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बुधवार, 18 जून 2014

स्मरण एवं मनन


   मेरे जन्म के पहले ही मेरे परदादा एब्राम हैस अपनी आँखों की रौशनी गंवा चुके थे। वे अपने क्षेत्र में दो बातों के लिए विख्यात थे - अपनी खराद मशीन पर लकड़ी की सुन्दर वस्तुओं को बनाने और परमेश्वर के वचन बाइबल के अनेक पदों को स्मरण रखने तथा दोहराने। वे और उनके एक मित्र - एली अकसर आपस में एक दूसरे के साथ बाइबल के पदों को बाँटते रहते थे। उन दोनों में पदों को ऐसे बोलने की एक स्पर्धा सी रहती थी; जबकि एली बाइबल के हवाले अधिक बताने पाते थे, मेरे परदादा पदों के लेख को दोहराने पाते थे।

   आज हमारा परिवार परदादा एब्राम को अधिकतर "दृष्टिहीन दादा" संबोधित करके याद करता है। आँखों के चले जाने के बाद बाइबल के पदों को स्मरण रखने की उनकी आदत उनके लिए जीवन जीने का सहारा बन गई। लेकिन हमारे लिए यह क्यों आवश्यक है कि हम परमेश्वर के वचन को स्मरण रखें और उस पर मनन करें?

   भजन 119 हमें कई कारण बताता है कि परमेश्वर के वचन को अपने हृदयों में रख लेने से हमारे जीवन में क्या प्रभाव आते हैं: पहले तो उस वचन के द्वारा हम प्रलोभनों और परीक्षाओं का सामना करने की सामर्थ पाते हैं (पद 11, इफिसियों 6:17)| फिर जब हम उस वचन पर मनन करते हैं तो हम परमेश्वर को और बेहतर रीति से जानने लगते हैं। जब परमेश्वर का वचन हमारे मन-मस्तिष्क में बस जाता है तो हम उसकी आवाज़ को बेहतर सुनने और समझने लगते हैं, उसके मार्गदर्शन सरलता से समझने लगते हैं। हम परमेश्वर के वचन को ही प्रार्थना करने, परमेश्वर से वार्तालाप करने, उसकी आराधना करने और दूसरों को उसके बारे में बताने के लिए प्रयोग करने पाते हैं (कुलुस्सियों 3:16)।

   परमेश्वर का वचन जीवित और प्रबल है (इब्रानियों 4:12); इस बहुमूल्य वचन को स्मरण रखें, उस पर मनन करते रहें, उसे अपने हृदय में बसा लें, और वह आपको पाप से बचाए रखेगा (भजन 119:11)। - सिंडी हैस कैसपर


जब परमेश्वर का वचन हमारे हृदय में बसा रहेगा तो परमेश्वर के मार्ग हमारे मार्ग बन जाएंगे।

धर्मी अपने मुंह से बुद्धि की बातें करता, और न्याय का वचन कहता है। उसके परमेश्वर की व्यवस्था उसके हृदय में बनी रहती है, उसके पैर नहीं फिसलते। - भजन 37:30-31

बाइबल पाठ: भजन 119:9-15
Psalms 119:9 जवान अपनी चाल को किस उपाय से शुद्ध रखे? तेरे वचन के अनुसार सावधान रहने से। 
Psalms 119:10 मैं पूरे मन से तेरी खोज मे लगा हूं; मुझे तेरी आज्ञाओं की बाट से भटकने न दे! 
Psalms 119:11 मैं ने तेरे वचन को अपने हृदय में रख छोड़ा है, कि तेरे विरुद्ध पाप न करूं। 
Psalms 119:12 हे यहोवा, तू धन्य है; मुझे अपनी विधियां सिखा! 
Psalms 119:13 तेरे सब कहे हुए नियमों का वर्णन, मैं ने अपने मुंह से किया है। 
Psalms 119:14 मैं तेरी चितौनियों के मार्ग से, मानों सब प्रकार के धन से हर्षित हुआ हूं। 
Psalms 119:15 मैं तेरे उपदेशों पर ध्यान करूंगा, और तेरे मार्गों की ओर दृष्टि रखूंगा। 
Psalms 119:16 मैं तेरी विधियों से सुख पाऊंगा; और तेरे वचन को न भूलूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 73-75


