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रविवार, 14 जून 2015

मित्र


   कुछ समय पहले मुझे एक प्रमुख सड़क मार्ग के किनारे लगे विज्ञापन पटल के बारे में पता चला जिस पर लिखा गया था: "परमेश्वर तो एक कालपनिक मित्र है - वास्तविकता चुनें। यही हम सब के लिए भला रहेगा।" प्रकट था कि यह कथन मसीही विश्वासियों को बच्चों के समान दर्शा रहा था जो अपनी कलपनाओं में कालपनिक मित्रों एवं सहयोगियों से प्रसन्न रहते हैं, ाइसे मित्र और सहयोगी जो वस्तविकता में उनकी कभी कोई सहायता नहीं कर सकते। किंतु क्या परमेश्वर वास्तव में एक कालपनिक मित्र है?

   थोड़ा विचार और अध्ययन करें तो उपलब्ध प्रमाण परमेश्वर के वास्तविक होने के पक्ष में हैं। यह पूरी सृष्टि और उसके सभी कार्य दिखाते हैं कि यह सब एक योजनाबद्ध तरीके से संचालित और कार्यान्वित हो रहा है, जो दिखाता है कि इस सृष्टि और उसके कार्य तथा संचालन के पीछे एक योजना बनाने और योजनबद्ध तरीके से कार्य करने वाला है (रोमियों 1:18-20)। प्रत्येक मनुष्य का विवेक इस बात की गवाही देता है कि हमारे अन्दर नैतिकता तथा सही-गलत की पहचान करने की क्षमता डाली गई है (रोमियों 2:14-15) जो किसी भी अन्य पशु-पक्षी में देखने को नहीं मिलती। संगीत और कला के विभिन्न रूपों में जो रचनात्मक योग्यता हम मनुष्य दिखाते हैं, वह हमारे सृष्टिकर्ता परमेश्वर की रचनात्मक क्षमता का एक छोटा सा अंश है (निर्गमन 35:31-32)। प्रभु यीशु ने परमेश्वर को मानव रूप में प्रकट किया (इब्रानियों 1:1-4) और मसीही विश्वासियों के हृदय में परमेश्वर के पवित्र आत्मा के साथ होने वाली सहभागिता परमेश्वर की वास्तविकता का प्रमाण है (गलतियों 5:22-23)।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें सिखाती है कि ऐसे समय और लोग होंगे जो परमेश्वर की वास्तविकता से इंकार करेंगे (2 पतरस 3:4-6)। साथ ही बाइबल परमेश्वर के एक मित्र के जीवन की गवाही और परमेश्वर के साथ उसके अनुभवों को भी बयान करती है: "और पवित्र शास्त्र का यह वचन पूरा हुआ, कि इब्राहीम ने परमेश्वर की प्रतीति की, और यह उसके लिये धर्म गिना गया, और वह परमेश्वर का मित्र कहलाया" (याकूब 2:23)।

   परमेश्वर ने अपने पुत्र प्रभु यीशु को आपका सच्चा और अनन्तकाल का मित्र तथा उद्धारकर्ता बनने के लिए भेजा है (यूहन्ना 15:15); क्या आपने उसकी मित्रता के इस निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है? - डेनिस फिशर


इस पृथ्वी का सबसे प्रीय और निकटतम मानव मित्र प्रभु यीशु की छाया मात्र से बढ़कर नहीं है। - चैम्बर्स

अब से मैं तुम्हें दास न कहूंगा, क्योंकि दास नहीं जानता, कि उसका स्‍वामी क्या करता है: परन्तु मैं ने तुम्हें मित्र कहा है, क्योंकि मैं ने जो बातें अपने पिता से सुनीं, वे सब तुम्हें बता दीं। - यूहन्ना 15:15

बाइबल पाठ: रोमियों 1:18-25
Romans 1:18 परमेश्वर का क्रोध तो उन लोगों की सब अभक्ति और अधर्म पर स्वर्ग से प्रगट होता है, जो सत्य को अधर्म से दबाए रखते हैं। 
Romans 1:19 इसलिये कि परमेश्वर के विषय का ज्ञान उन के मनों में प्रगट है, क्योंकि परमेश्वर ने उन पर प्रगट किया है। 
Romans 1:20 क्योंकि उसके अनदेखे गुण, अर्थात उस की सनातन सामर्थ, और परमेश्वरत्व जगत की सृष्टि के समय से उसके कामों के द्वारा देखने में आते है, यहां तक कि वे निरुत्तर हैं। 
Romans 1:21 इस कारण कि परमेश्वर को जानने पर भी उन्होंने परमेश्वर के योग्य बड़ाई और धन्यवाद न किया, परन्तु व्यर्थ विचार करने लगे, यहां तक कि उन का निर्बुद्धि मन अन्धेरा हो गया। 
Romans 1:22 वे अपने आप को बुद्धिमान जताकर मूर्ख बन गए। 
Romans 1:23 और अविनाशी परमेश्वर की महिमा को नाशमान मनुष्य, और पक्षियों, और चौपायों, और रेंगने वाले जन्तुओं की मूरत की समानता में बदल डाला। 
Romans 1:24 इस कारण परमेश्वर ने उन्हें उन के मन के अभिलाषाओं के अुनसार अशुद्धता के लिये छोड़ दिया, कि वे आपस में अपने शरीरों का अनादर करें। 
Romans 1:25 क्योंकि उन्होंने परमेश्वर की सच्चाई को बदलकर झूठ बना डाला, और सृष्टि की उपासना और सेवा की, न कि उस सृजनहार की जो सदा धन्य है। आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • एज़्रा 9-10
  • प्रेरितों 1


