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शुक्रवार, 12 दिसंबर 2014

सांत्वना


   अमेरिका के इतिहास में एक बहुत त्रासदीपूर्ण और दुखदायी घटना है 19वीं सदी के आरंभ में अमेरिका के मूल रेड इन्डियन निवासियों का ज़बर्दस्ती किया गया विस्थापन। उन मूल निवासियों ने बढ़ती हुई श्वेत आबादी के लोगों के साथ संधियाँ करी थीं, उनके साथ दुश्मनों के विरुद्ध युद्ध में सहयोग किया था, लेकिन बाद में उन्हीं लोगों को अपनी भूमि छोड़कर अन्य स्थानों पर जाकर बसने के लिए मजबूर कर दिया गया। सन 1838 की सर्दियों में चिरोकी कबीले के हज़ारों लोगों को पश्चिम की ओर 1000 मील की एक कठिन यात्रा करने के लिए मजबूर कर दिया गया। इस अन्याय के कारण उनमें से हज़ारों मर गए क्योंकि सर्दी के समय में इस लंबी और कठिन यात्रा को कर पाने के लायक कपड़े, जूतियाँ और आवश्यक वस्तुएं उनके पास नहीं थे; इसलिए उनकी इस यात्रा को "आँसुओं की यात्रा" कहा जाता है।

   आज भी संसार अन्याय, पीड़ा और मनोव्यथा से भरा हुआ है। आज भी बहुतेरों को अनेक कारणों से अपने जीवन में "आँसुओं की यात्रा" करनी पड़ती है; उन्हें लगता है कि उनकी पीड़ा को जानने और समझने वाला कोई नहीं है, कोई उनकी परवाह नहीं करता है। लेकिन प्रभु परमेश्वर हमारी पीड़ाओं को देखता है और हमारे दुखी हृदयों को सांत्वना भी देता है (2 कुरिन्थियों 1:3-5)। साथ ही वह उस आते समय कि भी आशा देता है जिसमें पाप और अन्याय का कोई दाग़ नहीं रहेगा; उस समय और उस स्थान पर "वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं" (प्रकाशितवाक्य 21:4)।

   परमेश्वर ना केवल भविष्य में हमारे आँसुओं को पोंछने और हमें सांत्वना देने की आशा देता है, वायदा करता है, वरन जब हम विश्वास और समर्पण के साथ उसके पास अपने दुखों को लेकर आते हैं तो वह आज भी हमारे सभी आँसुओं को पोंछता है, हर परिस्थिति में हमें सांत्वना देता है। - बिल क्राउडर


जब परमेश्वर हमारे जीवन में परीक्षाओं को आने की अनुमति देता है तो साथ ही अपनी शान्ति तथा सांत्वना भी हमें उपलब्ध करवा देता है।

वह हमारे सब क्‍लेशों में शान्‍ति देता है; ताकि हम उस शान्‍ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्हें भी शान्‍ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्‍लेश में हों। - 2 कुरिन्थियों 1:4

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 21:1-7
Revelation 21:1 फिर मैं ने नये आकाश और नयी पृथ्वी को देखा, क्योंकि पहिला आकाश और पहिली पृथ्वी जाती रही थी, और समुद्र भी न रहा। 
Revelation 21:2 फिर मैं ने पवित्र नगर नये यरूशलेम को स्वर्ग पर से परमेश्वर के पास से उतरते देखा, और वह उस दुल्हिन के समान थी, जो अपने पति के लिये सिंगार किए हो। 
Revelation 21:3 फिर मैं ने सिंहासन में से किसी को ऊंचे शब्द से यह कहते सुना, कि देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है; वह उन के साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उन के साथ रहेगा; और उन का परमेश्वर होगा। 
Revelation 21:4 और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं। 
Revelation 21:5 और जो सिंहासन पर बैठा था, उसने कहा, कि देख, मैं सब कुछ नया कर देता हूं: फिर उसने कहा, कि लिख ले, क्योंकि ये वचन विश्वास के योग्य और सत्य हैं। 
Revelation 21:6 फिर उसने मुझ से कहा, ये बातें पूरी हो गई हैं, मैं अलफा और ओमिगा, आदि और अन्‍त हूं: मैं प्यासे को जीवन के जल के सोते में से सेंतमेंत पिलाऊंगा। 
Revelation 21:7 जो जय पाए, वही इन वस्‍तुओं का वारिस होगा; और मैं उसका परमेश्वर होऊंगा, और वह मेरा पुत्र होगा।

एक साल में बाइबल: 
  • तीतुस 1-3



गुरुवार, 11 दिसंबर 2014

प्रेम व्यवहार


   कुछ वर्ष पहले की बात हैं मैं अपने एक मित्र के साथ परमेश्वर के वचन बाइबल से मत्ती 26 अध्याय पढ़ रहा था, जिसमें प्रभु यीशु के क्रूस पर चढ़ाए जाने के लिए पकड़वाए जाने से ठीक पहले की घटनाक्रम लिखा गया है। जब हम पढ़ते पढ़ते उस खण्ड पर आए जिसमें प्रभु यीशु तीन बार अपने चेलों से अपने लिए प्रार्थना करने को कहता है, और हर बार उन्हें प्रार्थना करते नहीं वरन सोते हुए पाता है, तो क्रोधावेश में होकर वह मित्र बोला, "यदि तब प्रभु यीशु के साथ मैं होता तो कभी नहीं सोता, मैं प्रभु का पूरा-पूरा साथ देता। कोई कैसे सो सकता है जबकि बारंबार प्रभु उन से कह रहा है कि वह बहुत व्याकुल है? प्रभु तो उनसे निवेदन कर रहा था।"

