ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

गुरुवार, 20 फ़रवरी 2014

भय


   अमेरीकी राष्ट्रपति फ्रैंक्लिन रूज़वेल्ट ने 1933 में अपने राष्ट्रपतिकाल के प्रथम एवं उद्घाटन भाषण में कहा, "हमें केवल एक ही बात से डरना है और वह है स्वयं डर।" रूज़वेल्ट भारी आर्थिक मन्दी की भयानक मार से त्रस्त राष्ट्र में एक आशा की किरण जलाना चाह रहे थे, लोगों के अन्दर की निराशा को निकालकर एक सकारात्मक रवैया जगाना चाह रहे थे।

   भय हमारे जीवनों में तब दिखाई देता है जब हमें लगता है कि हम कुछ गंवा देंगे। यह गंवाना हमारी दौलत, सेहत, सम्मान, पदवी, सुरक्षा, परिवार, मित्र इत्यादि किसी का भी हो सकता है। भय हमारे अन्दर बसी उस इच्छा को प्रगट करता है जिसके अन्तर्गत हम अपने जीवन में महत्वपूर्ण बातों को अपने ही द्वारा बचा कर रखने का प्रयास करते हैं, बजाए इसके कि उनकी सुरक्षा और नियंत्रण परमेश्वर के हाथों में सौंप दें। जब भय हम पर हावी हो जाता है तो हमें भावनात्मक रीति से अपंग और आत्मिक रीति से दुर्बल कर देता है। भय की स्थिति में हम दूसरों को प्रभु यीशु के बारे में बताने से हिचकिचाते हैं, अपने जीवन और संसाधन दूसरों की भलाई के लिए लगाने से कतराते हैं, किसी नए कार्य को आरंभ करने से डरते हैं। एक भयभीत आत्मा का शत्रु शैतान द्वारा आहत होने की संभावना कहीं अधिक होती है; ऐसे में शैतान हमें उकसाता है कि हम परमेश्वर और उसके वचन बाइबल पर अपने विश्वास के साथ समझौता करें, परमेश्वर पर भरोसा रख कर उसकी बाट जोहने की बजाए, समस्याओं का समाधान अपने ही हाथों में लेकर अपनी सीमित समझ और सीमित संसाधनों के द्वारा उन्हें सुलझाने के प्रयास करें; क्योंकि वह जानता है कि ऐसा करने में हम अवश्य ही कोई ना कोई गलती करेंगे और उसके फंदों में फंस जाएंगे।

   भय का समाधान है अपने सृष्टिकर्ता परमेश्वर पर विश्वास को बनाए रखना। जब हम उसकी उपस्थिति, सामर्थ, सुरक्षा और संसाधनों की वास्तविकता में विश्वास रख कर जीवन व्यतीत करेंगे तब भय का कोई स्थान नहीं होगा और हम आनन्द के साथ जीवन व्यतीत करते हुए भजनकार के साथ कहने पाएंगे, "मैं यहोवा के पास गया, तब उसने मेरी सुन ली, और मुझे पूरी रीति से निर्भय किया" (भजन 34:4)। - जो स्टोवैल


भयभीत आत्मा का उपाय है परमेश्वर प्रभु यीशु पर संपूर्ण भरोसा।

यहोवा परमेश्वर मेरी ज्योति और मेरा उद्धार है; मैं किस से डरूं? यहोवा मेरे जीवन का दृढ़ गढ़ ठहरा है, मैं किस का भय खाऊं? - भजन 27:1

बाइबल पाठ: भजन 34:1-10
Psalms 34:1 मैं हर समय यहोवा को धन्य कहा करूंगा; उसकी स्तुति निरन्तर मेरे मुख से होती रहेगी। 
Psalms 34:2 मैं यहोवा पर घमण्ड करूंगा; नम्र लोग यह सुनकर आनन्दित होंगे। 
Psalms 34:3 मेरे साथ यहोवा की बड़ाई करो, और आओ हम मिलकर उसके नाम की स्तुति करें। 
Psalms 34:4 मैं यहोवा के पास गया, तब उसने मेरी सुन ली, और मुझे पूरी रीति से निर्भय किया। 
Psalms 34:5 जिन्होंने उसकी ओर दृष्टि की उन्होंने ज्योति पाई; और उनका मुंह कभी काला न होने पाया। 
Psalms 34:6 इस दीन जन ने पुकारा तब यहोवा ने सुन लिया, और उसको उसके सब कष्टों से छुड़ा लिया।
Psalms 34:7 यहोवा के डरवैयों के चारों ओर उसका दूत छावनी किए हुए उन को बचाता है। 
Psalms 34:8 परखकर देखो कि यहोवा कैसा भला है! क्या ही धन्य है वह पुरूष जो उसकी शरण लेता है। 
Psalms 34:9 हे यहोवा के पवित्र लोगो, उसका भय मानो, क्योंकि उसके डरवैयों को किसी बात की घटी नहीं होती! 
Psalms 34:10 जवान सिंहों तो घटी होती और वे भूखे भी रह जाते हैं; परन्तु यहोवा के खोजियों को किसी भली वस्तु की घटी न होवेगी।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 13-16