मंगलवार, 17 जून 2014

खोए और पाए


   हाल ही की बात है कि मुझे अपना क्रेडिट कार्ड नहीं मिल पा रहा था। मैं उसे बड़ी व्यग्रता से ढूँढ़ने लगा, क्योंकि चाहे क्रेडिट कार्ड आकार में छोटा सा हो लेकिन क्रेडिट कार्ड का खो जाना कोई छोटी बात नहीं है। यदि वह खो जाए तो उसके अनुचित उपयोग को रोकने के लिए तुरंत बैक को बता कर उसे अवरुद्ध करवाना होता है; और फिर जब तक वह ना मिल जाए या उसके स्थान पर बैंक से नया कार्ड ना मिल जाए तब तक अनेक प्रकार के भुगतान और प्रतिदिन की खरीददारी बाधित रहती है।

   प्रभु यीशु ने एक खोए हुए सिक्के की नीति-कथा बताई (लूका 15:8-10)। एक स्त्री का एक बहुमूल्य सिक्का खो गया। उस खोए हुए सिक्के को खोजने के लिए उस स्त्री ने दीपक जलाया, घर को बुहारा और साफ किया और सब स्थानों पर यत्न से खोजती रही जब तक की वह सिक्का उसे मिल नहीं गया। जब वह सिक्का मिल गया तब उसने अपने मित्रों को बुलाया और उनके साथ आनन्द मनाया। इस कथा के द्वारा प्रभु यीशु ने सिखाया कि जब एक पाप में खोया हुआ व्यक्ति पश्चाताप के साथ वापस परमेश्वर की ओर लौट कर आता है तब स्वर्ग में भी ऐसे ही आनन्द होता है।

   परमेश्वर के लिए सारे संसार के हम सभी मनुष्य बहुत बहुमूल्य हैं, हम सभी उसकी अद्भुत रचना, विलक्षण सृष्टि हैं। हमारे पाप स्वभाव और पापों ने हमें उस से दूर कर दिया है, किंतु वह चाहता है कि हम सब लौट कर उसके पास आ जाएं। इसलिए हमारे पापों की क्षमा, हमारे उद्धार और हमारे उसके साथ मेल-मिलाप के लिए उसने प्रभु यीशु को इस संसार में भेजा। प्रभु यीशु ने समस्त मानव जाति के सभी पापों को अपने ऊपर लेकर उनका दण्ड भी अपने ऊपर ले लिया। वह हमारे पापों के लिए बलिदान हुआ और हमारे उद्धार के लिए तीसरे दिन मृतकों में से पुनः जी उठा। अब जो भी उसपर विश्वास ला कर उससे अपने पापों की क्षमा माँगता है, वह परमेश्वर की सन्तान और स्वर्ग का निवासी हो जाता है - संसार और पापों में खोए हुई व्यक्ति परमेश्वर के राज्य और स्वर्ग में पाए हुए बन जाते हैं।

   क्या आप किसी ऐसे खोए हुए व्यक्ति को जानते हैं आज जिसे परमेश्वर से मिलने वाली इस क्षमा और उद्धार तथा पाए हुए हो जाने की आवश्यकता है? परमेश्वर से प्रार्थना करें कि वह आपको उनके साथ सुसमाचार बाँटने का अवसर दे जिससे वे पापों में खोए हुए भी परमेश्वर के पाए हुए बन सकें। - डेनिस फिशर


पाए जाने के लिए पहले खोए हुआ होना स्वीकार करना आवश्यक है।

क्योंकि मनुष्य का पुत्र खोए हुओं को ढूंढ़ने और उन का उद्धार करने आया है। - लूका 19:10 

बाइबल पाठ: लूका 15:4-10
Luke 15:4 तुम में से कौन है जिस की सौ भेड़ें हों, और उन में से एक खो जाए तो निन्नानवे को जंगल में छोड़कर, उस खोई हुई को जब तक मिल न जाए खोजता न रहे? 
Luke 15:5 और जब मिल जाती है, तब वह बड़े आनन्द से उसे कांधे पर उठा लेता है। 
Luke 15:6 और घर में आकर मित्रों और पड़ोसियों को इकट्ठे कर के कहता है, मेरे साथ आनन्द करो, क्योंकि मेरी खोई हुई भेड़ मिल गई है। 
Luke 15:7 मैं तुम से कहता हूं; कि इसी रीति से एक मन फिराने वाले पापी के विषय में भी स्वर्ग में इतना ही आनन्द होगा, जितना कि निन्नानवे ऐसे धर्मियों के विषय नहीं होता, जिन्हें मन फिराने की आवश्यकता नहीं।
Luke 15:8 या कौन ऐसी स्त्री होगी, जिस के पास दस सिक्के हों, और उन में से एक खो जाए; तो वह दीया बारकर और घर झाड़ बुहार कर जब तक मिल न जाए, जी लगाकर खोजती न रहे? 
Luke 15:9 और जब मिल जाता है, तो वह अपने सखियों और पड़ोसिनियों को इकट्ठी कर के कहती है, कि मेरे साथ आनन्द करो, क्योंकि मेरा खोया हुआ सिक्‍का मिल गया है। 
Luke 15:10 मैं तुम से कहता हूं; कि इसी रीति से एक मन फिराने वाले पापी के विषय में परमेश्वर के स्‍वर्गदूतों के साम्हने आनन्द होता है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 70-72


