सोमवार, 18 नवंबर 2013

बहुभाषीय


   क्या यह संभव है कि ऐसे समाज तक, जो प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार के प्रति अधिकाधिक उदासीन होते जा रहा है, और उन लोगों तक जो मसीही विश्वास को नहीं मानते यह सुसमाचार सन्देश पहुँचाया जा सके? ऐसा कर सकने का एक माध्यम हो सकता है हम मसीही विश्वासियों का सांसकृतिक रूप से "बहुभाषीय" हो जाना - उन लोगों ’भाषा’ के प्रयोग द्वारा, अर्थात उन लोगों की रुचि और लगाव की बातों के माध्यम से, उन तक प्रभु यीशु मसीह में सेंत-मेंत मिलने वाली मुक्ति के सन्देश को पहुँचाना।

   सामान्यतः आम लोगों की रुचि संगीत, सिनेमा, टी.वी., खेल-कूद आदि में होती है और वे ऐसे ही विषयों पर आपस में बातचीत करते हैं। यदि हम मसीही विश्वासी भी इन बातों की आलोचना या निन्दा किए बिना, इन विषयों को बातचीत आरंभ करने का माध्यम बना कर उन तक इन विषयों के सन्दर्भ में परमेश्वर के वचन और उद्धार के मार्ग को प्रस्तुत करें तो सुसमाचार के प्रति लोगों की रुचि जागृत करना सम्भव होगा।

   प्रेरित पौलुस ने इस बात का उदाहरण अथेने के लोगों के साथ अपने वार्तालाप में दिया। प्रेरितों के कार्य के अध्याय 17 में हम पाते हैं कि अथेने के अरियुपगुस में पौलुस को अवसर हुआ कि एक पूर्णतः गैरमसीही संसकृति के लोगों को मसीही विश्वास और मसीह यीशु में उद्धार के मार्ग के बारे में बताए। ऐसा करने के लिए पौलुस ने उन युनानी लोगों के कवियों की लिखी बातों को संदर्भ बनाकर सुसमाचार को उनके सामने प्रस्तुत किया; पौलुस ने कहा: "क्योंकि हम उसी में जीवित रहते, और चलते-फिरते, और स्थिर रहते हैं; जैसे तुम्हारे कितने कवियों ने भी कहा है, कि हम तो उसी के वंश भी हैं" (प्रेरितों 17:28)।

   जैसे पौलुस ने उस संसकृति के लोगों तक अपनी बात उसे आधार बनाकर पहुँचाई जो वे पढ़ रहे थे, हम भी लोगों तक प्रभु यीशु मसीह में पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार को अधिक प्रभावी रीति से लोगों तक पहुँचा सकते हैं यदि हम उन की रुचि के विषय को आधार बनाएं तो। क्या आप किसी पड़ौसी या सहकर्मी तक सुसमाचार पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं? ’बहुभाषीय’ बन कर देखिए, शायद ऐसा करना कारगर हो जाए। - बिल क्राउडर


बाइबल का सन्देश संसार के संपर्क में लाना आवश्यक है।

क्योंकि हम उसी में जीवित रहते, और चलते-फिरते, और स्थिर रहते हैं; जैसे तुम्हारे कितने कवियों ने भी कहा है, कि हम तो उसी के वंश भी हैं। - प्रेरितों 17:28

