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बुधवार, 18 मार्च 2015

अक्षम?


   चार वर्षीय एलियाना, सोने जाने से पहले अपनी माँ के साथ मिलकर अपनी इधर-उधर फैली हुई चीज़ें एकत्रित कर रही थी। यह करते हुए जब उसकी माँ ने कहा कि वह बिस्तर पर पड़े हुए कपड़े भी उठा कर ठीक से रख दे, तो एलियाना का धैर्य टूट गया; वह कमर पर हाथ रख कर खड़ी हो गई और खिसियाकर माँ से बोली, "अब मैं ही सब कुछ तो नहीं कर सकती हूँ ना!"

   क्या परमेश्वर ने आप से जो कुछ करने के लिए कहा है उसे लेकर आपको भी कभी ऐसा ही लगता है? चर्च के कार्यों, व्यक्तिगत सेवकाई, परिवार की ज़िम्मेदारियाँ आदि को निभाने-करने की व्यस्तता से हो सकता है कि हम अपने आप को अभिभूतित अनुभव करने लगें, और एक लंबी ठंडी सांस लेकर, रुष्ठ भाव से परमेश्वर से कहें, "अब मैं ही सब कुछ तो नहीं कर सकता हूँ ना!"

   लेकिन परमेश्वर के निर्देश यह दिखाते हैं कि अपने विश्वासियों से उसकी आशाएं ऐसी नहीं हैं जो उन्हें अभिभूतित कर दें। उदाहरणस्वरूप उसके कुछ निर्देशों के साथ जुड़ी बातों को देखिए:
  • जब हमें दुसरों के साथ व्यवहार करना होता है तो उस संदर्भ में प्रभु कहता है, "जहां तक हो सके, तुम अपने भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो" (रोमियों 12:18) - वह हमारी सहनशीलता की सीमाओं को समझता है।
  • हमारे कार्य को लेकर वह कहता है, "और जो कुछ तुम करते हो, तन मन से करो, यह समझ कर कि मनुष्यों के लिये नहीं परन्तु प्रभु के लिये करते हो" (कुलुस्सियों 3:23)। वह हम से लोगों को प्रभावित करने वाली सिद्धता नहीं माँगता; उसे बस इतना चाहिए कि हम अपनी खरी मेहनत और कार्यनिष्ठा के द्वारा उसको महिमा देने वाले बनें।
  • दूसरों के साथ तुलना के विषय में उसने कहा है: "पर हर एक अपने ही काम को जांच ले, और तब दूसरे के विषय में नहीं परन्तु अपने ही विषय में उसको घमण्‍ड करने का अवसर होगा" (गलतियों 6:4)। हमें दूसरों की आलोचना करने वाले या उनके साथ अपनी तुलना करने वाले नहीं बनाना है क्योंकि हमारे जीवन तथा कार्यों का उद्देश्य किसी अन्य के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं है; हमें तो बस सत्यनिष्ठा के साथ अपनी ज़िम्मेदारियों को ही पूरा करना है।


   अपनी बुद्धिमता में, जो कुछ वह हम से चाहता है उसे करने के लिए परमेश्वर ने हमें भरपूर क्षमता एवं सामर्थ प्रदान करी है; अब यह हमारा कर्तव्य है कि अपने आप को उसके दिए कार्यों के लिए अक्षम समझने की बजाए उसके मार्गदर्शन में होकर उन कार्यों को पूरा करते रहें, क्योंकि उसका वायदा है कि वह हमें हमारी सामर्थ से बाहर किसी भी परीक्षा कभी नहीं पड़ने देगा (1 कुरिन्थियों 10:13)।


परमेश्वर द्वारा ज़िम्मेदारियाँ उन्हें पूरा करने के लिए आवश्यक सामर्थ के साथ ही मिलती हैं।

तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े, जो मनुष्य के सहने से बाहर है: और परमेश्वर सच्चा है: वह तुम्हें सामर्थ से बाहर परीक्षा में न पड़ने देगा, वरन परीक्षा के साथ निकास भी करेगा; कि तुम सह सको। - 1 कुरिन्थियों 10:13

बाइबल पाठ: गलतियों 6:1-10
Galatians 6:1 हे भाइयों, यदि कोई मनुष्य किसी अपराध में पकड़ा भी जाए, तो तुम जो आत्मिक हो, नम्रता के साथ ऐसे को संभालो, और अपनी भी चौकसी रखो, कि तुम भी परीक्षा में न पड़ो। 
Galatians 6:2 तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो। 
Galatians 6:3 क्योंकि यदि कोई कुछ न होने पर भी अपने आप को कुछ समझता है, तो अपने आप को धोखा देता है। 
Galatians 6:4 पर हर एक अपने ही काम को जांच ले, और तब दूसरे के विषय में नहीं परन्तु अपने ही विषय में उसको घमण्‍ड करने का अवसर होगा। 
Galatians 6:5 क्योंकि हर एक व्यक्ति अपना ही बोझ उठाएगा।
Galatians 6:6 जो वचन की शिक्षा पाता है, वह सब अच्छी वस्‍तुओं में सिखाने वाले को भागी करे। 
Galatians 6:7 धोखा न खाओ, परमेश्वर ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता, क्योंकि मनुष्य जो कुछ बोता है, वही काटेगा। 
Galatians 6:8 क्योंकि जो अपने शरीर के लिये बोता है, वह शरीर के द्वारा विनाश की कटनी काटेगा; और जो आत्मा के लिये बोता है, वह आत्मा के द्वारा अनन्त जीवन की कटनी काटेगा। 
Galatians 6:9 हम भले काम करने में हियाव न छोड़े, क्योंकि यदि हम ढीले न हों, तो ठीक समय पर कटनी काटेंगे। 
Galatians 6:10 इसलिये जहां तक अवसर मिले हम सब के साथ भलाई करें; विशेष कर के विश्वासी भाइयों के साथ।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 32-34
  • मरकुस 15:26-47