सोमवार, 16 जून 2014

अद्भुत रचना


   जब मैं बालक था तो मेरे एक निकट संबंधी ने मुझे और बेहतर करने को प्रोत्साहित करने के विचार से बार बार मुझे "तुम इतने बेवकूफ क्यों हो?" कहना आरंभ कर दिया। उनकी इस बात का मुझपर कैसा प्रभाव हुआ यह मैंने अपनी युवावस्था में जा कर समझा - तब जब किसी ने मेरी पीठ पीछे किसी अन्य को कहा "बेवकूफ" और मैंने तुरंत इस आश्य से कि कोई मुझे बुला रहा है पीछे मुड़कर उसकी ओर देखा!

   प्रभु यीशु मसीह को अपना उद्धारकर्ता और प्रभु मान लेने के बाद मुझे यह एहसास हुआ कि परमेश्वर ने मुझे अपने स्वरूप में बनाया है (उत्पत्ति 1:27), और मैं बेवकूफ नहीं वरन परमेश्वर की अद्भुत रचना हूँ (भजन 39:14)। संसार की रचना के बाद परमेश्वर ने सब कुछ का अवलोकन किया और कहा, "बहुत अच्छा" (उत्पत्ति 1:31)।

   दाऊद अपने भजन में वर्णन करता है कि कैसे परमेश्वर हम सब को बहुत निकटता से, अन्दर-बाहर से जानता है: "हे यहोवा, तू ने मुझे जांच कर जान लिया है। तू मेरा उठना बैठना जानता है; और मेरे विचारों को दूर ही से समझ लेता है। मेरे चलने और लेटने की तू भली भांति छानबीन करता है, और मेरी पूरी चालचलन का भेद जानता है" (भजन 139:1-3)।

   ना केवल हम परमेश्वर की अद्भुत रचना हैं, वरन प्रभु यीशु मसीह के क्रूस पर दिए बलिदान के द्वारा हम परमेश्वर के साथ सही संबंध में बहाल भी किए जाते हैं, एक नई सृष्टि के समान: "सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। और सब बातें परमेश्वर की ओर से हैं, जिसने मसीह के द्वारा अपने साथ हमारा मेल-मिलाप कर लिया, और मेल-मिलाप की सेवा हमें सौंप दी है" (2 कुरिन्थियों 5:17-18)।

   परमेश्वर के स्वरूप में बनाई गई परमेश्वर ही की अद्भुत रचना होने के कारण हमारा कर्तव्य है कि हम सब मनुष्यों को आदर की दृष्टि से देखें, किसी को नीचा या हीन ना समझें और परमेश्वर की इच्छा एवं उद्देश्यों के अनुसार सभी को प्रभु यीशु में विश्वास द्वारा मिलने वाले उद्धार तथा पापों की क्षमा का सुसमाचार सुनाएं, उन्हें परमेश्वर के साथ सही संबंध में बहाल होने के तरीके के बारे में बताएं। - एल्बर्ट ली


प्रत्येक व्यक्ति परमेश्वर के स्नेह की अद्वितीय अभिव्यक्ति है।

फिर परमेश्वर ने कहा, हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाएं; और वे समुद्र की मछलियों, और आकाश के पक्षियों, और घरेलू पशुओं, और सारी पृथ्वी पर, और सब रेंगने वाले जन्तुओं पर जो पृथ्वी पर रेंगते हैं, अधिकार रखें। तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्वर ने उसको उत्पन्न किया, नर और नारी कर के उसने मनुष्यों की सृष्टि की। - उत्पत्ति 1:26-27