   यह जानते और समझते हुए कि हमारे परिवारजन हमारे कार्य करते रहने की व्यस्तता और लंबी दिनचर्या को लेकर कैसे संघर्ष करते हैं, मैंने अपने उस मित्र से कहा, "ऐसा कितनी बार हुआ है कि हमारे बच्चे स्कूल के किसी कार्यक्रम में, वहाँ बैठे अन्य अभिभावकों के मध्य हमें ढूँढ़ रहे होते हैं लेकिन हम वहाँ उनके लिए, उनके साथ नहीं होते? क्या हमारे बच्चों को कभी कभी अकेले ही परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता? हमारे परिवार और मित्रजनों को अनेक बार हमारी ओर से मिलने वाले व्यक्तिगत ध्यान और परवाह की आवश्यकता होती है; जैसे प्रभु यीशु की अपने चेलों से, वैसे ही हमारे परिवार और मित्रजनों की हम से उनका साथ निभाने की आशा रहती है, परन्तु जैसे प्रभु को अपने चेलों से वैसे ही उन्हें भी हम से निराशा ही मिलती है।"

   जीवन की माँगों और हम से जुड़ी लोगों की आशाओं के बीच तालमेल बैठा कर दोनों को निभाते रहना कोई सरल कार्य नहीं है, परन्तु ऐसा ना करना भावनाओं के साथ विश्वासघात भी है। उन चेलों द्वारा प्रभु यीशु को उस रात निराश करने की बात हमें उकसाती है कि हम आज अपने जीवनों में झाँक कर देखें कि हम अपने प्रभु और अपने प्रीय जनों को कितनी बार और कैसे-कैसे निराश करते रहते हैं; और फिर प्रभु यीशु से सहायता माँगें कि वह हमारा मार्गदर्शन करे कि हम वह प्रेम व्यवहार प्रदर्शित कर सकें जो हमें करना चाहिए। - रैन्डी किल्गोर


दूसरों की आवश्यकता के प्रति हमारी संवेदनशीलता, प्रभु यीशु के प्रति हमारे प्रेम का एक माप है।

इसलिये जागते रहो और हर समय प्रार्थना करते रहो कि तुम इन सब आने वाली घटनाओं से बचने, और मनुष्य के पुत्र के साम्हने खड़े होने के योग्य बनो। - लूका 21:36

बाइबल पाठ: मत्ती 26:36-46
Matthew 26:36 तब यीशु ने अपने चेलों के साथ गतसमनी नाम एक स्थान में आया और अपने चेलों से कहने लगा कि यहीं बैठे रहना, जब तक कि मैं वहां जा कर प्रार्थना करूं। 
Matthew 26:37 और वह पतरस और जब्‍दी के दोनों पुत्रों को साथ ले गया, और उदास और व्याकुल होने लगा। 
Matthew 26:38 तब उसने उन से कहा; मेरा जी बहुत उदास है, यहां तक कि मेरे प्राण निकला चाहते: तुम यहीं ठहरो, और मेरे साथ जागते रहो। 
Matthew 26:39 फिर वह थोड़ा और आगे बढ़कर मुंह के बल गिरा, और यह प्रार्थना करने लगा, कि हे मेरे पिता, यदि हो सके, तो यह कटोरा मुझ से टल जाए; तौभी जैसा मैं चाहता हूं वैसा नहीं, परन्तु जैसा तू चाहता है वैसा ही हो। 
Matthew 26:40 फिर चेलों के पास आकर उन्हें सोते पाया, और पतरस से कहा; क्या तुम मेरे साथ एक घड़ी भी न जाग सके? 
Matthew 26:41 जागते रहो, और प्रार्थना करते रहो, कि तुम परीक्षा में न पड़ो: आत्मा तो तैयार है, परन्तु शरीर दुर्बल है। 
Matthew 26:42 फिर उसने दूसरी बार जा कर यह प्रार्थना की; कि हे मेरे पिता, यदि यह मेरे पीए बिना नहीं हट सकता तो तेरी इच्छा पूरी हो। 
Matthew 26:43 तब उसने आकर उन्हें फिर सोते पाया, क्योंकि उन की आंखें नींद से भरी थीं। 
Matthew 26:44 और उन्हें छोड़कर फिर चला गया, और वही बात फिर कहकर, तीसरी बार प्रार्थना की। 
Matthew 26:45 तब उसने चेलों के पास आकर उन से कहा; अब सोते रहो, और विश्राम करो: देखो, घड़ी आ पहुंची है, और मनुष्य का पुत्र पापियों के हाथ पकड़वाया जाता है। 
Matthew 26:46 उठो, चलें; देखो, मेरा पकड़वाने वाला निकट आ पहुंचा है।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 तिमुथियुस 1-4