बाइबल पाठ: प्रेरितों 17:18-31
Acts 17:18 तब इपिकूरी और स्‍तोईकी पण्‍डितों में से कितने उस से तर्क करने लगे, और कितनों ने कहा, यह बकवादी क्या कहना चाहता है परन्तु औरों ने कहा; वह अन्य देवताओं का प्रचारक मालूम पड़ता है, क्योंकि वह यीशु का, और पुनरुत्थान का सुसमाचार सुनाता था। 
Acts 17:19 तब वे उसे अपने साथ अरियुपगुस पर ले गए और पूछा, क्या हम जान सकते हैं, कि यह नया मत जो तू सुनाता है, क्या है? 
Acts 17:20 क्योंकि तू अनोखी बातें हमें सुनाता है, इसलिये हम जानना चाहते हैं कि इन का अर्थ क्या है? 
Acts 17:21 (इसलिये कि सब अथेनवी और परदेशी जो वहां रहते थे नई नई बातें कहने और सुनने के सिवाय और किसी काम में समय नहीं बिताते थे)। 
Acts 17:22 तब पौलुस ने अरियुपगुस के बीच में खड़ा हो कर कहा; हे अथेने के लोगों मैं देखता हूं, कि तुम हर बात में देवताओं के बड़े मानने वाले हो। 
Acts 17:23 क्योंकि मैं फिरते हुए तुम्हारी पूजने की वस्‍तुओं को देख रहा था, तो एक ऐसी वेदी भी पाई, जिस पर लिखा था, कि अनजाने ईश्वर के लिये। सो जिसे तुम बिना जाने पूजते हो, मैं तुम्हें उसका समाचार सुनाता हूं। 
Acts 17:24 जिस परमेश्वर ने पृथ्वी और उस की सब वस्‍तुओं को बनाया, वह स्वर्ग और पृथ्वी का स्‍वामी हो कर हाथ के बनाए हुए मन्‍दिरों में नहीं रहता। 
Acts 17:25 न किसी वस्तु का प्रयोजन रखकर मनुष्यों के हाथों की सेवा लेता है, क्योंकि वह तो आप ही सब को जीवन और स्‍वास और सब कुछ देता है। 
Acts 17:26 उसने एक ही मूल से मनुष्यों की सब जातियां सारी पृथ्वी पर रहने के लिये बनाईं हैं; और उन के ठहराए हुए समय, और निवास के सिवानों को इसलिये बान्‍धा है। 
Acts 17:27 कि वे परमेश्वर को ढूंढ़ें, कदाचित उसे टटोल कर पा जाएं तौभी वह हम में से किसी से दूर नहीं! 
Acts 17:28 क्योंकि हम उसी में जीवित रहते, और चलते-फिरते, और स्थिर रहते हैं; जैसे तुम्हारे कितने कवियों ने भी कहा है, कि हम तो उसी के वंश भी हैं। 
Acts 17:29 सो परमेश्वर का वंश हो कर हमें यह समझना उचित नहीं, कि ईश्वरत्‍व, सोने या रूपे या पत्थर के समान है, जो मनुष्य की कारीगरी और कल्पना से गढ़े गए हों। 
Acts 17:30 इसलिये परमेश्वर आज्ञानता के समयों में अनाकानी कर के, अब हर जगह सब मनुष्यों को मन फिराने की आज्ञा देता है। 
Acts 17:31 क्योंकि उसने एक दिन ठहराया है, जिस में वह उस मनुष्य के द्वारा धर्म से जगत का न्याय करेगा, जिसे उसने ठहराया है और उसे मरे हुओं में से जिलाकर, यह बात सब पर प्रामाणित कर दी है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 8-10 
  • इब्रानियों 13


रविवार, 17 नवंबर 2013

साथी


   मुझे अपने प्रदेश के मार्गों पर पैदल घूमना चलना अच्छा लगता है क्योंकि ऐसा करने से मैं वहाँ की सुरम्य सुन्दरता और भव्यता को भली-भांति निहार सकता हूँ, उसका आनन्द उठा सकता हूँ। यह मुझे इस बात का भी स्मरण दिलाता है कि मैं अपने तथा जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह के साथ एक आत्मिक यात्रा पर भी हूँ, जिसमें प्रभु यीशु मेरा साथी और मार्गदर्शक है। प्रभु यीशु भी, अपने पृथ्वी के समय में सारे इस्त्राएल देश में चलता फिरता और शिष्य बनाता रहा, उनसे यह कह कर, "मेरे पीछे चले आओ" (मत्ती 4:19)।

   जॉन बनयन द्वारा लिखित सुप्रसिद्ध पुस्तक "मसीही मुसाफिर" में एक स्थान पर मसीही यात्री कठिनाई के पहाड़ पर पहुँचता है, और उसे चढ़ने से पहले वह थोड़ा रुककर विश्राम करता है। उस विश्राम के समय में वह अपने पास विद्यमान परमेश्वर के वचन को पढ़ता है जो उसे परमेश्वर की उसके साथ बनी हुई उपस्थिति को स्मरण कराता है और आश्वस्त करता है कि परमेश्वर की सामर्थ उसके साथ है। इस विश्राम और मनन से वह नई स्फूर्ति पाता है और अपनी यात्रा पर आगे बढ़ने और कठिनाई के पहाड़ पर चढ़ने के लिए तैयार हो जाता है।

   मसीही विश्वास के जीवन की यह यात्रा सरल नहीं है; अनेक बार इसमें आगे बढ़ने से सरल और बेहतर लगता है इसे छोड़ देना, पीछे हट जाना, मार्ग बदल लेना। लेकिन जब ऐसे कठिन समय आएं तब उचित होता है थोड़ा समय रुककर विश्राम करना और पुनः सामर्थ प्राप्त करना - बीती यात्रा में हमारे साथ बनी रही परमेश्वर प्रभु यीशु की उपस्थिति और सहायता को स्मरण कर के और कभी साथ ना छोड़ने के उसके वायदे तथा उसके वचनों में दी गई हमारी भलाई की प्रतिज्ञाओं के स्मरण से आश्वासन लेने के द्वारा।