बाइबल पाठ: भजन 139:1-16
Psalms 139:1 हे यहोवा, तू ने मुझे जांच कर जान लिया है।
Psalms 139:2 तू मेरा उठना बैठना जानता है; और मेरे विचारों को दूर ही से समझ लेता है। 
Psalms 139:3 मेरे चलने और लेटने की तू भली भांति छानबीन करता है, और मेरी पूरी चालचलन का भेद जानता है। 
Psalms 139:4 हे यहोवा, मेरे मुंह में ऐसी कोई बात नहीं जिसे तू पूरी रीति से न जानता हो। 
Psalms 139:5 तू ने मुझे आगे पीछे घेर रखा है, और अपना हाथ मुझ पर रखे रहता है। 
Psalms 139:6 यह ज्ञान मेरे लिये बहुत कठिन है; यह गम्भीर और मेरी समझ से बाहर है।
Psalms 139:7 मैं तेरे आत्मा से भाग कर किधर जाऊं? वा तेरे साम्हने से किधर भागूं? 
Psalms 139:8 यदि मैं आकाश पर चढूं, तो तू वहां है! यदि मैं अपना बिछौना अधोलोक में बिछाऊं तो वहां भी तू है! 
Psalms 139:9 यदि मैं भोर की किरणों पर चढ़ कर समुद्र के पार जा बसूं, 
Psalms 139:10 तो वहां भी तू अपने हाथ से मेरी अगुवाई करेगा, और अपने दाहिने हाथ से मुझे पकड़े रहेगा। 
Psalms 139:11 यदि मैं कहूं कि अन्धकार में तो मैं छिप जाऊंगा, और मेरे चारों ओर का उजियाला रात का अन्धेरा हो जाएगा, 
Psalms 139:12 तौभी अन्धकार तुझ से न छिपाएगा, रात तो दिन के तुल्य प्रकाश देगी; क्योंकि तेरे लिये अन्धियारा और उजियाला दोनों एक समान हैं।
Psalms 139:13 मेरे मन का स्वामी तो तू है; तू ने मुझे माता के गर्भ में रचा। 
Psalms 139:14 मैं तेरा धन्यवाद करूंगा, इसलिये कि मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया हूं। तेरे काम तो आश्चर्य के हैं, और मैं इसे भली भांति जानता हूं। 
Psalms 139:15 जब मैं गुप्त में बनाया जाता, और पृथ्वी के नीचे स्थानों में रचा जाता था, तब मेरी हडि्डयां तुझ से छिपी न थीं। 
Psalms 139:16 तेरी आंखों ने मेरे बेडौल तत्व को देखा; और मेरे सब अंग जो दिन दिन बनते जाते थे वे रचे जाने से पहिले तेरी पुस्तक में लिखे हुए थे।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 67-69


रविवार, 15 जून 2014

स्वर्गीय पिता


   जब प्रभु यीशु ने अपने चेलों को प्रार्थना करना सिखाया, तो प्रार्थना आरंभ करते हुए परमेश्वर को संबोधित करने के लिए जो शब्द प्रयोग करने को कहा वे हैं "हे हमारे पिता, तू जो स्वर्ग में है" (मत्ती 6:9)। परमेश्वर के वचन बाइबल में ऐसे ही अनेक अन्य पद हैं जहाँ परमेश्वर को पिता के रुप में संबोधित किया गया है। मुझे यह बड़ी रोचक और शिक्षाप्रद बात लगती है कि परमेश्वर ने अपने बारे में हम मनुष्यों को जानकारी देने के लिए अपने आप को एक पिता के रूप में हमारे समक्ष रखा।

   परमेश्वर के पिता होने बारे में, विशेषकर व्यक्तिगत रीति से अपना पिता होने के बारे में हम क्या जानते हैं? प्रभु द्वारा सिखाई गई इस प्रार्थना से हम सीख सकते हैं कि हमारा स्वर्गीय पिता हमारे लिए सदा उपलब्ध और हमारी ओर ध्यान लगाए रखने वाला है। यहाँ हम यह भी देखते हैं कि वह हमारा ध्यान रखता है और हमारी आवश्यकताओं के लिए उचित प्रयोजन करता है; वह हमें बड़े धैर्य के साथ हमें क्षमा करता है और बुराई से बचाता है।

   पितृत्व का यह नमूना हम सांसारिक पिताओं के लिए कैसा अद्भुत उदाहरण है। यह निश्चित है कि हमारे स्वर्गीय परमेश्वर पिता के समान कोई अन्य सिद्ध पिता इस पृथ्वी पर ना है और ना हो सकता है, लेकिन हम असिद्ध मनुष्यों को अपनी पारिवारिक ज़िम्मेदारियाँ निभाने के लिए उसने अपना नमूना निर्धारित कर के दिया है। मैं अपने अनुभव से जानता हूँ कि अपनी सेवकाई और पारिवारिक ज़िम्मेदारियों के आरंभिक समय में ही मुझे यह आभास हो गया था कि मेरे बच्चों को मेरे द्वारा लिखी गई पुस्तकों की संख्या से, मुझे मिलने वाली उपाधियों से या कितने स्थानों पर मुझे प्रचार के लिए निमंत्रण मिलता है आदि बातों से कोई लेना-देना नहीं है। उन के लिए महत्वपूर्ण था तो बस मेरा उनके प्रति ध्यान और उनके साथ बिताया गया समय, और वे इन्हीं के लालायित रहते थे। उनकी मुझ से यही आशा रहती थी कि मैं उनसे प्रेम दिखाऊँ, धैर्य के साथ उन्हें उनकी गलतियों के लिए क्षमा करूँ, उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति करूँ और उनके रहने और परवरिश के लिए एक अच्छा स्थान बनाए रखूँ। पितृत्व की ज़िम्मेदारियों की यह सूची चाहे लंबी ना भी हो, तौ भी गंभीर अवश्य है।

