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शनिवार, 15 मार्च 2014

वचन


   इंटरनेट पर बाइबल संबंधी जानकारी और सामग्री की एक साईट, बाइबलगेटवे ने अपनी साईट पर प्रतिमाह आने वाले 80 लाख दर्शकों की प्रवृतियों का विश्लेषण किया और पाया कि परमेश्वर के वचन बाइबल का सबसे अधिक खोजा जाने वाला पद है यूहन्ना 3:16 और मुझे से इससे कोई आश्चर्य नहीं हुआ, क्योंकि यह पद बताता है कि परमेश्वर ने सारे जगत से इतना प्रेम किया है कि जगत के सभी लोगों को उनके पापों से बचाने तथा उन्हें अनन्त जीवन प्रदान करने के लिए अपने इकलौते पुत्र को दे दिया। पदों की खोज की सूचि में दसवें स्थान पर है प्रभु यीशु का अपने स्वर्गारोहण के समय चेलों को दिया गया उत्तरदायित्व के वे सारे संसार में जाकर चेले बनाएं (मत्ती 28:19)। प्रथम दस स्थानों की इसी सूचि में पाए जाने वाले अन्य पद हैं यर्मियाह 29:11, रोमियों 8:28 जो परमेश्वर द्वारा अपने लोगों के लिए बनाई गई भली योजनाओं के बारे में हैं।

   पवित्रशास्त्र बाइबल अनेक अद्भुत सत्यों से भरा पड़ा है और उन्हें खोजते रहना तथा दूसरों के साथ उन्हें बाँटना हम मसीही विश्वासियों का कर्तव्य है। बाइबल का सबसे लंबा अध्याय है भजन 119 जो पूरा का पूरा परमेश्वर के वचन के बारे में है। इस अध्याय में भजनकार ने परमेश्वर के वचन के बारे में अपने विचार और उसे खोजते रहने तथा परमेश्वर से सीखते रहने की अपनी इच्छा को बताया है। एक स्थान पर भजनकार कहता है, "अहा! मैं तेरी व्यवस्था में कैसी प्रीति रखता हूं! दिन भर मेरा ध्यान उसी पर लगा रहता है" (भजन 119:97)। आज का बाइबल पाठ कुछ उन बातों को बताता है जिनके कारण भजनकार परमेश्वर के वचन से ऐसा प्रेम रखता है: परमेश्वर के वचन से उसे बुद्धि एवं समझ मिलती है, उसके पांव बुरे रास्ते पर चल निकलने से रोके जाते हैं और वह वचन उसके लिए मधुर है, इसी लिए यह वचन सारे दिन उसके मनन का कारण है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल को पढ़ते रहिए, उसके लिए प्रतिदिन समय निकालते रहिए। जितना अधिक हम बाइबल को पढ़ेंगे, उतना ही अधिक हमारा प्रेम उस वचन के प्रति तथा उसके मूल लेखक अर्थात परमेश्वर के लिए बढ़ता रहेगा। - ऐनी सेटास


आप बाइबल के साथ जितना अधिक समय बिताएंगे, परमेश्वर के प्रति आपका प्रेम उतना अधिक बढ़ता जाएगा।

क्योंकि यहोवा की यह वाणी है, कि जो कलपनाएं मैं तुम्हारे विषय करता हूँ उन्हें मैं जानता हूँ, वे हानी की नहीं, वरन कुशल ही की हैं, और अन्त में तुम्हारी आशा पूरी करूंगा। - यर्मियाह 29:11

बाइबल पाठ: भजन 119:97-104
Psalms 119:97 अहा! मैं तेरी व्यवस्था में कैसी प्रीति रखता हूं! दिन भर मेरा ध्यान उसी पर लगा रहता है। 
Psalms 119:98 तू अपनी आज्ञाओं के द्वारा मुझे अपने शत्रुओं से अधिक बुद्धिमान करता है, क्योंकि वे सदा मेरे मन में रहती हैं। 
Psalms 119:99 मैं अपने सब शिक्षकों से भी अधिक समझ रखता हूं, क्योंकि मेरा ध्यान तेरी चितौनियों पर लगा है। 
Psalms 119:100 मैं पुरनियों से भी समझदार हूं, क्योंकि मैं तेरे उपदेशों को पकड़े हुए हूं। 
Psalms 119:101 मैं ने अपने पांवों को हर एक बुरे रास्ते से रोक रखा है, जिस से मैं तेरे वचन के अनुसार चलूं। 
Psalms 119:102 मैं तेरे नियमों से नहीं हटा, क्योंकि तू ही ने मुझे शिक्षा दी है। 
Psalms 119:103 तेरे वचन मुझ को कैसे मीठे लगते हैं, वे मेरे मुंह में मधु से भी मीठे हैं! 
Psalms 119:104 तेरे उपदेशों के कारण मैं समझदार हो जाता हूं, इसलिये मैं सब मिथ्या मार्गों से बैर रखता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 4-7