   केवल परमेश्वर ही यह जानता है कि हमारी यह जीवन यात्रा कितनी लंबी है, तथा कब, कहाँ और कैसे समाप्त होगी; लेकिन उसका आश्वासन सदा अपने लोगों के साथ है, "...और देखो, मैं जगत के अन्‍त तक सदैव तुम्हारे संग हूं" (मत्ती 28:20)। प्रभु यीशु का यह आश्वासन किसी कथन को सुन्दर बनाने वाला कोई अलंकार मात्र नहीं है। प्रभु यीशु की साथ बनी रहने वाली उपस्थिति वास्तविक है जो अनेक मसीही विश्वासियों ने अपनी विश्वास की यात्रा में भिन्न समयों और परिस्थितियों में अनुभव की है। ऐसा कोई पल नहीं जिसमें मसीह यीशु अपने विश्वासियों के साथ ना हो, ऐसी कोई यात्रा नहीं जिसके प्रत्येक पग में वह साथी ना हो। 

   मैंने अपने अनुभव से जाना है कि वह मेरा ऐसा साथी है जो मेरी जीवन यात्रा को अपनी सामर्थ और मार्गदरशन से सुगम बना देता है। क्या आपने भी मसीह यीशु को आपनी जीवन यात्रा का साथी बनाया है? - डेविड रोपर


जीवन यात्रा के कठिन मार्ग पर अपने बोझ प्रभु यीशु को सौंप दीजिए।

हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। - मत्ती 11:28

बाइबल पाठ: मत्ती 4:18-22
Matthew 4:18 उसने गलील की झील के किनारे फिरते हुए दो भाइयों अर्थात शमौन को जो पतरस कहलाता है, और उसके भाई अन्द्रियास को झील में जाल डालते देखा; क्योंकि वे मछवे थे। 
Matthew 4:19 और उन से कहा, मेरे पीछे चले आओ, तो मैं तुम को मनुष्यों के पकड़ने वाले बनाऊंगा। 
Matthew 4:20 वे तुरन्त जालों को छोड़ कर उसके पीछे हो लिए। 
Matthew 4:21 और वहां से आगे बढ़कर, उसने और दो भाइयों अर्थात जब्‍दी के पुत्र याकूब और उसके भाई यूहन्ना को अपने पिता जब्‍दी के साथ नाव पर अपने जालों को सुधारते देखा; और उन्हें भी बुलाया 
Matthew 4:22 वे तुरन्त नाव और अपने पिता को छोड़ कर उसके पीछे हो लिए।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 5-7 
  • इब्रानियों 12


शनिवार, 16 नवंबर 2013

सावधान!


   बैंक में पैसा लेने-देने और संभालने वाले अधिकारियों के प्रशिक्षण के समय उन्हें असली और नकली नोट में भेद करना और नकली को पहचानना सिखाया जाता है। उन्हें असली और नकली दोनों ही नोट दिखाए जाते हैं फिर असली की तुलना में नकली में विद्यमान समानताओं को नहीं वरन भिन्नताओं को देखना और पहचानना सिखाया जाता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित यूहन्ना की पहली पत्री के दुसरे अध्याय में मसीही विश्वासियों के समक्ष झूठे मसीही विश्वासियों और शिक्षकों के उदाहरण रखे गए हैं जिससे वे असली-नकली की पहचान कर सकें। यूहन्ना ने बताया कि अन्त के समयों की एक पहचान होगी झूठे मसीहियों और मसीह विरोधियों की बहुतायत (1 यूहन्ना 2:18)। झूठे मसीही या मसीह विरोधी वे हैं जो अपने में मसीह यीशु की सामर्थ और उससे प्राप्त अधिकार के होने का दावा तो करते हैं लेकिन उनमें ऐसा कुछ भी नहीं होता; या फिर वे जो मसीह यीशु और मसीही विश्वास का और उसकी शिक्षाओं का इन्कार करते हैं, उसका विरोध करते हैं।

   प्रेरित यूहन्ना ने मसीह विरोधियों की पहचान के तीन चिन्ह दिए: वे मसीही संगति और सहभागिता से हट जाते हैं (पद 19); वे प्रभु यीशु को जगत का उद्धारकर्ता मसीहा स्वीकार नहीं करते (पद 22); वे मसीही विश्वासियों को भी मसीह यीशु से दूर कर देने के प्रयास करते हैं (पद 26)। साथ ही यूहन्ना इसी पत्री में ऐसे मसीह विरोधियों से बच कर रहने के उपाय भी बताता है: प्रत्येक मसीही विश्वासी अपने अन्दर वास करने वाले परमेश्वर पवित्र आत्मा पर निर्भर रहे, उसकी आज्ञाकरिता में चले; परमेश्वर के वचन की सच्चाईयों को जाने और उनमें बना रहे तथा मसीह यीशु के साथ संगति बनाए रखे।

   जैसे बैंक के कर्मचारी असली-नकली नोट के तुलनात्मक प्रशिक्षण के द्वारा असली को पहचानने वाले तथा नकली के नुकसान से बचे रहने वाले हो जाते हैं, हम मसीही विश्वासी भी अटल सत्य प्रभु यीशु मसीह की पहचान के द्वारा नकली अर्थात मसीह विरोधियों को पहचान कर उनके षड़यंत्रों और गलत शिक्षाओं से बचे रह सकते हैं। - मार्विन विलियम्स