शनिवार, 13 जून 2015

सक्रीय संबंध


   एक प्रातः मैंने पाया कि मेरा इंटरनैट कनेक्शन काम नहीं कर रहा था। मैंने अपने इंटरनैट सेवा देने वाले से बात करी तो उसने आकर जाँच करी और बताया कि मेरे कंप्यूटर को इंटरनैट से जोड़ने वाला यंत्र - मोडेम खराब हो गया है और उसे बदलना पड़ेगा, किंतु नया मोडेम उपलब्ध होने और लगाए जाने में एक दिन का समय लगेगा; अर्थात मैं एक दिन तक इंटरनैट से जुड़ा नहीं रहूँगा। यह जान कर मुझे थोड़ी घबराहट हुई, और मन में विचार आया, "बिना इंटरनैट के एक दिन! ऐसे मैं कैसे रह पाऊँगा?"

   फिर मेरे मन में एक और प्रश्न उठा, "क्या मैं इसी प्रकार घबरा जाऊँगा यदि परमेश्वर के साथ मेरा संबंध एक दिन के लिए बाधित हो जाए?" हम परमेश्वर के साथ अपने संबंध को सक्रीय रखते हैं परमेश्वर के वचन बाइबल के साथ समय बिताने से, प्रार्थना में परमेश्वर के साथ संगति रखने से, उसके वचन और निर्देशों का पालन करने से (याकूब 1:22-24)।

   भजन 119 के लेखक ने परमेश्वर के साथ अविरल सक्रीय संबंध बनाए रखने के महत्व को पहचाना और परमेश्वर से आग्रह किया कि वह उसे अपने नियम सिखाए और उन नियमों को समझने की समझ-बूझ दे (पद 33-34)। फिर लेखक ने इच्छा जताई कि वह उन नियमों का पूरे मन से पालन करेगा (पद 34), उनके मार्गदर्शन में चलेगा (पद 35), और अपनी आँखों को व्यर्थ बातों को देखने से रोके रखेगा (पद 37)। परमेश्वर के वचन पर मनन करने और उसे अपने जीवन में लागू करने के द्वारा भजनकार परमेश्वर के साथ अविरल सक्रीय संबंध बना कर रख सका।

   परमेश्वर ने हमें अपना वचन इसीलिए दिया है जिससे कि वह हमारे पथ के लिए दीपक और मार्ग के लिए उजियाला हो सके और उसके साथ हमारा सक्रीय संबंध अविरल बना रहे। - सी. पी. हिया

अपनी आत्मिक बैटरी भरी रखने के लिए उसे आत्मिक स्त्रोत से जोड़े रखें।

तेरा वचन मेरे पांव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है। - भजन 119:105 

बाइबल पाठ: भजन 119:33-40
Psalms 119:33 हे यहोवा, मुझे अपनी विधियों का मार्ग दिखा दे; तब मैं उसे अन्त तक पकड़े रहूंगा। 
Psalms 119:34 मुझे समझ दे, तब मैं तेरी व्यवस्था को पकड़े रहूंगा और पूर्ण मन से उस पर चलूंगा। 
Psalms 119:35 अपनी आज्ञाओं के पथ में मुझ को चला, क्योंकि मैं उसी से प्रसन्न हूं। 
Psalms 119:36 मेरे मन को लोभ की ओर नहीं, अपनी चितौनियों ही की ओर फेर दे। 
Psalms 119:37 मेरी आंखों को व्यर्थ वस्तुओं की ओर से फेर दे; तू अपने मार्ग में मुझे जिला। 
Psalms 119:38 तेरा वचन जो तेरे भय मानने वालों के लिये है, उसको अपने दास के निमित्त भी पूरा कर। 
Psalms 119:39 जिस नामधराई से मैं डरता हूं, उसे दूर कर; क्योंकि तेरे नियम उत्तम हैं। 
Psalms 119:40 देख, मैं तेरे उपदेशों का अभिलाषी हूं; अपने धर्म के कारण मुझ को जिला।

एक साल में बाइबल: 
  • एज़्रा 6-8
  • यूहन्ना 21


शुक्रवार, 12 जून 2015

अधूरा कार्य


   लिओ प्लास ने 99 वर्ष की आयु में ईस्टर्न ओरेगन विश्वविद्यालय से कॉलेज स्नातक होने का अपना डिपलोमा प्राप्त किया। लिओ ने 1930 के दशक में पढ़ाई छोड़कर काम करना आरंभ किया था जिससे वह कुछ कमाई कर सके। अब 79 वर्ष बाद उस अधूरी छूटी हुई पढ़ाई को उन्होंने पूरा किया और कॉलेज से स्नातक होने की उपाधि प्राप्त करके अपने जीवन का वह महत्वपूर्ण अधूरा कार्य पूरा किया।