बुधवार, 19 फ़रवरी 2014

आतुर और तैयार


   प्रसिद्ध प्रचारक एवं धर्मशास्त्री हेल्मट थिएलिके (1908-1986) को जर्मनी में नाट्ज़ी शासन के दौरान 1930 तथा 1940 के दशकों में बहुत विरोध का सामना करना पड़ा, लेकिन फिर भी इन कठिन और कष्टदायक समयों में वे मसीह यीशु में परमेश्वर की उपस्थिति और सामर्थ्य का प्रचार करने से थमे नहीं। उनके विषय में विद्वान रॉबर्ट स्मिथ ने कहा कि अपने प्रचार में थिएलिके ने वर्तमान के मुद्दों और समस्याओं को संबोधित करते हुए अपने समक्ष सदा एक प्रश्न रखा, "इस विषय पर परमेश्वर की ओर से क्या कोई वचन है?"

   क्या यही प्रश्न आज हम सबके समक्ष नहीं होना चाहिए? क्योंकि जो परमेश्वर ने कहा है वह ही हमें सामर्थ देगा और हमारा मार्गदर्शन करेगा तथा कठिनाईयों और परिस्थितियों से होकर निकलने में हमारी सहायता करेगा।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के 1 शमूएल 3 अध्याय में हम एक ऐसे काल का उल्लेख पाते हैं जब "परमेश्वर का वचन दुर्लभ था" (पद 1)। जब परमेश्वर ने बालक शमूएल से बात करी, तब पहले तो शमूएल ने समझा कि वृद्ध पुरोहित एली, जिसके साथ वह रहता था, वह उससे बात करना चाह रहा है। एली ने ही सारी परिस्थिति समझ कर शमूएल को समझाया कि जब पुनः उसे परमेश्वर का स्वर सुनाई दे तो वह कहे, "हे यहोवा कह, क्योंकि तेरा दास सुन रहा है" (पद 9)। शमूएल ने परमेश्वर की आवाज़ को सुना और उसकी बात पर विश्वास करना तथा उसे मानना सीखा, और वह परमेश्वर का निडर और विश्वासयोग्य सेवक बन सका, तथा, "...यहोवा ने अपने आप को शीलो में शमूएल पर अपने वचन के द्वारा प्रगट किया" (पद 21)।

   जब कभी हम परमेश्वर के अध्ययन के लिए बैठें, या परमेश्वर के वचन पर आधारित कोई प्रचार सुनें, या प्रार्थना में परमेश्वर के सामने आएं, तो हमारे लिए बहुत अच्छा होगा कि हम परमेश्वर से कहें, "हे प्रभु यीशु मुझसे बोलिए। मैं सुनने के लिए आतुर और आज्ञा मानने के लिए तैयार हूँ।" - डेविड मैक्कैसलैण्ड


परमेश्वर अपने वचन में हो कर उन से बोलता है जो सच्चे मन से उसकी सुनने और मानने को तैयार रहते हैं।

मैं ने तेरे वचन को अपने हृदय में रख छोड़ा है, कि तेरे विरुद्ध पाप न करूं। - भजन 119:11 