सचेत रहें; शैतान थोड़े से सत्य का हल्का सा आवरण पहना कर असत्य को स्वीकारयोग्य बनाने के प्रयास में लगा रहता है।

और यह कुछ अचम्भे की बात नहीं क्योंकि शैतान आप भी ज्योतिमर्य स्वर्गदूत का रूप धारण करता है। सो यदि उसके सेवक भी धर्म के सेवकों का सा रूप धरें, तो कुछ बड़ी बात नहीं परन्तु उन का अन्‍त उन के कामों के अनुसार होगा। - 2 कुरिन्थियों 11:14-15

बाइबल पाठ: 1यूहन्ना 2:18-27
1 John 2:18 हे लड़कों, यह अन्‍तिम समय है, और जैसा तुम ने सुना है, कि मसीह का विरोधी आने वाला है, उसके अनुसार अब भी बहुत से मसीह के विरोधी उठे हैं; इस से हम जानते हैं, कि यह अन्‍तिम समय है। 
1 John 2:19 वे निकले तो हम ही में से, पर हम में के थे नहीं; क्योंकि यदि हम में के होते, तो हमारे साथ रहते, पर निकल इसलिये गए कि यह प्रगट हो कि वे सब हम में के नहीं हैं। 
1 John 2:20 और तुम्हारा तो उस पवित्र से अभिषेक हुआ है, और तुम सब कुछ जानते हो। 
1 John 2:21 मैं ने तुम्हें इसलिये नहीं लिखा, कि तुम सत्य को नहीं जानते, पर इसलिये, कि उसे जानते हो, और इसलिये कि कोई झूठ, सत्य की ओर से नहीं। 
1 John 2:22 झूठा कौन है? केवल वह, जो यीशु के मसीह होने का इन्कार करता है; और मसीह का विरोधी वही है, जो पिता का और पुत्र का इन्कार करता है। 
1 John 2:23 जो कोई पुत्र का इन्कार करता है उसके पास पिता भी नहीं: जो पुत्र को मान लेता है, उसके पास पिता भी है। 
1 John 2:24 जो कुछ तुम ने आरम्भ से सुना है वही तुम में बना रहे: जो तुम ने आरम्भ से सुना है, यदि वह तुम में बना रहे, तो तुम भी पुत्र में, और पिता में बने रहोगे। 
1 John 2:25 और जिस की उसने हम से प्रतिज्ञा की वह अनन्त जीवन है। 
1 John 2:26 मैं ने ये बातें तुम्हें उन के विषय में लिखी हैं, जो तुम्हें भरमाते हैं। 
1 John 2:27 और तुम्हारा वह अभिषेक, जो उस की ओर से किया गया, तुम में बना रहता है; और तुम्हें इस का प्रयोजन नहीं, कि कोई तुम्हें सिखाए, वरन जैसे वह अभिषेक जो उस की ओर से किया गया तुम्हें सब बातें सिखाता है, और यह सच्चा है, और झूठा नहीं: और जैसा उसने तुम्हें सिखाया है वैसे ही तुम उस में बने रहते हो।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 3-4 
  • इब्रानियों 11:20-40


शुक्रवार, 15 नवंबर 2013

आहार


   क्या आपने कभी शिशु आहार चखा है? मैंने चखा है, और वह बहुत बेस्वाद होता है। लेकिन शिशुओं के लिए और कोई विकल्प भी नहीं है, क्योंकि उनके दाँत नहीं होते इसलिए वे किसी स्वादिष्ट, मसालेदार ठोस भोजन को काट, चबा कर खा नहीं सकते, उसका स्वाद नहीं ले सकते। हम जानते हैं कि बच्चे जैसे जैसे बड़े होते हैं, वे ठोस आहार भी लेना आरंभ कर देते हैं, और ऐसा केवल स्वाद के लिए नहीं है। यदि वे उस शिशु आहार से निकलकर ठोस आहार पर नहीं जाएंगे तो उनका शारीरिक विकास नहीं होने पाएगा, वे कमज़ोर रहेंगे, रोगों से लड़ने की क्षमता उनमें विकसित नहीं होने पाएगी, उनके शरीर दुर्बल तथा अस्वस्थ ही बने रहेंगे।

   दुख की बात है कि बहुत से मसीही विश्वासियों का भी आत्मिक भोजन और आत्मिक विकास के संबंध में यही हाल रहता है। वे मसीही विश्वास की उन्हीं आरंभिक बातों (इब्रानियों 6:1-2) और सरल सच्चाईयों से संतुष्ट रहते हैं और सुसमाचार की बुनियादी बातों से आगे बढ़ने ही नहीं पाते। परमेश्वर के वचन बाइबल की गंभीर बातों तथा कठिन भागों का अध्ययन और मनन ना करने के कारण वे आत्मिक रीति से परिपक्व नहीं होते, बच्चे ही रहते हैं जो बस दूसरों से ही सीखते रहते हैं, स्वयं प्रौढ़ नहीं होते (इब्रानियों 5:13)। इस कारण वे परमेश्वर के वचन और परमेश्वर की आज्ञाओं की समझ नहीं रखते, सही निर्णय करने में असमर्थ रहते हैं, झूठी शिक्षाओं को पहचानने की क्षमता नहीं रखते और चाहे अनेक वर्षों से मसीही विश्वास में हों लेकिन फिर भी आत्मिक रूप से बच्चे और अविकसित ही रहते हैं।