मंगलवार, 17 मार्च 2015

होंठों का स्वामी?


   प्रशंसा एवं चापलूसी की बातों में केवल उद्देश्य का ही अन्तर होता है। प्रशंसा किसी दूसरे व्यक्ति में विद्यमान किसी गुण या उसके द्वारा करे गए किसी कार्य के वास्तविक सम्मान के लिए होती है; जबकि चापलूसी किसी दूसरे व्यक्ति की कृपादृष्टि प्राप्त करके अपनी स्वार्थसिद्धी करने के लिए होती है। प्रशंसा दूसरों को उत्साहित करने, उन्हें आगे बढ़ाने के लिए होती है; चापलूसी दूसरों को अपने लिए प्रयोग करने के लिए होती है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 12 में दाऊद अपने समय के समाज को लेकर विलाप करता है, जहाँ भक्त तथा विश्वासयोग्य लोग जाते रहे थे और उनके स्थान पर छल-कपट करने वाले खड़े हो गए थे; दाऊद ने उनके बारे में लिखा: "उन में से प्रत्येक अपने पड़ोसी से झूठी बातें कहता है; वे चापलूसी के ओठों से दो रंगी बातें करते हैं" (भजन 12:2) क्योंकि "वे कहते हैं कि हम अपनी जीभ ही से जीतेंगे, हमारे ओंठ हमारे ही वश में हैं; हमारा प्रभु कौन है?" (भजन 12:4)

   जब हम मसीही विश्वासी अपनी स्वार्थसिद्धी के लिए किसी की झूठी प्रशंसा करने की इच्छा में पड़ें तो एक प्रश्न है जो हमें अपने-आप से अवश्य ही पूछ लेना चाहिए - "मेरे होंठों का स्वामी कौन है?" यदि मेरे होंठ मेरे अपने हैं, तो फिर मैं उनसे जो चाहूँ वह कह सकता हूँ; लेकिन यदि प्रभु यीशु मेरे होंठों का स्वामी है, तो फिर मेरे होंठों से निकलने वाले शब्द उसके चरित्र के अनुसार हों; ऐसे शब्द जिनके विषय में दाऊद ने लिखा "परमेश्वर का वचन पवित्र है, उस चान्दी के समान जो भट्टी में मिट्टी पर ताई गई, और सात बार निर्मल की गई हो" (भजन 12:6)।

   इस बात को निर्धारित रखने के लिए कि कौन मेरे होंठों का स्वामी है, एक अच्छा तरीका होगा दाऊद द्वारा लिखे गए एक अन्य भजन के एक पद के साथ अपने दिन को आरंभ करना तथा उस पद पर मनन करते रहना - "मेरे मुंह के वचन और मेरे हृदय का ध्यान तेरे सम्मुख ग्रहण योग्य हों, हे यहोवा परमेश्वर, मेरी चट्टान और मेरे उद्धार करने वाले!" (भजन 19:14)। - डेविड मैक्कैसलैंड


जो अपने मुंह की चौकसी करता है, वह अपने प्राण की रक्षा करता है, परन्तु जो गाल बजाता है उसका विनाश जो जाता है। - नीतिवचन 13:3

हे यहोवा, मेरे वचनों पर कान लगा; मेरे ध्यान करने की ओर मन लगा। हे मेरे राजा, हे मेरे परमेश्वर, मेरी दोहाई पर ध्यान दे, क्योंकि मैं तुझी से प्रार्थना करता हूं। -  भजन 5:1-2

बाइबल पाठ: भजन 12
Psalms 12:1 हे परमेश्वर बचा ले, क्योंकि एक भी भक्त नहीं रहा; मनुष्यों में से विश्वास योग्य लोग मर मिटे हैं।
Psalms 12:2 उन में से प्रत्येक अपने पड़ोसी से झूठी बातें कहता है; वे चापलूसी के ओठों से दो रंगी बातें करते हैं।
Psalms 12:3 प्रभु सब चापलूस ओठों को और उस जीभ को जिस से बड़ा बोल निकलता है काट डालेगा।
Psalms 12:4 वे कहते हैं कि हम अपनी जीभ ही से जीतेंगे, हमारे ओंठ हमारे ही वश में हैं; हमारा प्रभु कौन है?
Psalms 12:5 दीन लोगों के लुट जाने, और दरिद्रों के कराहने के कारण, परमेश्वर कहता है, अब मैं उठूंगा, जिस पर वे फुंकारते हैं उसे मैं चैन विश्राम दूंगा।
Psalms 12:6 परमेश्वर का वचन पवित्र है, उस चान्दी के समान जो भट्टी में मिट्टी पर ताई गई, और सात बार निर्मल की गई हो।
Psalms 12:7 तू ही हे परमेश्वर उनकी रक्षा करेगा, उन को इस काल के लोगों से सर्वदा के लिये बचाए रखेगा।
Psalms 12:8 जब मनुष्यों में नीचपन का आदर होता है, तब दुष्ट लोग चारों ओर अकड़ते फिरते हैं।