बुधवार, 10 दिसंबर 2014

मार्गदर्शन


   यात्रा करते हुए किसी से मार्गदर्शन लेना मुझे अच्छा नहीं लगता। मैं यही मान कर चलता हूँ कि यदि मैं प्रयास करता रहूँगा तो अन्ततः गन्तव्य स्थान पर पहुँच ही जाऊँगा। इसके विपरीत मेरी पत्नि मार्टी कभी मार्गदर्शन लेने से नहीं हिचकिचाती, और उसे बड़ा अजीब लगता है जब मैं मार्गदर्शन लेने से बचने के प्रयास यह सोच कर करता हूँ कि यह इस बात को दिखाता है कि मैं इस बात से अनभिज्ञ हूँ कि मैं कहाँ हूँ और मुझे आगे कैसे जाना है। अन्ततः होता यही है कि मार्टी गन्तव्य स्थान पर मुझसे पहले और एक अच्छी मनोदशा में पहुँच जाती है, जबकि मैं इधर-उधर भटकता और चिड़चिड़ाता रहता हूँ।

   जीवन के मार्ग पर चलना भी एक यात्रा ही है, और हमारा यह मान कर चलना कि हम इस मार्ग पर अपनी समझ से चलने में सक्षम हैं, परमेश्वर के वचन बाइबल की चेतावनी के विपरीत है; बाइबल बताती है कि "ऐसा भी मार्ग है, जो मनुष्य को सीधा देख पड़ता है, परन्तु उसके अन्त में मृत्यु ही मिलती है" (नीतिवचन 16:25)। जीवन के मार्ग पर चलते चलते हम जब भी किसी दोराहे पर आते हैं और सही-गलत की पहचान कठिन होती है तब परमेश्वर से इस बारे में पूछना भला होता है क्योंकि परमेश्वर ने हमें सचेत किया है: "तू अपनी समझ का सहारा न लेना, वरन सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना। उसी को स्मरण कर के सब काम करना, तब वह तेरे लिये सीधा मार्ग निकालेगा" (नीतिवचन 3:5-6)।

   जीवन सही दिशा में अग्रसर होने से ही भली-भांति फलवंत होता है। यह अति अनिवार्य है कि हम अपने जीवन को आशीषमय तथा शान्तिपूर्ण संबंधों, प्रेम एवं सेवा के अर्थपूर्ण कार्यों, परमेश्वर के साथ एक भले और सन्तोषप्रद संबंध तथा अन्य ऐसी अनेक बातों की दिशा में लेकर चलें। ऐसी सही दिशा में चलते रहने के लिए परमेश्वर से मार्गदर्शन लेते रहना केवल एक अच्छा विचार ही नहीं, अनिवार्य भी है; इसके लिए अहंकार को तज कर एक समर्पित मन तथा नम्र हृदय लेकर परमेश्वर के साथ चलने की आवश्यकता होती है। इसीलिए परमेश्वर कहता है:  "जो बुद्धिमान हो, वही इन बातों को समझेगा; जो प्रवीण हो, वही इन्हें बूझ सकेगा; क्योंकि यहोवा के मार्ग सीधे हैं, और धर्मी उन में चलते रहेंगे, परन्तु अपराधी उन में ठोकर खाकर गिरेंगे" (होशे 14:9)। - जो स्टोवैल


परमेश्वर से मार्गदर्शन लेते रहें क्योंकि केवल वह ही है जिसे संपूर्ण मार्ग और अन्त स्थान का ज्ञान है।

यहोवा भला और सीधा है; इसलिये वह पापियों को अपना मार्ग दिखलाएगा। वह नम्र लोगों को न्याय की शिक्षा देगा, हां वह नम्र लोगों को अपना मार्ग दिखलाएगा। - भजन 25:8-9

बाइबल पाठ: होशे 14:1-9
Hosea 14:1 हे इस्राएल, अपने परमेश्वर यहोवा के पास लौट आ, क्योंकि तू ने अपने अधर्म के कारण ठोकर खाई है। 
Hosea 14:2 बातें सीख कर और यहोवा की ओर फिर कर, उस से कह, सब अधर्म दूर कर; अनुग्रह से हम को ग्रहण कर; तब हम धन्यवाद रूपी बलि चढ़ाएंगे। 
Hosea 14:3 अश्शूर हमारा उद्धार न करेगा, हम घोड़ों पर सवार न होंगे; और न हम फिर अपनी बनाई हुई वस्तुओं से कहेंगे, तुम हमारे ईश्वर हो; क्योंकि अनाथ पर तू ही दया करता है। 
Hosea 14:4 मैं उनकी भटक जाने की आदत को दूर करूंगा; मैं सेंतमेंत उन से प्रेम करूंगा, क्योंकि मेरा क्रोध उन पर से उतर गया है। 
Hosea 14:5 मैं इस्राएल के लिये ओस के समान हूंगा; वह सोसन की नाईं फूले-फलेगा, और लबानोन की नाईं जड़ फैलाएगा। 
Hosea 14:6 उसकी जड़ से पौधे फूटकर निकलेंगे; उसकी शोभा जलपाई की सी, और उसकी सुगन्ध लबानोन की सी होगी। 
Hosea 14:7 जो उसकी छाया में बैठेंगे, वे अन्न की नाईं बढ़ेंगे, वे दाखलता की नाईं फूले-फलेंगे; और उसकी कीर्ति लबानोन के दाखमधु की सी होगी। 
Hosea 14:8 एप्रैम कहेगा, मूरतों से अब मेरा और क्या काम? मैं उसकी सुनकर उस पर दृष्टि बनाए रखूंगा। मैं हरे सनौवर सा हूं; मुझी से तू फल पाया करेगा। 
Hosea 14:9 जो बुद्धिमान हो, वही इन बातों को समझेगा; जो प्रवीण हो, वही इन्हें बूझ सकेगा; क्योंकि यहोवा के मार्ग सीधे हैं, और धर्मी उन में चलते रहेंगे, परन्तु अपराधी उन में ठोकर खाकर गिरेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 तिमुथियुस 4-6