शुक्रवार, 14 मार्च 2014

थामने वाला


   जीवन जोखिमों से भरा है। कभी हम सफलता की ऊँची उड़ान भर रहे होते हैं, और कभी अनायास ही असफलता की डरावनी सच्चाई और घोर निराशा की गहराईयों में पड़े विचार कर रहे होते हैं कि क्या आशा रख पाने का कोई कारण है भी?

   हाल ही में एक अन्त्येष्टि के समय एक पास्टर ने सरकस में ऊँचाईयों पर लटक कर कलाबाज़ीयों के करतब दिखाने वाले एक कलाकार की कहानी सुनाई - यद्यपि वह कलाकार उस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण और नायक समझा जाता था, लेकिन स्वयं उसके अनुसार असली नायक तो उसका साथी था जो दूसरे डंडे से लटक कर उसे थामता था और उसके सुरक्षित नीचे उतर आने को सुनिश्चित करता था। सारे करतबों के सफल होने और उस कलाकार के सुरक्षित रह पाने की कुंजी थी विश्वास। उस ऊँचाई पर करतब करते हुए एक से दूसरे डंडे पर जाने के लिए जब वह लपकता था तो उसे पूरा विश्वास रखना होता था कि उसका साथी उसे थामने के लिए तैयार है और सही स्थान पर उसे मिलेगा, उसे थाम लेगा। ऐसे ही मृत्यु के समय में भी हमें विश्वास रखना है कि परमेश्वर भी थामने वाले के समान सही समय और स्थान पर हम मसीही विश्वासियों को थामने के लिए तैयार मिलेगा। अपनी जीवन यात्रा की कलाबाज़ियाँ पूरी कर लेने के पश्चात संसार से उस पार उतर जाने के समय हम मसीही विश्वासी निश्चिंत होकर विश्वास रख सकते हैं कि दूसरी ओर परमेश्वर हमें थाम कर अनन्त काल के लिए अपने साथ स्वर्ग में स्थान देने के लिए तैयार खड़ा है।

   प्रभु यीशु ने अपने पकड़वाए जाने और क्रूस पर चढ़ाए जाने से पहले अपने चेलों को आशवासन दिया कि वह उनके लिए स्थान तैयार करने जा रहा है और फिर आकर उन्हें वहाँ ले जाएगा, इसलिए वे घबराएं नहीं, विश्वास बनाए रखें (यूहन्ना 14:1-3)। इसमें कोई शक नहीं है कि जीवन जोखिमों से भरा है, लेकिन यदि आपने मसीह यीशु पर विश्वास किया है और उसे अपना उद्धारकर्ता माना है तो निश्चिंत रहें - वह इस जीवन में आपके साथ बना रहेगा, आपको सुरक्षा देता रहेगा, और पृथ्वी के इस जीवन के बाद आपका थामने वाला होकर आपको अपने साथ अनन्त स्वर्गीय जीवन में सुरक्षित उतार लाएगा। - जो स्टोवैल


हमारे स्वर्गीय परमेश्वर पिता की बाहें अपने बच्चों को थामे रहने के लिए, इस जीवन तथा उस जीवन दोनों में ही, सदा तैयार और उपलब्ध रहती हैं।

यदि कोई मेरी सेवा करे, तो मेरे पीछे हो ले; और जहां मैं हूं वहां मेरा सेवक भी होगा; यदि कोई मेरी सेवा करे, तो पिता उसका आदर करेगा। - यूहन्ना 12:26

बाइबल पाठ: यूहन्ना 14:1-6
John 14:1 तुम्हारा मन व्याकुल न हो, तुम परमेश्वर पर विश्वास रखते हो मुझ पर भी विश्वास रखो। 
John 14:2 मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते, तो मैं तुम से कह देता क्योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूं। 
John 14:3 और यदि मैं जा कर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूं, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहां ले जाऊंगा, कि जहां मैं रहूं वहां तुम भी रहो। 
John 14:4 और जहां मैं जाता हूं तुम वहां का मार्ग जानते हो। 
John 14:5 थोमा ने उस से कहा, हे प्रभु, हम नहीं जानते कि तू हां जाता है तो मार्ग कैसे जानें? 
John 14:6 यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता।