बाइबल पाठ: 1 शमूएल 3:1-10
1 Samuel 3:1 और वह बालक शमूएल एली के साम्हने यहोवा की सेवा टहल करता था। और उन दिनों में यहोवा का वचन दुर्लभ था; और दर्शन कम मिलता था। 
1 Samuel 3:2 और उस समय ऐसा हुआ कि (एली की आंखे तो धुंघली होने लगी थीं और उसे न सूझ पड़ता था) जब वह अपने स्थान में लेटा हुआ था, 
1 Samuel 3:3 और परमेश्वर का दीपक अब तक बुझा नहीं था, और शमूएल यहोवा के मन्दिर में जहाँ परमेश्वर का सन्दूक था लेटा था; 
1 Samuel 3:4 तब यहोवा ने शमूएल को पुकारा; और उसने कहा, क्या आज्ञा! 
1 Samuel 3:5 तब उसने एली के पास दौड़कर कहा, क्या आज्ञा, तू ने तो मुझे पुकारा है। वह बोला, मैं ने नहीं पुकारा; फिर जा लेट रह। तो वह जा कर लेट गया। 
1 Samuel 3:6 तब यहोवा ने फिर पुकार के कहा, हे शमूएल! शमूएल उठ कर एली के पास गया, और कहा, क्या आज्ञा, तू ने तो मुझे पुकारा है। उसने कहा, हे मेरे बेटे, मैं ने नहीं पुकारा; फिर जा लेट रह। 
1 Samuel 3:7 उस समय तक तो शमूएल यहोवा को नहीं पहचानता था, और न तो यहोवा का वचन ही उस पर प्रगट हुआ था। 
1 Samuel 3:8 फिर तीसरी बार यहोवा ने शमूएल को पुकारा। और वह उठके एली के पास गया, और कहा, क्या आज्ञा, तू ने तो मुझे पुकारा है। तब एली ने समझ लिया कि इस बालक को यहोवा ने पुकारा है। 
1 Samuel 3:9 इसलिये एली ने शमूएल से कहा, जा लेट रहे; और यदि वह तुझे फिर पुकारे, तो तू कहना, कि हे यहोवा, कह, क्योंकि तेरा दास सुन रहा है तब शमूएल अपने स्थान पर जा कर लेट गया। 
1 Samuel 3:10 तब यहोवा आ खड़ा हुआ, और पहिले की नाईं पुकारा, शमूएल! शमूएल! शमूएल ने कहा, कह, क्योंकि तेरा दास सुन रहा है।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 10-12


मंगलवार, 18 फ़रवरी 2014

प्रश्न


   जब मैं पढ़ा रही होती हूँ तब अपने शिषयों को प्रोत्साहित करती हूँ कि वे प्रश्न पूछें। ऐसा करके मैं उन्हें यह नहीं कह रही हूँ कि वे मुझे चुनौती दें; मैं उन्हें इस बात के लिए प्रोत्साहित कर रही हूँ कि वे अपनी जिज्ञासाओं को शांत करें और जो नहीं समझ पाए हैं उसे समझ लें। क्योंकि स्वभाव से ही हम उसे अधिक महत्व देते हैं जो हम स्वयं जानना चाहते हैं बजाए उसके जो दूसरे हमें बताना चाहते हैं इसलिए कुछ शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बजाए दूसरों के सामने केवल बोलते रहने के, प्रश्न-उत्तर के द्वारा एक शिक्षक अधिक अच्छी रीति से पढ़ा सकता है।

   दोनों ही प्रकार की शिक्षाओं का अपना अपना स्थान है, लेकिन परमेश्वर के वचन बाइबल में शिक्षा प्रदान करने का सबसे पहला उदाहरण प्रश्न पूछे जाने के द्वारा का है। मिस्त्र के दासत्व से छुड़ाए जाकर, कनान देश की ओर कूच करने से पहले, परमेश्वर ने मूसा को आज्ञा दी कि वह एक ऐसी रीति, अर्थात फसह का पर्व, स्थापित करे जिसमें प्रश्न पूछना स्वाभाविक और महत्वपूर्ण था। यह पर्व व्यसकों को परमेश्वर द्वारा दासत्व से छुड़ाए जाने को स्मरण कराता है और बच्चों को उसके विषय में पूछने को प्रोत्साहित करता है (निर्गमन 12:26)।

   "क्यों" एक खीझ दिलाने वाला प्रश्न हो सकता है, लेकिन यह हमारे लिए अपने विश्वास को बाँटने का भी एक अच्छा अवसर प्रदान करने वाला प्रश्न भी हो सकता है (1 पतरस 3:15)। जब कोई प्रश्न पूछे तब खिसियाने के बजाए हमें धन्यवादी होना चाहिए कि उनमें जानने और सीखने की जिज्ञासा है, और हमें धैर्य, सहिषुण्ता और प्रेम के साथ उनके प्रश्नों का उत्तर देना चाहिए, यह स्मरण रखते हुए कि हमारे शब्दों के अनन्तकालीन परिणाम भी हो सकते हैं।

   प्रश्नों को नज़रन्दाज़ ना करें, उन्हें अवसर जान कर उनका सदुपयोग करें। - जूली ऐकैरमैन लिंक


सच्चे प्रश्न विश्वास स्थापित करने और बढ़ाने का माध्यम हो सकते हैं।

पर मसीह को प्रभु जान कर अपने अपने मन में पवित्र समझो, और जो कोई तुम से तुम्हारी आशा के विषय में कुछ पूछे, तो उसे उत्तर देने के लिये सर्वदा तैयार रहो, पर नम्रता और भय के साथ। - 1 पतरस 3:15 