मंगलवार, 9 दिसंबर 2014

उपहार


   पिछले वर्ष क्रिसमस पर मुझे कुछ बहुत अच्छे उपहार मिले, लेकिन जिस उपहार से मैं सबसे अधिक आनन्दित हुई वह था प्रीय जनों के साथ बिताए गए समय का उपहार - वह समय जो उन्होंने मेरे लिए निकाला और मेरे साथ बिताया: मुझे अपने उन नौ पौत्र-पौत्रियों के साथ खेलने का समय मिला जो एक भिन्न प्रदेश में रहते थे और हमारे पास क्रिसमस के लिए आए थे; मेरी एक भतीजी अपने पति और अपनी 18 महीने की बेटी के साथ हमारे साथ क्रिसमस पर चर्च में उपासना करने आए; मुझे अवसर मिला अपने एक पूर्व सह-कार्यकरता एवं सहयोगी तथा उसकी पत्नि के साथ, जो अस्वस्थ रहते हैं, समय बिताने का; कुछ पुराने मित्रों के साथ आनन्द मनाने का और प्रीय जनों के साथ क्रिसमस की कहानी सुनने-सुनाने का। ना केवल वे उपहार वरन वह समय और संगति जो हम एक दूसरे के साथ बाँट सके, एक दूसरे को दे सके, यह सब कुछ उस प्रेम के कारण ही तो था जो हम एक दूसरे से करते हैं। उसी प्रेम ने हमें दूसरों को कुछ उपहार देने के लिए प्रेरित किया।

   हमारा परमेश्वर पिता भी हमसे बहुत प्रेम करता है, और अपने इसी प्रेम को दिखाने के लिए उसने हमारे लिए एक ऐसा उपहार संसार में भेजा जो कभी पुराना नहीं पड़ता, जिसकी उपयोगिता का कभी अन्त नहीं होता, जिसकी आवश्यकता हमें सदा रहती है, जो सदा हमारी सहायता के लिए उपलब्ध रहता है - अपना एकलौता पुत्र प्रभु यीशु मसीह। लगभग 2000 वर्ष पहले प्रभु यीशु संसार के उद्धार तथा पापों की क्षमा के लिए कपड़ों में लपेटकर एक चरनी में रखे हुए उपहार के रूप में संसार में आया (लूका 2:7, 12)। उसके आगमन का समाचार उसी रात को स्वर्गदूतों द्वारा मैदान में भेड़ों की रखवाली कर रहे चरवाहों को दिया गया (पद 8-14), और वे चरवाहे तुरंत उसे देखने के लिए गए; तत्पश्चात वे इस अनुपम उपहार के बारे में औरों को बताने से अपने आप रोक नहीं सके (पद 16-17)। प्रभु यीशु उन्हीं लोगों के बीच बड़ा हुआ और उन्हें परमेश्वर तथा उसके राज्य के बारे में सिखाया, लेकिन फिर भी बहुतेरों ने उस पर अविश्वास किया। वह हमारे पापों को अपने ऊपर लिए क्रूस पर मारा गया, गाड़ा गया और फिर तीसरे दिन जीवित हो उठा, और आज जीवित प्रभु है जो सारे संसार के सभी लोगों को पापों की क्षमा और उद्धार प्रदान करता है, यदि लोग उसे स्वीकार कर लें, उस पर विश्वास करें।

   हे पिता परमेश्वर हमारे प्रति आपके महान प्रेम के कारण दिए गए प्रभु यीशु में विश्वास द्वारा पापों की क्षमा और आपके साथ मिलने वाले अनन्त जीवन के इस अद्भुत उपहार के लिए आपका बारंबार धन्यवाद। - ऐनी सेटास


संसार को परमेश्वर का उपहार है संसार के सभी लोगों को अनन्त जीवन देने वाला उद्धारकर्ता।

क्योंकि पाप की मजदूरी तो मृत्यु है, परन्तु परमेश्वर का वरदान हमारे प्रभु मसीह यीशु में अनन्त जीवन है। - रोमियों 6:23