   हम में से अनेक जन लिओ से सीख ले सकते हैं। संभवतः हमारे जीवनों में भी कुछ अधूरे कार्य हो सकते हैं, जैसे कि किसी से क्षमा माँगना, या उससे भी बढ़कर कुछ ऐसे आवश्यक आत्मिक निर्णय लेना, जिन्हें हम टालते आ रहे हैं। प्रभु यीशु के साथ जो दो डाकू क्रूस पर चढ़ाए गए थे, उनमें से एक ने निर्णय लेने की इस अनिवार्यता को पहचाना। वह जीवन के अन्तिम पलों में था जब उसे यह बोध हुआ कि प्रभु यीशु कौन है, तथा उसने अपने बारे में पहचाना कि वह पापी है और निष्पाप प्रभु यीशु अभी उसके पाप क्षमा करने में सक्षम है; उसने विश्वास किया कि वह प्रभु यीशु के साथ स्वर्ग में जा सकता है। जीवन की अन्तिम साँसों में उसने प्रभु यीशु से विनती करी, "...हे यीशु, जब तू अपने राज्य में आए, तो मेरी सुधि लेना" (लूका 23:42), और तुरंत ही प्रभु यीशु ने उसे आश्वासन दिया, "...मैं तुझ से सच कहता हूं; कि आज ही तू मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा" (लूका 23:43)। निर्णय के उस एक पल में उस डाकू के लिए वह अधूरा कार्य पूरा हो गया और वह परमेश्वर के पास स्वर्ग में अनन्तकाल तक रहने के योग्य बन गया।

   हमारा सृष्टिकर्ता परमेश्वर पिता नहीं चाहता कि हम में से एक भी जन अपने पापों में नाश हो। इसलिए परमेश्वर द्वारा प्रभु यीशु में विश्वास लाने और पापों की क्षमा माँगने के द्वारा सारे संसार के सभी लोगों के लिए, वे चाहे किसी भी उम्र, स्थान, जाति, रंग, आदि के क्यों ना हों उद्धार और परमेश्वर की सन्तान बनने का गौरव, इस पृथ्वी पर उनकी अन्तिम श्वास तक सेंत-मेंत उपलब्ध है। यदि आपने परमेश्वर के इस प्रस्ताव को अभी तक स्वीकार नहीं किया है, तो अभी आप के लिए अवसर है, इस अधूरे कार्य को पूरा कर लीजिए, "क्योंकि वह तो कहता है, कि अपनी प्रसन्नता के समय मैं ने तेरी सुन ली, और उद्धार के दिन मैं ने तेरी सहायता की: देखो, अभी वह प्रसन्नता का समय है; देखो, अभी उद्धार का दिन है" (2 कुरिन्थियों 6:2)।

   यह निर्णय लेने में देर नहीं कीजिए; इस अति महत्वपूर्ण और अभी तक अधूरे कार्य को समय रहते पूरा कर लीजिए; क्या जानें कि बाद में अवसर हो या नहीं, आप निर्णय लेने लायक हालत में हों या नहीं। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


इस पृथ्वी पर मिले उद्धार का अर्थ है स्वर्ग में अनन्तकाल के लिए सुरक्षित भविषय।

प्रभु अपनी प्रतिज्ञा के विषय में देर नहीं करता, जैसी देर कितने लोग समझते हैं; पर तुम्हारे विषय में धीरज धरता है, और नहीं चाहता, कि कोई नाश हो; वरन यह कि सब को मन फिराव का अवसर मिले। - 2 पतरस 3:9 

बाइबल पाठ: लूका 23:32-43
Luke 23:32 वे और दो मनुष्यों को भी जो कुकर्मी थे उसके साथ घात करने को ले चले।
Luke 23:33 जब वे उस जगह जिसे खोपड़ी कहते हैं पहुंचे, तो उन्होंने वहां उसे और उन कुकिर्मयों को भी एक को दाहिनी और और दूसरे को बाईं और क्रूसों पर चढ़ाया। 
Luke 23:34 तब यीशु ने कहा; हे पिता, इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये नहीं जानते कि क्या कर रहें हैं और उन्होंने चिट्ठियां डालकर उसके कपड़े बांट लिए। 
Luke 23:35 लोग खड़े खड़े देख रहे थे, और सरदार भी ठट्ठा कर कर के कहते थे, कि इस ने औरों को बचाया, यदि यह परमेश्वर का मसीह है, और उसका चुना हुआ है, तो अपने आप को बचा ले। 
Luke 23:36 सिपाही भी पास आकर और सिरका देकर उसका ठट्ठा कर के कहते थे। 
Luke 23:37 यदि तू यहूदियों का राजा है, तो अपने आप को बचा। 
Luke 23:38 और उसके ऊपर एक पत्र भी लगा था, कि यह यहूदियों का राजा है। 
Luke 23:39 जो कुकर्मी लटकाए गए थे, उन में से एक ने उस की निन्‍दा कर के कहा; क्या तू मसीह नहीं तो फिर अपने आप को और हमें बचा। 
Luke 23:40 इस पर दूसरे ने उसे डांटकर कहा, क्या तू परमेश्वर से भी नहीं डरता? तू भी तो वही दण्‍ड पा रहा है। 
Luke 23:41 और हम तो न्यायानुसार दण्‍ड पा रहे हैं, क्योंकि हम अपने कामों का ठीक फल पा रहे हैं; पर इस ने कोई अनुचित काम नहीं किया। 
Luke 23:42 तब उसने कहा; हे यीशु, जब तू अपने राज्य में आए, तो मेरी सुधि लेना। 
Luke 23:43 उसने उस से कहा, मैं तुझ से सच कहता हूं; कि आज ही तू मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा।