बाइबल पाठ: निर्गमन 12:1-13
Exodus 12:1 फिर यहोवा ने मिस्र देश में मूसा और हारून से कहा, 
Exodus 12:2 कि यह महीना तुम लोगों के लिये आरम्भ का ठहरे; अर्थात वर्ष का पहिला महीना यही ठहरे। 
Exodus 12:3 इस्राएल की सारी मण्डली से इस प्रकार कहो, कि इसी महीने के दसवें दिन को तुम अपने अपने पितरों के घरानों के अनुसार, घराने पीछे एक एक मेम्ना ले रखो। 
Exodus 12:4 और यदि किसी के घराने में एक मेम्ने के खाने के लिये मनुष्य कम हों, तो वह अपने सब से निकट रहने वाले पड़ोसी के साथ प्राणियों की गिनती के अनुसार एक मेम्ना ले रखे; और तुम हर एक के खाने के अनुसार मेम्ने का हिसाब करना। 
Exodus 12:5 तुम्हारा मेम्ना निर्दौष और पहिले वर्ष का नर हो, और उसे चाहे भेड़ों में से लेना चाहे बकरियों में से। 
Exodus 12:6 और इस महीने के चौदहवें दिन तक उसे रख छोड़ना, और उस दिन गोधूलि के समय इस्राएल की सारी मण्डली के लोग उसे बलि करें। 
Exodus 12:7 तब वे उसके लोहू में से कुछ ले कर जिन घरों में मेम्ने को खाएंगे उनके द्वार के दोनों अलंगों और चौखट के सिरे पर लगाएं। 
Exodus 12:8 और वे उसके मांस को उसी रात आग में भूंजकर अखमीरी रोटी और कड़वे सागपात के साथ खाएं। 
Exodus 12:9 उसको सिर, पैर, और अतडिय़ों समेत आग में भूंजकर खाना, कच्चा वा जल में कुछ भी पकाकर न खाना। 
Exodus 12:10 और उस में से कुछ बिहान तक न रहने देना, और यदि कुछ बिहान तक रह भी जाए, तो उसे आग में जला देना। 
Exodus 12:11 और उसके खाने की यह विधि है; कि कमर बान्धे, पांव में जूती पहिने, और हाथ में लाठी लिये हुए उसे फुर्ती से खाना; वह तो यहोवा का पर्ब्ब होगा। 
Exodus 12:12 क्योंकि उस रात को मैं मिस्र देश के बीच में से हो कर जाऊंगा, और मिस्र देश के क्या मनुष्य क्या पशु, सब के पहिलौठों को मारूंगा; और मिस्र के सारे देवताओं को भी मैं दण्ड दूंगा; मैं तो यहोवा हूं। 
Exodus 12:13 और जिन घरों में तुम रहोगे उन पर वह लोहू तुम्हारे निमित्त चिन्ह ठहरेगा; अर्थात मैं उस लोहू को देखकर तुम को छोड़ जाऊंगा, और जब मैं मिस्र देश के लोगों को मारूंगा, तब वह विपत्ति तुम पर न पड़ेगी और तुम नाश न होगे।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 7-9


सोमवार, 17 फ़रवरी 2014

शिक्षक


   मेरे पारिवारिक फोटो संग्रह में एक ऐसी फोटो है जहाँ मेरी बेटी, जब वह 4 वर्ष की थी, अपने हाथ में एक छोटी खिलौने वाली हथौड़ी लिए, मेरे साथ हमारे घर की खिड़की की मरम्मत का कार्य करती दिख रही है। उस दिन हम दोनों ने साथ साथ मिलकर घर की मरम्मत का काम किया था, मैं जो जो कर रहा था उसकी वह नकल करती जा रही थी, इस बात में बिलकुल निश्चित कि वह भी घर की मरम्मत में यथासंभव योगदान कर रही है। शायद ही किसी अन्य अवसर पर मुझे काम करने से ऐसा आनन्द आया होगा जैसा इस अवसर पर आया था।

   वह फोटो मुझे स्मरण कराती है कि हमारे बच्चे जो हम अभिभावकों में वार्तालाप और कार्यों में देखते हैं उसी का अनुसरण स्वयं भी करते हैं वैसे ही करते हैं। साथ ही उनके मनों में परमेश्वर की छवि भी हमारे द्वारा ही निर्धारित होती है। यदि हम कठोर और दयारहित होंगे तो सम्भवतः वे परमेश्वर को भी ऐसा ही समझेंगे। यदि हम उन से दूरी बना कर रखते हैं, उनके प्रति असंवेदनशील होते हैं तो उन्हें परमेश्वर भी ऐसा ही प्रतीत होगा। हम अभिभावकों की यह बहुत महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी है कि हम अपने बच्चों के मनों में परमेश्वर कि सही पहचान और छवि बना कर दे सकें, विशेषकर परमेश्वर के निस्वार्थ और बिना किसी शर्त के प्रेम के बारे में।