एक साल में बाइबल: 

  • व्यवस्थाविवरण 30-31
  • मरकुस 15:1-25



सोमवार, 16 मार्च 2015

टूटी हड्डियाँ


   बहुत वर्ष पहले, अपने कॉलेज के दिनों में मैं अपने कॉलेज की फुटबॉल टीम में गोलकीपर हुआ करता था। मेरे लिए वह खेल कितना मनोरंजक हुआ करता था इस बात का संपूर्ण वर्णन यहाँ संभव नहीं है, लेकिन उस मनोरंजन के लिए मुझे एक कीमत चुकानी पड़ती थी - मुझे अपने आप को बार-बार खतरे में डालकर प्रतिद्वंदी टीम को गोल करने से रोकना होता था। उस मनोरंजन की कीमत मैं ने केवल तब ही नहीं चुकाई, मैं आज भी उस कीमत को चुकाता रहता हूँ; क्योंकि खेल के समय में मुझे गंभीर चोटें भी आईं - मेरी एक टाँग टूटी, कई पसलियाँ टूटीं, एक कंधा उतरा, तथा मेरे सिर की चोट के कारण दिमाग़ को अन्दरूनी धक्का भी लगा। आज भी, विशेषकर ठंड के दिनों में, उन टूटी हड्डियाँ की दुखन मुझे उस मनोरंजन के जोखिम तथा चोटों की याद दिलाती है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के एक प्रमुख नायक दाऊद को भी अपने जीवन में कुछ टूटी हड्डियों का स्मरण शेष रह गया था, लेकिन उसकी चोटें शारीरिक नहीं आत्मिक थीं! बथशेबा के साथ व्यभिचार और फिर बथशेबा के पति को मरवा देने के नैतिक पतन के कारण दाऊद को परमेश्वर के अनुशासन की कठोरता को सहना पड़ा था। लेकिन उस अनुशासन में होकर निकलने से दाऊद के अन्दर अपने किए पर ग्लानि तथा पश्चताप आया और उसने पश्चातापी मन से परमेश्वर से प्रार्थना करी; उसकी प्रार्थना का एक वाक्य था, "मुझे हर्ष और आनन्द की बातें सुना, जिस से जो हडि्डयां तू ने तोड़ डाली हैं वह मगन हो जाएं" (भजन 51:8)।

   परमेश्वर का दण्डात्मक अनुशासन इतना कठोर था कि उसकी पीड़ा दाऊद को टूटी हड्डियों की पीड़ा के समान प्रतीत हुई। लेकिन उस दुख भरी परिस्थिति में भी दाऊद ने परमेश्वर पर भरोसा किया कि अपने अनुग्रह में होकर वह ना केवल दाऊद के टूटेपन को ठीक करेगा वरन उसके आनन्द को भी लौटा कर दे देगा। हमारे पाप और पराजय की परिस्थिति में पड़े होने पर भी, हम मसीही विश्वासियों के लिए यह सांत्वना और आनन्द की बात है कि परमेश्वर का हमारे प्रति प्रेम कभी कम नहीं होता। परमेश्वर हम से पुत्रों के समान व्यवहार करता है, और हमारी भलाई के लिए जहाँ अनुशासित करना होता है वहाँ अनुशासित करता है और जहाँ हमें उभारने-उठाने की आवश्यकता होती हैं वहाँ उभारता-उठाता भी है। - बिल क्राउडर


परमेश्वर के अनुशासन का हाथ, उसके प्रेम का हाथ भी है।

क्योंकि प्रभु, जिस से प्रेम करता है, उस की ताड़ना भी करता है; और जिसे पुत्र बना लेता है, उसको कोड़े भी लगाता है। - इब्रानियों 12:6