   उन लोगों का क्या जिन्हें यह सब करने वाले पिता नहीं मिले हों? हमारी व्यकतिगत परिस्थितियाँ चाहे कैसी भी रही हों, फिर भी हम सभी इस तथ्य से प्रोत्साहित एवं आशावान रह सकते हैं कि प्रभु यीशु मसीह में होकर हमें सबसे सिद्ध और सबसे उत्तम स्वर्गीय पिता - स्वयं परमेश्वर तक पहुँच प्राप्त है।

   क्या आपने सृष्टि के परमेश्वर को व्यक्तिगत रीति से अपने पिता के रूप में जान लिया है? यदि नहीं, तो वह अभी आपके निर्णय की प्रतीक्षा में है। - जो स्टोवैल


स्वर्गीय पिता परमेश्वर की बाहें अपने बच्चों तो थामे रखने और उनकी देखरेख करते रहने से कभी नहीं थकतीं।

और अनन्त जीवन यह है, कि वे तुझ अद्वैत सच्चे परमेश्वर को और यीशु मसीह को, जिसे तू ने भेजा है, जाने। - यूहन्ना 17:3

बाइबल पाठ: मत्ती 6:5-13
Matthew 6:5 और जब तू प्रार्थना करे, तो कपटियों के समान न हो क्योंकि लोगों को दिखाने के लिये सभाओं में और सड़कों के मोड़ों पर खड़े हो कर प्रार्थना करना उन को अच्छा लगता है; मैं तुम से सच कहता हूं, कि वे अपना प्रतिफल पा चुके। 
Matthew 6:6 परन्तु जब तू प्रार्थना करे, तो अपनी कोठरी में जा; और द्वार बन्‍द कर के अपने पिता से जो गुप्‍त में है प्रार्थना कर; और तब तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा। 
Matthew 6:7 प्रार्थना करते समय अन्यजातियों की नाईं बक बक न करो; क्योंकि वे समझते हैं कि उनके बहुत बोलने से उन की सुनी जाएगी। 
Matthew 6:8 सो तुम उन की नाईं न बनो, क्योंकि तुम्हारा पिता तुम्हारे मांगने से पहिले ही जानता है, कि तुम्हारी क्या क्या आवश्यक्ता है। 
Matthew 6:9 सो तुम इस रीति से प्रार्थना किया करो; “हे हमारे पिता, तू जो स्वर्ग में है; तेरा नाम पवित्र माना जाए। 
Matthew 6:10 तेरा राज्य आए; तेरी इच्छा जैसी स्वर्ग में पूरी होती है, वैसे पृथ्वी पर भी हो। 
Matthew 6:11 हमारी दिन भर की रोटी आज हमें दे। 
Matthew 6:12 और जिस प्रकार हम ने अपने अपराधियों को क्षमा किया है, वैसे ही तू भी हमारे अपराधों को क्षमा कर। 
Matthew 6:13 और हमें परीक्षा में न ला, परन्तु बुराई से बचा; क्योंकि राज्य और पराक्रम और महिमा सदा तेरे ही हैं।” आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 64-66


शनिवार, 14 जून 2014

आराधना के योग्य


   परमेश्वर के वचन बाइबल की अन्तिम पुस्तक, यूहन्ना के प्रकाशितवाक्य, के 5 अध्याय में प्रभु यीशु मसीह के दो शब्द चित्र मिलते हैं - यहूदा का सिंह (पद 5) तथा वध किया हुआ मेमना (पद 6)। इन शब्द चित्रों का संदर्भ देकर प्रसिद्ध मसीही प्रचारक चार्ल्स स्पर्जन ने प्रश्न किया, "ऐसा क्यों है कि हमारा महान प्रभु अपनी महिमा में घातक घावों के साथ दिखाया गया है?" अपने प्रश्न का स्पर्जन ने उत्तर दिया, "क्योंकि वे घाव ही उसकी महिमा हैं।"