   अपनी कलपना में मैं यह विचार रख सकता हूँ कि मुझे लेकर मेरे पिता परमेश्वर के पास भी एक ऐसा ही फोटो संग्रह होगा। मैं भी परमेश्वर से सीख रहा हूँ कि जीवन कैसे जीना है, प्रेम कैसे करना है, परमेश्वर को अपने जीवन का अभिन्न अंग कैसे बनाना है। मुझे यह सब सिखा कर परमेश्वर तैयार कर रहा है कि मैं भी इन बातों को दूसरों को सिखाने वाला बन सकूँ (व्यवस्थाविवरण 6:1-7)।

   परमेश्वर हमें ऐसी समझ प्रदान करे कि हम उसे जान कर यह बुद्धिमता दूसरों को भी पहुँचाने-सिखाने वाले अच्छे शिक्षक बन सकें। - रैन्डी किल्गोर


यदि आप परमेश्वर से भलि-भांति सीखेंगे तो अपने बच्चों को भी भलि-भांति सिखाने पाएंगे।

और हे बच्‍चे वालों अपने बच्‍चों को रिस न दिलाओ परन्तु प्रभु की शिक्षा, और चितावनी देते हुए, उन का पालन-पोषण करो। - इफिसियों 6:4

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 6:1-9
Deuteronomy 6:1 यह वह आज्ञा, और वे विधियां और नियम हैं जो तुम्हें सिखाने की तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने आज्ञा दी है, कि तुम उन्हें उस देश में मानो जिसके अधिकारी होने को पार जाने पर हो; 
Deuteronomy 6:2 और तू और तेरा बेटा और तेरा पोता यहोवा का भय मानते हुए उसकी उन सब विधियों और आज्ञाओं पर, जो मैं तुझे सुनाता हूं, अपने जीवन भर चलते रहें, जिस से तू बहुत दिन तक बना रहे। 
Deuteronomy 6:3 हे इस्राएल, सुन, और ऐसा ही करने की चौकसी कर; इसलिये कि तेरा भला हो, और तेरे पितरों के परमेश्वर यहोवा के वचन के अनुसार उस देश में जहां दूध और मधु की धाराएं बहती हैं तुम बहुत हो जाओ। 
Deuteronomy 6:4 हे इस्राएल, सुन, यहोवा हमारा परमेश्वर है, यहोवा एक ही है; 
Deuteronomy 6:5 तू अपने परमेश्वर यहोवा से अपने सारे मन, और सारे जीव, और सारी शक्ति के साथ प्रेम रखना। 
Deuteronomy 6:6 और ये आज्ञाएं जो मैं आज तुझ को सुनाता हूं वे तेरे मन में बनी रहें; 
Deuteronomy 6:7 और तू इन्हें अपने बाल-बच्चों को समझाकर सिखाया करना, और घर में बैठे, मार्ग पर चलते, लेटते, उठते, इनकी चर्चा किया करना। 
Deuteronomy 6:8 और इन्हें अपने हाथ पर चिन्हानी कर के बान्धना, और ये तेरी आंखों के बीच टीके का काम दें। 
Deuteronomy 6:9 और इन्हें अपने अपने घर के चौखट की बाजुओं और अपने फाटकों पर लिखना।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 4-6


रविवार, 16 फ़रवरी 2014

स्थिर और सामर्थी


   क्योंकि मैंने बहुत से लेख और एक पुस्तक जीवन में होने वाली दुर्घटनाओं और उनके नुकसान विषय पर लिखी है इसलिए मेरा परिचय कई ऐसे लोगों के साथ हो गया है जिन्हें अपनी जीवन यात्रा में नुकसानों को झेलना पड़ा है या झेल रहे हैं। ऐसी ही मेरी एक नई परिचित है एक महिला जिसकी 21 वर्षीय पुत्री की आकस्मक मृत्यु हो गई जिससे उसके पैरों तले मानों ज़मीन ही खिसक गई। उस महिला ने मुझ से कहा, "इस दुर्घटना के कारण मुझे ऐसा प्रतीत हुआ जैसे मैं सामन्य जीवन से निशकासित कर दी गई हूँ, कुचल दी गई हूँ; मेरी आत्मा में अत्यन्त वेदना है"।