एक साल में बाइबल: 
1 शमूएल 1-3

गुरुवार, 13 मार्च 2014

धन्यवादी


   हमारी अपेक्षाओं के अनुसार यदि कोई जन आत्मिक जीवन में उन्नति नहीं कर रहा है तो उसके प्रति आलोचनात्मक हो जाना और उनमें ऐसे क्षेत्र देखना जिनमें उन्हें सुधार की आवश्यकता है, कोई कठिन बात नहीं होती; लेकिन साथ ही हमें वह भी देखना चाहिए कि उनमें क्या सही और बेहतर हो गया है। प्रेरित पौलुस को अकसर विभिन्न मसीही विश्वासी मण्डलियों को सुधारना होता था, लेकिन इस सुधारने के साथ ही जो बातें उन मण्डलियों में भली थीं, उनके लिए वह उन्हें प्रोत्साहन भी देता था और साथ ही परमेश्वर के प्रति उनके लिए धन्यवादी भी होता था।

   उदाहरण के लिए कुलुस्से की मसीही विश्वासी मण्डली को लिखी पौलुस की पत्री को देखिए। पत्री के आरंभ में ही वह कहता है कि प्रभु यीशु में उद्धार के सुसमाचार ने उनमें जड़ पकड़ ली थी और अब उन विश्वासियों के जीवन में फलवन्त हो रहा था (कुलुस्सियों 1:6)। पौलुस ने उनकी इस आत्मिक उन्नति के लिए परमेश्वर का धन्यवाद किया कि वे प्रभु यीशु को जानने पाए थे और अब झूठे शिक्षकों के विरुद्ध संघर्ष कर रहे थे (कुलुस्सियों 2:6-8)। पौलुस ने परमेश्वर का धन्यवाद किया कुलुस्से के विश्वासी अन्य सभी मसीह विश्वासियों के प्रति गहरा और स्थिर प्रेम भी रखते थे। पौलुस का उनके लिए धन्यवादी होने का एक और कारण था कि उनका यह विश्वास और प्रेम उनकी उस वास्तविक और निश्चित आशा से जन्मा था कि संसार के जीवन से आगे भी उनके लिए कुछ अति उत्तम रखा हुआ है (कुलुस्सियों 1:5)।

   हो सकता है कि आज आपके सामने ऐसे अवसर आएं जिनमें आप अपने साथी मसीही विश्वासियों के जीवनों पर ध्यान कर सकें - ऐसे में आप आलोचनात्मक होंगे या उनकी आत्मिक बढ़ोतरी के लिए परमेश्वर के धन्यवादी? समय निकाल कर प्रभु परमेश्वर के प्रति धन्यवादी बनें कि मसीह यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार ने उनके जीवनों में जड़ पकड़ी है और फलवन्त भी हो रहा है। - मार्विन विलियम्स


सुधारने के लिए आलोचना कुछ सहायता कर सकती है, परन्तु प्रोत्साहन बहुत अधिक प्रभावी होता है।

हे भाइयो, तुम्हारे विषय में हमें हर समय परमेश्वर का धन्यवाद करना चाहिए, और यह उचित भी है इसलिये कि तुम्हारा विश्वास बहुत बढ़ता जाता है, और तुम सब का प्रेम आपस में बहुत ही होता जाता है। - 2 थिस्सलुनीकियों 1:3 