बाइबल पाठ: भजन 51:1-13
Psalms 51:1 हे परमेश्वर, अपनी करूणा के अनुसार मुझ पर अनुग्रह कर; अपनी बड़ी दया के अनुसार मेरे अपराधों को मिटा दे। 
Psalms 51:2 मुझे भलीं भांति धोकर मेरा अधर्म दूर कर, और मेरा पाप छुड़ाकर मुझे शुद्ध कर! 
Psalms 51:3 मैं तो अपने अपराधों को जानता हूं, और मेरा पाप निरन्तर मेरी दृष्टि में रहता है। 
Psalms 51:4 मैं ने केवल तेरे ही विरुद्ध पाप किया, और जो तेरी दृष्टि में बुरा है, वही किया है, ताकि तू बोलने में धर्मी और न्याय करने में निष्कलंक ठहरे। 
Psalms 51:5 देख, मैं अधर्म के साथ उत्पन्न हुआ, और पाप के साथ अपनी माता के गर्भ में पड़ा। 
Psalms 51:6 देख, तू हृदय की सच्चाई से प्रसन्न होता है; और मेरे मन ही में ज्ञान सिखाएगा। 
Psalms 51:7 जूफा से मुझे शुद्ध कर, तो मैं पवित्र हो जाऊंगा; मुझे धो, और मैं हिम से भी अधिक श्वेत बनूंगा। 
Psalms 51:8 मुझे हर्ष और आनन्द की बातें सुना, जिस से जो हडि्डयां तू ने तोड़ डाली हैं वह मगन हो जाएं। 
Psalms 51:9 अपना मुख मेरे पापों की ओर से फेर ले, और मेरे सारे अधर्म के कामों को मिटा डाल। 
Psalms 51:10 हे परमेश्वर, मेरे अन्दर शुद्ध मन उत्पन्न कर, और मेरे भीतर स्थिर आत्मा नये सिरे से उत्पन्न कर। 
Psalms 51:11 मुझे अपने साम्हने से निकाल न दे, और अपने पवित्र आत्मा को मुझ से अलग न कर। 
Psalms 51:12 अपने किए हुए उद्धार का हर्ष मुझे फिर से दे, और उदार आत्मा देकर मुझे सम्भाल। 
Psalms 51:13 तब मैं अपराधियों को तेरा मार्ग सिखाऊंगा, और पापी तेरी ओर फिरेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 28-29
  • मरकुस 14:54-72



रविवार, 15 मार्च 2015

दृष्टिकोण


   जब मेरी नज़र उस पर पड़ी, तब हम आईसक्रीम स्टोर में पंक्ति में खड़े थे। उसके चेहरे पर मारपीट की चोटों के अनेकों निशान थे, उसकी नाक भी टेढ़ी हो रखी थी; उसके कपड़े साफ तो थे लेकिन अस्त-व्यस्त थे। एक स्वाभाविक प्रतिक्रीया स्वरूप मैं अपने बच्चों और उसके बीच में होकर खड़ा हो गया तथा अपनी पीठ को दोनों के बीच की एक दीवार बना लिया। जब पहली बार उसने कुछ कहा तो मुझे स्पष्ट सुनाई नहीं दिया, इसलिए उत्तर में मैंने बस अपना सिर थोड़ा सा हिला भर दिया, मैं उसके साथ आँख मिलाकर बात नहीं कर पा रहा था। क्योंकि मेरी पत्नि मेरे साथ स्टोर में नहीं थी इसलिए उसने सोचा कि मैं अकेला ही बच्चों का पालन-पोषण कर रहा हूँ।

  फिर उसने बड़ी नम्र आवाज़ में कहा, "अकेले ही इन का पालन-पोषण करना कठिन होता है; है ना?" बात कहने के उसके अन्दाज़ में कुछ था जिसने मुझे मुड़कर उसे देखने पर मजबूर कर दिया। तब ही मेरा ध्यान उसके साथ खड़े उसके बच्चों की ओर गया, और फिर उसने बताया कि कैसे बहुत पहले उस की पत्नि उन्हें छोड़कर जा चुकी थी, और मैं उसकी बात सुनता रहा। उसके नम्र शब्द तथा व्यवहार उसके कठोर बाहरी स्वरूप की तुलना में विरोधात्मक थे। मैं एक बार फिर मैं अपनी पूर्व-धारणा एवं आँकलन के कारण दुखी हुआ; एक बार फिर मैंने बाहरी स्वरूप के अन्दर की वास्तविकता को नहीं देख पाने की गलती करी थी।

   प्रभु यीशु का प्रतिदिन ऐसे लोगों से सामना होता था जिनके बाहरी स्वरूप के कारण उनसे मुँह मोड़ लेना बड़ी स्वाभाविक बात होती, उदाहरणस्वरूप हमारे आज के परमेश्वर के वचन बाइबल के पाठ में उल्लेखित दुष्टात्माओं से ग्रसित व्यक्ति ही को लीजिए (मरकुस 5:1-20)! लेकिन प्रभु यीशु ने सदा ही मनुष्यों की भीतरी दशा पर ध्यान किया, उनकी आवश्यकताओं को पहचाना और फिर उसी के अनुसार उनके साथ व्यवहार किया, उनकी आवश्यकताओं को पूरा किया।

   प्रभु यीशु का दृष्टिकोण सदा ही प्रेम का दृष्टिकोण होता है; वह कभी हमारे पाप के दाग़ों, बिगड़े हुए स्वभाव और लड़खड़ाती हुई विश्वासयोग्यता के आधार पर हमारा आँकलन नहीं करता है। उसने जगत के सभी लोगों से प्रेम किया है, अपने बैरी और विरोधियों से भी; उसने सभी के लिए अपना बलिदान दिया है; उस में विश्वास द्वारा सेंत-मेंत मिलने वाले उद्धार का उसका प्रस्ताव सभी के लिए समान रूप से है। प्रभु करे कि हमारा दृष्टिकोण तथा व्यवहार हट और दंभ का नहीं वरन उसके दृष्टिकोण के समान प्रेम और क्षमा का हो। - रैन्डी किलगोर