बाइबल पाठ: लूका 2:1-18
Luke 2:1 उन दिनों में औगूस्‍तुस कैसर की ओर से आज्ञा निकली, कि सारे जगत के लोगों के नाम लिखे जाएं। 
Luke 2:2 यह पहिली नाम लिखाई उस समय हुई, जब क्‍विरिनियुस सूरिया का हाकिम था। 
Luke 2:3 और सब लोग नाम लिखवाने के लिये अपने अपने नगर को गए। 
Luke 2:4 सो यूसुफ भी इसलिये कि वह दाऊद के घराने और वंश का था, गलील के नासरत नगर से यहूदिया में दाऊद के नगर बैतलहम को गया। 
Luke 2:5 कि अपनी मंगेतर मरियम के साथ जो गर्भवती थी नाम लिखवाए। 
Luke 2:6 उन के वहां रहते हुए उसके जनने के दिन पूरे हुए। 
Luke 2:7 और वह अपना पहिलौठा पुत्र जनी और उसे कपड़े में लपेटकर चरनी में रखा: क्योंकि उन के लिये सराय में जगह न थी। 
Luke 2:8 और उस देश में कितने गड़रिये थे, जो रात को मैदान में रहकर अपने झुण्ड का पहरा देते थे। 
Luke 2:9 और प्रभु का एक दूत उन के पास आ खड़ा हुआ; और प्रभु का तेज उन के चारों ओर चमका, और वे बहुत डर गए। 
Luke 2:10 तब स्वर्गदूत ने उन से कहा, मत डरो; क्योंकि देखो मैं तुम्हें बड़े आनन्द का सुसमाचार सुनाता हूं जो सब लोगों के लिये होगा। 
Luke 2:11 कि आज दाऊद के नगर में तुम्हारे लिये एक उद्धारकर्ता जन्मा है, और यही मसीह प्रभु है। 
Luke 2:12 और इस का तुम्हारे लिये यह पता है, कि तुम एक बालक को कपड़े में लिपटा हुआ और चरनी में पड़ा पाओगे। 
Luke 2:13 तब एकाएक उस स्वर्गदूत के साथ स्‍वर्गदूतों का दल परमेश्वर की स्‍तुति करते हुए और यह कहते दिखाई दिया। 
Luke 2:14 कि आकाश में परमेश्वर की महिमा और पृथ्वी पर उन मनुष्यों में जिनसे वह प्रसन्न है शान्‍ति हो।
Luke 2:15 जब स्वर्गदूत उन के पास से स्वर्ग को चले गए, तो गड़रियों ने आपस में कहा, आओ, हम बैतलहम जा कर यह बात जो हुई है, और जिसे प्रभु ने हमें बताया है, देखें। 
Luke 2:16 और उन्होंने तुरन्त जा कर मरियम और यूसुफ को और चरनी में उस बालक को पड़ा देखा। 
Luke 2:17 इन्हें देखकर उन्होंने वह बात जो इस बालक के विषय में उन से कही गई थी, प्रगट की। 
Luke 2:18 और सब सुनने वालों ने उन बातों से जो गड़िरयों ने उन से कहीं आश्चर्य किया।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 तिमुथियुस 1-3


सोमवार, 8 दिसंबर 2014

अधीर


   चौराहे के उस पार से मैं देख रहा था, यातायात नियंत्रित करने वाली बत्ती जैसे ही लाल से हरी हुई, सबसे आगे खड़ी कार का चालक कार चलाने और आगे बढ़ाने में थोड़ा सा हिचकिचाया, और तभी अचानक ही न जाने कहाँ से कोई ऊँचे स्वर में चिल्लाने लगा - चलो! चलो!, आगे बढ़ो, चलो भी! यह शोर सुनकर वह चालक और अधिक असमंजस में पड़ गया तथा हड़बड़ा कर इधर-उधर देखने लगा, जानने को कि वह आवाज़ कहाँ से आ रही थी। तब मैंने देखा, उस चालक के पीछे खड़ी कार पर लाउडस्पीकर लगा हुआ था और उसकी सहायता से उस पिछली कार का चालक अगली कार वाले पर चिल्ला रहा था। अन्ततः आगे वाली कार का चालक कुछ संभला और अपनी कार आगे बढ़ा कर ले गया। मैं उस दूसरी कार के चालक की अधीरता एवं असभ्य वयवहार से चकित था।

   कभी कभी लोग सोचते हैं कि परमेश्वर भी ऐसा ही चिड़चिड़ा तथा अधीर है, और हमारी हर छोटी-मोटी गलती पर हमें दण्डित करने या हमें डाँटने के लिए हम पर नज़र गड़ाए रहता है, तैयार बैठा रहता है। लेकिन सच्चाई इसके बिलकुल विपरीत है। परमेश्वर अपने बच्चों के प्रति सदा धैर्य और प्रेम के साथ व्यवहार करता है, वह हमारी गलतियों के लिए हमें दण्ड देने या हमें डाँटने के लिए नहीं वरन हमें क्षमा करने और गलतियों को सुधारने के लिए अवसर देने को तैयार रहता है। वह हमारी रचना और परिस्थितियों को जानता है और हमसे उसी के अनुसार धीरज के साथ व्यवहार करता है (भजन 103:13-14)।