एक साल में बाइबल: 
  • एज़्रा 3-5
  • यूहन्ना 20



गुरुवार, 11 जून 2015

स्वाद लेकर


   मेरी पत्नि मार्टी को धीरे धीरे भोजन के स्वाद का आनन्द लेते हुए खाना अच्छा लगता है। क्योंकि सामन्यतः भोजन करते हुए मैं मार्टी से बहुत पहले ही अपना भोजन समप्त कर लेता हूँ इसलिए वह अकसर मुझ से कहती है, "जो, तुम बहुत जल्दबाज़ी में खाते हो! धीमे होकर और भोजन का स्वाद लेते हुए खाओ।"

   मैं सोचता हूँ, हम में से कितने ऐसे हैं जो परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखी परमेश्वर की बातों का भरपूर स्वाद लिए बिना उसको जल्दबाज़ी के साथ पढ़ते हैं। भजनकार ने लिखा, "तेरे वचन मुझ को कैसे मीठे लगते हैं, वे मेरे मुंह में मधु से भी मीठे हैं" (भजन 119:103)। बाइबल की यह बात मुझे अच्छी प्रतीत होती है!

   परमेश्वर के वचन में भरपूरी से उपलब्ध इस पौष्टिक आत्मिक भोजन से क्या लाभ हैं? परमेश्वर के वचन से लिया गया यह दैनिक भोजन हमारे कमज़ोर मन को चिंता, घमंड, भय और प्रलोभन के दुषप्रभावों से बचाए रखता है और जयवंत जीवन मार्ग पर अग्रसर रखता है। यह वचन हमें समझ-बूझ और बुद्धिमता प्रदान करता है (पद 98-100) और हमारे कदमों को बुरे मार्गों पर चलने से रोके रहता है (पद 101)। जैसे जब शारीरिक भोजन हमारे पाचन तंत्र से होकर निकलता है तो उसके पौष्टिक तत्व शरीर के सभी अंगों तक पहुँचते हैं और उन्हें विकसित करते हैं, उसी प्रकार जब परमेश्वर का वचन हमारे अन्दर पचाया जाता है तो वह हमारे मन, भावनाओं और इच्छा-शक्ति को स्वस्थ रीति से पोषित तथा विकसित करता है।

   जल्दबाज़ी में परमेश्वर के वचन को लेकर बाहर संसार में भागने की बजाए, उसे ऐसे समय और स्थान में पढ़ना चाहिए जब हम उसके साथ समय बिता सकें, उस में होकर हम परमेश्वर के साथ संगति कर सकें। परमेश्वर के वचन बाइबल को स्वाद लेकर, समय लगाकर नियमित रूप से पढ़ें; यह आपके जीवन के लिए बहुत लाभदायक रहेगा। - जो स्टोवैल


आत्मिक विकास के लिए आवश्यक सभी तत्वों को बाइबल भरपूरी से उपलब्ध करती है।

यहोवा का भय पवित्र है, वह अनन्तकाल तक स्थिर रहता है; यहोवा के नियम सत्य और पूरी रीति से धर्ममय हैं। वे तो सोने से और बहुत कुन्दन से भी बढ़कर मनोहर हैं; वे मधु से और टपकने वाले छत्ते से भी बढ़कर मधुर हैं। और उन्हीं से तेरा दास चिताया जाता है; उनके पालन करने से बड़ा ही प्रतिफल मिलता है। - भजन 19:9-11

बाइबल पाठ: भजन 119:97-104
Psalms 119:97 अहा! मैं तेरी व्यवस्था में कैसी प्रीति रखता हूं! दिन भर मेरा ध्यान उसी पर लगा रहता है। 
Psalms 119:98 तू अपनी आज्ञाओं के द्वारा मुझे अपने शत्रुओं से अधिक बुद्धिमान करता है, क्योंकि वे सदा मेरे मन में रहती हैं। 
Psalms 119:99 मैं अपने सब शिक्षकों से भी अधिक समझ रखता हूं, क्योंकि मेरा ध्यान तेरी चितौनियों पर लगा है। 
Psalms 119:100 मैं पुरनियों से भी समझदार हूं, क्योंकि मैं तेरे उपदेशों को पकड़े हुए हूं। 
Psalms 119:101 मैं ने अपने पांवों को हर एक बुरे रास्ते से रोक रखा है, जिस से मैं तेरे वचन के अनुसार चलूं। 
Psalms 119:102 मैं तेरे नियमों से नहीं हटा, क्योंकि तू ही ने मुझे शिक्षा दी है। 
Psalms 119:103 तेरे वचन मुझ को कैसे मीठे लगते हैं, वे मेरे मुंह में मधु से भी मीठे हैं! 
Psalms 119:104 तेरे उपदेशों के कारण मैं समझदार हो जाता हूं, इसलिये मैं सब मिथ्या मार्गों से बैर रखता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • एज़्रा 1-2
  • यूहन्ना 19:23-42