  किसी व्यक्ति के डील-डौल को देख कर उसकी आयु का अनुमान लगाया जा सकता है। इसी प्रकार हमारे दैनिक व्यवहार, चरित्र और भले-बुरे में अन्तर की परख द्वारा हमारी आत्मिक आयु का भी अनुमान लगाया जा सकता है। आज आपकी आत्मिक आयु के बारे में लोग क्या अनुमान लगाते हैं? क्या आप आत्मिक रीति से प्रौढ़ और परिपक्व हैं, या परिपक्वता की ओर अग्रसर हैं? आज आपका आत्मिक आहार कैसा है - शिशु आहार या ठोस आहार? - सी. पी. हिया


परमेश्वर के वचन के अध्ययन में लगे रहें; आपकी परिपक्वता स्वतः ही प्रकट होती रहेगी।

क्योंकि दूध पीने वाले बच्‍चे को तो धर्म के वचन की पहिचान नहीं होती, क्योंकि वह बालक है। पर अन्न सयानों के लिये है, जिन के ज्ञानेन्‍द्रिय अभ्यास करते करते, भले बुरे में भेद करने के लिये पक्के हो गए हैं। - इब्रानियों 5:13-14

बाइबल पाठ: इब्रानियों 5:12-6:3
Hebrews 5:12 समय के विचार से तो तुम्हें गुरू हो जाना चाहिए था, तौभी क्या यह आवश्यक है, कि कोई तुम्हें परमेश्वर के वचनों की आदि शिक्षा फिर से सिखाए ओर ऐसे हो गए हो, कि तुम्हें अन्न के बदले अब तक दूध ही चाहिए। 
Hebrews 5:13 क्योंकि दूध पीने वाले बच्‍चे को तो धर्म के वचन की पहिचान नहीं होती, क्योंकि वह बालक है। 
Hebrews 5:14 पर अन्न सयानों के लिये है, जिन के ज्ञानेन्‍द्रिय अभ्यास करते करते, भले बुरे में भेद करने के लिये पक्के हो गए हैं।
Hebrews 6:1 इसलिये आओ मसीह की शिक्षा की आरम्भ की बातों को छोड़ कर, हम सिद्धता की ओर आगे बढ़ते जाएं, और मरे हुए कामों से मन फिराने, और परमेश्वर पर विश्वास करने। 
Hebrews 6:2 और बपतिस्मों और हाथ रखने, और मरे हुओं के जी उठने, और अन्‍तिम न्याय की शिक्षारूपी नेव, फिर से न डालें। 
Hebrews 6:3 और यदि परमेश्वर चाहे, तो हम यही करेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 1-2 
  • इब्रानियों 11:1-19


गुरुवार, 14 नवंबर 2013

विलाप और सांत्वना


   यरुशलेम आग की लपटों से घिरा हुआ था और परमेश्वर का भविष्यद्वकता यिर्मयाह उसकी दुर्दशा पर विलाप कर रहा था। लंबे समय से तथा बारंबार यिर्मयाह यरुशलेम के लोगों और हाकिमों को आते विनाश से बचने के लिए पश्चाताप करने का परमेश्वर का सन्देश पहुँचाता रहा था, लेकिन उन्होंने उसकी एक ना सुनी, उसका तिरस्कार किया, उसे सताया, उसे झूठा कहा। अब वह विनाश का समय अपनी संपूर्ण वीभत्सता के साथ यरुशलेम पर आ पड़ा था और चारों ओर बरबादी ही बरबादी थी। परमेश्वर के वचन बाइबल में यिर्मयाह द्वारा लिखित छोटी सी पुस्तक ’विलापगीत’ यिर्मयाह द्वारा यरुशलेम की इस बरबादी पर किए गए शोक और विलाप का वर्णन है।