   सामान्यतः मेमने का चिन्ह सामर्थ और विजय का प्रतीक नहीं हैं। अधिकांश लोग ऐसे चिन्ह पसन्द करते हैं जो सामर्थ दिखाते हैं और लोगों की प्रशंसा को आमंत्रित करते हैं। लेकिन परमेश्वर ने यही चुना कि वह एक शिशु बनकर संसार में अवतरित हो, एक गरीब बढ़ई के घर में जन्म ले और बड़ा हो। वह अपनी सेवकाई के दिनों में पैदल ही एक से दूसरे स्थान पर यात्रा करते हुए परमेश्वर के राज्य और धार्मिकता तथा पापों से पश्चताप का प्रचार करता रहा और एक रोमी क्रूस पर लटा कर उसे मार डाला गया। सबने, यहाँ तक कि उसके चेलों ने भी यही सोचा कि क्रूस पर उसकी मृत्यु का तात्पर्य था अपने समय की स्थापित धर्म व्यवस्था को चुनौती देने वाले का अन्त। लेकिन मेमने के समान दीन जीवन बिताने वाले प्रभु यीशु मसीह ने तीसरे दिन मृतकों में से पुनः जी उठ कर, परमेश्वर की अतुल्य सामर्थ और महिमा को संसार के सामने प्रकट किया।

   वह दिन आने वाला है जब प्रभु यीशु अपनी महिमा में लौट कर आएगा और अपना राज्य स्थापित करेगा। उस दिन सारे संसार के सब लोग उसके सामने दण्डवत करेंगे और कहेंगे, "... कि वध किया हुआ मेम्ना ही सामर्थ, और धन, और ज्ञान, और शक्ति, और आदर, और महिमा, और धन्यवाद के योग्य है" (प्रकाशितवाक्य 5:12)! मेमने के समान दीन और नम्र प्रभु यीशु, सिंह के समान सामर्थी और जयवन्त तथा हमारी आराधना के योग्य है। - सी. पी. हिया


अपने राजा के आदर के लिए हम उसका यशगान करते हैं।

इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है। कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे है; वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें। और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है। फिलिप्पियों 2:9-11

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 5:1-12
Revelation 5:1 और जो सिंहासन पर बैठा था, मैं ने उसके दाहिने हाथ में एक पुस्‍तक देखी, जो भीतर और बाहर लिखी हुई भी, और वह सात मुहर लगा कर बन्‍द की गई थी। 
Revelation 5:2 फिर मैं ने एक बलवन्‍त स्वर्गदूत को देखा जो ऊंचे शब्द से यह प्रचार करता था कि इस पुस्‍तक के खोलने और उस की मुहरें तोड़ने के योग्य कौन है? 
Revelation 5:3 और न स्वर्ग में, न पृथ्वी पर, न पृथ्वी के नीचे कोई उस पुस्‍तक को खोलने या उस पर दृष्टि डालने के योग्य निकला। 
Revelation 5:4 और मैं फूट फूटकर रोने लगा, क्योंकि उस पुस्‍तक के खोलने, या उस पर दृष्टि करने के योग्य कोई न मिला। 
Revelation 5:5 तब उन प्राचीनों में से एक ने मुझे से कहा, मत रो; देख, यहूदा के गोत्र का वह सिंह, जो दाऊद का मूल है, उस पुस्‍तक को खोलने और उसकी सातों मुहरें तोड़ने के लिये जयवन्‍त हुआ है। 
Revelation 5:6 और मैं ने उस सिंहासन और चारों प्राणियों और उन प्राचीनों के बीच में, मानों एक वध किया हुआ मेम्ना खड़ा देखा: उसके सात सींग और सात आंखे थीं; ये परमेश्वर की सातों आत्माएं हैं, जो सारी पृथ्वी पर भेजी गई हैं। 
Revelation 5:7 उसने आ कर उसके दाहिने हाथ से जो सिंहासन पर बैठा था, वह पुस्‍तक ले ली, 
Revelation 5:8 और जब उसने पुस्‍तक ले ली, तो वे चारों प्राणी और चौबीसों प्राचीन उस मेम्ने के साम्हने गिर पड़े; और हर एक के हाथ में वीणा और धूप से भरे हुए सोने के कटोरे थे, ये तो पवित्र लोगों की प्रार्थनाएं हैं। 
Revelation 5:9 और वे यह नया गीत गाने लगे, कि तू इस पुस्‍तक के लेने, और उसकी मुहरें खोलने के योग्य है; क्योंकि तू ने वध हो कर अपने लोहू से हर एक कुल, और भाषा, और लोग, और जाति में से परमेश्वर के लिये लोगों को मोल लिया है। 
Revelation 5:10 और उन्हें हमारे परमेश्वर के लिये एक राज्य और याजक बनाया; और वे पृथ्वी पर राज्य करते हैं। 
Revelation 5:11 और जब मैं ने देखा, तो उस सिंहासन और उन प्राणियों और उन प्राचीनों के चारों ओर बहुत से स्‍वर्गदूतों का शब्द सुना, जिन की गिनती लाखों और करोड़ों की थी। 
Revelation 5:12 और वे ऊंचे शब्द से कहते थे, कि वध किया हुआ मेम्ना ही सामर्थ, और धन, और ज्ञान, और शक्ति, और आदर, और महिमा, और धन्यवाद के योग्य है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 61-63