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 1:1-14
Colossians 1:1 पौलुस की ओर से, जो परमेश्वर की इच्छा से मसीह यीशु का प्रेरित है, और भाई तीमुथियुस की ओर से। 
Colossians 1:2 मसीह में उन पवित्र और विश्वासी भाइयों के नाम जो कुलुस्‍से में रहते हैं। हमारे पिता परमेश्वर की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शान्‍ति प्राप्त होती रहे। 
Colossians 1:3 हम तुम्हारे लिये नित प्रार्थना कर के अपने प्रभु यीशु मसीह के पिता अर्थात परमेश्वर का धन्यवाद करते हैं। 
Colossians 1:4 क्योंकि हम ने सुना है, कि मसीह यीशु पर तुम्हारा विश्वास है, और सब पवित्र लोगों से प्रेम रखते हो। 
Colossians 1:5 उस आशा की हुई वस्तु के कारण जो तुम्हारे लिये स्वर्ग में रखी हुई है, जिस का वर्णन तुम उस सुसमाचार के सत्य वचन में सुन चुके हो। 
Colossians 1:6 जो तुम्हारे पास पहुंचा है और जैसा जगत में भी फल लाता, और बढ़ता जाता है; अर्थात जिस दिन से तुम ने उसको सुना, और सच्चाई से परमेश्वर का अनुग्रह पहिचाना है, तुम में भी ऐसा ही करता है। 
Colossians 1:7 उसी की शिक्षा तुम ने हमारे प्रिय सहकर्मी इपफ्रास से पाई, जो हमारे लिये मसीह का विश्वास योग्य सेवक है। 
Colossians 1:8 उसी ने तुम्हारे प्रेम को जो आत्मा में है हम पर प्रगट किया। 
Colossians 1:9 इसी लिये जिस दिन से यह सुना है, हम भी तुम्हारे लिये यह प्रार्थना करने और बिनती करने से नहीं चूकते कि तुम सारे आत्मिक ज्ञान और समझ सहित परमेश्वर की इच्छा की पहिचान में परिपूर्ण हो जाओ। 
Colossians 1:10 ताकि तुम्हारा चाल-चलन प्रभु के योग्य हो, और वह सब प्रकार से प्रसन्न हो, और तुम में हर प्रकार के भले कामों का फल लगे, और परमेश्वर की पहिचान में बढ़ते जाओ। 
Colossians 1:11 और उस की महिमा की शक्ति के अनुसार सब प्रकार की सामर्थ से बलवन्‍त होते जाओ, यहां तक कि आनन्द के साथ हर प्रकार से धीरज और सहनशीलता दिखा सको। 
Colossians 1:12 और पिता का धन्यवाद करते रहो, जिसने हमें इस योग्य बनाया कि ज्योति में पवित्र लोगों के साथ मीरास में समभागी हों। 
Colossians 1:13 उसी ने हमें अन्धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया। 
Colossians 1:14 जिस में हमें छुटकारा अर्थात पापों की क्षमा प्राप्त होती है।

एक साल में बाइबल: 
  • रूत 1-4


बुधवार, 12 मार्च 2014

महानतम


   खेल-कूद में सबसे महान क्या है? क्या वह बड़ी प्रतियोगिताएं है; या स्थापित होने वाले कीर्तिमान अथवा मिलने वाला यश? पेनसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के बास्केट्बॉल कोर्ट में लगी एक पटिया पर एक भिन्न दृष्टिकोण वाला वाक्य लिखा है: "खेल जीतना महान है। खेल को सही खेलना उससे भी महान है। किंतु खेल से प्रेम करना सबसे महान है।" यह हमें स्मरण कराता है कि खेल स्पर्धा नहीं वरन वे क्रीड़ाएं हैं जिन्हें खेल कर हम बालकपन से आनन्दित होते रहे हैं।

   एक धार्मिक अगुवे ने एक बार प्रभु यीशु से परमेश्वर के वचन के बारे में उसकी परीक्षा लेने के उद्देश्य से महानता के बारे में पूछा: "हे गुरू; व्यवस्था में कौन सी आज्ञा बड़ी है?" (मत्ती 22:36)। प्रभु यीशु ने अपने उत्तर में उसे प्रेम के विषय में चुनौति देते हुए कहा: "उसने उस से कहा, तू परमेश्वर अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख। बड़ी और मुख्य आज्ञा तो यही है। और उसी के समान यह दूसरी भी है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख" (मत्ती 22:37-39)।

   मसीह यीशु में हमारा विश्वास हमें चाहे और कुछ भी करने के लिए प्रेरित करे, लेकिन इससे बढ़कर और कुछ नहीं कि हम अपने प्रेम को प्रदर्शित करें - क्योंकि प्रेम ही हमारे स्वर्गीय परमेश्वर पिता के हृदय का प्रगटिकरण है। परमेश्वर का वचन बाइबल कहती है, "जो प्रेम नहीं रखता, वह परमेश्वर को नहीं जानता है, क्योंकि परमेश्वर प्रेम है" (1 यूहन्ना 4:8)। इससे कम महत्व की बातों के द्वारा मार्ग से भ्रमित हो जाना सरल है, इसलिए हमारा पूरा ध्यान उस महानतम बात पर लगा रहना चाहिए - प्रभु परमेश्वर से प्रेम। जब हम परमेश्वर से प्रेम रखेंगे तो परमेश्वर की सृष्टि, अर्थात एक दूसरे से भी प्रेम रखेंगे। इससे बढ़कर और कुछ भी नहीं है। - बिल क्राउडर