   यिर्मयाह ने इस पुस्तक को एक विशेष रीति से लिखा है। मूल इब्रानी भाषा की वर्णमाला में, जिसमें यह पुस्तक लिखी गई, 22 अक्षर होते हैं। यिर्मयाह ने इस पुस्तक को कविता के रूप में लिखा, और कविता का हर छंद इब्रानी वर्णनमाला के अक्षर से क्रमबुद्ध रूप में आरंभ होता है। प्रत्येक अक्षर के इस प्रकार क्रमबद्ध रूप में प्रयोग करे जाने से ना केवल पाठकों को इसे स्मरण करना सरल है, वरन यह इस बात का भी सूचक है कि यिर्मयाह का शोक और विलाप अधूरा नहीं वरन आरंभ से अन्त तक संपूर्ण था। इस बात की पुष्टि इससे भी होती है कि यिर्मयाह ने ना केवल यरुशलेम और उसके लोगों की दशा बयान करी, वरन साथ ही अपना अनुभव और अपनी व्यथा भी बयान करी, और उससे भी बढ़कर, इस सारे कठोर अनुभव में उसने परमेश्वर से मिलने वाली शांति और सांत्वना को भी लिखा है। यिर्मयाह ने लिखा, "क्योंकि प्रभु मन से सर्वदा उतारे नहीं रहता, चाहे वह दु:ख भी दे, तौभी अपनी करुणा की बहुतायत के कारण वह दया भी करता है;" (विलापगीत 3:31-32)।

   यह हम मसीही विश्वासियों के लिए एक अद्भुत आशा और मार्गदर्श्न की बात है - हमारा प्रभु, जिस पर हमने विश्वास किया है और जिसे अपना जीवन समर्पित किया है वह हमारे कष्ट और क्लेष में हमारे साथ होता है, हमें संभालता है, हमें सांत्वना देता है। क्या आप भी किसी हृदय विदारक घटना या क्लेष से होकर निकल रहे हैं अथवा आप को निकलना पड़ा है? यिर्मयाह के समान ही, अपने मन के शोक और विलाप को पूरा अवसर दीजिए, साथ ही परमेश्वर की उपस्थिति और बीती समय में उसके द्वारा दिखाई गई भलाईयों को भी स्मरण रखिए। इससे आप उसकी शांति तथा सांत्वना को भी अनुभव करने पाएंगे और भविषय के लिए आशावान भी बने रहेंगे। - डेनिस फिशर


परमेश्वर आज हमारे हृदयों को हमारे आँसुओं से धुल लेने देता है जिससे आते सुख और आनन्द के लिए वे साफ रहें।

क्योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्‍लेश हमारे लिये बहुत ही महत्‍वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है। - 2 कुरिन्थियों 4:17

बाइबल पाठ: विलापगीत 3:22-33
Lamentations 3:22 हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है। 
Lamentations 3:23 प्रति भोर वह नई होती रहती है; तेरी सच्चाई महान है। 
Lamentations 3:24 मेरे मन ने कहा, यहोवा मेरा भाग है, इस कारण मैं उस में आशा रखूंगा। 
Lamentations 3:25 जो यहोवा की बाट जोहते और उसके पास जाते हैं, उनके लिये यहोवा भला है। 
Lamentations 3:26 यहोवा से उद्धार पाने की आशा रख कर चुपचाप रहना भला है। 
Lamentations 3:27 पुरुष के लिये जवानी में जूआ उठाना भला है। 
Lamentations 3:28 वह यह जान कर अकेला चुपचाप रहे, कि परमेश्वर ही ने उस पर यह बोझ डाला है; 
Lamentations 3:29 वह अपना मुंह धूल में रखे, क्या जाने इस में कुछ आशा हो; 
Lamentations 3:30 वह अपना गाल अपने मारने वाले की ओर फेरे, और नामधराई सहता रहे। 
Lamentations 3:31 क्योंकि प्रभु मन से सर्वदा उतारे नहीं रहता, 
Lamentations 3:32 चाहे वह दु:ख भी दे, तौभी अपनी करुणा की बहुतायत के कारण वह दया भी करता है; 
Lamentations 3:33 क्योंकि वह मनुष्यों को अपने मन से न तो दबाता है और न दु:ख देता है।

एक साल में बाइबल: 
  • विलापगीत 3-5 
  • इब्रानियों 10:19-39


बुधवार, 13 नवंबर 2013

हम जो हैं


   एक स्थानीय अस्पताल में अपने नियमित चिकित्सा जाँच किए जाने की प्रतीक्षा करते हुए मेरा ध्यान वहाँ दीवार पर लगे क्रूस पर चढ़ाए हुए प्रभु यीशु मसीह के चित्र पर गया। थोड़ी देर बाद, जाँच से पहले एक नर्स ने मेरे फॉर्म भरते और जाँच संबंधी कागज़ तैयार करते हुए मुझसे अनेक प्रश्न पूछे, जिनमें से एक था, "क्या आपकी कोई आत्मिक आवश्यकताएं हैं जिनके बारे में आप हमारे पादरी से चर्चा चाहेंगे?" मैंने कहा कि वर्तमान संसार के संदर्भ में मुझे उनका यह प्रश्न पूछना अच्छा लगा। उस नर्स ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया कि हम मसीही विश्वास पर आधारित और संचालित अस्पताल हैं और यह करना हमारी सेवकाई का एक भाग है। मैं प्रभावित हुआ कि आज के बहुवादी और धर्मनिर्पेक्ष धारणाओं को मान्यता देने वाले संसार में भी ऐसे लोग हैं जो वह दिखाने में हिचकिचाते नहीं हैं जो वो हैं।