बुधवार, 10 जून 2015

डटे रहें


   सितंबर 1961 में एक हाई स्कूल के छात्र हार्वे कार्लसन ने, जो अमेरिका में न्यूयॉर्क के ब्रु्कलिन क्षेत्र का निवासी था, इंगलैण्ड में रहने वाले विश्व-विख्यात लेखक सी. एस. लूइस को एक पत्र लिखा। हार्वे ने लूइस की पुस्तक The Screwtape Letters पढ़ी थी, और उसी के संदर्भ में उसने लेखक से पूछा, "आप के द्वारा इस पुस्तक के लिखे जाने के दौरान क्या शैतान ने आपको किसी रीति से परेशान किया; यदि किया तो आपने इस बारे में क्या किया?"

   तीन सप्ताह के बाद लूइस का उत्तर आया जिसमें उन्होंने स्वीकारा कि उन्हें अब तक बहुत से प्रलोभनों का सामना करना पड़ रहा है। उन बातों का सामना करने के विषय में उन्होंने कहा, "संभवतः जो सबसे अधिक महत्वपूर्ण बात है वह है डटे रहना और आगे बढ़ते रहना; चाहे कितनी ही बार प्रलभनों का सामना करना पड़े या उनमें गिर भी जाएं तो भी निराश हुए बिना, परमेश्वर से क्षमा माँगना, उठकर पुनः खड़ा होना और आगे कदम बढ़ाना।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित यूहन्ना अपनी पत्रियों में यह बात बार बार दोहराता है और पाठकों को प्रोत्साहित करता है कि परीक्षाओं और प्रलोभनों के समयों में दृढ़ता से स्थिर खड़े रहें: "हे बालकों, मैं तुम्हें इसलिये लिखता हूं, कि उसके नाम से तुम्हारे पाप क्षमा हुए। हे पितरों, मैं तुम्हें इसलिये लिखता हूं, कि जो आदि से है, तुम उसे जानते हो: हे जवानों, मैं तुम्हें इसलिये लिखता हूं, कि तुम ने उस दुष्‍ट पर जय पाई है: हे लड़कों मैं ने तुम्हें इसलिये लिखा है, कि तुम पिता को जान गए हो" (1 यूहन्ना 2:12-13)।

   हमारी उम्र अथवा अनुभव जो भी हो, हम सभी मसीही विश्वासी सदा ही शत्रु शैतान के साथ एक आत्मिक युद्ध की स्थिति में रहते हैं, इस युद्ध में हमें कमज़ोर करने के लिए शैतान बारंबार हमारे सामने सांसारिक लालसाओं, उपलब्धियों और ऐश्वर्य में पड़ने के प्रलोभन और परीक्षाएं लाता है। शैतान की इन चालबाज़ियों पर विजयी होने का मार्ग है परमेश्वर के वचन की बात को सदा स्मरण रखना और अपने अन्दर बसाए रहना कि, "संसार और उस की अभिलाषाएं दोनों मिटते जाते हैं, पर जो परमेश्वर की इच्छा पर चलता है, वह सर्वदा बना रहेगा" (1 यूहन्ना 2:17)।

   यदि आप मसीही विश्वासी हैं तो शैतान आपकी भी परीक्षा अवश्य लेता रहेगा; घबराएं नहीं, परमेश्वर और उसके वचन से लिपटे रहें तथा परमेश्वर के मार्ग पर डटे रहें। - डेविड मैक्कैसलैंड


परीक्षाओं और प्रलभनों पर विजयी होने के लिए मसीह यीशु को अपने ऊपर प्रभुत्व करने दें।

हे मेरे बालकों, मैं ये बातें तुम्हें इसलिये लिखता हूं, कि तुम पाप न करो; और यदि कोई पाप करे, तो पिता के पास हमारा एक सहायक है, अर्थात धार्मिक यीशु मसीह। - 1 यूहन्ना 2:1