   यह सच है कि हमारे जीवन में आने वाले ये नुकसान - किसी प्रीय जन की मृत्यु, कोई बच्चा जो परिवार और परमेश्वर को छोड़ कर चला जाए, कोई शारीरिक अथवा मानसिक आघात आदि हमें बहुत आहत कर सकते हैं। लेकिन मैंने और मेरे समान अन्य मसीही विश्वासियों ने भी अपने जीवन के कटु अनुभवों से सीखा है ऐसे में भी हमारा परमेश्वर हमारे साथ ही होता है, हमारे दुख में दुखी होता है और हमें उस परिस्थिति पर जयवन्त होने की सामर्थ देता है और हमारे लिए उस से भी कुछ भला ही उत्पन्न करता है। इसलिए हम भजनकार के साथ कह सकते हैं कि, "परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक" (भजन 46:1)।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के नायकों के जीवन में हम इस बात को बहुधा पाते हैं। उन सभी के लिए जीवन कभी सरल नहीं था, उन्हें नाम और शौहरत आसानी से नहीं मिली; दुख, कठिनाईयाँ, विपरीत परिस्थितियाँ उनके जीवन का अभिन्न अंग रहीं लेकिन इन सब में उन्होंने परमेश्वर की निकटता को अनुभव किया और परमेश्वर की सामर्थ को प्राप्त किया जो उन्हें इन सभी परिस्थितियों से पार निकालती ले गई और अन्ततः वे इन सब अनुभवों और इन में होकर मिली आशीषों के लिए परमेश्वर का धन्यवाद करने पाए, परमेश्वर पर उन का भरोसा और दृढ़ ही हो गया।

   जब जीवन अनायास ही पैरों तले ज़मीन खिसका दे, तो ऊपर परमेश्वर की ओर देखें। वह सब देख रहा है, उसकी नज़र सब पर बनी रहती है, वह सब जानता और समझता है। यह सरल तो नहीं होगा लेकिन यह बात विश्वासयोग्य है - अपना हाथ उसकी ओर बढ़ा दीजिए, वह आपको उठाकर पुनः खड़ा करेगा, फिर स्थिर करेगा, फिर सामर्थ देगा। - डेव ब्रैनन


पृथ्वी के दुख जैसे स्वर्ग में अनुभव होते हैं उससे बढ़कर और कहीं नहीं होते।

यहोवा पिसे हुओं के लिये ऊंचा गढ़ ठहरेगा, वह संकट के समय के लिये भी ऊंचा गढ़ ठहरेगा। - भजन 9:9

बाइबल पाठ: भजन 116:1-6
Psalms 116:1 मैं प्रेम रखता हूं, इसलिये कि यहोवा ने मेरे गिड़गिड़ाने को सुना है। 
Psalms 116:2 उसने जो मेरी ओर कान लगाया है, इसलिये मैं जीवन भर उसको पुकारा करूंगा। 
Psalms 116:3 मृत्यु की रस्सियां मेरे चारों ओर थीं; मैं अधोलोक की सकेती में पड़ा था; मुझे संकट और शोक भोगना पड़ा। 
Psalms 116:4 तब मैं ने यहोवा से प्रार्थना की, कि हे यहोवा बिनती सुन कर मेरे प्राण को बचा ले! 
Psalms 116:5 यहोवा अनुग्रहकारी और धर्मी है; और हमारा परमेश्वर दया करने वाला है। 
Psalms 116:6 यहोवा भोलों की रक्षा करता है; जब मैं बलहीन हो गया था, उसने मेरा उद्धार किया।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 1-3


शनिवार, 15 फ़रवरी 2014

सन्तुष्टि


   मेरी बेटी अब बोलने लगी है, तथा उसने एक शब्द सीख लिया है जो उसे बहुत प्रीय है - ’और’। वो हर बात जो उसे पसन्द है उसके लिए वह कहती है ’और’; जैसे, ’और’ कहते हुए वह टोस्ट और जैम की ओर इशारा करेगी, मेरे पति ने हाल ही में उसकी गुल्लक में डालने के लिए उसे कुछ सिक्के दिए तो उसने हाथ फैला कर उनसे कहा ’और’। एक प्रातः जब मेरे पति काम के लिए निकले तो वो पीछे से पुकारने लगी ’और पापा’।

   जैसे मेरी वह छोटी बेटी करती है वैसे ही हम व्यसक भी प्रायः अपने चारों ओर की वस्तुओं या किसी अन्य के पास की चीज़ों को देखकर कहते रहते हैं, ’और’; दुर्भाग्यवश हमारे लिए पर्याप्त कभी पर्याप्त नहीं होता, हमें भी हर चीज़ अधिक, और अधिक ही चाहिए होती है। सांसारिक बातों की इस लालसा और लालच की मनसा से बच पाने की सामर्थ केवल प्रभु यीशु में होकर ही हमें मिल सकती है। जैसा प्रेरित पौलुस ने अपने अनुभव के आधार पर कहा, "यह नहीं कि मैं अपनी घटी के कारण यह कहता हूं; क्योंकि मैं ने यह सीखा है कि जिस दशा में हूं, उसी में सन्‍तोष करूं" (फिलिप्पियों 4:11) वैसे ही हमारे लिए भी यही सामर्थ पौलुस के समान ही उप्लब्ध है।