परमेश्वर के प्रति हमारे प्रेम का प्रमाण है परमेश्वर की आज्ञाओं के लिए हमारी आज्ञाकारिता।

क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। - यूहन्ना 3:16

बाइबल पाठ: मत्ती 22:34-40
Matthew 22:34 जब फरीसियों ने सुना, कि उसने सदूकियों का मुंह बन्‍द कर दिया; तो वे इकट्ठे हुए। 
Matthew 22:35 और उन में से एक व्यवस्थापक ने परखने के लिये, उस से पूछा। 
Matthew 22:36 हे गुरू; व्यवस्था में कौन सी आज्ञा बड़ी है? 
Matthew 22:37 उसने उस से कहा, तू परमेश्वर अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख। 
Matthew 22:38 बड़ी और मुख्य आज्ञा तो यही है। 
Matthew 22:39 और उसी के समान यह दूसरी भी है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख। 
Matthew 22:40 ये ही दो आज्ञाएं सारी व्यवस्था और भविष्यद्वक्ताओं का आधार है।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों 19-21


मंगलवार, 11 मार्च 2014

सुन्दरता


   जब मेरे पति जे और मैंने एक नया घर बनाने का निर्णय लिया तो हमने औज़ारों का प्रयोग कर सकने तथा ऐसे कार्य में रुचि रखने वाले मित्र तथा परिवारगणों को इस कार्य पर नहीं लगाया, वरन हमने एक कुशल भवन निर्माता को चुना जो देखने में सुन्दर तथा उपयोग में व्यावाहरिक घर हमारे लिए बना के दे सके।

   साधारणतया चर्च भवन में सुन्दरता का कोई विशेष स्थान नहीं माना जाता है; कुछ लोग तो उसे अव्यवाहारिक भी कहते हैं, इसलिए किसी भी बारीकी से की गई सजावट को वे व्यर्थ मानते हैं। लेकिन जब परमेश्वर ने प्राचीन इस्त्राएलियों के लिए आराधना स्थान के बनाए जाने के निर्देश दिए तब परमेश्वर का ऐसा विचार कतई नहीं था। आराधना के स्थान के बनाने के लिए परमेश्वर ने ऐसे ही किसी को भी एक साधारण सा तम्बू बना कर खड़ा करने को नहीं कहा। परमेश्वर ने इस कार्य के लिए कुशल कारिगर बसलेल और ओहलिआब नियुक्त किए (निर्गमन 36:1)। उन कारिगरों के साथ उसने अन्य लोगों को भी इस कार्य के लिए तैयार करके दिया जिससे वे सब कढ़ाई तथा तराशने में बारीकी एवं कुशलता से करी गई कारिगरी द्वारा तम्बु के सामान को बना सकें (निर्गमन 37:17-20)।

   मैं सोचती हूँ कि सुन्दरता का वहाँ महत्वपूर्ण स्थान था क्योंकि यह उन इस्त्राएलियों को उनकी आराधना में परमेश्वर की उत्तमता को स्मरण कराता था। बियाबान और रेगेस्तानी इलाकों के अपने भ्रमण के दौरान उन्हें परमेश्वर की महान महिमा को याद दिलानी वाला कुछ चाहिए था।

   आज भी परमेश्वर के लोगों द्वारा आराधना और उपासना में सुन्दरता यही कार्य कर सकती है। हम परमेश्वर को अपना सर्वोत्तम इसलिए अर्पित करते हैं क्योंकि वह इसके योग्य है। सुन्दरता हमें स्वर्ग की भी अनुभूति करवाती है और हमें स्मरण करवाती है उस उत्तम स्थान की जो परमेश्वर अपने विश्वासी लोगों के लिए तैयार कर रहा है (यूहन्ना 14:2; 1 कुरिन्थियों 2:9)। - जूली ऐकैअरमैन लिंक


सुन्दरता परमेश्वर को प्रतिबिंबित करती है।

परन्तु जैसा लिखा है, कि जो आंख ने नहीं देखी, और कान ने नहीं सुना, और जो बातें मनुष्य के चित्त में नहीं चढ़ीं वे ही हैं, जो परमेश्वर ने अपने प्रेम रखने वालों के लिये तैयार की हैं। - 1 कुरिन्थियों 2:9