यदि आप प्रभु यीशु के दृष्टिकोण से देखेंगे तो आपको संसार ज़रूरतमंद नज़र आएगा।

...क्योंकि यहोवा का देखना मनुष्य का सा नहीं है; मनुष्य तो बाहर का रूप देखता है, परन्तु यहोवा की दृष्टि मन पर रहती है। - 1 शमूएल 16:7

बाइबल पाठ: मरकुस 5:1-20
Mark 5:1 और वे झील के पार गिरासेनियों के देश में पहुंचे। 
Mark 5:2 और जब वह नाव पर से उतरा तो तुरन्त एक मनुष्य जिस में अशुद्ध आत्मा थी कब्रों से निकल कर उसे मिला। 
Mark 5:3 वह कब्रों में रहा करता था। और कोई उसे सांकलों से भी न बान्‍ध सकता था। 
Mark 5:4 क्योंकि वह बार बार बेडिय़ों और सांकलों से बान्‍धा गया था, पर उसने सांकलों को तोड़ दिया, और बेडिय़ों के टुकड़े टुकड़े कर दिए थे, और कोई उसे वश में नहीं कर सकता था। 
Mark 5:5 वह लगातार रात-दिन कब्रों और पहाड़ों में चिल्लाता, और अपने को पत्थरों से घायल करता था। 
Mark 5:6 वह यीशु को दूर ही से देखकर दौड़ा, और उसे प्रणाम किया। 
Mark 5:7 और ऊंचे शब्द से चिल्लाकर कहा; हे यीशु, परमप्रधान परमेश्वर के पुत्र, मुझे तुझ से क्या काम? मैं तुझे परमेश्वर की शपथ देता हूं, कि मुझे पीड़ा न दे। 
Mark 5:8 क्योंकि उसने उस से कहा था, हे अशुद्ध आत्मा, इस मनुष्य में से निकल आ। 
Mark 5:9 उसने उस से पूछा; तेरा क्या नाम है? उसने उस से कहा; मेरा नाम सेना है; क्योंकि हम बहुत हैं। 
Mark 5:10 और उसने उस से बहुत बिनती की, हमें इस देश से बाहर न भेज। 
Mark 5:11 वहां पहाड़ पर सूअरों का एक बड़ा झुण्ड चर रहा था। 
Mark 5:12 और उन्होंने उस से बिनती कर के कहा, कि हमें उन सूअरों में भेज दे, कि हम उन के भीतर जाएं। 
Mark 5:13 सो उसने उन्हें आज्ञा दी और अशुद्ध आत्मा निकलकर सूअरों के भीतर पैठ गई और झुण्ड, जो कोई दो हजार का था, कड़ाडे पर से झपटकर झील में जा पड़ा, और डूब मरा।
Mark 5:14 और उन के चरवाहों ने भागकर नगर और गांवों में समाचार सुनाया। 
Mark 5:15 और जो हुआ था, लोग उसे देखने आए। और यीशु के पास आकर, वे उसको जिस में दुष्टात्माएं थीं, अर्थात जिस में सेना समाई थी, कपड़े पहिने और सचेत बैठे देखकर, डर गए। 
Mark 5:16 और देखने वालों ने उसका जिस में दुष्टात्माएं थीं, और सूअरों का पूरा हाल, उन को कह सुनाया। 
Mark 5:17 और वे उस से बिनती कर के कहने लगे, कि हमारे सिवानों से चला जा। 
Mark 5:18 और जब वह नाव पर चढ़ने लगा, तो वह जिस में पहिले दुष्टात्माएं थीं, उस से बिनती करने लगा, कि मुझे अपने साथ रहने दे। 
Mark 5:19 परन्तु उसने उसे आज्ञा न दी, और उस से कहा, अपने घर जा कर अपने लोगों को बता, कि तुझ पर दया कर के प्रभु ने तेरे लिये कैसे बड़े काम किए हैं। 
Mark 5:20 वह जा कर दिकपुलिस में इस बात का प्रचार करने लगा, कि यीशु ने मेरे लिये कैसे बड़े काम किए; और सब अचम्भा करते थे।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 26-27
  • मरकुस 14:27-53



शनिवार, 14 मार्च 2015

पुनरावलोकन


   हवाई जहाज़ों में उड़ान संबंधी विवरण रिकॉर्ड करते रहने के लिए दो उपकरण लगे रहते हैं जिन्हें "ब्लैक-बॉक्स" कहा जाता है। एक में उड़ान के समय वायुयान के उपकरणों तथा कल-पुर्ज़ों के कार्य का विवरण रिकॉर्ड होता रहता है तथा दुसरे में उस वायुयान को उड़ाने वाले चालक दल की धरती पर स्थित हवाई-अड्डों में बैठे वायुयानों की उड़ान का नियंत्रण करने वाले लोगों के साथ होने वाली वार्तालाप रिकॉर्ड की जाती है। इन दोनों ब्लैक-बॉक्स को बहुत मज़बूत बनाया जाता है जिससे दुर्घटना के समय वे खराब ना हों; वे अत्याधिक गरम अथवा ठंडा तापमान सह सकते हैं तथा पानी में डूबे होने पर भी अपनी स्थिति की सूचना देते रहने के लिए ऊपर सतह तक संकेत भेजने के लिए उन में व्यवस्था होती है। यदि वायुयान दुर्घटनाग्रस्त होता है तो इन बलैक-बॉकस को बड़े यत्न से ढूँढ़ कर उन में दर्ज सारे विवरण की बड़ी बारीकी से जाँच तथा विश्लेषण किया जाता है जिससे दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा सके और अन्य किसी वायुयान में वही गलती फिर ना हो इसका उपाय किया जा सके।