   प्रेरित पौलुस ने थिस्सुलुनीके के विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में उन्हें यह बात समझाने के लिए लिखा: "परमेश्वर के प्रेम और मसीह के धीरज की ओर प्रभु तुम्हारे मन की अगुवाई करे" (2 थिस्सुलुनीकियों 3:5)। परमेश्वर हमारे जीवनों में कार्यरत है और वह अपने उद्देश्यों को हमारे जीवनों में पूरा भी करेगा। लेकिन वह उन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए अधीर नहीं है, और ना ही किसी कठोर स्वामी के समान दण्ड अथवा क्रूरता के व्यवहार द्वारा हमसे कार्य करवाना चाहता है। हो सकता है कि हमें उकसाकर आगे बढ़ाने के लिए कभी उसे हमें हलकी सी चोट देनी पड़ जाए या फिर हमारी बनी रहने वाली लापरवाहियों के लिए कभी हमें अनुशासित भी करना पड़ जाए, लेकिन वह अधीर होकर ना कभी हम पर चिल्लाता है, ना कभी हमारा बुरा चाहता या करता है। - बिल क्राउडर


परमेश्वर अपने बड़े अनुग्रह में होकर हमारे लिए अनन्त भलाई द्वारा अपने अनन्त प्रेम को प्रकट करता है।

जैसे पिता अपने बालकों पर दया करता है, वैसे ही यहोवा अपने डरवैयों पर दया करता है। क्योंकि वह हमारी सृष्टि जानता है; और उसको स्मरण रहता है कि मनुष्य मिट्टी ही है। - भजन 103:13-14

बाइबल पाठ: 2 थिस्सुलुनीकियों 2:13-3:5
2 Thessalonians 2:13 पर हे भाइयो, और प्रभु के प्रिय लोगो चाहिये कि हम तुम्हारे विषय में सदा परमेश्वर का धन्यवाद करते रहें, कि परमेश्वर ने आदि से तुम्हें चुन लिया; कि आत्मा के द्वारा पवित्र बन कर, और सत्य की प्रतीति कर के उद्धार पाओ। 
2 Thessalonians 2:14 जिस के लिये उसने तुम्हें हमारे सुसमाचार के द्वारा बुलाया, कि तुम हमारे प्रभु यीशु मसीह की महिमा को प्राप्त करो। 
2 Thessalonians 2:15 इसलिये, हे भाइयों, स्थिर रहो; और जो जो बातें तुम ने क्या वचन, क्या पत्री के द्वारा हम से सीखी है, उन्हें थामे रहो।
2 Thessalonians 2:16 हमारा प्रभु यीशु मसीह आप ही, और हमारा पिता परमेश्वर जिसने हम से प्रेम रखा, और अनुग्रह से अनन्त शान्‍ति और उत्तम आशा दी है। 
2 Thessalonians 2:17 तुम्हारे मनों में शान्‍ति दे, और तुम्हें हर एक अच्‍छे काम, और वचन में दृढ़ करे।
2 Thessalonians 3:1 निदान, हे भाइयो, हमारे लिये प्रार्थना किया करो, कि प्रभु का वचन ऐसा शीघ्र फैले, और महिमा पाए, जैसा तुम में हुआ। 
2 Thessalonians 3:2 और हम टेढ़े और दुष्‍ट मनुष्यों से बचे रहें क्योंकि हर एक में विश्वास नहीं।
2 Thessalonians 3:3 परन्तु प्रभु सच्चा है; वह तुम्हें दृढ़ता से स्थिर करेगा: और उस दुष्‍ट से सुरक्षित रखेगा। 
2 Thessalonians 3:4 और हमें प्रभु में तुम्हारे ऊपर भरोसा है, कि जो जो आज्ञा हम तुम्हें देते हैं, उन्हें तुम मानते हो, और मानते भी रहोगे। 
2 Thessalonians 3:5 परमेश्वर के प्रेम और मसीह के धीरज की ओर प्रभु तुम्हारे मन की अगुवाई करे।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 थिस्सलुनीकियों 1-3