बाइबल पाठ: निर्गमन 36:1-7
Exodus 36:1 और बसलेल और ओहोलीआब और सब बुद्धिमान जिन को यहोवा ने ऐसी बुद्धि और समझ दी हो, कि वे यहोवा की सारी आज्ञाओं के अनुसार पवित्रस्थान की सेवकाई के लिये सब प्रकार का काम करना जानें, वे सब यह काम करें।
Exodus 36:2 तब मूसा ने बसलेल और ओहोलीआब और सब बुद्धिमानों को जिनके हृदय में यहोवा ने बुद्धि का प्रकाश दिया था, अर्थात जिस जिस को पास आकर काम करने का उत्साह हुआ था उन सभों को बुलवाया। 
Exodus 36:3 और इस्त्राएली जो जो भेंट पवित्रस्थान की सेवकाई के काम और उसके बनाने के लिये ले आए थे, उन्हें उन पुरूषों ने मूसा के हाथ से ले लिया। तब भी लोग प्रति भोर को उसके पास भेंट अपनी इच्छा से लाते रहें; 
Exodus 36:4 और जितने बुद्धिमान पवित्रस्थान का काम करते थे वे सब अपना अपना काम छोड़कर मूसा के पास आए, 
Exodus 36:5 और कहने लगे, जिस काम के करने की आज्ञा यहोवा ने दी है उसके लिये जितना चाहिये उस से अधिक वे ले आए हैं। 
Exodus 36:6 तब मूसा ने सारी छावनी में इस आज्ञा का प्रचार करवाया, कि क्या पुरूष, क्या स्त्री, कोई पवित्रस्थान के लिये और भेंट न लाए, इस प्रकार लोग और भेंट लाने से रोके गए। 
Exodus 36:7 क्योंकि सब काम बनाने के लिये जितना सामान आवश्यक था उतना वरन उस से अधिक बनाने वालों के पास आ चुका था।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों 16-18


सोमवार, 10 मार्च 2014

चमकते रहें


   ईमानदारी की बात तो यह है कि स्टोर का एक और चक्कर लगाना मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था। पिछले 4 सप्ताह से मैं और मेरी पत्नि एक खराब फ्रिज को लौटाने के बाद उसकी कीमत वापस मिलने का इंतिज़ार कर रहे थे। अबकि बार फिर से मैंने स्टोर के मैनेजर को अपनी बात समझाई, लेकिन प्रतीत यही हो रहा था कि पहले के समान ही हम आज भी किसी परिणाम पर पहुँचने वाले नहीं हैं; और मैं मन ही मन सोच रहा था कि क्या कभी मुझे मेरा पैसा वापस भी मिलेगा या नहीं? मैं अन्दर से तो खिसिया रहा था किंतु बाहर से, उस वार्तालाप के दौरान मैं शांत और नम्र बने रहने का प्रयत्न करता रहा।

   बातचीत के समय उस मैनेजर ने मुझ से कहा, "साधारणतया, यहाँ तक पहुँचते पहुँचते ग्राहक खिसिया कर मुझ पर चिल्लाना आरंभ कर देते हैं, लेकिन आप इतने विनम्र और शांत बने हुए हैं; आईए एक अन्य रीति से आपकी समस्या सुलझाने का प्रयास करते हैं।" उसने मुझे से कुछ प्रश्न पूछने आरंभ किए और फिर अपने कंप्यूटर में कुछ अंक भरे, और थोड़े से विलंब के पश्चात कंप्यूटर ने एक रसीद छाप कर दे दी जिस में लिखा था कि मेरे पैसे वापस होना स्वीकृत हो गया है! हमारी वह फ्रिज वापसी की परेशानी हल हो गई थी। मैनेजर ने विदाई लेते हुए मुझ से हाथ मिलाया और कहा, "हमारे साथ अच्छा बर्ताव बनाए रखने के लिए बहुत धन्यवाद।"

   मैं मानता हूँ कि ना चाहते हुए भी अच्छा बने रहने का मेरा प्रयास इस सारे प्रकरण में अवश्य ही कुछ हद तक सहायक था, लेकिन हम मसीही विश्वासियों के लिए अच्छे व्यवहार करते रहने का कारण अपना काम निकलवाना नहीं है। हमारे भले व्यवहार का सही कारण है कि हमें अपने और जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की ज्योति सब के सामने प्रकट करनी है (इफिसियों 5:8); फिर चाहे वे कोई भी क्यों ना हों - एक चिड़चिड़ा पड़ौसी, काम करने वाला कोई अनाड़ी कार्यकर्ता, किसी संस्थान का कोई अड़ियल मैनेजर, या अन्य कोई भी। हमारी वाणी और हमारा व्यवाहार हमारे विश्वास का सजीव उदाहरण होने चाहिएं (इफिसियों 4:29-32; कुलुस्सियों 4:6)।