   हम मसीही विश्वासियों को भी अपने जीवन की बातों, विशेषतः गलतियों का पुनरावलोकन करते रहना चाहिए और परमेश्वर के वचन बाइबल से उन बातों से संबंधित सही शिक्षा लेते रहना चाहिए, अपने जीवनों को सुधारते रहना चाहिए। प्रेरित पौलुस ने मिस्त्र के दास्तव से निकलकर कनान देश में बसने जा रहे इस्त्राएलियों द्वारा करी गई गलतियों का कुरिन्थुस की मसीही मण्डली को लिखी अपनी पत्री में उल्लेख किया, और मण्डली के लोगों को चिताया, "परन्तु परमेश्वर उन में के बहुतेरों से प्रसन्न न हुआ, इसलिये वे जंगल में ढेर हो गए" (1 कुरिन्थियों 10:5)। पौलुस ने आगे कहा कि, "परन्तु यें सब बातें, जो उन पर पड़ी, दृष्‍टान्‍त की रीति पर भी: और वे हमारी चितावनी के लिये जो जगत के अन्‍तिम समय में रहते हैं लिखी गईं हैं" (1 कुरिन्थियों 10:11)।

   परमेश्वर ने अपना वचन अपनी प्रेरणा से हमारी भलाई के लिए लिखवाया है (2 तिमुथियुस 3:16-17) और परमेश्वर चाहता है कि हम उसके इस जीवित वचन की शिक्षाओं के अन्तर्गत अपने जीवनों तथा कार्यों का पुनरावलोकन करते रहें, अपने सुधार तथा परमेश्वर की इच्छा के अनुसार चलते रहने के लिए नियमित रूप से बाइबल का प्रयोग करते रहें। - सी. पी. हिया


परमेश्वर की चेतावनियाँ हमारे सुधार और सुरक्षा के लिए हैं, हमें दण्डित करने के लिए नहीं।

हर एक पवित्रशास्‍त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धर्म की शिक्षा के लिये लाभदायक है। ताकि परमेश्वर का जन सिद्ध बने, और हर एक भले काम के लिये तत्‍पर हो जाए। - 2 तिमुथियुस 3:16-17

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 10:1-11
1 Corinthians 10:1 हे भाइयों, मैं नहीं चाहता, कि तुम इस बात से अज्ञात रहो, कि हमारे सब बाप दादे बादल के नीचे थे, और सब के सब समुद्र के बीच से पार हो गए। 
1 Corinthians 10:2 और सब ने बादल में, और समुद्र में, मूसा का बपितिस्मा लिया। 
1 Corinthians 10:3 और सब ने एक ही आत्मिक भोजन किया। 
1 Corinthians 10:4 और सब ने एक ही आत्मिक जल पीया, क्योंकि वे उस आत्मिक चट्टान से पीते थे, जो उन के साथ-साथ चलती थी; और वह चट्टान मसीह था। 
1 Corinthians 10:5 परन्तु परमेश्वर उन में के बहुतेरों से प्रसन्न न हुआ, इसलिये वे जंगल में ढेर हो गए। 
1 Corinthians 10:6 ये बातें हमारे लिये दृष्‍टान्‍त ठहरीं, कि जैसे उन्होंने लालच किया, वैसे हम बुरी वस्‍तुओं का लालच न करें। 
1 Corinthians 10:7 और न तुम मूरत पूजने वाले बनों; जैसे कि उन में से कितने बन गए थे, जैसा लिखा है, कि लोग खाने-पीने बैठे, और खेलने-कूदने उठे। 
1 Corinthians 10:8 और न हम व्यभिचार करें; जैसा उन में से कितनों ने किया: एक दिन में तेईस हजार मर गये । 
1 Corinthians 10:9 और न हम प्रभु को परखें; जैसा उन में से कितनों ने किया, और सांपों के द्वारा नाश किए गए। 
1 Corinthians 10:10 और न हम कुड़कुड़ाएं, जिस रीति से उन में से कितने कुड़कुड़ाए, और नाश करने वाले के द्वारा नाश किए गए। 
1 Corinthians 10:11 परन्तु यें सब बातें, जो उन पर पड़ी, दृष्‍टान्‍त की रीति पर भी: और वे हमारी चितावनी के लिये जो जगत के अन्‍तिम समय में रहते हैं लिखी गईं हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 23-25
  • मरकुस 14:1-26