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 2:9-17
1 John 2:9 जो कोई यह कहता है, कि मैं ज्योति में हूं; और अपने भाई से बैर रखता है, वह अब तक अन्धकार ही में है। 
1 John 2:10 जो कोई अपने भाई से प्रेम रखता है, वह ज्योति में रहता है, और ठोकर नहीं खा सकता। 
1 John 2:11 पर जो कोई अपने भाई से बैर रखता है, वह अन्धकार में है, और अन्धकार में चलता है; और नहीं जानता, कि कहां जाता है, क्योंकि अन्धकार ने उस की आंखे अन्‍धी कर दी हैं।
1 John 2:12 हे बालकों, मैं तुम्हें इसलिये लिखता हूं, कि उसके नाम से तुम्हारे पाप क्षमा हुए। 
1 John 2:13 हे पितरों, मैं तुम्हें इसलिये लिखता हूं, कि जो आदि से है, तुम उसे जानते हो: हे जवानों, मैं तुम्हें इसलिये लिखता हूं, कि तुम ने उस दुष्‍ट पर जय पाई है: हे लड़कों मैं ने तुम्हें इसलिये लिखा है, कि तुम पिता को जान गए हो। 
1 John 2:14 हे पितरों, मैं ने तुम्हें इसलिये लिखा है, कि जो आदि से है तुम उसे जान गए हो: हे जवानो, मैं ने तुम्हें इसलिये लिखा है, कि तुम बलवन्‍त हो, और परमेश्वर का वचन तुम में बना रहता है, और तुम ने उस दुष्‍ट पर जय पाई है। 
1 John 2:15 तुम न तो संसार से और न संसार में की वस्‍तुओं से प्रेम रखो: यदि कोई संसार से प्रेम रखता है, तो उस में पिता का प्रेम नहीं है। 
1 John 2:16 क्योंकि जो कुछ संसार में है, अर्थात शरीर की अभिलाषा, और आंखों की अभिलाषा और जीविका का घमण्‍ड, वह पिता की ओर से नहीं, परन्तु संसार ही की ओर से है। 
1 John 2:17 और संसार और उस की अभिलाषाएं दोनों मिटते जाते हैं, पर जो परमेश्वर की इच्छा पर चलता है, वह सर्वदा बना रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 34-36
  • यूहन्ना 19:1-22



मंगलवार, 9 जून 2015

आराधना


   मैं एक मसीही हाई स्कूल के छात्रों की गायन मण्डली के साथ भ्रमण पर था; उन छात्रों को मसीही गीतों द्वारा चर्च सभाओं में आराधना की अगुवाई करते देखना उत्तम अनुभव था, परन्तु उससे भी उत्तम अनुभव था उन्हें चर्च के बाहर अपने मसीही विश्वास को कार्यकारी रूप में प्रकट करते हुए देखना। एक दिन उस छात्र समूह की जानकारी में आया कि एक महिला के पास अपनी कार में पेट्रोल डलवाने लायक पैसे नहीं थे; उस महिला के लिए कुछ करने के लिए परमेश्वर से अगुवाई अनुभव करते हुए, उन्होंने तुरंत उस महिला के लिए दान एकत्रित किया और उसे कई बार कार की टंकी भरने लायक धन एकत्रित करके दे दिया।

   चर्च के अन्दर परमेश्वर की आराधना करना, उसकी स्तुति के गीत गाना एक बात है; किंतु चर्च के बाहर व्यावाहरिक जीवन में प्रतिदिन अपनी आज्ञाकारिता के द्वारा परमेश्वर को महिमा देना, उसे आराधना प्रस्तुत करना बिलकुल अलग बात है। उन छात्रों का उदाहरण हमें अपने जीवनों के बारे में सोचने पर बाध्य करता है। क्या अपने प्रभु परमेश्वर के लिए हमारा प्रेम और हमारी आराधना केवल चर्च के अन्दर तक ही सीमित है, या हम अपने दैनिक जीवन में उसकी आज्ञाकारिता के द्वारा उसकी महिमा देते हैं, उसकी सेवकाई को पूरा करने के प्रयास करते रहते हैं?

   परमेश्वर के वचन बाइबल में 1 शमूएल 15 में हम देखते हैं कि राजा शाऊल को परमेश्वर ने कुछ कार्य करने के लिए कहा, परन्तु इस कार्य को लेकर जब हम उसकी आज्ञाकारिता के बारे में देखते हैं तो हम पाते हैं कि उसने उपासना (बलिदान चढ़ाने) को अपनी अनाज्ञाकारिता छुपाने का बहाना बनाने का प्रयास किया, जो परमेश्वर को कतई स्वीकार्य नहीं था; तब परमेश्वर की ओर से शाऊल से कहा गया, "शमूएल ने कहा, क्या यहोवा होमबलियों, और मेलबलियों से उतना प्रसन्न होता है, जितना कि अपनी बात के माने जाने से प्रसन्न होता है? सुन मानना तो बलि चढ़ाने और कान लगाना मेढ़ों की चर्बी से उत्तम है" (1 शमूएल 15:22)।

   चर्च में आराधना तथा स्तुति गीत गाने में सम्मिलित होना अच्छी बात है, परन्तु उससे भी अच्छा है परमेश्वर की आज्ञाकारिता में जीवन व्यतीत करना। प्रमेश्वर से प्रार्थना करें कि वह आपको ऐसे अवसर प्रदान करे जहाँ आप उसके प्रति अपनी आज्ञाकारिता से उसे वह आराधना अर्पित कर सकें जैसी वह चाहता है तथा जिसके वह योग्य है। - डेव ब्रैनन


हमारी आराधना समय अथवा स्थान से जुड़ी हुई नहीं वरन सदा ही हमारे जीवनों से जुड़ी और मन की भावना होनी चाहिए।