शुक्रवार, 13 जून 2014

सर्वोत्तम शिक्षक


   बहुत से जवान लोगों ने, भविष्य की अपनी तैयारी के संबंध में मुझ से कहा है, "हमें संसार में जाकर अधर्मी परिस्थितियों और लोगों का अनुभव लेना आवश्यक है जिस से हम उनके लिए तैयार और उनका सामना करने के लिए सामर्थी बन सकें।" इस विचारधारा ने बहुत से अपरिपक्व मसीहियों को निगल लिया है और कुछ को तो परमेश्वर के विरुद्ध भी कर दिया है।

   यह सच है कि हम संसार में रहते हैं तथा हमें संसार में ही रहना भी है (यूहन्ना 17:15) और अपने स्कूल, व्यवसाय, पड़ौस आदि में गैर-मसीही लोगों और विचारधारा का सामना भी हमें करना पड़ता है, इसलिए यह अति आवश्यक है कि हम सावधान रहें कि संसार की बातों का सामना करते करते कहीं हमें उन के अनुरूप ना होने लग जाएं, उन से संबंध ना बनाने लग जाएं। हम सब मसीही विश्वासी परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 1:1 में दिए परमेश्वर के निर्देश के पालन से भली-भांति परिपक्व हो सकते हैं। इस भजन में दिए निर्देशों के अनुसार हमें:
  • प्रथम, ध्यान रखना है कि हमारे चुनाव तथा निर्णय "दुष्टों की युक्ति" के अनुसार ना हों।
  • दूसरे, हमें अपने आप को ऐसी परिस्थितियों से दूर रखना है जहाँ वे लोग जो मसीह यीशु को व्यक्तिगत रीति से नहीं जानते और उसे समर्पित जीवन व्यतीत नहीं करते, वे हमारे सोच-विचार को प्रभावित कर सकें।
  • तीसरे, हम उनके साथ निकट या घनिष्ट ना हों जो परमेश्वर के वचन बाइबल का, परमेश्वर का और हमारे जीवनों में उनकी भूमिका का ठट्ठा करते हैं या उसे महत्वहीन मानते हैं।
   ऐसे लोगों की सलाह हमें परमेश्वर से दूर ले जाती है। इसलिए अपने प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और परामर्श के लिए हमें परमेश्वर के पवित्र वचन बाइबल तथा बाइबल से प्रेम करने वालों एवं उसके आज्ञाकारी रहकर जीवन व्यतीत करने वाले लोगों के पास ही जाना चाहिए। संसार का ज्ञान या अनुभव नहीं वरन परमेश्वर और उसका जीवता एवं सच्चा वचन ही हर बात तथा परिस्थिति के लिए हमारा सर्वोत्तम शिक्षक है। - डेव ब्रैनन


परमेश्वर के वचन बाइबल से अपने मस्तिष्क को भर लें, उसे अपने मन पर राज्य और अपने जीवन का मार्गदर्शन करने दें।

और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो। - रोमियों 12:2 

बाइबल पाठ: भजन 1
Psalms 1:1 क्या ही धन्य है वह पुरूष जो दुष्टों की युक्ति पर नहीं चलता, और न पापियों के मार्ग में खड़ा होता; और न ठट्ठा करने वालों की मण्डली में बैठता है! 
Psalms 1:2 परन्तु वह तो यहोवा की व्यवस्था से प्रसन्न रहता; और उसकी व्यवस्था पर रात दिन ध्यान करता रहता है। 
Psalms 1:3 वह उस वृक्ष के समान है, जो बहती नालियों के किनारे लगाया गया है। और अपनी ऋतु में फलता है, और जिसके पत्ते कभी मुरझाते नहीं। इसलिये जो कुछ वह पुरूष करे वह सफल होता है।
Psalms 1:4 दुष्ट लोग ऐसे नहीं होते, वे उस भूसी के समान होते हैं, जो पवन से उड़ाई जाती है। 
Psalms 1:5 इस कारण दुष्ट लोग अदालत में स्थिर न रह सकेंगे, और न पापी धर्मियों की मण्डली में ठहरेंगे; 
Psalms 1:6 क्योंकि यहोवा धर्मियों का मार्ग जानता है, परन्तु दुष्टों का मार्ग नाश हो जाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 58-60