रविवार, 7 दिसंबर 2014

महज़ युवा


   हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के पश्चात डैरल ब्लिज़र्ड ने वह अनाथालय छोड़ दिया जिस में वह बड़ा हुआ था और अमेरिका की वायुसेना में भरती हो गया। उन दिनों दूसरा विश्वयुद्ध चल रहा था और शीघ्र ही डैरल को ऐसी ज़िम्मेदारियाँ उठानी पड़ गईं जो सामन्यतः व्यसक और अनुभवी लोगों को दी जाती हैं। कई वर्षों के बाद एक पत्रकार को दिए गए साक्षात्कार में डैरल ने कहा, "लड़ाकु विमान का पाएलेट बनने से पहले जो सबसे बड़ी चीज़ मैंने चलाई थी वह थी चार खच्चरों से चलने वाली गाड़ी, और अब मुझे चार इंजनों वाला विशालकाय युद्धविमान बी-17 चलाने की ज़िम्मेदारी दी गई थी। हम जो उन विमानों को उड़ा रहे थे महज़ युवा ही तो थे!"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम कई ऐसे लोगों के वृतांत लिखे हुए पाते हैं जिन्होंने साहस के साथ परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन किया, उसका अनुसरण किया, यद्यपि वे आयु और अनुभव में छोटे थे, युवा थे। भ्रष्ट आत्मिक नेतृत्व की स्थिति में भी "परन्तु शमूएल जो बालक था सनी का एपोद पहिने हुए यहोवा के साम्हने सेवा टहल किया करता था" (1 शमूएल 2:18)। दाऊद ने दैत्याकार गोलियत का सामना किया और उसे हराया जबकि उससे कहा जा रहा था, "... तू जा कर उस पलिश्ती के विरुद्ध नहीं युद्ध कर सकता; क्योंकि तू तो लड़का ही है, और वह लड़कपन ही से योद्धा है" (1 शमूएल 17:33)। प्रभु यीशु की माता मरियम भी एक युवती ही थी जब उसके पास परमेश्वर कि ओर से स्वर्गदूत के द्वारा समाचार आया कि वो जगत के उद्धारकर्ता तथा परमेश्वर के पुत्र की सांसारिक माता बनेगी, मरियम का स्वर्गदूत को उत्तर था, "...देख, मैं प्रभु की दासी हूं, मुझे तेरे वचन के अनुसार हो: तब स्वर्गदूत उसके पास से चला गया" (लूका 1:38)। युवा पास्टर तिमुथियुस से, जिस पर मण्डली की देखभाल और संचालन करने की ज़िम्मेदारी थी, प्रेरित पौलुस ने कहा: "कोई तेरी जवानी को तुच्‍छ न समझने पाए; पर वचन, और चाल चलन, और प्रेम, और विश्वास, और पवित्रता में विश्वासियों के लिये आदर्श बन जा" (1 तिमुथियुस 4:12)।

   परमेश्वर के परिवार में प्रत्येक जन का महत्व है, उपयोग है, आवश्यकता है। जो भी परमेश्वर के लिए कार्य करते हैं, वे परमेश्वर ही की सामर्थ से करते हैं, इसलिए युवा भी अपने विश्वास में निर्भीक रह सकते हैं और परमेश्वर पर विश्वास रखते हुए उसके द्वारा उन्हें दी गई ज़िम्मेदारी निभा सकते हैं; तथा व्यसक एवं प्रौढ़ उनका हौंसला बढ़ा सकते हैं जो परमेश्वर के लिए कार्यरत होने से इसलिए हिचकिचाते हैं क्योंकि वे अभी "महज़ युवा" ही हैं। - डेविड मैक्कैसलैंड


नवयुवकों का हौंसला बढ़ाने को कभी पुराना ना होने दें।

अपने आप को परमेश्वर का ग्रहणयोग्य और ऐसा काम करने वाला ठहराने का प्रयत्न कर, जो लज्जित होने न पाए, और जो सत्य के वचन को ठीक रीति से काम में लाता हो। - 2 तिमुथियुस 2:15 

बाइबल पाठ: 1 तिमुथियुस 4:9-16
1 Timothy 4:9 और यह बात सच और हर प्रकार से मानने के योग्य है। 
1 Timothy 4:10 क्योंकि हम परिश्रम और यत्‍न इसी लिये करते हैं, कि हमारी आशा उस जीवते परमेश्वर पर है; जो सब मनुष्यों का, और निज कर के विश्वासियों का उद्धारकर्ता है। 
1 Timothy 4:11 इन बातों की आज्ञा कर, और सिखाता रह। 
1 Timothy 4:12 कोई तेरी जवानी को तुच्‍छ न समझने पाए; पर वचन, और चाल चलन, और प्रेम, और विश्वास, और पवित्रता में विश्वासियों के लिये आदर्श बन जा। 
1 Timothy 4:13 जब तक मैं न आऊं, तब तक पढ़ने और उपदेश और सिखाने में लौलीन रह। 
1 Timothy 4:14 उस वरदान से जो तुझ में है, और भविष्यद्वाणी के द्वारा प्राचीनों के हाथ रखते समय तुझे मिला था, निश्‍चिन्‍त न रह। 
1 Timothy 4:15 उन बातों को सोचता रह, और इन्हीं में अपना ध्यान लगाए रह ताकि तेरी उन्नति सब पर प्रगट हो। अपनी और अपने उपदेश की चौकसी रख। 
1 Timothy 4:16 इन बातों पर स्थिर रह, क्योंकि यदि ऐसा करता रहेगा, तो तू अपने, और अपने सुनने वालों के लिये भी उद्धार का कारण होगा।
एक साल में बाइबल: 1 थिस्सलुनीकियों 1-5

शनिवार, 6 दिसंबर 2014

प्रोत्साहन


   क्या आपको प्रोत्साहन की आवश्यकता है? क्या संसार से मिल रहे विभिन्न निराशाजनक तथा बुरे समाचारों के कारण आपको कुछ ऐसा चाहिए जो आपको उभार सके, थोड़ा बढ़ावा दे सके? परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन संहिता में आपको अनेक ऐसे खण्ड मिल जाएंगे जो आपको हर परिस्थिति में प्रोत्साहित कर सकते हैं, उभार सकते हैं।