   क्या आप आज किसी विषम परिस्थिति का सामना कर रहे हैं? उसे मसीह यीशु की ज्योति संसार के लोगों पर प्रकट करने का माध्यम बना लें और मसीह की ज्योति से संसार में चमकते रहें। - डेव ब्रैनन


जब मसीह की ज्योति आप में हो कर चमकेगी तो लोग आपकी ओर आकर्षित भी होंगे।

प्रभु यीशु ने कहा: "मैं जगत में ज्योति हो कर आया हूं ताकि जो कोई मुझ पर विश्वास करे, वह अन्धकार में न रहे।" - यूहन्ना 12:46

बाइबल पाठ: इफिसियों 5:1-10
Ephesians 5:1 इसलिये प्रिय, बालकों की नाईं परमेश्वर के सदृश बनो। 
Ephesians 5:2 और प्रेम में चलो; जैसे मसीह ने भी तुम से प्रेम किया; और हमारे लिये अपने आप को सुखदायक सुगन्‍ध के लिये परमेश्वर के आगे भेंट कर के बलिदान कर दिया। 
Ephesians 5:3 और जैसा पवित्र लोगों के योग्य है, वैसा तुम में व्यभिचार, और किसी प्रकार अशुद्ध काम, या लोभ की चर्चा तक न हो। 
Ephesians 5:4 और न निर्लज्ज़ता, न मूढ़ता की बातचीत की, न ठट्ठे की, क्योंकि ये बातें सोहती नहीं, वरन धन्यवाद ही सुना जाएं। 
Ephesians 5:5 क्योंकि तुम यह जानते हो, कि किसी व्यभिचारी, या अशुद्ध जन, या लोभी मनुष्य की, जो मूरत पूजने वाले के बराबर है, मसीह और परमेश्वर के राज्य में मीरास नहीं। 
Ephesians 5:6 कोई तुम्हें व्यर्थ बातों से धोखा न दे; क्योंकि इन ही कामों के कारण परमेश्वर का क्रोध आज्ञा ने मानने वालों पर भड़कता है। 
Ephesians 5:7 इसलिये तुम उन के सहभागी न हो। 
Ephesians 5:8 क्योंकि तुम तो पहले अन्धकार थे परन्तु अब प्रभु में ज्योति हो, सो ज्योति की सन्तान की नाईं चलो। 
Ephesians 5:9 (क्योंकि ज्योति का फल सब प्रकार की भलाई, और धामिर्कता, और सत्य है)। 
Ephesians 5:10 और यह परखो, कि प्रभु को क्या भाता है।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों 13-15


रविवार, 9 मार्च 2014

कृतज्ञ


   मेरे लड़कपन में जितनी अच्छी रीति से पास्टर फ्रांसिस एलेन मुझे जानते थे, शायद ही कोई ओर वैसा मुझे जानता होगा। वे बहुत जोशीले प्रचारक और कोमलता तथा परमेश्वर के प्रेम के सजीव उदाहरण थे और वे ही मुझे मसीह यीशु के निकट ले कर आए थे। मेरे साथ उनके संपर्क के आरंभिक समय में ही उन्होंने पहचान लिया था कि मुझ में, अपेक्षा से अधिक कठिन परिश्रम करने तथा कहे गए से अधिक कर देने के  द्वारा लोगों से उनका समर्थन या स्वीकृति "खरीदने" की प्रवृत्ति है।

   उन्होंने मुझे समझाया कि परिश्रम करने के मेरे ये गुण दूसरों की सहायता हेतु उपयोग करने के लिए बहुत भले हैं, लेकिन इनका प्रयोग दूसरों से, विशेषतयाः परमेश्वर से, स्वीकृति पाने के लिए कभी नहीं करना चाहिए। इसे समझाने के लिए उन्होंने मुझ से परमेश्वर के वचन बाइबल में से मत्ती 11:30 पढ़ने के लिए कहा, जहाँ प्रभु यीशु ने वायदा किया है "क्योंकि मेरा जूआ सहज और मेरा बोझ हल्का है" - एक ऐसा कथन जो इतना सरल है कि कभी कभी उसपर विश्वास करना कठिन होता है। फिर उन्होंने मुझ से एक और खण्ड पढ़ने के लिए कहा - मीका 6:6-8; और मेरे वह खण्ड पढ़ने के बाद वे बोले, "अब मुझे बताओ कि क्या तुम परमेश्वर को कुछ ऐसा दे सकते हो जो उसके पास नहीं है या उसके लिए कुछ ऐसा कर सकते हो जो उसके लिए करना कठिन है?" स्वाभविक था कि मेरा उत्तर था, "नहीं"।