   प्रेरित पतरस ने प्रथम सदी के मसीही विश्वासियों को ढ़ाढ़स दिया, उन्हें जो मसीही विश्वास के कारण उन पर आए सताव के कारण घर-बार छोड़कर भागने और तित्तर-बित्तर हो जाने को बाध्य हो गए थे, कि सच्चाई के कारण क्लेष उठाना भी उनके लिए आशीष का कारण है। अपनी पत्री में पतरस ने उन्हें लिखा: "और यदि तुम धर्म के कारण दुख भी उठाओ, तो धन्य हो; पर उन के डराने से मत डरो, और न घबराओ। पर मसीह को प्रभु जान कर अपने अपने मन में पवित्र समझो, और जो कोई तुम से तुम्हारी आशा के विषय में कुछ पूछे, तो उसे उत्तर देने के लिये सर्वदा तैयार रहो, पर नम्रता और भय के साथ" (1 पतरस 3:14-15)।

   जैसे उस अस्पताल की नर्स ने बिना झिझके अपने विश्वास को व्यक्त किया, वैसे ही हम मसीही विश्वासी भी अपने विश्वास को बिना हिचकिचाए बयान कर सकते हैं। यदि इस कारण लोग हमसे अनुचित व्यवहार करें या हमारी आलोचना करें तो हमें नम्रता और आदर के साथ ही उन्हें अपना प्रत्युत्तर देना चाहिए। हम जो हैं उसके लिए हमें कभी भयभीत होने या शर्मिंदा होने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि हमारा परमेश्वर सदा हमारे साथ है। - डेविड मैक्कैस्लैंड


मसीह के कार्य को कष्ट देने के बजाए भला है कि मसीह के कार्य के लिए कष्ट उठाना।

फिर यदि मसीह के नाम के लिये तुम्हारी निन्‍दा की जाती है, तो धन्य हो; क्योंकि महिमा का आत्मा, जो परमेश्वर का आत्मा है, तुम पर छाया करता है। - 1 पतरस 4:14

बाइबल पाठ: 1 पतरस 3:8-17
1 Peter 3:8 निदान, सब के सब एक मन और कृपामय और भाईचारे की प्रीति रखने वाले, और करूणामय, और नम्र बनो। 
1 Peter 3:9 बुराई के बदले बुराई मत करो; और न गाली के बदले गाली दो; पर इस के विपरीत आशीष ही दो: क्योंकि तुम आशीष के वारिस होने के लिये बुलाए गए हो। 
1 Peter 3:10 क्योंकि जो कोई जीवन की इच्छा रखता है, और अच्‍छे दिन देखना चाहता है, वह अपनी जीभ को बुराई से, और अपने होंठों को छल की बातें करने से रोके रहे। 
1 Peter 3:11 वह बुराई का साथ छोड़े, और भलाई ही करे; वह मेल मिलाप को ढूंढ़े, और उस के यत्‍न में रहे। 
1 Peter 3:12 क्योंकि प्रभु की आंखे धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान उन की बिनती की ओर लगे रहते हैं, परन्तु प्रभु बुराई करने वालों के विमुख रहता है।
1 Peter 3:13 और यदि तुम भलाई करने में उत्तेजित रहो तो तुम्हारी बुराई करने वाला फिर कौन है? 
1 Peter 3:14 और यदि तुम धर्म के कारण दुख भी उठाओ, तो धन्य हो; पर उन के डराने से मत डरो, और न घबराओ। 
1 Peter 3:15 पर मसीह को प्रभु जान कर अपने अपने मन में पवित्र समझो, और जो कोई तुम से तुम्हारी आशा के विषय में कुछ पूछे, तो उसे उत्तर देने के लिये सर्वदा तैयार रहो, पर नम्रता और भय के साथ। 
1 Peter 3:16 और विवेक भी शुद्ध रखो, इसलिये कि जिन बातों के विषय में तुम्हारी बदनामी होती है उनके विषय में वे, जो तुम्हारे मसीही अच्‍छे चालचलन का अपमान करते हैं लज्ज़ित हों। 
1 Peter 3:17 क्योंकि यदि परमेश्वर की यही इच्छा हो, कि तुम भलाई करने के कारण दुख उठाओ, तो यह बुराई करने के कारण दुख उठाने से उत्तम है।