यहोवा के नाम की ऐसी महिमा करो जो उसके योग्य है; भेंट ले कर उसके आंगनों में आओ! - भजन 96:8

बाइबल पाठ: 1 शमूएल 15:13-23
1 Samuel 15:13 तब शमूएल शाऊल के पास गया, और शाऊल ने उस से कहा, तुझे यहोवा की ओर से आशीष मिले; मैं ने यहोवा की आज्ञा पूरी की है। 
1 Samuel 15:14 शमूएल ने कहा, फिर भेड़-बकरियों का यह मिमियाना, और गय-बैलों का यह बंबाना जो मुझे सुनाई देता है, यह क्यों हो रहा है? 
1 Samuel 15:15 शाऊल ने कहा, वे तो अमालेकियों के यहां से आए हैं; अर्थात प्रजा के लोगों ने अच्छी से अच्छी भेड़-बकरियों और गाय-बैलों को तेरे परमेश्वर यहोवा के लिये बलि करने को छोड़ दिया है; और बाकी सब को तो हम ने सत्यानाश कर दिया है। 
1 Samuel 15:16 तब शमूएल ने शाऊल से कहा, ठहर जा! और जो बात यहोवा ने आज रात को मुझ से कही है वह मैं तुझ को बताता हूं। उसने कहा, कह दे। 
1 Samuel 15:17 शमूएल ने कहा, जब तू अपनी दृष्टि में छोटा था, तब क्या तू इस्राएली गोत्रियों का प्रधान न हो गया, और क्या यहोवा ने इस्राएल पर राज्य करने को तेरा अभिषेक नहीं किया? 
1 Samuel 15:18 और यहोवा ने तुझे यात्रा करने की आज्ञा दी, और कहा, जा कर उन पापी अमालेकियों को सत्यानाश कर, और जब तक वे मिट न जाएं, तब तक उन से लड़ता रह। 
1 Samuel 15:19 फिर तू ने किस लिये यहोवा की वह बात टालकर लूट पर टूट के वह काम किया जो यहोवा की दृष्टि में बुरा है? 
1 Samuel 15:20 शाऊल ने शमूएल से कहा, नि:सन्देह मैं ने यहोवा की बात मानकर जिधर यहोवा ने मुझे भेजा उधर चला, और अमालेकियों को सत्यानाश किया है। 
1 Samuel 15:21 परन्तु प्रजा के लोग लूट में से भेड़-बकरियों, और गाय-बैलों, अर्थात सत्यानाश होने की उत्तम उत्तम वस्तुओं को गिलगाल में तेरे परमेश्वर यहोवा के लिये बलि चढ़ाने को ले आए हैं। 
1 Samuel 15:22 शमूएल ने कहा, क्या यहोवा होमबलियों, और मेलबलियों से उतना प्रसन्न होता है, जितना कि अपनी बात के माने जाने से प्रसन्न होता है? सुन मानना तो बलि चढ़ाने और कान लगाना मेढ़ों की चर्बी से उत्तम है। 
1 Samuel 15:23 देख बलवा करना और भावी कहने वालों से पूछना एक ही समान पाप है, और हठ करना मूरतों और गृहदेवताओं की पूजा के तुल्य है। तू ने जो यहोवा की बात को तुच्छ जाना, इसलिये उसने तुझे राजा होने के लिये तुच्छ जाना है।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 32-33
  • यूहन्ना 18:19-40



सोमवार, 8 जून 2015

सृष्टिकर्ता


   मेरे 7 वर्षीय अश्वेत मित्र टोबियस ने मुझ से एक दिन ऐसा प्रश्न पूछा जो कौतहूल जागृत करता है; उसने पूछा, "जबकि हमारे आदि माता-पिता आदम और हव्वा श्वेत रंग के थे तो फिर अश्वेत लोग कहाँ से आए?" मैंने उत्तर दिया, "हम यह नहीं जानते कि आदम और हव्वा किस रंग के थे, क्योंकि परमेश्वर का वचन बाइबल इस बारे में कुछ नहीं कहती; लेकिन तुम ने यह कैसे मान लिया कि वे दोनों श्वेत रंग के थे?" उसने जवाब दिया कि उसने जितनी भी बाइबल संबंधित पुस्तकें देखीं, चाहे चर्च में हों या किसी पुस्तकालय में, जिस भी पुस्तक में आदम और हव्वा का चित्र बना है, उन्हें श्वेत ही दिखाया गया है। उसका यह उत्तर सुनकर मेरा मन विचलित हो गया, कि कहीं टोबियस यह ना समझने लगे कि अपने अश्वेत रंग के कारण वह किसी अन्य से हीन या नीचा है, अथवा यह कि वह परमेश्वर की सृष्टि है ही नहीं!