शुक्रवार, 13 मार्च 2015

जीवित साक्षी


   वॉचमैन नी को प्रभु यीशु मसीह में विश्वास रखने के कारण चीन में सन 1952 में पकड़ कर जेल में डाल दिया गया था, जहाँ उन्होंने अपना शेष जीवन व्यतीत किया। उस जेल की कोठरी में उन्होंने 30 मई 1972 को अपनी अन्तिम श्वास ली। जब उनकी भतीजी उनकी बची हुई चीज़ें लेने के लिए आई तो उसे जेल के एक पहरेदार ने काग़ज़ का एक टुकड़ा दिया जिस पर वॉचमैन नी ने अपने जीवन की यह साक्षी लिखी थी: "मसीह परमेश्वर का पुत्र है जो पापियों के छुटकारे के लिए मारा गया और तीसरे दिन मृतकों में से जी उठा। यह सृष्टि का सबसे बड़ा सत्य है। मैं इस लिए मर रहा हूँ क्योंकि मैं मसीह पर विश्वास रखता हूँ - वॉचमैन नी।"

   प्रेरित पौलुस भी मसीह यीशु में अपने विश्वास के लिए मारा गया। अपनी म्रुत्यु से कुछ समय पहले, जेल में से, जहाँ वह मृत्यु दण्ड के दिए जाने की प्रतीक्षा में था, पौलुस ने कुछ पत्रियाँ लिखीं। अपनी अन्तिम पत्री में पौलुस ने अपने पाठकों से कहा, "यीशु मसीह को स्मरण रख, जो दाऊद के वंश से हुआ, और मरे हुओं में से जी उठा; और यह मेरे सुसमाचार के अनुसार है। जिस के लिये मैं कुकर्मी की नाईं दुख उठाता हूं, यहां तक कि कैद भी हूं; परन्तु परमेश्वर का वचन कैद नहीं" (2 तिमुथियुस 2:8-9)।

   संभव है कि हमें मसीह यीशु में विश्वास करने के कारण, उन लाखों लोगों के समान जो सदियों से अपने प्राण बलिदान करते आए हैं, अपने प्राणों की आहुति नहीं देनी पड़े, लेकिन फिर भी हम सभी मसीही विश्वासियों को प्रभु यीशु के लिए जीवित साक्षी होने के लिए बुलाया गया है। हमारे इस विश्वास के कारण हमारा अन्जाम जो भी हो, लेकिन हर समय और हर हाल में हमें परमेश्वर के प्रति धन्यवादी हृदय के साथ लोगों के सामने प्रभु यीशु में होकर मिली आशीषों का वर्णन रखना है, उन्हें प्रभु यीशु में मिलने वाली पापों की क्षमा और उद्धार के बारे में बताना है। - डेनिस फिशर


होने दें कि आपके होंठ और जीवन दोनों ही मसीह यीशु का वर्णन करते रहें।

इसी कारण मैं ने सब से पहिले तुम्हें वही बात पहुंचा दी, जो मुझे पहुंची थी, कि पवित्र शास्त्र के वचन के अनुसार यीशु मसीह हमारे पापों के लिये मर गया। और गाड़ा गया; और पवित्र शास्त्र के अनुसार तीसरे दिन जी भी उठा। - 1 कुरिन्थियों 15:3-4

बाइबल पाठ: 2 तिमुथियुस 2:1-10
2 Timothy 2:1 इसलिये हे मेरे पुत्र, तू उस अनुग्रह से जो मसीह यीशु में है, बलवन्‍त हो जा। 
2 Timothy 2:2 और जो बातें तू ने बहुत गवाहों के साम्हने मुझ से सुनी हैं, उन्हें विश्वासी मनुष्यों को सौंप दे; जो औरों को भी सिखाने के योग्य हों। 
2 Timothy 2:3 मसीह यीशु के अच्‍छे योद्धा की नाईं मेरे साथ दुख उठा। 
2 Timothy 2:4 जब कोई योद्धा लड़ाई पर जाता है, तो इसलिये कि अपने भरती करने वाले को प्रसन्न करे, अपने आप को संसार के कामों में नहीं फंसाता 
2 Timothy 2:5 फिर अखाड़े में लड़ने वाला यदि विधि के अनुसार न लड़े तो मुकुट नहीं पाता। 
2 Timothy 2:6 जो गृहस्थ परिश्रम करता है, फल का अंश पहिले उसे मिलना चाहिए। 
2 Timothy 2:7 जो मैं कहता हूं, उस पर ध्यान दे और प्रभु तुझे सब बातों की समझ देगा। 
2 Timothy 2:8 यीशु मसीह को स्मरण रख, जो दाऊद के वंश से हुआ, और मरे हुओं में से जी उठा; और यह मेरे सुसमाचार के अनुसार है। 
2 Timothy 2:9 जिस के लिये मैं कुकर्मी की नाईं दुख उठाता हूं, यहां तक कि कैद भी हूं; परन्तु परमेश्वर का वचन कैद नहीं। 
2 Timothy 2:10 इस कारण मैं चुने हुए लोगों के लिये सब कुछ सहता हूं, कि वे भी उस उद्धार को जो मसीह यीशु में हैं अनन्त महिमा के साथ पाएं।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 20-22
  • मरकुस 13:21-37