   फिर उन्होंने आगे समझाया, हम परमेश्वर को किसी रीति से "खरीद" नहीं सकते अर्थात उसे अपने लिए कुछ करने को बाध्य नहीं कर सकते - परमेश्वर का हमारे प्रति प्रेम उसका स्वाभाविक गुण है जिसके फलस्वरूप वह अपने बड़े अनुग्रह में होकर हमसे बर्ताव करता है, ना कि हमारे किसी "धार्मिकता" या "भलाई के कार्यों" से मजबूर होकर। इसलिए हमारा प्रत्युत्तर क्या होना चाहिए? वही जो मीका 6:8 में लिखा है: "हे मनुष्य, वह तुझे बता चुका है कि अच्छा क्या है; और यहोवा तुझ से इसे छोड़ और क्या चाहता है, कि तू न्याय से काम करे, और कृपा से प्रीति रखे, और अपने परमेश्वर के साथ नम्रता से चले?"

   मीका 6 अध्याय हमारे लिए स्मरण के लिए रहे कि परमेश्वर का अनुग्रह हमारे प्रति बिना किसी "कीमत" के है; तथा उस अनुग्रह के प्रत्युत्तर में उसके प्रति विश्वासयोग्यता का जीवन व्यतीत करना हमारी कृतज्ञता की प्रतिक्रिया है ना कि उसकी "कीमत" चुकाना। - रैंडी किलगोर


भले काम उद्धार पाने का कारण नहीं परिणाम हैं।

हम तो सब के सब अशुद्ध मनुष्य के से हैं, और हमारे धर्म के काम सब के सब मैले चिथड़ों के समान हैं। हम सब के सब पत्ते की नाईं मुर्झा जाते हैं, और हमारे अधर्म के कामों ने हमें वायु की नाईं उड़ा दिया है। -  यशायाह 64:6

बाइबल पाठ: मीका 6:1-8
Micah 6:1 जो बात यहोवा कहता है, उसे सुनो : उठ कर, पहाड़ों के सामने वादविवाद कर, और टीले भी तेरी सुनने पाएं। 
Micah 6:2 हे पहाड़ों, और हे पृथ्वी की अटल नेव, यहोवा का वादविवाद सुनो, क्योंकि यहोवा का अपनी प्रजा के साथ मुकद्दमा है, और वह इस्राएल से वादविवाद करता है।
Micah 6:3 हे मेरी प्रजा, मैं ने तेरा क्या किया, और क्या कर के मैं ने तुझे उकता दिया है? 
Micah 6:4 मेरे विरुद्ध साक्षी दे! मैं तो तुझे मिस्र देश से निकाल ले आया, और दासत्व के घर में से तुझे छुड़ा लाया; और तेरी अगुवाई करने को मूसा, हारून और मरियम को भेज दिया। 
Micah 6:5 हे मेरी प्रजा, स्मरण कर, कि मोआब के राजा बालाक ने तेरे विरुद्ध कौन सी युक्ति की? और बोर के पुत्र बिलाम ने उसको क्या सम्मत्ति दी? और शित्तिम से गिल्गाल तक की बातों का स्मरण कर, जिस से तू यहोवा के धर्म के काम समझ सके।
Micah 6:6 मैं क्या ले कर यहोवा के सम्मुख आऊं, और ऊपर रहने वाले परमेश्वर के सामने झुकूं? क्या मैं होमबलि के लिये एक एक वर्ष के बछड़े ले कर उसके सम्मुख आऊं? 
Micah 6:7 क्या यहोवा हजारों मेढ़ों से, वा तेल की लाखों नदियों से प्रसन्न होगा? क्या मैं अपने अपराध के प्रायश्चित्त में अपने पहिलौठे को वा अपने पाप के बदले में अपने जन्माए हुए किसी को दूं? 
Micah 6:8 हे मनुष्य, वह तुझे बता चुका है कि अच्छा क्या है; और यहोवा तुझ से इसे छोड़ और क्या चाहता है, कि तू न्याय से काम करे, और कृपा से प्रीति रखे, और अपने परमेश्वर के साथ नम्रता से चले? 

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों 9-12