   उदाहरण के लिए भजन 19 को लीजिए - यहाँ पद 7-9 में हमें उन सकारात्मक बातों की एक संक्षिप्त सूची मिलती है जो परमेश्वर के नियम और व्यवस्था के पालन से होती हैं। परमेश्वर की व्यवस्था और नियम की बात सुनते ही लोगों के मन में संकोच होता है, उन्हें लगता है कि ये वे बातें हैं जो हमारी स्वतंत्रता को छीन लेती हैं, हमें बाँध देती हैं, हमारे आनन्द को भंग कर देती हैं। इस भजन के लेखक ने परमेश्वर के निर्देशों के बारे में कुछ शब्दों का प्रयोग किया है, उसने उन्हें व्यव्स्था, नियम, उपदेश, आज्ञा, यहोवा का भय, धर्ममय इत्यादि कहा है। इन शब्दों से बहुतेरे लोग डरते हैं, उन के तात्पर्य को शक की दृष्टि से देखते हैं, उनका तिरिस्कार करते हैं। लेकिन साथ ही यह भी देखिए कि इन बातों पर विश्वास करने तथा उन्हें मानने वालों के लिए परमेश्वर ने क्या आशीषें रख छोड़ी हैं - प्राणों की बहाली, बुद्धिमता, आनन्दित हृदय, ज्योतिर्मय आँखें, स्थिरता, सत्य और धार्मिकता।

   अब ऐसा अद्भुत प्रोत्साहन और कहाँ मिलेगा? इसीलिए इस भजन का लेखक दाऊद परमेश्वर की वयवस्था और नियमों के लिए कहता है: "वे तो सोने से और बहुत कुन्दन से भी बढ़कर मनोहर हैं; वे मधु से और टपकने वाले छत्ते से भी बढ़कर मधुर हैं" (भजन 19:10)। - डेव ब्रैनन


परमेश्वर के वचन का पालन ही मसीही विश्वासी की सबसे बड़ी स्वतंत्रता है।

जब तेरे वचन मेरे पास पहुंचे, तब मैं ने उन्हें मानो खा लिया, और तेरे वचन मेरे मन के हर्ष और आनन्द का कारण हुए; क्योंकि, हे सेनाओं के परमेश्वर यहोवा, मैं तेरा कहलाता हूँ। - यिर्मयाह 15:16 

बाइबल पाठ: भजन 19
Psalms 19:1 आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है। 
Psalms 19:2 दिन से दिन बातें करता है, और रात को रात ज्ञान सिखाती है। 
Psalms 19:3 न तो कोई बोली है और न कोई भाषा जहां उनका शब्द सुनाई नहीं देता है। 
Psalms 19:4 उनका स्वर सारी पृथ्वी पर गूंज गया है, और उनके वचन जगत की छोर तक पहुंच गए हैं। उन में उसने सूर्य के लिये एक मण्डप खड़ा किया है, 
Psalms 19:5 जो दुल्हे के समान अपने महल से निकलता है। वह शूरवीर की नाईं अपनी दौड़ दौड़ने को हर्षित होता है। 
Psalms 19:6 वह आकाश की एक छोर से निकलता है, और वह उसकी दूसरी छोर तक चक्कर मारता है; और उसकी गर्मी सब को पहुंचती है।
Psalms 19:7 यहोवा की व्यवस्था खरी है, वह प्राण को बहाल कर देती है; यहोवा के नियम विश्वासयोग्य हैं, साधारण लोगों को बुद्धिमान बना देते हैं; 
Psalms 19:8 यहोवा के उपदेश सिद्ध हैं, हृदय को आनन्दित कर देते हैं; यहोवा की आज्ञा निर्मल है, वह आंखों में ज्योति ले आती है; 
Psalms 19:9 यहोवा का भय पवित्र है, वह अनन्तकाल तक स्थिर रहता है; यहोवा के नियम सत्य और पूरी रीति से धर्ममय हैं। 
Psalms 19:10 वे तो सोने से और बहुत कुन्दन से भी बढ़कर मनोहर हैं; वे मधु से और टपकने वाले छत्ते से भी बढ़कर मधुर हैं। 
Psalms 19:11 और उन्हीं से तेरा दास चिताया जाता है; उनके पालन करने से बड़ा ही प्रतिफल मिलता है। 
Psalms 19:12 अपनी भूलचूक को कौन समझ सकता है? मेरे गुप्त पापों से तू मुझे पवित्र कर। 
Psalms 19:13 तू अपने दास को ढिठाई के पापों से भी बचाए रख; वह मुझ पर प्रभुता करने न पाएं! तब मैं सिद्ध हो जाऊंगा, और बड़े अपराधों से बचा रहूंगा।। 
Psalms 19:14 मेरे मुंह के वचन और मेरे हृदय का ध्यान तेरे सम्मुख ग्रहण योग्य हों, हे यहोवा परमेश्वर, मेरी चट्टान और मेरे उद्धार करने वाले!

एक साल में बाइबल: 
  • कुलुस्सियों 1-4