गुरुवार, 12 मार्च 2015

धन


   हम मनुष्यों के अन्दर एक धारणा है कि अधिक धन पा लेने से हम अपनी सभी समस्याओं का समाधान भी पा लेंगे। सन 2012 के आरंभ में 6.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर का विशाल ईनाम जीतने की लालसा में अमेरीकी लोगों ने 150 करोड़ डॉलर के लौटरी टिकिट खरीदे, यह जानते हुए भी कि ईनाम जीतने की संभावना का आंकड़ा 17.6 करोड़ में से 1 का था। लेकिन उस लौटरी के टिकिट को खरीदने के लिए लोग किराने की दुकानों, पेट्रोल पम्पों और कैफे आदि में जहाँ टिकिट बेचे जा रहे थे घंटों तक लंबी कतारों में खड़े रहे, इस आशा में कि वे धनवान हो जाएंगे।

   किंतु परमेश्वर के वचन बाइबल में उल्लेखित एक व्यक्ति, आगूर का धन के संबंध में अलग ही दृष्टिकोण था; उसने परमेश्वर से प्रार्थना करी कि उसके मरने से पहले परमेश्वर उसके लिए दो बातों को कर के दे। पहली बात थी: "...व्यर्थ और झूठी बात मुझ से दूर रख..." तथा दूसरी बात थी: "...मुझे न तो निर्धन कर और न धनी बना; प्रतिदिन की रोटी मुझे खिलाया कर" (नीतिवचन 30:8)। आगूर समझ चुका था कि चिंता रहित जीवन व्यतीत करने की कुंजी है ईमानदारी; जब हमारे पास कुछ छुपाने को नहीं होगा तो हमारे पास किसी बात को लेकर भयभीत रहने के लिए भी कुछ नहीं होगा। आगूर यह भी जान चुका था कि अपनी हर आवश्यकता के लिए परमेश्वर पर भरोसा रखना एवं जो कुछ परमेश्वर प्रदान करे उसे कृतज्ञता के साथ स्वीकार करना ही सन्तुष्टि का स्त्रोत है क्योंकि परमेश्वर ही है जिसने सब कुछ बनाया है और वह ही सब का पालन करता है (नीतिवचन 30:4-5)।

   हमारा वस्तविक और स्थाई धन नाशमान सांसारिक नहीं वरन आत्मिक गुण ईमानदारी तथा संतुष्टि हैं, और ये सभी के लिए उपलब्ध हैं। जो कोई परमेश्वर पिता से इन के लिए निवेदन करता है, परमेश्वर अपने खज़ानों से उसे यह धन उपलब्ध करवा देता है। - डेविड मैक्कैसलैन्ड


असंतोष हमें निर्धन किंतु संतोष हमें धनवान बना देता है।

यहोवा यों कहता है, बुद्धिमान अपनी बुद्धि पर घमण्ड न करे, न वीर अपनी वीरता पर, न धनी अपने धन पर घमण्ड करे; परन्तु जो घमण्ड करे वह इसी बात पर घमण्ड करे, कि वह मुझे जानता और समझता हे, कि मैं ही वह यहोवा हूँ, जो पृथ्वी पर करुणा, न्याय और धर्म के काम करता है; क्योंकि मैं इन्हीं बातों से प्रसन्न रहता हूँ। - यिर्मियाह 9:23-24

बाइबल पाठ: नीतिवचन 30:1-9
Proverbs 30:1 याके के पुत्र आगूर के प्रभावशाली वचन। उस पुरूष ने ईतीएल और उक्काल से यह कहा, 
Proverbs 30:2 निश्चय मैं पशु सरीखा हूं, वरन मनुष्य कहलाने के योग्य भी नहीं; और मनुष्य की समझ मुझ में नहीं है। 
Proverbs 30:3 न मैं ने बुद्धि प्राप्त की है, और न परमपवित्र का ज्ञान मुझे मिला है। 
Proverbs 30:4 कौन स्वर्ग में चढ़ कर फिर उतर आया? किस ने वायु को अपनी मुट्ठी में बटोर रखा है? किस ने महासागर को अपने वस्त्र में बान्ध लिया है? किस ने पृथ्वी के सिवानों को ठहराया है? उसका नाम क्या है? और उसके पुत्र का नाम क्या है? यदि तू जानता हो तो बता! 
Proverbs 30:5 ईश्वर का एक एक वचन ताया हुआ है; वह अपने शरणागतों की ढाल ठहरा है। 
Proverbs 30:6 उसके वचनों में कुछ मत बढ़ा, ऐसा न हो कि वह तुझे डांटे और तू झूठा ठहरे।
Proverbs 30:7 मैं ने तुझ से दो वर मांगे हैं, इसलिये मेरे मरने से पहिले उन्हें मुझे देने से मुंह न मोड़: 
Proverbs 30:8 अर्थात व्यर्थ और झूठी बात मुझ से दूर रख; मुझे न तो निर्धन कर और न धनी बना; प्रतिदिन की रोटी मुझे खिलाया कर। 
Proverbs 30:9 ऐसा न हो, कि जब मेरा पेट भर जाए, तब मैं इन्कार कर के कहूं कि यहोवा कौन है? वा अपना भाग खो कर चोरी करूं, और अपने परमेश्वर का नाम अनुचित रीति से लूं।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 17-19
  • मरकुस 13:1-20