गुरुवार, 12 जून 2014

उपयोगी


   नर मोर बहुत खूबसूरत पक्षी होते हैं। उनकी रंगीन पंखों से बनी लंबी पूँछ, उस पूँछ में भिन्न प्रकार के पंख और उनके चमकते चटकीले रंग, उनके सिर की कलगी, उनकी गरदन और छाती के चमकते हुए रंग बस देखते ही बनते हैं, खासकर जब वे अपनी पूँछ खड़ी करके नृत्य करते हैं तो देखने वालों को मानों मंत्र-मुग्ध कर देते हैं। लेकिन उनके पाँव बड़े कुरूप होते हैं!

   ईमानदारी से कहें तो यह हम सब की दशा भी है - हम सब में कोई ना कोई कमज़ोरी या किसी ना किसी बात की घटी अवश्य होती है - वह हम में जन्म से विद्यमान हो सकती है या किसी कारणवश हम में आने वाली हो सकती है; वह लंबे समय से हमारे साथ हो सकती है, या फिर हाल ही में किसी घटना के कारण हम में आ सकती है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने अपनी एक कमी को "शरीर में चुभाया गया काँटा" कहा जो उसे नम्र रखने के लिए था (2 कुरिन्थियों 12:7-9)। पौलुस ने तीन बार परमेश्वर से उसे हटाने के लिए प्रार्थना करी, संभवतः इस विचार से कि उसके हटने के बाद वह और भली रीति से परमेश्वर की सेवा करने पाएगा, लेकिन परमेश्वर ने उसे आश्वस्त किया कि "मेरा अनुग्रह ही तेरे लिए काफी है" और "मेरी सामर्थ निर्बलता में सिद्ध होती है"। परमेश्वर के इस आश्वासन पर पौलुस का प्रत्युत्तर था, "इसलिए मैं बड़े आनन्द से अपनी निर्बलताओं पर घमण्ड करूँगा कि मसीह की सामर्थ्य मुझ पर छाया करती रहे"।

   मसीही विश्वास की एक विशेषता है कि परमेश्वर अपने महत्वपूर्ण कार्यों को हमारे द्वारा संपन्न कराने के लिए हमें हमारी निर्बलताओं के बावजूद चुन लेता है, ना कि इसलिए कि हम में कोई वाकपटुता है, या हम कार्य करने की विशेष योग्यता रखते हैं या हमारा रूप-रंग अच्छा है। प्रसिद्ध मिशनरी सेवक हडसन टेलर ने कहा था, "परमेश्वर को अपने कार्य करवाने के लिए किसी योग्यता-विहीन तथा निर्बल जन की आवश्यकता थी, इसलिए उसने मुझे और आपको चुन लिया"।

   जब हम परमेश्वर को ही अपनी सामर्थ और योग्यता का आधार बना लेते हैं, तो वो हमें ऐसे उपयोग करने पाता है जो हमारी कलपना से परे है। - डेविड रोपर


परमेश्वर की सामर्थ हमारी निर्बलता में प्रकट होती है।

हे भाइयो, अपने बुलाए जाने को तो सोचो, कि न शरीर के अनुसार बहुत ज्ञानवान, और न बहुत सामर्थी, और न बहुत कुलीन बुलाए गए। परन्तु परमेश्वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है, कि ज्ञान वालों को लज्ज़ित करे; और परमेश्वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है, कि बलवानों को लज्ज़ित करे। - 1 कुरिन्थियों 1:26-27

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 12:7-10
2 Corinthians 12:7 और इसलिये कि मैं प्रकाशों की बहुतायत से फूल न जाऊं, मेरे शरीर में एक कांटा चुभाया गया अर्थात शैतान का एक दूत कि मुझे घूँसे मारे ताकि मैं फूल न जाऊं। 
2 Corinthians 12:8 इस के विषय में मैं ने प्रभु से तीन बार बिनती की, कि मुझ से यह दूर हो जाए। 
2 Corinthians 12:9 और उसने मुझ से कहा, मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है; क्योंकि मेरी सामर्थ निर्बलता में सिद्ध होती है; इसलिये मैं बड़े आनन्द से अपनी निर्बलताओं पर घमण्‍ड करूंगा, कि मसीह की सामर्थ मुझ पर छाया करती रहे। 
2 Corinthians 12:10 इस कारण मैं मसीह के लिये निर्बलताओं, और निन्‍दाओं में, और दरिद्रता में, और उपद्रवों में, और संकटों में, प्रसन्न हूं; क्योंकि जब मैं निर्बल होता हूं, तभी बलवन्‍त होता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 55-57