   जब पौलुस कहता है कि "मैं ने यह सीखा है" तो इससे मैं समझती हूँ कि पौलुस के लिए परिस्थितियाँ सरल अथवा सहज नहीं थी। हम जानते हैं कि उसे अपने मसीही विश्वास के जीवन में अनेक कठिनाईयों का सामना करना पड़ा; यह सन्तोष करना सीखने के लिए उसे अभ्यास आवश्यक था। जब हम पौलुस के जीवन को परमेश्वर के वचन बाइबल में देखते हैं तो पाते हैं कि उसके जीवन में अनेक उतार-चढ़ाव आए; वह कठिनाईयों में रहा, सांप से भी डसा गया, झूठे आरोपों का शिकार हुआ, मारा-पीटा भी गया, तिरस्कृत भी हुआ इत्यादि लेकिन वह आत्माओं को बचाने और मसीही विश्वासियों की मण्डलियाँ स्थापित करने में लगा ही रहा और इन सब कठिनाईयों में कहता रहा कि उसकी आत्मा की तृप्ति का स्त्रोत प्रभु यीशु ही है। उसने प्रभु यीशु के सन्दर्भ में कहा, "जो मुझे सामर्थ देता है उस में मैं सब कुछ कर सकता हूं" (फिलिप्पियों 4:13)। प्रभु यीशु ने उसे वह आत्मिक बल दिया था जो उसे कठिनाईयों के समयों में संभालता था और बहुतायत तथा समृद्धि के समयों के फंदों से बच कर निकलना भी सिखाता था।

   यदि आप भी अपने जीवन में ’और’, ’और’, ’और’ की लालसा को कार्य करते हुए पाते हैं तो पौलुस के उदाहरण पर ध्यान कीजिए और स्मरण रखिए कि वास्तविक सन्तुष्टि प्रभु यीशु में अधिकाई से बने रहने में ही है ना कि सांसारिक वस्तुओं की बहुतायत के होने से। - जेनिफर बेनसन शुल्ट


सच्ची सन्तुष्टि इस नश्वर संसार की किसी वस्तु भी वस्तु पर निर्भर ना रहने में है।

और उस[प्रभु यीशु]ने उन से कहा, चौकस रहो, और हर प्रकार के लोभ से अपने आप को बचाए रखो: क्योंकि किसी का जीवन उस की संपत्ति की बहुतायत से नहीं होता। - लूका 12:15

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 4:10-20
Philippians 4:10 मैं प्रभु में बहुत आनन्‍दित हूं कि अब इतने दिनों के बाद तुम्हारा विचार मेरे विषय में फिर जागृत हुआ है; निश्‍चय तुम्हें आरम्भ में भी इस का विचार था, पर तुम्हें अवसर न मिला। 
Philippians 4:11 यह नहीं कि मैं अपनी घटी के कारण यह कहता हूं; क्योंकि मैं ने यह सीखा है कि जिस दशा में हूं, उसी में सन्‍तोष करूं। 
Philippians 4:12 मैं दीन होना भी जानता हूं और बढ़ना भी जानता हूं: हर एक बात और सब दशाओं में तृप्‍त होना, भूखा रहना, और बढ़ना-घटना सीखा है। 
Philippians 4:13 जो मुझे सामर्थ देता है उस में मैं सब कुछ कर सकता हूं। 
Philippians 4:14 तौभी तुम ने भला किया, कि मेरे क्‍लेश में मेरे सहभागी हुए। 
Philippians 4:15 और हे फिलप्‍पियो, तुम आप भी जानते हो, कि सुसमाचार प्रचार के आरम्भ में जब मैं ने मकिदुनिया से कूच किया तब तुम्हें छोड़ और किसी मण्‍डली ने लेने देने के विषय में मेरी सहयता नहीं की। 
Philippians 4:16 इसी प्रकार जब मैं थिस्सलुनीके में था; तब भी तुम ने मेरी घटी पूरी करने के लिये एक बार क्या वरन दो बार कुछ भेजा था। 
Philippians 4:17 यह नहीं कि मैं दान चाहता हूं परन्तु मैं ऐसा फल चाहता हूं, जो तुम्हारे लाभ के लिये बढ़ता जाए। 
Philippians 4:18 मेरे पास सब कुछ है, वरन बहुतायत से भी है: जो वस्तुएं तुम ने इपफ्रुदीतुस के हाथ से भेजी थीं उन्हें पाकर मैं तृप्‍त हो गया हूं, वह तो सुगन्‍ध और ग्रहण करने के योग्य बलिदान है, जो परमेश्वर को भाता है। 
Philippians 4:19 और मेरा परमेश्वर भी अपने उस धन के अनुसार जो महिमा सहित मसीह यीशु में है तुम्हारी हर एक घटी को पूरी करेगा। 
Philippians 4:20 हमारे परमेश्वर और पिता की महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 34-36


शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2014

मित्र


   सिसरो रोमी साम्राज्य का एक महानतम दार्शनिक था। वह एक कुशल वक्ता, अधिवक्ता, राजनैतिज्ञ, भाषा ज्ञानी और लेखक था। आज भी उसके व्यावाहारिक ज्ञान और स्पष्ट कथनों के लिए उसे स्मरण किया जाता है। उदाहरणस्वरूप उसने मित्रता के विषय में कहा: "मित्र हमारे आनन्द को दोगुना कर देते हैं और शोक को विभाजित करके उसे घटा देते है"। उसने जीवन यात्रा में मित्रता के दोहरे लाभ को पहचाना था।

   उसके लगभग एक सहस्त्र वर्ष पूर्व राजा सुलेमान ने भी मित्रता के विषय में लिखा था। सुलेमान द्वारा लिखी परमेश्वर के वचन बाइबल की सभोपदेशक नामक पुस्तक में लिखा है: "एक से दो अच्छे हैं, क्योंकि उनके परिश्रम का अच्छा फल मिलता है। क्योंकि यदि उन में से एक गिरे, तो दूसरा उसको उठाएगा; परन्तु हाय उस पर जो अकेला हो कर गिरे और उसका कोई उठाने वाला न हो" (सभोपदेशक 4:9-10)। निश्चय ही बिना किसी मित्र के हमारी जीवन यात्रा एकाकी और कठिन होती है।

   रोमी सिसरो और यहूदी राजा सुलेमान, दोनों ने बिलकुल सही कहा है, मित्र बहुत आवश्यक हैं। अच्छे मित्र नेक सलाहकार, बोझ बाँटने वाले और मन की बात समझने वाले सहायक होते हैं। प्रभु यीशु ने क्रूस पर चढ़ाए जाने के लिए पकड़वाए जाने से पहले अपने चेलों से कहा, "...मैं ने तुम्हें मित्र कहा है, क्योंकि मैं ने जो बातें अपने पिता से सुनीं, वे सब तुम्हें बता दीं" (यूहन्ना 15:15)। प्रभु यीशु एक ऐसा मित्र है जो सदा साथ रहता है, सदा सहायक होता है और सदा विश्वासयोग्य रहता है। क्या आपने प्रभु यीशु को अपना मित्र बना लिया है? - डेनिस फिशर


जीवन की बगिया में मित्र सुगन्धित फूलों के समान होते हैं।

मित्र सब समयों में प्रेम रखता है, और विपत्ति के दिन भाई बन जाता है। - नीतिवचन 17:17

बाइबल पाठ: सभोपदेशक 4:9-12;  यूहन्ना 15:12-16
Ecclesiastes 4:9 एक से दो अच्छे हैं, क्योंकि उनके परिश्रम का अच्छा फल मिलता है। 
Ecclesiastes 4:10 क्योंकि यदि उन में से एक गिरे, तो दूसरा उसको उठाएगा; परन्तु हाय उस पर जो अकेला हो कर गिरे और उसका कोई उठाने वाला न हो। 
Ecclesiastes 4:11 फिर यदि दो जन एक संग सोए तो वे गर्म रहेंगे, परन्तु कोई अकेला क्योंकर गर्म हो सकता है? 
Ecclesiastes 4:12 यदि कोई अकेले पर प्रबल हो तो हो, परन्तु दो उसका साम्हना कर सकेंगे। जो डोरी तीन तागे से बटी हो वह जल्दी नहीं टूटती।

John 15:12 मेरी आज्ञा यह है, कि जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो। 
John 15:13 इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे। 
John 15:14 जो कुछ मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं, यदि उसे करो, तो तुम मेरे मित्र हो। 
John 15:15 अब से मैं तुम्हें दास न कहूंगा, क्योंकि दास नहीं जानता, कि उसका स्‍वामी क्या करता है: परन्तु मैं ने तुम्हें मित्र कहा है, क्योंकि मैं ने जो बातें अपने पिता से सुनीं, वे सब तुम्हें बता दीं। 
John 15:16 तुम ने मुझे नहीं चुना परन्तु मैं ने तुम्हें चुना है और तुम्हें ठहराया ताकि तुम जा कर फल लाओ; और तुम्हारा फल बना रहे, कि तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से मांगो, वह तुम्हें दे।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 31-33