   संसार के सभी मनुष्य उसी एक परमेश्वर पिता की रचना हैं, और इसलिए चाहे उनका बाहरी रंग-रूप जो भी हो, परमेश्वर के लिए वे सब एक समान स्तर के ही हैं, परमेश्वर सब से एक समान प्रेम करता है और सबको प्रभु यीशु में मिलने वाली पापों की क्षमा तथा उद्धार के साथ अपने पास स्वर्ग में देखना चाहता है। इसीलिए प्रेरित पौलुस ने एथेने के लोगों से कहा: "उसने एक ही मूल से मनुष्यों की सब जातियां सारी पृथ्वी पर रहने के लिये बनाईं हैं; और उन के ठहराए हुए समय, और निवास के सिवानों को इसलिये बान्‍धा है" (प्रेरितों 17:26); हम सब एक ही मूल से हैं।

   डैरेल बॉक ने बाइबल की प्रेरितों के काम नामक पुस्तक की अपनी विवेचना में इस खण्ड के बारे में लिखा, "पौलुस का यह कथन उसके उन एथेनी श्रोताओं के लिए स्वीकार करने को बहुत कठिन रहा होगा, क्योंकि वे एथेनी अपने आप को औरों से बहुत उच्च कोटि का, तथा अन्य सभी जातियों को अपने से निम्न कोटि का मानते थे, उन्हें वहशी कहते थे। लेकिन परमेश्वर का वचन बाइबल हमें यह स्पष्ट सिखाती है कि समस्त मानव जाति एक ही आदि माता-पिता, अर्थात आदम और हव्वा से आई है, और परमेश्वर रंग या जाति के आधार पर कभी मनुष्यों में भेदभाव नहीं करता इसलिए कोई भी व्यक्ति या जाति किसी अन्य से ऊँचा या नीचा कदापि नहीं है।

   हम अपने सृष्टिकर्ता परमेश्वर के सामने श्रद्धा के साथ झुकते हैं, उसका आदर तथा भय मानते हैं; उसने हम सब की सृष्टि करी है, वह हम सब को "जीवन, श्वास और सब कुछ" (पद 25) देता है। हम सब अपने सृष्टिकर्ता की नज़रों में एक समान हैं; तो फिर हम आपस में ऊँच-नीच के भेदभाव क्यों करें? - ऐनी सेटास


परमेश्वर पिता हम सब से ऐसा प्रेम करता है मानों हम में से प्रत्येक एकमात्र है।

परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सताने वालों के लिये प्रार्थना करो। जिस से तुम अपने स्‍वर्गीय पिता की सन्तान ठहरोगे क्योंकि वह भलों और बुरों दोनों पर अपना सूर्य उदय करता है, और धर्मियों और अधर्मियों दोनों पर मेंह बरसाता है। - मत्ती 5:44-45

बाइबल पाठ: प्रेरितों 17:22-31
Acts 17:22 तब पौलुस ने अरियुपगुस के बीच में खड़ा हो कर कहा; हे एथेने के लोगों मैं देखता हूं, कि तुम हर बात में देवताओं के बड़े मानने वाले हो। 
Acts 17:23 क्योंकि मैं फिरते हुए तुम्हारी पूजने की वस्‍तुओं को देख रहा था, तो एक ऐसी वेदी भी पाई, जिस पर लिखा था, कि अनजाने ईश्वर के लिये। सो जिसे तुम बिना जाने पूजते हो, मैं तुम्हें उसका समाचार सुनाता हूं। 
Acts 17:24 जिस परमेश्वर ने पृथ्वी और उस की सब वस्‍तुओं को बनाया, वह स्वर्ग और पृथ्वी का स्‍वामी हो कर हाथ के बनाए हुए मन्‍दिरों में नहीं रहता। 
Acts 17:25 न किसी वस्तु का प्रयोजन रखकर मनुष्यों के हाथों की सेवा लेता है, क्योंकि वह तो आप ही सब को जीवन और स्‍वास और सब कुछ देता है। 
Acts 17:26 उसने एक ही मूल से मनुष्यों की सब जातियां सारी पृथ्वी पर रहने के लिये बनाईं हैं; और उन के ठहराए हुए समय, और निवास के सिवानों को इसलिये बान्‍धा है। 
Acts 17:27 कि वे परमेश्वर को ढूंढ़ें, कदाचित उसे टटोल कर पा जाएं तौभी वह हम में से किसी से दूर नहीं! 
Acts 17:28 क्योंकि हम उसी में जीवित रहते, और चलते-फिरते, और स्थिर रहते हैं; जैसे तुम्हारे कितने कवियों ने भी कहा है, कि हम तो उसी के वंश भी हैं। 
Acts 17:29 सो परमेश्वर का वंश हो कर हमें यह समझना उचित नहीं, कि ईश्वरत्‍व, सोने या रूपे या पत्थर के समान है, जो मनुष्य की कारीगरी और कल्पना से गढ़े गए हों। 
Acts 17:30 इसलिये परमेश्वर आज्ञानता के समयों में अनाकानी कर के, अब हर जगह सब मनुष्यों को मन फिराने की आज्ञा देता है। 
Acts 17:31 क्योंकि उसने एक दिन ठहराया है, जिस में वह उस मनुष्य के द्वारा धर्म से जगत का न्याय करेगा, जिसे उसने ठहराया है और उसे मरे हुओं में से जिलाकर, यह बात सब पर प्रामाणित कर दी है।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 30-31
  • यूहन्ना 18:1-18