एक साल में बाइबल: 
  • विलापगीत 1-2 
  • इब्रानियों 10:1-18


मंगलवार, 12 नवंबर 2013

पालनहारा परमेश्वर


   रॉबिन और स्टीव परमर्श देने का कार्य करते हैं, यही उनकी मसीही सेवकाई भी है; किंतु इससे उन्हें आमदानी बहुत कम मिलती है। हाल ही में परिवार में उठी एक समस्य के कारण अपनी पुरानी कार में उन्हें 5,000 मील की यात्रा करनी पड़ी। समस्या से निपटने के बाद वापस लौटते हुए, घर से लगभग 2,000 मील दूर उनकी कार से आवाज़ें आने लगीं और वह चलने में दिक्कत देने लगी। उन्होंने गाड़ी को जब एक कार ठीक करने वाले मिस्त्री को दिखाया तो उत्तर मिला, इसका अब कुछ नहीं हो सकता, पूरा इंजन ही बदलना पड़ेगा। उनके पास नया इंजन डलवाने के लिए पैसे नहीं थे इसलिए बड़ी कठिनाई से वे जैसे-तैसे उस गाड़ी में घर तक तो लौट आए। तब उन्हें एक "कार मिशनरी" का पता चला जो मसीही सेवकाई में लगे लोगों कि सहायता करता था। उसने उनकी कार देखी और उसे अचंभा हुआ कि वह वापस घर तक आ गई थी। लेकिन उससे भी अधिक अचंभा स्टीव और रॉबिन को हुआ जब उस "कार मिशनरी" ने उनसे बिना कोई पैसा लिए उनकी गाड़ी में नया इंजन लगवाने का प्रस्ताव दिया। यदि उन्होंने मार्ग में नया इंजन डलवाने का प्रयास किया होता तो व्यर्थ ही, उतने पैसे ना होते हुए भी उन्हें हज़ारों डॉलर का खर्चा उठाना पड़ जाता। परमेश्वर ने उनके लिए कुछ अलग ही इन्तज़ाम पहले ही कर रखा था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में जब इस्त्राएली मिस्त्र की गुलामी से निकल कर परमेश्वर की अगुवाई में वाचा के देश कनान की ओर चले तो उन्हें मरुभूमि से होकर जाना पड़ा। तीन दिन कि यात्रा के बाद उनका पानी समाप्त हो गया, और उन्हें यह भी पता नहीं था कि अब पानी कहाँ से मिलेगा। लेकिन परमेश्वर समस्या भी जानता था और उसका समाधान भी। जिस मार्ग से वे इस्त्राएली जा रहे थे वहाँ दो जगह, मारा और एलीम पर, पानी के सोते थे और परमेश्वर उन्हें वहीं लेकर गया। उन स्थानों पर ना केवल उन्हें पानी मिला वरन विश्राम करने के लिए अच्छा स्थान भी मिला।

   चाहे हमारी समस्या गंभीर और परिस्थिति विकट लगे, हम मसीही विश्वासियों को परमेश्वर का यह आश्वासन है कि परमेश्वर हमारी अगुवाई कर रहा है। वह हमारा पालनहारा परमेश्वर है, हमारी यात्रा के मार्ग और मार्ग की हर बात को तथा मार्ग के लिए हमारी प्रत्येक आवश्यकता को वह भली-भांति जानता है। जब आवश्यकता आन पड़ेगी तब हमारा पालनहारा परमेश्वर उसका समाधान भी करेगा। - डेव ब्रैनन


असंभव परिस्थितियाँ परमेश्वर पर हमारे विश्वास को दृढ़ करने के अवसर होते हैं।

तब मूसा ने यहोवा की दोहाई दी, और यहोवा ने उसे एक पौधा बतला दिया, जिसे जब उसने पानी में डाला, तब वह पानी मीठा हो गया। - निर्गमन 15:25

बाइबल पाठ: निर्गमन 15:22-27
Exodus 15:22 तब मूसा इस्राएलियों को लाल समुद्र से आगे ले गया, और वे शूर नाम जंगल में आए; और जंगल में जाते हुए तीन दिन तक पानी का सोता न मिला। 
Exodus 15:23 फिर मारा नाम एक स्थान पर पहुंचे, वहां का पानी खारा था, उसे वे न पी सके; इस कारण उस स्थान का नाम मारा पड़ा। 
Exodus 15:24 तब वे यह कहकर मूसा के विरुद्ध बकझक करने लगे, कि हम क्या पीएं? 
Exodus 15:25 तब मूसा ने यहोवा की दोहाई दी, और यहोवा ने उसे एक पौधा बतला दिया, जिसे जब उसने पानी में डाला, तब वह पानी मीठा हो गया। वहीं यहोवा ने उनके लिये एक विधि और नियम बनाया, और वहीं उसने यह कहकर उनकी परीक्षा की, 
Exodus 15:26 कि यदि तू अपने परमेश्वर यहोवा का वचन तन मन से सुने, और जो उसकी दृष्टि में ठीक है वही करे, और उसकी आज्ञाओं पर कान लगाए, और उसकी सब विधियों को माने, तो जितने रोग मैं ने मिस्रियों पर भेजा है उन में से एक भी तुझ पर न भेजूंगा; क्योंकि मैं तुम्हारा चंगा करने वाला यहोवा हूं। 
Exodus 15:27 तब वे एलीम को आए, जहां पानी के बारह सोते और सत्तर खजूर के पेड़ थे; और वहां उन्होंने जल के पास डेरे खड़े किए।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 51-52 
  • इब्रानियों 9